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Manipur Political Update: राष्ट्रपति शासन हटाने का ऐलान, केंद्र के फैसले से नई सियासी हलचल

नई दिल्ली मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त कर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर इसकी घोषणा की। यह फैसला 4 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा। नोटिफिकेशन के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 356 के खंड (2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मणिपुर राज्य में 13 फरवरी 2022 को लागू की गई राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को वापस ले लिया है। इस आदेश के साथ ही राज्य में केंद्रीय शासन की व्यवस्था समाप्त हो गई है।

SIR मुद्दे पर ममता का दर्द: CJI से बोलीं— ‘न्याय के लिए भटक रही हूं, हाल बंधुआ मजदूर जैसा’

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तब अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला, जब खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दलीलें रखने के लिए पेश हुईं। उन्होंने एसआईआर का विरोध करते हुए सीजेआई सूर्यकांत की बेंच के सामने कहा कि हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा, हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखी हैं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। उन्होंने चुनाव आयोग पर पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। 'बार एंड बेंच' वेबसाइट के अनुसार, ममता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान भी पेश हुए और कहा कि अपमैप्ड वोटर 32 लाख हैं। लॉजिकल गड़बड़ी वाली लिस्ट में 1.36 करोड़ हैं। 63 लाख सुनवाई पेंडिंग है अभी। उन्होंने बड़ी संख्या में अनमैप्ड वोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि सुधार के उपायों के लिए बहुत कम समय बचा है। ममता के वकील की तरफ से कुछ उदाहरण भी पेश किए गए, जिसमें बताया गया कि कैसे नामों में गड़बड़ी आई। वकील ने कहा कि हमने आपको असली वोटर्स के उदाहरण दिए हैं। कृपया अपेंडिक्स एक देखें.. चिराग टिबरेवाल। उनकी गड़बड़ी पिता के नाम में मिसमैच थी क्योंकि पिता के नाम में बीच में कुमार आता है। मुझे नोटिस देकर बुलाया गया था। फिर आते हैं अजीमुद्दीन खान…पिता का नाम बंगाली में अलाउद्दीन खान दिखाता है… तो बंगाली से इंग्लिश में… इसमें गलती हो सकती है। 'मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा' सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने भी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा, ''मैं आपकी दया के लिए आभारी हूं। जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब हमें लगा कि हमें कहीं से भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह चिट्ठियां लिखीं। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं। मैं यही पसंद करती हूं। मैं अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं।'' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मैं आपको फोटो दिखाती हूं और यह तस्वीर मेरी नहीं है। यह बड़े अखबारों ने छापी है। एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ डिलीट करने के लिए है। मान लीजिए शादी के बाद एक बेटी ससुराल जाती है। सवाल किए जाते हैं कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। ये लोग यही कर रहे हैं। कुछ बेटियां जो ससुराल चली गई, उनके नाम डिलीट कर दिए गए। गरीब लोग कभी कभी फ्लैट खरीदते हैं, कभी-कभी वे शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे के भी नाम डिलीट कर दिए गए। चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि यह गलत मैपिंग हो रही है। चुनाव से ठीक पहले सिर्फ पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। वे दो महीने में ही वह काम करना चाहते हैं, जिसमें दो साल लग जाते हैं। बीएलओ ने आत्महत्या कर ली और उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर यह आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया गया, असम को क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने को कहा है। सोमवार को इस मामले की फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि बनर्जी अपने वकीलों के साथ कोर्ट रूम नंबर एक में मौजूद रहीं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम पर एक गेट पास जारी किया गया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने बनर्जी और तीन अन्य लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं को मोस्तारी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ने दायर किया है।  

काम में ढिलाई पड़ी भारी तो होगा एक्शन! मंत्री का अधिकारियों को साफ संदेश

लखनऊ योगी सरकार में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि अगर विभागीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता अथवा अनियमितता मिली तो सख्त ऐक्शन लेंगे। चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा, जिससे विभाग में सकारात्मक, उत्तरदायी एवं परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्यों में कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारी एवं कार्मिकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ये निर्देश मंगलवार को यहां उदयगंज स्थित सिंचाई विभाग मुख्यालय में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए। शारदा संगठन की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने विभागीय कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट एवं कड़े निर्देश दिए। इसके साथ ही मंत्री ने विभिन्न निर्माण कार्यों की निर्माण कार्य के पूर्व की स्थिति एवं निर्माण पूर्ण होने के पश्चात की स्थिति का तुलनात्मक मूल्यांकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों, गुणवत्ता एवं समयसीमा के अनुरूप पूर्ण किए जाएं, जिससे योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों एवं आम जनता तक पहुंच सके। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि वे स्वयं शीघ्र ही विभिन्न निर्माण कार्यों का भौतिक निरीक्षण करेंगे, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी अथवा अनियमितता की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। पूरी प्रक्रिया पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष एवं नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। अंत में उन्होंने अधिकारियों से पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता सिंचाई परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कर प्रदेश के किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है। समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागध्यक्ष सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग संदीप कुमार, प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन अशोक कुमार सिंह, मुख्य अभियंता शारदा संगठन, मुख्य अभियंता शारदा सहायक, सिंचाई विभाग (यांत्रिक संगठन) के मुख्य अभियंता तथा संबंधित संगठनों के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता सहित सिंचाई विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।  

