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नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 चुनाव से लागू करने की तैयारी, संसद में विशेष सत्र

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सभी संसदीय दलों के नेताओं को पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) के संशोधन पर पूर्ण समर्थन की अपील की है. इस पत्र में पीएम मोदी ने 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र में इस ऐतिहासिक संशोधन को सर्वसम्मति से पारित करने की बात कही है. साथ ही बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर 16, 17 और 18 अप्रैल को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम अपनी पूरी भावना के साथ देश में लागू हो. यह उचित होगा कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले सभी विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण पूरी तरह लागू किया जाए. पीएम मोदी ने अपने पत्र में लिखा, '16 अप्रैल से देश की संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी एक ऐतिहासिक चर्चा होने जा रही है. ये विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को और मजबूत बनाने का अवसर है. ये सबको साथ लेकर चलने की हम सभी की प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है. इसी भावना और उद्देश्य से मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं.' विकसित भारत के लिए नारी शक्ति आवश्यक प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में जोर दिया कि कोई भी समाज तभी आगे बढ़ता है, जब महिलाओं को आगे बढ़ने, निर्णय लेने और नेतृत्व का अवसर मिले. देश ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसकी सिद्धि के लिए आवश्यक है कि इस यात्रा में नारी शक्ति अपनी पूरी क्षमता और पूरी भागीदारी के साथ जुड़े. हम सभी साक्षी हैं कि सार्वजनिक जीवन में हमारी बहनों-बेटियों की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है. भारत की बेटियां स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स और सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप्स तक, हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं. अपनी बड़ी सोच और पूरे जज्बे के साथ वे कड़ी मेहनत करती हैं और खुद को साबित कर रही हैं. पीएम ने याद दिलाया कि देश की संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण की चर्चा दशकों से होती आ रही है. साल 2023 में संसद में सभी दलों के सांसदों ने एक साथ आकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था. ये हमारी एकजुटता को दिखाने वाला एक अविस्मरणीय अवसर था. नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा में संसद के सभी सदस्यों का योगदान रहा था. और जब ये चर्चा चल रही थी, तब उस समय इसे लागू करने के समय पर भी विचार हुआ था. तब सबने सहमति से ये विचार रखा था कि नए कानून के प्रावधान जल्द से जल्द लागू हो जाने चाहिए. सभी दलों के नेताओं ने मुखर होकर इस विचार का समर्थन किया था. पिछले कुछ समय में हमने इस विषय पर जानकारों से विमर्श किया. संविधान की बारीकियों को समझने वाले विशेषज्ञों से हमें सुझाव और मार्गदर्शन मिले. हमने राजनीतिक दलों से भी इस बारे में संवाद किया है. ऐतिहासिक बदलाव का लक्ष्य गहन मंथन के बाद सरकार इस नतीजे पर पहुंची है कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही होना चाहिए. इससे जन-विश्वास गहरा होगा और प्रतिनिधित्व की आकांक्षा पूरी होगी. प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपील की है कि यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है. यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है. सांसदों का योगदान आने वाले समय में गौरव के साथ याद किया जाएगा. पीएम ने कहा कि मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूं, ताकि हम सभी एक स्वर में इस संशोधन को पारित कराने के लिए एकजुट हों. ज्यादा से ज्यादा सांसद इस विषय पर अपने विचार संसद में रखें. यह अवसर किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है. यह नारी शक्ति और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी जिम्मेदारी भी है. हम सभी दल काफी समय से चाहते रहे हैं कि राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़े. इस आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने का यही सही समय है. एकजुट होकर इतिहास रचने की अपील पत्र के अंत में पीएम मोदी ने अटूट विश्वास जताया कि सभी दल एकजुट होकर संसद में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करेंगे. उन्होंने इसे 140 करोड़ देशवासियों की सिद्धि का विषय बताया है. यह संशोधन देश की माताओं, बहनों और बेटियों के प्रति असीम दायित्वों का निर्वहन होगा.  प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र की महान परंपराओं को और जीवंत बनाने के लिए इस ऐतिहासिक बदलाव की दिशा में कदम उठाने का आह्वान किया है. खड़गे ने उठाए सवाल वहीं, प्रधानमंत्री के पत्र के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पीएम मोदी को पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि साल 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने से अब तक 30 महीने बीत चुके हैं और अब हमें विश्वास में लिए बिना यह विशेष सत्र बुलाया गया है और आपकी सरकार परिसीमन के बारे में कोई भी जानकारी दिए बिना हमसे फिर से सहयोग मांग रही है. आप समझ सकते हैं कि परिसीमन और अन्य पहलुओं के विवरण के बिना, इस ऐतिहासिक कानून पर कोई भी सार्थक चर्चा करना असंभव होगा. खड़गे ने ये भी कहा कि आपने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आपकी सरकार ने इस संबंध में राजनीतिक दलों के साथ बातचीत की है. हालांकि, मुझे यह बताते हुए खेद है कि यह बात सच के विपरीत है, क्योंकि सभी विपक्षी दल सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि 29 अप्रैल 2026 को मौजूदा चुनाव खत्म होने के बाद संविधान संशोधनों पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. उन्होंने संशोधन के लिए बुलाए गए विशेष सत्र की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'राज्य में चल रहे चुनावों के दौरान विशेष सत्र बुलाना हमारे इस विश्वास को और मजबूत करता है कि आपकी सरकार महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के बजाय राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए विधेयक के कार्यान्वयन में जल्दबाजी कर रही है.' पिछले रिकॉर्ड का किया जिक्र पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि मुझे यह लिखते हुए दुख हो रहा है कि सार्वजनिक महत्व के मामलों में सरकार का पिछला रिकॉर्ड, चाहे वह नोटबंदी हो, जीएसटी हो, जनगणना हो या वित्त आयोग की सिफारिशों … Read more

