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विजय माल्या की मुश्किलें बरकरार, ₹10,270 करोड़ की वसूली के बाद भी ₹8,752 करोड़ बाकी

नई दिल्ली भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या (Vijay Malya) फिर से एक बार चर्चा में हैं। इस बार भी वो अपनी कर्ज के बकाया राशि को लेकर सुर्खियों में हैं। इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले कंसोर्टियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जानकारी दी है कि अगस्त तक विजय माल्या के ऊपर ₹8,752 का भुगतान बाकि था। इससे पहले माल्या ने दावा किया था कि देश की वित्तीय संस्थाओं ने उनसे सभी बकाया राशि वसूल कर ली है। बता दें, विजय माल्या इस समय भारत में नहीं है। कैसे आया यह मामला सामने बंद हो चुकी एयरलाइन और यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रुप के चेयरमैन रह चुके विजय माल्या ने 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट में एक अर्जी डाली। इसमें उन्होंने कोर्ट से अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को खत्म करने की अपील की थी। अपने बचाव में विजय माल्या की तरफ से कहा गया था कि उनके और लोन देने वाले संस्थाओं के बीच एसेट रिकवरी के बाद विवाद खत्म हो गया है। इसी मामले में कोर्ट में बकाया राशि से जुड़ी जानकारी सामने आई। कोर्ट की तरफ से मिले निर्देश के बाद बैंकों ने जो डॉक्यूमेंट्स जमा करवाए हैं, उसके अनुसार डेट रिकवरी ऑफिसर ने 10,270 करोड़ रुपये अस्थायी वसूले हैं। ट्रिब्यूनल में कार्यवाही शुरू होने से पहले 544.58 करोड़ रुपये वसूले गए थे। इस रिकवरी के बाद भी अब भी बड़ी राशि का भुगतान होना बाकी है। डॉक्यूमेंट्स के अनुसार जनवरी 2026 तक माल्या के ऊपर 8135.63 करोड़ रुपये की राशि बकाया थी। इसमें लीगल फीस और अन्य खर्चों को अगर जोड़ दिया जाए तो राशि 8756.86 करोड़ रुपये अगस्त के अंततक पहुंच जाती है। ईडी का क्या कहना है? प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 14132 करोड़ रुपये की कुल रिकवरी हो चुकी है। लेकि ईडी ने हाई कोर्ट से कहा है कि सिविल रिकवरी से PMLA एक्ट खत्म नहीं होते हैं। वहीं, विजय माल्या की दलील है कि अगर रिकवरी मूल कर्ज से ज्यादा हो जाए तो मामले को बंद कर देना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम, दानिश आजाद अंसारी ने कही बड़ी बात

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री  दानिश आजाद अंसारी जी ने आज लखनऊ में मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम को प्रदेश के युवाओं एवं छात्र-छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर अल्प-आय वर्ग के पूर्वदशम एवं दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में ₹148 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। श्री दानिश आजाद अंसारी जी ने कहा कि आज का दिन उत्तर प्रदेश के युवाओं, नौजवानों और विशेष रूप से जेन-जी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने हमेशा युवाओं के सपनों को उड़ान देने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को पूरा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक कारणों से किसी भी छात्र की शिक्षा प्रभावित न हो। कार्यक्रम में मा. कैबिनेट मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर जी, मा. पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप जी, मा. समाज कल्याण मंत्री श्री असीम अरुण जी, मा. मंत्री श्री संजीव कुमार गोंड जी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री बैजनाथ रावत जी, मा. विधायक श्रीमती जय देवी जी, मा. श्री अमरेश कुमार जी सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

‘सपा ने यूपी को तमाशे के अलावा कुछ नहीं दिया’, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने अखिलेश यादव को घेरा

