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2026 में VW का धमाका: भारतीय बाजार में आएंगी 5 नई कारें, Tayron R-Line की होगी शुरुआत

मुंबई  जर्मन कार निर्माता Volkswagen ने हाल ही में अपनी नई Volkswagen Tayron R-Line का खुलासा किया है. अब Volkswagen India ने 2026 कैलेंडर वर्ष के लिए अपने आने वाले प्रोडक्ट प्लान की घोषणा की है. कंपनी ने जानकारी दी है कि वह भारतीय बाज़ार के लिए 5 नए प्रोडक्ट लॉन्च करने वाली है, जिसमें साल के हर क्वार्टर में एक लॉन्च का प्लान है. कंपनी के आने वाले मॉडल SUV, सेडान और हैचबैक बॉडी स्टाइल में होंगे, जिनका फोकस मार्केट के प्रीमियम सेगमेंट पर होगा. जानकारी के अनुसार, Tayron R-Line आने वाले मॉडल्स में से सबसे पहली होने वाली है, जो भारतीय बाजार में लॉन्च की जाएगी. Volkswagen का प्रोडक्ट इंटरवेंशन रेगुलर लॉन्च के ज़रिए कंपनी की प्रासंगिकता और जुड़ाव बनाए रखने पर केंद्रित है. कंपनी का कहना है कि साल 2026 के लिए उसके बड़े लक्ष्य एस्पिरेशनल प्रीमियम पेशकश, बेहतर कस्टमर इंटरैक्शन और क्यूरेटेड ब्रांड अनुभवों पर केंद्रित हैं. जहां बाकी चार मॉडलों के बारे में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है, वहीं Volkswagen ने कन्फर्म किया है कि हर नया मॉडल एक अलग प्रीमियम कस्टमर सेगमेंट को टारगेट करेगा. Volkswagen Tayron R-Line इस पहल को लीड करेगी और इसे 2026 की पहली तिमाही में लॉन्च किया जाना है. Volkswagen Tayron R-Line में क्या है खास Volkswagen Tayron R-Line की बात करें तो यह भारत में कंपनी की फ्लैगशिप SUV के तौर पर लॉन्च की जाएगी, और इसे Tiguan R-Line से ऊपर पोजिशन किया जाएगा. यह Volkswagen Tiguan Allspace के भारतीय बाजार में बंद होने के बाद प्रीमियम थ्री-रो SUV सेगमेंट में कंपनी की वापसी है. इस 7-सीटर SUV को MQB EVO प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा, और इसे फाइव-स्टार यूरो NCAP सेफ्टी रेटिंग मिली है. इसमें 2,789 mm का लंबा व्हीलबेस दिया गया है, जो Volkswagen Tiguan से 109 mm ज़्यादा है, ताकि तीसरी रो को जगह मिल सके. Volkswagen Tayron R-Line में स्पोर्टी बंपर, R-Line एक्सटीरियर बैजिंग और 19-इंच के अलॉय व्हील लगाए गए हैं. इसके केबिन में ड्राइवर की तरफ झुकी हुई 15-इंच की टचस्क्रीन और डिजिटल इंस्ट्रूमेंटेशन दिया गया है. इस कार में वेंटिलेटेड और मसाज वाली फ्रंट सीटें, लेदर अपहोल्स्ट्री, पैनोरमिक सनरूफ, मैट्रिक्स LED हेडलैंप, 30-कलर एम्बिएंट लाइटिंग और तीसरी रो को फोल्ड करने पर 850 लीटर तक का बूट स्पेस जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इंजन की बात करें तो संभावना जताई जा रही है कि Volkswagen Tayron R-Line में वही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन दिया जाएगा, जो Tiguan R-Line में देखने को मिलता है. यह इंजन 7-स्पीड डुअल-क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स और ऑल-व्हील-ड्राइव सिस्टम के ज़रिए 204 hp की पावर और 320 Nm का टॉर्क देता है.

