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उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया बदली, रिश्तों के प्रमाण के लिए अब अलग दस्तावेज जरूरी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में जमीन की रजिस्ट्री वगैरह में आधार कार्ड को सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज माना जाएगा। उस पर दर्ज माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य संबंधों की जानकारी को रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। यूपी में संपत्तियों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब रजिस्ट्री कार्यालयों में आधार कार्ड को केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में ही स्वीकार किया जाएगा। आधार कार्ड पर लिखी माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक संबंधों की जानकारी को कानूनी रूप से रिश्ते का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों के लिए नया आदेश जारी कर दिया है। रिश्ते साबित करने के लिए दूसरे कागज देने होंगे। आदेश के अनुसार, जहां भी किसी आवेदन, योजना और विलेख में पारिवारिक संबंध का सत्यापन आवश्यक होगा, वहां आवेदकों को वैध सरकारी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। रिश्ते की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकारी संबंधी अभिलेख या सरकार द्वारा मान्य अन्य दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे। अब तक कई मामलों में संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान लोग आधार कार्ड पर दर्ज पारिवारिक जानकारी के आधार पर रिश्तों का सत्यापन करवा लेते थे। खास तौर पर विरासत, उत्तराधिकार या पारिवारिक संपत्ति के हस्तांतरण के मामलों में आधार कार्ड का उपयोग किया जाता था। आगे से आधार कार्ड दिखाकर ऐसा करना बंद हो जाएगा। आधार कार्ड सिर्फ पहचान और पते का दस्तावेज महानिरीक्षक निबंधन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड केवल किसी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण है, न कि पारिवारिक संबंधों का। इसी स्पष्टीकरण के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। रजिस्ट्री से पहले तैयार कराने होंगे दस्तावेज नए नियम के लागू होने के बाद संपत्ति खरीदारों, विक्रेताओं और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में शामिल लोगों को रजिस्ट्री से पहले अपने संबंधों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने होंगे। यदि किसी मामले में पारिवारिक संबंध साबित करना आवश्यक होगा, तो केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं माना जाएगा। निबंधन विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और गलत दस्तावेजों या रिश्तों के आधार पर होने वाले विवादों पर भी अंकुश लगेगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि रजिस्ट्री कराने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। अब फैमिली प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री में इन नियमों का पालन किया जाएगा।

बिहार में आम महोत्सव का भव्य आगाज, स्वर्णरेखा और मल्लिका किस्म के आम बने आकर्षण

पटना  बिहार के आम उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ने और उपभोक्ताओं तक रसायन-मुक्त आम पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित नाबार्ड आम महोत्सव-2026 का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। पटना के बिहार राज्य सहकारी संघ परिसर में शुरू हुए दो दिवसीय महोत्सव में जहां किसानों को बड़े खरीदारों और निर्यातकों से जुड़ने का अवसर मिला, वहीं आम प्रेमियों ने विभिन्न प्रजातियों के स्वादिष्ट आमों की खरीदारी कर मेले को जीवंत बना दिया। महोत्सव में स्वर्णरेखा और मल्लिका प्रजाति के   बड़े आकार के आम आकर्षण का केंद्र बने रहे। बिहार के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से आयोजित इस महोत्सव का उद्घाटन बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि आम केवल फलों का राजा नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जर्दालु, लंगड़ा, चौसा, दशहरी और फजली जैसी किस्में देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी विशेष गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने किसानों से आधुनिक खेती तकनीक अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और विपणन के नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। मंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसानों और खरीदारों के बीच सीधा संपर्क नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि आम महोत्सव का उद्देश्य किसानों को ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं, थोक व्यापारियों और बड़े खरीदारों तक पहुंचा सकें। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं के तहत बागवानी और जनजातीय विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में 33 वाडी (बगीचा) परियोजनाएं संचालित हैं, इनसे करीब 19 हजार परिवारों को स्थायी आजीविका मिली है। इसके अलावा 302 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए गए हैं, जिनसे लगभग 1.40 लाख किसान जुड़े हैं। कार्बाइड-मुक्त आमों की रही मांग महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता किसानों द्वारा सीधे लाए गए कार्बाइड-मुक्त आम हैं। उपभोक्ताओं ने इन प्राकृतिक तरीके से पकाए गए आमों को हाथोंहाथ लिया। लोगों ने इसे सुरक्षित और स्वादिष्ट विकल्प बताते हुए खरीदारी में विशेष रुचि दिखाई। आयोजकों के अनुसार आम प्रेमियों को बागवानों से सीधे आम खरीदने का अवसर मिल रहा है, जिससे उन्हें ताजा और गुणवत्तापूर्ण फल उचित कीमत पर उपलब्ध हो रहे हैं। स्वर्णरेखा और मल्लिका बने आकर्षण का केंद्र महोत्सव में प्रदर्शित आमों की विविधता ने आगंतुकों को खूब लुभाया। दूधिया मालदा, सफेद मालदा, बम्बईया, आम्रपाली, हेमसागर, जर्दालु, गुलाबखास, बीजू, बेलखास, लाल मोहन और लोकनायक जैसी किस्मों के बीच स्वर्णरेखा और मल्लिका ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। कई स्टालों पर एक किलोग्राम तक वजन वाले बड़े-बड़े आम लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने रहे। आगंतुक पहले इन आमों को देखने पहुंचे, लेकिन स्वाद और गुणवत्ता की जानकारी मिलने के बाद खरीदार भी बन गए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने इन दुर्लभ किस्मों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। आम के साथ अचार की भी खूब बिक्री महोत्सव में केवल ताजे आम ही नहीं, बल्कि विभिन्न किस्मों के आम के अचार भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। महिलाओं और गृहिणियों ने स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए पारंपरिक अचारों में विशेष रुचि दिखाई। इससे किसानों और स्वयं सहायता समूहों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। बड़ी संख्या में पहुंचे किसान और अधिकारी कार्यक्रम में बिहार स्टेट को-ऑपरेशन फेडरेशन के अध्यक्ष विनय कुमार शाही, बिहार स्टेट को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमेश चंद्र चौबे, एनसीसीएफ एवं बिस्कोमान के अध्यक्ष विशाल सिंह, मुजफ्फरपुर को-आपरेटिव बैंक के अध्यक्ष अमरनाथ पांडेय, गोपालगंज को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष महेश राय, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष दिनेश सिंह तथा बिहार ग्रामीण बैंक के महाप्रबंधक दीपक कुमार सहित बैंकिंग एवं सहकारिता क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन नाबार्ड के एजीएम डॉ. अनुपम लाल कुसमाकर ने किया जबकि सहायक महाप्रबंधक नवीन चंद्र झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आज भी जारी रहेगा महोत्सव आम महोत्सव 26 जून तक जारी रहेगा। समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे। आयोजकों ने आम जनता से बड़ी संख्या में पहुंचकर बिहार के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध आमों का स्वाद लेने और किसानों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है

यूट्यूब-व्हाट्सएप जाल में फंसकर 72 लाख गंवाए, चित्तौड़गढ़ में बड़ी साइबर ठगी

चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ में शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ के नाम पर 72 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया है. गोपाल लाल शर्मा को टीना मल्होत्रा नाम की एक महिला ने आईआईएफएल कंपनी की फर्जी सेक्रेटरी बनकर अपना शिकार बनाया. ठगों ने पीड़ित को यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए जाल में फंसाया और फर्जी ऐप डाउनलोड कराया. अधिक मुनाफे का लालच देकर पीड़ित और उनके परिवार के 7 अलग-अलग बैंक खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करा लिए. जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ऐप पर फिशिंग वॉर्निंग आ गई और आरोपियों के नंबर बंद हो गए. यूट्यूब विज्ञापन और व्हाट्सएप ग्रुप से फंसाया दरअसल, पीड़ित गोपाल राशमी उपखंड के पहुंना के रहने वाले हैं. फर्जी सेक्रेटरी टीना मल्होत्रा ने जमा कराई गई राशि पर 5 से 20 फीसदी तक प्रॉफिट होने का झांसा दिया था. इसके बाद 26 मार्च को डीएमए मार्केट ट्रेडिंग अकाउंट रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरवाया गया. जब पीड़ित ग्रुप से जुड़ा तो व्हाट्सएप ग्रुप में उसे यह टिप्स दिए जाते थे कि कौन-सा शेयर कब खरीदना है और कब बेचना है. ठगों ने पैसे ट्रांसफर करने के बाद व्हाट्सएप ग्रुप में ही स्क्रीनशॉट भी भेजे. 25 हजार से शुरू हुई ठगी, 72 लाख तक पहुंचा नुकसान 2 अप्रैल 2026 को पीड़ित ने आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में 25 हजार रुपए ट्रांसफर किए. इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच देकर 2 अप्रैल से 3 जून 2026 के बीच ठगों ने पीड़ित गोपाल और उनके परिवार के एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी, आईसीआईसीआई, कोटक महिंद्रा और फेडरल बैंक समेत अलग-अलग बैंक खातों से कुल 71 लाख 97 हजार 900 रुपए फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा लिए. पीड़ित गोपाल शर्मा ने बताया कि यह राशि होम लोन, पर्सनल लोन और उनकी पत्नी चन्द्रकला और पिता देवी लाल के खातों में जमा पैसे और परिचितों से लेकर जुटाई गई थी, जिसे ठगों ने बताए गए खातों में जमा करा लिया. 26 लाख से ज्यादा का फर्जी प्रॉफिट कुछ ही दिनों में आईआईएफएल वीआईपी ऐप पर 26 लाख 31 हजार 544 रुपए का प्रॉफिट दिखाया गया. जब पीड़ित ने पैसे विड्रॉल करने की रिक्वेस्ट डाली तो ऐप पर फिशिंग वॉर्निंग आ गई और अकाउंट में जीरो बैलेंस दिखाई देने लगा. कैसे खुला ठगी का राज? पीड़ित ने टीना मल्होत्रा समेत ग्रुप के अन्य सदस्यों से संपर्क किया, लेकिन सभी आरोपियों के नंबर बंद मिले. इसके बाद पीड़ित ने आईआईएफएल कंपनी से संपर्क किया, जहां बताया गया कि टीना मल्होत्रा नाम की कोई सेक्रेटरी कंपनी में नहीं है और न ही वह वहां काम करती है. इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि उसके साथ साइबर ठगी हो चुकी है. साइबर थाने में मामला दर्ज ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित ने 24 जून को साइबर पुलिस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस थाना चित्तौड़गढ़ में आईटी एक्ट की धारा 66डी और बीएनएस की धारा 318(4) और 61(2) के तहत टीना मल्होत्रा और आर. वेंकटरमन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. साइबर पुलिस थानाधिकारी मधु कंवर मामले की जांच कर रही हैं.

प्रियंका चोपड़ा का खुलासा: “परफेक्शन नहीं, सच्चाई से बनती है सफलता”

अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा जोनस ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने लंबे सफर और कामयाबी के राज के बारे में खुलकर बात की है। उनका मानना है कि सफलता के लिए हमेशा हर चीज में एकदम सही होना जरूरी नहीं है, बल्कि अपनी कमियों को स्वीकार करना और इंसान बने रहना ज्यादा जरूरी है परफेक्शन नहीं, दर्शकों से दिल का रिश्ता जरूरी एएनआई की खबर के अनुसार, प्रियंका ने बताया कि करियर की शुरुआत में वह हर चीज को परफेक्ट करने की कोशिश करती थीं। लेकिन समय के साथ उन्हें समझ आया कि दर्शक आपकी कमियों से और आपकी सच्चाई से जुड़ते हैं। जब आप अपनी गलती मान लेते हैं और यह स्वीकार करते हैं, तब फैंस के साथ दिल का रिश्ता बनता है। 'ना' सुनने पर दोगुनी ताकत से काम करना प्रियंका ने अपनी कामयाबी का एक बड़ा कारण रिजेक्शन का डटकर सामना करना बताया। उन्होंने कहा, 'मैं बहुत महत्वाकांक्षी हूं। अगर मुझे किसी काम के लिए न कहा जाता है, तो मेरा मन उस काम को और भी ज्यादा करने का करता है।' प्रियंका ने हाल ही में आई अपनी फिल्म 'द ब्लफ' की सफलता को लेकर खुलकर बात की। इसमें उन्होंने एक महिला समुद्री डाकू का किरदार निभाया है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में महिलाओं के आगे बढ़ने की एक सीमा तय कर दी जाती है। ऐसे में मौकों का इंतजार करने के बजाय खुद पहल करनी पड़ती है। यही वजह है कि उन्होंने एक्टिंग के साथ-साथ फिल्मों का निर्माण करना भी शुरू किया। दूसरों के लिए मददगार बनना जब प्रियंका ने हॉलीवुड में कदम रखा, तो वह वहां किसी को नहीं जानती थीं। शुरुआत में उन्हें मुख्य भूमिकाएं नहीं मिल रही थीं, क्योंकि स्टूडियोज किसी भारतीय कलाकार को मुख्य रोल में नहीं सोचते थे। इसलिए उन्होंने खुद अपनी फिल्में प्रोड्यूस करना शुरू किया। अब वह अपने प्रोडक्शन हाउस के जरिए नए कलाकारों और क्रिएटर्स को आगे बढ़ने के लिए एक प्लेटफॉर्म देना चाहती हैं। इन फिल्मों में नजर आएंगी प्रियंका प्रियंका तेलुगु फिल्म 'वाराणसी' में नजर आएंगी। इसे करीब 200 भाषाओं में डब किया जाएगा। इसमें प्रियंका के साथ साउथ सुपरस्टार महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन नजर आएंगे। इस फिल्म का निर्देशन एसएस राजामौली करेंगे। इसके अलावा प्रियंका अभिनेता ऑरलैंडो ब्लूम के साथ फिल्म 'रीसेट' में नजर आएंगी।

विधानसभा चुनाव से पहले यूपी भाजपा में बड़ा फेरबदल, नई कार्यकारिणी में कई नए चेहरे शामिल

 लखनऊ  विधानसभा चुनाव से पहले कील कांटे दुरुस्त करने में जुटी भाजपा ने बड़े बदलावों के साथ प्रदेश इकाई घोषित कर दी है। चुनावी वर्ष को देखते हुए पिछली बार की तुलना में इस बार 64 सदस्यीय बड़ी टीम बनाई गई है। आठ महामंत्री, 19 उपाध्यक्ष, 19 मंत्री, छह क्षेत्रीय अध्यक्ष व छह मोर्चों के अध्यक्ष बनाए गए हैं। कई दिग्गजों सहित आधे पदाधिकारियों को संगठन से मुक्त कर नए चेहरों पर भरोसा किया गया है। जातीय समीकरणों का ध्यान देते हुए पिछड़े और अनुसूचित समाज को विशेष वरीयता दी गई है। छह में चार क्षेत्रीय अध्यक्ष ओबीसी समाज से हैं। महामंत्रियों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ की गई है, वहीं 16 की जगह अब 19 उपाध्यक्ष होंगे। कई नए और चौंकाने वाले नाम शामिल किए गए हैं। पूर्व मंत्री सुरेश राणा और नवाब सिंह नागर को भी संगठन में बड़ा दायित्व दिया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह की जगह नीरज सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर उन्हें राजनीतिक पारी शुरू करने का अवसर दिया गया। भाजपा ने इसमें क्षेत्रीय से ज्यादा जातीय संतुलन पर फोकस किया है। जातीय समीकरणों के पैमाने पर देखें तो 27 सामान्य चेहरों में 12 ब्राह्मण, सात क्षत्रिय, चार भूमिहार, दो वैश्य व एक-एक कायस्थ और त्यागी हैं। किस वर्ग को मिला कितना अवसर? समाज में सबसे बड़ा करीब 55 प्रतिशत समूह ओबीसी का माना जाता है, जिनको सबसे ज्यादा 29 पदों पर भागीदारी दी गई है। इसमें सर्वाधिक तीन जाट, दो-दो यादव, कुर्मी, पाल, गुर्जर व लोधी को स्थान दिया गया है। साथ ही एक-एक पद पर कुशवाहा, मौर्य, बिंद, शिवहरे, विश्वकर्मा, निषाद, गिरी, राजभर, सैंथवार, सैनी, चौरसिया, तेली, कलार व लोनिया चौहान को अवसर दिया गया है। अनुसूचित वर्ग में पासी को सबसे ज्यादा तीन पद दिए गए हैं, जबकि कोरी, वाल्मीकि, जाटव व एसटी के रूप में गोंड को भी अवसर दिया गया है। वहीं, 64 में 13 पदों पर महिलाओं को दायित्व दिया गया है, जो पार्टी के संकल्प 33 प्रतिशत की तुलना में कमतर प्रतिनिधित्व है। यूजीसी नियमों से उपजे आक्रोश से लेकर कई अन्य विषयों पर ब्राह्मणों में असंतोष उभरा था, जिसको साधने के लिए प्रदेश इकाई में उन्हें विशेष वरीयता दी गई है। अभिजात मिश्रा को जहां महामंत्री बनाया गया, वहीं बृज बहादुर, अर्चना मिश्रा, शंकर गिरी, अंकुर शर्मा, यतेंद्र शर्मा, रजनी पांडे के अलावा अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में अवधेश द्विवेदी को अवसर दिया गया, वहीं कार्यालय मंत्री व सह मंत्री और अन्य भूमिकाओं में कई ब्राह्मणों को समायोजित किया गया। आठ से तीन महामंत्री अभिजात, उपेंद्र रावत व शंकर लोधी अवध क्षेत्र के हैं, जबकि पश्चिम क्षेत्र से कोई चेहरा महामंत्री नहीं बनाया गया। धार्मिक व राजनीतिक केंद्र के रूप में उभरे ब्रज क्षेत्र से रामप्रताप सिंह व राजेश चौधरी को महामंत्री बनाने के साथ ही सबसे ज्यादा नौ पदाधिकारियों को स्थान दिया गया है। पश्चिम क्षेत्र से दिग्गज क्षत्रिय चेहरा सुरेश राणा को हरियाणा व बंगाल चुनाव में बेहतर जिम्मेदारी निभाने का फायदा मिला और उनकी उपाध्यक्ष पद पर लंबे समय बाद वापसी हुई। दिल्ली आइआइटी से पढ़े लिखे और पश्चिम क्षेत्र के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल को युवा जाट नेता के रूप में दोबारा उपाध्यक्ष बनाया गया है। प्रदेश संगठन में लंबे समय तक पदाधिकारी व कई जिलों में चुनावी जमीन बनाने में भूमिका निभाने वाले मेरठ के जाट चेहरे देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया गया है। सत्यपाल सैनी के रूप में पश्चिम में बड़े जातीय समूह में संदेश देने का प्रयास किया गया है। मथुरा में मांट के विधायक जाट चेहरा राजेश चौधरी को प्रदेश महामंत्री जैसा अहम पद दिया गया है। जाट समाज को गुर्जरों से ज्यादा प्रतिनिधित्व मिला। पिछली टीम में सुरेंद्र नागर के रूप में गुर्जर चेहरे को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय मंत्री बना दिया गया। इस बार महामेधा नागर को मंत्री बनाया गया है। हालांकि, पश्चिम क्षेत्र की कमान नवाब सिंह नागर को देकर पार्टी ने बड़ा दांव चला है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र नीरज सिंह के मिलनसार व्यवहार व उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया है। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के छह माह बाद गठित हुई कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने दिसंबर में कार्यभार संभाला। तब से ही नई प्रदेश इकाई बनाने की चर्चा चल पड़ी, लेकिन संगठन छह माह बाद ही बन सका। प्रदेश इकाई में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ल, सुभाष यदुवंश, अनूप गुप्ता, अमरपाल मौर्य, त्रियंबक त्रिपाठी, अंजुला महौर, विजय बहादुर पाठक, संतोष सिंह, कांता कर्दम, डा.चंद्रमोहन, सुनीता दयाल, सलिल विश्नोई, मीना चौबे समेत दर्जनभर नामों को स्थान नहीं मिला। रदेश उपाध्यक्ष के रूप में सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, डा.धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, डा.कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता को अवसर दिया गया है। मंत्री पद के लिए विजय शिवहरे, बसंत त्यागी, शिवभूषण सिंह, सहजानंद राय, अंकुर शर्मा, अनिल यादव, अवधेश श्रीवास्तव, विजय राजभर, प्रमेन्द्र जांगड़ा, किरण लोधी निषाद, राकेश बिंद मंत्री, संचिता सिंह चौहान (लुनिया), रजनी पांडेय, राहुल वाल्मीकि, महामेधा नागर दीपमाला संतोषी, सुहासिनी जायसवाल, यतेंद्र शर्मा व आकांक्षा सोनकर के नाम पर मुहर लगी है। भारत दीक्षित कार्यालय मंत्री व अतुल अवस्थी व लक्ष्मण सिंह कार्यालय सह-मंत्री होंगे। दिनेश प्रताप सिंह मुख्य प्रवक्ता बनाए गए हैं, जबकि मनीष दीक्षित प्रदेश मीडिया संयोजक बने रहेंगे। हिमांशु राज पंडित को प्रदेश सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है। सभी छह क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल को पिछड़ा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनकी जगह क्षेत्रीय महामंत्री रहे रामकिशोर साहू को क्षेत्रीय अध्यक्ष की कमान दी गई। ब्रज के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्गविजय शाक्य को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, उनकी जगह बरेली के पूर्व जिलाध्यक्ष पूरण लाल लोधी क्षेत्रीय अध्यक्ष होंगे। पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेंद्र शिशौदिया किसी इकाई में जगह नहीं बना सके। उनकी जगह गुर्जर चेहरा व दो बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे नवाब सिंह नागर क्षेत्रीय अध्यक्ष बने हैं। अवध के क्षेत्रीय अध्यक्ष कमलेश मिश्र प्रदेश इकाई से लेकर … Read more

Mysaa: रश्मिका मंदाना की फिल्म से निधि सिंह का फर्स्ट लुक आया सामने, कैरेक्टर पोस्टर वायरल

मुंबई  पैन-इंडिया स्टार रश्मिका मंदाना की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मैसा' से अभिनेत्री निधि सिंह का नया कैरेक्टर पोस्टर रिलीज किया गया है। मेकर्स ने निधि सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनका यह पोस्टर रिलीज करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।पोस्टर में निधि सिंह का गुस्से से भरा और निडर अंदाज नजर आ रहा है। पोस्टर साझा करते हुए मेकर्स ने लिखा, "हर आत्मा का जन्म कोमल होने के लिए नहीं होता। कुछ का निर्माण संघर्षों को सहने के लिए किया जाता है। टीम #मैसा की तरफ से बेहद प्रतिभाशाली निधि सिंह को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं। शूटिंग जारी है। इस 2026 में सिनेमाघरों में।" 'मैसा' में रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में उनका अब तक का सबसे अलग और दमदार अवतार देखने को मिलेगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों के बीच खासा उत्साह है। अनफॉर्मूला फिल्म्स के बैनर तले निर्मित और रवींद्र पुल्ले के निर्देशन में बन रही 'मैसा' आदिवासी क्षेत्रों की पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर फिल्म है। फिल्म की शूटिंग जारी है और इसके वर्ष 2026 में सिनेमाघरों में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने की संभावना है।

श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद बैठक, 12 प्रस्तावों पर लगी मुहर

कुरुक्षेत्र  श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान की अध्यक्षता में अकादमिक परिषद (एकेडमिक काउंसिल) की 10वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में कुलसचिव डा. कृष्ण कांत गुप्ता ने परिषद के समक्ष 12 प्वाइंट रखे, जिन पर विस्तार से चर्चा के बाद बहुमत से पास कर दिए गए। बैठक में पिछली बैठक की कार्रवाई की पुष्टि, एक्शन टेकन रिपोर्ट, गृहिणियों के लिए तीन माह के स्वास्थ्य एवं योग पाठ्यक्रम को अनुमोदन दिया गया। वहीं बेचलर इन नेचुरोपैथी एंड योग एवं डिप्लोमा इन नेचुरोपैथी एंड योग के पाठ्यक्रम तैयार करके उन्हें हरियाणा सरकार के पास भेजकर कालेजों में शुरू करने बारे भी चर्चा हुई। वहीं बीएससी इन योगा को अगले वर्ष आयुर्वेदिक अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में आरंभ करने का अनुमोदन भी दिया गया। बीएएमएस के नए परीक्षा पैटर्न, डी-फार्मेसी (आयुर्वेद) एवं पंचकर्म सहायक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के संशोधित सिलेबस को शुरू करने बारे अनुमोदन दी गई। बोर्ड आफ होम्योपैथी के डायरेक्टर की डिमांड पर हरियाणा में होम्योपैथिक फार्मेसी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम एवं मानकों का मसौदा तैयार किया जाएगा इस प्वाइंट को भी सरकार के पास अनुमति के लिए भेजा जाएगा। विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए एमओयू, विश्वविद्यालय के कुलगीत, संशोधित विजन और मिशन सहित अन्य प्रस्तावों पर विचार-विमर्श कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रशासनिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। बीएससी इन योग जल्द शुरू होगा विश्वविद्यालय में कुलपति प्रोफेसर वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि विश्वविद्यालय के स्वस्थवृत्त विभाग की ओर से गृहिणियों के लिए तीन माह का स्वास्थ्य एवं योग पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। प्रतिदिन दो घंटे की कक्षाओं के माध्यम से गृहिणियों को आयुर्वेद, संतुलित आहार-विहार, योग एवं स्वस्थ जीवनशैली की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आयुष विभाग, हरियाणा की मांग पर प्राकृतिक चिकित्सा का नया पाठ्यक्रम भी तैयार किया जा रहा है और विश्वविद्यालय में जल्द ही बीएससी इन योग पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किया जाएगा।  शिक्षक परिषद के समक्ष रखें सुझाव, आयोग को भेजेंगे : कुलपति कुलपति ने कहा कि बीएएमएस का पाठ्यक्रम राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआइएसएम) द्वारा निर्धारित किया जाता है, लेकिन यदि शिक्षकों को उसमें किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता महसूस होती है तो वे अपने सुझाव अकादमिक परिषद के समक्ष रखें, ताकि उन्हें संबंधित आयोग तक भेजा जा सके। उन्होंने बताया कि डी-फार्मेसी (आयुर्वेद) के पाठ्यक्रम में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिन्हें स्वीकृति मिलने के बाद लागू किया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड आफ होम्योपैथी द्वारा प्रस्तावित होम्योपैथिक फार्मेसी डिप्लोमा के पाठ्यक्रम एवं मानकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई, जिसे अंतिम रूप देकर सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की भी समीक्षा की गई। कुलपति ने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव के बेहतर अवसर उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई दिशा मिल रही है। परिषद की बैठक में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर रणधीर सिंह, प्रोफेसर आशीष मेहता, परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर हेतल दावे, हरियाणा के राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य कुवि के एसोसिएट प्रोफेसर डा. सुखबीर लाल, प्रोफेसर जितेश पंडा, उप कुलसचिव अतुल गोयल, प्रोफेसर सतीश वत्स, प्रोफेसर आशु, प्रोफेसर अमित कटारिया, प्रोफेसर रविराज मौजूद रहे।

एसआईआर प्रक्रिया में फर्जी प्रमाणपत्रों पर कार्रवाई के आदेश, मतदाता सूची सुधार पर जोर

 रांची राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर को लेकर फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई के निर्देश सभी जिलों के उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एसआइआर की प्रक्रिया में कई प्रकार के दस्तावेज की आवश्यकता मतदाताओं को हो सकती है। पाकुड़ एवं गढ़वा जिले में ऐसे मामलों की सूचना विभिन्न माध्यमों से आई है। इसलिए ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कानून की संगत धाराओं के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भी कहा है कि एसआइआर के दौरान जितने भी दस्तावेज जमा किए जाएंगे, उनका सत्यापन का दायित्व जिला निर्वाचन पदाधिकारी का है। इसलिए एसआइआर के लिए कोई भी नागरिक फर्जी अनधिकृत दस्तावेज न बनवाए और न ही ऐसा प्रयास किसी के द्वारा किया जाए। उन्होंने इसका पूर्णरूप से प्रचार-प्रसार विभिन्न माध्यमों से करने को कहा है। साथ ही ऐसे मामलों में उपायुक्तों को पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने राजनीतिक दलों से की सहयोग की अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने गुरुवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर उत्पन्न होनेवाली शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर राजनीतिक दलों द्वारा उठाई गई विभिन्न पृच्छाओं और शंकाओं का समाधान पीपीटी के माध्यम से किया। उन्होंने कहा कि एसआइआर का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और किसी भी अयोग्य व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआइआर की चरणबद्ध विस्तृत कार्ययोजना और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश को साझा किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण एवं मुद्रण का कार्य 29 जून तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 30 जून से 29 जुलाई तक बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर भ्रमण कर गणना प्रपत्र भरने का का कार्य किया जाएगा। मतदान केंद्रों का युक्तीकरण 29 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद पांच अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन होगा, जिस पर चार सितंबर तक दावे एवं आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी। दावों और आपत्तियों के निष्पादन के बाद सात अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। उनके अनुसार, 30 जून से शुरू होने वाले गणना चरण के दौरान बीएलओ अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर नागरिकों को आंशिक रूप से पहले से भरा हुआ गणना प्रपत्र दो प्रतियों में वितरित करेंगे। यदि कोई घर बंद मिलता है, तो बीएलओ को प्रपत्र इकट्ठा करने के लिए कम से कम तीन बार जाना होगा। इस चरण के शुरुआती दिनों में मतदान केंद्रों पर कोई कैंप नहीं लगेगा, बल्कि यह सेवा पूरी तरह घर-घर जाकर दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि मतदाताओं से दस्तावेजों की आवश्यकता को कम करने के लिए ''सेल्फ'' या ''पैरेंटल'' मैपिंग की जा रही है। यदि किसी मतदाता का नाम पिछले एसआइआर रोल में दर्ज है, तो उसे किसी अन्य दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और सिविल व सैन्य क्षेत्र के सभी वरिष्ठ अधिकारियों की पहचान पहले से कर प्राथमिकता के आधार पर उनकी गणना की जाएगी। मैपिंग के दौरान सामने आने वाली 15 प्रकार की विसंगतियों को दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

आउटसोर्स नौकरी का इंतजार बढ़ा, यूपी में अगस्त के बाद ही शुरू होंगी नई भर्तियां

लखनऊ  उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग कार्मिक के रूप में काम करने की राह देख रहे युवाओं को अगस्त के बाद ही कोई मौका मिलेगा आउटसोर्स सेवा निगम का पोर्टल तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कारपोरेशन लि. (यूपीडेस्को) ने अगस्त तक का लिया है। पोर्टल तैयार हो जाने के बाद ही निगम आउटसोर्स के माध्यम से भर्तियां करेगा। पिछले वर्ष 20 सितंबर को आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के लिए शासनादेश जारी किया गया था।जिसमें आउटसोर्सिंग की भर्तियों के लिए चार श्रेणिया बनाई गई हैं। श्रेणी एक के पदों के लिए 40 हजार रुपये, श्रेणी दो के पदों 25 हजार रुपये, श्रेणी तीन के पदों के लिए 22 हजार रुपये और श्रेणी चार के आउटसोर्स कार्मिकों के लिए 20 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है। कंपनी अधिनियम के तहत आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया जा चुका है। बोर्ड आफ डायरेक्टर्स का चयन किया जा चुका है। इसके साथ ही निगम के प्रबंध निदेशक और कार्यकारी निदेशक की तैनाती भी की जा चुकी है। निगम के लिए पिकप भवन में कार्यालय बनाया जा रहा है। इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी पोर्टल नहीं बन पाने की वजह से आउटसोर्स की भर्तियां निगम के माध्यम से नहीं हो पा रही हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक निगम का पोर्टल तैयार करने के लिए यूपीडेस्को ने अगस्त तक का समय लिया है।पोर्टल बन जाने के बाद ही निगम भर्ती की दिशा में आगे बढ़ेगा। सितंंबर से निगम आउटसोर्स के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने की स्थिति में आ जाएगा।  

इम्तियाज अली की ‘मैं वापस आऊंगा’ ने दूसरे हफ्ते में भी बॉक्स ऑफिस पर मचाया धमाल

डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म मैं वापस आऊंगा ने दूसरे हफ्ते में ऐसा कमाल किया है, जो इसकी रिलीज के दिन शायद ही किसी ने सोचा होगा. दूसरे हफ्ते में इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसी पकड़ बनाई है, जो शुक्रवार से इसके सामने आई नई फिल्म कॉकटेल 2 भी नहीं बना पाई. वैसे इन दोनों फिल्मों का एक बहुत दिलचस्प इनडायरेक्ट कनेक्शन भी है. 2012 में आई ओरिजिनल कॉकटेल फिल्म के राइटर इम्तियाज अली थे, लेकिन इसके सीक्वल के राइटर वह नहीं हैं. इम्तियाज की लिखी फिल्म का सीक्वल कॉकटेल 2 जब थिएटर्स में पहुंचा, तो उनकी ही लिखी-डायरेक्ट की हुई मैं वापस आऊंगा एक हफ्ते पहले से बॉक्स ऑफिस पर मौजूद थी. लेकिन इम्तियाज की फिल्म ने दूसरे हफ्ते में होने के बावजूद, कॉकटेल 2 की कमाई में अच्छी-खासी सेंधमारी कर दी. मैं वापस आऊंगा का तगड़ा बॉक्स ऑफिस होल्ड इम्तियाज की फिल्म ने बहुत स्लो शुरुआत के बाद, जनता की तारीफों के दम पर धीरे-धीरे अपने दर्शक जुटाए और इस काम में पहला हफ्ता लगा. पहले पूरे हफ्ते में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 12.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था, जबकि दूसरे वीकेंड के तीन दिनों में ही मैं वापस आऊंगा ने बॉक्स ऑफिस पर 12 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर डाला. लेकिन फिल्म ने असली कमाल किया दूसरे हफ्ते के वर्किंग डेज में. सैकनिल्क का डेटा बताता है कि मैं वापस आऊंगा ने गुरुवार को 2.30 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है. इतना कलेक्शन फिल्म ने पहले हफ्ते में सिर्फ एक दिन किया था. गुरुवार के कलेक्शन के साथ, पिछले चार वर्किंग डेज में मैं वापस आऊंगा ने 10.5 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर डाला. यानी पिछले शुक्रवार से शुरू हुए बॉक्स ऑफिस हफ्ते में, वीकेंड के मुकाबले वर्किंग डेज में मैं वापस आऊंगा की कमाई मात्र 12.5% गिरी, जबकि इसी हफ्ते में नई फिल्म कॉकटेल 2 का होल्ड भी इससे बहुत कमजोर रहा. स्लो पड़ती जा रही कॉकटेल 2 शुक्रवार को रिलीज हुई कॉकटेल 2 ने पहले वीकेंड में बॉक्स ऑफिस पर 47.5 करोड़ रुपये का दमदार कलेक्शन किया था, लेकिन मंडे से ही इसका कलेक्शन सिंगल डिजिट में आ गया. मंगलवार को सस्ते टिकट का ऑफर भी कमाई नहीं बढ़ा पाया और बुधवार को भी कमाई गिरी. गुरुवार का कलेक्शन 4.15 करोड़ रुपये रहा, जो बुधवार के 5.25 करोड़ रुपये से भी कम है. सोमवार से गुरुवार तक, वर्किंग डेज में कॉकटेल 2 का कलेक्शन करीब 27 करोड़ रुपये हुआ है. यानी वीकेंड के मुकाबले इसके वर्किंग डेज का कलेक्शन करीब 43% कम हुआ है. दोनों फिल्मों की तुलना ही बताती है कि जहां मैं वापस आऊंगा ने दूसरे हफ्ते में, पहले हफ्ते से भी ज्यादा दम दिखाया, वहीं दर्शकों के इसकी तरफ भागने से नई फिल्म कॉकटेल 2 को भी नुकसान हुआ जो पहले हफ्ते में लगातार धीमी पड़ती गई. अब थिएटर्स में अक्षय कुमार की वेलकम टू द जंगल नई रिलीज बनकर पहुंच चुकी है और इसकी कॉमेडी की तारीफ हो रही है. देखने वाली बात होगी कि तीसरे हफ्ते में मैं वापस आऊंगा और दूसरे हफ्ते में कॉकटेल 2 बॉक्स ऑफिस पर कितना बच पाती हैं.