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मध्य प्रदेश की 22.77 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनीं, देश के टॉप-5 राज्यों में चौथे स्थान पर

भोपाल  मध्य प्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार के 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत 22,77,814 महिलाएं सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय अर्जित कर रही हैं। इसी के साथ मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा ‘लखपति दीदी’ वाली सूची में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि एक वर्ष पहले राज्य इस सूची में आठवें स्थान पर था। यह जानकारी संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में सामने आई है। क्या है ‘लखपति दीदी’ योजना यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, बाजार से जोड़ने की सुविधा और बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे सालाना न्यूनतम ₹1 लाख की आय हासिल कर सकें। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 15 अगस्त 2023 को इस योजना की घोषणा की थी। शुरुआत में इसका लक्ष्य 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया। ड्रोन तकनीक से बढ़ी कमाई मध्य प्रदेश ने आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने में भी बढ़त दिखाई है। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत राज्य को 34 ड्रोन मिले हैं, जिससे यह देश में तीसरे स्थान पर है। राज्य के 89 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। ये महिलाएं अब खेतों में ड्रोन के जरिए तरल उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हैं, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी हो रही है। ड्रोन वितरण के मामले में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य आगे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वहीं, ड्रोन ट्रेनिंग के मामले में भी राज्य शीर्ष पांच में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक और वित्तीय सहायता का यह संयोजन ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में अहम भूमिका निभा रहा है। मध्य प्रदेश की यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत भी देती है। बड़ी संख्या में महिलाएं अब स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। नमो ड्रोन दीदी को सरकार ने दिए 34 ड्रोन आधुनिक खेती और तकनीक के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश की महिलाएं पीछे नहीं हैं। 'नमो ड्रोन दीदी' योजना के तहत मध्य प्रदेश को 34 ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, जो इसे देश में तीसरे स्थान (आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बाद) पर खड़ा करता है। एमपी के 89 स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं ने ड्रोन से संबंधित प्रमाणित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब खेतों में लिक्विड फर्टिलाइजर (तरल उर्वरकों) और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए कर रहीं हैं। क्या है 'लखपति दीदी' योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत हरेक महिला सदस्य को कम से कम चार कृषि ऋतुओं या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर सालाना 1 लाख रुपये की न्यूनतम आय सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 2023 में पीएम ने किया था योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023 को लाल किले की प्राचीर से 'लखपति दीदी' योजना की घोषणा की थी, जिसका लक्ष्य शुरुआती चरण में 2 करोड़ महिलाओं को लखपति बनाना था (बाद में इसे बढ़ाकर 3 करोड़ कर दिया गया)। कैसे काम करती है योजना इस पहल के तहत महिलाओं को वित्तीय सहायता, बाजार लिंकेज, कौशल विकास प्रशिक्षण और बैंक ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है । इसमें 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी सहायक योजनाएं भी शामिल हैं, जो महिलाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से आय बढ़ाने में मदद करती हैं। नमो ड्रोन दीदी: राज्यों में ड्रोन वितरण (Top 5) (योजना के तहत दिए गए 500 ड्रोनों के आधार पर) टॉप – 5 राज्य (जहां सबसे ज्यादा ड्रोन दिए गए)     आंध्र प्रदेश: 96     कर्नाटक: 82     तेलंगाना: 72     मध्य प्रदेश: 34     उत्तर प्रदेश: 32 नमो ड्रोन दीदी को ड्रोन ट्रेनिंग देने वाले टॉप – 5 राज्य     कर्नाटक: 145     उत्तर प्रदेश: 128     आंध्र प्रदेश: 108     हरियाणा: 102     मध्य प्रदेश: 89 (इन राज्यों में महिला लाभार्थियों/ SHG को ड्रोन चलाने का सर्टिफिकेट मिला)

विधानसभा से पास हुआ संशोधन, गुजरात में बढ़े काम के घंटे, महिलाओं को रात की ड्यूटी की इजाजत

अहमदाबाद  गुजरात विधानसभा (Gujarat Budget Session) में बजट सेशन जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश पटेल की मौजूदगी में बजट 2026- 27 पेश किया जाएगा। इससे पहले मंगलवार को विधानसभा में  गुजरात दुकानें और प्रतिष्ठान रोजगार विनियमन और सेवा की शर्तें (संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया है। इस बिल को श्रम एवं रोजगार मंत्री कुनवरजी भाई बावलिया ने सदन में पेश किया था। कानून लागू होने पर व्यापार और रोजगार सेवा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह कानून 10 या इससे अधिक वर्कर वाली दुकानों और स्थान पर लागू होगा। जबकि पहले यह कानून 20 या उससे ज्यादा स्टाफ वाले दुकानों या स्थान पर लागू होता था। रोजाना काम करने के रोजाना काम करने के घंटे के लिए में 9 से बढ़कर 10 कर दिया गया है। इन नए नियमों को भी जान लें महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी। हालांकि दुकानदारों और कंपनियों को महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।  इसके अलावा 3 महीने के कम समय में ओवर टाइम काम की ज्यादा से ज्यादा लिमिट 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दी गई है। इस संशोधन बिल को आज के दौर के डिमांड और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत पेश किया गया है। श्रम और रोजगार मंत्री का कहना है कि यह वर्कर, ट्रेडर्स मालिकों और नागरिकों सभी के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। कृषि भूमि ट्रांसफर के नियम भी बदले  विधानसभा में सौराष्ट्र घरखेड़ एडमिनिस्ट्रेशन सेटलमेंट एंड एग्रीकल्चरल लैंड ऑर्डिनेशन 1949 अमेंडमेंट बिल भी पास हो चुका है। इसे रिवेन्यू स्टेट मिनिस्टर संजय सिंह माहिडा ने पेश किया था। गैर कानूनी ट्रांसफर के मामलों में एक साफ और सिस्टमैटिक प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी। जिसके अनुसार कलेक्टर या तो अपनी पहल पर या जमीन में दिलचस्पी रखने वाले किसी व्यक्ति के एप्लीकेशन के आधार पर कार्रवाई शुरू कर सकेंगे। अगर ट्रांसफर गैर कानूनी पाया जाता है, तो कलेक्टर जमीन बेचने वाले से 3 महीने के अंदर जमीन वापस करने को कहेंगे। जिसके बाद खरीदने वाले को जमीन वापस करनी होगी। ऐसा न होंने पर कलेक्टर ट्रांसफर को गैर कानूनी घोषित कर देंगे और ऐसी जमीन सभी तरह के बोझ से मुक्त होकर सरकार के पास चली जाएगी। फिर इसे सरकार बंजर  जमीन के तौर पर बेच देगी। ओइस बदलाव से पेनल्टी लगने पर जो व्यक्ति या संस्थान किसान नहीं है, उसे एक महीने के अंदर जमीन की मौजूद मार्केट वैल्यू का 3 गुना अमाउंट देना होगा। नई परियोजना को मंजूरी मिली  बनासकांठा जिले में पालनपुर और लक्ष्मीपुरा रोड पर मॉडर्न रेलवे ओवर ब्रिज के लिए 46 करोड़ रुपये मंसूर किए गए हैं। 1212.19 मीटर लंबे रेलवे ओवरब्रिज से शहर के लगभग 1.81 लाख लोगों को लाभ होगा। रेलवे ब्रिज के बन जाने से ड्राइवर का समय और ईंधन बचेगा। यह प्रस्ताव मंत्री ऋषिकेश भाई पटेल द्वारा विधानसभा में पेश किया गया था।

दस हजार की मदद से मिली सिलाई मशीन और गाय ने बदली महिलाओं की किस्मत

छपरा. सारण में इन दिनों गांव-गांव एक नई तस्वीर उभर रही है। जिस घर में कल तक मजदूरी की अनिश्चित कमाई थी, आज वहां छोटा कारोबार चल रहा है। जिन महिलाओं को लंबे समय तक घर तक सीमित माना गया, वही महिलाएं अब कमाई की कमान संभाल रही हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत खाते में आए 10 हजार रुपये सारण की हजारों महिलाओं के लिए केवल रकम नहीं बने यह उनके लिए आत्मनिर्भरता का पहला कदम बन गया। दिघवारा प्रखंड की नीतू देवी,जानकी देवी और लालती देवी जैसी महिलाएं अब पूरे जिले में चर्चा का विषय हैं। इनकी कहानी बताती है कि अगर अवसर मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी परिवार की आर्थिक रीढ़ बन सकती हैं। आंकड़ों ने भी कहा- बदल रहा है समय सारण में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का असर अब कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव की गलियों और बाजारों तक पहुंच चुका है। नवंबर 2025 तक 4,93,621 महिलाएं योजना से जुड़ीं थी, जिनमें से 17,608 महिलाओं के खाते में राशि भेजी गई।अब तक कुल 5,11,229 महिलाएं योजना के दायरे में आ चुकी हैं। यानी सारण अब इस योजना में अग्रणी जिलों में गिना जाने लगा है। रामपुर आमी की नीतू देवी टोटो बना परिवार की कमाई का सहारा दिघवारा प्रखंड के रामपुर आमी पंचायत में रहने वाली नीतू देवी कौसर जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं।नीतू देवी के घर की हालत पहले वैसी थी, जैसी गांव के कई मजदूर परिवारों की होती है कमाई का कोई भरोसा नहीं। उनके पति मजदूरी करते थे, लेकिन काम मिला तो ठीक, नहीं मिला तो घर में चिंता। इसी बीच मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से नीतू देवी को 10 हजार रुपये की सहायता मिली। नीतू देवी ने इसे खर्च नहीं किया, बल्कि इसे पूंजी बनाया। उन्होंने कुछ अतिरिक्त राशि जोड़कर किस्त पर बैटरी चालित टोटो खरीद ली। टोटो चलाने की जिम्मेदारी उनके पति ने संभाली और कुछ ही समय में उनकी रोज की कमाई 700 से 1000 रुपये तक पहुंच गई। घर बैठे काम जानकी देवी ने सिलाई से बना ली पहचान दिघवारा की जानकी देवी जय गणेश स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। उनके पास छह महीने का छोटा बच्चा था। ऐसे में घर से बाहर जाकर काम करना संभव नहीं था। पति दिल्ली में मजदूरी करते थे, लेकिन पिछले छह महीनों से पत्नी-बच्चे की देखभाल के लिए गांव में ही रुक गए थे। इससे कमाई घट गई और घर पर आर्थिक दबाव बढ़ गया। इसी कठिन समय में योजना से मिले 10 हजार रुपये उनके लिए उम्मीद की तरह आए। जानकी देवी ने पहले से सिलाई का प्रशिक्षण ले रखा था। उन्होंने दिघवारा प्रखंड स्थित संस्कार जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ के सिलाई प्रशिक्षण केंद्र से यह हुनर सीखा था। अब जानकी देवी घर में रहकर बच्चे की देखभाल भी कर रही हैं और साथ ही अपनी आमदनी भी बना रही हैं। गांव की महिलाओं के कपड़े सिलने से उन्हें धीरे-धीरे पहचान और काम दोनों मिल रहे हैं। मजदूरी से दूध का कारोबार, लालती देवी की मेहनत रंग लाई दिघवारा प्रखंड की लालती देवी जय गणेश जीविका महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं। पहले वे खेती से जुड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं।गांव में काम मिला तो दिन चलता, नहीं मिला तो घर में तंगी।मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मिले 10 हजार रुपये से लालती देवी ने एक गाय खरीदी। यह गाय प्रतिदिन करीब 10 लीटर दूध देती है। लालती देवी अब चाहती हैं कि अगर आगे और मदद मिले, तो वे 10–12 गायें खरीदकर अपना पशुपालन बढ़ाएं। सारण में इस योजना का सबसे बड़ा असर यह दिख रहा है कि महिलाएं अब केवल सहयोगी नहीं, बल्कि कमाने वाली मुख्य ताकत बन रही हैं। कहीं टोटो की चाबी महिलाओं के हाथ में है, कहीं सिलाई मशीन की रफ्तार से घर चल रहा है, तो कहीं दूध के डिब्बे के साथ आर्थिक आजादी की नई सुबह आ रही है।

खाना बनाते समय महिलाओं की ये 5 आदतें बन सकती हैं घर की बरकत की दुश्मन

आज से कई सौ सालों पहले आचार्य चाणक्य ने जो बातें कहीं थी, वो आज के जीवन में भी काफी व्यवहारिक हैं। आज भी कई लोग जीवन में सही रास्ते की तलाश में आचार्य चाणक्य की नीतियों का सहारा लेते हैं। इनमें केवल राजनीति, अर्थशास्त्र जैसे विषयों का ही ज्ञान नहीं मिलता बल्कि गृहस्थ जीवन से जुड़ी कई बातें भी सीखने को मिलती हैं। उदाहरण के लिए आचार्य चाणक्य का मानना था कि महिलाओं को खाना बनाते समय कुछ बातें विशेष रूप से ध्यान रखनी चाहिए। ये गलतियां यदि वो दोहराती हैं, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है और घर में एक नकारात्मकता सी बनी रहती है। उन्होंने इन 5 गलतियों को किसी भी हाल में ना करने की सलाह दी है, आइए जानते हैं। बिना नहाए कभी नहीं बनाना चाहिए खाना आचार्य चाणक्य सलाह देते हैं कि कभी भी महिलाओं को बिना नहाए खाना नहीं बनाना चाहिए। बिना नहाए, गंदे कपड़ों में खाना बनाना अशुद्ध माना जाता है। ऐसा खाना ना सिर्फ सेहत पर बुरा असर डाल सकता है, बल्कि घर में मासिक अशांति का कारण भी बन सकता है। इससे घर में एक नकारात्मक ऊर्जा फैलने लगती है, जिससे घर की बरकत कम हो जाती है। नेगेटिव इमोशन के साथ ना पकाएं भोजन आचार्य चाणक्य कहते हैं कि खाने को आप किस सोच के साथ पका रहे हैं, ये काफी मायने रखता है। यही आप दुखी मन से, उदास हो कर या गुस्से में खाना पकाती हैं, तो ये नकारात्मक सोच भोजन भी ग्रहण कर लेता है। ऐसे में परिवार के अन्य सदस्य जो इसे ग्रहण करते हैं, उनके मन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आचार्य सलाह देते हैं कि खाना हमेशा शांत मन से और खुशी के साथ पकाना चाहिए। बासी और खराब सामग्री का इस्तेमाल करना आचार्य के मुताबिक खाना बनाते हुए हमेशा ताजी और शुद्ध सामग्री को ही इस्तेमाल में लाना चाहिए। अगर आप बासी सामग्री या खराब तेल-मसाले इस्तेमाल में लाती हैं, तो ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आचार्य कहते हैं कि भोजन जितना ताजा और शुद्ध होता है, उतना ही मन और शरीर को शक्ति देता है। खाना बनाते हुए इधर-उधर की बातों में उलझे रहना कई महिलाएं खाना तो बनाती हैं, लेकिन उनका ध्यान बातों या फिर दूसरे कामों में लगा रहता है। आचार्य कहते हैं कि इस तरह कभी भी खाना नहीं बनाना चाहिए। जब भी खाना बनाएं, सिर्फ उसपर ही ध्यान रखें। ऐसा करने से भोजन सिर्फ स्वदिष्ट ही नहीं बनता, बल्कि आपके मन का प्रभाव भी उसपर पड़ता है। भगवान को याद ना करना अपनी नीति में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि खाना बनाते हुए आपके मन में हमेशा भगवान का स्मरण या आभार की भावना होनी चाहिए। ऐसा करने से खाने में एक सकारात्मक ऊर्जा आती है, जिससे घर में खुशहाली और बरकत बनी रहती है।

नए श्रमिक कानून से उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का कवच, महिलाओं को भी नाइट शिफ्ट का अधिकार

डबल इंजन सरकार में प्रत्येक श्रमिक को न्यूनतम वेतन की गारंटी, जोखिमयुक्त काम करने वालों को 100% स्वास्थ्य सुरक्षा बीमा चार नई श्रम संहिताओं के लागू होने से “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’’ को गति, 2047 तक उत्तर प्रदेश  बनेगा विकसित और आत्मनिर्भर  लखनऊ नए श्रमिक कानून से उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा गारंटी और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित होगा। देश के 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर दिया गया है। इसकी जगह अब चार नए श्रमिक कानून लागू किए हैं। नई संहिता आधुनिक कार्यशैली, वेतन, स्वास्थ्य जांच और गिग वर्कर्स के लिए नए प्रगतिशील प्रावधान लेकर आई है। अब श्रमिकों को न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र, समान वेतन, सोशल सिक्योरिटी, ओवरटाइम पर डबल वेतन, फिक्स टर्म ग्रेच्युटी और जोखिम वाले क्षेत्रों में 100% हेल्थ सिक्योरिटी की गांरटी मिलेगी। इसके साथ ही महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने का भी अधिकार मिलेगा। वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार नए कानून देश में लागू कई श्रम कानून 1930–1950 के बीच बनाए गए थे। इसमें गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और प्रवासी श्रमिक जैसी आधुनिक कार्यशैली का उल्लेख तक नहीं था। नए लेबर कोड इन सभी को कानूनी सुरक्षा देते हैं। नए श्रम कानून उत्तर प्रदेश की रोजगार व्यवस्था और इंडस्ट्रियल सिस्टम को नई परिभाषा देगें। नए नियमों से उत्तर प्रदेश के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिलेगा, जो पहले कभी संभव नहीं हुआ था कामकाजी महिलाओं को नाइट शिफ्ट का अधिकार उत्तर प्रदेश की महिलाएं अब सहमति और सुरक्षा प्रबंधों के साथ नाइट शिफ्ट में काम कर सकती हैं। समान वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की गारंटी भी नए कोड में शामिल है। ट्रांसजेंडर कर्मचारियों को भी समान अधिकार मिले हैं। नियुक्ति पत्र अनिवार्य, समय पर वेतन की गारंटी नियोक्ताओं को अब हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना होगा। न्यूनतम वेतन प्रदेशभर में लागू हो गया है और समय पर वेतन देना कानूनी बाध्यता होगी। इससे रोजगार में पारदर्शिता और कर्मचारी सुरक्षा बढ़ेगी। 40 वर्ष से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों की साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाएगी। खनन, केमिकल और कंस्ट्रक्शन जैसे खतरनाक कार्य क्षेत्रों में काम करने वालों को पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। केवल एक साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी पहले 5 साल नौकरी के बाद मिलने वाली ग्रेच्युटी अब सिर्फ एक साल की स्थाई नौकरी के बाद मिलेगी। यह प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए बड़ा फायदा है। गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पहली बार कानूनी मान्यता मिली है। ओला–उबर ड्राइवर, जोमैटो–स्विगी डिलीवरी पार्टनर, ऐप-बेस्ड वर्कर्स अब सामाजिक सुरक्षा लाभ पाएंगे। एग्रीगेटर्स को अपने टर्नओवर का 1–2% योगदान देना होगा। UAN लिंक होने से राज्य बदलने पर भी लाभ जारी रहेगा।   ओवरटाइम का डबल वेतन मिलेगा नए श्रमिक कानून से कर्मचारियों को अब ओवरटाइम का भुगतान डबल रेट पर मिलेगा। इससे ओवरटाइम भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और काम की गारंटी मिलेगी। प्रवासी और असंगठित क्षेत्र के कामगार भी सुरक्षा ढांचे में शामिल होंगे। सिंगल लाइसेंस और सिंगल रिटर्न सिस्टम लागू होगा। इससे कंपनियों का अनुपालन बोझ कम होगा और उद्योगों को लालफीताशाही से राहत मिलेगी। नए लेबर कोड विकसित उत्तर प्रदेश @2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेंगे। इससे “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को भी रफ्तार मिलेगी।