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर सुर्खियों में, पाकिस्तान के संयुक्त गश्त प्रस्ताव पर चर्चा तेज

नई दिल्ली  अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। इस दौरान दोनों देशों के बीच किसी भी बात को लेकर आम सहमति नहीं बनी। यह वार्ता भले ही सिर्फ दो देशों के बीच हुई, लेकिन दुनिया की निगाहें इसपर टिकी हुई थीं। इसका सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज था, जिसपर युद्ध के बाद से ही पहरा है। हालांकि, शनिवार को इस समुद्री मार्ग से कम से कम 16 जहाज गुजरे। युद्धविराम के बाद का अब तक का सबसे व्यस्त दिन रहा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन जहाजों को विशेष रूप से ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों को साफ करने के अभियान में लगाया गया है ताकि जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित किया जा सके। नौसेना की निगरानी करने वाली संस्था 'मैरीन ट्रैफिक' ने बताया कि USS माइकल मर्फी की सुरक्षा में चीन, हांगकांग और लाइबेरिया के झंडे वाले तीन विशाल कच्चे तेल के टैंकरों को सफलतापूर्वक मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने संक्षिप्त संबोधन में होर्मुज (Strait of Hormuz) के फिर से खोलने जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी असहमति का जिक्र नहीं किया। आपको बता दें कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान का संयुक्त गश्त प्रस्ताव इस्लामाबाद में संपन्न अमेरिका-ईरान सीधी बातचीत में पाकिस्तान ने इस विवादित जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के लिए एक रूपरेखा पेश की है। अल जजीरा अरबी की रिपोर्ट के अनुसार, एक सूत्र ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में संयुक्त गश्त का प्रस्ताव दिया। इसका मकदसद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस मार्ग को सुरक्षित और बाधा रहित बनाना है। पाकिस्तान ने सुझाव दिया है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग की निगरानी में संयुक्त तंत्र विकसित किया जाए। होर्मुज का खुलना क्यों जरूरी? दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध के दौरान इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो गई थी। अब जबकि शनिवार को एक ही दिन में 16 जहाजों ने इसे पार किया है, यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत के संकेत हैं।

