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चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने रचा इतिहास, 6 दिन में बनाए 17 हजार से ज्यादा टैबलेट

चीनी रोबोटिक्स कंपनी एजीबॉट ने इतिहास रच दिया है। दरअसल इस कंपनी के ह्यूमनॉइड रोबोट्स को एक फैक्ट्री में टैबलेट बनाने और उनकी जांच करने वाली लाइव प्रोडक्शन लाइन पर काम करते हुए लाइव दिखाया गया। खास बात रही कि ऐसा पूरे 6 दिन लाइव स्ट्रीम के जरिए पूरी दुनिया के सामने चला। इस दौरान 8 रोबोट्स ने बिना रुके ठीक वैसे ही काम किया जैसे कि इंसान किसी फैक्ट्री में करते। हालांकि, फर्क यह रहा कि ये रोबोट्स इंसानों की उल्ट बिना थके लगातार काम करते रहे। 99.99% की सक्सेस रेट से किया काम 6 दिन तक लाइव स्ट्रीमिंग नानचांग में लॉन्गचीयर टेक्नोलॉजी की फैक्ट्री से हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन रोबोट्स ने फैक्ट्री में बिना रुके 64 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार काम किया। इन रोबोट्स ने 6 दिनों की लाइव स्ट्रीमिंग में कुल 17,625 टैबलेट तैयार किए। इससे भी ज्यादा मजेदार बात रही कि रोबोट्स का सक्सेस रेट यानी कि काम को सही तरह से करने की दर 99.99% रही। कहने का मतलब है कि रोबोट्स से ना के बराबर गलतियां हुईं। रोबोट्स ने किए क्या-क्या काम? फैक्ट्री में जिन रोबोट्स को काम पर लगाया गया था वे एजीबॉट के G2 ह्यूमनॉइड मॉडल थे। इन रोबोट्स ने 6 दिनों तक इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। काम की बात करें, तो इन रोबोट्स ने बलेट की जांच करने यानी कि इन्स्पेक्शन, खराब पीस को अलग करने यानी कि डिफेक्ट सॉर्टिंग और सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने यानी कि मटेरियल ट्रांसपोर्ट का काम किया। इस तरह से 6 दिनों में इन रोबोट्स ने कुल 64,828 काम पूरे किए। लैब नहीं असल दुनिया में किया कमाल इन रोबोट्स के प्रदर्शन की तारीफ इसलिए की गई क्योंकि 6 दिनों तक रोबोट्स ने किसी लैब में नहीं बल्कि असल दुनिया में काम किया। इसके साथ ही ये रोबोट्स समय-समय पर जरूरत के अनुसार खुद ढालते रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार(REF.), कंपनी का कहना है कि वे दुनिया को यह दिखाना चाहती थी कि असल इंडस्ट्रियल माहौल में रोबोट्स के शरीर में मौजूद AI से काम लेने कि लिए किस दर्जे की तैयारी और ट्रांसपेरेंसी चाहिए होती है। फैक्ट्रियों में काम संभालने को तैयार रोबोट्स इस कंपनी ने लाइव स्ट्रीमिंग में रोबोट्स के सफल प्रदर्शन के बाद एलान किया है कि उनका 15,000 वां रोबोट बनकर तैयार है और उसे पार्टनर कपनी लॉन्गचीयर को सौंप दिया है। खास बात है कि जहां पहले 1 से 5 हजार रोबोट्स बनाने में एक साल लगता था वहीं अब 5 से 10 हजार रोबोट तीन महीने में बनाए जा सकते हैं। यह इवेंट Figure AI कंपनी के उस लाइव-स्ट्रीम के कुछ महीनों बाद हुआ है, जिसमें उनके फिगर 03 रोबोट्स ने बिना किसी खराबी के करीब 2.5 लाख पैकेजों को प्रोसेस किए थे।  

झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, अब प्रोबेशन खत्म होने के बाद ही मिलेगा प्रमोशन का लाभ

