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इंदौर में आयुर्वेदिक कॉलेज ने 220 कैंसर मरीजों को दी ओजोन थेरेपी, स्वास्थ्य में सुधार

इंदौर  इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज में ओजोन थेरेपी के माध्यम से देशभर के कैंसर मरीजों को लाभ मिल रहा है। गत पांच महीनों में 220 से अधिक मरीजों को यह थेरेपी दी जा चुकी है। ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर कैंसर मरीजों को ऊर्जा प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऑक्सीजन मानव शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। दूषित पर्यावरण, फेफड़ों की बीमारियों और अन्य कारणों से शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ओजोन थेरेपी शरीर में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाकर रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। अस्पताल में हर वर्ष एक हजार से अधिक मरीज कैंसर का इलाज करवाने के लिए आते हैं। इनमें कई मरीज देश के विभिन्न राज्यों से होते हैं। ओजोन थेरेपी द्वारा शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाकर बीमारियों को समाप्त किया जा सकता है, जिससे स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है। आयुर्वेदिक इलाज से मिला लाभ     सुदामा नगर निवासी 66 वर्षीय महिला लाइपोसार्कोमा कैंसर से पीड़ित हैं। उन्होंने ऑपरेशन करवाया और फिर कीमोथेरेपी भी करवाई, लेकिन समस्या कम नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज लेना शुरू किया और अब तक 15 ओजोन थेरेपी ले चुकी हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। नवीन आर्य को आंत का कैंसर है। ऑपरेशन हो चुका है और कीमोथेरेपी भी ले चुके हैं। ओजोन थेरेपी के बाद उन्हें आराम मिला है। बैतूल निवासी 55 वर्षीय महिला को स्तन कैंसर है, जिसमें गांठ बनी हुई है। उन्होंने ऑपरेशन नहीं करवाया है और इंदौर में रहकर ओजोन थेरेपी ले रही हैं, जिससे वे स्वस्थ महसूस कर रही हैं। इंदौर के 53 वर्षीय शिवदत्त जोशी को जीभ का कैंसर है। वे पिछले कुछ समय से ओजोन थेरेपी ले रहे हैं, जिससे उन्हें कैंसर की समस्या में राहत मिल रही है। पिछले पांच माह में ओजोन थेरेपी लेने वाले मरीज माह     मरीज अगस्त     41 सितंबर     102 अक्टूबर     46 नवंबर     24 दिसंबर     19 (अब तक) अन्य बीमारियों में भी सहायक यह थेरेपी अन्य बीमारियों में भी सहायक है। थेरेपी द्वारा शरीर की कोशिकाएं अधिक आक्सीजन अवशोषित करती हैं, जिससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अस्पताल की यूनिट में डॉ. श्वेता वर्मा, डॉ. शेखर पटेल, भारत प्रजापति, कमलेश पटेल एवं निशा मालवीय मरीजों का इलाज कर रहे हैं। तीन हजार वर्ष पुरानी पद्धति विशेषज्ञों का कहना है कि यह चिकित्सा पद्धति नई नहीं है। लगभग तीन हजार वर्ष पहले पतंजलि योग सूत्रों में भी प्राणायाम के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन बढ़ाने की बात कही गई थी। आधुनिक यूरोपीय देशों में ओजोन थेरेपी का लंबे समय से उपयोग किया जा रहा है और इसे विज्ञानी रूप से लाभकारी माना गया है। सप्ताह में दो दिन की जाती है थेरेपी     ओजोन, ऑक्सीजन का एक सक्रिय रूप है, जो शरीर के रक्त, लसिका और ऊतकों में जाकर कोशिकाओं से जुड़ता है। इस थेरेपी में एक विशेष मशीन के माध्यम से शरीर में ऑक्सीजन प्रवाहित की जाती है। इससे कैंसर कोशिकाओं को समाप्त करने, शरीर को डिटॉक्स करने और घावों को भरने में सहायता मिलती है। यह थेरेपी सप्ताह में दो दिन दी जाती है। – डॉ. अखिलेश भार्गव, विभागाध्यक्ष, शल्य तंत्र विभाग  

केंद्र का फैसला: अगले 5 सालों में लुधियाना, अमृतसर, चंडीगढ़ समेत 10 रेलवे स्टेशनों की क्षमता दोगुना की जाएगी

