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MP में प्रशिक्षु IPS अधिकारी को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी, पुलिस व्यवस्था में प्रशासनिक बदलाव के आदेश जारी

छतरपुर  छतरपुर  जिले की पुलिस व्यवस्था में एक अहम प्रशासनिक बदलाव किया गया है। छतरपुर में सेवाएं दे रहे प्रशिक्षु आईपीएस (IPS) अधिकारी लेखराज मीणा को अब ओरछा रोड थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने आदेश जारी कर दिया है। यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जिले में विभिन्न गतिविधियों और कानून से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे मीणा जानकारी के मुताबिक, प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अब तक जिले में विभिन्न गतिविधियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उनके कार्यशैली और अनुशासन को देखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण थाना ओरछा रोड की कमान सौंपी गई है। ओरछा रोड थाना क्षेत्र शहर का संवेदनशील और व्यस्त इलाका माना जाता है, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे में एक युवा आईपीएस अधिकारी की तैनाती को विभाग ने सख्ती और बेहतर मॉनिटरिंग की दिशा में अहम कदम माना है। पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा आदेश जारी पुलिस अधीक्षक अगम जैन द्वारा जारी आदेश के बाद थाना स्तर पर पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही नए थाना प्रभारी क्षेत्र में भ्रमण कर आमजन से संवाद भी स्थापित करेंगे। युवा नेतृत्व से बढ़ी उम्मीदें.. शहर के सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उम्मीद जताई है कि नए थाना प्रभारी अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और जनसुनवाई में तेजी लाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशिक्षु आईपीएस लेखराज मीणा अपने कार्यकाल में ओरछा रोड थाना क्षेत्र में किस तरह की कार्यशैली और परिणाम प्रस्तुत करते हैं।

हिमाचल की IPS अधिकारी अदिति सिंह की छुट्टियों को लेकर DGP ने लिया फैसला, ड्यूटी जूनियर को दी

शिमला हिमाचल प्रदेश में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य के डीजीपी अशोक तिवारी ने 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां उनकी बार-बार की छुट्टियों के दौरान एक अधीनस्थ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है. 25 दिन की छुट्टी से प्रभावित हुआ कामकाज आदेश में कहा गया है कि धर्मशाला स्थित स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) के नॉर्दर्न रेंज में एसपी के पद पर तैनात अदिति सिंह 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच कुल 25 दिनों की छुट्टी पर रहीं. इससे उनके कार्यालय के कामकाज पर असर पड़ा. एडिशनल एसपी को सौंपी गई जिम्मेदारी निर्देश के अनुसार, एडिशनल एसपी ब्रह्म दास भाटिया को अगली सूचना तक उनकी जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह अदिति सिंह की मौजूदगी में भी उनसे जुड़े रहेंगे. पहले भी रहीं थीं मुख्यालय से अनुपस्थित डीजीपी के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि अदिति सिंह दिसंबर में नैनीताल में आयोजित एक आधिकारिक मिड-करियर इंटरैक्शन प्रोग्राम के कारण भी मुख्यालय से अनुपस्थित रही थीं. यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है. कब-कब ली छुट्टी डीजीपी अशोक तिवारी के आदेश में अदिति सिंह द्वारा ली गई छुट्टियों का भी विस्तृत ब्योरा दिया गया है. आदेश के अनुसार, अदिति सिंह 8 जनवरी से 11 जनवरी तक क्रमशः दो दिन के आकस्मिक अवकाश और बीमार अवकाश पर रहीं. इसके बाद उन्होंने 12 जनवरी को एक दिन का आकस्मिक अवकाश लिया. फिर 16 जनवरी से 19 जनवरी के बीच उन्होंने तीन दिन का आकस्मिक अवकाश और एक दिन का बीमार अवकाश लिया. बाद में 8 फरवरी से 22 फरवरी तक वह 13 दिन के अर्जित अवकाश और दो दिन के बीमार अवकाश पर रहीं. आदेश में कहा गया है, 'यह देखा गया है कि अदिति सिंह, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी), नॉर्दर्न रेंज, धर्मशाला, बार-बार अवकाश पर जा रही हैं, जिसके कारण एसपी, एसवी एंड एसीबी, नॉर्दर्न रेंज, धर्मशाला के कार्यालय के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.'