रांची झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. अब राज्यकर्मी प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद ही प्रोन्नति के लिए पात्र होंगे. यानी प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद ही प्रोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि की गणना शुरू होगी. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में संशोधित संकल्प जारी कर दिया. इस प्रस्ताव को दो जुलाई को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिली थी. प्रोबेशन के बाद ही जुड़ेगी प्रोन्नति की सेवा अवधि सरकार की ओर से जारी संशोधित संकल्प के अनुसार, जिन मूल पदों पर दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि निर्धारित है और अगले पद पर प्रोन्नति के लिए दो या तीन वर्ष की सेवा अवधि तय है, वहां अब दोनों अवधियां अलग-अलग मानी जाएंगी. यानी पहले कर्मचारी को प्रोबेशन अवधि पूरी करनी होगी, उसके बाद ही प्रोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि की गणना शुरू होगी. चार साल बाद मिलेगी पहली प्रोन्नति नये प्रावधान के तहत यदि किसी कर्मचारी का मूल पद 4800 रुपये ग्रेड पे का है और प्रथम प्रोन्नति 5400 रुपये ग्रेड पे वाले पद पर होनी है, जहां प्रोन्नति के लिए दो वर्ष की सेवा अवधि निर्धारित है तथा मूल पद पर दो वर्ष का प्रोबेशन है, तो अब कर्मचारी को पहली प्रोन्नति के लिए कुल चार वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी. पहले दो वर्ष प्रोबेशन में बीतेंगे और उसके बाद दो वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने पर ही वह प्रोन्नति के लिए पात्र होगा. सरकार ने बताया संशोधन का कारण राज्य सरकार ने संशोधित संकल्प में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में कई सेवाओं में प्रोबेशन अवधि और प्रोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि लगभग एक साथ पूरी हो रही थी, जो प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया. इसी विसंगति को दूर करने के उद्देश्य से नियमों में संशोधन किया गया है. जहां नियम नहीं, वहां लागू होगा संशोधित संकल्प सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्रेड पे के बीच प्रोन्नति की अवधि वर्ष 2014 के संकल्प में निर्धारित नहीं है, वहां बीच के सभी स्तरों की निर्धारित सेवा अवधि जोड़कर पात्रता तय की जाएगी. वहीं जिन सेवा नियमावलियों में पहले से प्रोन्नति की अलग व्यवस्था है, वहां वही नियम प्रभावी रहेंगे. जिन सेवाओं में ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां वर्ष 2014 के संशोधित संकल्प के प्रावधान लागू होंगे. सचिवालय सेवा संघ ने किया विरोध इधर, झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार के इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर संशोधित संकल्प को तत्काल निरस्त करने का आग्रह किया है. संघ का कहना है कि वर्ष 2014 में जारी संकल्प संख्या-3286 का उद्देश्य विभिन्न सेवा संवर्गों में प्रोन्नति के लिए सेवा अवधि में एकरूपता लाना था. नए संशोधन से यह व्यवस्था प्रभावित होगी और अलग-अलग सेवा संवर्गों के बीच फिर असमानता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. 2014 के बाद अब बदलाव की क्या जरूरत: संघ संघ ने सवाल उठाया है कि वर्ष 2014 से लागू व्यवस्था में 12 वर्ष बाद संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी. संघ के अनुसार, संशोधित नियम लागू होने पर अन्य सेवाओं के कर्मचारियों को जहां लेवल-7 से लेवल-8 में प्रोन्नति के लिए केवल दो वर्ष की प्रतीक्षा करनी होगी, वहीं झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों को आठ वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा. संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि संशोधित नियम पर तत्काल रोक लगाकर पुराने प्रावधान को ही लागू रखा जाए, ताकि सभी सेवा संवर्गों के कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके.

ग्रीन टी से बनाएं नेचुरल एंटी-एजिंग टोनर, झुर्रियां और दाग-धब्बों में मिलेगी राहत