महंगे और अनुपलब्ध गैस सिलेंडर ने बढ़ाई मुश्किलें, उधना स्टेशन पर उमड़ी भीड़

सूरत गुजरात के सूरत में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत ने गंभीर सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है. मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण सप्लाई प्रभावित होने और स्थानीय स्तर पर कालाबाज़ारी बढ़ने से आम लोगों, खासकर प्रवासी श्रमिकों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं. स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि बड़ी संख्या में मजदूर शहर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं. स्टेशन पर भीड़, खुले मैदान में परिवार के साथ बैठे नजर आए लोग शनिवार रात और रविवार सुबह उधना रेलवे स्टेशन पर हजारों श्रमिकों की भीड़ देखने को मिली. रेलवे स्टेशन के वेटिंग एरिया से लेकर खुले मैदान तक लोग अपने परिवारों के साथ बैठे नजर आए. ट्रेनों में सफर करने के लिए लंबी कतारें लगी हुई थीं, जिससे साफ है कि पलायन का सिलसिला पिछले एक महीने से लगातार जारी है. मजदूरों ने बताया कि उन्हें सामान्य कीमत पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा है. कई लोगों का कहना है कि सिलेंडर या तो उपलब्ध नहीं है या फिर ब्लैक में कई गुना ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है. सीमित आय वाले इन श्रमिकों के लिए इतना महंगा सिलेंडर खरीद पाना संभव नहीं है. ऐसे में खाना बनाना और रोजमर्रा का जीवन चलाना कठिन हो गया है. श्रमिकों का पलायन उद्योगों के लिए भी बना चिंता का विषय एक श्रमिक ने बताया कि “काम तो मिल रहा है, लेकिन खाना बनाने के लिए गैस नहीं है. महंगे सिलेंडर खरीदना हमारे बस की बात नहीं है, इसलिए गांव लौटना ही बेहतर विकल्प है.” कई परिवारों ने भी यही कारण बताते हुए शहर छोड़ने का निर्णय लिया है. आपको बता दें कि सूरत देश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, जहां टेक्सटाइल और डायमंड इंडस्ट्री में लाखों प्रवासी मजदूर काम करते हैं. ऐसे में श्रमिकों का यह पलायन उद्योगों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है. यदि यही स्थिति बनी रही, तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैस की आपूर्ति को सामान्य करना और कालाबाज़ारी पर सख्ती से रोक लगाना है. जब तक यह समस्या हल नहीं होती, तब तक सूरत से श्रमिकों का पलायन जारी रहने की आशंका बनी हुई है.

