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रेलवे नियम बदलाव: अनियमित यात्रा और उल्लंघनों पर 500 रुपये तक न्यूनतम जुर्माना

नई दिल्ली अगर आप ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करते हैं तो सावधान हो जाएं। पकड़े जाने पर अब पहले से दोगुना जुर्माना भरना पड़ेगा। रेलवे में नए नियमों के तहत अब बिना टिकट यात्रा करने या यात्रा का प्रयास करने पर देय न्यूनतम अतिरिक्त जुर्माना राशि को दोगुना करते हुए 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। इसी प्रकार, अनियमित यात्रा से संबंधित मामलों में भी अब 250 रुपये के स्थान पर 500 रुपये का न्यूनतम अतिरिक्त प्रभार वसूला जाएगा। जुर्माना राशि में कड़ा संशोधन रेलवे में अनुशासन बनाए रखने, यात्रियों की सुविधा और रेल सेवाओं के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल अधिनियम में संशोधित दंड एवं जुर्माना प्रावधान लागू कर दिए गए हैं। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट ही नहीं, बल्कि रेलवे परिसर में अनधिकृत प्रवेश, अनधिकृत फेरी, महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुषों का जबरन प्रवेश और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों की अवहेलना करने जैसे अन्य विभिन्न उल्लंघनों से संबंधित दंड प्रावधानों तथा जुर्माना राशि में भी कड़ा संशोधन किया गया है। 19 जून से प्रभावी रेल मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत रेल अधिनियम, 1989 की विभिन्न धाराओं में किए गए ये महत्वपूर्ण बदलाव 19 जून से प्रभावी हो चुके हैं। लंबे समय से अपरिवर्तित चली आ रही दंड राशियों को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप और व्यावहारिक बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने शनिवार को बताया कि इन संशोधित प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों में नियमों के प्रति जागरुकता बढ़ाना और बिना टिकट व अनियमित यात्रा पर पूरी तरह प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके साथ ही रेलवे परिसरों में पहले से बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा फायदा रेलवे प्रशासन का मानना है कि बढ़े हुए दंड प्रावधानों के डर से बिना टिकट और अनियमित यात्रा की घटनाओं में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा उन वैध टिकटधारी यात्रियों को मिलेगा जो पूरा किराया देकर सफर करते हैं। इससे रेलवे परिसरों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।  

खैबर पख्तूनख्वा में रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट, वाहनों को निशाना बनाकर किया गया हमला

नई दिल्ली पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत के बन्नू जिले में दो लगातार धमाकों से हड़कंप मच गया है। इन धमाकों में 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस ने इन रिमोट-कंट्रोल धमाकों को 'कायराना आतंकी हमला' करार दिया है। क्या है पूरी घटना? बन्नू के वजीर सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले अर्ध-जनजातीय और पहाड़ी इलाके 'मरका बेरा' में यह दिल दहला देने वाली घटना घटी है। बन्नू के डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर (DPO) यासिर अफरीदी ने इस बात की पुष्टि की है कि इन दो धमाकों में सात लोगों की जान गई है और तीन लोग घायल हुए हैं। रिमोट-कंट्रोल से वाहनों को बनाया गया निशाना डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि फांग मूसा खेल इलाके में रिमोट-कंट्रोल ब्लास्ट के जरिए दो वाहनों को टारगेट किया गया। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, डैटसन का एक प्राइवेट वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की तरफ जा रहा था। इसी दौरान इसे निशाना बनाया गया। इस जोरदार धमाके में वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया और 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दूसरा धमाका कहां हुआ? मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि जब पहले धमाके के घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर दूसरा ब्लास्ट हुआ। इसमें दूसरे वाहन के भी परखच्चे उड़ गए और 2 अन्य लोगों ने जान गंवा दी। बचाव कार्य और सर्च ऑपरेशन जारी घटना के तुरंत बाद 'रेस्क्यू 1122' की टीमों ने मोर्चा संभाला और शवों व घायलों को डोमेल रूरल हेल्थ सेंटर और खलीफा गुल नवाज टीचिंग अस्पताल पहुंचाया। सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि इलाके में और भी विस्फोटक उपकरण (IED) छिपे हो सकते हैं, जिसके चलते चप्पे-चप्पे की तलाशी ली जा रही है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस आईईडी हमले की कड़ी निंदा की है और निर्दोष नागरिकों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। बन्नू में लगातार बढ़ रहे हैं आतंकी हमले यह ताजा हमला बन्नू के पहाड़ी इलाकों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को साफ तौर पर दर्शाता है, जिससे वहां के निवासियों में भी खौफ का माहौल है। हाल के महीनों में बन्नू जिले में आतंकी हिंसा में तेजी से इजाफा हुआ है। एक सप्ताह पहले ही आतंकवादियों ने मिर्यान रोड पर स्थित 'तेरी राम ब्रिज' को विस्फोटकों से उड़ाने की कोशिश की थी, जिससे पुल को आंशिक नुकसान पहुंचा था। 12 जून को बन्नू में ही टारगेट किलिंग की दो अलग-अलग घटनाओं में दो पुलिसकर्मी मारे गए थे। पिछले महीने सुरक्षा बलों, शांति समिति और आतंकवादियों के बीच हुई एक भीषण मुठभेड़ में 25 आतंकी मारे गए थे। इस दौरान दो पुलिसकर्मी और दो नागरिकों की भी जान गई थी।

आदित्य बिड़ला फैशन यूनिट का दौरा, धनबाद में रोजगार सृजन की नई संभावनाओं पर मंथन

धनबाद बीसीसीएल क्षेत्र में पुनर्वासित और परियोजना-प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशने के उद्देश्य से बेंगलुरु स्थित आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल लिमिटेड की वस्त्र विनिर्माण इकाई का अध्ययन शुक्रवार को भ्रमण किया। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल गई है। भ्रमण के दौरान टीम ने फैक्ट्री में चल रही उत्पादन प्रणाली, पूरी आपूर्ति श्रृंखला, गुणवत्ता प्रबंधन और सहायक तकनीकी व्यवस्थाओं का विस्तार से अवलोकन किया। कंपनी अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को उत्पादन प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी और प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दी। रोजगार सृजन और औद्योगिक माडल पर चर्चा: सीएमडी सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि बीसीसीएल रोजगार को लेकर काफी गंभीर है। इसी को ध्यान में रखकर इस पर काम कर रही है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच संभावित सहयोग, स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त औद्योगिक माडल और पुनर्वासित परिवारों के लिए रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों ओर से व्यावहारिक पहलुओं और भविष्य की संभावनाओं पर विचार साझा किए गए। उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल बीसीसीएल की ओर से डीटीओपी संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक (जेएमपी) राजीव चोपड़ा सहित अन्य अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल थे। वहीं आदित्य बिड़ला समूह की ओर से मुख्य आपूर्ति श्रृंखला अधिकारी स्वामीनाथन रामचंद्रन, मुख्य स्थिरता अधिकारी डा. नरेश त्यागी, कॉरपोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ अधिकारी और मैन्युफैक्चरिंग हेड सुधाकरन गुरुनाथन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आगे की योजना पर होगा निर्णय दौरे के दूसरे दिन शनिवार को औद्योगिक माडल के क्रियान्वयन और रोजगार आधारित गतिविधियों के विकास पर विस्तृत चर्चा होगी। इस अध्ययन से मिले निष्कर्षों के आधार पर बीसीसीएल भविष्य की कार्ययोज

‘शौच के लिए बाहर जाना भी छुट्टी माना जाएगा’, शिक्षा मंत्री के बयान पर चर्चा तेज

रामगढ़  बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री व भाजपा के कद्दावर नेता मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे अपने दायित्व बोध को जगाएं तभी विवेकानंद का सपना साकार होगा। आप सभी सहयोग व संकल्प के साथ कार्य करने का निश्चय करने का ठान लेंगे, तब शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की तस्वीर बदल देंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की शिक्षा में गुणात्मक सुधार मेरी प्राथमिकता में है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी रामगढ़ के माधव पैलेस में भाजपा द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मां सरस्वती की आराधना और उपासना से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। शौच के लिए भी बाहर गए तो कार्रवाई तय शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि विद्यालय अवधि के दौरान बिना अनुमति स्कूल परिसर से बाहर जाना शिक्षकों को महंगा पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्रणाली के जरिए शिक्षकों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि यदि कोई शिक्षक स्कूल समय में परिसर से बाहर जाता है तो उसकी उपस्थिति पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शौच के लिए भी यदि कोई शिक्षक विद्यालय की चहारदीवारी से बाहर जाता है तो उसकी आधे दिन की उपस्थिति प्रभावित हो सकती है वहीं, यदि कोई शिक्षक एक घंटे से अधिक समय तक विद्यालय से बाहर रहता है तो उसे पूरे दिन की अनुपस्थिति माना जा सकता है। 'बिहार का भविष्य शिक्षकों के हाथ में' शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार के सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था शिक्षकों के भरोसे चलती है और राज्य के बच्चों का भविष्य उनके हाथों में है। उन्होंने कहा, "आप छात्रों को गढ़ने का काम करते हैं। आने वाले बिहार की नींव स्कूलों में रखी जाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।" AI आधारित मॉनिटरिंग से बढ़ेगी जवाबदेही मंत्री ने कहा कि विभाग तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दे रहा है और इसी कड़ी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यालय में उनकी गतिविधियों और समय पालन की निगरानी की जाएगी। सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग से जवाबदेही बढ़ेगी और विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी। लंबित मामलों के समाधान का भी भरोसा शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की समस्याओं को लेकर भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि विभाग में लंबित पड़े एसीपी, वेतन विसंगति, प्रोन्नति और अन्य प्रशासनिक मामलों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सचिवालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। विभाग में सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत 20 दिनों के भीतर शिकायतों का निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई मिथिलेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी शिक्षक की समस्या का समाधान नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर जहां शिक्षकों से अनुशासन और जवाबदेही की अपेक्षा करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी वैध समस्याओं के समाधान के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकारी स्‍कूलों में अपने बच्‍चे को पढ़ाने पर होगा गर्व इसलिए हमारा लक्ष्य है कि हम सभी मिलकर राज्य के स्कूलों को कुछ इस तरह विकसित करेंगे, जरुरी संसाधनों से लैस करेंगे कि सरकारी स्कूलों में मंत्री- विधायक और अधिकारी के बच्चे भी गौरव-बोध के साथ पढ़ाई कर सकें। हम ऐसी संरचना व संसाधन स्थापित कर दिखाएंगे। यह हमारा संकल्प भी है और लक्ष्य है। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि आप सुविधाएं लीजिए। सरकार जरुरी सहुलियत भी मुहैया कराने का निर्णय ले चुकी है। लेकिन पढ़ाई में ढ़िलाई बर्दाश्त नहीं होगी। पठन पाठन व्यवस्था में सख्ती लागू रहेगी। उन्होंने शिक्षकों को मजाकिया लहजे में चेताया कि अब ई शिक्षा पोर्टल पर हस्ताक्षर बनाकर ससुराल नहीं घूम पाएंगे। शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की समस्या को हमने करीब से महसूस किया और फिर सरकार ने निर्णय लिया कि महिला शिक्षकों को अपने मूल पंचायत के बगल वाली पंचायत और पुरुष शिक्षकों को अपने मूल प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में पोस्टिंग करेंगे। इस सुविधा और सहूलियत का एक मात्र उद्देश्य है कि शिक्षको को परेशानी से छुटकारा मिले और गुणात्मक शिक्षा की दिशा में सार्थक प्रयास को अंजाम दे सकें। मंत्री ने कहा कि बक्सर और रामगढ़ से मेरा गहरा लगाव है। हर महीने रामगढ़ के एक स्कूल में आऊंगा और पूर्व विधायक अशोक सिंह शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रस्ताव भेजेंगे उसे स्वीकृति मिलेगी। समारोह की अध्यक्षता नगर अध्यक्ष संजय जायसवाल और संचालन राजीव श्रीवास्तव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन परशुराम तिवारी ने किया। समारोह को जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, पूर्व प्रमुख संजय सिंह, तरुण सिंह, दिनेश उपाध्याय, कृपाशंकर चौबे, हरिद्वार राम, मंडल अध्यक्ष आनंद सिंह, अरविंद सिंह, विक्की सिंह ने संबोधित किया।    

बेसिक स्कूल रसोइयों के लिए बड़ा फैसला, सेवा शर्तों और छुट्टियों का मिलेगा लाभ

लखनऊ बेसिक स्‍कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) बनाने वाले रसोइयों की रिटायरमेंट की उम्र 62 साल हो सकती है। हाल ही में कई स्तर पर हुई बैठकों के बाद मध्याह्न भोजन प्राधिकारण इनकी सेवा नियमावली बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। नियमावली बनने के बाद अन्य संविदाकर्मियों की तरह छुट्टियों और नियुक्ति प्रक्रिया सहित कई सेवा शर्तें इन पर भी भी लागू होंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2004 में कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में बच्चों को पका हुआ भोजन दिए जाने की योजना लागू की गई थी। उसके बाद 2007 में पिछड़े ब्लॉक के अपर प्राइमरी स्कूलों में और 2008 में सभी अपर प्राइमरी स्कूलों में मध्याह्न भोजन की योजना लागू कर दी गई। वर्तमान में 1.41 लाख स्कूलों के 1.52 करोड़ बच्चों को पका हुआ भोजन दिया जा रहा है। इसके लिए 3.63 लाख रसोइये स्कूलों में कार्यरत हैं। ऐसे बनी सहमति रसोइयों को 2000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाता है, लेकिन इनकी अब तक सेवा शर्तें नहीं बनीं। ग्राम समिति इनका चयन करती हैं। कुछ रसोइये 70-75 साल की उम्र में भी कार्यरत हैं। वहीं, ग्राम समिति चाहती है तो किसी को कभी भी हटा देती है। इनकी सेवानिवृत्ति की कोई आयु सरकार ने तय नहीं की है। वहीं, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 11 महीने का मानदेय मिलता है, लेकिन रसोइयों को 10 माह का ही मानदेय मिलता है। अब इनकी सेवा शर्ते बनाने की तैयारी की जा रही है। रसोइयों के प्रदर्शन के बाद अफसरों संग हुई बैठक हाल ही में रसाइयों के प्रदर्शन के बाद अधिकारियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और शासन स्तर के अधिकारियों ने भी मंथन किया। उसके बाद प्राधिकरण को इस बाबत प्रस्ताव करने के लिए कहा गया है। इनकी रिटायरमेंट उम्र 62 साल की जा सकती है। सेवा शर्तों से क्या अंतर आएगा? सेवा शर्तें बन जाने से इनकी रिटायरमेंट उम्र तय हो जाएगी। इससे ग्राम समितियों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अभी इनको किसी तरह की कोई छुट्टी का प्रावधान नहीं है। यहां तक कि मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव का भी प्रावधान नहीं है। सेवा शर्तें बन जाने से रसोइयों को ये लाभ भी मिल सकेंगे। अन्य संविदा कर्मियों की तरह इनके 11 माह के मानदेय पर भी विचार किया जा रहा है।  

श्रद्धा कपूर की नई बायोपिक ‘ईथा’ का टीजर रिलीज, सोशल मीडिया पर मचा धमाल

बॉलीवुड डीवा श्रद्धा कपूर अपकमिंग बायोपिक ईथा से बड़े पर्दे पर बड़ा धमाका करने के लिए तैयार हैं. फिल्म का टीजर कॉकटेल 2 के साथ आया. टीजर की छोटी सी झलक ने सोशल मीडिया पर हल्ला मचा दिया है. फिल्म प्रोडक्शन के आखिरी चरण में है और फिलहाल इसके अगस्त में रिलीज होने की बात चल रही है. पर असल खबर सिर्फ यही नहीं है. असल में बात एक्ट्रेस की फैमिली की है. कहा जा रहा है कि श्रद्धा कपूर की फैमिली में कुल चार लोग हैं और चारों ही अलग-अलग घर में रहते हैं. जानते हैं कि इसकी वजह क्या है. पेरेंट्स से अलग रहती हैं श्रद्धा FPJ की रिपोर्ट में सूत्रों का हवाला देते हुए बताया गया कि श्रद्धा कपूर के परिवार के सारे लोग अलग-अलग रह रहे हैं. श्रद्धा जुहू  में एक किराये के फ्लैट में रहती हैं. उनके रूमर्ड बॉयफ्रेंड राहुल मोदी वहां आते-जाते रहते हैं. ये वही सी-फेसिंग अपार्टमेंट है, जो उन्होंने स्त्री 2 की कामयाबी के बाद ऋतिक रोशन से किराये पर लिया था. एक्ट्रेस यहां अकेली रहती हैं. उनके परिवार वाले कभी-कभार यहां उनसे मिलने आते हैं. लगभग 2020 तक कपूर फैमिली के चारों सदस्य एक ही जूहू वाले अपार्टमेंट में साथ रहते थे, लेकिन महामारी के बाद चीजें बदल गईं. अब शक्ति कपूर एक सबर्बन फ्लैट में अलग रहते हैं. श्रद्धा की मां शिवांगी ने गोवा में एक अपार्टमेंट खरीदा है. कोविड के बाद से वो अपना काफी समय गोवा के अपने बड़े घर में बिताती हैं. श्रद्धा के बड़े भाई सिद्धांत कपूर का भी गोवा में एक घर है. जब वो शूटिंग पर नहीं होते हैं, तो वहीं रहते हैं. मतलब ये कि इस कपूर खानदान के चारों सदस्य अब अपने-अपने घरों में रहते हैं और अलग जिंदगी जी रहे हैं. परफेक्ट अरेंजमेंट. सभी बड़े हैं और अपनी आजादी का स्वागत करते हैं. हमेशा के लिए हुए अलग? रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रद्धा कपूर और उनके “बापू” शक्ति ने पिछले जनवरी में मिलकर माहालक्ष्मी रेसकोर्स के सामने एक अपार्टमेंट खरीदा था.वहां के अंदरूनी सजावट का काम उनकी मां शिवांगी की निगरानी में चल रहा है, क्योंकि उनकी मां की एस्थेटिक्स पर पकड़ मज़बूत है और वो अपनी बेटी को सुंदर घर देना चाहती हैं. एक बार ये जगह तैयार हो जाए, तो श्रद्धा का सेंट्रल मुंबई में दूसरा घर भी होगा. माहालक्ष्मी वाले घर का एक हिस्सा हमेशा उनके माता-पिता के लिए रिजर्व रखा जाएगा, लेकिन सिद्धांत अपनी आजादी पसंद करते हैं और अपने बीचसाइड घर में गोवा में रहना जारी रखेंगे.

प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदबाजी, रोहित के तीन कैच ने मचाया धमाल

चेन्नई भारत और अफगानिस्तान के बीच शनिवार (21 जून) को वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले में अनुभवी बल्लेबाज रोहित शर्मा ने अपनी शानदार फील्डिंग से सुर्खियां बटोरीं. 39 वर्षीय रोहित ने स्लिप रीजन में लगातार तीन बेहतरीन कैच लपककर यह साबित कर दिया कि उम्र भले बढ़ रही हो, लेकिन वो अपनी शानदार फिटनेस को बरकरार रखे हुए हैं. खास बात यह रही कि रोहित शर्मा ने जो तीनों कैच पकड़े, वे सभी तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा की गेंदों पर आए. चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में प्रसिद्ध की धारदार गेंदबाजी और रोहित की बेहतरीन कैचिंग ने अफगानिस्तान के शीर्ष क्रम को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया. अफगानिस्तान की पारी की शुरुआत में प्रसिद्ध कृष्णा ने रहमानुल्लाह गुरबाज को अपनी अतिरिक्त उछाल से चकमा दिया. गेंद गुरबाज के बल्ले के बाहरी किनारे पर लगी और पहली स्लिप में खड़े रोहित शर्मा ने बिना कोई गलती किए आसान कैच लपक लिया. इसके बाद रहमत शाह क्रीज पर आए. एक चौका लगाने के बाद वह लय में दिख रहे थे, लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा ने उन्हें भी ज्यादा देर टिकने नहीं दिया. ऑफ स्टम्प के बाहर जाती गेंद बल्ले के किनारे पर लगी और रोहित शर्मा ने दूसरी बार कैच पकड़कर भारत को बड़ी सफलता दिलाई. अफगानिस्तान अभी इन झटकों से उबर भी नहीं पाया था कि प्रसिद्ध कृष्णा ने इब्राहिम जादरान को भी अपने जाल में फंसा लिया. जादरान का बल्ला गेंद को छू गया और स्लिप में मौजूद रोहित शर्मा ने तीसरा लगातार कैच पकड़कर स्टेडियम में मौजूद दर्शकों का उत्साह बढ़ा दिया। पावरप्ले में प्रसिद्ध कृष्णा ने अफगानिस्तान को  एक और झटका दिया, जब उन्होंने युवा बल्लेबाज दरविश रसूली को श्रेयस अय्यर के हाथों कैच आउट कराया. रोहित शर्मा के इन तीनों कैचों और प्रसिद्ध कृष्ण की तूफानी बॉलिंग ने ना सिर्फ अफगानिस्तान के टॉप ऑर्डर को ध्वस्त किया, बल्कि भारत को मुकाबले में पूरी तरह हावी भी कर दिया. ODI में पहले 10 ओवर्स में चार या उससे ज्यादा विकेट (भारतीय गेंदबाज) 5 मोहम्मद सिराज बनाम श्रीलंका, कोलंबो 2023 4 जवागल श्रीनाथ बनाम श्रीलंका, जोहानिसबर्ग 2003 4 भुवनेश्वर बनाम श्रीलंका, पोर्ट ऑफ स्पेन 2013 4 जसप्रीत बुमराह बनाम इंग्लैंड, द ओवल 2022 4 मोहम्मद सिराज बनाम श्रीलंका, तिरुवनंतपुरम 2023 4 अर्शदीप सिंह बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग 2023 4 प्रसिद्ध कृष्णा बनाम अफगानिस्तान, चेन्नई 2026

शिवसेना विवाद गहराया, शिंदे के बयान के बाद राउत की रहस्यमयी पोस्ट से बढ़ा तनाव

मुंबई  शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके गोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला था। शिंदे ने यूबीटी सांसदों की टूट का जिक्र करते हुए कहा था कि यह तो सिर्फ ट्रेलर, पिक्चर अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा था कि ऑपरेशन के लिए शेर का दिल चाहिए। इस मौके पर शिंदे ने विरोधी खेमे पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुत्ते झुंड में आते हैं, टाइगर अकेला आता है। अब शिंदे के इस बयान पर उद्धव ठाकरे के करीबी नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने रहस्यमयी पोस्ट की है। राउत ने एक्स पर जय महाराष्ट्र के साथ लिखा है कि कुछ लोग कुत्ते होते हैं लेकिन वफादार नहीं। आप एकनाथ शिंदे को इतना गंभीरता से क्यों लेते हैं? उन्हें गंभीरता से लेना बंद करें। वे कोई महान व्यक्ति नहीं हैं। वे एक बेईमान नेता हैं और आप उन्हें गंभीरता से लेते हैं? आप शुभेंदु अधिकारी को भी गंभीरता से लेते हैं। ये बेईमान लोग हैं। इन्होंने अपने ही लोगों को धोखा दिया है। जब तक वे सत्ता में हैं, जब तक उनके हाथ में पैसा है, वे ऐसी बातें कहते रहेंगे। उद्धव ठाकरे के सांसदों में बगावत महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच राजनीतिक तनाव और बयानबाजी सांसदों के बागी होने को लेकर बढ़ी है। दावा किया गया है कि शिवसेना यूबीटी के सिंबल मशाल पर जीते छह सांसदों ने उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है। उद्धव ठाकरे के पास अब सिर्फ तीन सांसद ही बचे हैं। शिंदे ने ऑपरेशन टाइगर के जरिए छह सांसदों को शिवसेना में शामिल कर लिया है। इसका औपचारिक ऐलान 21 जून को होने की संभावना जताई जा रही है। यह भी दावा किया गया है कि इस सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र भी दे दिया है। शिंदे के ऊपर संजय राउत का पलटवार शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर की। उनकी यह पोस्ट 'ऑपरेशन टाइगर' की चर्चा और इस बढ़ती अटकलबाजी के बीच आई है कि पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। X पर एक पोस्ट में राउत ने एक इन्फोग्राफिक शेयर किया जिसमें लिखा है कि कुछ लोग कुत्ते तो होते हैं लेकिन वफादार नहीं होते। उन्होंने पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है जय महाराष्ट्र!, राउत की यह टिप्पणी महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर शिवसेना कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे गुट पर निशाना साधा था और कहा था कि कुत्ते झुंड में आकर भौंकते हैं, शेर अकेला आता है।  

