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ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी, तीनों सेना प्रमुख ने बताई भविष्य की तैयारियां और शांति का संदेश

महू  ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार सेना का रण संवाद-2025 कार्यक्रम मंगलवार से महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में शुरू हुआ। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर एक आधुनिक संघर्ष था, जिससे हमने कई महत्वपूर्ण सबक सीखे। इनमें से अधिकांश पर अमल चल रहा है और कुछ को लागू भी कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अब भी जारी है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मंगलवार शाम को महू पहुंचेंगे। जनरल अनिल चौहान ने भारत की रक्षा क्षमताओं के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बात। उन्होंने कहा, 'दो-तीन दिन पहले, आपने सुना होगा कि DRDO ने एक विशेष एकीकृत प्रणाली का परीक्षण किया, जिसमें QRSAM, VSHORADS और 5-किलोवाट लेजर को इंटीग्रेट किया गया।' जनरल चौहान ने आगे कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मल्टी-डोमेन लेवल पर तैयार रहना होगा। जैसे- इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस के स्तर पर समन्वय की जरूरत है। इसके अलावा संघर्ष की स्थिति में जल, थल, नभ के अलावा समुद्र के भीतर और स्पेस में भी तैयारी की जरूरत है। इसके अलावा इन सभी क्षेत्रों में समन्वय भी जरूरी है। गीता और महाभारत से युद्ध नीति की सीख सीडीएस ने कहा कि गीता और महाभारत युद्ध नीति के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। चाणक्य की नीति ने चंद्रगुप्त मौर्य को विजय दिलाई। कौटिल्य और चाणक्य ने शक्ति, उत्साह और युक्ति को युद्ध नीति का मूल तत्व बताया है। उन्होंने जोर दिया कि शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन आवश्यक है। “हम शांति चाहते हैं, पर शांतिवादी नहीं हो सकते” सीडीएस चौहान ने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और यह एक शांतिप्रिय राष्ट्र है। लेकिन किसी भ्रम में न रहें, हम शांतिवादी नहीं हो सकते। उन्होंने उद्धरण देते हुए कहा – “यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध के लिए तैयार रहें।” उन्होंने ‘युद्ध पर प्रौद्योगिकी का प्रभाव’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र किसी सीमा को नहीं पहचानेंगे। इसलिए सभी सेनाओं को मिलकर त्वरित और निर्णायक प्रतिक्रिया देने की जरूरत है। उन्होंने एआई, साइबर और क्वांटम तकनीक को संयुक्त प्रशिक्षण के साथ जोड़ने पर बल दिया और कहा कि संयुक्त कौशल ही भारत के सैन्य परिवर्तन की नींव है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड कंप्यूटेशन, डेटा एनालिटिक्स, बिग डेटा, LLM (लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स) और क्वांटम टेक्नोलॉजीज के उपयोग को अनिवार्य बताया। जनरल चौहान ने कहा, 'भारत जैसे विशाल देश के लिए इस स्तर की परियोजना में पूरे राष्ट्र की भागीदारी जरूरी होगी। लेकिन हमेशा की तरह, मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय इसे न्यूनतम और बहुत किफायती लागत पर कर लेंगे।' रण संवाद 2025 में तीन संयुक्त सैन्य सिद्धांत—मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, स्पेशल फोर्सेस ऑपरेशंस और एयरबोर्न व हेलिबोर्न ऑपरेशंस जारी किए गए। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन 26 और 27 अगस्त को होना है। वाइस एडमिरल बोले – तकनीक बनी निर्णायक कारक नौसेना के वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने कहा कि ड्रोन, आईएसआर, साइबर ