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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की गोवर्धन पूजा, बोले—‘प्रदेश में हर ओर शांति और समृद्धि फैले’

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय, बगिया (जशपुर) में सपरिवार गोवर्धन पूजा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की माता श्रीमती जसमनी देवी साय, धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय एवं परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण की उस प्रेरणादायी लीला की स्मृति है, जिसमें उन्होंने गोकुलवासियों को प्रलयकारी वर्षा और संकट से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर सभी को शरण दी थी। यह पर्व हमें बताता है कि जब समाज एकजुट होकर विश्वास और सहयोग के साथ कार्य करता है, तब कोई भी संकट अजेय नहीं रहता। उन्होंने कहा कि गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि कृतज्ञता, सह-अस्तित्व और प्रकृति-पूजन का प्रतीक है। इस दिन गोवंश की पूजा की जाती है, जो भारतीय संस्कृति की आत्मा — गौ-संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण — को जीवंत रखती है।

बाजार में मंदी की चमक: दिवाली के बाद सोना सस्ता, चांदी ₹10 हजार सस्ती हुई

इंदौर  दिवाली के बाद आज बुधवार को सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट आई है. 22 अक्टूबर 2025 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 1 लाख 23 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के ज्यादा है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, सोमवार 20 अक्टूबर की शाम को 916 शुद्धता यानी 22 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Rate) 116912 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो बुधवार, 22 अक्टूबर को गिरावट के साथ 113499 रुपये तक आ गया है. इसी तरह चांदी का रेट भी धड़ाम से गिरा है. आइए जानते हैं सोना-चांदी का लेटेस्ट रेट क्या है. Gold-Silver Price Today 22 October: सोना-चांदी का लेटेस्ट रेट     शुद्धता सोमवार शाम का रेट बुधवार शाम का रेट कितना महंगा हुआ गोल्ड/सिल्वर सोना (प्रति 10 ग्राम) 999 (24 कैरेट) 127633 123907 3726 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 995 (23 कैरेट) 127122 123411 3711 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 916 (22 कैरेट) 116912 113499 3413 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 750 (18 कैरेट) 95725 92930 2795 रुपये सस्ता सोना (प्रति 10 ग्राम) 585 (14 कैरेट) 74665 70486 4179 रुपये सस्ता चांदी (प्रति 1 किलो) 999  163050 152501 10549 रुपये सस्ती बता दें कि बीते दिन यानी 21 अक्टूबर को दिवाली के दिन सर्राफा बाजार की कीमतें जारी नहीं की गई थीं. जबकि सोमवार, 20 अक्टूबर को सोना-चांदी के रेट में बढ़ोतरी देखी गई थी. सोमवार को सुबह की तुलना में शाम को दाम बढ़े थे. सोने का भाव(999 शुद्धता): सुबह का रेट: ₹126730  प्रति 10 ग्राम शाम का रेट: ₹127633 प्रति 10 ग्राम चांदी का भाव (999 शुद्धता) : सुबह का रेट: ₹160100 प्रति किलो शाम का रेट: ₹163050 प्रति किलो इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए गए भाव पूरे देश में मान्य होते हैं, लेकिन इनमें जीएसटी शामिल नहीं होता है. ध्यान दें कि गहने खरीदते समय सोने या चांदी की कीमत टैक्स समेत होने के कारण अधिक होती है. IBJA की ओर से केंद्र सरकार द्वारा घोषित भाव शनिवार, रविवार और केंद्र सरकार की छुट्टियों पर जारी नहीं किए जाते.

मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में बारिश, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मुंबई  मुंबई शहर और महानगरीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ बेमौसम बारिश हुई. लक्ष्मी पूजन के दौरान अचानक हुई बारिश से खरीदारी करने आए लोगों और सड़क पर सामान बेचने वालों को असुविधा हुई. मुंबई और आसपास के इलाकों में सुबह से ही उमस थी. अचानक हुई बारिश से थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन दिवाली की खरीदारी करने वालों और दुकानदारों को असुविधा भी हुई. दरअसल दादर, बांद्रा, लालबाग, पवई, बायकुला, कुर्ला और कई अन्य क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश हुई. नगर निकाय के अधिकारियों ने बताया कि नवी मुंबई के कई इलाकों में भारी बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की भी खबर है. इस बीच, मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है. मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में बारिश नेरुल, बेलापुर, वाशी, सीवुड्स, सानपाड़ा और घनसोली सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश हुई. इससे कई सड़कें आंशिक रूप से जलमग्न हो गईं और व्यस्ततम आवागमन समय के दौरान यातायात धीमा हो गया. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आने वाले कुछ घंटों में नवी मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है. लोगों को हुई भारी परेशानी राज्य में एक बार फिर बारिश शुरू हो गई है, मुंबई सहित राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो रही है. दिवाली से ठीक पहले अचानक हुई बारिश के कारण लोगों को खरीदारी के लिए निकलने में दिक्कतें हुईं. मुंबई, कल्याण, ठाणे, पटाखा व्यापारियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. बलदापुर और नासिक जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है. मुंबई के दादर इलाके में मध्यम बारिश मुंबई में मंगलवार शाम के आसपास बारिश ने दस्तक दे दी. मुंबई के दादर इलाके में हल्की से मध्यम बारिश हुई. बारिश अचानक तब शुरू हुई जब दिवाली के मौके पर खरीदारी के लिए दादर के बाज़ार में भारी भीड़ थी.उधर, ठाणे में भी भारी बारिश हुई है. इस बारिश से खरीदारी के लिए घरों से बाहर निकले नागरिकों को काफी परेशानी हुई. कल्याण में मौसम में अचानक बदलाव आया और उसके कुछ ही देर बाद शहर और आसपास के इलाकों में गरज और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने लगी. तेज हवाओं के कारण वाहन चलाते समय चालकों को काफी तनाव में रहना पड़ रहा है. निचले इलाकों में जलभराव की आशंका कुछ क्षेत्रों में बारिश शुरू होते ही बिजली आपूर्ति बाधित हो गई, जिससे नागरिकों को दिवाली के दौरान अंधेरे में रहना पड़ा. अचानक हुई मूसलाधार बारिश से लोग भी इधर-उधर भागने को मजबूर हो गए. वहीं, अगर बारिश जारी रही तो निचले इलाकों में जलभराव की आशंका है.उधर, बदलापुर में भी बारिश ने दस्तक दे दी है. शहर में हल्की से मध्यम बारिश हुई. इस बारिश से हवा में ठंडक होने के साथ ही नागरिकों को गर्मी से राहत मिली है. नासिक जिले में बारिश दूसरी ओर, मुंबई के अलावा, नासिक जिले के कुछ हिस्सों में भी बारिश हुई है. नासिक के निफाड़ में पिछले कुछ समय से अच्छी बारिश हो रही है और इस बारिश से खेती पर असर पड़ने की संभावना है.  

बिलासपुर में भव्य छठघाट की तैयारी, 50 हजार श्रद्धालुओं की उम्मीद, 25 ट्रक मलबा हटाया गया