कस्टम हायरिंग स्कीम से प्रतीक ने आसान बनाया खेती का काम, बढ़ी उत्पादकता

कस्टम हायरिंग स्कीम से प्रतीक ने अपने कृषि कार्य को बनाया आसान टिटगांवकलां के किसानों को मिल रही है कृषि यंत्रों की सुविधा आधुनिकता एवं तकनीक से जुड़ाव के साथ ही हुई समय की बचत भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये संकल्पित है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण के माध्यम से न केवल उत्पादन बढ़ रहा है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे है। ऐसी ही कहानी बुरहानपुर जिले के ग्राम टिटगाँवकलां के युवा प्रतीक पाटील की है। प्रतीक के पिता किसान है। प्रतीक अपने पिताजी के साथ कई वर्षों से कृषि कार्य कर रहे है, वे मुख्य रूप से केला, चना, मक्का, गन्ना, सोयाबीन, तुअर, गेहूँ, केला, प्याज आदि फसल लगाते हैं। प्रतीक बताते हैं कि खेती के दौरान महसूस किया कि गांवों में समय पर ट्रेक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों की अनुपलब्धता किसानों की सबसे बड़ी समस्या है। इससे न केवल खेती में देरी होती है, बल्कि उत्पादन भी प्रभावित होता है। उन्होंने सोचा क्यों न मैं कृषि यंत्रों की मदद से अपने कार्य को आसान और सुविधाजनक बना पाऊँ। प्रतीक ने कृषि कार्य में आधुनिक तकनीकियों को जोड़कर आजीविका और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का इरादा बनाया। कंप्यूटराइज्ड लॉटरी के माध्यम से हुआ चयन प्रतीक बताते है कि, मुझे कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित निजी कस्टम हायरिंग स्कीम की जानकारी सहायक कृषि यंत्री कार्यालय, बुरहानपुर से प्राप्त हुई। इस योजना ने प्रतीक के सपनों को नई दिशा दी। योजना का लाभ लेने के लिये प्रतीक ने ऑनलाइन आवेदन किया और कंप्यूटराइज्ड लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित हुये।  योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर  प्रतीक पाटील ने बताया कि मुझे योजना के तहत करीबन 20.5 लाख की परियोजना लागत पर ऋण  स्वीकृत हुआ। इससे मैंने अक्टूबर, 2025 में ‘‘गुरूकृपा कस्टम हायरिंग केन्द्र’’ नाम से ट्रेक्टर सहित आधुनिक  कृषि यंत्र क्रय कर निजी कस्टम हायरिंग केन्द्र की स्थापना की है। अब प्रतीक पाटील अपने गांव एवं आसपास के क्षेत्र के लगभग 40 किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहे हैं। प्रतीक बताते है कि केन्द्र से वह किसानों को ट्रेक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर, मल्चिंग मशीन, मल्टिक्रोप थ्रेशर, चापकटर, सीडाकम फर्टिलाईजर इत्यादि यंत्र उपलब्ध कराते है। बीते दो महीनों में प्रतीक ने करीबन 2.6 लाख से अधिक का कार्य किया है। कस्टम हायरिंग योजना से न केवल प्रतीक को लाभ मिला है बल्कि क्षेत्र के किसानों को भी फायदा हुआ है। कस्टम हायरिंग की सुविधा के लिये प्रतीक पाटील कहते हैं कि शासन की इस योजना ने उन्हें स्वरोजगार का अवसर दिया और गांव के अन्य किसानों को भी सशक्त बनाया है। ऐसी योजनाएं ग्रामीण युवाओं को खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करती हैं। उन्होंने योजना का लाभ मिलने पर शासन एवं प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित किया है। कस्टम हायरिंग स्कीम क्या है मध्यप्रदेश में निजी कस्टम हायरिंग स्कीम अंतर्गत कृषकों को कृषि फसलों हेतु किराये पर ट्रेक्टर एवं आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराकर सेवाएं देने के उद्देश्य से बैंक ऋण आधार पर केन्द्र स्थापित करवाये जाते हैं। यह योजना वर्ष 2012-13 से संचालनालय कृषि अभियांत्रिकी, मध्यप्रदेश के तहत संचालित है और इसका उद्देश्य छोटे व सीमांत किसानों को उचित दरों पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराना, उत्पादकता बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिये कृषि क्षेत्र में रोजगार सृजन करना है। ट्रेक्टर एवं कृषि यंत्रों के क्रय की लागत अधिकतम 25 लाख एवं सभी श्रेणी के आवेदकों हेतु लगभग 40 प्रतिशत, अधिकतम 10 लाख तक का अनुदान देय है। योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आंमत्रित किये जाते हैं एवं कंप्यूटराइज्ड लाटरी के माध्यम से आवेदकों का चयन किया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिये निर्धारित दस्तावेजों में आवेदक के पास जमीन का कागज बी-1 या मूल निवासी प्रमाण पत्र, 12वी पास, आयु 18 से 40 वर्ष, जाति प्रमाण-पत्र (आरक्षित श्रेणी के लिये), आधार कार्ड होना आवश्यक है वहीं आवेदक के नाम से राशि रूपये 10,000 का डिमांड ड्राफ्ट देय है।  