कर्बला की जंग: सत्ता के खिलाफ उसूलों की सबसे बड़ी कुर्बानी की कहानी

इतिहास में बहुत युद्ध बहुत हुए हैं, लेकिन 10 अक्टूबर, 680 ईस्वी (10 मुहर्रम, 61 हिजरी) की घटना ऐसी है जो केवल एक तारीख बनकर नहीं, बल्कि न्याय के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान के रूप में दर्ज है.  इराक के कर्बला के रेगिस्तान में जो हुआ, वह सत्ता और उसूलों के बीच की वह लड़ाई थी जिसने इंसानियत की परिभाषा बदल दी.  इराक के कर्बला में हुई यह घटना इमाम हुसैन और उमय्यद खलीफा यजीद प्रथम की सेनाओं के बीच हुई थी. सत्ता का संकट और कूफा का निमंत्रण इस संघर्ष की शुरुआत 680 ईस्वी में हुई, जब मुआविया प्रथम की मृत्यु के बाद उनका बेटा यजीद प्रथम खलीफा बना. मुस्लिम समुदाय (उम्मा) का एक बड़ा वर्ग मानता था कि नेतृत्व का सही अधिकार हजरत मोहम्मद के चचेरे भाई और दामाद अली इब्न अबी तालिब और उनके वंशजों का है.  इराक के कूफा शहर के लोगों ने हुसैन (अली के बेटे) को निमंत्रण दिया कि वे उनके पास आएं और उन्हें खलीफा घोषित किया जाएगा. जब यजीद को इस विद्रोह की भनक लगी, तो उसने उबैदुल्लाह (बसरा के गवर्नर) को कूफा भेजा.  उबैदुल्लाह ने कड़ाई से पेश आते हुए जनजातीय प्रमुखों को जिम्मेदार ठहराया और विद्रोह करने वालों को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी. इन धमकियों के बावजूद, हुसैन अपने परिवार और वफादार साथियों के साथ मक्का से कूफा के लिए चल पड़े. कर्बला में घेराबंदी 10 अक्टूबर को जब हुसैन फरात नदी के पश्चिम में स्थित कर्बला पहुंचे, तो उनका सामना उबैदुल्लाह द्वारा भेजी गई एक विशाल सेना से हुआ. 4,000 सैनिकों वाली इस सेना का नेतृत्व कूफा के संस्थापक के बेटे उमर इब्न साद कर रहे थे.  हुसैन के पास लड़ने वाले केवल 72 लोग थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने यजीद की सेना के आगे झुकने से इनकार कर दिया. कूफा के निवासियों से मिले मदद के वादे पूरे नहीं हुए, और हुसैन अपने साथियों के साथ  युद्ध में घिर गए.  युद्ध का अंत अत्यंत दुखद था; हुसैन और उनके लगभग सभी परिवार के लोग और साथी मारे गए. उनके शवों के साथ की गई बर्बरता ने बाद की शिया समुदायों के भीतर गहरा आक्रोश और शोक भर दिया. जैनब का साहस और सत्ता को चुनौती युद्ध के बाद, हुसैन की बहन जैनब और बच्चों सहित परिवार की महिलाओं को बंदी बना लिया गया. उन्हें पहले कूफा और फिर रेगिस्तान के रास्ते दमिश्क में यजीद के दरबार में पेश किया गया. शिया परंपरा के अनुसार, जैनब ने कूफा में उबैदुल्लाह को और दमिश्क में यजीद को सरेआम ललकारा और उसकी सत्ता को चुनौती दी.  उनका निधन 681 ईस्वी में हुआ.  उन्हें कहां दफनाया गया, इसे लेकर मान्यताएं बंटी हुई हैं: शिया परंपरा के अनुसार वे दमिश्क में दफन हैं, जबकि सुन्नी परंपरा उन्हें काहिरा में दफन मानती है. इतिहास पर गहरा प्रभाव और शोक की परंपरा इस जंग के बाद हुसैन को मानने वाले लोगों ने उमर, उबैदुल्लाह और यजीद को सीधे तौर पर हत्यारा माना.  यही वजह है कि आज भी मुस्लिम समुदाय में इन तीनों नामों को बहुत नफरत से देखा जाता है. हर साल 10 मुहर्रम (जिसे आशूरा कहा जाता है) के दिन दुनिया भर के मुसलमान गहरा दुख मनाते हैं. इस दिन लोग ताज़िया निकालते हैं और मातम (शोक मनाने का तरीका, जिसमें कई लोग खुद को चोट पहुँचाकर अपना दर्द जाहिर करते हैं) के जरिए कर्बला की उस कड़वी याद को ताजा करते है. . आज भी कर्बला में बना हुसैन का मकबरा  मुसलमानों के लिए पवित्र जगह है. अगर हम इस जंग के मकसद को देखें, तो यजीद के लिए यह लड़ाई सिर्फ अपनी गद्दी और ताकत को बचाने का एक जरिया थी. लेकिन दूसरी तरफ, हुसैन के लिए यह अपने उसूलों और सच्चाई पर डटे रहने की परीक्षा थी. हुसैन ने इस परीक्षा में अपनी जान दे दी, लेकिन वे झुकने के बजाय हारकर भी इतिहास के सबसे बड़े नायक बन गए.

10 एकड़ तक जमीन आवंटन का अधिकार डीएम को, बिहार में प्रक्रिया होगी तेज और सरल

पटना बिहार में सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार को तेज करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब विभिन्न सरकारी विभागों को फ्री या स्थायी रूप से जमीन ट्रांसफर करने के मामले में डीएम और कमिश्नर के अधिकारों का दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस बदलाव को लेकर अपना आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया है। विभाग द्वारा उठाए गए इस कदम से छोटे और मध्यम स्तर के प्रोजेक्ट्स के लिए भूमि आवंटन की फाइलों को बार-बार मुख्यालय भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बड़ी बचत होगी। पहले सिर्फ 3 एकड़ तक ही सीमित था जिलाधिकारियों का पावर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह की ओर से जारी किए गए पत्र के अनुसार, पुरानी व्यवस्था के तहत अब तक जिलाधिकारियों को केवल 3 एकड़ तक की ही सरकारी या गैर मजरूआ आम भूमि का हस्तांतरण करने का अधिकार प्राप्त था। वहीं, 3 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ तक की भूमि का फ्री हस्तांतरण प्रमंडलीय आयुक्त (कमिश्नर) के स्तर पर किया जा रहा था। हाल ही में विभाग द्वारा की गई उच्च स्तरीय समीक्षा के दौरान यह बात खुलकर सामने आई कि इस पुरानी व्यवस्था के कारण छोटी-छोटी परियोजनाओं के लिए भी जमीन हस्तांतरण में बहुत अधिक समय बर्बाद हो रहा था। इसी लेती-देती को खत्म करने के लिए विभाग ने अब 10 एकड़ तक की जमीन के ट्रांसफर की पूरी शक्ति सीधे तौर पर डीएम को सौंप दी है। 10 से 20 एकड़ तक की जमीन का फैसला करेंगे कमिश्नर विभाग द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब 10 एकड़ से अधिक और 20 एकड़ तक की सरकारी जमीन के फ्री या स्थायी हस्तांतरण की मंजूरी प्रमंडलीय आयुक्त के स्तर पर दी जा सकेगी। यदि किसी बड़ी परियोजना के लिए 20 एकड़ से अधिक भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए अंतिम मंजूरी सीधे राज्य मंत्रिपरिषद के स्तर पर ली जाएगी। इसके साथ ही, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पारदर्शिता और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए एक और कड़ा फरमान जारी किया है। विभाग ने सख्त लहजे में दोहराया है कि अब आम जनता या किसी भी कार्य के लिए लैंड रिकार्ड की केवल डिजिटल साइन्ड कॉपी ही ली जाएगी।