उम्र बढ़ना एक नेचुरल प्रोसेस है, जिसे रोका नहीं जा सकता. बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और स्किन में ढीलापन आना आम बात है. इन्हें कम करने के लिए कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स या पार्लर ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में रखी ग्रीन टी भी आपकी स्किन को ग्लोइंग और यंग बनाए रखने में मदद कर सकती है. आज हम आपको घर पर ग्रनी टी से नेचुरल एंटी-एजिंग टोनर बनाना बताएंगे, जिसे आप बेहद आसानी से घर पर तैयार कर सकते हैं. यह टोनर न सिर्फ आपकी लटकती स्किन को टाइट करने में मदद करेगा, बल्कि दाग-धब्बों को दूर कर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने में मदद करेगा. ग्रीन टी से टोनर बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है? 2 कप पानी 2 छोटे चम्मच ग्रीन टी की पत्तियां 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल ग्रीन टी से एंटी-एजिंग टोनर कैसे बनाएं?     सबसे पहले एक पैन में 2 कप पानी डालकर उबाल लें.     जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तब उसमें ग्रीन टी की पत्तियां डाल दें.     अब पैन को ढक दें और तब तक उबालें, जब तक पानी घटकर लगभग आधा रह जाए.     इसके बाद मिश्रण को छान लें और पूरी तरह ठंडा होने दें. जब यह ठंडा हो जाए, तब इसमें गुलाब जल डालकर अच्छी तरह मिला लें.     अब तैयार टोनर को एक साफ स्प्रे बोतल में भरकर फ्रिज में रख लें. आपका नेचुरल एंटी-एजिंग टोनर इस्तेमाल के लिए तैयार है. टोनर का इस्तेमाल चेहरे पर कैसे करें? सबसे पहले चेहरे को किसी अच्छे फेसवॉश से अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद टोनर को सीधे चेहरे पर स्प्रे करें. अगर चाहें तो कॉटन पैड की मदद से भी इसे लगा सकते हैं. बेहतर रिजल्ट के लिए इसका इस्तेमाल दिन में दो बार करें. ग्रीन टी से बने टोनर क्यों है इतना खास ग्रीन टी से बना यह टोनर नेचुरल एंटी-एजिंग की तरह काम करता है. यह स्किन को लंबे समय तक रिफ्रेश और हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है. इसके रेगुलर इस्तेमाल से फाइन लाइन्स, झुर्रियों, पिग्मेंटेशन और डार्क स्पॉट्स की समस्या कम होती है. साथ ही यह चेहरे पर नेचुरल ग्लो बनाए रखने में भी मदद करता है. इन बातों का रखें ध्यान     टोनर को हमेशा साफ और सूखी स्प्रे बोतल में रखें.     इसे फ्रिज में स्टोर करें और 5 से 7 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लें.     अगर आपकी काफी सेंसिटिव है तो पहले पैच टेस्ट जरूर करें.     अगर टोनर लगाने के बाद जलन, खुजली या एलर्जी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें.  