‘एआई और टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग देखना है तो सपा कार्यालय चले जाइए’, दानिश आजाद का अखिलेश पर तीखा हमला ‘सपा ने यूपी को तमाशे के अलावा कुछ नहीं दिया’, मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने अखिलेश यादव को घेरा ‘सपा सरकार में नौकरियों की नीलामी होती थी, रेट तय होते थे’, अखिलेश के आरोपों पर बीजेपी ने किया तीखा पलटवार 'अपने शासन में यूपी को बीमारू राज्य बनाने वाले आज निवेश पर ज्ञान दे रहे हैं', दिनेश प्रताप सिंह का अखिलेश पर तीखा हमला अखिलेश जब नकल की बात आप करते हैं तो यूपी की जनता को हंसी आती है : दिनेश प्रताप सिंह ‘बिना खर्ची-पर्ची के योगी सरकार ने साढ़े नौ लाख सरकारी नौकरियां दी’, दिनेश प्रताप सिंह ने सपा पर साधा निशाना लखनऊ  सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों पर यूपी सरकार के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी और बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने तीखा पलटवार किया है। दानिश आजाद ने एआई और सोशल मीडिया के इस्तेमाल से लेकर सपा के 2012-17 के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों तक पर सवाल खड़े किए और कहा कि सपा के दौर में सरकारी भर्तियों में नौकरी की नीलामी होती थी। वहीं, बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने निवेश और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर अखिलेश को घेरते हुए कहा कि जिस यूपी में पहले निवेशक आने से डरते थे, आज वही प्रदेश बेहतर कनेक्टिविटी और कानून के राज के कारण निवेश का केंद्र बन रहा है। ‘एआई का दुरुपयोग देखना है तो सपा कार्यालय चले जाइए’ दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा समाज को भ्रमित करने की नीयत से काम करती है। उन्होंने कहा कि आज यूपी और देश डिजिटल मजबूती की ओर बढ़ रहे हैं। एआई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल विद्यार्थियों और युवाओं के करियर ग्रोथ के लिए होना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर रील देखकर टाइम पास करने के लिए। मंत्री ने आरोप लगाया कि सपा कार्यालय में तकनीक का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “एआई का दुरुपयोग अगर देखना है, टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग अगर देखना है, तो आप समाजवादी पार्टी के कार्यालय चले जाओ।” उन्होंने कहा कि तमाशा बनाने के अलावा सपा ने यूपी को कुछ नहीं दिया। ‘सपा शासनकाल में नौकरियों की नीलामी होती थी’ दानिश आजाद ने आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार में सरकारी भर्तियों के दौरान अलग-अलग नौकरियों के रेट तय होते थे और एजेंट लगाए जाते थे। उन्होंने कहा कि किसी नौकरी के लिए 10 लाख, किसी के लिए 20 लाख और किसी के लिए 30 लाख रुपये तक की बोलियां लगती थी। उन्होंने सपा सरकार में छात्रवृत्ति, शिक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि सपा को पहले अपने कार्यकाल का इतिहास देखना चाहिए और यह समझना चाहिए कि जनता ने उसे सत्ता से बाहर क्यों किया। ‘वसूली के डर से निवेशक यूपी नहीं आते थे’ दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि अपने शासनकाल में जिन्होंने यूपी को बीमारु राज्य बना दिया आज वो प्रदेश में निवेश पर ज्ञान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले निवेशक यहां निवेश करने से डरते थे, क्योंकि निवेश का पता चलते ही सपा नेता वसूली अभियान शुरू कर देते थे। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में निवेशकों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया जा रहा है और अब यूपी में खर्ची-पर्ची की बात कोई सोच भी नहीं सकता। दिनेश ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज है और बेहतर रोड, एयर व वॉटरवेज कनेक्टिविटी के कारण निवेशक यूपी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ‘सपा सरकार में नौकरियों का हाल खराब था’ दिनेश प्रताप सिंह ने अखिलेश के नकल और रोजगार के मुद्दे उठाने पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता नहीं थी और जाति के आधार पर नियुक्तियां होती थी। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में करीब साढ़े नौ लाख सरकारी नौकरियां पारदर्शी तरीके से दी गई हैं। उन्होंने अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा कि योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर युवाओं को नौकरी मिल रही है, इसलिए उन्हें दिक्कत हो रही है। सिंह ने कहा कि सपा की दुकान 2017 में ही बंद नहीं हुई, बल्कि 2047 तक बंद रहने वाली है।

