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मार्च महीने में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केंद्र रहेंगे खुला

मार्च में सभी अवकाश दिनों में बिजली बिल भुगतान केन्द्र खुलेंगे भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत 07 मार्च, 14 मार्च, 21 मार्च, 28 मार्च शनिवार एवं 01 मार्च, 08 मार्च, 15 मार्च, 22 मार्च, तथा 29 मार्च रविवार, 03 मार्च होली, 19 मार्च गुड़ी पड़वां, 20 मार्च जमात- उल-विदा/ ईद उल-फितर के ठीक पूर्व का दिवस/ रानी अवंती बाई का बलिदान दिवस, 27 मार्च रामनवमीं तथा 31 मार्च महावीर जयंती को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ता राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन माध्यम से भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्यक्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्नदाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्चदाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, वॉट्सऐप पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल एप के माध्यम से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।  

OBC क्रीमी लेयर पर बड़ा सवाल: शादी के बाद महिला की पहचान मायके से या ससुराल से? SC में सुनवाई

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल की जांच करने के लिए सहमत हो गया है कि सरकारी नौकरी में आरक्षण प्राप्त करने के लिए एक विवाहित ओबीसी (OBC) महिला उम्मीदवार के 'क्रीमी लेयर' में आने का निर्धारण किस आधार पर किया जाएगा- उसके पति की आय पर या उसके माता-पिता की आय पर। पहले मामला समझिए रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला कर्नाटक की एक महिला का है, जो न्यायिक अधिकारी (सिविल जज) बनना चाहती है। वह हिंदू नामधारी समुदाय से ताल्लुक रखती है, जो कर्नाटक में आरक्षण की II-A श्रेणी के अंतर्गत आता है। अप्रैल 2018 में, महिला की शादी हो गई। महिला का पति आरक्षण की III-B श्रेणी के अंतर्गत आता है। शादी के बाद से महिला अपने माता-पिता से अलग रह रही है। उसने सिविल जज के पद के लिए आवेदन किया था। इस भर्ती में कुल 57 में से 6 पद II-A श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे। अपने चयन के बाद, उसने अपने पति की आय के आधार पर जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन और 'सिंधुत्व' प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया था। विवाद का कारण जिला जाति और आय सत्यापन समिति ने महिला का आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह अपने माता-पिता की आय के कारण क्रीमी लेयर के दायरे में आती है, जिससे वह आरक्षण के लिए अयोग्य हो जाती है। महिला की मां कर्नाटक न्यायिक सेवा से जिला न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई हैं, जबकि उसके पिता सहायक वन संरक्षक के पद से रिटायर हुए हैं। कर्नाटक हाई कोर्ट में क्या हुआ? महिला ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह तर्क दिया कि चूंकि वह शादीशुदा है, इसलिए उसकी पात्रता उसके पति की आय के आधार पर तय होनी चाहिए। उसने दलील दी कि उसके पति की वार्षिक आय उसे क्रीमी लेयर की अयोग्यता से बाहर रखती है। हालांकि, राज्य सरकार ने तर्क दिया कि इस प्रक्रिया में माता-पिता की पेंशन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सहमति जताते हुए महिला के दावे को खारिज कर दिया और फैसला सुनाया कि माता-पिता की पेंशन को भी परिवार की आय माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में अपील हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ महिला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। बुधवार को उनकी अपील पर बहस करते हुए, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय एम. नुली ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के सामने कानूनी सवाल उठाए- क्या एक विवाहित महिला उम्मीदवार की क्रीमी लेयर का निर्धारण करने के लिए पति की आय पर विचार किया जाना चाहिए या माता-पिता की आय पर? यदि माता-पिता की आय पर विचार किया जाना है, तो क्या माता-पिता की पेंशन को 'आय' के रूप में गिना जाना चाहिए या नहीं? सुप्रीम कोर्ट का कदम सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस अपील पर कर्नाटक सरकार को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। इसके बाद, महिला (अपीलकर्ता) को एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर (rejoinder) दाखिल करने की अनुमति दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है।  

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कच्चे तेल में उछाल, भारतीयों की जेब पर संकट!