रात 11 बजे के रोमांच में गफ की जीत, बेंचिच को हराकर अंतिम आठ में बनाई जगह

लंदन महिला सिंगल्स में सातवीं वरीयता प्राप्त अमेरिका की कोको गफ ने रविवार देर रात स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेंचिच को 4-6, 6-3, 6-4 से हराकर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। कोर्ट नंबर-1 की छत बंद होने के बीच खेला गया यह मुकाबला रात 11 बजे के निर्धारित ‘कर्फ्यू’ से महज दो मिनट पहले समाप्त हुआ। विंबलडन में रात 11 बजे के बाद खेल जारी रखने की अनुमति नहीं होती लंबे इंतजार के बाद कोर्ट पर उतरी दोनों खिलाड़ी शुरुआत में अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में नहीं दिखीं। 11वीं वरीयता प्राप्त बेंचिच ने पहला सेट अपने तीसरे सेट प्वाइंट पर जीत लिया, जब गफ ने रिटर्न नेट में मार दिया। हालांकि इसके बाद गफ ने शानदार वापसी की। दूसरे सेट में गफ ने की वापसी दूसरे सेट में उन्होंने दो बार बेंचिच की सर्विस तोड़ी और शानदार ड्रॉप शॉट तथा बेहतरीन लॉब की मदद से मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचाया। तीसरे सेट में दो बार की ग्रैंडस्लैम चैंपियन गफ ने आक्रामक खेल दिखाते हुए कोर्ट के कोनों का शानदार इस्तेमाल किया और बेंचिच पर लगातार दबाव बनाए रखा। मैच के अंतिम क्षणों में समय तेजी से बीत रहा था, लेकिन गफ ने एक दमदार स्मैश से मैच प्वाइंट बनाया और फिर तेज सर्विस के जरिए मुकाबला अपने नाम कर लिया, जिसका जवाब बेंचिच नहीं दे सकीं। 22 वर्षीय गफ ने मैच में 35 विनर्स लगाए, जबकि बेंचिच केवल 19 विनर्स ही लगा सकीं। हालांकि गफ ने 46 अनफोर्स्ड एरर और नौ डबल फॉल्ट भी किए। जीत के बाद गफ ने कहा, आखिरकार क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर मैं बेहद खुश हूं। यह मेरे लिए लंबे इंतजार के बाद मिली सफलता है। उन्होंने कहा कि अंतिम गेम में उनकी नजर लगातार घड़ी पर थी क्योंकि विंबलडन में रात 11 बजे के बाद खेल जारी रखने की अनुमति नहीं होती। अब क्वार्टर फाइनल में गफ का सामना अपनी हमवतन और चौथी वरीयता प्राप्त जेसिका पेगुला से होगा। सिनर लगातार पांचवीं बार अंतिम आठ में पहुंचे विश्व नंबर एक और गत चैंपियन जानिक सिनर ने ऑल इंग्लैंड क्लब में शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। सोमवार रात खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में शीर्ष वरीय सिनर ने जापान के क्वालीफायर शिंतारो मोचिजुकी को 6-3, 7-6 (7-0), 6-3 से सीधे सेटों में हराया। विश्व नंबर एक सिनर ने पूरे मुकाबले में दबदबा बनाए रखा और मोचिजुकी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। खास बात यह रही कि टूर्नामेंट में अब तक सिनर को किसी भी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी का सामना नहीं करना पड़ा है और क्वार्टर फाइनल में भी उन्हें गैर वरीय जर्मनी के अनुभवी खिलाड़ी जॉन लेनार्ड स्ट्रफ से भिड़ना होगा। स्ट्रफ ने पहली बार बनाई क्वार्टरफाइनल में जगह 36 वर्षीय स्ट्रफ ने अपने करियर में पहली बार किसी ग्रैंडस्लैम के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। विश्व रैंकिंग में 74वें स्थान पर काबिज स्ट्रफ ने पोलैंड के हुबर्ट हुर्काज के विरुद्ध मुकाबले में दो सेट से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की। हालांकि तीसरे सेट के दौरान हुर्काज बाएं कूल्हे की चोट के कारण मुकाबला जारी नहीं रख सके और उन्हें रिटायर होना पड़ा। यह स्ट्रफ का 47वें ग्रैंड स्लैम प्रयास में पहला क्वार्टर फाइनल है। यदि सिनर स्ट्रफ को हराने में सफल रहते हैं तो उनका सामना सेमीफाइनल में सात बार के चैंपियन नोवाक जोकोविक और कनाडा के तीसरी वरीयता प्राप्त आगर फेलिक्स अलिसियामे के बीच होने वाले क्वार्टर फाइनल के विजेता से हो सकता है।  

PM2.5 प्रदूषण से सिर्फ सांस नहीं, बाल भी खतरे में, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