18 साल की उम्र पूरी कर चुके युवाओं के लिए मौका, फार्म-6 से मतदाता सूची में ऐसे जुड़वाएं नाम

 गोरखपुर  मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से वंचित रह गए लोगों के लिए राहत की खबर है। अब अर्ह युवा, पहली बार मतदाता बनने वाले, छूटे हुए, बेघर, दिव्यांग और महिला मतदाता आसानी से सिर्फ फार्म-6 के माध्यम से अपना नाम सूची में शामिल करा सकेंगे। इसके लिए आनलाइन या आफलाइन दोनों ही माध्यमों से आवेदन किया जा सकता है। भारत निर्वाचन आयोग 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र नागरिकों के लिए फार्म-6 के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा देता है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी जय प्रकाश ने बताया कि जिन पात्र लोगों का नाम विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर के संबंध में 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका है, वे भी फार्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं। फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र देना जरूरी नहीं उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र लगाने की अनिवार्यता निर्वाचन आयोग ने समाप्त कर दी है। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फार्म-6 के साथ घोषणा पत्र भरकर लगाना अनिवार्य नहीं है। पात्र व्यक्ति संबंधित बीएलओ के माध्यम से आफलाइन आवेदन कर सकते हैं अथवा निर्वाचन आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल से आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आयोग के अनुसार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए पात्र नागरिक भारतीय नागरिक होना, संबंधित क्षेत्र का सामान्य निवासी होना और अयोग्य न होना जरूरी है। एसआइआर में कटे थे 6.45 लाख नाम गोरखपुर में एसआइआर से पहले 36.66 लाख से अधिक मतदाता थे। अभियान में 6.45 लाख से अधिक नाम हटे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी, जो मतदाता तो थे, लेकिन 2003 की मतदाता सूची में अपने, माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से संबंधित जरूरी जानकारी या अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके। जिला स्तर पर एसआइआर के बाद जारी आंकड़ों में 6,45,634 नाम हटने और मतदाताओं की संख्या घटकर 30,20,908 होने की जानकारी दी गई थी। एसआइआर के दौरान फार्म छह के साथ घोषणा पत्र के जरिए 2003 के रिकार्ड की जानकारी देना महत्वपूर्ण हो गया था। अब इस अतिरिक्त बाध्यता के हटने से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी , जो पुराने पारिवारिक रिकार्ड की जानकारी न होने के कारण आवेदन की प्रक्रिया में अटक रहे थे।

सात समंदर पार बसे हरियाणवियों को जोड़ने की तैयारी, विदेशों में बनेंगी ‘हरियाणवी’ एसोसिएशन