वसुंधरा राजे सिंधिया ने महाकाल मंदिर में नंदी हाल से किए दर्शन, लिया आशीर्वाद

उज्जैन मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में आज यानी बुधवार को सुबह राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया दर्शन करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने नंदी हाल से भगवान महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। उन्होंने मंदिर में दर्शन व्यवस्था की जमकर सराहना भी की। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन के बाद भगवान वीरभद्र और महाकालेश्वर ध्वज चल समारोह में निकलने वाले ध्वज का भी पूजन किया। नंदी हाल में नंदी का पूजन कर बाबा महाकाल को जल अर्पित किया। मंदिर प्रबंधन ने निभाई परंपरा मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल एवं सहायक प्रशासक प्रतीक द्विवेदी ने सिंधिया का स्वागत एवं सत्कार किया गया। वसुंधरा राजे सिंधिया ने कहा कि राजस्थान के लोग बड़ी संख्या में महाकाल मंदिर में आते हैं, भगवान महाकाल का हम सब पर आशीर्वाद रहा है। सुखी-दुख में हम भगवान शिव के पास आते हैं। महाकाल मंदिर में भक्तों को सुलभ दर्शन मिल रहे हैं। होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं इधर, होली पर्व को लेकर इस वर्ष तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। चंद्रग्रहण के कारण 3 और 4 मार्च को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं, लेकिन महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में होली उत्सव पर ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने 2 और 3 मार्च को पारंपरिक रूप से होली मनाने का कार्यक्रम तय किया है। महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि बाबा महाकाल के दरबार में ग्रहण का विशेष प्रभाव नहीं होता। ग्रहण काल में भी दर्शन व्यवस्था निरंतर जारी रहती है। उन्होंने बताया कि 2 मार्च की शाम को होली सजाई जाएगी और सांध्य आरती में बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित किया जाएगा। इसके बाद शाम 7 बजे विधिवत होलिका दहन किया जाएगा। 3 मार्च की सुबह होने वाली भस्म आरती में भी प्रतिदिन की तरह पूजन-अर्चन होगा, लेकिन विशेष रूप से बाबा महाकाल को गुलाल अर्पित कर होली का पर्व मनाया जाएगा।   हर्बल गुलाल और शक्कर की माला चढ़ेगी विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में इस वर्ष भी परंपरानुसार 2 मार्च को संध्या आरती के बाद होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर समिति के अनुसार, संध्या आरती में बाबा महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा और शक्कर की माला चढ़ाई जाएगी। इसके बाद ओंकारेश्वर मंदिर के सामने विधिवत पूजन-अर्चन के साथ होलिका दहन किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित व्यवस्था का पालन करते हुए दर्शन करें और पर्व को श्रद्धा व अनुशासन के साथ मनाएं।

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि

योगी सरकार का इंतजाम, होली पर 28 फरवरी से नौ मार्च तक चलेंगी अतिरिक्त बसें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि दिल्ली एवं गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या पहले से सुनिश्चित की जाएगी लखनऊ योगी सरकार ने होली पर्व पर यात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। इसके तहत 28 फरवरी से नौ मार्च तक अतिरिक्त बसों का संचालन किया जाएगा । इसके साथ ही, उत्कृष्ट कर्मचारियों को 3600 से 4500 रुपये तक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। अनुबंधित बसों के कर्मियों को नहीं मिलेगा अवकाश प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि दिल्ली एवं गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश से यात्रा का दबाव अधिक रहता है। इसलिए इन क्षेत्रों में बसों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या पहले से सुनिश्चित की जाएगी। यदि प्रारंभिक प्वाइंट से 60 प्रतिशत यात्री लोड मिलता है तो प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी। उन्होंने निर्देश दिए कि शत-प्रतिशत निगम बसों को ऑनरोड रखा जाए और अनुबंधित बसों के कर्मियों को पर्व अवधि में अवकाश न दिया जाए। वाहन स्वामी समय से मरम्मत कार्य पूर्ण कर बसें संचालन हेतु उपलब्ध कराएं। सुरक्षा और गुणवत्ता पर विशेष जोर योगी सरकार ने यात्रा के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। जाम या दुर्घटना की स्थिति को काबू कर संचालन सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रवर्तन दल लगातार ड्यूटी पर रहेंगे तथा चालकों और परिचालकों का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट किया जाएगा। बसों की तकनीकी स्थिति दुरुस्त रहे, सीटें ठीक हों, खिड़कियों के शीशे सही हों और फायर सेफ्टी उपकरण उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बस स्टेशनों और बसों में स्वच्छता व्यवस्था भी सुदृढ़ रखने को कहा गया है। कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना पर्व अवधि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चालक-परिचालकों (संविदा एवं आउटसोर्सिंग सहित) को विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। प्रतिदिन औसतन 300 किमी संचालन करने पर 360 रुपये प्रतिदिन की दर से 3600 रुपये मिलेंगे । 10 दिन की पूर्ण ड्यूटी और निर्धारित मानक पूरा करने पर 450 रुपये प्रतिदिन की दर से 4500 रुपये और निर्धारित मानक से अधिक किलोमीटर पर प्रति किमी 55 पैसे अतिरिक्त मानदेय प्रदान किया जाएगा। डिपो एवं क्षेत्रीय कार्यशालाओं में कार्यरत कर्मचारियों को भी 10 दिन लगातार ड्यूटी पर 2100 रुपये तथा नौ दिन की ड्यूटी पर 1800 रुपये एकमुश्त दिए जाएंगे। उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अतिरिक्त सम्मान प्रोत्साहन अवधि में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं अधिकारियों को क्षेत्रीय समिति की संस्तुति पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सर्वाधिक आय प्रति बस प्राप्त करने वाले तीन क्षेत्रों के क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं सेवा प्रबंधकों तथा 10 डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।

