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सरकार की प्रभावी नीतियों से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट में 53% की वृद्धि

यूपी में बढ़ा निवेशकों का भरोसा, एक साल में 309 परियोजनाएं पंजीकृत बेहतर हुई टाउनशिप नीति तो पूंजी निवेश 44 हजार करोड़ से बढ़कर 68 हजार करोड़ तक पहुंचा धार्मिक पर्यटन के विकास से रियल एस्टेट को मिली गति, छोटे शहरों की ओर भी रुख कर रहे हैं निवेशक लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उप्र सरकार द्वारा प्रदेश की टाउनशिप नीति को बेहतर करने का नतीजा यहां रियल एस्टेट के क्षेत्र में अद्वितीय वृद्धि के रूप में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में प्रदेश के रियल एस्टेट में 68 हजार 328 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हुआ है जो 2024 में 44 हजार 526 करोड़ रुपये था। यानी निवेश में 53.5% की प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज हुई है। प्रदेश में बीते एक वर्ष में रिकॉर्ड 309 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं जो उप्र सरकार की नीतियों के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाती हैं। सरकार ने बीते वर्ष टाउनशिप नीति में परिवर्तन करके बिल्डरों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ में टाउनशिप बनाने की बाध्यता समाप्त की थी और ये छूट दी गई थी कि वे न्यूनतम 12.5 एकड़ पर टाउनशिप बना सकेंगे। इसके अलावा नई टाउनशिप नीति में आवंटियों के हितों का ध्यान भी रखा गया। 25 एकड़ की टाउनशिप को तीन साल में और इससे ज्यादा की टाउनशिप को अधिकतम 5 साल में पूरा करने के नियम बनाए गए। जबकि पहले की नीतियों के चलते कई परियोजनाएं 8 से 12 साल की अवधि में भी पूरी नहीं हो पाईं और आवंटियों का पैसा फंस गया। टाउनशिप नीति में बदलाव निवेशकों के साथ-साथ आवंटियों के लिए राहत देने वाला सिद्ध हो रहा है। एनसीआर ही नहीं, छोटे शहर भी कर रहे आकर्षित कुछ समय पहले तक एनसीआर यानी नेशनल कैपिटल रीजन उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था, लेकिन वर्ष 2025 के आंकड़े ये बताते हैं अब निवेशकों का रुझान गैर-एनसीआर जिलों और उप्र के छोटे जनपदों की ओर भी बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में पंजीकृत हुई कुल 308 परियोजनाओं में से 122 एनसीआर में और 186 परियोजनाएं गैर-एनसीआर क्षेत्रों में स्वीकृत हुईं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि उप्र सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और टियर-2 शहरों के विस्तार का रियल एस्टेट के क्षेत्र में सकारात्मक असर पड़ा है। राजधानी लखनऊ बनी केन्द्र उप्र की राजधानी लखनऊ बीते वर्ष में 67 परियोजनाओं के साथ एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरी है। वहीं अन्य शहरों की बात करें तो बरेली में 15 और आगरा में 14 परियोजनाएं रजिस्टर्ड हुई हैं। इसके अलावा बुलंदशहर, रामपुर, चंदौली, उन्नाव, गोंडा, मऊ, मिर्जापुर जैसे शहरों तक बिल्डर नए प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन से मिल रहा है विस्तार उत्तर प्रदेश में बढ़ते धार्मिक पर्यटन के चलते भी इन शहरों में रियल एस्टेट निवेश बढ़ा है। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में साल 2025 में 23 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में 5, बाबा काशी विश्वनाथ के धाम वाराणसी में 9, संगमनगरी प्रयागराज में 7 परियोजनाओं का पंजीकरण हुआ है। उप्र सरकार के प्रयासों से ये शहर बेहतर कनेक्टिविटी, शहरी पुनर्विकास योजनाओं और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि के साथ रियल एस्टेट विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के मजबूत केंद्र के रूप में उभर रहा है उत्तर प्रदेश

ईसीएमएस के तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश को मिली अहम हिस्सेदारी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को मिल रही है नई गति डिस्प्ले मॉड्यूल और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश त्वरित गति से देश के अग्रणी औद्योगिक प्रदेशों में अपनी पहचान सशक्त बनाता जा रहा है। केंद्र सरकार की “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस)” के तीसरे चरण के अंतर्गत हाल ही में 22 प्रस्तावों की स्वीकृति में उत्तर प्रदेश का नाम सम्मिलित होना इसी बदले हुए औद्योगिक परिदृश्य की तस्वीर है। ईसीएमएस योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 04 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश उन 11 राज्यों में शामिल है जहां इस योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इस योजना के अंतर्गत केंद्र की ओर से 41,863  करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश और 33,791 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसका प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश की अर्थव्यवस्था और युवाओं को भी मिलेगा। योगी सरकार ने पिछले वर्षों में निवेश अनुकूल वातावरण को मजबूती देने का काम किया है। वर्ष 2017 में अधिसूचित “उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति” और “इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पालिसी 2025” के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल रहा है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण उत्तर प्रदेश आज इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई टेक मैन्युफैक्चरिंग के मामले में पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी मोबाइल विनिर्माण केंद्र बन गया है, जो देश के 55% से अधिक स्मार्टफोन और 50-60% मोबाइल कंपोनेंट्स का उत्पादन करता है। ईसीएमएस के अंतर्गत प्रदेश में स्थापित होने वाली इकाइयां इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने में भी विशेष भूमिका निभाएंगी। इन परियोजनाओं के जरिये पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल, लीथियम आयन सेल और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का निर्माण किया जाएगा। इससे न केवल मोबाइल और आईटी हार्डवेयर इंडस्ट्री को दृढ़ता मिलेगी, प्रदेश में हाई वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार भी होगा। योगी सरकार की मंशा है कि उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाला अग्रणी प्रदेश बनाया जाए। इसी सोच को लेकर प्रदेश सरकार ने निवेशकों को हर स्तर पर सहयोग देने का एक इकोसिस्टम बनाया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश में बड़े राष्ट्रीय और वैश्विक ब्रांड निवेश के लिए आगे आ रहे हैं। ईसीएमएस के तहत जो स्वीकृति मिली है वह इस भरोसे को और मजबूती प्रदान करती है। ईएसडीएम सेक्टर से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) क्षेत्र से जुड़ी 200 से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं। इनमें वीवो, ओप्पो, सैमसंग, लावा, हायर और एलजी जैसी अग्रणी कंपनियों के साथ-साथ होलिटेक, ट्रांसशन, जाह्वा, सनवोडा और सैमक्वांग जैसे कंपोनेंट आपूर्तिकर्ताओं ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित की हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आईटी सेक्टर को मिला नया विस्तार

लखनऊ  उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख आईटी और डिजिटल हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू की गई नीतियों और मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था का असर अब धरातल स्टार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रदेश में आईटी कंपनियों का लगातार विस्तार हो रहा है, जो रोजगार सृजन निवेश और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा कर रही हैं। इनमें से सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 आईटी कंपनियां पंजीकृत हैं।    उत्तर प्रदेश में संचालित आईटी कंपनियों में स्टार्टअप्स, मध्यम उद्यम और वैश्विक स्तर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, आईटीईएस, क्लाउड सर्विसेज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं पर कार्य कर रही हैं। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टेक्नोलॉजी सेक्टर को बढ़ावा देने विज़न से आईटी कंपनियों का उत्तर प्रदेश की ओर रुझान बढ़ रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े आईटी गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुके हैं। जो डेटा सेंटर और नई तकनीकों पर आधारित सेवाएं प्रदान करने का काम कर रही हैं। इसके अलावा कानपुर और वाराणसी जैसे शहर भी तेजी से उभरते डिजिटल केंद्र बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के संतुलित विकास को मजबूती मिल रही है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के अंतर्गत प्रदेश में लगभग 400 इकाइयां पंजीकृत हैं। ये इकाइयां आईटी निर्यात में अहम भूमिका निभा रही हैं। आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2026  तक प्रदेश में एसटीपीआई पंजीकृत इकाइयों की संख्या 500 से अधिक हो जाएगी। उत्तर प्रदेश में माइक्रोसॉफ्ट, टीसीएस, एचसीएल, विप्रो, इंफोसिस, पेटीएम और एडोब जैसी प्रमुख कंपनियां बड़े स्तर पर संचालन कर रही हैं। इसके साथ ही लगभग 90 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं, जहां रिसर्च और उच्च स्तरीय सेवाओं पर काम हो रहा है। इन कंपनियों की मौजूदगी से प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर मिल रहा है। सरकार की स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के अंतर्गत युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर हुई 81, अब रेफरल सिस्टम को सीमित कर प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में बेहतर उपचार की व्यवस्था की जा रही सुनिश्चितः मुख्यमंत्री

  विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के लिए सरकार को अब तक 98 लाख से अधिक नागरिकों के सुझाव प्राप्त हुए हैं, 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की जा रहीं नीतियांः योगी   लखनऊ, विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, विकास कार्यों की गति और विकसित उत्तर प्रदेश के रोडमैप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति पहले दिन जैसी ही मजबूत है और योजनाओं को अब टोकन फंडिंग नहीं, बल्कि ठोस वित्तीय प्रावधानों के साथ ज़मीन पर उतारा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करना आवश्यक है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर अब 81 हो चुकी है। आपके क्षेत्र में भी माधव बाबू के नाम पर मेडिकल कॉलेज स्थापित किया गया है। पहले स्थिति यह थी कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता था तो उसे गोरखपुर भेज दिया जाता था, फिर एम्स या लखनऊ आना पड़ता था। इससे मरीज और उसके परिजनों को भारी परेशानी होती थी। अब हमने इस व्यवस्था को समाप्त किया है। सभी मेडिकल कॉलेजों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि रेफर करने की आदत छोड़कर वहीं उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें, और इस दिशा में कार्य भी हो रहा है। यह प्रदेश का 81वां मेडिकल कॉलेज है। अमेठी जैसे क्षेत्र, जहां वर्षों तक कांग्रेस का प्रभाव रहा, वहां भी मेडिकल कॉलेज नहीं बन पाया, जबकि अब हमारी सरकार ने वहां यह कार्य प्रारंभ किया है। मैं मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने भूमि उपलब्ध कराई और वहां मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ। इस सत्र में वहां कक्षाएं भी प्रारंभ हो चुकी हैं। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज की दिशा में कार्य प्रगति पर है। सरकार ने भूमि प्रस्ताव शीघ्र मंगवाया है और धन की व्यवस्था भी कर दी गई है। बलिया में भी मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। अब तक 98 लाख से अधिक लोगों ने विकसित उत्तर प्रदेश के लिए अपने सुझाव साझा किए मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं एक और महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख करना चाहूंगा। पिछले सत्र में 13–14 अगस्त को इस सदन में ‘विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश’ विषय पर व्यापक और सार्थक चर्चा हुई थी। इस चर्चा के बाद प्रदेशभर के लगभग 300 बुद्धिजीवियों के साथ विचार-विमर्श किया गया और उन्हें विभिन्न संस्थानों में भेजकर इस विषय पर संवाद कराया गया। इसके बाद एक पोर्टल विकसित किया गया, जिसके माध्यम से प्रदेश की जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि अब तक 98 लाख से अधिक लोगों ने विकसित उत्तर प्रदेश के लिए अपने सुझाव साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि 2047 में प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन के अनुरूप विकसित उत्तर प्रदेश कैसे बने, इस विषय पर प्राप्त सुझावों को लेकर हम आईआईटी कानपुर के सहयोग से विभिन्न सेक्टरों में कार्य कर रहे हैं। सरकार की इच्छाशक्ति आज भी पहले दिन जैसी मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि सरकार की इच्छाशक्ति पहले दिन जैसी थी, आज भी वैसी ही है और उसी दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। सप्लीमेंट्री डिमांड्स में भी उन्हीं क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां वास्तविक आवश्यकता थी। अब सरकार टोकन मनी की नीति पर नहीं चलती। पहले 25 करोड़ की सड़क के लिए मात्र 1 लाख रुपये जारी कर दिए जाते थे, जिससे काम संभव ही नहीं था। अब सरकार ने स्पष्ट नीति तय की है कि एक साथ 40 से 50 प्रतिशत धनराशि जारी की जाएगी और 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण होते ही अगली किस्त जारी की जाएगी, जिससे कार्यों की गति बनी रहे। कार्ययोजना और डीपीआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब कार्यों के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा रही है। वर्ष 2024–25 और 2025–26 में विकास की यह गति और अधिक तेज होती हुई दिखाई देगी। मुख्यमंत्री का शायराना अंदाज मुख्यमंत्री ने सदन में अपनी बात की शुरुआत और अंत दोनों शायरी के साथ किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पूछा था कि…'इधर उधर की न बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा'…वहीं, सीएम ने अपने संबोधन के अंत में नेता प्रतिपक्ष और विपक्ष के सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि अनावश्यक नकारात्मकता से बचें। हर विषय को जाति या संकीर्ण दृष्टि से देखने की आदत प्रदेश के हित में नहीं है। उत्तर प्रदेश को जितना नुकसान पहले हो चुका है, उससे अब बचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अंत में यही कहूंगा कि… राह में मुश्किल हों हजार, तुम दो कदम बढ़ाओ तो सही, हो जाएगा हर सपना साकार, तुम चलो तो सही, तुम चलो तो सही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश के जो सपने इस सदन ने देखे हैं, उन्हें साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

अनुपूरक बजट चर्चा में सीएम योगी बोले- परंपरागत उत्पादों को ब्रांडिंग-पैकेजिंग से मिला नया बाजार, काला नमक बना उदाहरण

ब्रह्मोस मिसाइल के लखनऊ में निर्माण से डिफेंस कॉरिडोर को मिली मजबूतीः योगी आदित्यनाथ वेलफेयर योजनाओं और विकास कार्यों में कोई भेदभाव नहीं, हर विधानसभा तक पहुंच रहा विकास का पैसाः योगी आदित्यनाथ लखनऊ, विधान सभा के शीतकालीन सत्र में अनुपूरक बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों के साथ-साथ परंपरागत उद्यमों को सशक्त कर एमएसएमई सेक्टर को नई मजबूती दी गई है, जिसका असर आज निवेश, निर्यात और रोजगार के रूप में साफ दिखाई दे रहा है। पहले किसी सरकार ने इन उत्पादों पर ध्यान नहीं दिया, जबकि मौजूदा सरकार ने इनकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब के प्रति सरकार की संवेदना अडिग है। 25 करोड़ की आबादी के कल्याण और सुरक्षा के लिए सरकार बिना किसी भेदभाव के मजबूती से खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी। काला नमक चावल की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि काला नमक चावल पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।  हमारी सरकार ने इसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शाही जी जहां भी जाते हैं, वहां के श्रेष्ठ स्थानीय खाद्य उत्पादों की जानकारी लेते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए वाराणसी का किस्सा भी सुनाया और कहा कि शाही जी स्वयं परंपरागत उत्पादों के प्रति सजग हैं और काला नमक को विशेष ब्रांड के रूप में स्थापित करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। वहीं, पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए कहा कि उस समय इच्छाशक्ति की कमी के कारण ऐसे उत्पाद उपेक्षित रहे। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश के हर जनपद में एक-एक विशिष्ट उत्पाद था, लेकिन तकनीक, डिजाइन, मार्केट डिमांड और पैकेजिंग की जानकारी के अभाव में वे धीरे-धीरे बंद होते जा रहे थे। सरकार ने इन्हें सुविधाएं दीं और आज उत्तर प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा एमएसएमई नेटवर्क है। प्रदेश में करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं, जिनसे पौने दो करोड़ परिवारों की आजीविका चल रही है। एमएसएमई के जरिए यूपी दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा है। 5 लाख करोड़ की जीबीसी होगी जल्द निवेश के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमीनी स्तर पर उतर चुके हैं। वहीं, 7 लाख से अधिक युवाओं को सीधे रोजगार मिला है। 5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नए भारत का नया उत्तर प्रदेश है। अब प्रदेश का युवा रोजगार के लिए भटकने को मजबूर नहीं है। ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण अब लखनऊ में हो रहा है, जो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर की बड़ी उपलब्धि है। इसमें काम करने वाले सभी युवा उत्तर प्रदेश के हैं। आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग पास युवाओं को यहीं रोजगार मिला है। कभी चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया वेलफेयर योजनाओं पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार ने कभी चेहरा देखकर योजनाओं का लाभ नहीं दिया। आवास, राशन, उज्ज्वला गैस, आयुष्मान कार्ड और मुख्यमंत्री राहत कोष हर योजना बिना भेदभाव लागू की गई है। सूची में उन गरीबों को भी जोड़ा गया, जिन्हें पहले वंचित रखा गया था। सीएम योगी ने कहा कि 403 विधानसभा क्षेत्रों में कोई भी क्षेत्र विकास से वंचित नहीं रहेगा। पीडब्ल्यूडी समेत हर विभाग की नियमित समीक्षा होती है, जिलों में सांसद और प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में बैठकें होती हैं और योजनाओं की प्रगति की रिपोर्ट शासन तक पहुंचती है। मुख्यमंत्री राहत कोष में किए गए नए प्रावधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिनके पास आयुष्मान कार्ड है, वे पहले उसका उपयोग करें, आवश्यकता होने पर जिला अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर राहत कोष से सहायता दी जाएगी। कुछ अस्पतालों में गलत बिलिंग की शिकायतों पर कार्रवाई भी की गई है।

विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर पलटवार

लखनऊ, विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान अनुपूरक बजट पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों को सदन के समक्ष रखा, बल्कि विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का भी तथ्यों के साथ जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में सुरक्षा, कानून का राज और विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इन्हीं आधारों पर उत्तर प्रदेश की छवि देश और दुनिया में बदली है। इस दौरान, मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर जमकर हमला भी बोला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आज जो उपदेश हमारी सरकार को दिए जा रहे हैं, वो उपदेश पहले की सरकारों को दिए होते तो प्रदेश की स्थिति कुछ और होती। विपक्ष के उठाए सवालों को गंभीरता से लेगी सरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नेता प्रतिपक्ष और सभी दलीय नेताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में उठाए गए अधिकांश विषय आम जनमानस से जुड़े हुए हैं और प्रदेश के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों को सरकार गंभीरता से लेती है और उन पर आवश्यक कार्यवाही भी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी हैं तथा उनकी सहजता और सरलता सदन को सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि विपक्ष में रहते हुए सरकार के कार्यों की आलोचना की जाती है, क्योंकि विरोध में रहने का भी यही औचित्य होता है। आपने सरकार के बजट के आकार और पिछले लगभग साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सरकार के योगदान पर प्रश्न उठाए हैं। इतना अवश्य पूछना चाहूंगा कि यदि आज से लगभग नौ–दस वर्ष पहले, जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी और भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, आज जो आपने उपदेश यहां दिए हैं, वे उस समय की सरकार को दिए होते तो संभवतः प्रदेश की स्थिति कुछ और होती। 2017 से पहले और बाद का अंतर प्रदेश की जनता देख रही है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में अराजकता, अव्यवस्था और पहचान के संकट की जो स्थिति बनी थी, उसके लिए कौन उत्तरदायी था यह उत्तर प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है। आपने यह स्वीकार किया है कि अपराधियों और माफियाओं के प्रति सरकार की नीति स्पष्ट और कठोर होनी चाहिए और यह हमारी सरकार ने करके भी दिखाया है। राज्य की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए स्पष्ट नीति और उसे लागू करने की इच्छाशक्ति आवश्यक होती है। इसके चार प्रमुख आयाम हैं और उन चारों पर सरकार ने प्रभावी ढंग से कार्य किया है। कोई भी व्यक्ति, समाज या संस्था, सबसे पहले सुरक्षा चाहता है। कानून का राज हो, हर व्यक्ति, हर बेटी, हर व्यापारी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे यह किसी भी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले और 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की छवि में जो बदलाव आया है, वह देश और दुनिया दोनों के सामने है। पहले प्रदेश की छवि अच्छी नहीं थी, यह हम सभी को पीड़ा देता था। आज प्रदेश के भीतर या बाहर जाने पर लोग स्वयं कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का बेहतर माहौल है, दंगे नहीं हैं, अराजकता नहीं है। बेटी किसी भी पक्ष की हो उसे न्याय मिलेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय कैसे होता है, इसका उदाहरण भी हमारे सामने है। पूजा पाल प्रकरण इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। आपके समय में माफिया के सामने झुकना मजबूरी थी, लेकिन आज सरकार यह स्पष्ट कर चुकी है कि बेटी किसी भी पक्ष की हो, उसे न्याय हर हाल में मिलेगा। यह केवल सत्ता या विपक्ष का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश की सुरक्षा और सम्मान का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस रिद्धिमा यादव की बात यहां कही जा रही है उसे भी न्याय हमारी सरकार जरूर देगी। मुख्यमंत्री ने अवैध कब्जों के सवाल पर कहा कि मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि चाहे कोई भी हो, किसी भी स्मारक, पौराणिक स्थल या सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाएगी। सरकारी भूमि गरीबों के लिए है, न कि माफिया के लिए। गरीब और वंचितों के लिए लाए गए बिल पर सपा का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह दुर्भाग्य है कि इस सदन में जब ग्रामीण अभिलेख विधेयक लाया गया तो समाजवादी पार्टी ने उसका विरोध किया। ग्रामीण अभिलेख से संबंधित संशोधन विधेयक पहली बार गरीब को उसके मकान का वैधानिक अधिकार देता है। यह अधिकार महिला सदस्य के नाम पर दर्ज होगा, जिससे वह आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेगी। लेकिन यदि कोई माफिया या असामाजिक तत्व सरकारी भूमि पर कब्जा कर अनैतिक गतिविधियाँ करेगा, तो उस पर कठोरतम कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि यही सुरक्षा का वातावरण है, जिसने उत्तर प्रदेश की छवि बदली है और जिसके कारण आज प्रदेश में निवेश आ रहा है। यह परिवर्तन परिणाम आधारित है, और उत्तर प्रदेश की जनता ने इसका उत्तर दिया है और आगे भी देती रहेगी।

लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर, सीतापुर की एक हजार से अधिक महिलाएं मोरिंगा के जरिए बन रहीं आत्मनिर्भर

एफपीओ के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण महिलाओं की बढ़ रही आमदनी सवा लाख रुपये तक की हो रही आय, बाजार में बढ़ रही उत्पादों की मांग लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन का असर अब गांव-गांव दिखने लगा है। राजधानी लखनऊ, अयोध्या, बाराबंकी, सुल्तानपुर और सीतापुर समेत तमाम जिलों में मोरिंगा आधारित आजीविका मॉडल ने ग्रामीण महिलाओं को स्थायी रोजगार और सम्मानजनक आय का रास्ता दिया है। इन जिलों की एक हजार से अधिक महिलाएं मोरिंगा की पत्तियों, बीज और छाल की प्राथमिक प्रोसेसिंग से जुड़कर नियमित कमाई कर रही हैं। मोरिंगा को लेकर इस पहल की अगुवाई कर रहीं जेवीकेएस बायो एनर्जी फार्मर प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड बीकेटी लखनऊ की डायरेक्टर डॉ. कामिनी सिंह बताती हैं कि सीतापुर जिले के सिधौली ब्लॉक के ग्राम गाजीपुर में सीमा देवी, बउआ देवी, शालिनी देवी, ममता देवी, पूनम देवी, प्रियंका, राजकुमारी सहित प्रदेश के अन्य जिलों की सैकड़ों महिलाएं इस मॉडल से जुड़ी हैं। इन्हें प्रतिमाह 10,000 तक और वार्षिक सवा लाख रुपये तक की आय हो रही है। महिलाओं ने समूह के रूप में काम सीखकर गुणवत्ता, पैकेजिंग और समयबद्ध सप्लाई पर फोकस किया, जिससे बाजार में उनके उत्पादों की मांग भी बढ़ रही है। प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स के जरिए हो रहा काम यह पूरा प्रोजेक्ट एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के अंतर्गत संचालित किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से चल रहा है। एफपीओ ने प्राइमरी प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की हैं, जहां मोरिंगा की पत्तियों, बीजों और छाल से वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन हुआ है और महिलाओं की आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। घर के पास काम मिलने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी सीएम योगी के निर्देश पर मोरिंगा के जरिए स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसकी सबसे खास बात ये है कि घर के पास काम मिलने से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। ग्रामीण महिलाएं पत्तियों की तुड़ाई, सुखाने, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण लेकर आय अर्जित कर रही हैं। डॉ कामिनी सिंह के अनुसार मोरिंगा से टैबलेट, पाउडर, मोरिंगा चाय, हैंडमेड साबुन, मोरिंगा सीड आयल और मोरिंगा लड्डू, मोरिंगा बिस्कुट बनते हैं। इसके माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं।

सौर ऊर्जा पॉलिसी का असर: यूपी में बिजली उत्पादन और रोजगार दोनों में वृद्धि

पीएम सूर्य घर योजना से आगरा मंडल में रिकॉर्ड 82 हजार से अधिक लोगों ने किया आवेदन ब्रज क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा ग्रीन एनर्जी की ओर, लोगों के घर और प्रतिष्ठान हो रहे सौर ऊर्जा से रोशन सूर्य मित्र मुफ्त प्रशिक्षण पाकर सोलर सेक्टर में युवाओं को मिल रहे करियर बनाने के अवसर वेंडरों और कंपनियों के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर मिल रहा रोजगार आगरा  योगी सरकार की हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की नीति उत्तर प्रदेश को विद्युत उत्पादन में आत्मनिर्भर बना रही है, साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही है। केंद्र की 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' को आगरा मंडल में जबरदस्त सफलता मिली है। यहां 82 हजार से अधिक लोगों ने सौर ऊर्जा से अपने घर और प्रतिष्ठान रोशन करने के लिए आवेदन किया है, जिससे ब्रज क्षेत्र ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। यूपी नेडा परियोजना अधिकारी (अतिरिक्त प्रभार) खगेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और पीएम सूर्य घर योजना के कारण सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है। आगरा मंडल में अब तक 82759 लोगों ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत आवेदन किया है। जिसमें आगरा जनपद से 30502 आवेदन प्राप्त हुए है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली प्रदान कर रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देते हुए पर्यावरण और रोजगार दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। इस योजना से आगरा मंडल में अब तक 3200 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। 'सूर्य मित्र' से युवाओं को मिल रहा स्थायी करियर इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 'सूर्य मित्र' प्रशिक्षण कार्यक्रम है। यूपी नेडा द्वारा युवाओं को सोलर पैनल लगाने और रखरखाव का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को सोलर सेक्टर में करियर बनाने और रोजगार पाने का अवसर मिल रहा है। हजारों वेंडरों, कंपनियों और प्रशिक्षित तकनीशियनों के माध्यम से नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। सोलर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के तकनीकी सहायक पंकज यादव ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यूपी नेडा से प्रशिक्षण लेने के बाद मुझे सोलर कंपनी में तुरंत काम मिल गया। पहले मैं बेरोजगार था, लेकिन अब मैं एक स्थायी करियर बना रहा हूँ। योगी सरकार का यह कदम युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका दे रहा है। उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली और बचत पीएम सूर्य घर योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ता भी बेहद उत्साहित हैं। आगरा की विजय नगर निवासी और उपभोक्ता रोमा ने बताया कि बिजली बिलों से बहुत परेशानी होती थी, लेकिन पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर लगवाने के बाद अब हमारा घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा हैं। इससे बिजली के बिल में बड़ी बचत हो रही है। यह सरकार की बहुत बड़ी राहत है।

प्रदेश में विजन 2047 को साकार करने के लिए 98 लाख सुझावों पर आधारित 12 सेक्टरों वाला विजन डॉक्यूमेंट हो रहा तैयारः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहाः 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प तभी पूरा होगा जब राज्य समान गति व संकल्प से बढ़ेगा आगे नई दिल्ली,  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत के विजन 2047 को साकार करने में उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे अहम है। शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित एक निजी समाचार पत्र के कॉन्क्लेव में प्रतिभाग करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को वर्ष 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प तभी पूरा हो सकता है जब देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य समान गति और संकल्प के साथ आगे बढ़े। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापक विमर्श और जनभागीदारी के आधार पर राज्य का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है जिसमें जनप्रतिनिधियों तथा जनता दोनों के सुझाव शामिल किए गए हैं। जनता की भागीदारी का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार विकसित भारत के निर्माण में उत्तर प्रदेश को अपनी भूमिका मजबूत करनी होगी। इसके लिए विधानसभा में 27 घंटे तक लगातार चर्चा कराई गई, जिसमें सभी दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जनता से भी व्यापक स्तर पर सुझाव मांगे गए और अब तक 98 लाख विचार प्राप्त हुए। इन सुझावों को आधार बनाकर राज्य के 12 प्रमुख सेक्टरों के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश का लक्ष्य वर्ष 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है और राज्य की वर्तमान प्रगति इस दिशा में उत्साहजनक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश 'विकसित भारत विकसित उत्तर प्रदेश' और 'आत्मनिर्भर भारत आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के संकल्प को पूरा करेगा। उत्तर प्रदेश ने नकारात्मक धारणा को पीछे छोड़ा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेश के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक दौर में कई उद्यमी उत्तर प्रदेश लौटने से हिचकिचाते थे और राज्य के प्रति नकारात्मक धारणा रखते थे। योगी ने कहा कि उन्होंने उद्योग जगत को भरोसा दिलाया कि नया उत्तर प्रदेश उन्हें अवश्य दिखाई देगा। इसी प्रयास के परिणामस्वरूप रोड शो में ढाई लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्राप्त हुए और पहले इन्वेस्टर समिट में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग चार लाख पचहत्तर हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 के तीसरे इन्वेस्टर समिट में उत्तर प्रदेश को कुल 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इस प्रकार राज्य को अब तक कुल 45 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव मिले हैं जिनमें से 15 लाख करोड़ की परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं और उनमें उत्पादन शुरू हो चुका है। अगली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी का भी किया जिक्र कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रस्तावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के अगले संस्करण का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 5 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभी ग्राउंड ब्रेकिंग के अगले संस्करण के आयोजन की तिथि तय की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि निवेश के क्षेत्र में यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के लिए एक नया मील का पत्थर है और डबल इंजन सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई ऊंचाई पर पहुंचाया है जो अब सभी को प्रत्यक्ष दिख रहा है।

उत्तर प्रदेश में नवाचार की नई परंपरा, इनक्यूबेशन सेंटर बने विकास के अग्रदूत

प्रदेश में 8 वर्षों में विकसित हुआ सशक्त इनक्यूबेशन इकोसिस्टम योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों से युवाओं को मिला रोजगार उद्यम और नवाचार का नया अवसर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले आठ वर्षों में इनक्यूबेशन आधारित नवाचार को नई पहचान दी है। आज प्रदेश में कुल 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं। ये केंद्र विद्यार्थियों और युवाओं को विचार से उद्योग तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सहयोग देते हैं। सरकार का उद्देश्य हर जिले में ऐसा माहौल तैयार करना है जहां युवा सुरक्षित और संगठित तरीके से उद्यम शुरू कर सकें। इसी लक्ष्य के तहत वित्तीय सहायता तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इनक्यूबेशन सेंटर वह स्थान है, जहां नए आइडिया को विकसित कर सफल कारोबार में बदलने के लिए सभी आवश्यक संसाधन एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह ऐसा केंद्र है जो स्टार्टअप को उसके जन्म से लेकर उसके पांव जमाने तक मार्गदर्शन, सहायता और सुविधाएं प्रदान करता है। इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना से उद्यमियों की कई चुनौतियां सरल हो गई हैं। यहां शुरुआती चरण में जरूरी प्रशिक्षण कानूनी सलाह बाजार से जुड़ी जानकारी तकनीकी मार्गदर्शन और निवेशकों से संपर्क जैसे सभी तत्व एक ही स्थान पर उपलब्ध होते हैं। इससे किसी भी स्टार्टअप की सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इन केंद्रों ने युवाओं में उद्यमिता की भावना को मजबूत किया है और उन्हें जोखिम लेने का आत्मविश्वास दिया है। पिछले आठ वर्षों में इन केंद्रों से जुड़े हजारों युवाओं ने अपनी पहचान बनाई है। कृषि तकनीक शिक्षा स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले कई स्टार्टअप प्रदेश के भीतर और बाहर अपनी उपयोगिता सिद्ध कर चुके हैं। इन स्टार्टअप ने रोजगार भी बढ़ाया है और स्थानीय समस्याओं के समाधान भी प्रदान किए हैं। इससे उत्तर प्रदेश के आर्थिक ढांचे को नई दिशा मिली है। स्टार्टअप विशेषज्ञ विनीत का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार स्टार्टअप को बढ़ावा देने का ठोस प्रयास कर रही है। इन्क्युबेटर्स की स्थापना से स्टार्टअप्स को बड़ी मदद मिलती है। शुरुआत में स्टार्टअप्स को बहुत दिक्कतें आती है, ऐसे में इन्क्युबेटर्स बड़े सहायक होते हैं। योगी आदित्यनाथ सरकार का मानना है कि इनोवेशन और तकनीक आधारित उद्यम ही भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार तैयार करेंगे। इनक्यूबेशन सेंटर इसी सोच का विस्तार हैं। छोटे शहरों से निकलकर बड़े मंच तक पहुंचने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यह परिवर्तन प्रदेश को एक मजबूत स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित कर रहा है। कुल मिलाकर इनक्यूबेशन सेंटर उत्तर प्रदेश में विकास और अवसरों के नए द्वार खोल रहे हैं। यह नेटवर्क न केवल उद्यमिता को गति दे रहा है बल्कि प्रदेश को आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी अग्रसर कर रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार से पहले इनक्यूबेशन सेंटर मामले में स्थिति उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या लगभग 12 से 15 के बीच थी। यह केंद्र केवल चुनिंदा विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों तक सीमित थे। न इनके विस्तार की कोई स्पष्ट नीति थी और न ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर कोई स्पष्ट संरचना। योगी आदित्यनाथ सरकार में विस्तार वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने स्टार्टअप नीति लागू की और पूरे राज्य में इनक्यूबेशन नेटवर्क का व्यापक विस्तार शुरू किया। परिणाम स्वरूप आज प्रदेश में 76 इनक्यूबेशन सेंटर सक्रिय हैं और कई और स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं। सरकार के प्रमुख लक्ष्य – हर जिले में कम से कम एक इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करना – उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करना – युवा उद्यमिता को रोजगार सृजन का प्रमुख साधन बनाना – स्टार्टअप की सफलता दर को बढ़ाना – कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाएं सुरक्षा और ई-गवर्नेंस सहित कई क्षेत्रों में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का निर्माण करना – इनक्यूबेशन सेंटरों की संख्या 100 करने का लक्ष्य