पेंडिंग केसों का गंभीर हाल, MP हाई कोर्ट में जजों की संख्या न बढ़ी तो 40 साल लग सकते हैं निपटान में

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि न्यायाधीशों की मौजूदा संख्या 42 से बढ़कर 75 या 85 नहीं होती है, तो साढ़े चार लाख 80 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का बैकलाग खत्म करने में पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है। एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण इस संबंध में एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी लंबित मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति और उनके समाधान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत राज्य का यह दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। लेकिन यदि न्याय मिलने में दशकों का समय लगे, तो यह संवैधानिक प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वर्तमान स्थिति इसी ओर संकेत करती है। आंकड़ों की जुबानी: सुधार की आहट या लंबी चुनौती हालिया आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में वर्तमान में 4,80,592 मामले लंबित हैं। अगस्त 2025 से कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या औसतन 42–43 हो गई है, जो पिछले 20 वर्षों के औसत 30 न्यायाधीशों की तुलना में बेहतर स्थिति मानी जा रही है। इसका परिणाम यह रहा कि अगस्त 2025 से अब तक 84,455 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 90,045 मामलों का निपटारा किया गया। इस अवधि में कुल 5,590 मामलों की शुद्ध कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गति के बावजूद लंबित मामलों को पूरी तरह खत्म करने में 39 से 40 वर्ष का समय लग सकता है। वर्ष 2024 में इंदौर बनाम कर्नाटक राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने न्याय तक पहुंच को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। न्यायालय ने कहा था कि न्याय तक पहुंच तभी एक संवैधानिक मूल्य है, जब न्याय त्वरित रूप से मिले। यदि न्याय प्रक्रिया अत्यधिक धीमी या महंगी हो जाए, तो यह अधिकार निरर्थक बन जाता है। हाई कोर्ट में मामलों के अत्यधिक लंबित होने का प्रमुख कारण न्यायाधीशों की रिक्तियां हैं। 1989–90 की एरियर कमेटी ने भी यह स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालयों में मामलों के जमा होने का मुख्य कारण न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी है। 53 से बढ़ाकर 85 न्यायाधीश करने की अनुशंसा हाई कोर्ट ने अपनी स्वीकृत क्षमता 53 से बढ़ाकर 85 न्यायाधीश करने की अनुशंसा की है, जो वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार के पास वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के लिए लंबित है। लक्ष्य यह है कि अगले पांच वर्षों में लंबित मामलों को खत्म करने के लिए प्रतिमाह 22,000 से 23,000 मामलों का निपटारा किया जाए। इसके लिए कम से कम 75 कार्यरत न्यायाधीशों की तत्काल आवश्यकता है। 2026 में मुख्य न्यायाधीश सहित कम से कम सात न्यायाधीश सेवानिवृत्त चुनौती यह भी है कि वर्ष 2026 में मुख्य न्यायाधीश सहित कम से कम सात न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि समय पर नई नियुक्तियां नहीं हुईं, तो स्थिति फिर यथावत हो सकती है। निष्कर्ष के तौर पर कहा गया है कि केवल मामलों का निपटारा पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्याय न्यायपूर्ण और तर्कसंगत भी होना चाहिए। इसके लिए पर्याप्त न्यायिक शक्ति, आधुनिक डिजिटाइजेशन और विशेष बेंचों का गठन आवश्यक है। मध्य प्रदेश में पिछले दो दशकों के बाद शुरू हुआ सुधार तभी कायम रह सकता है, जब 85 न्यायाधीशों की स्वीकृति जैसे ऐतिहासिक कदम को अमल में लाया जाए। सरकार को अनुच्छेद 39-ए के तहत अपनी जवाबदेही निभाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए, ताकि आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा बना रहे।  