चंडीगढ़  हरियाणा की पहचान अब केवल दिल्ली की सीमाओं से लगे एक राज्य तक सीमित नहीं है। खेतों, खलिहानों, खेल के मैदानों, फौजी परंपरा और उद्यमिता से निकली हरियाणा की प्रतिभा पिछले कई दशकों में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंची है। किसी ने यूरोप में कारोबार खड़ा किया, किसी ने अफ्रीका में अपनी पहचान बनाई, तो कोई नई पीढ़ी के साथ अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या खाड़ी देशों में बस गया। ये लोग भले ही हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन अपनी जड़ों से उनका रिश्ता अब भी उतना ही गहरा है इसी रिश्ते को संस्थागत रूप देने की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक नई पहल आरंभ की है। सरकार विदेश में रहने वाले हरियाणा मूल के लोगों को एक मंच पर लाकर पंजीकृत ‘हरियाणवी’ एसोसिएशन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मकसद सिर्फ एक सामाजिक संगठन खड़ा करना नहीं, बल्कि विदेश में बसे हरियाणवियों के लिए ऐसा नेटवर्क तैयार करना है जो जरूरत के समय सहयोगी, नई पीढ़ी के लिए संस्कृति का वाहक और हरियाणा के लिए दुनिया से जुड़ने का एक मजबूत सेतु बन सके। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की इस पहल के तहत विदेश में रहने वाले हरियाणा मूल के प्रमुख लोगों, उद्योगपतियों, कारोबारियों, पेशेवरों और आम लोगों को एक साथ जोड़ने की परिकल्पना की गई है। विदेश सहयोग विभाग इन संगठनों के पदाधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। संकट में सहारे से रोजगार तक, एसोसिएशन निभाएगी ‘अपने लोगों’ की भूमिका विदेश में नया जीवन शुरू करना हमेशा आसान नहीं होता। भाषा, स्थानीय कानून, रोजगार, कारोबार, दस्तावेज, शिक्षा और सामाजिक परिस्थितियों से जुड़ी चुनौतियां प्रवासी भारतीयों के सामने समय-समय पर आती रहती हैं। ऐसे में उसी क्षेत्र में रहने वाले अपने लोगों का संगठित नेटवर्क चुनौतियों से पार लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हरियाणा सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में यही एसोसिएशन स्थानीय स्तर पर एक तरह के ‘सपोर्ट सिस्टम’ के रूप में काम करेगी। विदेश में पहुंचने वाले किसी हरियाणवी युवा को रोजगार की तलाश हो, किसी कारोबारी को स्थानीय संपर्कों की जरूरत हो या किसी व्यक्ति को किसी मुश्किल परिस्थिति में सामुदायिक सहयोग चाहिए, एसोसिएशन मदद और मार्गदर्शन का माध्यम बन सकेगी। अफ्रीका से यूरोप तक बन रहा मजबूत नेटवर्क अभी तक युगांडा और केन्या में हरियाणवी संगठन बन चुके हैं, जबकि स्वीडन, डेनमार्क और तंजानिया में संगठन बनाने की प्रक्रिया के लिए प्रयास चल रहे हैं। हर संगठन के नाम में ‘हरियाणवी’ शब्द को शामिल करने की व्यवस्था आवश्यक रहेगी। विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. पवन चौधरी समन्वय की भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का प्रयास है कि इन संगठनों के साथ निरंतर संपर्क बना रहे और वे विदेश में रहने वाले हरियाणवियों तथा सरकार के बीच संवाद का एक प्रभावी माध्यम बनें। सात समंदर पार सजेगी हरियाणवी संस्कृति की चौपाल हरियाणा दिवस, गीता जयंती और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सामूहिक आयोजन विदेशों में बसे हरियाणवियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। खासतौर पर उन बच्चों और युवाओं के लिए, जिनका जन्म या पालन-पोषण विदेश में हुआ है। ऐसे आयोजन हरियाणा को किताबों या पारिवारिक स्मृतियों से आगे एक जीवंत अनुभव के रूप में सामने ला सकते हैं। इस पहल का सबसे व्यापक आयाम आर्थिक है। हरियाणा में निवेश की संभावनाओं, नई तकनीक, अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक कारोबारी संपर्कों के लिए प्रवासी हरियाणवी एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।  

बाढ़ से फसल बर्बाद होने पर किसानों को राहत, रबी सीजन में मुफ्त बीज के साथ मिलेगा अनुदान

पटना  बाढ़ प्रभावित किसानों को रबी मौसम में फसल उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार नगद अनुदान के साथ राई, सरसों और मटर का निशुल्क बीज उपलब्ध कराएगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा की पहल पर किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत गुणवत्तापूर्ण बीज मुहैया कराने की तैयारी की जा रही है। इससे किसानों की खेती की लागत कम करने के साथ रबी फसलों का रकबा बढ़ाने में मदद मिलेगी। किसानों को निर्धारित मानक एवं पात्रता के आधार पर बीज उपलब्ध कराया जाएगा। बीज वितरण की प्रक्रिया को आनलाइन आवेदन और सत्यापन से जोड़ने की तैयारी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिल सके। विदित हो कि 18 जिलों, 84 प्रखंडों एवं 653 पंचायतों में बाढ़ एवं अत्यधिक वर्षापात से फसलों को नुकसान हुआ है। ऐसे प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को रबी मौसम में राई, सरसों एवं मटर के बीज का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। वहीं, कम वर्षा वाले क्षेत्रों में श्री अन्न की खेती के लिए किसानों को आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाना उद्देश्य उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और खेती को अधिक लाभकारी बनाना है। बिहार में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए दलहन, तिलहन, मखाना, मशरूम, मसाले एवं बागवानी फसलों के क्षेत्र विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन के साथ बाजार व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। बाढ़ एवं अत्यधिक वर्षापात से प्रभावित किसानों को राहत देने के साथ-साथ रबी मौसम में कृषि गतिविधियों को नई गति दी जाएगी।

राउज एवेन्यू कोर्ट में लालू परिवार की पेशी, IRCTC केस की सुनवाई टली; अब 30 अक्टूबर को होगी सुनवाई

पटना  रेलवे होटल टेंडर से संबंधित आईआरसीटीसी स्कैम के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव,पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राउज एवेन्यू कोर्ट दिल्ली में शनिवार को हाजिर हुए। मामले के नौ आरोपियों को उनके खिलाफ गठित आरोप पढ़कर सुनाया जाना था। लेकिन, चार्ज फ्रेमिंग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 30 अक्टूबर की तारीख तय किया है। 10 सितम्बर को इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने चार्ज फ्रेमिंग की औपचारिक प्रक्रिया के लिए 3 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की थी। कोर्ट ने कहा था कि आरपियों के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद हैं जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी। इसके तहत लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल नौ आरोपितों में उपस्थित होने का आदेश दिया गया था। यह मामला तब का है जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। सीबीआई और ईडी की जांच रिपोर्ट और फाइल की गयी चार्जशीट के अनुसार कोर्ट ने माना कि रेलवे(आईआरसीटीसी) की रांची और पूरी स्थित होटलों का लीज देने में नियमों की अनदेखी करते हुए अवैध लेन देन हुआ। लालू परिवार हमेशा आरोपों से इनकार करता रहा पर तथ्यों के आधार पर कोर्ट की ओर से उनके और परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप गठित किया गया। जांच रिपोर्ट में ईडी के साथ सीबीआई ने भी माना कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते पद का दुरुपयोग किया। विनय कोचर और विजय कोचर के सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को रांची और पूरी स्थित रेलवे के होटलों के संचालन का टेंडर देने में नियमों की अनदेखी की गयी। इसके बदले पटना की कीमती जमीन पीसी गुप्ता और सरला गुप्ता के माध्यम से लालू परिवार को दिया। टेंडर प्रक्रिया को एक दूसरे को लाभ पहुंचाने के पूर्व निर्धारित फार्मूले के आधार पर पू्र्ण किया गया। इसमें हेरफेर भी किया गया। इस मामले में ईडी ने कुल 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इनमें से 9 के खिलाफ आरोपों को सत्य पाया। 10 सितम्बर के फैसले में कोर्ट ने जिनके खिलाफ आरोप गठित किया उनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, प्रेम चंद गुप्ता, सरला गुप्ता, सुजाता होटल्स, लारा प्रोजेक्ट्स और होटल कारोबारी विनय कोचर और विजय कोचर के नाम शामिल हैं। सभी आरोपी कोर्ट में हाजिर हुए।

योगी सरकार ने 15 IAS समेत 38 अफसरों का किया ट्रांसफर, खनन और चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव

लखनऊ योगी आदित्यनाथ सरकार ने शनिवार तीन अक्टूबर को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सरकार ने 15 आईएएस और 23 पीसीएस अफसरों का ट्रांसफर किया है। इन तबादलों को चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बीती 20 सितंबर को सरकार ने दस आईएस अधिकारियों का तबादला कर दिया था। IAS अमित कुमार घोष और अमृत अभिजात समेत दस अधिकारियों को नई तैनाती दी गई थी। आईएएस अफसरों के ट्रांसफर में खनन सचिव माला श्रीवास्तव से सचिव खनन का प्रभार ले लिया गया है। उन्हें अब निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म की जिम्मेदारी दी गई है। पंचायती राज के निदेशक आईएएस अधिकारी अमित सिंह को हटाकर हरिप्रताप शाही को निदेशक पंचायती राज बनाया गया है। अमित सिंह को प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ पद का कार्यभार दिया गया है। आईएएस अधिकारी राकेश कुमार सिंह को अपर आयुक्त आवास विकास परिषद भेजा गया है। खनन और चिकित्सा शिक्षा विभाग में बदलाव खनन और चिकित्सा शिक्षा विभाग में भी बदलाव किया गया है।माला श्रीवास्तव को सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म तथा निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म के पद पर तैनात किया गया है। डॉ. उज्जवल कुमार को विशेष सचिव एवं निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म की जिम्मेदारी दी गई है। वह इससे पहले प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के पद पर थे। जेरीभा को प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन बनाया गया है। वह इससे पहले विशेष सचिव, भूतत्व एवं खनिकर्म तथा अपर निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म के पद पर थीं। आईएएस अफसर ध्रुव खाडिया को जौनपुर से मुख्य विकास अधिकारी मऊ के पद पर भेजा गया है। विवेक कुमार श्रीवास्तव को सदस्य राजस्व परिषद प्रयागराज और नरेंद्र बहादुर सिंह को मुख्य विकास अधिकारी जौनपुर के पद पर तैनाती मिली है। उज्जवल कुमार विशेष सचिव खनन बनाए हैं। आईएएस अफसर जे रीभा एमडी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन में भेजी गई हैं तो सचिन कुमार सिंह विशेष सचिव, चिकित्सा शिक्षा और प्रकाश बिंदु सचिव चिकित्सा शिक्षा के साथ अर्चना गहरवार को कुलसचिव AKTU लखनऊ और रीना सिंह कुलसचिव KGMU के पद पर तैनाती मिली है। डॉ. चन्द्र भूषण, सचिन कुमार सिंह को मिली नई जिम्मेदारी डॉ. चन्द्र भूषण को अपर निदेशक, डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के पद पर भेजा गया है। उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद में अपर निदेशक के पद पर तैनात रहे सचिन कुमार सिंह को विशेष सचिव, चिकित्सा शिक्षा नियुक्त किया गया है। ध्रुव खाड़िया मुख्य विकास अधिकारी, जौनपुर थे। मुख्य विकास अधिकारी, मथुरा के पद पर रहे विवेक कुमार श्रीवास्तव को प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद में सदस्य (न्यायिक) बनाया गया है। लखीमपुर खीरी में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के पद पर तैनात नरेंद्र बहादुर सिंह को मुख्य विकास अधिकारी, जौनपुर की जिम्मेदारी दी गई है। श्रीहरि प्रताप शाही को निदेशक, पंचायती राज की जिम्मेदारी श्रीहरि प्रताप शाही को निदेशक, पंचायती राज बनाया गया है। वह अब तक अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, यूपीईडा के पद पर थे। निदेशक, पंचायती राज के पद पर तैनात अमित कुमार सिंह को प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले थे। प्रकाश बिन्दु को सचिव, चिकित्सा शिक्षा बनाया गया है। इससे पहले वह प्रबंध निदेशक, पीसीडीएफ के पद पर थे। नीरज शुक्ला प्रबंध निदेशक पीसीएफ बनाए गए है। नीरज शुक्ला अपर आयुक्त आवास विकास परिषद के पद पर थे। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा से जुड़े दो प्रमुख पदों पर भी बदलाव किया गया है। अर्चना गहरवार को कुलसचिव, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय नियुक्त किया गया है। वहीं रीना सिंह को कुलसचिव, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय बनाया गया है। इस फेरबदल के बाद प्रशासनिक, पंचायती राज, चिकित्सा शिक्षा, खनन और विकास प्राधिकरण से जुड़े कई विभागों में अधिकारियों की नई तैनाती हुई है। 23 पीसीएस अधिकारियों का तबादला यूपी सरकार ने PCS कैडर के 23 अधिकारियों का भी तबादला कर दिया है। शासन की जारी लिस्ट में कई जिलों के अपर जिलाधिकारी (ADM), उपजिलाधिकारी (SDM) और नगर निगमों के अपर नगर आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के तहत चंद्रेश कुमार को मुख्य राजस्व अधिकारी देवरिया, ज्ञानेन्द्र विक्रम को एडीएम (न्यायिक) संतकबीरनगर, लवी त्रिपाठी को एडीएम (प्रशासन) सहारनपुर और राजेश कुमार को अपर नगर आयुक्त मेरठ बनाया गया है। वहीं पुष्पेंद्र पटेल को एडीएम (प्रशासन) रामपुर, अर्पित गुप्ता को कुलसचिव बांदा कृषि विश्वविद्यालय, विजय शंकर को कुलसचिव महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर, अभिनव कन्नौजिया को संयुक्त दुग्ध आयुक्त और बृजेश कुमार सिंह को सचिव मेरठ विकास प्राधिकरण के पद पर तैनात किया गया है। शिवानी सिंह को एडीएम (नमामि गंगे) जालौन, प्रेम चन्द्र मौर्य को एडीएम (वि/रा) प्रतापगढ़, रामजी मिश्रा को एडीएम (वि/रा) लखनऊ, राजेंद्र कुमार को एडीएम (न्यायिक) हरदोई और प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी को एडीएम (प्रशासन) मुरादाबाद की जिम्मेदारी दी गई है।