नई दिल्ली मध्य पूर्व में तनाव अब खुले युद्ध में बदल चुका है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं, जिसमें तेहरान समेत कई शहरों में विस्फोट की खबरें हैं। इस घटना ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है। क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और दुनिया भर के निवेशक व आम लोग इस बात से चिंतित हैं कि क्या यह आग भारत की जेब तक पहुंच जाएगी? भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, और इसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (सऊदी अरब, UAE, इराक आदि) से आता है, जो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। ईरान: एक प्रमुख तेल उत्पादक देश अमेरिकी प्रतिबंधों की मार झेलने के बावजूद ईरान आज भी दुनिया के शीर्ष 10 तेल उत्पादकों में शामिल है। 'ओपेक' (OPEC) के आंकड़ों के अनुसार, ईरान वर्तमान में लगभग 3.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन करता है। ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट के मुख्य विश्लेषक अर्ने लोहमैन रासमुसेन के अनुसार, 1974 में ईरान अमेरिका और सऊदी अरब के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था (6 मिलियन बैरल प्रतिदिन)। ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है। सालों के कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, इसके तेल उद्योग की स्थिति वेनेजुएला जैसे देशों से काफी बेहतर है। होर्मुज जलडमरूमध्य: सबसे बड़ा खतरा तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी है, जिसे ठप करने की धमकी ईरान अक्सर देता रहा है। यह मध्य पूर्व के अमीर तेल उत्पादक देशों को शेष विश्व से जोड़ने वाला मुख्य समुद्री मार्ग है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के अनुसार, 2024 में इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो वैश्विक खपत का करीब 20 प्रतिशत है। यह जलमार्ग काफी संकरा (लगभग 50 किलोमीटर चौड़ा) और उथला (अधिकतम 60 मीटर गहरा) है। इस मार्ग पर सुरक्षा को लेकर जरा सा भी संदेह होने पर जहाजों के बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आ सकता है। सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन के अनुसार, केवल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास ही वैकल्पिक (बाईपास) बुनियादी ढांचा है, जिसकी अधिकतम क्षमता मात्र 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। अत्यधिक लाभदायक तेल और चीन पर निर्भरता पश्चिमी देशों (कनाडा, अमेरिका) में जहां तेल निकालने की लागत $40 से $60 प्रति बैरल आती है, वहीं ईरान के लिए यह लागत मात्र $10 प्रति बैरल है। 1979 की इस्लामी क्रांति और विशेषकर डोनाल्ड ट्रंप की अधिकतम दबाव नीति के कारण ईरान के पास निर्यात के बहुत कम विकल्प बचे हैं। चीन सबसे बड़ा खरीदार ईरान वर्तमान में 1.3 से 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन निर्यात करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इसका 80% से अधिक हिस्सा बाजार मूल्य से कम कीमत पर चीनी रिफाइनरियों मुख्यतः स्वतंत्र टीपॉट रिफाइनरियों को जाता है। पड़ोसी देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर खाड़ी देशों से लेकर तुर्की और पाकिस्तान तक, ईरान के पड़ोसी डरे हुए हैं। चूंकि इन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, इसलिए वे ईरान के जवाबी हमले के निशाने पर आ सकते हैं। भूमध्यसागरीय सामरिक अध्ययन फाउंडेशन के निदेशक पियरे रज़ौक्स के अनुसार, ईरान के पास मध्यम दूरी की मिसाइलें हैं जो हाइड्रोकार्बन हब, बिजली संयंत्रों और समुद्री जल संयंत्रों को नष्ट कर सकती हैं। अगर कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक पहुंच जाती है (जो फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से नहीं हुआ है), तो इससे दुनिया भर में महंगाई फिर से बेकाबू हो सकती है। तेल की बढ़ती कीमतें इस साल के अंत में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में राष्ट्रपति ट्रंप को नुकसान पहुंचा सकती हैं, क्योंकि उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं से सस्ती ऊर्जा का वादा किया है। भारत पर असर को विस्तार से समझिए अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए इस सैन्य हमले का भारत पर बहुत गहरा और बहुआयामी असर पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए मध्य पूर्व में कोई भी अस्थिरता सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापक आर्थिक स्थिरता को चुनौती देती है। इस भू-राजनीतिक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला संभावित असर- पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत अगर $100 प्रति बैरल के पार जाती है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की रिफाइनिंग लागत में भारी वृद्धि होगी। यदि सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती करके इस झटके को खुद नहीं सहती है, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में प्रति लीटर ₹5 से ₹10 तक का उछाल आ सकता है। बता दें कि यह महज अनुमान है। सरकार की ओर से कुछ भी आदेश नहीं आया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूसी तेल का लाभ उठाया था, लेकिन यदि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो माल ढुलाई और बीमा लागत इतनी बढ़ जाएगी कि कोई भी रियायती तेल अंततः महंगा ही पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डीजल की कीमतें बढ़ने से देश भर में माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों, एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों, फलों और सब्जियों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे खुदरा महंगाई दर (CPI) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर जा सकती है।  