अक्सर माना जाता है कि हवा प्रदूषण के कारण खांसने, दम घुटने और सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स ने अब एक ऐसी चेतावनी दी है जो आपकी चिंताएं बढ़ा सकती है. हालिया रिसर्च में पाया गया है कि हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बारीक कण न सिर्फ हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि इनका सीधा असर हमारे बालों और स्कैल्प पर भी पड़ रहा है. ये महीन कण इतने छोटे होते हैं कि ये आसानी से स्कैल्प की त्वचा के रोमछिद्रों में घुस जाते हैं जिससे बालों का गिरना और उनकी क्वालिटी खराब होना एक बड़ी समस्या बन गया है. इस बारे में डॉक्टर ने कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है जो सभी को मानना चाहिए. ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और बालों की कमजोरी बेंगलुरु के अपोलो हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. समीर बंसल का कहना है, 'PM2.5 सामान्य धूल नहीं है. इसका आकार इतना छोटा होता है कि यह नाक और ऊपरी एयरवे के सुरक्षा कवच को पार करके फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच जाता है. उन्होंने बताया कि प्रदूषण को केवल खांसी या सांस की तकलीफ तक सीमित नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसका 'इन्फ्लेमेटरी बोझ' शरीर के अन्य अंगों पर भी पड़ता है जिससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इन्फ्लेमेटरी रिस्पॉन्स पैदा होते हैं.' बेंगलुरु के फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विवेक आनंद पडेगल का कहना है, 'लोग PM2.5 को फेफड़ों के लिए हानिकारक मानते हैं लेकिन अब यह स्पष्ट हो रहा है कि इसका प्रभाव हेयर फॉलिकल्स यानी बालों की जड़ों पर भी पड़ रहा है. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से स्कैल्प में इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है जो बालों के झड़ने, उनके पतले होने और स्कैल्प के अस्वस्थ होने का कारण बन सकता है.' स्कैल्प का इन्फ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण के सूक्ष्म कण शरीर में फ्री रेडिकल्स को बढ़ाते हैं, जो बालों की जड़ों की प्रोटीन संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं. इससे बाल न केवल कमजोर और रूखे हो जाते हैं, बल्कि उनके टूटने की रफ्तार भी बढ़ जाती है. द मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदूषण की मार सिर्फ बालों की लंबाई तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, वायु प्रदूषण में मौजूद हानिकारक तत्व स्कैल्प में सूजन या इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं. जब स्कैल्प पर गंदगी और टॉक्सिन्स की परत जमती है तो यह बालों के रोमछिद्रों को प्रभावित करती है जिससे बालों को जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते. इसका नतीजा ये होता है कि बाल समय से पहले पतले होने लगते हैं और स्कैल्प में खुजली व डैंड्रफ की समस्या आम हो जाती है. सिस्टमिक हेल्थ रिस्क डॉ. बंसल और डॉ. पडेगल इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि वायु प्रदूषण अब केवल एक अंग की समस्या न होकर एक 'सिस्टमिक हेल्थ रिस्क' बन गया है जो बालों सहित पूरे शरीर को प्रभावित कर रहा है. प्रदूषण की वजह से स्कैल्प पर जो गंदगी की परत जमती है वह स्कैल्प को सेंसिटिव बनाती है. यदि इसे समय रहते साफ न किया जाए तो यह बालों के पतले होने और बालों की जड़ों की मजबूती कम होने का कारण बनती है. बचाव के लिए क्या करें? इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर निकलते समय बालों को स्कार्फ या कैप से जरूर ढकें. प्रदूषण वाली जगहों पर जाने के बाद बालों को माइल्ड सल्फेट-फ्री शैम्पू से धोना चाहिए ताकि गंदगी जमा न हो. इसके अलावा, एंटीऑक्सीडेंट युक्त हेयर केयर प्रोडक्ट्स और संतुलित डाइट का सेवन बालों की जड़ों को प्रदूषण के असर से बचाने में मददगार साबित हो सकता है.

वास्तु मान्यताओं के अनुसार दवाइयां गलत जगह रखने से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, जानें सही स्थान।

 आज के दौर में लगभग हर घर की यही कहानी है—कमाई चाहे जितनी भी हो, उसका एक बड़ा हिस्सा डॉक्टर की फीस और दवाइयों के बिल में चला जाता है.  कई बार लाख कोशिशों और अच्छे इलाज के बाद भी घर से बीमारियां जाने का नाम नहीं लेतीं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो मुमकिन है कि इसका कारण आपके घर में गलत जगह पर रखा दवाइयों का डिब्बा हो. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखी हर वस्तु की अपनी एक ऊर्जा होती है. अगर हम दवाओं को गलत दिशा या जगह पर रख देते हैं, तो वे बीमारी को ठीक करने के बजाय उसे और बढ़ाने लगती हैं. आइए जानते हैं कि घर की वो कौन सी जगह है जहां भूलकर भी दवाइयां नहीं रखनी चाहिए. भूलकर भी रसोई (किचन) में ना रखें दवाइयां हम में से ज्यादातर लोग अपनी सहूलियत के लिए दवाइयों का डिब्बा रसोई घर में रख देते हैं. कई घरों में तो लोग इसे सीधे गैस चूल्हे के पास वाले शेल्फ में रख देते हैं ताकि सुबह-शाम खाना खाते ही दवा खाना याद रहे. वास्तु के अनुसार, यह सबसे घातक भूल है. अग्नि का प्रभाव: रसोई घर को मां अन्नपूर्णा और अग्नि देव का स्थान माना जाता है, जहां से पूरे परिवार को सेहत और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. अग्नि का स्वभाव हर चीज को तीव्र करना यानी बढ़ाना होता है. जब दवाइयां रसोई में या चूल्हे के आसपास रखी जाती हैं, तो बीमारी घटने के बजाय और ज्यादा बढ़ने लगती है. अन्नपूर्णा का दोष: रसोई में बीमारी की दवाएं रखने का सीधा मतलब है कि आप अनजाने में बीमारी को अपने भोजन का हिस्सा बना रहे हैं. इससे घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अक्सर खराब रहने लगता है, और एक बीमारी ठीक होने से पहले ही दूसरी शुरू हो जाती है. इन 2 जगहों पर भी दवा रखना है नुकसानदेह रसोई के अलावा दो और ऐसी जगहें हैं जहाँ लोग अक्सर दवाएं रखते हैं, जो वास्तु के लिहाज से बिल्कुल गलत हैं: डाइनिंग टेबल पर: डाइनिंग टेबल के बीचों-बीच दवाइयां सजाकर रखने से भोजन करते समय पूरे परिवार का ध्यान बीमारी पर केंद्रित रहता है. इससे भोजन से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है. बेड के सिरहाने या तकिए के नीचे: सोते समय सिर के पास दवाइयां रखने से राहु दोष बढ़ता है. इससे व्यक्ति को मानसिक तनाव, घबराहट और अनिद्रा (नींद न आने) की समस्या होने लगती है. कहाँ रखें दवाइयां ताकि जल्दी मिले बीमारी से छुटकारा? अगर आप चाहते हैं कि दवाएं शरीर पर जल्दी असर करें. आपका मेडिकल का खर्च कम हो, तो इन बातों का ध्यान रखें: उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा (North-East): घर के कमरे की उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को आरोग्य और देवताओं के वैद्य भगवान धन्वंतरि की दिशा माना जाता है. इस कोने में साफ-सफाई के साथ दवाएं रखने से मरीज जल्दी ठीक होता है. नजरों से छुपाकर रखें: दवाओं को कभी भी खुले में टेबल या शेल्फ पर बिखेर कर ना रखें. इन्हें हमेशा किसी दराज या अलमारी के अंदर बंद करके रखें, ताकि घर में आने-जाने वाले लोगों की नजर इन पर बार-बार न पड़े.

हरियाणा में 10 जुलाई तक बारिश के आसार, सात जिलों में येलो अलर्ट जारी हुआ

 हिसार  प्रदेश में मौसम तेजी से बदल रहा है। रविवार शाम के बाद 11 जिलों में वर्षा हुई। कुछ जिलों में तेज वर्षा हुई तो कुछ में गर्मी से लोग परेशान रहे। हिसार में गर्मी के चलते विनोद नगर के 24 वर्षीय विक्की की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में गर्मी से मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मंगलवार को सात जिलों में तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार जींद, यमुनानगर, भिवानी, अंबाला व झज्जर आदि जिलों में वर्षा हुई। इसके साथ ही आने वाले दिनों में भी तेज वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले दिनों में वर्षा से तापमान में गिरावट हो सकती है। गर्मी के कारण विनोद नगर निवासी विक्की की रविवार रात को तबीयत बिगड़ गई थी। परिवार के लोग इसे अस्पताल ले गए। वहां पर इलाज के दौरान मौत हो गई। विक्की मजदूरी करता था। मानसून के आगे बढ़ने की संभावना चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मदन खीचड़ ने बताया कि मानसून टर्फ की उत्तरी सीमा जामनगर, उदयपुर, अजमेर, झुंझुनू, हिसार व भठिंडा तक बनी हुई है। अरब सागर में एक डिप्रेशन बनने से अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून के आगे बढ़ने की संभावना है। जिससे मानसूनी हवाओं और राजस्थान पर एक साईक्लोनिक सर्कुलेशन बनने से हरियाणा राज्य में 10 जुलाई तक मौसम आमतौर पर परिवर्तनशील रहने तथा ज्यादातर क्षेत्रों में बीच-बीच में हवाओं व गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। परंतु इस दौरान कुछ एक स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है। इससे दिन के तापमान में गिरावट तथा वातावरण में नमी की अधिकता बने रहने की संभावना है। यलो अलर्ट: पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, मेवात और पलवल। वर्षा (मिलीमीटर में)     करनाल : 16     गुरुग्राम : 38     भिवानी : 2.4     चरखी दादरी : 9     हिसार : 31     जींद : 26.5     कैथल : 8.5     सोनीपत : 1 तापमान (डिग्री सेल्सियस में) जिला न्यूनतम अधिकतम अंबाला 29 36.8 भिवानी 26.5 37 गुरुग्राम 27.4 36 हिसार 28.2 38.2 नारनौल 26.5 34.5 रोहतक 28.2 33.6 सिरसा 29 38.2  