पटना PMCH में अक्टूबर से नई व्यवस्था, गंभीर नवजातों के लिए NICU में बढ़ेंगे 20 बेड

 पटना नवजात और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में अक्टूबर के पहले सप्ताह में नीकू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) और पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) का विस्तार किया जाएगा। इससे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने वाले नवजात और बच्चों को भर्ती कराने में होने वाली परेशानी कम होगी और अधिक बच्चों को एक साथ इलाज की सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल प्रशासन ने विस्तार को लेकर आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी है। पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में नीकू-पीकू की नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। वर्तमान में पांचवें फ्लोर पर 38 बेड का नीकू और 20 बेड का पीकू संचालित है। नई व्यवस्था के तहत दोनों यूनिट को नए स्वरूप में व्यवस्थित किया जाएगा। इसमें 58 बेड का नीकू वार्ड और 20 बेड का अलग पीकू वार्ड होगा। गंभीर नवजातों के लिए 58 बेड का नीकू अस्पताल में अभी 38 बेड का नीकू है। नवजातों की संख्या बढ़ने पर कई बार बेड की उपलब्धता चुनौती बन जाती है। नई व्यवस्था में नीकू की क्षमता बढ़ाकर 58 बेड की जाएगी। इससे समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन वाले और गंभीर स्थिति वाले नवजातों को गहन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वर्तमान में नीकू और पीकू पांचवें फ्लोर पर ही संचालित हो रहे हैं। नई व्यवस्था में 20 बेड का पीकू अलग वार्ड के रूप में संचालित किया जाएगा। इसमें गंभीर रूप से बीमार बच्चों को वेंटिलेटर सहित आवश्यक गहन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह के अनुसार, नीकू और पीकू का विस्तार पीएमसीएच में बाल चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बेड बढ़ने से गंभीर नवजात और बच्चों को समय पर भर्ती कर उपचार शुरू करने में मदद मिलेगी। अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि विस्तार के साथ जरूरी संसाधन और चिकित्सकीय सुविधाएं भी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाएं।

रांची में बारिश का असर, एक हफ्ते में दोगुने हुए सब्जियों के भाव; रसोई का बजट बिगड़ा