क्या भारत रोक पाएगा ऑस्ट्रेलिया का विजय रथ? वनडे सीरीज में करो या मरो की स्थिति

होबार्ट भारतीय टीम पहले दोनों मैच में चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाने में नाकाम रही और ऑस्ट्रेलिया ने बिना किसी परेशानी के लक्ष्य हासिल करके श्रृंखला में 2-0 से अजेय बढ़त बनाई। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम को अगर क्लीन स्वीप से बचना है तो उसके बल्लेबाजों को अपने खेल में आमूलचूल सुधार करना होगा। पहले दो मैचों में बुरी तरह हारने के बाद बैकफुट पर खड़ी मौजूदा विश्व चैंपियन भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविवार को होबार्ट में होने वाले तीसरे और अंतिम महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में साख बचानी होगी। भारतीय महिला टीम को अगर जीत हासिल करके अपनी प्रतिष्ठा कुछ हद तक बचानी है तो उसको अपनी बल्लेबाजी की कमजोरियों को दूर करना होगा। भारतीय टीम पहले दोनों मैच में चुनौतीपूर्ण स्कोर बनाने में नाकाम रही और ऑस्ट्रेलिया ने बिना किसी परेशानी के लक्ष्य हासिल करके श्रृंखला में 2-0 से अजेय बढ़त बनाई। यह लगातार 12वां अवसर है जबकि भारतीय महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया से वनडे श्रृंखला गंवाई। असल में भारत अभी तक अपने इस प्रतिद्वंदी से द्विपक्षीय वनडे श्रृंखला नहीं जीत पाया है। पहले मैच में भारत ने पावरप्ले के अंदर ही तीन विकेट गंवा दिए थे और फिर वापसी नहीं कर पाया। भारतीय टीम ने दूसरे वनडे में पहले विकेट के लिए 78 रन की साझेदारी करके अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन मध्य और निचले क्रम के बल्लेबाज इसका फायदा उठाने में नाकाम रहे। भारत ने 17वें और 31वें ओवर के बीच सिर्फ 52 रन पर पांच विकेट गंवा दिए। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर उन्हें ध्यान देने की जरूरत है। पहले वनडे में भारत 214 रन पर आउट हो गया और दूसरे वनडे में नौ विकेट पर 251 रन ही बना पाया। ऑस्ट्रेलिया ने इन दोनों मैच में आसानी से लक्ष्य हासिल किया। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम को अगर क्लीन स्वीप से बचना है तो उसके बल्लेबाजों को अपने खेल में आमूलचूल सुधार करना होगा। युवा सलामी बल्लेबाज प्रतीका रावल ने पहले मैच में शून्य पर आउट होने के बाद शानदार वापसी करते हुए अर्धशतक बनाया, वहीं स्मृति मंधाना ने दोनों मैचों में क्रमशः 31 और 58 रन बनाए। हरमनप्रीत ने भी दो अर्धशतक जड़े। लेकिन जेमिमा रोड्रिग्स और दीप्ति शर्मा जैसी सीनियर बल्लेबाज अभी तक कोई खास योगदान नहीं दे पाए हैं जिससे टीम को नुकसान पहुंचा है। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत ने दूसरे मैच के बाद कहा, ‘निश्चित रूप से हमने अच्छी बल्लेबाजी नहीं की। हमने फिर से वही गलतियां दोहराई और विकेट गंवाए। इससे हम पर्याप्त स्कोर नहीं बना पाए। पिछले दो मैच में हम अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर पाए और उसका हमें खामियाजा भुगतना पड़ा। उम्मीद है अगले मैच में हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।’ भारत की गेंदबाजी में भी निरंतरता की कमी दिखी। दीप्ति ने तीन विकेट लिए हैं। श्री चरणी ने पहले मैच में दो विकेट लिए थे, लेकिन दूसरे मैच में वह काफी महंगी साबित हुईं। काशवी गौतम और क्रांति गौड़ की तेज गेंदबाजी जोड़ी को अधिक निरंतरता दिखानी होगी और पावरप्ले में ऑस्ट्रेलिया को हावी होने से रोकने के लिए शुरुआत में ही विकेट लेने होंगे। भारत की फील्डिंग भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, जिसमें गौड़, मंधाना और ऋचा घोष ने कैच छोड़े। इसके विपरीत ऑस्ट्रेलिया ने लगभग सभी विभाग में शानदार प्रदर्शन किया है। जॉर्जिया वोल के दमदार शतक और फीबी लिचफील्ड की प्रवाहमय बल्लेबाजी से ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे वनडे में आसानी से लक्ष्य हासिल किया। बेथ मूनी, एलिसा हीली और एनाबेल सदरलैंड ने पहले मैच में अच्छा प्रदर्शन किया था। मेगन शट और एशले गार्डनर की अगुवाई में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण ने भी अपने सामूहिक योगदान से प्रभावित किया है। इन दोनों के अलावा अलाना किंग और सदरलैंड ने भी विकेट लिए हैं। भारत ने टी20 श्रृंखला 2-1 से जीती थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की दो वनडे में जीत ने उसे बहु-प्रारूप वाली श्रृंखला में 6-4 की बढ़त दिला दी है। भारत के इस दौरे विजेता ट्रॉफी हासिल करने वाली टीम का निर्धारण तीनों प्रारूप के कुल अंकों के आधार पर होगा। टी20 और वनडे मैच जीतने पर दो अंक जबकि टेस्ट मैच जीतने पर चार अंक मिलेंगे। भारत को अंतिम वनडे और उसके बाद पर्थ में खेले जाने वाले एकमात्र टेस्ट मैच में वापसी करने की कोशिश करनी होगी ताकि दौरे का अंत निराशाजनक तरीके से न हो। टीम इस प्रकार हैं: भारत: हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंधाना (उप-कप्तान), शैफाली वर्मा, रेणुका ठाकुर, श्री चरणी, वैष्णवी शर्मा, क्रांति गौड़, स्नेह राणा, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), उमा छेत्री (विकेटकीपर), अमनजोत कौर, जेमिमा रोड्रिग्स, काशवी गौतम, हरलीन देयोल, प्रतिका रावल। ऑस्ट्रेलिया: एलिसा हीली (कप्तान), सोफी मोलिनी (उप-कप्तान), डार्सी ब्राउन, निकोला कैरी, एशले गार्डनर, किम गार्थ, अलाना किंग, फीबी लिट्चफील्ड, बेथ मूनी, ताहलिया मैकग्रा, एलीसे पेरी, एनाबेल सदरलैंड, जॉर्जिया वोल, जॉर्जिया वेयरहैम। समय: मैच सुबह 9.20 बजे शुरू होगा।  