योगी सरकार का बड़ा फैसला, ईवी खरीद पर रोड टैक्स शून्य और भारी आर्थिक राहत

लखनऊ यूपी में नए ई-वाहन (ईवी) खरीदने पर योगी सरकार ने बड़ी राहत दे दी है। अब ईवी खरीदने पर रोड टैक्स का नहीं देना होगा। ईवी पर 2.56 लाख रुपये तक का लाभ प्रदान किया जाएगा। कैबिनेट बैठक में सोमवार को वायु प्रदूषण से निपटने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एनसीआर क्षेत्र में परिवर्तन योजना लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। योजना के तहत एनसीआर में बीएस-वन से बीएस-फोर तक के पुराने ट्रकों और बसों को स्क्रैप कर नई बीएस-सिक्स अथवा इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने पर वाहन स्वामियों को मोटरयान कर और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 10 वर्ष तक भारी छूट प्रदान की जाएगी। नए बीएस-सिक्स या इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 100 फीसद रोड टैक्स माफ होगा। पुराने वाहनों पर 50 प्रतिशत की छूट वहीं पुराने/प्रयुक्त बीएस-सिक्स/ईवी वाहनों पर रोड टैक्स में 50 फीसद छूट दी जाएगी। यह छूट 10 वर्षों तक वैध रहेगी। नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रजिस्ट्रेशन शुल्क शत-प्रतिशत माफ होगा। सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को विशेष प्रोत्साहन दिया है। डीजल-सीएनजी गाड़ियों पर पांच प्रतिशत ब्याज छूट और ईंधन वाउचर मिलेगा जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों पर गाड़ी की श्रेणी के अनुसार 64 हजार रुपये से 2.56 हजार रुपये तक का एकमुश्त लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा नई गाड़ी खरीदने पर ओईएम यानी वाहन कंपनियों की ओर से 8% की शुरुआती छूट भी मिलेगी। भारत सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए परिवर्तन योजना शुरू की है। यूपी सरकार ने अब इसे राज्य के एनसीआर जिलों में प्रभावी रूप से लागू करने का फैसला किया है। योजना का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों को चरणबद्ध ढंग से हटाना है। बस-ट्रक पर माफ होगा बकाया टैक्स यूपी एनसीआर में पंजीकृत बीएस-वन, टू, थ्री व फोर श्रेणी की बसों-ट्रकों पर यदि एक वर्ष से अधिक का टैक्स बकाया है तो उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए पुराने वाहन को अधिकृत रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (आरवीएसएफ) के जरिए स्क्रैप कराना होगा और उसके बाद ही नए वाहन का पंजीकरण कराना होगा। वाहन स्वामियों को अपने पुराने वाहन आरवीएसएफ केंद्र पर जमा कर स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट लेना होगा। इसी सर्टिफिकेट के आधार पर नई गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में छूट मिलेगी। बकाया टैक्स माफी का लाभ भी इसी प्रक्रिया से मिलेगा। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलेगा कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। डाटा सेंटर नीति में बुंदेलखंड और पूर्वांचल को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डाटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत दो गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और दो लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डाटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। 50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना डाटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डाटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डाटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डाटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली दो डाटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं। 210 करोड़ की सब्सिडी दी गई वहीं, प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत हुआ है। योगी सरकार ने 210 करोड़ रुपये से अधिक सब्सिडी के रूप में ईवी वाहन मालिकों को वितरित किए हैं। कहा कि खाड़ी देशों में गंभीर हालात और तेल संकट के बीच ईवी वाहनों की तरफ रुख करना ही बेहतर है। ईवी खरीद सब्सिडी योजना शानदार सहयोग दे रही है। इससे पेट्रोल-डीजल पर लोगों की निर्भरता कम होगी और बेहतर पर्यावरण से लोगों का स्वास्थ्य अच्छा होगा।