 रांची  शहर के बाजारों में इन दिनों हरी सब्जियों की कीमत में तेजी देखने को मिल रही है। बारिश के कारण कई इलाकों में सब्जियों की फसल प्रभावित होने का असर अब बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। आम लोगों के रसोई बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। बाजार में कई सब्जियां 80 से 120 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। झींगा 120 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं फुलगोभी 80 से 100, फरसबिंस 100 से 120, पालक 100 से 120 और बड़ा झींगा 100 से 120 रुपये किलो बिक रहा है। हरा धनिया भी 200 से 220 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं हरी पत्तेदार सब्जियों की कीमत भी आम लोगों को परेशान कर रही है। पालक 100 से 120 रुपये किलो, लाल साग 50 से 60, पोई साग 50 से 60 रुपये किलो तक बिक रही है। नौनी साग 25 से 30 रुपये पाव मिल रहा है। वहीं एक सप्ताह में ही सब्जियों की कीमत दोगुनी हो गई है। बाजार में सब्जियों के भाव नौनी साग : 25-30 रुपये पाव सतपुतिया : 300-400 रुपये किलो खीरा : 70-80 रुपये किलो लाल साग : 50-60 रुपये किलो कंदा : 60-70 रुपये किलो सकरकंद : 70-80 रुपये किलो भिंडी : 70-80 रुपये किलो फुलगोभी : 80-100 रुपये किलो बंधागोभी : 40-50 रुपये किलो टमाटर : 50-60 रुपये किलो बैंगन : 50-60 रुपये किलो करेला : 80-90 रुपये किलो बौदी : 60-70 रुपये किलो फरसबिंस : 100-120 रुपये किलो शिमला मिर्च : 80-100 रुपये किलो नेनुआ : 60-70 रुपये किलो बड़ा झींगा : 100-120 रुपये किलो कद्दू : 50-60 रुपये किलो परवल : 40-50 रुपये किलो हरा धनिया : 200-220 रुपये किलो हरी मिर्च : 50-60 रुपये किलो नींबू : 5-7 रुपये प्रति पीस ओल : 50-60 रुपये किलो खेकसा : 80-100 रुपये किलो पालक : 100-120 रुपये किलो मूली : 50-60 रुपये किलो गाजर : 50-60 रुपये किलो बीट : 50-60 रुपये किलो सीम : 80-100 रुपये किलो कच्चू पत्ता : 60-70 रुपये किलो नोट : सब्जियों के ये भाव रांची के अलग-अलग बाजारों से लिए गए हैं। महिलाओं ने कहा, बढ़ गया रसोई का बजट सब्जियों के भाव में तेजी का असर सीधे घर के बजट पर पड़ रहा है। पहले जहां परिवार के लिए कई तरह की सब्जियां आसानी से खरीद लेते थे, अब कीमत देखकर मात्रा कम करनी पड़ रही है। खासकर हरी सब्जियों के बढ़े दाम चिंता बढ़ा रहे हैं। -अनुराधा वत्सल, गृहिणी, टाटीसिलवे टमाटर, भिंडी, करेला और झींगा जैसी रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के दाम काफी बढ़े हैं। परिवार की जरूरत के हिसाब से सब्जी खरीदना अब पहले की तुलना में महंगा हो गया है। बाजार में कीमतें जल्द सामान्य होने की उम्मीद है। -छाया वर्मा, गृहिणी, हरमू बारिश के बाद सब्जियों के भाव लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं। हरी सब्जियों के दाम ज्यादा होने से घर का मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। कम कीमत वाली सब्जियों को प्राथमिकता देनी पड़ रही है। नई फसल आने के बाद राहत मिले तो बेहतर होगा। -ममता देवी, चुटिया सब्जियों की कीमतों में अंतर देखकर खरीदारी करना पड़ रहा है। कई सब्जियां 80 से 100 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। परिवार की जरूरत के अनुसार ही सब्जियां खरीद रही हूं। अगर आवक बढ़ती है तो कीमत कम होने की उम्मीद है। -दिव्याशा, रातू दुकानदार का कोट बारिश से कई जगह सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। इसका असर आवक पर पड़ा है। मंडी में पर्याप्त मात्रा में माल नहीं आने के कारण कुछ सब्जियों के भाव बढ़े हैं। नई फसल की आवक बढ़ने के बाद कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है।