त्योहार पर यात्रियों को राहत: होली के लिए 9 जोड़ी स्पेशल ट्रेनें चलेंगी

फिरोजपुर   फिरोजपुर मंडल के द्वारा होली को देखते हुए रेलयात्रियों के सुविधाजनक आवागमन हेतु नियमित निर्धारित ट्रेनों के अलावा 9 जोड़ी त्यौहार स्पैशल रेलगाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए परमदीप सिंह सैनी वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उत्तर रेलवे फिरोजपुर ने बताया कि पहले से चल रही नियमित गाड़ियों के अतिरिक्त, दिनांक 1 मार्च को होली स्पेशल ट्रेन 04614 अमृतसर से कटिहार (बिहार) के लिए दोपहर 14:15 बजे चलेगी और रास्ते में ब्यास, जालंधर शहर, ढंडारी कलां, अंबाला छावनी, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, सीतापुर, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, सिवान, छपरा, सोनपुर, हाजीपुर, शाहपुर पटोरी, बछवारा, बरौनी, खगड़िया, मानसी तथा नवगछिया रेलवे स्टेशनों पर पर ठहरेगी। उन्होंने बताया कि 2 मार्च को होली स्पेशल ट्रेन 04616 फिरोजपुर कैंट से दानापुर के लिए दोपहर 12:00 बजे चलेगी और रास्ते में मोगा, लुधियाना, अम्बाला कैंट, यमुनानगर जगाधरी, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, रायबरेली, माँ बेल्हा देवी धाम (प्रतापगढ़), वाराणसी, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, रघुनाथपुर तथा आरा रेलवे स्टेशनों पर ठहरेगी। 2 मार्च को होली स्पेशल ट्रेन 04664 अमृतसर से पटना के लिए सुबह 9:45 बजे बजे चलेगी और रास्ते में ब्यास, जालंधर सिटी, ढंडारी कलां, सरहिन्द, अंबाला कैंट, यमुनानगर जगाधरी, सहारनपुर, रुड़की, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, हरदोई, लखनऊ, सुल्तानपुर, वाराणसी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा तथा दानापुर रेलवे स्टेशनों पर ठहरेगी।   रेलयात्रियों से अनुरोध है कि इन होली स्पेशल ट्रेनों का लाभ उठाएं। इस अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार ने यात्रियों से अपील किया है कि रेलयात्रियों की सुविधा के लिए गाड़ियों का उचित इंतजाम है। यात्रियों से यह भी निवेदन है कि ज्वलनशील पदार्थ लेकर यात्रा न करें।  

प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: सभी कैंटोनमेंट अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े