महिलाओं के लिए हैं ये योगासन, पीसीओडी से मिलेगा छुटकारा

पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम या पीसीओडी एक ऐसी बीमारी है जिसके तहत ओवरी में मल्टीपल सिस्ट हो जाते हैं। ये सीस्ट खास किस्म के तरल पदार्थ की थैलियां होती हैं। सिस्ट होने की असली वजह मासिक धर्म में अनियमतता को बताया जाता है। मासिक धर्म में अनियमतता के कारण ओवरी का साइज बढ़ जाता है नतीजतन एंड्रोजेन और एस्ट्रोजेनिक नामक हारमोन भारी मात्रा में प्रोड्यूस होते हैं। पॉलिसिस्टिक ओवरी नार्मल ओवरी की तुलना में आकार में काफी बड़े होते हैं। इसे स्टीन लिवंथन सिंड्रोम भी कहा जाता है। पीसीओडी के कारण गर्भास्था, मासिक धर्म, डायबिटीज जैसी बीमारी में परेशानियों का इजाफा करता है। पीसीओडी के लक्षण : पीसीओडी के लक्षण बेहद खतरनाक ढंग से देखे जा सकते हैं। दरअसल इससे महिलाओं के शरीर में बाल बढ़ जाते हैं, स्तन का साइज छोटा हो जाता है, आवाज में फर्क महसूस होने लगता है, वजन बढ़ जाता है, सिर के बाल पतले होने लगते हैं। इतना ही नहीं जो महिलाएं पीसीओडी से पीड़ित होती हैं, उनमें एंग्जाइटी, डिप्रेशन, वजन बढ़ना जैसी समस्या भी देखने को मिलती है। इन दिनों पीसीओडी वयस्क महिलाओं की कम उम्र की युवतियों में देखने को मिल रही है। इसकी असली वजह काम का तनाव, अस्वस्थ खानपान, एंग्जाइटी, डिप्रेशन, व्यायाम न करना है। साथ ही जो युवतियां कम सोती हैं, उन्हें भी पीसीओडी होने का खतरा रहता है। जो महिलाएं अपनी जीवनशैली के कारण पीसीओडी का शिकार हो रही हैं, वे चाहें तो कुछ आसनों की मदद से स्वस्थ जीवन जी सकती हैं। उनमें पीसीओडी का खतरा भी कम हो जाता है। कपालभाती : कपालभाती शब्द दो शब्दों को जोड़कर बनाया गया है। एक कपाल यानी माथा और भाती यानी चमकना। माना जाता है कि नियमित व्यायाम करने से चेहरे पर ग्लो आता है और शरीर स्वस्थ रहता है। कपालभाती वास्तव में एक शत क्रिया है। यह एक तरह शरीर की क्लीनिंग प्रक्रिया है जिसकी मदद से शरीर से जहरीले पदार्थों को निकाला जाता है। इसके तहत आपको योगिक आसन में बैठना होता है और फिर पूरी प्रक्रिया सांसों के लेने और छोड़ने पर निर्भर करती है। योनि मुद्रा : यह एक ऐसा योगासन है जिसे करते हुए महिला किसी भी रूप में बाहरी दुनिया से जुड़ाव महसूस नहीं करती। इसलिए इसे योनि मुद्रा कहा जाता है। यह हमें अपनी अंदरूनी दुनिया से जोड़ता है इसलिए इसे योनि मुद्रा कहा जाता है। यह गर्भाशय में शिशु के होने का आभास कराता है। पवनमुक्त आसन : पवनमुक्त आसन हमारे पेट के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी आसन है। साथ ही यह हमारी पाचन क्रिया को भी बेहतर करता है। पवनमुक्त आसन से एब्डोमिनल और पीठ की मसल्स को मजबूती मिलता है साथ ही रक्त संचार का प्रवाह भी बेहतर होता है। हलासन : हल एक तरह का जमीन जोतने के लिए इस्तेमाल होने वाला उपकरण है जिसे किसान द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। हलासन को सर्वांगासन के बाद ही किया जाता है जो वास्तव में कंधों से जुड़ा हुआ आसन है। यह आसन भी पीसीओडी में राहत देने में मदद करता है। धनुर्सान : यह आसन टेंशन और डिप्रेशन को दूर भगान के लिए किया जाता है। अतः यदि किसी महिला में पीसीओडी के जरा भी लक्ष्ण दिखें या उन्हें जबरदस्त तनाव होता है तो उन्हें यह आसन अवश्य करना चाहिए। इससे पीसीओडी के आशंका में काफी कमी आती है।  

महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वास्थ्य संरक्षण को बढ़ावा देने रायपुर में उठाया गया अहम कदम

रायपुर : महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल नियद नेल्लानार ग्रामों में बीपीएल परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन में प्राथमिकता रायपुर महिला सशक्तिकरण, स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य संरक्षण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा योजना के अंतर्गत 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी गैस कनेक्शन जारी करने की मंजूरी दी गई है। इसके तहत छत्तीसगढ़ के “नियद नेल्लानार योजना” में शामिल ग्रामों के बीपीएल परिवारों को प्राथमिकता से लाभ प्रदान किया जाएगा। खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों की बैठक लेकर योजना के पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्लानार योजना” के तहत पात्र 1.59 लाख माताओं-बहनों को उज्ज्वला कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। सुकमा कलेक्टर श्री देवेश कुमार धु्रव ने संबंधित अधिकारियों को चिन्हांकित ग्रामों में विशेष शिविर आयोजित कर आवेदन प्राप्त करने, लाभार्थियों का सत्यापन करने तथा गैस सुरक्षा संबंधी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। स्वच्छ रसोई ईंधन की उपलब्धता से महिलाओं को धूम्ररहित रसोई, समय की बचत, स्वास्थ्य सुरक्षा, सुविधा और सम्मानपूर्ण जीवन की दिशा में नई मजबूती प्राप्त होगी।

महिलाएं जानें ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़े खतरे

ऑस्टियोपोरोसिस एक क्रॉनिक बोन डिसीज है, जिसे हड्डियों का घटता घनत्व और उनके ऊतकों के कम होने के रूप में समझा जा सकता है। पूरी दुनिया में इससे लाखों की संख्या में लोग पीड़ित हैं। इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है और जीवन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इसके प्रति जागरूक रहकर महिलाएं इसके खतरों से बची रह सकती हैं और अपनी हड्डियों को सुरक्षित रख सकती हैं। हींग:-भोजन में इसे डालने का उद्देश्य ही यही होता है क्योंकि इसमें पाचन का गुण मौजूद है। इसकी खुशबू काफी तेज होती है। गैस की स्थिति में हींग काफी फायदेमंद होती है। एक चुटकी हींग को छाछ में नमक के साथ मिलाकर खाने के बाद लेने से पेट दर्द की स्थिति में राहत मिलती है। हींग की हल्की मात्रा पानी में घुल जाती है, इसका पेस्ट बनाकर नाभि के ऊपर लगाएं। इसके टुकड़े का दर्द देते दांत पर रखने से दर्द में राहत मिलती है। ब्रोनकाइटिस की स्थिति में भी हर दिन हींग लेने की सलाह दी जाती है। साइटिका, फेशियल पाल्सी, पैरालिसिस आदि की स्थिति में हींग को घी में भूनकर लेने से काफी लाभ मिलता है। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या क्या होती है… -ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या तब होती है जब उनकी हड्डियों का बहुत अधिक नुकसान हो जाता है। लेकिन हड्डियों का निर्माण बहुत कम मात्रा में होता है। या फिर दोनों ही स्थितियां हो सकती हैं। -इसकी वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आसानी से टूट जाती हैं। -ऑस्टियोपोरोसिस के कारण बोन फ्रैक्चर की समस्या आमतौर पर स्पाइन, हिप और कलाइयों में होती है। किन्हें हैं ऑस्टियोपोरोसिस… -विश्व में लगभग 200 मिलियन महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रसित हैं। -पचास साल से अधिक उम्र की तीन में एक महिला को ऑस्टियोपोरोसिस संबंधित फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है वहीं पुरुषों में यह अनुपात पांच में से एक है। -ऐसा माना जा रहा है कि 2050 तक एशिया में पूरे विश्व के फ्रैक्चर के पचास प्रतिशत मामले पाए जाएंगे। 45 व उससे अधिक उम्र के लोगों में… ऑस्टियोपोरोसिस के कारण 45 से अधिक उम्र की महिलाएं डायबिटीज, हार्ट अटैक और ब्रेस्ट कैंसर की तुलना में अस्पताल में अधिक भर्ती होती हैं। ये होती है खतरे की बात… -कैल्शियम का कम स्तर और विटामिन डी कम मात्रा में ग्रहण करना -जेंडर -एनॉरेक्जिया -फैमिली हिस्ट्री किसी प्रकार का वजन नहीं उठाने की आदत…. -उम्र -सेक्स हॉर्मोन का निम्न स्तर -धूम्रपान, शराब और कुछ खास प्रकार की दवाएं  

महिलाओं को पुरुषों से ज़्यादा ठंड क्यों लगती है? साइंस ने बताया चौंकाने वाला सच!

