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जेट फ्यूल महंगा होने से जयपुर, अयोध्या, चंडीगढ़ और दिल्ली की फ्लाइट्स के किराए बढ़ेंगे

हिसार जेट फ्यूल की कीमतों में भारी इजाफे के चलते हिसार एयरपोर्ट से जयपुर, अयोध्या, चंडीगढ़ और दिल्ली के हवाई किराए बढ़ने जा रहे हैं। नया किराया 1 मई 2026 से लागू होगा। साथ ही, विंटर सीजन में बंद की गई हिसार-दिल्ली हवाई सेवा 16 अप्रैल 2026 से दोबारा शुरू हो रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने 16 दिसंबर 2025 को इस सेवा को बंद किया था। 16 अप्रैल से सप्ताह में शनिवार को छोड़कर छह दिन फ्लाइट्स उपलब्ध रहेंगी। चारों शहरों जयपुर, अयोध्या, चंडीगढ़ और दिल्ली के लिए दो-दो दिन उड़ानें संचालित की जाएंगी किराया बढ़ने का कारण वित्त मंत्रालय ने जेट फ्यूल की कीमत 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी है। इसके चलते एलायंस एयर ने अपने किराए में वृद्धि कर दी है। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर नया किराया अपडेट कर दिया है, जो 1 मई और उसके बाद की यात्राओं पर लागू होगा। नाइट लैंडिंग की राह हिसार एयरपोर्ट को 24 फरवरी 2026 को नाइट लैंडिंग का लाइसेंस मिल चुका है। हालांकि, अभी केवल एक शिफ्ट में काम चल रहा है, जिसके कारण शाम 6 बजे के बाद कोई फ्लाइट नहीं है। दूसरी शिफ्ट शुरू होते ही रात में भी उड़ानों का संचालन संभव हो सकेगा। यात्री अब हिसार से आस-पास के प्रमुख शहरों के लिए हवाई यात्रा की सुविधा का फिर से लाभ उठा सकेंगे।  

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अनिवार्य, लाखों वाहन अभी भी बिना प्लेट

 लखनऊ बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) वाहनों की 15 अप्रैल से प्रदूषण जांच नहीं होगी। वाहनों में यह नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य है, फिर भी प्रदेशभर में दो करोड़ वाहनों में एचएसआरपी नहीं लगी है। प्रदूषण जांच न कराने पर वाहन मालिक का दस हजार रुपये और एचएसआरपी न होने पर पांच हजार रुपये यानी दोनों का कुल 15 हजार रुपये का चालान होगा। महानगरों में यह कार्रवाई यातायात विभाग, परिवहन व पुलिस तीनों करेंगे, जबकि अन्य जिलाें में परिवहन व पुलिस करेगी। प्रदेश में एक अप्रैल 2019 से पंजीकृत होने वाले सभी वाहनों में एचएसआरपी लग रही है। इसके पहले के पंजीकृत तीन करोड़ से अधिक वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य किया गया था, कई बार अभियान चलाकर लोगों को नंबर प्लेट लगवाने के लिए प्रेरित किया गया और बिना एचएसआरपी लगे वाहन मिलने पर चालान भी हुए उसके बाद भी करीब दो करोड़ वाहनों में अब तक विशेष नंबर प्लेट नहीं लग सकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश दोपहिया वाहनों में यह नंबर प्लेट नहीं लगी है। अपर परिवहन आयुक्त राजस्व राजेंद्र विश्वकर्मा ने बताया, परिवहन विभाग ने नेशनल इंफार्मेटिक्स सेंटर यानी एनआइसी के माध्यम से पीयूसीसी यानी प्रदूषण जांच पोर्टल में ऐसी तकनीकी व्यवस्था की गई है ताकि 15 अप्रैल से पोर्टल इसका प्रमाणपत्र तभी जारी करेगा, जब वाहन में एचएसआरपी लगा होगा। क्या है एचएसआरपी यह प्लेट एल्युमीनियम से बनी होती है, जिसमें सुरक्षा के लिए अशोक चक्र होलोग्राम और 10 अंकों का पिन (लेजर कोड) होता है। इसमें वाहन की पूरी जानकारी जैसे इंजन नंबर, चेसिस नंबर आदि दी गई है। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आ रहा जांच का ओटीपी फरवरी माह में ही वाहनों की प्रदूषण जांच में बदलाव हुआ। वाहन खरीदते समय जो मोबाइल नंबर दर्ज कराया गया था, उसी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड आ रहा है। वाहन स्वामी ने पंजीकृत मोबाइल नंबर बदल दिया है या खो गया है तो नया नंबर अपडेट कराना होगा, उसके बाद ही प्रदूषण की जांच हो सकेगी। ऐसे लगवा सकते हैं एचएसआरपी वाहन में एचएसआरपी लगवाने के लिए सबसे पहले वेबसाइट bookmyhsrp.com पर जाएं और हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट विद कलर स्टीकर का विकल्प चुनें। अपने राज्य का चयन करके वाहन नंबर, चेसिस नंबर, इंजन नंबर आदि दर्ज करें। प्लेट लगवाने के लिए नजदीकी डीलर या होम डिलीवरी का चयन करें। अपनी सुविधा के अनुसार, नंबर प्लेट लगवाने की तारीख व समय चुन सकते हैं। आवेदन फीस का आनलाइन भुगतान करना होगा। दोपहिया वाहनों के लिए लगभग 400 रुपये से और चार पहिया वाहनों के लिए 1100 रुपये तक का भुगतान करना होगा। इसमें वाहन स्वामी को अपने वाहन रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र यानी आरसी दस्तावेज के रूप में अपलोड करना होगा।