रील से रियल पॉलिटिक्स तक: अंकिता परमार की एंट्री, पार्टी में ही विरोध

बड़ोदरा गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है और जैसे ही भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की, वडोदरा की पोर जिला पंचायत सीट अचानक चर्चा के केंद्र में आ गई. बीजेपी ने यहां से सोशल मीडिया स्टार अंकिता परमार को चुनावी मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया है. अंकिता के इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन चुनावी राजनीति की जमीन पर उनकी एंट्री इतनी आसान नहीं दिख रही. दरअसल, अंकिता को टिकट मिलते ही पार्टी के अंदर पुरानी और जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है. भाजपा की ही पुरानी कार्यकर्ता नयना परमार ने अंकिता के खिलाफ खुलेआम बागी तेवर अपना लिए हैं. नयना ने न केवल विरोध जताया, बल्कि निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है. माना जा रहा है कि नयना का यह कदम अंकिता के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है. इस बगावत की वजह से भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगने का बड़ा डर है. पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि वह अपनों को कैसे मनाए, क्योंकि अगर वोट बंटते हैं तो इसका सीधा फायदा विरोधियों को मिल सकता है. . राजनीति और सोशल मीडिया का मेल अंकिता परमार के लिए राजनीति कोई नई चीज नहीं है. 5 साल पहले वे तालुका पंचायत की सदस्य चुनी गई थीं और ढाई साल तक अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभाली. रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी से बी.कॉम करने वाली अंकिता फिलहाल प्रदेश युवा मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं. उन्होंने राजनीति के साथ-साथ सोशल मीडिया पर अपनी एक जबरदस्त पहचान बनाई है. यही वजह है कि उनकी रील के साथ-साथ उनकी कार्यशैली की भी चर्चा होती रही है. वे जानती हैं कि आज के दौर में जनता तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म कितना जरूरी है और इसी का फायदा उन्हें इस चुनाव में मिल सकता है. अंकिता का जन्म वडोदरा में हुआ, लेकिन उनकी शादी पोर गांव में हुई. उनके ससुर 45 सालों तक सक्रिय राजनीति में रहे और उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए अंकिता ने इस फील्ड में कदम रखा. अंकिता का मानना है कि महिलाओं को 'इंडिपेंडेंट' यानी आत्मनिर्भर होना चाहिए. वे पीएम मोदी के 'फिट इंडिया' अभियान की बड़ी फैन हैं और खुद का जिम भी चलाती हैं, जहाँ वे रोज जमकर वर्कआउट करती हैं. वे अक्सर अपने वीडियो के जरिए युवाओं को स्वस्थ रहने का संदेश देती हैं, जिससे उनकी एक अलग ही 'फैन फॉलोइंग' बन गई है. भाजपा को उम्मीद है कि अंकिता की लोकप्रियता का फायदा उन्हें चुनावों में मिलेगा. पार्टी को लगता है कि एक युवा चेहरा, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय हो, युवाओं और महिलाओं को ज्यादा बेहतर ढंग से पार्टी से जोड़ सकता है. अब देखना होगा कि सोशल मीडिया पर रील से दिल जीतने वाली अंकिता, क्या जनता का वोट भी जीत पाती हैं. क्या उनकी डिजिटल लोकप्रियता उन्हें जिला पंचायत की दहलीज तक पहुंचा पाएगी, यह आने वाले चुनाव के नतीजे तय करेंगे.