CM से वकील बनीं ममता बनर्जी, सुप्रीम कोर्ट में SIR मामले पर खुद करेंगी दलील—बन सकता है इतिहास

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।  

7 साल बाद रिया चक्रवर्ती की वापसी, सुशांत केस के बाद लगे इंडस्ट्री बायकॉट के बाद नया अध्याय

मुंबई  सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी, लेकिन अब एक्ट्रेस एक्टिंग में धमाकेदार कमबैक करने को तैयार हैं. मंगलवार शाम मुंबई में 'नेक्स्ट ऑन नेटफ्लिक्स' इवेंट में ऐलान हुआ. रिया नेटफ्लिक्स की सीरीज 'फैमिली बिजनेस' एक्टिंग की दुनिया में वापसी कर रही हैं. इसमें अनिल कपूर और विजय वर्मा भी लीड रोल में हैं. 7 साल बाद रिया का कमबैक रिया ने इंस्टाग्राम पर शो का टीजर शेयर किया है. टीजर के कैप्शन में लिखा है- नया खून पुराने पैसों से मिला. जब इतनी ताकत दांव पर हो, तो फैमिली और बिजनेस की लाइनें धुंधली पड़ जाती हैं. देखिए फैमिली बिजनेस, जल्द आ रही है, सिर्फ नेटफ्लिक्स पर. एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर टीजर शेयर करते हुए लिखा कि 7 साल बाद. उन्होंने कैप्शन के साथ हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी बनाया.  फैन्स ने किया रिएक्ट  रिया चक्रवर्ती के कमबैक को लेकर फैन्स को एक्साइटेड हो उठे हैं. एक्ट्रेस के चाहने वालों ने वीडियो पर कमेंट करके खुशी जाहिर की है. एक यूजर ने उनके पोस्ट पर कमेंट किया, देर आए दुरुस्त आए. दूसरे ने लिखा, रिया को स्क्रीन पर वापस देखकर बहुत खुशी हुई. वो इस कमबैक की हकदार हैं. अन्य ने कहा कि इंतजार नहीं हो रहा. एक फैन ने कहा कि रिया की जर्नी हिम्मत की मिसाल है. उन्हें सिर्फ सम्मान नहीं, माफी भी मिलनी चाहिए.  जब विवादों में आईं रिया  2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया की जिंदगी में बड़ा भूचाल आ गया था. सितंबर 2020 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उनके व्हाट्सएप पर ड्रग पेडलर्स के चैट्स मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन लंबे समय तक ट्रैवल पर पाबंदी रही. उन्हें इंडस्ट्री ने भी बायकॉट कर दिया था. एक्ट्रेस से प्रोजेक्ट्स छीन लिए गए थे.  2025 में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में रिया को सभी आरोपों से क्लीन चिट दे दी, जिससे इस चैप्टर का आधिकारिक अंत हुआ. ये सब उनके लिए बहुत बड़ा झटका था.  तमाम ताने और आरोपों से गुजरने के बाद रिया एक्टिंग से धमाल मचाने के लिए तैयार हैं. 