लखनऊ यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान कार्ड) के लाभार्थियों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सरकार प्रदेश के सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा देने जा रही है। जल्द ही स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) प्रदेश के 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों से एमओयू साइन करने जा रही है। प्रदेश में कुल 13 कैंटोनमेंट अस्पताल हैं। प्रयागराज कैंटोनमेंट अस्पताल में पहले से ही आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान कार्ड) के लाभार्थियों को बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सरकार प्रदेश के सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा देने जा रही है। जल्द ही स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) प्रदेश के 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों से एमओयू साइन करने जा रही है। प्रदेश में कुल 13 कैंटोनमेंट अस्पताल हैं। प्रयागराज कैंटोनमेंट अस्पताल में पहले से ही आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज किया जा रहा है। इसके सफल परिणाम को देखते हुए योगी सरकार ने प्रदेश के अन्य 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज मुहैया कराने का निर्णय लिया है। साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि जनवरी-2026 से प्रयागराज के कैंटोनमेंट अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारकों का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। यहां पर मरीजों को कार्डियोलाॅजी, नेफ्रोलॉची, मेडिकल एंड सर्जिकल अनकालॉजी आदि गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा दी जा रही है। इसके साथ ही मुफ्त ओपीडी अप्वाइंटमेंट, मुफ्त जांच व गंभीर मरीजों को मुफ्त परिवहन की सुविधा दी जा रही है, जिसके सफल परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के अन्य 12 कैंटोनमेंट अस्पतालों के साथ एमओयू साइन किया जाएगा। इसके लिए स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज) द्वारा औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। एमओयू के बाद लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बरेली, वाराणसी, अयोध्या, शाहजहांपुर, मथुरा, आगरा, फतेहपुर, झांसी और बबीना के कैंटोनमेंट अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का इलाज सुनिश्चित किया जाएगा। इन अस्पतालों के जुड़ने से प्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत पैनल्ड अस्पतालों की संख्या और अधिक बढ़ जाएगी। साचीज की एसीईओ डॉ. पूजा यादव ने बताया कि कैंटोनमेंट अस्पतालों के साथ समन्वय से आयुष्मान कार्ड धारक को बेहतर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी। विशेष रूप से गंभीर और जटिल बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। साथ ही, गंभीर रोगियों के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि सभी कैंटोनमेंट अस्पतालों में आवश्यक प्रक्रियाओं को आयुष्मान योजना के अनुरूप ढाला जा रहा है। एमओयू के बाद इन अस्पतालों को योजना के पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों के इलाज, बिलिंग और क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी। योगी सरकार की पहल से सेना क्षेत्र के अस्पतालों की आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ आम नागरिकों को भी मिलेगा। स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाला दबाव भी संतुलित होगा। कैंटोनमेंट अस्पतालों को आयुष्मान योजना से जोड़ने का निर्णय गरीब और जरूरतमंद नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

ईरान का बड़ा एक्शन: बहरीन-कतर में US बेस पर मिसाइल स्ट्राइक, बढ़ा तनाव

तेल अवीव इजरायली और अमेरिकी हमलों का ईरान ने बड़ा बदला लिया है। उसने शनिवार दोपहर कम से कम सात देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया है। इसमें बहरीन के नेवल बेस, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इजरायल, कुवैत आदि शामिल हैं। हमलों के बाद ने कहा है कि अमेरिकी नेवी के पांचवें फ्लीट के हेडक्वार्टर को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। इससे पहले, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को पूरे ईरान में टारगेट करते हुए एक बड़ा हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपनी सरकार पर कब्जा करने की अपील की। पहला हमला तेहरान के डाउनटाउन में ईरान के 86 साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर के कंपाउंड को टारगेट करता हुआ लगा। यह तुरंत साफ नहीं था कि वह उस समय वहां थे या नहीं। ईरानी राजधानी से धुआं उठता देखा जा सकता था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “47 सालों से, ईरानी शासन अमेरिका को मौत का नारा लगा रहा है और खून-खराबे और बड़े पैमाने पर हत्या का एक कभी न खत्म होने वाला कैंपेन चलाया है, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स, हमारे सैनिकों और कई, कई देशों के बेगुनाह लोगों को टारगेट किया गया है।” उन्होंने ईरानियों से हमलों के दौरान कवर लेने की अपील की, लेकिन फिर कहा कि जब हम खत्म कर लें, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। यह आपकी होगी।” वहीं, इजरायली और अमेरिकी हमलों का ईरान ने जवाब देना शुरू कर दिया है। ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने इजरायल को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइलों की पहली लहर लॉन्च करके जवाब दिया। इस बीच, यमन में ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों ने रेड सी शिपिंग रूट और इजरायल पर हमले फिर से शुरू करने की कसम खाई है। ऐसा दो सीनियर हूती अधिकारियों ने कहा। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही क्योंकि हूती लीडरशिप की तरफ से कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुई थी। इसके अलावा, ट्रंप ने वीडियो में कहा कि अमेरिका ने ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर डील के लिए दबाव बनाने की कोशिश में इस इलाके में फाइटर जेट और वॉरशिप का एक बड़ा बेड़ा इकट्ठा करने के बाद ईरान में बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं।