विजयपुर सीट विवाद का फैसला करीब, हाईकोर्ट में 17 तारीख को आखिरी बहस

श्योपुर  विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर छिड़ी कानूनी लड़ाई अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की चुनाव याचिका पर सुनवाई के दौरान नया अपडेट सामने आया है। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी गवाहों की गवाही दर्ज कर ली है। अब इस हाई-प्रोफाइल चुनावी याचिका पर 17 फरवरी को अंतिम बहस होगी, जिसके बाद कोर्ट फैसला सुरक्षित कर सकता है। कांग्रेस विधायक के निर्वाचन को चुनौती देने से जुड़ा है मामला दरअसल यह मामला विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को चुनौती देने से जुड़ा है। पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि नामांकन दाखिल करते वक्त मुकेश मल्होत्रा ने अपने आपराधिक रिकॉर्ड से संबंधित अहम जानकारी छुपाई। याचिका में दावा किया गया कि यदि सही और पूरी जानकारी सार्वजनिक होती, तो चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता था। सभी गवाहों की गवाही दर्ज हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई बीते कई महीनों से चल रही है। दोनों पक्षों की ओर से गवाह पेश किए गए, दस्तावेज रखे गए और तथ्यों पर तीखी बहस हुई। कोर्ट ने एक-एक कर सभी गवाहों की गवाही दर्ज की। क्या कह रहे हैं कानून के जानकार? चुनाव कानून के जानकारों की मानें तो इस केस का असर सिर्फ विजयपुर सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में नामांकन प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ सकती है। विजयपुर की राजनीति पर नजर रखने वालों के लिए 17 फरवरी की तारीख बेहद अहम मानी जा रही है। यदि कोर्ट आरोपों को गंभीर मानता है, तो विधायक की विधानसभा की सदस्यता पर संकट खड़ा हो सकता है। वहीं, फैसला याचिकाकर्ता के खिलाफ गया तो सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल हाई कोर्ट में गवाही का अध्याय बंद हो चुका है। अब सबकी नजरें अंतिम बहस पर टिकी हैं। 

भारत के विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी ने HD देवगौड़ा की तारीफ की

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी पीएम मोदी ने खुद दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई दो तस्वीरों में से एक में पीएम मोदी देवगौड़ा को पुष्पगुच्छ देते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में देवगौड़ा के हाथों को पकड़कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी ने एचडी देवगौड़ा के साथ हुई वार्ता की जानकारी देते हुए कहा, "एचडी देवेगौड़ा के साथ बातचीत हुई। अहम मुद्दों पर उनके सार्थक विचार काफी ध्यान देने लायक हैं। भारत के विकास के लिए उनका उत्साह भी उतना ही सराहनीय है।" एचडी देवेगौड़ा 1996-1997 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और वर्तमान में वे जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है और कर्नाटक में भाजपा के साथ मिलकर काम करती है। देवेगौड़ा लंबे समय से कृषि, ग्रामीण विकास और जल संसाधनों जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखते आए हैं। वे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और अभी राज्यसभा सदस्य हैं। उनकी उम्र और राजनीतिक अनुभव के कारण उनकी सलाह राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हाल के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच कई बार मुलाकातें और बातचीत हुई हैं, जो एनडीए के सहयोगी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने का संकेत देती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने अतीत में भी प्रधानमंत्री मोदी की कई योजनाओं की सराहना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ सौजन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी है। खासकर कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्य में जहां जद(एस) का प्रभाव अभी भी बना हुआ है, और आगामी विधानसभा या अन्य चुनावों को देखते हुए गठबंधन की मजबूती जरूरी है।

SC की रोक के बाद मायावती का बयान, कहा- ‘सवर्ण होते तो विवाद नहीं होता’

लखनऊ यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले पर विपक्षी नेताओं के भी रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, अगर यूजीसी नियमों में सवर्णों को भी कमिटी में रख लिया जाता तो बवाल नहीं होता। उन्होंने आगे कहा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किए गए है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित। जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।   अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सच्चा न्याय यह सुनिश्चित करने में है कि किसी पर भी अत्याचार या अन्याय न हो। यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।' उन्होंने कहा, ‘न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी।’ यूजीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा 'समानता समितियां' गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।  

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से गरमाई सियासत: भाजपा ने विपक्ष पर साधा तीखा निशाना

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसी बीच, सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सनातन को बांटने वाले यूजीसी के नियम पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता की है।" भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 'एक्स' पर लिखा, "यूजीसी पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, पिछले 2 दिनों से संसद जा रहा हूं। किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने इस पर चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा? उल्टा जिस सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर गरीब की सुध ली, उसी को गाली।" निशिकांत दुबे ने आगे कहा, "मैं दोबारा आपसे करबद्ध निवेदन करता हूं कि मोदी जी पर भरोसा रखिए, संविधान की धारा 14 और 15 के तहत ही देश के कानून चलेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो मैंने कहा।" सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगाई और स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि तब तक 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की। चीफ जस्टिस ने कहा कि रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से यह संकेत मिलता है कि इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि अदालत समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस की अवैध हथियारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई

विगत 2 सप्ताह में 34 अवैध हथियार एवं सामग्री जब्त भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने तथा आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से अवैध हथियारों के निर्माण, संग्रहण, परिवहन एवं उपयोग के विरुद्ध निरंतर, योजनाबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी के परिणामस्‍वरूप विगत 2 सप्ताह में प्रदेश के विभिन्‍नजिलोमें पुलिस ने अवैध हथियार रखने, हवाई फायरिंग करदहशत फैलाने एवं संगीन आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त अंतरराज्यीय गिरोह के विरूद्ध कार्यवाही कर34फायर आर्म्स, जिंदा कारतूस, वाहन एवं अन्य सामग्री जब्त की है। एसटीएफ ग्वालियर-दो आरोपी अवैध हथियारों सहित गिरफ्तार एसटीएफ ग्वालियर इकाई ने मुखबिर की सूचना के आधार पर एक प्रभावी कार्रवाई करते हुए शिवपुरी क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 03 पिस्टल एवं 04 जिंदा राउंड जप्त किए गए हैं। शिवपुरी– अवैध हथियार निर्माण फैक्ट्री पर निर्णायक कार्रवाई अवैध हथियारों के स्रोत को जड़ से समाप्त करने की दिशा में शिवपुरी जिले के थाना करैरा क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने प्राप्त सूचना के आधार पर अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री पर दबिशदेकर मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।पुलिस ने फैक्ट्री से 07 अवैध हथियार, 05 जिंदा कारतूस सहित हथियार निर्माण में प्रयुक्त मशीनें, औजार एवं अन्य सामग्री जब्त की। जब्त की गई सामग्री की अनुमानित कीमत लगभग 2 लाख रुपये आँकी गई है।आरोपियों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट एवं अन्य धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना की जा रही है। बड़वानी– अंतरराज्यीय गिरोह पर बड़ी कार्रवाई थाना जुलवानिया पुलिस ने महाराष्ट्र के अहमदनगर (अहिल्यानगर) से चोरी कर लौट रहे 05 अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से 05 फायर आर्म्स, 03 जिंदा कारतूस, सोने-चांदी के आभूषण, नगदी एवं अन्य सामग्री सहित 38लाख 91हजाररुपये से अधिक की सामग्री जब्त की है। इसी प्रकार प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी अलग-अलग दिनों में अवैध हथियारों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की गई। ग्वालियर एवं दतिया जिलों में 05-05 अवैध हथियार, छतरपुर जिले में 03 अवैध हथियार, मुरैना जिले में 02 अवैध हथियारजब्‍त किए हैं।जबकि उज्जैन, सतना, सागर एवं जबलपुर जिलों में01-01 अवैध हथियार जब्त किए गए हैं। इन कार्रवाइयों से जिलों में अलग-अलग मामलों में सार्वजनिक स्थानों पर फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले आरोपियों को चिन्हित कर शीघ्र गिरफ्तार किया गया है।देशी कट्टे, पिस्टल (9MM, 32 बोर, 315 बोर), जिंदा राउंड, खाली खोखे, चाकू, खंजर सहित मोटरसाइकिल एवं कारें जब्त की गईं। अवैध हथियार निर्माण में प्रयुक्त मशीनें, औजार एवं अन्य सामग्री बरामद कर उन्हें निष्क्रिय किया गया। मध्यप्रदेश पुलिस अवैध हथियारों एवं आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त तत्वों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत निरंतर, कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है।  