परीक्षा से पहले ही परीक्षा खत्म! पूर्णिया यूनिवर्सिटी की लापरवाही से हंगामा

पूर्णिया बिहार का पूर्णिया विश्वविद्यालय हाल में ही एक शोध छात्रा के साथ एक विभागाध्यक्ष की तस्वीर और वीडियो वायरल होने के बाद अब स्नातक प्रथम खण्ड की परीक्षा को लेकर सुर्खियों में है. पूर्णियां विश्वविद्यालय इस मामले में देश का संभवतः पहला विश्वविद्यालय होगा, जहां एक परीक्षा के लिए तीन अलग अलग एडमिट-कार्ड जारी किए गए हैं और उससे भी बड़ी हैरानी की बात यह है कि निर्धारित तारीख से एक दिन पहले ही परीक्षा हो गई. परीक्षा से वंचित हजारों छात्र-छात्रों का परीक्षा केंद्र और विश्वविद्यालय परिसर में आक्रोश देखने को मिला है. हालांकि, विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक इस लापरवाही का पूरा ठीकरा समर्थ पोर्टल पर फोड़ रहे हैं. एक ही परीक्षा का तीन-तीन कार्ड दरअसल, पूर्णिया विश्वविद्यालय स्नातक में प्रथम वर्ष की परीक्षा 30 मार्च से शुरू हुई है. जो 15 अप्रैल तक चलेगी. इसी बीच एक हैरानी की बात सामने आई कि परीक्षा शुरू होने से पहले तकनीकी त्रुटियों की वजह से दो बार परीक्षार्थियों को एडमिट कार्ड जारी किया गया. दूसरी बार वाले एडमिट कार्ड से 30 मार्च और 04 अप्रैल को परीक्षा भी सम्पन्न हुई. इसके बाद फिर विश्वविद्यालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए तीसरा एडमिट कार्ड जारी किया और परीक्षा तिथि में भी परिवर्तन किया. इस एडमिट कार्ड के अनुसार, 08 अप्रैल और 10 अप्रैल को होने वाली परीक्षा को विस्तारित करते हुए क्रमशः 09 और 11 अप्रैल कर दिया गया. 11 अप्रैल की सुबह की पाली की परीक्षा देने जब सैकड़ों परीक्षार्थी जिला मुख्यालय स्थित आर केके कॉलेज केंद्र पहुंचे तो उन्हें परीक्षा केंद्र में यह कहकर प्रवेश करने से रोक दिया कि इन विषयों की परीक्षा 10 अप्रैल को ही पूरी हो चुकी है. इसके बाद सैकड़ों परीक्षार्थी आक्रोशित हो गए और उन्होंने सहरसा-पूर्णिया मार्ग को जामकर नारेबाजी किया. परीक्षार्थी इमराना खातून ने बताया कि 08 तारीख से आ रहे हैं, फर्स्ट सिटींग में परीक्षा थी, कैंसल हो गया. फिर बोला कि 09 तारीख को होगा, वह भी कैंसल हो गया. फिर 11 तारीख बताया गया, लेकिन आज भी नही हो रहा है. हमलोगों को धक्का मारकर बाहर कर दिया गया. समर्थ पोर्टल की गड़बड़ी से हुई छात्रों को परेशानी परीक्षा नियंत्रक प्रो अमरकांत सिंह ने बताया कि समर्थ पोर्टल द्वारा पहली बार फॉर्म भराया गया. तकनीकी त्रुटियों की वजह से बच्चों को परेशानी हुई. उनकी परेशानियों को देखते हुए विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी लेता है. छुटे हुए बच्चों की परीक्षा फिर से ली जाएगी. आगे की परीक्षा स्थगित की जाती है. परीक्षा नियंत्रक प्रो अमरकांत सिंह कहते हैं कि भारत सरकार के समर्थ पोर्टल द्वारा पहली बार परीक्षा फॉर्म भराया गया है और तकनीकी त्रुटि के कारण विश्वविद्यालय के बच्चों को परेशानी हुई है. उनकी परेशानी को देखते हुए विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी लेता है. परीक्षार्थियों को कोई असुविधा नही हो, इसलिए उक्त विषय की परीक्षा फिर से ली जाएगी और आगे की परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि समर्थ पोर्टल ने बताया है कि जो त्रुटि है, उसको दूर कर लिया गया है. छात्र नेता पीयूष पुजारा विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहते हैं कि ऐसा लगता है कि परीक्षा विभाग और विश्वविद्यालय खेल बनकर रह गया है उन्हें पता ही नही है कि उनका मैनेजमेंट क्या है और बार-बार एडमिट कार्ड निकलना पड़ता है. परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि इसकी नैतिक जिम्मेवारी परीक्षा विभाग लेती है और आगे की परीक्षा स्थगित की जाती है.इसका मतलब तो यह हुआ कि परीक्षा विभाग और पूर्णियां विश्वविद्यालय खेल बनकर रह गया है और उन्हें पता ही नही है कि उनका मैनेजमेंट क्या है ,बार-बार एडमिट कार्ड बदलना पड़ता है.  

गुरु-चंद्रमा की युति से बनेगा शुभ योग, करियर में तरक्की के संकेत

ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे शुभ योग बताए गए हैं, जो व्यक्ति के जीवन में तरक्की, सम्मान और सुख-सुविधाएं लेकर आते हैं. इन्हीं में से एक खास योग है गजकेसरी राजयोग, जो चंद्रमा और गुरु ग्रह के साथ आने से बनता है. अप्रैल 2026 में यह शुभ योग बनने जा रहा है. 21 अप्रैल को चंद्रमा मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही गुरु बृहस्पति मौजूद रहेंगे. इन दोनों ग्रहों की युति से गजकेसरी राजयोग बनेगा, जिसे बेहद शुभ माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाएं और सुख का कारक होता है, जबकि गुरु ज्ञान, धन और भाग्य से जुड़ा ग्रह है. जब ये दोनों ग्रह साथ आते हैं, तो कई क्षेत्रों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. इस योग का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मिथुन, सिंह और कन्या राशि वालों के लिए यह समय ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. कैसे बनता है गजकेसरी राजयोग? ज्योतिष के अनुसार जब गुरु और चंद्रमा एक ही राशि में हों या एक-दूसरे से केंद्र स्थान (1, 4, 7, 10 भाव) में हों, तब गजकेसरी राजयोग बनता है. यह योग कुंडली में शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है और व्यक्ति को सफलता दिलाने में मदद करता है. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि के लोगों के लिए यह योग करियर में ग्रोथ लेकर आ सकता है. नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं. आपकी बात करने की क्षमता आपको आगे बढ़ने में मदद करेगी. बिजनेस में भी नए अवसर मिल सकते हैं और साझेदारी फायदेमंद साबित हो सकती है. हालांकि खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए बजट का ध्यान रखें और जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास से बचें. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए यह योग आय और लाभ के मामले में अच्छा साबित हो सकता है. इस दौरान आपकी मेहनत की सराहना होगी और ऑफिस में आपकी पहचान बढ़ सकती है. बिजनेस करने वालों को निवेश से फायदा मिलने के संकेत हैं और नए मौके भी मिल सकते हैं. परिवार में कोई अच्छी खबर मिल सकती है, लेकिन जल्दबाजी या अहंकार से बचना जरूरी होगा, वरना नुकसान हो सकता है. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला हो सकता है. रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं और करियर में स्थिरता आ सकती है. नई नौकरी या बिजनेस के अवसर मिल सकते हैं. इस दौरान यात्रा के योग बन रहे हैं और किसी धार्मिक कार्य में शामिल होने का मौका मिल सकता है. हालांकि काम का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए सेहत का ध्यान रखें और पर्याप्त आराम करें.

‘पैसे डबल’ का झांसा देकर चलाते थे नकली नोट, पुलिस ने गिरोह का किया खुलासा

 बस्ती यूपी के बस्ती जिले में पुलिस ने फर्जी नोट चलाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. संयुक्त अभियान में थाना वाल्टरगंज पुलिस, स्वॉट टीम और सर्विलांस टीम की अहम भूमिका रही. गिरफ्तार अभियुक्तों में मुस्तफा, नबीउल्लाह, नबीउल्लाह उस्मानी, हबीबुर्रहमान और मणिकांत चौधरी शामिल हैं. पुलिस ने इनके पास से कुल 420000 रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं. जिनमें 500 रुपये के पांच बंडल, 200 रुपये के पांच बंडल और 100 रुपये के सात बंडल शामिल हैं. इसके अलावा एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और तीन मोटरसाइकिल भी बरामद की गई है. पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी संगठित तरीके से नकली नोटों का नेटवर्क चला रहे थे और विभिन्न क्षेत्रों में इन्हें खपाने का काम करते थे. गिरफ्तार आरोपियों में मणिकांत चौधरी रूपनदेही नेपाल का निवासी है. जबकि मुस्तफा और नबीउल्लाह जनपद बलरामपुर, नबीउल्लाह उस्मानी जनपद महाराजगंज और हबीबुर्रहमान जनपद संतकबीर नगर का रहने वाला है. पूरे मामले का खुलासा अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पांच लोग की गिरफ्तारी की गई है. जिसमें उनके पास से 4 लाख बीस हजार के फर्जी नोट रिकवर किए गए हैं. जिनमें 500 की पांच गड्डियां,200 की पांच गड्डियां और 100 की सात गड्डियां शामिल हैं. आरोपियों के पास से तीन बाइक भी बरामद की गई है. ये गिरफ्तारी बक्साई पुल के पास से की गई है. आरोपियों द्वारा ग्रुप बनाकर जनपद बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, अयोध्या, अंबेडकर नगर में घूमा जाता था. ऐसे में यहां के ग्रामीण बैंक को टारगेट किया जाता था. आरोपी बैंक से बुजुर्गों को पैसे निकालते समय लालच देते थे. आरोपी कहते थे कि हम आपके रुपए डबल कर देंगे. जिसके चलते कुछ लोग उनकी बातों पर विश्वास भी कर लेते थे और इस तरह ये लोग अपनी नकली नोट खपा देते थे.

इकाना में भिड़ंत: पंत बनाम गिल, किसका रहेगा पलड़ा भारी?

लखनऊ रविवार को भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटंस (जीटी) की मेजबानी करेगी। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के 19वें मैच में एलएसजी की टीम जीत की हैट्रिक लगाना चाहेगी। एलएसजी को इस सीजन अपने पहले मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स के विरुद्ध 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच 5 विकेट से अपने नाम किया। अपने तीसरे मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ इस टीम ने 3 विकेट से जीत दर्ज की। गुजरात का कैसा रहा है प्रदर्शन दूसरी ओर, जीटी को अपने पहले मैच में पंजाब किंग्स के विरुद्ध 3 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद अगले मैच को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 6 रन से गंवाया। हालांकि, दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 1 रन के करीबी अंतर से जीत दर्ज करते हुए गुजरात टाइटंस अपना खाता खोलने में कामयाब रही। अरुण जेटली स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मिली शानदार जीत गुजरात टाइटंस के लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकती है। शुभमन गिल की कप्तानी में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे लखनऊ में होने वाले अगले मुकाबले में इस लय को बरकरार रख पाते हैं या नहीं? हेड टू हेड में कैसा है दोनों टीमों का रिकॉर्ड हेड-टू-हेड रिकॉर्ड के मामले में गुजरात टाइटंस का लखनऊ सुपर जायंट्स पर थोड़ा पलड़ा भारी है। दोनों टीमों के बीच अब तक 7 मैच खेले गए हैं, जिनमें से गुजरात टाइटंस ने चार जीते, जबकि लखनऊ सुपर जायंट्स को तीन मुकाबलों में जीत मिली है। दोनों टीमों का स्क्वाड गुजरात टाइटंस की टीम: शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र, ग्लेन फिलिप्स, राशिद खान, मानव सुथार, निशांत सिंधु, वाशिंगटन सुंदर, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, कगिसो रबाडा, रविश्रीनिवासन साई किशोर, जयंत यादव, ईशांत शर्मा, अशोक शर्मा, जेसन होल्डर, टॉम बैंटन, ल्यूक वुड, साई सुदर्शन, राहुल तेवतिया, अरशद खान, अनुज रावत, कुलवंत खेजरोलिया, गुरनूर बरार, एम शाहरुख खान। लखनऊ सुपर जाइंट्स की टीम: ऋषभ पंत (कप्तान), मिशेल मार्श, एडेन मार्कराम, हिम्मत सिंह, मैथ्यू ब्रीत्जके, मुकुल चौधरी, अक्षत रघुवंशी, जोश इंग्लिस, निकोलस पूरन, अब्दुल समद, शाहबाज अहमद, अर्शिन कुलकर्णी, आयुष बडोनी, मोहम्मद शमी, अवेश खान, एम. सिद्धार्थ, दिग्वेश सिंह, आकाश सिंह, प्रिंस यादव, अर्जुन तेंदुलकर, एनरिक नॉर्टजे, नमन तिवारी, मयंक यादव, मोहसिन खान।  