रसोई में रोटियां गिनकर क्यों नहीं बनानी चाहिए? जानें धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

 हमारे भारतीय समाज में रसोई घर को सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि घर की खुशहाली और बरकत का केंद्र माना जाता है. अक्सर आपने घर के बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि रसोई में रोटियां गिनकर नहीं बनानी चाहिए. कुछ लोग इसे केवल एक पुरानी सोच या अंधविश्वास मानकर टाल देते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे आज भी पूरी शिद्दत से निभाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोटियां गिनकर बनाने की मनाही के पीछे सिर्फ पौराणिक मान्यताएं या वास्तु शास्त्र ही नहीं, बल्कि एक गहरा व्यावहारिक और स्वास्थ्य से जुड़ा तर्क भी है? आइए जानते हैं कि रोटियां गिनकर बनाना आपकी सेहत, रिश्तों और घर की समृद्धि को किस तरह प्रभावित करता है. वास्तु शास्त्र का दृष्टिकोण बरकत की कमी वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम रोटियां गिनकर बनाते हैं, तो हम अनजाने में अपने घर की बरकत को सीमित कर देते हैं. भोजन को मां अन्नपूर्णा का रूप माना जाता है, और उसे तौलना या गिनना उनका अनादर माना जाता है. ग्रहों का प्रभाव: राहु का दोष रसोई को मंगल का स्थान माना जाता है. मान्यता है कि गिन-गिनकर रोटियां बनाने से कुंडली में राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे घर में मानसिक तनाव और बिना वजह के खर्चे बढ़ते हैं. मेहमान का सत्कार सनातन परंपरा में अतिथि देवो भव की भावना है. अगर रोटियां बिल्कुल नाप-तोलकर बनाई जाएं और अचानक कोई मेहमान आ जाए, तो उसे सम्मानपूर्वक भोजन नहीं कराया जा सकता, जिससे बुध और गुरु ग्रह कमजोर होते हैं. वैज्ञानिक कारण (Scientific Reasons) भूख और संतुष्टि का नियम इंसान की भूख हर दिन एक जैसी नहीं होती. कभी काम के तनाव में भूख कम लगती है, तो कभी स्वाद या ज्यादा शारीरिक श्रम के कारण व्यक्ति एक-दो रोटी ज्यादा खा लेता है. अगर घर में सख्त गिनती से रोटियां बनेंगी, तो परिवार के किसी सदस्य को अपनी भूख मारनी पड़ सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. सकारात्मक ऊर्जा की कमी जो महिला या खाना बनाने वाला व्यक्ति लगातार गिन-गिनकर रोटियां बनाता है, उसकी मानसिकता सीमित या कंजूसी वाली होने लगती है. इसका सीधा असर भोजन के स्वाद और रसोई के माहौल (Vibe) पर पड़ता है. वास्तु के अनुसार कितनी रोटियां ज्यादा बनाएं? पहली रोटी (गाय के लिए): पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालनी चाहिए, इससे घर के सभी वास्तु दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद मिलता है. आखिरी रोटी (कुत्ते के लिए): रसोई में बनने वाली अंतिम रोटी कुत्ते के लिए होनी चाहिए, जिससे राहु, केतु और शनि शांत रहते हैं. अतिरिक्त रोटियां: 2-3 रोटियां हमेशा अतिरिक्त होनी चाहिए ताकि कोई भूखा जीव, पक्षी या अचानक आया मेहमान खाली हाथ न लौटे.

राज्य के विकास कार्यों पर मुख्य सचिव सख्त, सचिवों के साथ समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश

मुख्य सचिव ने सचिवों की ली उच्च स्तरीय बैठक विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सभी विभागों में बैकलॉग के रिक्त पदों की भर्ती के लिए शीघ्र कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने शासन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों के अंतर्गत भू-अर्जन के प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुआर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव भुवनेश यादव सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।