संकल्प, संवेदनशीलता और सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानी

संकल्प, संवेदनशीलता और सशक्तिकरण की प्रेरणादायी कहानी लखनऊ खुशबू, निवासी पारा, जनपद लखनऊ, एक दिव्यांग महिला हैं जो दोनों पैरों से दिव्यांग होने के कारण लंबे समय से चलने-फिरने में अत्यधिक असमर्थ थीं। रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कार्यों के साथ-साथ अपने 06 वर्षीय पुत्र के साथ आवागमन उनके लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। सीमित संसाधनों और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी समस्या को साहसपूर्वक प्रशासन के समक्ष रखा। दिनांक 29.01.2026 को जनता दर्शन के दौरान खुशबू ने जिलाधिकारी, लखनऊ महोदय को प्रार्थना पत्र देकर इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर/ई-स्कूटी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने बच्चे की देखभाल के साथ-साथ सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। जिलाधिकारी महोदय द्वारा मामले को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लेते हुए त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी के निर्देशन में जिला दिव्यांगजन अधिकारी श्री शशांक सिंह द्वारा न केवल उनकी समस्या का समाधान कराया गया, बल्कि इसी क्रम में उनके 06 वर्षीय पुत्र का विद्यालय में दाखिला भी जिलाधिकारी महोदय के सहयोग से सुनिश्चित कराया गया, जिससे खुशबू अत्यंत प्रसन्न हुईं। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा दिव्यांगजनों हेतु ई-स्कूटी/ई-वाहन की कोई शासकीय योजना संचालित नहीं है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया कि संबंधित दिव्यांग महिला को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। जिलाधिकारी महोदय के उक्त निर्देशों के अनुपालन में जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी श्री शशांक सिंह द्वारा तत्परता से प्रयास करते हुए CSR सहयोग के माध्यम से दिनांक 04.02.2026 को जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण कार्यालय, लखनऊ में खुशबू को इलेक्ट्रिक 3-व्हील स्कूटी उपलब्ध कराई गई। ई-स्कूटी प्राप्त कर खुशबू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि अब उनके जीवन में एक नया सकारात्मक परिवर्तन आया है। वे बिना किसी सहारे के अपने बच्चे के साथ आ-जा पा रही हैं, दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर बनकर भविष्य में अपना रोजगार करने की दिशा में भी आगे बढ़ सकेंगी। इससे वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर पाएंगी। श्रीमती खुशबू ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, जिलाधिकारी महोदय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का इस सहयोग हेतु हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।

सरकारी अफसरों के लिए अलर्ट! मोहन सरकार ने रोक दी छुट्टियां, मुख्यालय से दूर रहने पर कार्रवाई

भोपाल  मध्यप्रदेश में विधानसभा के बजट सत्र को लेकर सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त शिकंजा कस दिया है। सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी अधिकारी-कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय (Headquarters) नहीं छोड़ेगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होकर 6 मार्च तक चलेगा, जिसमें राज्य का वार्षिक बजट पेश किया जाएगा। सत्र को सुचारु रूप से संचालित करने और विधानसभा प्रश्नों के समय पर जवाब सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ा तो एक्शन तय विधानसभा सत्र को ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर के जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने जिलों में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।  आदेश के मुताबिक— अधिकारी किसी भी हाल में बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे.. अपरिहार्य स्थिति में अपर कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य,अवकाश के लिए भी पूर्व स्वीकृति जरूरी,नियम तोड़ने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। विधानसभा प्रश्नों पर खास फोकस सरकार ने विधानसभा से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए — नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश, विधानसभा प्रश्नों के तत्काल और सही उत्तर भेजने की जिम्मेदारी ,जिला कार्यालयों में कंट्रोल रूम स्थापित करने के आदेश जारी किए हैं। स्पष्ट किया गया है कि प्रश्नों के जवाब में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का साफ संदेश सरकार का स्पष्ट संदेश है — बजट सत्र के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहेगा। मुख्यालय से गैरहाजिरी अब नहीं चलेगी। लापरवाही पर सीधा एक्शन होगा।