शुक्र गोचर 2026: बनेगा मालव्य और शुक्रादित्य राजयोग, इन राशियों को फायदा

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, प्रेम, वैभव और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 की रात 10 बजकर 19 मिनट पर शुक्र भरणी नक्षत्र से निकलकर कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 19 अप्रैल को शुक्र वृषभ राशि में गोचर करेंगे, जिससे मालव्य राजयोग बनेगा. सूर्य के स्वामित्व वाले कृत्तिका नक्षत्र में शुक्र का प्रवेश 'शुक्रादित्य राजयोग' भी बना रहा है. यह खगोलीय बदलाव 27 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा और इस दौरान कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं. शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन क्यों है खास? ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शुक्र जब कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के साथ उनका विशेष संबंध बनता है. शुक्र और सूर्य की युति से बनने वाला शुक्रादित्य राजयोग व्यक्ति के जीवन में मान-सम्मान, आकर्षण, आर्थिक लाभ और रिश्तों में सुधार लेकर आता है. वहीं, वृषभ राशि में शुक्र का प्रवेश मालव्य राजयोग बनाकर भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि करता है. आइए जानते हैं किन राशियों को इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है. मेष राशि (Aries Zodiac) मेष राशि वालों के लिए शुक्र का नक्षत्र परिवर्तन कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है. इस दौरान आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा. लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. बचत करने के भी मौके मिलेंगे. व्यापारियों को विशेष लाभ मिल सकता है, खासकर जो लोग आयात-निर्यात से जुड़े हैं. विदेश से जुड़े कामों में सफलता मिलने के संकेत हैं. लव लाइफ भी बेहतर रहेगी. अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं. दांपत्य जीवन में भी मिठास बनी रहेगी. सिंह राशि (Leo Zodiac) सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय कई अच्छे संकेत लेकर आ सकता है. करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं. नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई नौकरी मिलने का मौका मिल सकता है. परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा. घर में शांति बनी रहेगी. धार्मिक या आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर झुकाव बढ़ सकता है, जिससे यात्रा के योग भी बन सकते हैं. व्यापार करने वालों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है. जो लोग उच्च शिक्षा लेना चाहते हैं, उनके लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा. घर में वाहन या प्रॉपर्टी लेने का सपना भी पूरा हो सकता है. धनु राशि (Sagittarius Zodiac) धनु राशि के लिए शुक्र का कृत्तिका नक्षत्र में जाना सकारात्मक परिणाम दे सकता है. इस दौरान आपकी क्रिएटिविटी बढ़ेगी. नए विचार सामने आ सकते हैं. करियर में नए मौके मिल सकते हैं. आपके आइडियाज की वजह से सफलता मिलने के योग बनेंगे. बिजनेस करने वालों के लिए भी यह समय फायदेमंद रहेगा. प्रेम संबंधों में सुधार देखने को मिल सकता है. रिश्तों में नजदीकी बढ़ेगी. हालांकि शादीशुदा लोगों को छोटी-छोटी बातों को लेकर बहस से बचने की सलाह दी जाती है. आर्थिक स्थिति मजबूत रह सकती है. जीवन में संतुलन बना रहेगा. कब तक रहेगा असर? द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्र 27 अप्रैल 2026 तक कृत्तिका नक्षत्र में रहेंगे और इसके बाद रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इस पूरे समय में बने राजयोग कई राशियों के लिए शुभ परिणाम दे सकते हैं, खासकर प्रेम, करियर और आर्थिक मामलों में. क्या करें इस दौरान? – शुक्रवार के दिन सफेद वस्त्र पहनें. – माता लक्ष्मी की पूजा करें. – सुगंधित इत्र या सफेद फूल अर्पित करें. – जरूरतमंदों को मिठाई या सफेद वस्त्र दान करें.