फिरोजपुर  फिरोजपुर रेलवे डिवीजन की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि अगले 5 सालों में नई ट्रेनें शुरू करने के लिए बड़े शहरों की क्षमता को मौजूदा लैवल से दौगुना करने की जरूरत है। साल 2030 तक बेसिक क्षमता को दोगुना करने के कामों में ये काम शामिल होंगे। मौजूदा टर्मिनलों को एक्स्ट्रा प्लेटफॉर्म के साथ बढ़ाना, लाइनों, पिट लाइनों और सही शंटिंग सुविधाओं को ठीक करना, शहरी इलाकों में और उसके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और कंस्ट्रक्शन आदि। उत्तर रेलवे के 10 स्टेशनों के बुनियादी ढांचे के उन्नयन की भी योजना बनाई गई है जिसमें दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर, जम्मू, हरिद्वार और बरेली शामिल हैं। यह उम्मीद की जाती है कि अगले 5 वर्षों में क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा ताकि क्षमता वृद्धि के लाभों को तुरंत महसूस किया जा सके। इससे वर्षों में धीरे-धीरे यातायात की आवश्यकता को पूरा करने में मदद मिलेगी। उत्तर रेलवे ने जिन 10 रेलवे स्टेशनों का इंफ्रॉस्ट्रक्चर अपग्रेड करने के लिए चुना है। लुधियाना समेत तीनों रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने का काम चल रहा है। हर रेलवे स्टेशन पर अभी जितने प्लेटफार्म हैं, उन्हें बढ़ाकर डबल कर दिया जाएगा। रेलवे स्टेशनों पर मॉडर्न स्टेशन बिल्डिंग तैयार की जा ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो। रेल मंत्रालय ने जारी की स्टेशनों की सूची रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने एक दिन पहले देश के रेलवे स्टेशनों की क्षमता को डबल करने की घोषणा करते हुए स्टेशनों की सूची जारी की है। उत्तर रेलवे के दस स्टेशनों को उसमें शामिल किया गया है। इस सूची में अमृतसर, लुधियाना व चंडीगढ़ के अलावा जम्मू, दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार और बरेली के नाम शामिल हैं। एयरपोर्ट टर्मिनल की तर्ज पर मिलेंगी सुविधाएं लुधियाना, अमृतसर व चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशनों का काम पूरा होते ही वहां पर यात्रियों को एयरपोर्ट टर्मिनल की तर्ज पर सुविधाएं मिलेंगी। रेलवे परिसर में मल्टी-लेवल पार्किंग, एलिवेटेड कॉनकोर्स, नए एंट्री-एग्जिट पॉइंट, फूड कोर्ट, एस्केलेटर और लिफ्ट शामिल हैं, ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिले और ट्रैफिक सुगम हो सके, जिससे ये स्टेशन पंजाब में प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब बन सके। रेल गाड़ियों के संचालन का मैकेनिज्म भी होगा अपग्रेड उत्तर रेलवे के मुताबिक रेल गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। इसलिए रेलवे स्टेशनों पर संचालन का मैकेनिज्म भी अपग्रेड किया जाएगा। रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, सिग्नल सिस्टम, मल्टीट्रैकिंग सिस्टम को भी 2030 तक डबल करने की योजना है। रेल मंत्री का अश्वनी वैष्णव का दावा है कि 2030 तक रेल नेटवर्क दुनिया के बेहतरीन नेटवर्क में से एक हो जाएगा। पंजाब को मिलेगा विशेष फायदा केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्‌टू का कहना है कि पंजाब में रेलवे स्टेशनों की क्षमता डबल होने से रेल गाड़ियों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पंजाब के लोगों को देश के अलग-अलग कोनों तक पहुंचने के लिए रेल की उपलब्धता बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि लुधियाना में मुख्य रेलवे स्टेशन के अलावा ढंडारी रेलवे स्टेशन को भी डेवलप किया जा रहा है। मुख्य विशेषताएं और कार्य:     आधुनिक इंफ्रॉस्ट्रक्चर: स्टेशन को एयरपोर्ट जैसा लुक देने के लिए नया डिज़ाइन, AC कॉनकोर्स (प्रतीक्षालय) और फुट ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।     बेहतर पार्किंग: मल्टी-लेवल पार्किंग की सुविधा, जिसमें 1,30,000 वर्ग फीट का पार्किंग क्षेत्र भी शामिल है।     ट्रैफिक मैनेजमेंट: एंट्री व एग्जिट के लिए अलग-अलग रास्ते, एक नया प्रवेश द्वार और एलिवेटेड रोड्स से सीधा जुड़ाव, जिससे यातायात सुगम हो सके।     यात्री सुविधाएं: लिफ्ट, एस्केलेटर, फूड कोर्ट, वीआईपी लाउंज और स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाएँ जोड़ी जा रही हैं.     पर्यावरण अनुकूल: स्टेशन को ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दिग्विजय सिंह का कांग्रेस से पलटवार, कहा- RSS नहीं तो शिवसेना से सीखो, कांग्रेस को दी नसीहत

भोपाल  BMC यानी बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस में तनातनी जारी है। अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले दल ने कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सीख लेने की सलाह दी है। खास बात है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की तरफ से हाल ही में आरएसएस की तारीफ की गई थी, जिसपर पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति जताई थी। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, 'आरएसएस पूरे देश में 60-70 लाख स्वयं सेवकों के माध्यम से देश की सेवा कर रहा है। हालांकि, वो राजनीति में सक्रिय नहीं होते, लेकिन पीछे से राजनीतिक दलों की मदद करते हैं। हम तो यही कहेंगे कि आरएसएस का जो संगठन है, जो अनुशासन है, मातृभूमि के प्रति जो समर्पण है, उससे कांग्रेस को सीखना चाहिए। दिग्विजय सिंह वही बात कर रहे हैं, जो सब बात करते हैं।' इस दौरान उन्होंने संघ की जमकर तारीफ की। दुबे ने कहा, 'देखिए आरएसएस देश की परंपरा चलाने वाली, धरोहर चलाने वाली सांस्कृतिक संगठन है। तो उसके जैसा कौन बन पाएगा। जो नरेंद्र मोदी जी को उठाकर प्रधानमंत्री बना सकती है संगठन। जो सारे बड़े बड़े हिन्दुत्व के आंदोलन में आगे रहती है। हमारी शिवसेना के भी साथ आंदोलन में भी आरएसएस साथ रहती है।' उन्होंने कहा, 'ऐसी आरएसएस से कांग्रेस नहीं सीखेगी, तो क्या कांग्रेस से कांग्रेस सीखेगी। जहां खुद ही नहीं पता कि कांग्रेस में क्या अनुशासन है, क्या रणनीति है, क्या उनकी बैठकें हैं, कौन कहां गठबंधन करेगा, कौन क्या बनाएगा। कुछ पता ही नहीं है। सब राम भरोसा चल रहे हो आप।' दिग्विजय ने क्या कहा दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना करते एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। फोटो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, 'कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।' विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने केवल संगठन और इसकी शक्ति की तारीफ की है, अन्यथा वह आरएसएस और मोदी के घोर विरोधी हैं।

किम केओन-ही पर 1.79 करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप, भ्रष्टाचार के मामले में 15 साल की सजा की संभावना

सोल South Korea की पूर्व प्रथम महिला किम केओन ही मौजूदा समय गंभीर कानूनी संकट में फंसी हुई हैं. किम केओन ही महाभियोग का सामना कर चुके पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल की पत्नी हैं. किम पर राज्य के अहम मामलों में कथित तौर पर दखल देने, प्रभाव का गलत इस्तेमाल करने और महंगे उपहार व पैसों के बदले घूस लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किम केओन ही ने अपने पद और पति की राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया? कि  पर आरोप है कि उन्होंने कारोबारी और प्रभावशाली लोगों से महंगे गिफ्ट्स स्वीकार किए और बदले में सरकारी फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की. एक विशेष अभियोजक ने सोमवार (29 दिसंबर) को बताया कि इस मामले की जांच रविवार को पूरी कर ली गई है. यह जांच पिछले एक साल से जारी थी. जांच के दायरे में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल द्वारा मार्शल लॉ लगाए जाने का फैसला भी शामिल रहा. इसके अलावा, इस दौरान पूर्व राष्ट्रपति और उनकी पत्नी से जुड़े कई गंभीर विवादों और आरोपों की भी पड़ताल की गई. यह मामला दक्षिण कोरिया की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था और जांच पूरी होने के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं. अभियोजन पक्ष ने की कड़ी सजा की मांग अभियोजन पक्ष ने किम केओन-ही के खिलाफ गंभीर आरोपों के चलते कड़ी सजा की मांग की है. अभियोजन ने अदालत से अनुरोध किया है कि किम केओन-ही को 15 साल की जेल की सजा दी जाए. उन पर बिचौलिया बनकर विभिन्न सौदे कराने, घूस लेने और सरकारी नियुक्तियों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करने जैसे आरोप लगाए गए हैं. फिलहाल किम केओन-ही हिरासत में हैं. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है. हालांकि, इस महीने की शुरुआत में हुई एक अदालत की सुनवाई के दौरान किम ने मामले के कारण जनता को हुई असुविधा और परेशानी के लिए माफी जरूर मांगी थी. अदालत अब मामले में अगली सुनवाई और अंतिम फैसले की तैयारी कर रही है. यूनिफिकेशन चर्च पर भी रिश्वत के आरोप इस मामले में यूनिफिकेशन चर्च की प्रमुख हान हक-जा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. जांच एजेंसियों ने उन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. अभियोजन पक्ष का दावा है कि चर्च ने अपने प्रभाव का विस्तार करने और किम पर दबाव या प्रभाव बनाने के उद्देश्य से महंगे उपहार दिए थे. इनमें दो लग्ज़री Chanel बैग और एक कीमती हीरे का हार शामिल बताया जा रहा है. इसके अलावा, अभियोजन का आरोप है कि चर्च की ओर से कुल 2 लाख डॉलर (लगभग 200,000 डॉलर) की रिश्वत दी गई. आरोपों के मुताबिक, यह रकम और महंगे तोहफे किम को प्रभावित करने के लिए दिए गए थे, ताकि चर्च को अपने हितों में लाभ मिल सके. दक्षिण कोरिया में उठा सियासी तूफान इस मामले ने दक्षिण कोरिया की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है. विपक्षी दल इसे सत्ता के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बता रहे हैं, जबकि सरकार और यून सुक येओल के समर्थक आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला देश की न्याय व्यवस्था और राजनीतिक नैतिकता के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा. फिलहाल जांच जारी है और पूरे देश की नजरें इस हाई-प्रोफाइल केस पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर न सिर्फ पूर्व राष्ट्रपति के राजनीतिक भविष्य पर, बल्कि दक्षिण कोरिया की सियासत की दिशा पर भी पड़ सकता है. 

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा

ईयर एंडर 2025  सीएम योगी के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण की योजनाओं ने रची नए विकास की कहानी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा शादी अनुदान योजना ने वंचित समाज की बेटियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान को किया गया मजबूत कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिला कौशल और रोजगार का मार्ग डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से बढ़ी पारदर्शिता, घटा भ्रष्टाचार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में पिछड़ा वर्ग कल्याण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण—तीनों क्षेत्रों में सरकार की योजनाएं न केवल निरंतर चलीं, बल्कि लाभार्थियों की संख्या और बजट के लिहाज से पहले से अधिक प्रभावी साबित हुईं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के आधिकारिक आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियां सीधे तौर पर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण महज योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सम्मान और कौशल के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का मजबूत माध्यम बना है। योगी सरकार की यह नीति-आधारित और परिणाम-केंद्रित कार्यशैली ही उत्तर प्रदेश को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में आगे ले जा रही है। शिक्षा को प्राथमिकता, रिकॉर्ड छात्रवृत्ति वितरण वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पिछड़ा वर्ग के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्रदान की। इस अवधि में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 6 लाख 90 हजार 349 छात्रों को 147.75 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से 5 लाख 85 हजार 954 छात्रों को 175.54 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। इस तरह केवल वर्ष 2025 में ही कुल 12 लाख 76 हजार 303 विद्यार्थियों को 323.29 करोड़ रुपये की सीधी मदद मिली। कुल मिलाकर योगी सरकार ने नौ वर्षों में कुल 2 करोड़ 20 लाख 29 हजार 760 छात्रों को 13,858.62 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की।  बेटियों के सम्मान में सरकार की संवेदनशीलता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामाजिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण शादी अनुदान योजना है। वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में पिछड़ा वर्ग की 72 हजार 296 बेटियों को इस योजना के तहत 144.59 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। पूर्व वर्षों में भी यह योजना लगातार मजबूत होती रही। 2019-20 और 2024-25 में एक-एक लाख बेटियों को 200-200 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। कुल मिलाकर नौ वर्षों में योगी सरकार ने शादी अनुदान योजना के तहत कुल 6 लाख 47 हजार 863 लाभार्थियों को 1,295.72 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई। इस योजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम आय सीमा एक लाख वाले अन्य पिछड़े वर्ग के परिवारों की बेटियों की शादी हेतु अनुदान दिये जाने का प्राविधान है। शादी योजना में लड़की की उम्र 18 वर्ष एवं लड़के की उम्र 21 वर्ष होना आवश्यक है।  डिजिटल भविष्य की तैयारी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी बनाने की रही है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत 18,159 बालकों और 4,233 बालिकाओं, कुल 22,392 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिस पर 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बीते वर्षों में यह योजना लगातार विस्तार पाती रही। 2017-18 में जहां 9,431 युवाओं को प्रशिक्षण मिला था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 29,769 युवाओं तक पहुंच गई। नौ वर्षों में कुल 1 लाख 62 हजार 046 युवाओं को 154.56 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किया गया। इनमें ओ लेवल सर्टिफिकेट के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या एक लाख, 1139 रही, जबकि सीसीसी सर्टिफिकेट के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 60,907 रही। इस योजना के अंतर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के इंटरमीडिएट पास बेरोजगार युवक और युवतियों को जिनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख तक या उससे कम है को भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करना है। इन सभी योजनाओं में लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से लाभ प्रदान किया गया, जिससे पारदर्शिता में वृद्धि हुई और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई।

मध्यप्रदेश में 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ, नए साल से बिजली बिल में 15% की बढ़ोतरी

भोपाल  नए साल में शहर के 33 हजार से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को बिजली का झटका लगेगा। बिजली कंपनी ने बिलिंग फार्मूले में परिवर्तन करते हुए किलोवॉट की जगह किलो वोल्ट एम्पियर से बिलिंग का फार्मूला लागू करने का फैसला लिया है। इसके असर यह होगा कि अनुपयोगी बिजली का बिल बनेगा और उपभोक्ता से इसकी वसूली की जाएगी। इसका सबसे ज्यादा असर बड़े संस्थान, उद्योग उपभोक्ताओं पर आएगा। इससे इनका बिजली बिल पंद्रह फीसदी तक बढ़ जाएगा। बिजली दर बढ़ाने का या पिछले दरवाजे का रास्ता है। मप्र विद्युत नियामक आयोग को कंपनी ने वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित टैरिफ में इसे प्रस्तावित किया है। केवीए को प्रकट शक्ति यानी अपेरेंट पावर भी कहते हैं। ये सप्लाई की गई कुल बिजली है। प्रस्ताव आयोग को दिया कंपनी ने अपना एआरआर प्रस्ताव आयोग को दिया है। इसमें तमाम तरह के प्रस्ताव है। आयोग के निर्णय के आधार पर ही दर और तरीका तय होगा। – क्षितिज सिंघल, एमडी, मध्यक्षेत्र ऐसे समझें पूरा हिसाब बिजली का बिल किलोवॉट की बजाय किलो वोल्ट एम्पीयर के आधार पर बनाना तय किया जा रहा है। किलोवॉट बिजली की वास्तविक खपत को बताता है, जबकि किलो-वोल्ट एम्पीयर लॉस वाली बिजली का भी आंकलन करता है। यदि पुराने उपकरण, वायरिंग से परिसर में बिजली का तकनीकी हानि होती है तो वह भी उपभोक्ताओं के बिल में जुड़ जाएगी। अभी एचटी उपभोक्ताओं के बिल इससे बनेंगे, धीरे-धीरे अन्य उपभोक्ताओं तक भी इसे बढ़ाएंगे। जिले में फिलहाल 33000 एचटी उपभोक्ता इसके दायरे में रहेंगे। बिजली कंपनी को ये लाभ लाइन लॉस कम। ट्रांसफॉर्मर व केबल पर कम दबाव। सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ेगी। बिल केवीए पर शिफ्ट इसका उद्देश्य है पावर फैक्टर सुधारना। ग्रिड पर अनावश्यक लोड कम करना। बिजली आपूर्ति को अधिक कुशल बनाना। उपभोक्ता को तकनीकी रूप से जिम्मेदार बनाना। जिले में बिजली लाइन के तकनीकी लॉस को घटाने 15 साल में 3000 करोड़ खर्च कर चुके हैं। इससे एचवीडीएस सिस्टम विकसित करने से लेकर नई लाइन बिछाने, फीडर सेपरेशन समेत ट्रांसफार्मर – सब स्टेशन की क्षमता वृद्धि तक की गई। ये औसत 15 फीसदी है जो बिलिंग सिस्टम बदलने से ग्राहक की जेब पर शिफ्ट हो जाएगा। लापरवाही से बढ़ेगा बिल केवीए आधार पर बिलिंग से वही उपभोक्ता लाभ में रहेंगे जो सही तरीके से बिजली का उपयोग करेंगे। लापरवाही करने वालों का बिल बढ़ेगा। यदि किसी परिसर में बिजली आपूर्ति करने वाला ट्रांसफार्मर, वायरिंग, उपकरण नए व बेहतर है तो किलोवॉट व केवीए एक समान रहेंगे। यहां बिल में अंतर नहीं होगा। जहां पुराने उपकरण, पुरानी वायरिंग है वहां बिजली का पॉवर फैक्टर खराब होगा। केवीए और किलोवॉट में अंतर होगा। इससे बिल बढ़ेगा। बीएमसी ने नहीं भरा बिजली बिल, बिजली कटी राजधानी के कोटरा क्षेत्र स्थित पीएम आवास योजना के गंगानगर में निगम न बिल का भुगतान नहीं करने से बिजली कंपनी ने कनेक्शन काट दिया। इससे रविवार को ब्लॉक सी-1 और सी-3 की लिफ्ट 10 घंटे तक बंद रहीं। नौ मंजिला इमारत में रहने वाले रहवासियों, विशेषकर जैसे बने रहे। रहवासियों के बुजुर्ग और मरीज दिनभर बंधक अनुसार रविवार 12 बजे अचानक लिफ्ट बंद हो गई। जब लिफ्ट मेंटेनेंस स्टाफ से संपर्क किया तो पता चला कि बिजली बिल बकाया होने से सप्लाई काट दी है। काफी हंगामे और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद शाम 6 बजे बिजली बहाल हुई। ब्लॉक सी-1 के फ्लैट नंबर 602 में रहने वाले 62 वर्षीय परशुराम कुम्हरे ने बताया कि उनकी पत्नी की हाल ही में सर्जरी हुई है। लिफ्ट बंद होने से पत्नी को सीढ़ियों से ले जाने में भारी दिक्कतें हुई। इस मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त तन्मय शर्मा का कहना है कि मामला फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और नियमानुसार रहवासियों को सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी

उज्जैन के महाकाल मंदिर में साल के आखिरी रविवार को पहुंचे डेढ़ लाख भक्त, सर्दियों में बढ़ी श्रद्धा

 उज्जैन  ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में साल के आखिरी रविवार करीब डेढ़ लाख भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए। सामान्य दर्शनार्थियों को चारधाम मंदिर पार्किंग से शक्तिपथ के रास्ते त्रिवेणी संग्रहालय द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया गया। शनिवार को जिस सम्राट अशोक सेतु पर ताला लगा दिया गया था। रविवार को उसे 250 रुपये के शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों के लिए खोला गया। महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक का निर्माण होने के बाद से सप्ताहंत में भक्तों की संख्या सर्वाधिक रहती आ रही है। इसका असर साल के आखिरी रविवार को भी नजर आया। देशभर से आए डेढ़ लाख से अधिक भक्त भगवान महाकाल के दर्शन करने मंदिर पहुंचे। शनिवार से भक्तों का उज्जैन पहुंचना शुरू हो गया था, जनदबाव के चलते प्रशासन को अपनी व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा था। रविवार को भी इसका असर दिखाई दिया। मंदिर प्रशासन ने उत्तर व पूर्व के सभी द्वारों को बंद कर केवल पश्चिम दिशा के श्री महाकाल महालोक व सम्राट अशोक सेतु से सामान्य व शीघ्र दर्शन टिकट वाले दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया। अतिरिक्त इंतजाम शुरू किए बीते दो दिनों की भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति व जिला प्रशासन द्वारा 31 दिसंबर व 1 जनवरी के लिए अतिरिक्त इंतजाम जुटाए जा रहे हैं। चारधाम पार्किंग में जिगजेग लगाने का काम शुरू हो गया है। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए अन्य इंतजाम भी किए जा रहे हैं। कालभैरव मंदिर में भी दर्शनार्थियों का ताता महाकाल मंदिर के अलावा कालभैरव, मंगलनाथ, अंगारेश्वर व चिंतामन गणेश मंदिर में भी आस्था उमड़ रही है। रविवार को 75 हजार से अधिक भक्तों ने भगवान कालभैरव के दर्शन किए। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकाल दर्शन व्यवस्था स्थगित रही। जिला प्रशासन की ओर से जारी सूची के आधार पर ही प्रोटोकाल दर्शन कराए जा रहे थे। मंदिर में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। मंदिर के बाहर अब भी अव्यवस्था का अंबार महाकाल मंदिर के बाहर अब भी अव्यवस्था का अंबार है। आसपास गली तथा शहनाई गेट के सामने मुख्य द्वार पर अवैध पार्किंग हो रही है, जो थोड़ा बहुत रास्ता बचता है उस पर हार फूल, माला, पूजन सामग्री बेचने वाले दुकान लगा लेते हैं। भारी भीड़ के बीच में सड़कों पर हो रहे इस अतिक्रमण को देखने वाला कोई नहीं है।

सरकार की योजना से सोयाबिन उत्पादक किसानों को मिली राहत, 810 करोड़ रुपये का ट्रांसफर

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने  भावांतर योजना के अंतर्गत रतलाम जिले के जावरा में 3.77 लाख सोयाबीन किसानों के खाते में 810 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। राशि सिंगल क्लिक के जरिए सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई गई है। गवर्नमेंट भगत सिंह कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस अवसर पर विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया गया। नुकसान की भरपाई की जाती है भावांतर योजना हाल में शुरू की गई है। इस योजना के तहत किसानों को अगर अपनी फसल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम दाम मिलता है तो सरकार की तरफ से भरपाई की जाती है। भावांतर योजना के तहत इससे पहले 6.44 लाख किसानों के खातों में 1,292 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जा चुकी थी। आय में स्थिरता लाई जा रही योजना का फायदा उन्हीं किसानों को दिया जाता है जिन्होंने भावांतर योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है। इस बार सरकार की ओर से इस योजना का फायदा सोयाबिन उत्पादक किसानों को दिया गया है। योजना के जरिए किसानों की आय में स्थिरता लाई जा रही है और उन्हें कम दाम में फसल बेचने के बावजूद भी नुकसान नहीं झेलना पड़ता है। सरकार की प्राथमिकता किसान सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5,328 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, ऐसे में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई सरकार की ओर से कर दी गई है। मोहन यादव कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनकी सरकार की प्राथमिकता किसान हैं। सीएम कह चुके हैं कि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य हासिल होना चाहिए।

एसएस प्लाजा में आग से मचा हड़कंप, कई दुकानों को भारी नुकसान, घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन

कोरबा कोरबा के एसएस प्लाजा में सोमवार सुबह भीषण आग लग गई. घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई है. पद्मिनी ज्वैलर्स, बालाजी स्टील सहित कई दुकानें आग की चपेट में आ गई. सूचना पर दमकल की 10 से अधिक गाड़ियां और 3 पानी टैंकर मौके पर पहुंची गई है. घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है. जानकारी के मुताबिक, पद्मिनी ज्वैलर्स और बालाजी स्टील सहित अन्य दुकानों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. आग इतनी भीषण है कि अबतक काबू नहीं पा जा सका है. 14 दमकल वाहनों और 3 पानी टैकर की मदद ली जा चुकी है. फिलहाल आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है. आग बुझाने में दमकल टीम को आ रही दिक्कत मौके पर मौजूद अधिकारियों ने आग बुझाने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए जेसीबी और हाइड्रा बुलवाए हैं. जिनकी मदद से आग की चपेट में आए दुकान के प्रथम तल को तोड़ा जा रहा है. वहीं निगम जल आपूर्ति को जारी रखने के लिए टैंकर को रवाना किया है.

अद्भुत मामला झारखंड से: पुलिस स्टोर का 200 किलो गांजा चूहों ने निगल लिया

रांची  झारखंड की राजधानी रांची के ओरमांझी थाने में पुलिस की कड़ी निगरानी में रखा गया करीब 200 किलो गांजा चूहों ने खा लिया. यह पुलिस ने कोर्ट को बताया है. यह मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज केस से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने सबूतों की गंभीर खामियों और पुलिस की लापरवाही को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया. आरोपी इंद्रजीत राय (26 वर्ष) बिहार के वैशाली जिला के वीरपुर गांव का रहनेवाला है. पुलिस और अदालत में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह मामला 17 जनवरी 2022 का है. ओरमांझी थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की बोलेरो रांची से रामगढ़ की ओर जा रही है, जिसमें भारी मात्रा में मादक पदार्थ लदा है. पुलिस टीम ने एनएच-20 पर बैरिकेडिंग की. गाड़ी रुकते ही उसमें सवार तीन लोग भागने लगे. पुलिस ने एक आरोपी को पकड़ लिया, जबकि दो फरार हो गये. पकड़े गये व्यक्ति की पहचान इंद्रजीत राय उर्फ अनुरजीत राय के रूप में हुई. तलाशी में करीब 200 किलो गांजा बरामद हुआ गाड़ी की तलाशी में करीब 200 किलो गांजा बरामद हुआ. इसके बाद एनडीपीएस एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा गया. जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, लेकिन मुकदमे की सुनवाई के दौरान पुलिस की कहानी सवालों के घेरे में आ गयी. गवाहों के बयानों में समय, स्थान और घटनाक्रम को लेकर भारी विरोधाभास सामने आया. कोई यह स्पष्ट नहीं कर सका कि आरोपी को किसने पकड़ा, गाड़ी कहां रोकी गयी या तलाशी कितनी देर चली. मालखाना में सुरक्षित रखा गया जब्त गांजा चूहे खा गये सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब अदालत को बताया गया कि ओरमांझी थाना के मालखाना में सुरक्षित रखा गया जब्त गांजा चूहे खा गये. इस संबंध में वर्ष 2024 में पुलिस ने सनहा दर्ज किया. अदालत ने इस दावे को गंभीर लापरवाही मानते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा सवाल उठाया. फैसले में अदालत ने कहा कि न तो आरोपी को वाहन से जोड़ने के ठोस सबूत पेश किये गये, न ही जब्ती और नमूनाकरण की प्रक्रिया पर भरोसा किया जा सकता है. वाहन के इंजन और चेसिस नंबर तक स्पष्ट नहीं थे, जिससे जांच की विश्वसनीयता कमजोर हो गयी. इसलिए अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया. मलखाने से गायब हुए गांजे की कीमत एक करोड़ आरपीएफ गांजा बरामदगी के बाद प्रति किलोग्राम 50 हजार रुपये की दर से मूल्यांकन करती है. इस तरह बरामद 200 किलो गांजा का मूल्य एक करोड़ रुपये हुआ. पुलिस के अनुसार यह चूहे खा गये. यह मामला न सिर्फ पुलिस की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि इतने बड़े पैमाने पर जब्त मादक पदार्थों की सुरक्षा और निगरानी आखिर कैसे की जाती है? अब यह जांच का विषय है कि क्या मालखाना में सचमुच चूहों का आतंक है या इसके पीछे कोई दूसरी कहानी है? घटनाक्रम 17 जनवरी 2022 : गांजा बरामदगी के लिए छापेमारी हुई. 17 जनवरी 2022 : ओरमांझी थाना में केस दर्ज होने की तिथि. 13 मार्च 2022 : केस में आरोपी इंद्रजीत राय पर चार्जशीट हुआ. 01 जून 2022 : केस में आरोपी पर चार्ज फ्रेम हुआ. 15 जून 2022 : केस में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया. 16 दिसंबर 2025 : केस में बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया. 19 दिसंबर 2025 : केस में आरोपी को बरी करने का फैसला आया.