जीत के बाद छलका कप्तान पारस डोगरा का जज्बा, कहा- ये पल जिंदगी का सबसे खास

जम्मू-कश्मीर जम्मू-कश्मीर के पहली बार रणजी चैम्पियन बनने से उसके कप्तान पारस डोगरा गदगद नजर आ रहे हैं और उनका कहना है कि उनके पास इस जीत को बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। जम्मू कश्मीर ने शनिवार को कर्नाटक के खिलाफ ड्रॉ रहे फाइनल में पहली पारी की बढ़त के आधार पर पहली बार रणजी ट्रॉफी क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताब जीतकर 67 साल का इंतजार खत्म करके इतिहास में अपना नाम दर्ज कर दिया। डोगरा ने शनिवार को कर्नाटक के खिलाफ फ़ाइनल ड्रा होने के बाद कहा, ''सच कहूँ तो मैं समझा नहीं सकता। मेरे पास अभी कोई शब्द नहीं हैं। इस समय, यह मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी चीज़ है और मैं इसके लिए बहुत शुक्रगुजार हूँ। सच कहूँ तो, मैं जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के साथ होने के लिए लकी रहा हूँ और वहाँ के लोग ज़बरदस्त रहे हैं। वे बहुत अच्छे रहे हैं और यह 11, 14, 15 लोगों के बारे में नहीं है, अगर आप देखेंगे, तो वे ज़बरदस्त रहे हैं।'' उन्होंने कहा,''वे अपना हाथ ऊपर उठा रहे हैं और वे सच में बहुत अच्छा परफॉर्म कर रहे हैं। वे मैच जीतने के लिए बहुत उत्सुक हैं और शुरू से ही, उन्हें 100% यकीन था कि हम यह जीतेंगे। मुझे फिलहाल सेलिब्रेट करने दो। आप देखेंगे कि आगे क्या होता है।'' पहली इनिंग में 291 रन की बड़ी लीड ने जम्मू-कश्मीर को ड्राइवर सीट पर पहुंचा दिया। कर्नाटक के पास गेम में वापस आने का एकमात्र मौका जम्मू-कश्मीर को उनकी दूसरी पारी में सस्ते में आउट करना और फिर चेज सेट करना था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को 11/2 पर थोड़ी मुश्किल में डाल दिया था, लेकिन कामरान इकबाल ने नई बॉल को देखा और डोगरा और समद के साथ लगातार फिफ्टी पार्टनरशिप करके गेम को कर्नाटक से और दूर ले गए। फिर, कामरन और साहिल लूथरा ने अपने सधे हुए अप्रोच से कर्नाटक के लिए दरवाजे पूरी तरह से बंद कर दिए। कामरान इकबाल और साहिल लूथरा दोनों ने सेंचुरी बनाईं और अपनी इनिंग्स को वे ज़िंदगी भर याद रखेंगे। चौथे दिन के बाद के हाफ से गेम उतार-चढ़ाव वाला रहा और कर्नाटक के खिलाड़ी बस इशारों में खेल रहे थे। पारस डोगरा ने आखिरकार दूसरे सेशन में डिक्लेयर करके जम्मू-कश्मीर की टीम को जश्न में डुबो दिया।  

पंजाब के बरनाला से कांग्रेस का चुनावी आगाज: राहुल-खरगे की रैली में 2027 पर नजर

बरनाला (पंजाब) कांग्रेस नेता राहुल गांधी बरनाला रैली में पहुंच गए हैं। अनाज मंडी में मनरेगा मजदूर किसान बचाओ महा रैली में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा, डॉ. राजकुमार वेरका, बरनाला के विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों, प्रताप सिंह बाजवा, सुखपाल सिंह खैरा, बीबी राजिंदर कौर भट्ठल, डॉक्टर धर्मवीर गांधी, गुरजीत सिंह औजला, पूर्व मंत्री व कांग्रेसी विधायक राणा गुरजीत सिंह समेत कई सीनियर लीडर भी मंच पर पहुंच चुके हैं। राहुल की रैली के लिए सियासी रणनीति के तहत मालवा क्षेत्र को चुना गया है। इस क्षेत्र के बरनाला में जिले में यह रैली होगी, क्योंकि यह जिला मालवा का केंद्र है। पार्टी सूत्रों के अनुसार रैली में करीब एक लाख लोगों की भीड़ एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस मालवा से अपना सूखा खत्म करना चाहती है। इसलिए राहुल गांधी यही से चुनाव हुंकार भरेंगे। मनरेगा के संशोधन बिल और अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील पर केंद्र सरकार को घेरते हुए मजदूरों और किसानों को साधेंगे। शिरोमणि अकाली दल को घेरेंगे जबकि आप सरकार में बढ़े रहे गैंगस्टरवार, नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों समेत अन्य मुद्दों पर आप सरकार पर भी निशाना साधेंगे। वरिष्ठ कांग्रेसियों को लगता है कि साल 2027 में कांग्रेस इस क्षेत्र में अपना खोया जनाधार वापस पाएगी। मान और बादल दोनों मालवा से अमूमन यह कहा जाता है कि पंजाब में सीएम मालवा क्षेत्र से ही निकलता है। मौजूदा सीएम भगवंत सिंह मान संगरूर से एमपी थे और अब धुरी से विधायक हैं। पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल भी श्री मुक्तसर साहिब से थे। उनके बेटे व पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल भी इसी क्षेत्र से हैं। मौजूदा सीएम के अलावा आप के तीन मंत्री हरपाल सिंह चीमा, बरिंदर सिंह गोयल व अमन अरोड़ा और आप के सांसद मीत हेयर  भी इसी क्षेत्र से आते हैं। 

राजीव गांधी का नाम पटियाला लॉ यूनिवर्सिटी से हटाने का प्रस्ताव, अकादमिक काउंसिल ने किया पारित

 पटियाला पंजाब के पटियाला स्थित राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की अकादमिक काउंसिल ने विश्वविद्यालय के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाने की सिफारिश की है. प्रस्ताव के अनुसार, विश्वविद्यालय का नया नाम केवल “नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी” रखा जा सकता है. इस फैसले की पुष्टि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जयशंकर सिंह ने की है.  उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव अकादमिक काउंसिल में पारित हो चुका है और अब इसे कार्यकारी परिषद तथा पंजाब सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. अंतिम फैसला पंजाब सरकार का होगा. इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है. पटियाला से कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने इसका विरोध किया है. उनका कहना है कि यह कदम चुनावों से पहले राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश हो सकती है.  उन्होंने आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा पर ऐसे मुद्दे उठा कर राजनीतिक लाभ कमाने का आरोप लगाया. सांसद ने यह भी कहा कि देश में संस्थानों के नाम बदलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे हमारी ऐतिहासिक विरासत प्रभावित हो रही है. नाम बदलने की मांग पहली बार नहीं उठी है. नवंबर 2024 में अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने भी केंद्र सरकार से इस विश्वविद्यालय का नाम बदलने की मांग की थी. उनका तर्क था कि 1984 के सिख विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि में राजीव गांधी का नाम सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करता है. यह विश्वविद्यालय साल 2006 में पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए एक अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था. अब सभी की निगाहें पंजाब सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि वह इस सिफारिश को स्वीकार करती है या नहीं.