जनसुनवाई में कलेक्टर ने आमजन की समस्याओं पर ध्यान दिया, त्वरित निराकरण के आदेश

कलेक्टर ने सुनीं आमजन की समस्याएं, त्वरित निराकरण के दिए निर्देश साप्ताहिक जनसुनवाई में 90 आवेदनों पर सुनवाई   डिंडौरी    जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आज बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने एक-एक कर आवेदकों से मुलाकात की और उनकी शिकायतों के निराकरण के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।            कलेक्ट्रेट सभागार में  आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आम नागरिकों की समस्याएं सुनी गईं तथा कई आवेदनों का मौके पर ही समाधान कराया गया। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए नागरिकों द्वारा समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित कुल 90 आवेदन प्रस्तुत किए गए। जिन मामलों का तत्काल निराकरण संभव नहीं हो सका, उनमें आवेदकों को समय-सीमा निर्धारित कर आवश्यक आश्वासन प्रदान किया गया।         जनसुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत पोंड़ी माल विकासखंड डिंडौरी की आवेदिका श्रीमती अंधियारो बाई धुर्वे (आयु 70 वर्ष) एवं श्री गनपत सिंह (आयु 75 वर्ष) द्वारा विगत 10 माह से पेंशन राशि प्राप्त नहीं होने की शिकायत प्रस्तुत की गई। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए।      कलेक्टर के निर्देश पर सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दोनों हितग्राहियों की ई-केवायसी की गई, जिससे आगामी माह से उनके खाते में पेंशन राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।       इसी क्रम में ग्राम बहेरा टोला, ग्राम पंचायत माधोपुर विकासखंड डिंडौरी के आवेदक श्री इन्द्रपाल सिंह (आयु 82 वर्ष) एवं श्रीमती उर्मिला बाई (आयु 78 वर्ष) ने भी वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की समस्या जनसुनवाई में रखी। जांच में पाया गया कि ई-केवायसी पूर्ण न होने के कारण उनकी पेंशन बंद थी। अपर कलेक्टर के निर्देशानुसार पुनः ई-केवायसी की गई, जिससे आगामी माह से पेंशन भुगतान पुनः प्रारंभ हो जाएगा। इसी प्रकार ग्राम ईश्वरपुर बंगवार ग्राम पंचायत दामी तितराही जनपद पंचायत समनापुर के श्री प्रेमलाल झिगराम ने जनसुनवाई में आवेदन दिया कि मेरे पुत्र पवन कुमार झिगराम की मृत्यु  28 सितंबर 2025 को हुआ है जिसका ग्राम पंचायत के द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। उक्त मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने हेतु जनसुनवाई में पहुंचे जहां पर अपर कलेक्टर ने योजना एवं सांख्यिकी विभाग के श्री अभिषेक बंसल को निराकरण करने के लिए निर्देशित किया जिस पर उन्होंने समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक घंटे के अंदर मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित हितग्राही को जनसुनवाई के दौरान सौंपा गया।         अपर कलेक्टर ने जिले के समस्त हितग्राहियों से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति की पेंशन राशि बंद हो गई है अथवा इस प्रकार की कोई समस्या है, तो वे अपने ग्राम पंचायत के सचिव, रोजगार सहायक, मोबिलाइज़र अथवा संबंधित जनपद पंचायत कार्यालय में संपर्क कर समस्या का समाधान करा सकते हैं, जिससे जिला मुख्यालय आने में समय व परेशानी से बचा जा सके।          जनसुनवाई में आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय भुगतान न होने पर उन्होंने जनसुनवाई में गुहार लगाई है कि ’ओम पारस मेन पावर सर्विस’ लिमिटेड, भोपाल के माध्यम से जिले के विभिन्न सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने आवेदन सौंपा। डाटा एंट्री ऑपरेटर, वार्डवॉय और सिक्योरिटी गार्ड सहित अन्य कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह का मानदेय अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने अपर कलेक्टर से मांग की है कि उनके मानदेय भुगतान के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की जाए। जिस पर अपर कलेक्टर ने संबंधित विभाग को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए तथा अपर कलेक्टर के द्वारा लिखित आवेदन भी कंपनी को मानदेय भुगतान  हेतु प्रेषित किया जाए। इसी तरह ग्राम मुंगेला विकासखंड समनापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजरा के सरपंच और ग्रामीणों ने सामुहिक रूप से लिखित आवेदन के साथ प्राथमिक शाला के जर्जर भवन की स्थिति की शिकायत की। बच्चों को स्कूल में अध्ययन में समस्या आ रहीं है। ग्रामीणों ने नए भवन निर्माण की मांग की। जिस पर अपर कलेक्टर ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान अधिकारी को निराकरण करने के निर्देश दिए।      ग्राम मोहगांव माल निवासी आवेदक ने अपने पिता की मृत्यु के उपरांत प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत लंबित क्लेम राशि के भुगतान हेतु आवेदन दिया। जिस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारी को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए।       कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्राप्त आवेदनों की गंभीरता से जांच करें और समय सीमा के भीतर हितग्राहियों को लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।     जनसुनवाई के दौरान अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत  पंकज जैन, एसडीएम डिंडौरी सुश्री भारती मेरावी, डिप्टी कलेक्टर  वैद्यनाथ वासनिक, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रियांशी जैन, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग श्री राजेन्द्र जाटव, एलडीएम  रविशंकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

टैरिफ डील का बड़ा खुलासा: क्या किसानों को सच में मिला फायदा?