ज्यादा तीखा खाना पड़ सकता है भारी, पेट और पाचन पर डालता है असर

अगर आप भी खाने में ज्यादा मिर्च-मसाले के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। भारत में तीखा खाना पसंद करने वालों की कमी नहीं है, खासकर मोमो की लाल चटनी और चटपटे गोलगप्पे तो हर किसी की पहली पसंद बन चुके हैं। लेकिन स्वाद के चक्कर में सेहत से समझौता करना भारी पड़ सकता है। दरअसल, हम सभी को ये समझने की जरूरत है कि जरूरत से ज्यादा तीखा खाना न सिर्फ पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ाता है, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक अधिक मिर्च-मसाले का सेवन गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने खान-पान में संतुलन बनाए रखें। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ज्यादा तीखा खाने से शरीर को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं और क्यों आपको सावधान रहने की जरूरत है।  पेट में जलन और एसिडिटी जब आप जरूरत से ज्यादा मिर्च-मसाले वाला खाना खाते हैं, तो पेट में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। इससे सीने में जलन, खट्टी डकारें और गैस की समस्या होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा खान-पान रखने से एसिडिटी क्रॉनिक (पुरानी) समस्या बन सकती है, जो रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती है। पाचन तंत्र पर असर अत्यधिक तीखा भोजन पाचन तंत्र को उत्तेजित कर देता है। इससे आंतों में जलन, अपच, पेट दर्द और कभी-कभी दस्त भी हो सकते हैं। जिन लोगों का पाचन पहले से कमजोर होता है, उनके लिए यह और भी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है। मुंह और गले में जलन ज्यादा तीखा खाना जीभ, मसूड़ों और गले की अंदरूनी सतह को प्रभावित करता है। इससे जलन, छाले और सूजन हो सकती है। लगातार ऐसा खाने से स्वाद की क्षमता भी कम हो सकती है। अल्सर का खतरा लगातार तीखा और मसालेदार भोजन पेट की परत को नुकसान पहुंचाता है। इससे गैस्ट्रिक अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके लक्षणों में तेज दर्द, उल्टी और कभी-कभी खून आना भी शामिल हो सकता है, जो गंभीर स्थिति बन सकती है।

घायलों के इलाज में कलेक्टर और एसपी ने बढ़ाई मुस्तैदी

घायलों के बेहतर उपचार हेतु कलेक्टर–एसपी मुस्तैद मृतकों के परिजनों से संपर्क एवं सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी स्वास्थ्य मंत्री भी निरंतर जिला प्रशासन के संपर्क में रायपुर  सक्ति जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता प्लांट में बॉयलर फटने से हुए भीषण हादसे के बाद जिला प्रशासन त्वरित रूप से सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय घटना एवं घायलों के उपचार को लेकर कलेक्टर श्री अमृत विकास टोपनो तथा पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर से लगातार संपर्क में हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्यामबिहारी जायसवाल भी लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और कलेक्टर के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी तथा प्रशासन की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। घायलों को प्राथमिकता के साथ रायगढ़ के फोर्टीस हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज एवं अपेक्स अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायलों को बेहतर उपचार हेतु रायपुर के कालड़ा अस्पताल रेफर किया गया। प्रशासन द्वारा घटनास्थल को बैरिकेड कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। कलेक्टर  टोपनो ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार घायलों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है। पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव देह को उनके गृहग्राम तक एम्बुलेंस के माध्यम से भेजने और तात्कालिक सहायता राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। हादसे में घायल अथवा प्रभावित श्रमिकों को पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक बिना उपस्थिति के वेतन देने पर भी सहमति बनाई गई है। कलेक्टर ने बताया कि मुआवजा राशि को लेकर देर रात तक चर्चा कर सहमति स्थापित की गई है। घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं तथा जांच टीम जल्द ही घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। रेस्क्यू कार्य में एसडीआरएफ की टीम भी सक्रिय है। मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है। पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी कि इस हादसे में कुल 36 श्रमिक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 17 की मृत्यु हो चुकी है तथा 19 घायल हैं, जिनका उपचार जारी है।  कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मृतकों के नाम हादसे में मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं– रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार), अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़), थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़), तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड), आकिब खान (दरभंगा, बिहार), सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), अब्दुल करीम (झारखंड), उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़), शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल), पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), अशोक परहिया (पलामू, झारखंड), मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल), बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश), रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़), कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल), नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़), शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)।

सरिता विहार में बड़ा एक्शन,मुठभेड़ के बाद 6 अपराधी दबोचे गए

दिल्ली साउथ-ईस्ट दिल्ली के सरिता विहार इलाके में बीती रात पुलिस और बदमाशों के बीच एकनाउंटर हुआ। दोनों ओर से 6 राउंड गोलियां चलीं। हालांकि गोली किसी को नहीं लगी। इसके बाद पुलिस ने 6 बदमाशों को पकड़ा। ये सभी बांग्लादेशी हैं। जो यहां डकैती की वारदात करते थे। खबर लिखे जाने तक आरोपियों से पूछताछ की जा रही थी। पुलिस सूत्र ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी एक्सटॉर्शन किडनैपिंग सेल टीम को सूचना मिली थी कि सरिता विहार इलाके में कुछ बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं। सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम उन्हें पकड़ने पहुंची थी। टीम ने मौके पर घेराबंदी कर बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। 6 बांग्लादेशी बदमाशों को दबोचा बदमाशों की ओर से कुल तीन राउंड फायर किए गए। आत्मरक्षा और अपराधियों को काबू करने के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई में तीन राउंड गोलियां चलाईं। गनीमत रही कि इस गोलाबारी में पुलिस टीम का कोई भी सदस्य या आरोपी घायल नहीं हुआ। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी छह बांग्लादेशी बदमाशों को दबोच लिया। बड़ी संभावित वारदात को टली तलाशी के दौरान बदमाशों के पास से तीन देसी कट्टे, 1 देसी 12 बोर की बंदूक, पांच कारतूस और एक बटनदार चाकू बरामद हुआ। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से बांग्लादेश के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि ये लोग कब से दिल्ली में रह रहे थे और इनके तार किन-किन वारदातों से जुड़े हैं। साथ ही, इनके अवैध रूप से सीमा पार करने और स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है। दावा किया जा रहा है कि सफल ऑपरेशन ने इलाके में एक बड़ी संभावित वारदात को टाल दिया है।  

गूगल का बड़ा अपडेट: अब आपकी ऐप्स से जुड़कर जवाब देगा AI

गूगल ने इस साल की शुरुआत में सर्चिंग को बेहतर बनाने के लिए पर्सनल इंटेलीजेंस फीचर को लॉन्च किया था. साल की शुरुआत में इसको अमेरिका में लॉन्च किया था और अब इसको भारत में लॉन्च कर दिया गया है. Gemini के लिए पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर की मदद से यूजर्स को बेहतर सर्चिंग एक्सपीरियंस मिलेगा. ये लेटेस्ट फीचर गूगल के ऐप्स जैसे जीमेल, गूगल फोटोज, यूट्यूब और गूगल सर्च से जानकारी को सुरक्षित तरीके से जोड़ता है, जिसके बाद यूजर्स की पसंद के आधार पर जवाब देता है. उदाहरण के तौर पर समझें तो आप जयपुर घूमने का प्लान बनाते हैं और ट्रिप को लेकर सर्च करते हैं. इसके बाद पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर जीमेल पर रिसीव टिकट और होटल की डिटेल्स को लेगा, जिसके बाद वह यूट्यूब पर देखे वीडियो के आधार पर घूमने की सलाह देगा. साथ लगने वाले समय को भी बताएगा. दो कैपिबिलिटीज पर काम करता है पर्सनल इंटेलिजेंस फीचर असल में दो कैपिबिलिटीज पर काम करता है. इसमें एक कॉम्प्लैक्स और अलग-अलग सोर्स से आने वाली को समझना है. दूसरा कनेक्टेड ऐप्स से खास जानकारी निकालना है.  यह सिस्टम टेक्स्ट, फोटो और वीडियो डेटा को मिलाकर AI ज्यादा सटीक जवाब देने की कोशिश करता है. डेटा प्राइवेसी का रखा है ध्यान Google का दावा है कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. वैसे तो इस फीचर बंद करके रखा जाता है, जिसे यूजर्स को खुद मैनुअली जाकर ऑन करना होता है. इसमें यूजर्स को पूरा कंट्रोल मिलता है, जिसमें यूजर्स तय कर सकते हैं कि कौन-कौन से ऐप्स से डेटा ले सकते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह सिस्टम थर्ड पार्टी ऐप्स के पास जाता नहीं है. यहां सोर्स को एकदम ट्रांस्परेंट रखा है, जहां AI बता सकता है कि जवाब किस स्रोत से आया है. मॉडल ट्रेनिंग कैसे होती है गूगल ने साफ कर दिया है कि जेमिनाई सीधे यूजर के जीमेल या फोटोज के डेटा पर ट्रेन नहीं होगा. ये ट्रेनिंग लिमिटेड डेटा पर होगी, जिसमें प्रॉम्प्ट और AI के जवाब पर होती है. बताते चलें कि मौजूदा वर्जन अभी बीटा फेज में है, जिसमें कुछ लिमिटेशन मौजूद हैं. भारत में यह फीचर अभी सिर्फ गूगल एआई प्लस, प्रो और अल्ट्रा सब्सक्राइबर के लिए रोलआउट हो रहा है. जल्द ही फ्री वर्जन यूजर्स के लिए भी यह उपलब्ध होगा. यह वेब और स्मार्टफोन पर काम करेगा. AI पर्सनालाइज को कैसे करें ऑन गूगल का पर्सनल इंटीलेंज फीचर को ऑन करना बहुत ही सिंपल है. एलिजिबल यूजर्स को जेमिनाई ऐप्स को ओपन करना होगा, फिर सेटिंग्स में जाना होगा. इसके बाद पर्सनल इंटेलीजेंस पर क्लिक करें, जिसके बाद कनेक्टेड ऐप्स को चुनना होगा.

श्यामसर गांव में ऐतिहासिक मायरा, चार भाइयों ने बहन को दिया करोड़ों का उपहार

 नागौर राजस्थान में नागौर जिले के श्यामसर गांव में भाई-बहन के रिश्ते ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे मारवाड़ ही नहीं, बल्कि राजस्थान भर में चर्चा की लहर पैदा कर दी है. यहां चार भाइयों ने अपनी बहन के लिए ऐसा मायरा भरा, जो अब इतिहास बन गया है. यह मायरा सिर्फ धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और संस्कारों का अनोखा संगम बनकर सामने आया है. इतिहास रच गया मायरा श्यामसर निवासी सुरजाराम सियाग की बेटी रामी देवी के परिवार में शादी का अवसर था. उनके बच्चों के विवाह समारोह में मायरे की रस्म के दौरान उनके चार भाइयों- गंगाराम, शिवलाल, खीयाराम और श्रवणराम ने मिलकर दिल खोलकर मायरा भरा. 21 लाख 51 हजार रुपये नगद, 25 बीघा खेती योग्य जमीन,7 बरी सोना, 21 बरी चांदी, 51 हजार रुपये टीका-  कुल मिलाकर यह मायरा 1 करोड़ 51 लाख रुपये का रहा, जिसने इस परंपरा को एक नई ऊंचाई दे दी. 1 करोड़ 51 लाख का उपहार स्थानीय लोगों के अनुसार, 'इतना बड़ा मायरा पहले कभी नहीं देखा गया. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन केवल आर्थिक संपन्नता नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है. यह घटना यह भी दिखाती है कि जहां कई जगह मायरा केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, वहीं श्यामसर के इन भाइयों ने इसे फिर से भावनाओं और जिम्मेदारी का उत्सव बना दिया. पूरा इलाका इस अनोखे मायरे की चर्चा कर रहा है. आस-पास के गांवों से लोग इस आयोजन को देखने और इसके बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं. सोशल स्तर पर भी यह खबर तेजी से फैल रही है और लोग इसे राजस्थानी परंपरा का स्वर्णिम उदाहरण बता रहे हैं. परंपरा और आधुनिकता का संगम राजस्थान में मायरा केवल रस्म नहीं, बल्कि भाई द्वारा बहन के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक माना जाता है. श्यामसर की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक समय में भी परंपराएं जीवित हैं, बस उन्हें निभाने का जज्बा होना चाहिए. क्या श्यामसर का यह मायरा आने वाले समय में नई परंपरा बनेगा? या फिर यह केवल एक अनोखी मिसाल बनकर रह जाएगा? श्यामसर का यह मायरा केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है.

छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार दफनाकर क्यों किया जाता है? जानें धार्मिक कारण

क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदू धर्म में छोटे बच्चों का अंतिम संस्कार जलाकर नहीं, बल्कि दफनाकर क्यों किया जाता है? हिंदू धर्म में आमतौर पर मृत्यु के बाद अग्नि संस्कार को सबसे पवित्र माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि अग्नि शरीर को पंचतत्वों में मिलाकर आत्मा को उसके बंधनों से मुक्त करती है. लेकिन जब बात छोटे बच्चों या अविवाहित बच्चों की आती है, तो यह परंपरा बदल जाती है. इसका मुख्य कारण बच्चों की निर्मलता और निष्कपट स्वभाव माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, छोटे बच्चों ने अभी तक कोई ऐसे कर्म नहीं किए होते हैं, जिनके कारण उन्हें जन्म-मरण के बंधन में फंसना पड़े. उनकी आत्मा पहले से ही शुद्ध और मुक्त होती है. इसलिए उन्हें अग्नि से शुद्ध करने की जरूरत नहीं मानी जाती है. नहीं होता है बच्चों का अग्नि संस्कार गरुड़ पुराण के अनुसार, जिस बच्चे के दूध के दांत नहीं निकले हों या जो बहुत छोटा हो, उसका दाह संस्कार नहीं किया जाता है. कई मान्यताओं में 2 से 5 साल तक के बच्चों को दफनाने की परंपरा बताई गई है. ऐसा माना जाता है कि इस उम्र तक बच्चे में 'मैं' और 'मेरा' का भाव विकसित नहीं होता है. आध्यात्मिक दृष्टि से भी कहा जाता है कि मनुष्य के तीन शरीर होते हैं- स्थूल, सूक्ष्म और कारण शरीर. बड़े लोगों में ये तीनों आपस में मजबूत रूप से जुड़े होते हैं, जिन्हें अलग करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है. लेकिन बच्चों में यह संबंध बहुत हल्का और सरल होता है, इसलिए उनकी आत्मा आसानी से शरीर छोड़ देती है. क्या है वैज्ञानिक कारण? वैज्ञानिक रूप से भी देखा जाए तो छोटे बच्चों का शरीर बहुत कोमल होता है. उनके सिर का ऊपरी हिस्सा (जिसे ब्रह्मरंध्र कहा जाता है) पूरी तरह बंद नहीं होता है, जिससे प्राण आसानी से बाहर निकल जाते हैं. इसलिए कपाल क्रिया जैसी प्रक्रिया की भी जरूरत नहीं पड़ती. प्रकृति से जुड़ा है रहस्य हिंदू धर्म में शरीर को पंचतत्व मिट्टी, जल, अग्नि, वायु और आकाश, से बना माना गया है. बड़े व्यक्ति के शरीर को अग्नि के माध्यम से इन तत्वों में मिलाया जाता है, लेकिन बच्चे का शरीर अभी प्रकृति के सबसे करीब माना जाता है. इसलिए, उसे सीधे मिट्टी को सौंप देना अधिक स्वाभाविक और शांतिपूर्ण माना जाता है. एक और कारण भी है कि छोटे बच्चे की मृत्यु परिवार के लिए बहुत दुखद होती है. ऐसे में दफनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत शांत होती है और यह एहसास देती है कि बच्चा धरती मां की गोद में सुरक्षित है.