सरकारी नौकरी में फायदा! यूपी सरकार दे रही उम्र और अनुभव में विशेष लाभ

लखनऊ सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 30 को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फैसला मुख्यमंत्री फेलो (CM Fellow) को लेकर रहा, जिसके तहत उन्हें यूपी सरकार की भर्तियों में विशेष राहत दी गई है।कैबिनेट के फैसले के अनुसार, अब सीएम फेलो को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के तहत होने वाली भर्तियों में आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट मिलेगी। इसके साथ ही, उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त वेटेज (भारांक) भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे प्रतिभाशाली युवाओं को प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिलेगा और वे बेहतर ढंग से प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे।   बैठक में शिक्षकों के लिए भी बड़ी सौगात का ऐलान किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के 11 लाख 95 हजार 391 शिक्षक और कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन 2 लाख 97 हजार 589 शिक्षकों और कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, विधानसभा के बजट सत्र की तारीखों की भी घोषणा की गई। विधानसभा का बजट सत्र 9 फरवरी से शुरू होगा और 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना बजट पेश करेंगे।शहरी विकास से जुड़े प्रस्तावों में वाराणसी के 18 वार्डों में सीवरेज लाइन के लिए 266 करोड़ रुपये और गोरखपुर में 721 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज परियोजना को मंजूरी दी गई। साथ ही उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 को स्वीकृति दी गई, जिसके तहत पुरानी और निष्प्रयोज्य संपत्तियों को तोड़कर नई इमारतें बनाने की अनुमति होगी। बैठक में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक प्रस्ताव भी पारित किया गया। मंत्रिपरिषद ने इसे अपूरणीय क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।

SC ने आवारा कुत्तों के विवाद में सुरक्षित किया फैसला, वकीलों को दिए 7 दिन

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिनमें आवारा कुत्तों के मामले में दिए गए पहले के आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों से एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने को कहा है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सभी राज्यों के सभी पक्षों, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) द्वारा दी गई दलीलों के आखिरी दौर की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।   इससे पहले कुत्ते पालने वालों, कुत्ते के काटने की घटनाओं के पीड़ितों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पेश हुए वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने कल कुछ राज्यों द्वारा दायर किए गए अस्पष्ट हलफनामों पर नाराजगी जताई थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, स्वतः संज्ञान मामले में कोर्ट ने आज NHAI से एक ऐप बनाने का भी आग्रह किया, जिसके ज़रिए लोग हाईवे पर आवारा जानवरों को देखने की रिपोर्ट कर सकें। कोर्ट ने कहा, "आप एक ऐप क्यों नहीं बनाते ताकि कोई भी जानवर को देखकर उसकी तस्वीर खींचकर अपलोड कर सके? आपके पास विज़ुअल्स होंगे।" इस पर NHAI के वकील ने जवाब दिया, "हम ऐसा करेंगे।" देश में सिर्फ 76 मान्यता प्राप्त स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर खास बात यह है कि जैसे ही सुनवाई खत्म होने वाली थी, AWBI के वकील ने कोर्ट को बताया कि देश में सिर्फ 76 मान्यता प्राप्त स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर हैं, जबकि विभिन्न राज्यों के डेटा से पता चलता है कि 883 आवारा कुत्तों के स्टेरिलाइज़ेशन सेंटर हैं। वकील ने कहा, “कुछ आवेदन पेंडिंग हैं। 250 से ज़्यादा आवेदन हैं… राज्यों द्वारा दिए गए डेटा के अनुसार 883 चल रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक हमारी तरफ से मान्यता नहीं दी गई है।” कोर्ट ने आखिर में पूछा, "जिन सेंटरों को आपने (AWBI) मान्यता नहीं दी है, उनमें क्या हो रहा है?" इससे AWBI के वकील ने स्टेरिलाइज़ेशन के कुछ डेटा में विसंगति की ओर इशारा किया, जिससे शायद यह पता चलता है कि संख्या उतनी सटीक नहीं थी जितनी दावा किया गया था। इससे यह चिंता भी बढ़ी कि स्टेरिलाइज़ेशन के लिए तय फंड उन लोगों द्वारा लिया जा रहा था जो असल में ऐसा काम नहीं कर रहे थे। कई राज्यों ने इस बारे में जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं कराई है। जहां कुत्ते कम वहां स्टेरिलाइज़ेशन ज्यादा वकील ने कहा, "आश्चर्यजनक डेटा है। जहां कुत्तों की आबादी कम है जैसे उत्तराखंड में, वहां स्टेरिलाइज़ेशन ज़्यादा है (रिपोर्ट किए गए स्टेरिलाइज़ेशन की संख्या कुत्तों की आबादी की संख्या से ज़्यादा है)।" इस पर कोर्ट ने कहा, “कारण साफ हैं। हर कोई इसके बारे में जानता है। कितनी ग्रांट दी जाती है।” इसके बाद वकील ने कहा, "जितना कम कहा जाए, उतना अच्छा।" इस पर कोर्ट ने कहा, "हां। कम कहना ही बेहतर है।" कोर्ट ने आगे कहा, "AWBI से बस यही अनुरोध है कि जो भी आवेदन पेंडिंग हैं, आप उन्हें प्रोसेस करें, और या तो उन्हें रिजेक्ट करें या एक तय समय के अंदर उन्हें मंज़ूरी दें।"