वाशिंगटन अमेरिका के साथ सोमवार को घोषित व्यापार समझौते को लेकर कयासों का बाजार गरम है। संसद से लेकर सड़कों तक विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है। इस बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत उन देशों से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा जिन पर प्रतिबंध नहीं हैं। गौरतलब है कि भारत रूस से तेल खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हुए हैं। किसानों के हितों से समझौता नहीं दरअसल, भारत द्वारा अपने राजनीतिक रूप से संवेदनशील कृषि क्षेत्र को अमेरिका की अधिक पहुंच के लिए खोलने से इनकार करना मुक्त व्यापार समझौते के दौरान वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच एक प्रमुख विवाद का मुद्दा रहा है। नई दिल्ली सोयाबीन और डेयरी जैसे कृषि क्षेत्रों को खोलने के लिए अनिच्छुक रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को, जिन्हें अब तक संरक्षित रखा गया है, आगे भी संरक्षित रखा जाएगा। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि भारत ने समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के हिस्से के रूप में कुछ कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच की पेशकश की है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों के लिए चुनिंदा बाजारों तक पहुंच की पेशकश की है। प्रतिबंध-मुक्त तेल खरीदेगी सरकार वैश्विक व्यापार डेटा प्रदाता केप्लर के अनुसार, ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाने के बावजूद भारत प्रतिदिन लगभग 1.5 मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है, जो कुल भारतीय आयात का एक तिहाई से अधिक है। सरकार के सूत्रों ने कहा कि भारत प्रतिबंध-मुक्त दुनिया भर के देशों से कच्चे तेल की खरीद को दर के आधार पर जारी रखेगा। सूत्रों ने बताया कि प्रतिबंध लागू होने के दौरान हमने वेनेजुएला से तेल नहीं खरीदी थी। अब प्रतिबंध हट गए हैं, इसलिए हम खरीदेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली ऊर्जा खरीद में अपने नागरिकों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। बता दें कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन भारतीय वस्तुओं पर अपना टैरिफ मौजूदा स्तर से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इसके बदले में नई दिल्ली रूस से तेल की खरीद बंद करने और इसके बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हो जाएगी। 500 अरब डॉलर के व्यापार ट्रंप ने यह भी कहा कि व्यापार समझौते के तहत भारत ने कई उपायों पर सहमति जताई है, जिनमें टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को 'शून्य' तक कम करना तथा ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि उत्पाद और कोयले सहित 500 अरब डॉलर से अधिक के अमेरिकी सामान खरीदना शामिल है। सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के साथ 500 अरब डॉलर की व्यापार प्रतिबद्धता की शर्तों में विमान सौदों और अन्य संबंधित निवेशों को शामिल किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि नया व्यापार समझौता भारत के लिए अपार आर्थिक लाभ के द्वार खोलेगा। भारतीय सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात सालाना आधार पर 15.88 प्रतिशत बढ़कर 85.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 46.08 अरब डॉलर रहा। इससे पहले एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी उत्पादों को खरीदने की प्रतिबद्धता में फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, रक्षा, पेट्रोलियम और विमान जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह प्रक्रिया कई वर्षों में पूरी की जाएगी।

सालाना 6 हजार से बढ़कर 9 हजार! बिहार सरकार ने पीएम किसान और कर्पूरी निधि में की बढ़ोतरी

पटना बिहार में किसान सम्मान निधि योजना की राशि डेढ़ गुना बढ़ा दी गई है। इसके लिए नीतीश सरकार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इसके तहत किसानों को साल में 3000 रुपये एक्स्ट्रा मिलेंगे। यह राशि पीएम किसान सम्मान निधि की मौजूदा राशि के साथ ही डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी। मंगलवार को बिहार विधानमंडल में पेश हुए बजट में इसकी घोषणा की गई। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अभी तक हर साल कुल तीन किस्तों में लाभार्थियों को कुल 6000 रुपये दिए जाते हैं। एक किस्त में किसानों के खाते में 2000 रुपये आते हैं। अब बिहार सरकार ने कर्पूरी ठाकुर के नाम पर अलग से किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इसके तहत प्रति किस्त 1000 और कुल तीन किस्तों में 3000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस तरह, बिहार के किसानों को पीएम किसान एवं जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि, दोनों योजनाओं को मिलाकर हर किस्त में कुल 3000 रुपये मिलेंगे। यानी कि साल में कुल तीन किस्तों में बिहार के किसानों को 6000 की बजाय कुल 9000 रुपये दिए जाएंगे। NDA ने चुनावी संकल्प पत्र में किया था वादा- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में कर्पूरी ठाकुर के नाम से किसानों के लिए नई योजना शुरू करने का वादा किया था। एनडीए ने संकल्प किया था कि अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं तो पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले लाखों किसानों को साल में 3000 रुपये अतिरिक्त देंगे। पिछले बिहार चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीते नवंबर में नई सरकार का गठन हुआ। अब सरकार के पहले पूर्णकालिक बजट में इस योजना की शुरुआत करने की घोषणा कर दी गई है। इस योजना का लाभ बिहार के लगभग 73 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा।