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पी के डेयरी उत्पादों का निर्यात 10% बढ़ा, अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज

यूपी के डेयरी उत्पादों के निर्यात में 10% की अभूतपूर्व वृद्धि योगी सरकार की नीतियों का असर, पशुपालन व डेयरी सेक्टर के निर्यात में उल्लेखनीय सुधार 444.10 करोड़ से बढ़कर अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच 489.24 करोड़ रुपये पहुंचा निर्यात डेयरी, अंडे और प्राकृतिक शहद समेत उत्पादों की बढ़ती मांग से निर्यात को मिली गति डेयरी प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रहा बढ़ावा पशुपालकों की आय में इजाफा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई मजबूती लखनऊ पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए योगी सरकार के कदमों का असर निर्यात में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है। उत्तर प्रदेश के डेयरी और संबंधित पशु-आधारित उत्पादों के निर्यात में विगत एक से डेढ़ वर्ष में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार “डेयरी उत्पाद, अंडे, प्राकृतिक शहद और खाद्य उत्पाद” श्रेणी के अंतर्गत आने वाले उत्पादों का निर्यात अप्रैल 2023 से नवंबर 2024 के दौरान 444.10 करोड़ रुपये था, जो अप्रैल 2024 से नवंबर 2025 के बीच बढ़कर 489.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस प्रकार इस श्रेणी में 10.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो करीब 45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी को दर्शाती है। निर्यात को मिल रही नई गति यह श्रेणी केवल डेयरी उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंडे, प्राकृतिक शहद और अन्य खाद्य पशु-आधारित उत्पाद भी शामिल हैं। इन सभी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग ने उत्तर प्रदेश के निर्यात को नई गति दी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, दूध, घी, पनीर, मक्खन, मिल्क पाउडर के साथ-साथ शहद और अंडों की गुणवत्ता में सुधार तथा प्रोसेसिंग सुविधाओं के विस्तार से प्रदेश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत हुई है। बेहतर पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और सप्लाई चेन मैनेजमेंट ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। योगी सरकार की पहल से मिला बढ़ावा सीएम योगी के निर्देश पर राज्य में पशुपालन और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की जा रहीं हैं। डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट्स के विस्तार, कोल्ड चेन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिला है। इसके साथ ही पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु, प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। दुग्ध सहकारी समितियों और निजी डेयरी इकाइयों को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण स्तर पर संग्रहण और विपणन तंत्र मजबूत हुआ है। अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत डेयरी और संबद्ध उत्पादों के निर्यात में आई यह वृद्धि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है। इससे बड़ी संख्या में जुड़े किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर इसी तरह ध्यान दिया जाता रहा, तो उत्तर प्रदेश आने वाले समय में इस श्रेणी के निर्यात में और बड़ी छलांग लगा सकता है।

टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 के तहत चलाया गया ‘नो टोबैको प्लेज’ अभियान, यूपी लगातार दूसरे वर्ष प्रथम

लखनऊ,  तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने और युवाओं को तंबाकू के सेवन से दूर रखने के उद्देश्य से चलाए जा रहे राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीसीपी) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर देश में पहला स्थान हासिल किया। केंद्र सरकार के टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 के तहत आयोजित ऑनलाइन ‘नो टोबैको प्लेज’ अभियान में वर्ष 2025-26 के दौरान उत्तर प्रदेश ने पूरे देश में सबसे ज्यादा भागीदारी दर्ज की । इस सूची में उत्तर प्रदेश के बाद हरियाणा दूसरे, राजस्थान तीसरे और दिल्ली चौथे स्थान पर रही। राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण के इस अभियान में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशों के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है। उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्ष 2024-25 में भी टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 2.0 के दौरान ऑनलाइन ‘नो टोबैको प्लेज’ में देश में शीर्ष स्थान हासिल किया था। लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि राज्य के युवाओं, स्कूलों, स्वास्थ्य विभाग और तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की टीम के संयुक्त प्रयासों से संभव हुई है। टोबैको फ्री यूथ कैंपेन 3.0 की शुरुआत 09 अक्टूबर 2025 से हुई थी। यह राष्ट्रीय अभियान शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उन्हें तंबाकू का उपयोग न करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना और तंबाकू मुक्त पीढ़ी का निर्माण करना है। इस अभियान के तहत स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम, शिक्षकों का प्रशिक्षण, तंबाकू मुक्त संस्थानों की घोषणा और ऑनलाइन शपथ जैसी कई गतिविधियां आयोजित की गईं। उत्तर प्रदेश में इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ सफल बनाया गया। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भागीदारी कर ऑनलाइन शपथ ली। इसके अलावा लोगों को तंबाकू की लत छोड़ने में सहायता देने के लिए भी विभिन्न सेवाएं संचालित की गईं। केंद्र सरकार के तंबाकू मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि मील का पत्थर साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभर रहा उत्तर प्रदेश

यूपी के गोरखपुर और रामपुर जिले में स्थापित हो रही ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं गोरखपुर में टोरेंट पॉवर का 0.5 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट, 9 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता रामपुर में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट, 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा उत्पादन क्षमता लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के गोरखपुर और रामपुर जनपदों में ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यूपी नेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि गोरखपुर में टोरेंट पॉवर द्वारा 0.5 मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के उपयोग और उसके व्यावसायिक विस्तार की संभावनाओं को परखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी तरह रामपुर जिले में जीरो फ्रूटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन परियोजना स्थापित की जा रही है। इस संयंत्र की उत्पादन क्षमता लगभग 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा होगी। इस परियोजना से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का स्वच्छ ईंधन माना जाता है। इसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। इसका उपयोग परिवहन, उद्योग और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इन जनपदों में स्थापित हो रही ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इससे प्रदेश में हरित ऊर्जा निवेश बढ़ेगा और आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

वैश्विक निवेश, टेक्नोलॉजी और भरोसे के दम पर बदलता उत्तर प्रदेश

1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा यूपी, सिंगापुर-जापान दौरे ने खोले नए द्वार 2.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव बने ‘ब्रांड योगी’ पर भरोसे की नई कहानी बेहतरीन कानून व्यवस्था और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बना निवेश का आधार लखनऊ,  उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। यह वही प्रदेश है, जिसे नौ साल पहले अत्यधिक जनसंख्या और पिछड़ेपन के संदर्भ में देखा जाता था। आज वही उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और निर्णायक नेतृत्व के बल पर 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास से बढ़ रहा है। यह बदलाव आकस्मिक नहीं है। इसके पीछे एक स्पष्ट विजन, कठोर प्रशासनिक इच्छाशक्ति और निवेशकों को दिया गया भरोसेमंद वातावरण है। हालिया सिंगापुर और जापान दौरे से लौटे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे उत्तर प्रदेश के लिए विश्वास और अवसर का नया अध्याय बताया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह दौरा केवल निवेश जुटाने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदलते विकास मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर था। सिंगापुर-जापान दौरा: कूटनीति से अर्थनीति तक हालिया सिंगापुर-जापान दौरा केवल एक शिष्टाचार यात्रा नहीं था। यह आर्थिक कूटनीति का सुविचारित प्रयास था। सरकार-से-सरकार (G2G), सरकार-से-व्यवसाय (G2B) और उद्योग-से-उद्योग (B2B) संवादों के माध्यम से 60 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गईं। नतीजा, जापान में लगभग ₹90,000 करोड़ के एमओयू और ₹1.5 लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव तथा सिंगापुर में ₹60,000 करोड़ के एमओयू और लगभग ₹1 लाख करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कुल मिलाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को मुख्यमंत्री ब्रांड यूपी पर वैश्विक भरोसे की मुहर मानते हैं। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश अब निवेशकों के लिए केवल संभावनाओं का प्रदेश नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की क्षमता वाला राज्य बन चुका है। उत्तर प्रदेश अब निवेश मानचित्र पर उभरता विकल्प नहीं, विश्वसनीय गंतव्य बन चुका है। ‘ब्रांड योगी’: नीति, निर्णायकता और विश्वास किसी भी निवेश का पहला आधार आंकड़े नहीं, विश्वास होता है। उत्तर प्रदेश में यह विश्वास दो स्तरों पर निर्मित हुआ है। पहला राष्ट्रीय नेतृत्व की वैश्विक साख और दूसरा प्रदेश नेतृत्व की प्रशासनिक दृढ़ता। मुख्यमंत्री का मानना है कि पिछले वर्षों में प्रदेश ने कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सेक्टोरल नीतियों में जो संरचनात्मक सुधार किए हैं, उसी का परिणाम है कि सिंगापुर और जापान जैसे विकसित देशों के निवेशक बड़े पैमाने पर राज्य में रुचि दिखा रहे हैं। एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब जैसे प्रोजेक्ट्स को सीएम योगी इस भरोसे की आधारशिला बताते हैं। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: निवेश से आगे की सोच जापान और सिंगापुर दौरे की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि फोकस केवल पूंजी निवेश पर नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कौशल विकास पर भी रहा। दौरे के दौरान ग्रीन हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, फिनटेक, मेडिटेक व डीपटेक जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाश की गईं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि उत्तर प्रदेश को दीर्घकालिक औद्योगिक शक्ति बनाना है तो उसे भविष्य की तकनीकों से जुड़ना ही होगा। कानून व्यवस्था: निवेश की असली रीढ़ किसी भी औद्योगिक विकास की सबसे मजबूत नींव कानून व्यवस्था होती है। उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में निर्णायक सुधार किए हैं। माफिया और संगठित अपराध पर सख्ती, निवेशकों की सुरक्षा की गारंटी और प्रशासनिक जवाबदेही ने प्रदेश की छवि को बदला है। आज निवेशक उत्तर प्रदेश को एक स्थिर, सुरक्षित और सुनियोजित नीति वाले राज्य के रूप में देखते हैं, जो बड़े निवेश के लिए अनिवार्य शर्त है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मत है कि मजबूत कानून व्यवस्था के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। वह कहते हैं कि पिछले वर्षों में माफिया और संगठित अपराध पर सख्ती तथा प्रशासनिक जवाबदेही ने प्रदेश की छवि बदली है। निवेशक सुरक्षा, स्थिरता और पारदर्शिता चाहते हैं। उत्तर प्रदेश ने यह भरोसा दिया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: प्रक्रिया से परिणाम तक योगी सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन अनुमतियां और समयबद्ध स्वीकृतियों से उद्योगों के लिए प्रक्रियागत बाधाएं कम की हैं। उत्तर प्रदेश अब निवेश प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाकर प्रतिस्पर्धी राज्यों की श्रेणी में खड़ा है। जो प्रक्रियाएं कभी महीनों लेती थीं, वे अब तय समय-सीमा में पूरी हो रही हैं। उत्तर प्रदेश ने वास्तव में ‘रेड टेप’ की जटिलता से निकलकर ‘रेड कार्पेट’ की संस्कृति को अपनाया है, जहां निवेशक को अड़चनों से नहीं, समाधान से संतुष्ट किया जाता है। यही प्रशासनिक दक्षता और नीतिगत स्पष्टता आज वैश्विक निवेशकों के बीच प्रदेश को प्रतिस्पर्धी, विश्वसनीय और परिणामोन्मुख गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है। रोजगार, युवा और 1 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रस्तावित निवेश धरातल पर उतरते हैं तो लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। आईटी, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, रक्षा उत्पादन, ग्रीन एनर्जी और एमएसएमई सेक्टर में निवेश प्रदेश की आर्थिक संरचना को नई मजबूती देगा। उनका कहना है कि 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक परिवर्तन का रोडमैप है, जहां उद्योग, कृषि, सेवाएं और निर्यात की समान भागीदारी अनिवार्य है।

सीएम योगी के सिंगापुर दौरे के पहले दिन यूपी को मिली बड़ी निवेश सफलता, लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित

निवेश के साथ कौशल विकास को भी मिला वैश्विक सहयोग, डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी पर विशेष फोकस यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप, गोल्डन स्टेट कैपिटल, पीआईडीजी और एवीपीएन ने जताई निवेश के लिए प्रतिबद्धता आईटीईईएस के साथ तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता सिंगापुर/लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सिंगापुर दौरे के पहले दिन उत्तर प्रदेश को निवेश और कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त हुईं। आधिकारिक बैठकों और निवेशकों के साथ संवाद के बीच कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। पहले दिन कुल 19,877 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी निवेशकों के समक्ष स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतिगत ढांचा, त्वरित स्वीकृतियां और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हस्ताक्षरित किए गए समझौता ज्ञापनों में एक बड़ा प्रस्ताव यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप की ओर से आया, जिसने ग्रुप हाउसिंग, लॉजिस्टिक पार्क और डेटा सेंटर परियोजनाओं में 6,650 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इन परियोजनाओं से शहरी विकास, औद्योगिक गतिविधियों और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसी क्रम में गोल्डन स्टेट कैपिटल (जीएससी) ने उत्तर प्रदेश में 100 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर की स्थापना के लिए 8,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की। यह परियोजना राज्य को देश के अग्रणी डेटा सेंटर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसी तरह, प्राइवेट इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ग्रुप (पीआईडीजी) ने नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और कृषि सह सोलर (एग्री-पीवी) परियोजनाओं में 2,500 करोड़ रुपये निवेश का समझौता ज्ञापन किया। इसके अतिरिक्त एवीपीएन लिमिटेड ने भी नवीकरणीय ऊर्जा और एग्री-पीवी क्षेत्र में 2,727 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इन पहलों से उत्तर प्रदेश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री की सिंगापुर विजिट के पहले दिन निवेश के साथ-साथ कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) को सुदृढ़ करने के लिए आईटीई एजुकेशन सर्विसेज (आईटीईईएस) के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत आईटीईईएस शैक्षणिक विकास, बुनियादी ढांचे के उन्नयन, नेतृत्व और क्षमता निर्माण, आईएसक्यू प्रमाणन तथा क्वालिटी एश्योरेंस जैसे क्षेत्रों में परामर्श और तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कौशल व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करना है।

फिर बदलेगा उत्तर प्रदेश का मौसम, बारिश–कोहरा–गर्मी का तिहरा असर; कई जिलों में चेतावनी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक बार फिर मौसम तेजी से बदल रहा है। अब धीरे-धीरे सर्दी जा रही है और गर्मी आ रही है। सुबह के समय प्रदेश में घना कोहरा छाया रहता है और लोगों को ठंड का एहसास होता है, लेकिन धूप निकलते ही तापमान में बढ़ोतरी हो जाती है। इसी बीच मौसम विभाग ने एक ताजा अनुमान जारी किया और आने वाले दिनों में मौसम कुछ ऐसा रहने वाला है… बारिश होगी या नहीं? मौसम विभाग के मुताबिक, 22 फरवरी को राज्य में बारिश की कोई संभावना नहीं है। हालांकि सुबह के समय पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मध्यम से घना कोहरा छाने की चेतावनी जारी की गई है। दिन में मौसम साफ रहेगा और तेज धूप निकलेगी, जिससे तापमान में बढ़ोतरी जारी रहेगी। इन जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग के मुताबिक गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया, मिर्जापुर, गोंडा और बहराइच में सुबह के समय हल्का से घना कोहरा छा सकता है। कोहरे की वजह से दृश्यता कम हो सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात पर असर पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों, खासकर वाहन चालकों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। कब बढ़ेगी गर्मी? मौसम विभाग के अनुसार, अभी प्रदेश में सुबह और शाम के समय में लोगों को ठंड का एहसास होता है। सुबह के समय घना कोहरा भी छाया रहता है। लेकिन, धूप निकलते ही मौसम साफ हो जाता है। शनिवार को अधिकतम तापमान 30.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.5 डिग्री ज्यादा है। न्यूनतम तापमान 14 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। महीने की शुरुआत के मुकाबले दिन और रात दोनों के तापमान में करीब 6 से 7 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। इससे साफ है कि फरवरी के अंत में ही गर्मी की आहट महसूस होने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों में तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के बाद तापमान फिर बढ़ने लगेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा।  

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में उत्तर प्रदेश का बेहतर प्रदर्शन

अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच सोलर संयंत्र स्थापना में देश में दूसरा स्थान, घरेलू रूफटॉप सोलर में निरंतर वृद्धि लखनऊ समेत 10 जनपदों में सर्वाधिक रूफटॉप सोलर स्थापित सीएम योगी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा के प्रति जनजागरूकता और स्वीकार्यता में तेजी लखनऊ, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अगस्त 2025 से जनवरी 2026 की अवधि में राज्य सोलर संयंत्र स्थापना के मामले में देशभर में दूसरे स्थान पर रहा। इस दौरान घरेलू रूफटॉप सोलर संयंत्रों की मासिक स्थापना में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के 10 प्रमुख जनपद लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर, बरेली, प्रयागराज, आगरा, झांसी, रायबरेली, शाहजहांपुर और सहारनपुर में सबसे अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। यह राज्य में सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ती जनजागरूकता और स्वीकार्यता को दर्शाता है। महाराष्ट्र से प्रतिस्पर्धा, गुजरात को पीछे छोड़ा इस अवधि में उत्तर प्रदेश का सीधा मुकाबला महाराष्ट्र और गुजरात से रहा। सौर ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी रहे गुजरात को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश ने शीर्ष दो राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत की है। यूपीनेडा के निदेशक इंद्रजीत सिंह का कहना है कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की सौर नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, जिलावार निगरानी और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण का परिणाम है। देश में कुल रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन के मामले में उत्तर प्रदेश वर्तमान में तीसरे स्थान पर है, जबकि पीएमएसजीवाई के तहत आवेदनों की संख्या में प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इंस्टॉलेशन में हर माह वृद्धि अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच हर माह घरेलू सोलर कनेक्शनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, सब्सिडी का सीधे उपभोक्ताओं के खातों में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरण और डिस्कॉम स्तर पर त्वरित स्वीकृति प्रणाली ने योजना को गति दी है। बढ़ते बिजली बिल और पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने भी लोगों को रूफटॉप सोलर अपनाने के लिए प्रेरित किया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में योजना का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का उद्देश्य देश के एक करोड़ घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कर प्रत्येक परिवार को स्वच्छ एवं मुफ्त ऊर्जा का लाभ दिलाना है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इस योजना की सफलता से उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं में आत्मनिर्भरता भी बढ़ रही है। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से पारंपरिक विद्युत उत्पादन पर दबाव कम होगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे हरित ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद मिलेगी। पहले स्थान की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही तो आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश देश में पहला स्थान भी हासिल कर सकता है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर इंस्टॉलेशन में विगत सात माह से लगातार शीर्ष दो स्थान में बने रहना राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। घरेलू सोलर अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन गया है उत्तर प्रदेश: योगी

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सीएम योगी ने प्रस्तुत की प्रदेश की तेज आर्थिक प्रगति की तस्वीर सीएम योगी बोले, जनता जनार्द़न पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं, चोरी को रोका गया लखनऊ विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रदेश की तेज आर्थिक प्रगति की तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने राजस्व अनुशासन, किसानों की आय वृद्धि और कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलावों को सरकार की प्रमुख उपलब्धि बताया। कहा कि बिना अतिरिक्त कर लगाए टैक्स चोरी पर अंकुश और विकास के संतुलित मॉडल से प्रदेश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी मात्र 13 लाख करोड़ रुपये थी। 1947 से लेकर 2017 तक इस यात्रा को तय करने में 70 वर्ष लगे। 2017 के बाद मात्र आठ से साढ़े आठ वर्ष के बीच में डबल इंजन सरकार ने इसमें 23 लाख करोड़ अतिरिक्त जोड़े हैं। सीएम योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था 36 लाख करोड़ की हो चुकी है। जब देश आजाद हुआ था, यूपी का शेयर 14 प्रतिशत था। लगातार घटते-घटते 2016-17 में यह आठ प्रतिशत रह गया। अब लगातार आगे बढ़ते हुए 9.5 प्रतिशत तक पहुंचने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर कैपिटा इनकम को तीन गुना करने में सफलता मिली है। इसके लिए जनता जनार्दन पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया। हमने टैक्स चोरी को जरूर रोका है। रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया। आज प्रदेश पिछले पांच वर्षों में लगातार रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में अपने आप को स्थापित कर चुका है। जोरदार वित्तीय अनुशासन और विकास दोनों का संतुलन आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। सीएम ने कहाकि बैंकों में पहले उत्तर प्रदेश के अंदर 100 रुपए जमा होते थे जो मात्र 43 रुपये जनता के उपयोग में खर्च होते थे। हमने इसे बढ़ाकर 61-62 रुपये तक पहुंचा दिया है। उत्तर प्रदेश के नौजवानों और व्यापारियों तक इसके उपयोग को पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। यानी सीडी रेशियो 43 से बढ़कर 62 प्रतिशत पहुंचाने में हमने सफलता प्राप्त की है। मुझे इस बात का गर्व है कि उत्तर प्रदेश आज सही दिशा में बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश करता है सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष के लोग भी गाहे-बगाहे अन्नदाता की चर्चा करते हैं, लेकिन नीयत उनकी साफ नहीं है। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य भी है। सबसे ज्यादा खाद्यान्न उत्पादन भी करता है लेकिन अन्नदाता किसानों की स्थिति उनके समय में क्या थी। इन्होंने कहां पहुंचा दिया था? भारत आज से 2000 वर्ष पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था का सिरमौर था। 44 प्रतिशत वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत का अधिकार था। वह भारत का स्वर्ण युग था। आज से 400 वर्ष पहले भी भारत की स्थिति यही थी और ग्लोबल इकॉनामी में भारत का शेयर 24-25 प्रतिशत था। किसानों के साथ पिछली सरकारों में औपनिवेशिक मानसिकता का व्यवहार हुआ सीएम योगी ने कहा कि औपनिवेशिक काल में यहां शोषण हुआ, लूट हुई, परंपरागत उद्यम समाप्त किए गए। अन्नदाता किसानों को, जो पहले उत्पादक था, उसे उपभोक्ता बनाकर रख दिया गया। कच्चा माल यहां से बाहर जाता था, फिर पक्का माल बनकर आता था और उस पर भारी टैक्स लगाकर महंगा बेचा जाता था। आज हम कह सकते हैं कि पिछली सरकारों में भी औपनिवेशिक मानसिकता के साथ अन्नदाता किसानों, एमएसएमई सेक्टर और परंपरागत उद्यम से जुड़े कारीगरों के साथ यही व्यवहार हुआ। किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से यह देश खड़ा हुआ आज पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसान, कारीगर सभी को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया गया है। हम मानते हैं कि किसानों के श्रम और कारीगरों की सृजनशीलता से यह देश खड़ा हुआ है। हर गांव हमारे यहां एक आधारभूत इकाई हुआ करता था। ग्राम स्वराज इसकी आधारशिला थी। चाहे पशुपालन हो, कृषि हो, हस्तशिल्प हो हर क्षेत्र में किसान उत्पादक था, कारीगर स्वयं में उद्यमी था और व्यापारी राष्ट्र को जोड़ने का सेतु हुआ करता था। डबल इंजन की डबल स्पीड लागत कम, उत्पादन ज्यादा 2017 के पहले कृषि के बारे में कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। अन्नदाता केवल वोट बैंक बन गया था। लागत अधिक, उत्पादन कम था और बिचौलियों का वर्चस्व था। 2017 के बाद डबल इंजन की डबल स्पीड से लागत कम, उत्पादन ज्यादा अन्नदाता को विकास में भागीदार बनाया गया। अन्नदाता से उद्यमी बनने की कहानी आज उत्तर प्रदेश में देखी जा सकती है। भूभाग का 11 प्रतिशत यूपी के पास लेकिन 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन हमारा संकल्प कृषि को इनकम-बेस्ड और वैल्यू एडिशन मॉडल के साथ किसानों की आय बढ़ाना है। आज उत्तर प्रदेश में कृषि विकास दर 8.5 से बढ़कर साढ़े 18 प्रतिशत तक पहुंची है। एमएसपी पर पारदर्शी खरीद हो रही है और डीबीटी का पैसा सीधे अन्नदाता किसानों के खाते में जा रहा है। इसी का परिणाम है कि देश के कुल कृषि भूभाग का 11 प्रतिशत यूपी के पास है, लेकिन 21 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। अन्नदाता को खेत से बाजार तक ग्लोबल मार्केट उपलब्ध है। किसानों को खेती संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में भी उत्तर प्रदेश के किसानों को 95 हजार करोड़ रुपये की धनराशि उनके खाते में हस्तांतरित हुई है। आज अन्नदाता किसानों को उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और जलवायु संबंधी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाई जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और प्रगतिशील किसानों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान ड्रोन दीदी, एफपीओ, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग के माध्यम से फसलों का मूल्यवर्धन हो रहा है। यूपी एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड एंटरप्राइज इकोसिस्टम” परियोजना के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले धड़ल्ले से चलते थे स्लॉटर हाउस 2017 के पहले प्रदेश में स्लॉटर हाउस धड़ल्ले से चलते थे। व्यापक तस्करी होती थी और आस्था के साथ खिलवाड़ … Read more

योगी सरकार की ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’

25 वर्ष से ज्यादा पुराने प्रोजेक्ट्स को मिलेगी नई जिंदगी स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य, सोसायटी अथवा अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के दो-तिहाई सदस्यों की सहमति के बाद ही लागू होगी पुनर्विकास प्रक्रिया पीपीपी मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी, त्रिपक्षीय समझौते से तय होंगी जिम्मेदारियां डीपीआर, ट्रांजिट आवास और 3 वर्ष की समयसीमा, योगी सरकार का टाइम-बाउंड रीडेवलपमेंट ब्लूप्रिंट नियोजन मानकों में व्यावहारिक लचीलापन, बोर्ड अनुमोदन से तेज होगा अमल लखनऊ, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पुराने हो चुके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की जर्जर स्थिति को देखते हुए योगी सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026’ लागू कर दी है। इस नीति का मकसद 25 वर्ष या उससे अधिक पुराने भवनों को सुरक्षित, आधुनिक और सुविधायुक्त रूप में पुनर्विकसित करना है, ताकि लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवास मिल सके। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहरी एवं नियोजन विभाग द्वारा अब इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। योगी सरकार की यह नीति न सिर्फ पुराने और असुरक्षित भवनों को नया जीवन देगी, बल्कि निर्माण, रियल एस्टेट और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। बेहतर नियोजन और आधुनिक डिजाइन के जरिए यह पहल उत्तर प्रदेश के शहरों को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। एकल आवास नीति में शामिल नहीं प्रदेश के कई शहरों में पुराने अपार्टमेंट और ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं अब संरचनात्मक रूप से कमजोर हो चुकी हैं। ऐसे भवनों में रहना जोखिम भरा हो गया है और महंगी शहरी जमीन का पूरा उपयोग भी नहीं हो पा रहा। नई नीति के जरिए सरकार इन पुराने और कम उपयोग किए जा रहे परिसरों को नए सिरे से विकसित कर शहरों के स्वरूप को बेहतर बनाना चाहती है। नीति के तहत वे सभी सार्वजनिक और निजी प्रोजेक्ट्स पुनर्विकास के लिए पात्र होंगे, जो कम से कम 25 वर्ष पुराने हैं या जिन्हें स्ट्रक्चरल ऑडिट में असुरक्षित पाया गया हो। हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के मामलों में प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो-तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। 1500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल की भूमि और एकल मकान इस नीति में शामिल नहीं किए गए हैं। इसके अलावा नजूल की भूमि, लीज पर आवंटित भूमि तथा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की भूमि भी इस पुनर्विकास नीति में शामिल नहीं होगी। तीन मॉडल्स से तय होगा पुनर्विकास सरकार ने पुनर्विकास के लिए तीन मॉडल तय किए हैं। पहला, शासकीय एजेंसी द्वारा सीधे काम कराना, दूसरा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी डेवलपर की भागीदारी और तीसरा सोसायटी या एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास। पीपीपी मॉडल में शासकीय अभिकरण, डेवलपर और सोसायटी के बीच त्रिपक्षीय समझौता होगा, जिसमें सभी की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करना अनिवार्य होगा। इसमें नए फ्लैट्स का कारपेट एरिया, पार्किंग, कॉमन एरिया, ट्रांजिट आवास या किराये की व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और तय समयसीमा जैसी सभी जानकारियां शामिल होंगी। पुनर्विकास के दौरान जिन निवासियों को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना होगा, उन्हें वैकल्पिक आवास या किराया दिया जाएगा। तीन वर्ष में पूरी होगी परियोजना परियोजना को सामान्यतः तीन वर्ष में पूरा करना होगा, जबकि विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। नियोजन मानकों में भी व्यावहारिक लचीलापन रखा गया है। बोर्ड की मंजूरी से केस-टू-केस आधार पर कुछ शर्तों में ढील दी जा सकेगी, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों। साथ ही, आपस में जुड़े एक से अधिक भूखंडों को मिलाकर पुनर्विकास की अनुमति दी गई है, जिससे बेहतर और समेकित विकास संभव होगा।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण को गति देगी एआई कौशल क्रांति

    प्रदेश सरकार लाखों युवाओं के लिए शुरू करेगी एआई और इमर्सिव तकनीकों का व्यापक प्रशिक्षण अभियान डिजिटल अवसंरचना से डिजिटल दक्षता तक, टैबलेट बने कौशल विकास का माध्यम, निवेश और उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की रणनीति भविष्य के रोजगारों की ठोस रणनीति और तैयारी के साथ आगे बढ़ने को तैयार उत्तर प्रदेश लखनऊ,  योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते कुछ वर्षों में विकास की जिस नई कार्यसंस्कृति को स्थापित किया है, उसका केंद्र बिंदु केवल आधारभूत संरचना का निर्माण नहीं, बल्कि ह्यूमन कैपिटल (मानव पूंजी) का सशक्तीकरण भी है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश सरकार द्वारा ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना की शुरुआत की गई है। यह योजना प्रदेश में 25 लाख युवा शक्ति को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित कर उत्तर प्रदेश को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने का व्यापक अभियान है। योगी सरकार का स्पष्ट मत है कि 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि कौशल की है। प्रदेश में पहले चरण में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत किया गया। बड़ी संख्या में युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराए गए, ताकि डिजिटल पहुंच सुनिश्चित हो सके। अब उसी आधार को मजबूत करते हुए सरकार इन उपकरणों को कौशल विकास के प्रभावी माध्यम में बदल रही है। एप्लिकेशन आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से युवाओं को व्यावहारिक और उद्योगोन्मुख शिक्षा दी जाएगी, जिससे वे सीधे रोजगार या कारोबार से जुड़ सकें। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान केवल बजट का आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत है। योगी सरकार युवाओं को केवल डिग्रीधारी नहीं, दक्ष और आत्मनिर्भर बनाना चाहती है। तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में एआई और उन्नत तकनीकों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश अपने युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बना रहा है। सरकार का यह प्रयास व्यापक आर्थिक रणनीति से जुड़ा हुआ है। प्रदेश में औद्योगिक निवेश तेजी से बढ़ रहा है। डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर पार्क और विभिन्न औद्योगिक परियोजनाओं के साथ अब आवश्यकता कुशल मानव संसाधन की है। ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होंगे तो उद्योगों को भी गति मिलेगी और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। इस योजना की विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवा भी डिजिटल माध्यम से उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे। इससे क्षेत्रीय असमानता कम करने में मदद मिलेगी और प्रदेश के हर हिस्से में समान अवसर उपलब्ध होंगे। योगी सरकार की सबका साथ सबका विकास की अवधारणा इसी प्रकार की योजनाओं के माध्यम से साकार हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रोजगार का स्वरूप तकनीक आधारित होगा। ऐसे में यदि राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर कौशल उन्नयन किया जाता है तो यह बेरोजगारी की चुनौती को काफी हद तक कम कर सकता है। योगी सरकार का यह कदम युवाओं में आत्मविश्वास पैदा करेगा और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगा। भविष्य में इसके लाभ -युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, जिससे वे उभरते एआई आधारित उद्योगों में सीधे रोजगार पा सकेंगे -प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी -स्वरोजगार और स्टार्टअप की संभावनाएं बढ़ेंगी, क्योंकि तकनीकी रूप से दक्ष युवा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे -ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिलेंगे, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी एआई और उन्नत डिजिटल तकनीकों में 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना केवल कौशल विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार का ये कदम प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अगले दशक के लिए रीडिफाइन करने वाला है।  इससे प्रदेश की युवा शक्ति नौकरी तलाशने वाली भीड़ नहीं, बल्कि इनोवेशन और निवेश को आकर्षित करने वाली दक्ष कार्यशक्ति में बदलेगी। मनिन्द्र अग्रवाल, डायरेक्टर, आईआईटी, कानपुर