ऑपरेशन सिंदूर में चली ब्रह्मोस’, योगी का संदेश- यूपी बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब

‘ऑपरेशन सिंदूर में जो ब्रह्मोस चली थी न…’, योगी का संदेश- डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग यूपी का नया ब्रांड सिंगापुर में इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो इवेंट में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान की यात्रा पर हैं। अपनी यात्रा के पहले दिन उन्होंने सिंगापुर में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित किया। CM योगी आदित्यनाथ ने मंच से एक ऐसी बात कही जिसने उत्तर प्रदेश की डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग के उद्देश्य को वैश्विक पटल पर स्पष्ट शब्दों में बयान किया।  CM योगी ने कहा- ‘ऑपरेशन सिंदूर के अंदर जो ब्रह्मोस मिसाइल दागी गई थी ना, वह लखनऊ की ही है।’ सिंगापुर की धरती पर योगी का यह एक वाक्य पूरी दुनिया के लिए संदेश है। यह भारत की रक्षा क्षमता, आत्मनिर्भरता और उत्तर प्रदेश के उभरते औद्योगिक सामर्थ्य का वैश्विक मंच पर प्रदर्शन भी था। उन्होंने जिस आत्मविश्वास के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ब्रह्मोस मिसाइल का जिक्र किया, उसने इस चर्चा को स्थानीय सीमाओं से निकालकर अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बना दिया। ब्रांड यूपी की दबंग दस्तक आज के बदलते भू-राजनीतिक माहौल में रक्षा क्षेत्र केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की तकनीकी क्षमता, आर्थिक ताकत और रणनीतिक प्रभाव का भी सूचक बन चुका है। ऐसे समय में, जब सिंगापुर में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ब्रह्मोस जैसी मिसाइल अब लखनऊ में बन रही है, तो यह केवल एक वक्तव्य नहीं था, बल्कि ‘ब्रांड यूपी’ की दबंग दस्तक की स्प्ष्ट उद्घोषणा थी। ब्रह्मोस इसलिए है 'ब्रह्मास्त्र' ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को यूं ही ‘भारत का देसी ब्रह्मास्त्र’ नहीं कहा जाता। लगभग 3 मैक की रफ्तार से उड़ने वाली यह मिसाइल करीब 800 किलोमीटर की दूरी तक सटीक वार करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी अचूक निशाना, हवा में मार्ग बदलने की क्षमता और दुश्मन के रडार को चकमा देने की तकनीक है। यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे खतरनाक और प्रभावी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में इसका जिक्र इस बात को रेखांकित करता है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक देश नहीं रहा, बल्कि वह उन्नत हथियार प्रणालियों का निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। योगी आदित्यनाथ के बयान में जब यह कहा गया कि इस मिसाइल ने पाकिस्तान में आतंकियों और एयरबेस को नेस्तनाबूद कर दिया, तो यह संदेश भी स्पष्ट था कि भारत की सैन्य क्षमता अब निर्णायक और सटीक कार्रवाई करने में सक्षम है।  ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जिक्र के मायने  इस पूरी चर्चा का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उत्तर प्रदेश का डिफेंस कॉरिडोर है। योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर में जिस तरह से यूपी के डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर को प्रमोट किया, वह राज्य को रक्षा उत्पादन के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। छह नोड्स में विकसित हो रहा यह कॉरिडोर लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, चित्रकूट और अलीगढ़ जैसे शहरों को रक्षा उत्पादन के नक्शे पर ला रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस का निर्माण केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि यह उस बदलाव का प्रतीक है जिसमें उत्तर प्रदेश ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर ‘डिफेंस इंडस्ट्रियल हब’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल निवेश आकर्षित होगा, बल्कि उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।