 बिलासपुर   छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में दिवाली के बाद अब आस्था के महापर्व छठ पूजा की धूम मचने वाली है. देश के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट के तौर पर मशहूर तोरवा छठ घाट पर तैयारियां ज़ोरों पर हैं. यह घाट करीब 7.5 एकड़ में फैला हुआ है. आयोजन समिति ने बताया है कि इस घाट पर 1 किलोमीटर के एरिया में पूजा और अर्घ्य देने के लिए प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं, जहां एक ही समय में 50,000 से ज़्यादा भक्त सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश जहां से छठ पूजा की शुरुआत हुई वहां भी इतना बड़ा और स्थाई घाट नहीं है. दिवाली के बाद छठ पूजा की तैयारी, 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दुर्गा माता की प्रतिमा विसर्जन के बाद अब छठ पूजा की धूम मचने वाली है। आयोजन समिति ने इस महापर्व की तैयारी शुरू कर दी है। यहां देश के सबसे बड़े छठ घाट में एक साथ 50,000 से अधिक लोग सूर्य देव को अर्घ्य देंगे। इस बार यह पर्व 25 नवंबर से 28 नवंबर तक मनाया जाएगा। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का महापर्व अब छत्तीसगढ़ में भी छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का पर्व है, लेकिन पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में भी इसका उत्साह बढ़ा है। शहर में बसे पूर्वांचल के लोगों के साथ ही स्थानीय लोग भी इस पर्व को मनाने लगे हैं। बिलासपुर का घाट 7 एकड़ में फैला है, जो कि देश में सबसे बड़ा घाट माना जाता है। यहाँ एक किलोमीटर के क्षेत्र में पूजा और अर्घ्य के लिए बेदी बनाई जा रही है। घाट की सफाई में जुटी समिति, मलबा हटाने का काम जारी दुर्गा विसर्जन के दौरान घाट पर इकट्ठे हुए मलबे को हटाने का काम तेजी से जारी है। अब तक 25 ट्रक मलबा निकाल लिया गया है। घाट से निकलने वाले मलबे में लकड़ी के टुकड़े, बांस की बल्लियां, मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, रंग-बिरंगे कागज और प्लास्टिक की थैलियां शामिल हैं। इससे न केवल घाट की सफाई प्रभावित हुई है, बल्कि नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है। महापर्व की शुरुआत नहाय खाय से छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ होगी। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा समेत अन्य पदाधिकारी अरपा नदी के तट पर बने छठ घाट की सफाई और रंग-रोगन के काम में जुटे हुए हैं। समिति ने महापर्व के सफल आयोजन के लिए सभी को जिम्मेदारियां सौंपी हैं। छठ घाट का महत्व और श्रद्धालुओं की भागीदारी पर्व मनाने के लिए घाटों, नदियों या तालाबों का विशेष महत्व होता है। यहां डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हुए श्रद्धालु छठी मैया की पूजा-अर्चना करते हैं। बिलासपुर के छठ घाट का आकार इसे विशेष बनाता है, जो कि बिहार के कई घाटों से भी बड़ा है। साफ-सफाई का काम और घाट का दृश्य घाट में सफाई का काम तेजी से चल रहा है। सफाई मशीनों के साथ कर्मचारी भी इस काम में जुटे हुए हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम के साथ मिलकर घाट से मलबा निकालने का कार्य किया है, ताकि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। छठ पूजा कार्यालय की स्थापना दुर्गा पूजा के बाद अब बिलासपुर में छठ महापर्व की तैयारी जोरों पर है। यहां तोरवा स्थित छठ घाट में छठ पूजा कार्यालय की स्थापना की गई है, जहां समिति के पदाधिकारी और सदस्य घाट पर व्यवस्था बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस कार्यालय के माध्यम से सभी व्यवस्थाओं का संचालन किया जाएगा। पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की पूरी संभावना है। पिछले साल की तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि इस पर्व के दौरान अरपा नदी के तट पर भीड़ काफी बढ़ जाती है। लोग उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूरा करते हैं। समापन छठ पूजा की तैयारी तेज हो चुकी है और सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर का छठ घाट इस बार और भी सुंदर और व्यवस्थित नजर आएगा, जिससे श्रद्धालुओं को एक अद्भुत अनुभव प्राप्त होगा। सभी भक्तों को इस महापर्व की शुभकामनाएं। नहाय खाय के साथ 25 अक्टूबर से पर्व की शुरुआत शहर में छठ पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा समेत पदाधिकारी अरपा नदी के तट पर बने छठघाट की साफ-सफाई और रंग-रोगन के काम में जुट गए हैं। समिति के पदाधिकारियों ने महापर्व के सफल आयोजन के लिए तैयारियों का निरीक्षण कर सभी को जिम्मेदारियां सौंपी है। 7 एकड़ में बना छठघाट, 50 हजार श्रद्धालु होंगे शामिल पर्व मनाने घाटों, नदी या तालाब के घाटों का विशेष महत्व है। यहां डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हुए छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है। छठ पूजा के लिए बिहार में सैकड़ों घाट हैं। बिलासपुर जैसा स्थायी और बड़ा घाट तो पर्व के उद्गम स्थल बिहार में भी नहीं है। छठ मुख्य रूप से बिहार प्रांत का पर्व है। बिलासपुर के तोरवा स्थित छठ घाट साढ़े 7 एकड़ में फैला हुआ है। यहां एक किलोमीटर एरिया में पूजा और अर्घ्य के लिए बेदी बनाई जाती है। जिसमें 50 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद 25 ट्रक निकला मलबा शहर सहित आसपास के क्षेत्रों की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन के लिए छठघाट में व्यवस्था की गई थी। नदी को गंदा होने से बचाने के लिए यहां कोई अलग से इंतजाम नहीं किया गया था। लोगों ने मनमाने तरीके से नदी में घाट के पास ही प्रतिमा विसर्जन कर दिया, जिससे वहां गंदगी का अंबार लग गया है। जगह-जगह फैली गंदगी से नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है। प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद स्थिति और बदहाल हो गई है। कहीं लकड़ी के टुकड़े, बांस की बल्लियां, मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, पानी में भीगे रंग-बिरंगी कागज, प्लास्टिक की थैलियां, मां की प्रतिमाओं पर चढ़ाई गई लाल और हरे रंग की चुनरी पड़ी हुई हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम की मदद से घाट से 25 ट्रक मलबा निकलवाया है। अरपा नदी के … Read more

अमृतसर DC साक्षी साहनी को नई पोस्ट, पंजाब सरकार ने किया प्रशासनिक बदलाव का ऐलान

चंडीगढ़/लुधियाना  पंजाब में एक बार फिर तबादलों का दोर शुरू हो गया है, जिसके तहत दिवाली से अगले ही दिन 3 डीसी बदल दिए गए हैं। हालांकि काफी दिनों से आला अधिकारियों के ट्रांसफ़र की अटकलें लगाई जा रही थी  लेकिन पहले बाढ़ के दोरान बचाव कार्यों और फिर किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की ट्रांसफ़र लिस्ट जारी करने मे देरी होने की बात कही गई । अब दिवाली से अगले ही दिन माझा बेल्ट के 3 डीसी बदल दिए गए, जिनमें अमृतसर की डीसी साक्षी साहनी का नाम भी शामिल है। जिनके द्वारा बाढ़ के दोरान ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर किए गए बचाव कार्यों के लिए लोगों के साथ मुख्यमंत्री भगवंत मान की तरफ से भी सार्वजनिक तोर पर तारीफ की गई थी। अब साक्षी साहनी को ग्रेटर मोहाली डिवेलपमेंट अथारिटी की मुख्य प्रशासक लगाया गया है और उनकी जगह अमृतसर के डीसी के रूप में दलविन्द्र जीत सिंह को लगाया गया है।    दलविन्द्र जीत सिंह इससे पहले डीसी गुरदासपुर थे और अब पठानकोट के डीसी आदित्य उप्पल को गुरदासपुर का डीसी लगाया गया है,  जिनकी जगह पर आईएएस अधिकारी पल्लवी पठानकोट की नई डीसी होंगी, जिन्हें नगर निगम कमिश्नर का चार्ज भी दिया गया है। 

गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा अब बने लेफ्टिनेंट कर्नल, सेना में नई पहचान से सम्मानित

नई दिल्ली  ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट और भारत के स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बन गए हैं। उन्हें यह मानद उपाधि बुधवार को एक औपचारिक समारोह के दौरान दी गई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी मौजूद रहे। समारोह के दौरान नीरज चोपड़ा सेना की वर्दी में नजर आए और उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक प्रदान की गई। इससे पहले नीरज सेना में सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत थे। सेना में नीरज का सफर नीरज चोपड़ा ने 26 अगस्त 2016 को भारतीय सेना में नायब सूबेदार के रूप में करियर की शुरुआत की थी। वर्ष 2021 में उन्हें सूबेदार और फिर 2022 में सूबेदार मेजर के पद पर प्रमोशन मिला। टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद, सेना ने उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM) से भी सम्मानित किया। उन्हें उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन अवॉर्ड और राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) भी मिल चुका है। ओलंपिक पदक विजेता हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव निवासी 27 वर्षीय नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक और हाल ही में संपन्न पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक जीता। वह भारत के पहले एथलीट हैं जिन्होंने ओलंपिक में ट्रैक और फील्ड इवेंट में स्वर्ण पदक जीता। धोनी के बाद दूसरे खिलाड़ी नीरज चोपड़ा से पहले महेंद्र सिंह धोनी को भी वर्ष 2011 में प्रादेशिक सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक दी गई थी। नीरज इस प्रतिष्ठित पद को प्राप्त करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी इस वर्ष मई 2025 में रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए नीरज चोपड़ा को लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि देने की घोषणा की थी। अधिसूचना में कहा गया था कि, "प्रादेशिक सेना विनियम, 1948 के पैरा-31 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति भारत, हरियाणा के पानीपत जिले के खंडरा गांव के निवासी, पीवीएसएम, पद्मश्री, वीएसएम, पूर्व सूबेदार मेजर नीरज चोपड़ा को 16 अप्रैल 2025 से प्रादेशिक सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि प्रदान करती हैं।"

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का प्रकोपः वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंची

नयी दिल्ली  हरियाणा के कुछ हिस्सों में बुधवार को वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में यह 'खराब' श्रेणी में रही। वहीं, दिल्ली में हवा की गुणवत्ता जहरीली हो चुकी है। दिल्ली में सुबह नौ बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 335 रहा, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 0 से 50 के बीच AQI को 'अच्छा', 51 से 100 के बीच को 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच को 'मध्यम', 201 से 300 के बीच को 'खराब', 301 से 400 के बीच को 'बहुत खराब' तथा 401 से 500 के बीच को 'गंभीर' माना जाता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा के रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा में सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 रहा। नारनौल और जींद में भी AQI 367 रहा जो के 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। CPCB के समीर ऐप के अनुसार 'बहुत खराब' वायु गुणवत्ता वाले अन्य स्थानों में चरखी दादरी (362), रोहतक (358), यमुनानगर (347), फतेहाबाद (320) और बल्लभगढ़ (318) शामिल हैं। हरियाणा में 'खराब' एकक्यूआई वाले स्थानों में बहादुरगढ़ (272), गुरुग्राम (290), करनाल (243), भिवानी (298), फ़रीदाबाद (218), कैथल (237), करनाल (243), कुरूक्षेत्र (226) और सोनीपत (285) शामिल हैं। पंजाब के अमृतसर में सुबह नौ बजे AQI 253, जालंधर में 261, पटियाला में 207 और लुधियाना में 234 दर्ज किया गया। वहीं चंडीगढ़ में एकक्यूआई 169 दर्ज किया गया।   कोलकाता, हावड़ा में वायु गुणवत्ता ‘खराब' कोलकाता और हावड़ा शहर में बुधवार सुबह वायु गुणवत्ता ‘‘खराब'' रही। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (डब्ल्यूबीपीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि जादवपुर स्थित वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 (पीएम 2.5) और बल्लीगंज में 141 (पीएम 2.5) था। सिंथी क्षेत्र में रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय में AQI 142 दर्ज किया गया जबकि कोलकाता के निकट स्थित न्यू टाउन में यह 165 था। उन्होंने बताया कि सुबह नौ बजे फोर्ट विलियम में वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 था, जबकि निकटवर्ती हरित क्षेत्र विक्टोरिया में वायु गुणवत्ता सूचकांक 242 रहा। रवींद्र सरोवर वायु निगरानी स्टेशन पर सुबह नौ बजे AQI 128 दर्ज किया गया। मंगलवार को जादवपुर में AQI 207 था जबकि बल्लीगंज में यह 213 था, जो सोमवार आधी रात के क्रमशः 159 और 134 से काफी अधिक है। मंगलवार आधी रात को हावड़ा के बेलूर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 213 था, जबकि हावड़ा के शिबपुर बॉटनिकल गार्डन क्षेत्र के कथित हरित बफर क्षेत्र में भी यह 195 था। हावड़ा के औद्योगिक शहर घुसुरी में सुबह नौ बजे AQI 179 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक 151 से 200 के बीच ‘खराब', 201 से 300 के बीच ‘बहुत खराब' और 300 से ऊपर ‘गंभीर' श्रेणी में रखा जाता है। पर्यावरणविदों ने दावा किया कि सोमवार और मंगलवार को महानगर में आधी रात तक पटाखे फोड़े जाने के कारण हवा में महीन प्रदूषक कण घुल गए। डब्ल्यूबीपीसीबी के अधिकारी ने कहा, ‘‘AQI के बिगड़ने को सीधे तौर पर पटाखे फोड़ने से नहीं जोड़ा जा सकता। AQI पिछले साल से कम है। इसके अलावा नीरी द्वारा अनुमोदित हरित पटाखों का ज्यादातर इस्तेमाल किया गया।'' अधिकारी ने कहा, ‘‘AQI में किसी भी तरह की गिरावट के लिए मौसम को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, क्योंकि बारिश या दक्षिणी हवाओं के अभाव में गर्म और आर्द्र परिस्थितियों के बीच प्रदूषक हवा में मौजूद रहते हैं…।'' उन्होंने कहा कि वे परिणामों का विश्लेषण कर रहे हैं। पर्यावरणविद् सोमेन्द्र मोहन घोष ने आरोप लगाया कि कोलकाता और हावड़ा में सोमवार और मंगलवार की शाम को आधी रात तक तेज आवाज वाले पटाखे फोड़े गए, जो पीसीबी द्वारा दी गई रात आठ बजे से 10 बजे तक की समय-सीमा से कहीं अधिक था।

यात्रा सुविधा बढ़ाने के लिए रानी कमलापति स्टेशन से सात विशेष ट्रेन सेवा शुरू

भोपाल दीपावली के पावन त्योहार के बाद घर लौटने वाले यात्रियों और छठ पूजा के अवसर पर यात्रा करने वाले लोगों की बढ़ती संख्या रेलवे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए रेलवे ने सात जोड़ी विशेष ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया है। डीआरएम पंकज त्यागी और सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने यात्रियों से व्यवस्थाओं पर चर्चा की। यात्री सुविधाओं में सुधार हेतु कर्मचारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। डीआरएम ने बताया कि भोपाल और आरकेएमपी स्टेशन पर क्राउड मैनेजमेंट प्लान लागू किया गया है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अधिक भीड़ देखी जा रही है, लेकिन अब तक किसी भी अव्यवस्था की घटना नहीं हुई है। इस प्रकार होगा ट्रेनों का संचालन     गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल प्रत्येक शनिवार और मंगलवार दिनांक 27.09.2025 से 01.11.2025 तक (छठ महापर्व स्पेशल) चलेगी।     गाड़ी संख्या 01665 रानी कमलापति-अगरतला स्पेशल प्रत्येक गुरुवार को संचालित होगी।     गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति हजरत निजामुद्दीन स्पेशल 17.10.2025 और 18.10.2025 को (दीपवाली स्पेशल) चलेगी।     गाड़ी संख्या 01289 रानी कमलापति रीवा एक्सप्रेस 17.10.2025 को संचालित होगी।     गाड़ी संख्या 02191 रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस 27.09.2025 से 18.10.2025 तक चलेगी।     गाड़ी संख्या 22187 रानी कमलापति-जबलपुर एक्सप्रेस और 12061 रानी कमलापति-जबलपुर एक्सप्रेस भी उपलब्ध रहेंगी। क्राउड मैनेजमेंट योजना के तहत     रस्सियों और बैरिकेड्स का उपयोग करके यात्रियों के लिए लाइन का प्रबंधन किया जाएगा।     होल्डिंग और सर्कुलेटिंग क्षेत्रों में लाउड स्पीकर के माध्यम से नियमित घोषणाएं की जाएंगी, जिसमें आने वाली ट्रेनों की जानकारी दी जाएगी।     यात्रियों को प्लेटफार्म की क्षमता के अनुसार व्यवस्थित किया जाएगा।     आरक्षित और अनारक्षित यात्रियों के लिए अलग-अलग प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी।     24 घंटे निगरानी के लिए कंट्रोल रूम में एक वार रूम स्थापित किया गया है।     सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से स्टेशनों की लाइव निगरानी की जा रही है। अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है।     मंडल पर बुकिंग काउंटर के अतिरिक्त 16 स्टेशनों पर 38 एटीवीएम (ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन) की सुविधा है, जिससे अनारक्षित टिकटों का वितरण किया जा रहा है।  