US-ईरान शांति वार्ता क्यों टूटी? परमाणु हथियार बना सबसे बड़ा रोड़ा

नई दिल्ली पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता 21 घंटे तक चली सघन चर्चा के बाद भी बेनतीजा रही। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी बात हुई, जिसके कारण शांति वार्ता छोड़कर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वहां से निकल गए। दरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते के विफल होने की वजह ईरान ने परमाणु हथियारों से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को न मानना बता रहे हैं, तो वहीं ईरान ने अमेरिका पर अतार्किक और बेतुकी मांगें थोपने का आरोप लगाया है। क्यों विफल हुई शांतिवार्ता? पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने विस्तार से चर्चा करने और सार्वजनिक रूप से बातचीत करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि मुख्य विवाद परमाणु हथियारों पर था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि यह ईरान के लिए बुरी खबर है और उनकी टीम अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव पेश करने के बाद वार्ता खत्म कर दी है। कैसे बिगड़ी बात? शांति वार्ता के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा, "हमें एक सकारात्मक प्रतिबद्धता देखने की जरूरत है कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे उपकरण हासिल करने की कोशिश करेंगे जो उन्हें जल्दी से परमाणु हथियार प्राप्त करने में सक्षम बना सकें। वेंस ने तया कि यही लक्ष्य अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भी है और यही वे बातचीत के माध्यम से हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। वेंस ने एक अलंकारिक प्रश्न पूछा कि क्या ईरानियों में दीर्घकाल में परमाणु हथियार विकसित न करने की इच्छाशक्ति है? जिसका ईरानियों ने सीधा सा जवाब 'नहीं' में दिया। शनिवार को इस्लामाबाद में चली शांति वार्ता के दौरान ईरान की जब्त संपत्तियों पर चर्चा हुई, इस बारे में एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए वैंस ने कहा कि इस पर और कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों। ईरान ने अमेरिका की बेतूकी मांगो की आलोचना की ईरान ने मध्य पूर्व में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में गतिरोध के लिए अमेरिका की बेतूकी मांगो को जिम्मेदार ठहराया है। ईरानी सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने बताया, "ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी जनता के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए 21 घंटे तक लगातार और गहन बातचीत की। ईरानी प्रतिनिधिमंडल की विभिन्न पहलों के बावजूद, अमेरिकी पक्ष की अनुचित मांगों ने बातचीत की प्रगति को रोक दिया। इस प्रकार बातचीत समाप्त हो गई।"  

21 घंटे चली बातचीत फेल: US-ईरान में नहीं बनी सहमति, पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग को रोकने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता का रोल निभाया. इस्लामाबाद में शांति वार्ता का आयोजन किया गया. हालांकि, ये बातचीत बेनतीजा साबित हुई. इसके बावजूद पाकिस्तान अपनी पीठ थपथपाने से पीछे नहीं हट रहा है. विदेश मंत्री इशाक डार ने बातचीत में शामिल होने के लिए अमेरिका और ईरान का आभार जताया है. शांति वार्ता के बाद इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान अपने बयान में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इन शांति वार्ताओं की मेजबानी करके सम्मानित महसूस कर रहा है. डार ने कहा, 'हम इस्लामाबाद में शांति वार्ता आयोजित करने के लिए ईरान और अमेरिका का शुक्रिया अदा करते हैं. ये न सिर्फ मिडिल-ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए एक अच्छा संकेत है.' पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इस दौरान उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष भविष्य में भी सीजफायर पर समझौतों को जारी रखेंगे. उन्होंने शांति के लिए पाकिस्तान की कोशिशें जारी रहने का भरोसा भी दिलाया. उन्होंने आगे बताया कि इस पूरी शांति वार्ता के पीछे पाकिस्तान के थल सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अहम भूमिका रही. उन्होंने कहा, 'आसिम मुनीर ने सीजफायर करने के लिए कई दौर की वार्ताओं में मदद की.' बता दें कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटों तक बातचीत का दौर चला. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर सहमति भी बनी. लेकिन परमाणु हथियार और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच बात नहीं बन पाई. क्यों फेल हुई शांति वार्ता? अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि वो बातचीत की नीयत से वार्ता में शामिल हुए थे. लेकिन ईरान अमेरिका का शर्तें मानने पर राजी नहीं है. ऐसे में वेंस अब अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद से अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं. वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका अपनी शर्तो में बहुत कुछ मांग रहा था.