सिंगापुर में इस मुद्दे को उठाने के पीछे एक स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है।  सिंगापुर में ब्रह्मोस और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा के जरिए योगी आदित्यनाथ ने जहां भारत की सैन्य ताकत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का प्रयास किया, वहीं एमओयू के माध्यम से उन्होंने यह भी दिखाया कि उत्तर प्रदेश निवेश, विकास और रोजगार के नए युग में प्रवेश कर चुका है। यह ‘दबंग दस्तक’ केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि समग्र विकास की कहानी कहती है- जिसके मूल में ब्रह्मोस की रफ्तार के साथ-साथ तीव्र गति से हो रहा विकास भी समाहित है। सिंगापुर में इन्वेस्ट यूपी मेगा रोड शो इवेंट में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का संबोधन मुझे प्रसन्नता है कि कल से अब तक हम लोगों ने यहां पर टेमासेक, GIC, USC, सेट्स, UBPN, GSS ग्रीन्स, शेपकोर, ब्लैकस्टोन इत्यादि संस्थाओं के चेयरमैन एंड CEOs के साथ हमारी बड़ी सार्थक चर्चा हुई है और अन्य बिजनेस लीडर के साथ भी अलग-अलग चरणों में हमारी यहां पर बातचीत हुई।  यह कल से लेकर के अब तक के इस बिजी शेड्यूल के बीच यह हमारे कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जब पूरे सिंगापुर के आप सभी इंडस्ट्री लीडर्स के साथ में मुझे और मेरी टीम को संवाद करने का एक अवसर प्राप्त हो रहा है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सीएम योगी ने सिंगापुर के शीर्ष नेताओं से मुलाकात, एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए निवेश का किया आह्वान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर यात्रा का दूसरा दिन सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से मिले सीएम योगी एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए निवेश का दिया आमंत्रण सिंगापुर/लखनऊ अपने आधिकारिक दौरे के दूसरे दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री एवं व्यापार और उद्योग मंत्री गान किम योंग तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के समन्वय मंत्री और गृह मंत्री के. शनमुगम से मुलाकात की। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी में हुई इन चर्चाओं का केंद्र उत्तर प्रदेश में शहरी नियोजन, आंतरिक सुरक्षा ढांचे और डिजिटल गवर्नेंस में सिंगापुर की विशेषज्ञता का उपयोग करते हुए उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रहा। औद्योगिक निवेश पर हुई चर्चा गान किम योंग के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के 'प्रो-बिजनेस' वातावरण पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के विशाल लैंड बैंक और शीघ्र ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से मिलने वाली कनेक्टिविटी को रेखांकित किया। बैठक में दिल्ली एनसीआर में सिंगापुर की कंपनियों द्वारा औद्योगिक टाउनशिप स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई, जिसमें सेमीकंडक्टर निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन मॉड्यूल पर विशेष फोकस रहा। सुरक्षा एवं प्रबंधन पर जोर के. शनमुगम के साथ संवाद में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में बेहतर होती कानून-व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर चर्चा की, जिसमें सिंगापुर के तकनीक-एकीकृत पुलिसिंग मॉडल और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया। इन बैठकों के दौरान उपस्थित सिंगापुर के कारोबारी समुदाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने स्वतंत्र वित्तीय कोषों और निजी निवेशकों को राज्य के लॉजिस्टिक्स और डेटा सेंटर क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि नियामक प्रक्रियाओं के सरलीकरण और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस प्रणाली से उत्तर प्रदेश में बड़े प्रोजेक्ट्स के पूरे होने की समय-सीमा में उल्लेखनीय कमी आई है।

सीएम योगी के नेतृत्व में सिंगापुर में मिली बड़ी सफलता, सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के साथ हुआ करार

सिंगापुर के साथ यूपी की बड़ी रणनीतिक साझेदारी, इन्वेस्ट यूपी व एससीई के बीच एमओयू सीएम योगी के नेतृत्व में सिंगापुर में मिली बड़ी सफलता, सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के साथ हुआ करार संस्थागत क्षमता, नीतिगत ढांचे और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर साथ मिलकर करेंगे काम सिंगापुर/लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी इन्वेस्ट यूपी और सिंगापुर सरकार के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था सिंगापुर कोऑपरेशन एंटरप्राइज (एससीई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता उत्तर प्रदेश में संस्थागत क्षमता व नीतिगत ढांचे को सुदृढ़ बनाने और इकोसिस्टम के विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। सतत विकास और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर फोकस एमओयू के तहत दोनों पक्ष विषयगत ज्ञान के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और परामर्श सेवाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश में सतत आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और आधुनिक अवसंरचना के विकास को गति देने के लिए मिलकर कार्य करेंगे। इन क्षेत्रों में होगा सहयोग समझौते के अनुसार, दोनों पक्ष न सिर्फ स्टडी विजिट्स व लीडरशिप डेलिगेशन का आयोजन करेंगे, बल्कि ट्रेनिंग व कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रमों का खाका तैयार कर उसे लागू भी कराएंगे। इससे लोगों की कार्यक्षमता व कौशल, दोनों को बेहतर किया जा सकेगा। इसके अलावा सलाह व मार्गदर्शन उपलब्ध कराना, साथ मिलकर तकनीकी सहयोग की परियोजनाएं तैयार करना और उन्हें लागू करना, सरकारी व निजी क्षेत्र से जुड़े संबंधित लोगों व संस्थाओं का सहयोग हासिल करना भी एमओयू के प्रावधानों में शामिल है। आवश्यकता पड़ने पर विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अलग से लिखित समझौते किए जाएंगे, जिनमें कार्यक्षेत्र, समयसीमा और वित्तीय प्रावधान स्पष्ट किए जाएंगे। दो माह के भीतर विस्तृत परियोजना समझौतों पर बातचीत शुरू की जाएगी और छह माह के भीतर उन्हें अंतिम रूप देने का प्रयास किया जाएगा।  वैश्विक अनुभव का मिलेगा लाभ इस साझेदारी से उत्तर प्रदेश को सिंगापुर के प्रशासनिक अनुभव, शहरी नियोजन, औद्योगिक क्लस्टर विकास, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुभव का लाभ मिलेगा। इस समझौते को उत्तर प्रदेश की वैश्विक सहभागिता और लॉन्ग टर्म विजन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

मप्र में 34.25 लाख मतदाता हटे, भाजपा और कांग्रेस दोनों कराएंगी सत्यापन

भोपाल  Madhya Pradesh में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एसआइआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने सियासी दलों की चिंता बढ़ा दी है। अंतिम सूची से 34.25 लाख मतदाताओं के नाम हटने के बाद खासतौर पर Bharatiya Janata Party सक्रिय हो गई है। पार्टी को आशंका है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कमी आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा ने बूथ स्तर पर रणनीति बनाते हुए अपने बूथ लेवल एजेंट बीएलए को सक्रिय करने का निर्णय लिया है। बूथवार सत्यापन का अभियान भाजपा अब बूथवार उन मतदाताओं की तलाश करेगी, जो या तो स्थानांतरित हो गए हैं या अनुपस्थित दर्ज किए गए हैं। यह संख्या 31.50 लाख से अधिक बताई जा रही है। पार्टी का कहना है कि यदि ये मतदाता पात्र हैं तो उनके नाम दोबारा सूची में जुड़वाने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा प्रदेश एसआइआर टोली के सहसंयोजक एएस उप्पल ने अभियान चलाने की घोषणा की है। कांग्रेस भी करेगी घर घर मिलान Indian National Congress ने भी अपने बीएलए के माध्यम से हटाए गए मतदाताओं का सत्यापन कराने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि वह पुरानी, प्रारूप और अंतिम मतदाता सूची का मिलान कराएगी। यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो न्यायालय का रुख किया जाएगा। आंकड़ों में बदलाव की तस्वीर     एसआइआर से पहले कुल मतदाता 5,74,06,143 थे। प्रारूप सूची के बाद यह संख्या घटकर 5,31,31,983 रह गई। अंतिम सूची में कुल मतदाता 5,39,81,065 दर्ज किए गए, यानी प्रारूप के बाद 8,49,082 की शुद्ध वृद्धि हुई। पूर्व सूची के अनुरूप 34,25,078 नाम हटाए गए।     श्रेणीवार देखें तो 8।46 लाख नाम मृतक श्रेणी में हटे, 31।50 लाख अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए गए और 2।77 लाख नाम दो या अधिक स्थानों पर दर्ज थे। पुरुष मतदाता 2,93,91,548 से घटकर 2,79,04,975 और महिला मतदाता 2,80,13,362 से घटकर 2,60,75,186 रह गए।     राजनीतिक दलों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दल बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं।  

SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल का TMC ने किया स्वागत, EC पर लगाए बड़े आरोप

कोलकाता पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मियां जारी है। इसी कड़ी में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने भारत निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाया है। तृणमूल कांग्रेस ने एक्स पर लिखा है, भारत निर्वाचन आयोग ने बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के संचालन पर अपना नियंत्रण प्रभावी रूप से खो दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लगातार आग्रह किए जाने पर इसके नियम और शर्तें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित की जा रही हैं। आज एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय को चुनाव आयोग की घोर अक्षमता और प्रशासनिक विफलता के कारण उत्पन्न भारी गतिरोध को दूर करने के लिए पड़ोसी राज्यों के न्यायाधीशों की तैनाती की अनुमति देने के लिए विवश होना पड़ा। यह हस्तक्षेप अपने आप में बहुत कुछ कहता है। कोर्ट ने दोहराया कि चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचित या बाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वीकृत सभी दस्तावेज, जिनमें आधार और माध्यमिक प्रवेश पत्र शामिल हैं, लंबित दावों और आपत्तियों के निपटान के लिए स्वीकार किए जाने चाहिए। यह स्पष्ट निर्देश भाजपा-चुनाव आयोग द्वारा मनमाने ढंग से नियमों को बदलने और दस्तावेजी मानकों में हेरफेर करने के प्रयास को विफल कर देता है। बंगाल में मतदाताओं को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने, डराने-धमकाने और परेशान करने की साजिश एक बार फिर न्यायिक बाधा से टकरा गई है। चुनाव आयोग जैसे संस्थानों को कानून की सीमाओं के भीतर कार्य करना चाहिए, न कि पक्षपातपूर्ण हितों के इशारे पर। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया में ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अफसर शामिल किए जाने के आदेश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर विवाद पर जारी सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इनके खर्च का वहन निर्वाचन आयोग को करने का आदेश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी को पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है। कोर्ट के इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस ने स्वागत किया है।

‘मोहब्बत की दुकान’ पर सियासी वार: ब्रजेश पाठक बोले- राहुल गांधी फैला रहे अराजकता और भारत विरोध

लखनऊ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंगलवार को भाजपा राज्य मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी तथाकथित 'मुहब्बत की दुकान' में केवल 'नफरत, अराजकता, दंगा और भारत विरोध' का सामान मिल रहा है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी झूठ की राजनीति के उस स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां से वापसी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार पर लगातार लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन और भ्रामक हैं। पाठक ने कहा कि इस तरह का आचरण न केवल निंदनीय है, बल्कि राष्ट्रहित के विरुद्ध भी है। उन्होंने एआई समिट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने वहां देश की गरिमा को ठेस पहुंचाई और भारत को बदनाम करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा इस कृत्य का समर्थन करना यह दर्शाता है कि पूरी पटकथा के सूत्रधार वही हैं। ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के नाम पर 'नग्नता और अराजकता' स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति का उद्देश्य भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि को धूमिल करना है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फेक न्यूज और अफवाहों के जरिए जनता को भड़काने की कोशिश की जा रही है। पाठक ने कहा कि देश की जनता सब देख रही है और नकारात्मक राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता तथ्यों के आधार पर निर्णय लेगी और कांग्रेस के 'झूठ के साम्राज्य' को खारिज कर देगी।