कफ सिरप पीने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी, कोटा में जांच शुरू

कोटा  राजस्थान के कोटा जिले में कफ सिरप पीने के बाद एक महिला की मौत के बाद ड्रग कंट्रोलर की ओर से बड़ा ऐक्शन सामने आया है। ड्रग कंट्रोलर ने मेडिकल स्टोर और गोदाम पर छापा मारा। छापेमारी में 500 से अधिक कफ सिरप की बोतलों को जप्त किया गया है। इन बोतलों के सैंपल को जांच के लिए लेबोरेटरी में भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूरी कार्रवाई ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र गर्ग के नेतृत्व में की गई है। अधिकारी मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। जांच में सामने आया है कि कफ सिरप के इन बोतलों को अहमदाबाद से मंगवाया गया था। जांच रिपोर्ट का भी इंतजार है। पुलिस ने भी महिला की डेड बॉडी का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। परिजनों की तरफ से दी गई शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। अंनतपुरा थाने के एसआई रोहित कुमार ने बताया कि महिला की डेड बॉडी का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्ट कराया गया है ताकि संदेह दूर किया जा सके। परिजनों के बयान लिए गए हैं। परिजनों ने बताया कि खांसी होने पर सिरप पीने के बाद कमला देवी की तबीयत बिगड़ गई। महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। परिजनों ने जो शिकायत दी है उस पर जांच की जा रही है। महिला की पोस्टमार्ट रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि अनंतपुरा थाना क्षेत्र के अजय आहूजा नगर की 57 वर्षीय कमला देवी अपने घर पर दीपावली की साफ-सफाई कर रही थीं। इसी दौरान वह खांसी जुकाम की चपेट में आ गईं। खासी होने पर उसके बेटे ने किसी मेडिकल स्टोर से कफ सिरप की बोतल लाकर दे दी। इसको पीने के बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उनको मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान महिला की हार्टबीट लगातार कम होती गई। आखिर में उनकी मौत हो गई।

बुंदेलखंड की परंपरा में रंगे अरविंद पटेरिया, दिवारी नृत्य में मौनिया के संग लगाए ठुमके

छतरपुर   बुंदेलखंड का छतरपुर लोकनृत्य और लोक संगीत कलाओं को संजोए हुए है. इन्हीं में से एक बुंदेली मौनिया नृत्य है, जो दीपावली के बाद आयोजित होता है. यह नृत्य बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में दीपावली के दूसरे दिन मौन परमा को पुरुषों द्वारा किया जाता है. इसे मौनी परमा भी कहा जाता है. ये बुंदेलखंड की सबसे प्राचीन नृत्य शैली है. इसे सेहरा और दिवारी नृत्य भी कहते हैं. इसमें किशोरों व युवकों द्वारा घेरा बनाकर मोर के पंखों को लेकर मनमोहक अंदाज में नृत्य किया जाता है. दिवारी नृत्य में लाठीबाजी के करतब दिवारी नृत्य लाठियां लड़ाकर भी किया जाता है. छतरपुर जिले के ग्रामीण अंचलों के लोगों की प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है. छतरपुर जिले के खजुराहो स्थित आदिवर्त संग्रहालय में पारंपरिक उल्लास के साथ मौनिया उत्सव का आयोजन किया गया. यह आयोजन संग्रहालय के सामने पार्किंग स्थल पर हुआ. उत्सव में पारंपरिक संगीत, ढोलक और नगाड़ों की गूंज के बीच विभिन्न क्षेत्रों से आए मौनिया दलों ने दीवारी नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां दी. तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा खजुराहो दिवारी नृत्य में रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों ने लोक संस्कृति के अनोखे रंगों से सराबोर कर दिया. खजुराहो, छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, दमोह तथा आसपास के ग्रामीण अंचलों से आए मोनिया दलों ने जब मंच पर पारंपरिक दीवारी नृत्य प्रस्तुत किया तो लोग देखते रह गए. कलाकारों ने अपने तेज़ लयबद्ध कदमों, चटख रंगों के परिधानों और उत्साहपूर्ण दृश्य प्रस्तुत किया कि पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. दीवारी या मोनिया नृत्य बुंदेलखंड की कृषक, चरवाहा संस्कृति का प्रतीक लोकनृत्य है, जो दीपावली से लेकर पूर्णिमा तक निरंतर किया जाता है. इस नृत्य में युवा कलाकार बुंदेली दिवारी लोकगीतों की ताल पर समूह में नाचते हैं. सामाजिक एकता का प्रतीक भी है मौनिया गीतों में श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा, धर्म, नीति, परिश्रम और जीवन के उल्लास का वर्णन होता है. यह नृत्य अहीर समाज की प्राचीन परंपरा को आज भी जीवंत बनाए हुए है. बुंदेलखंड में बरेदी नृत्य के रूप में प्रसिद्ध यह कला दीपावली के 15 दिन तक गांवों में गूंजती रहती है. इसमें नर्तक अत्यंत तीव्र गति से गोल घेरा बनाकर नृत्य करते हैं, जबकि एक कलाकार गीत की शुरुआत करता है और बाकी दल सामूहिक स्वर में उसे आगे बढ़ाते हैं. यह केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता, कृतज्ञता और धार्मिक आस्था का लोक उत्सव भी है, जिसे लोग आज भी जीवित रखे हुए हैं. मौनिया नृत्य कैसे शुरू हुआ खजुराहो में आयोजित हुए मोनिया नृत्य के दौरान राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया भी मौनिया को देखकर अपने आपको नृत्य करने से नहीं रोक पाए. पहले विधायक ने नगड़िया बजाई, फिर बुंदेली परंपरा के अनुसार मौनिया कलाकरों के साथ नृत्य किया. इस परंपरा के बारे में छतरपुर के पंडित अनंत शास्त्री महाराज बताते हैं "मोनिया नृत्य में बुंदेली लोक संस्कृति की झलक मिलती है. ऐसी मान्यता है जब भगवान श्री कृष्ण की सारी गायें कहीं चली गई तो भगवान श्रीकृष्ण दु:खी होकर मौन हो गए तो उनके दोस्तों ग्वालों ने उनकी गायें खोजी ओर गायें लेकर आये तब भगवान ने मौन तोड़ा." मौनिया उत्सव लोक संस्कृति की आत्मा मौनिया को लेकर दूसरी मान्यता यह भी है कि इंद्र के प्रकोप से गोकुलवासियों को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठा लिया. तब गोकुलवासी खुशी के मारे झूम उठे, तभी से यहां आयोजन मनाया जाता है. इस मौके पर विधायक अरविंद पटेरिया ने कहा "मौनिया उत्सव हमारी लोक संस्कृति की आत्मा है. इस आयोजन के माध्यम से न केवल परंपराएं संरक्षित होती हैं बल्कि नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से परिचय भी मिलता है."