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब कमरे का तापमान एक जैसा होता है तब भी महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में ज्यादा ठंड महसूस होती है? यह सिर्फ महसूस करने का अंतर नहीं है बल्कि इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक और शारीरिक कारण हैं। शरीर विज्ञान और हार्मोनल अंतर इस लैंगिक असमानता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। आइए जानते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज्यादा ठंड लगने के पीछे क्या वजहें हैं: कम मांसपेशियों का भार शरीर की मांसपेशियां आराम की अवस्था या गति में होने पर गर्मी पैदा करती हैं। महिलाओं में आमतौर पर पुरुषों की तुलना में मांसपेशियों का भार कम होता है। इस वजह से उनका शरीर कुल मिलाकर कम गर्मी उत्पन्न करता है। हार्मोन का प्रभाव प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन रक्त परिसंचरण और तापमान को नियंत्रित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर सकता है जिससे हाथ और पैरों में खून का बहाव कम हो जाता है। इस कारण शरीर के इन हिस्सों में जल्दी ठंड महसूस होती है। धीमा मेटाबॉलिज्म मेटाबॉलिज्म भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया है, जिसमें गर्मी भी पैदा होती है। महिलाओं का मेटाबॉलिक रेट पुरुषों की तुलना में धीमा होता है। इसका मतलब है कि उनके शरीर आराम की अवस्था में कम कैलोरी जलाते हैं और परिणामस्वरूप कम गर्मी पैदा करते हैं। फैट इंसुलेशन बनाम हीट प्रोडक्शन महिलाओं में पुरुषों की तुलना में वसा (Fat) का प्रतिशत ज्यादा होता है। यह वसा हीट लॉस के खिलाफ एक इंसुलेटर के रूप में काम करती है (यानी शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोकती है)। हालांकि यह वसा मांसपेशियों की तरह गर्मी उत्पन्न नहीं करती इसलिए शरीर के अंदरुनी तापमान को बनाए रखने के लिए पुरुषों की तुलना में कम आंतरिक गर्मी उपलब्ध होती है। सतह क्षेत्र और आयतन का अनुपात महिलाओं का सरफेस एरिया (सतह क्षेत्र) उनके शरीर के आयतन की तुलना में ज्यादा होता है। इसका मतलब है कि उनके शरीर अपने आसपास के वातावरण में तेजी से गर्मी छोड़ते हैं (हीट लॉस), जिससे उनके लिए शरीर के आंतरिक तापमान को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। थायरॉइड और केमिकल संवेदनशीलता थायरॉइड हार्मोन जैसे कुछ रसायन मेटाबॉलिज्म और गर्मी के उत्पादन  को नियंत्रित करते हैं। महिलाओं में इन केमिकल्स के प्रति संवेदनशीलता का स्तर थोड़ा अलग हो सकता है। थायरॉइड की कम गतिविधि या धीमा मेटाबॉलिज्म होना महिलाओं में आसानी से ठंड लगने की एक वजह बन सकता है।  

आत्मनिर्भरता की ज्योति: बिहान समूह की महिलाओं ने दीपावली को बनाया खास

बिहान समूह की महिलाओं की प्रेरणादायक पहल रायपुर, छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती महोत्सव के अवसर पर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि ग्रामीण प्रतिभा को सही दिशा, मार्गदर्शन और मंच प्राप्त हो, तो वे अवसर को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम बढ़ा सकती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत संचालित बिहान योजना से जुड़ी ग्राम केवटटोला, मोहला और भोजटोला की महिलाओं ने सामूहिक प्रयासों से अपने पारंपरिक ज्ञान और रचनात्मकता का उपयोग करते हुए दीपावली के उपयोगी उत्पाद जैसे रंगोली पाउडर, रुई की बाती, माता लक्ष्मी की मिट्टी से निर्मित मूर्तियाँ, अगरबत्ती, मिट्टी के दीये, मटके, पारंपरिक साड़ियाँ एवं मनिहारी सामग्री स्वयं तैयार कीं। समूह की महिलाओं ने उत्पादों की गुणवत्ता और पारंपरिक स्वरूप बनाए रखा, जिससे बाजार में अच्छी डिमांड रही। त्योहार के आरंभ से पूर्व ही महिलाओं ने मोहला के साप्ताहिक बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री प्रारंभ की। हस्तनिर्मित वस्तुओं को ग्राहकों द्वारा मिली सराहना ने महिलाओं का उत्साह और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाया। बिक्री से प्राप्त आय ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप  से आत्मनिर्भरता बनाया है। इस पहल में शामिल कई महिलाओं ने पहली बार घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर व्यवसायिक गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप उनमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। यह पहल केवल आय का स्रोत नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और सशक्तिकरण का माध्यम भी सिद्ध हुई। बिहान योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना एवं उन्हें आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना है। मोहला की महिलाओं की दीपावली के अवसर पर आरंभ हुई यह आर्थिक यात्रा केवल एक पर्व तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता, स्वावलंबन और सामुदायिक विकास की दिशा में एक नई शुरुआत है।