सूर्यकुमार यादव की फॉर्म पर सवाल, कप्तानी पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए आगामी कुछ महीने उनके करियर की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। हालांकि उनकी कप्तानी में भारत ने इसी साल टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया लेकिन बल्ले के साथ उनकी हालिया फॉर्म ने टीम मैनेजमेंट और बीसीसीआई की चिंता बढ़ा दी है। टूर्नामेंट में 242 रन बनाने वाले सूर्या ने अमेरिका के खिलाफ 84 रनों की नाबाद पारी से शुरुआत तो धमाकेदार की थी लेकिन इसके बाद नॉकआउट और बड़े मुकाबलों में उनके बल्ले से रन निकलना बंद हो गए। नहीं चल रहा सूर्या का बल्ला दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ उनका फ्लॉप शो अब चर्चा का विषय बन गया है। सूर्या की यह खराब फॉर्म आईपीएल 2026 में भी जारी है जहां मुंबई इंडियंस के लिए चार मैचों में वह केवल 106 रन ही बना सके हैं। इस गिरावट को देखते हुए अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या 35 वर्षीय सूर्यकुमार 2028 के टी20 वर्ल्ड कप और लॉस एंजिल्स ओलंपिक में टीम का नेतृत्व करने के लिए सही विकल्प हैं। पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी सीरीज सूर्या के लिए अग्निपरीक्षा की तरह होगी। गौतम गंभीर ने भी की मांग इसी बीच कोच गौतम गंभीर अब अपने कार्यकाल को विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। जुलाई 2024 में वनडे वर्ल्ड कप 2027 तक के लिए नियुक्त हुए गंभीर अब ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप 2028 तक टीम के साथ बने रहना चाहते हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार दो आईसीसी खिताब जीतने वाले पहले कोच बनने का गौरव हासिल करने के बाद गंभीर अब 2028 के मेगा इवेंट तक अनुबंध बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं। सूर्या को ही चाहते हैं कप्तान कप्तानी के मोर्चे पर गंभीर ने एक बार फिर सूर्यकुमार यादव पर अपना भरोसा जताया है और वह अब भी टी20 फॉर्मेट में उन्हें ही पहली पसंद मानते हैं। हालांकि अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति के लिए यह फैसला आसान नहीं होगा क्योंकि 2028 के ओलंपिक और टी20 वर्ल्ड कप तक सूर्या की उम्र 38 वर्ष के करीब होगी। बीसीसीआई के सूत्र ने क्या कहा? बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई से बातचीत में स्पष्ट कहा, 'जाहिर तौर पर सूर्या अभी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। लेकिन एक बल्लेबाज के तौर पर उन्हें अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखनी होगी। वह यूके दौरे पर कप्तानी करेंगे लेकिन उसके बाद 2028 तक के रोडमैप पर चर्चा पूरी तरह से उनके निजी प्रदर्शन पर आधारित हो सकती है।'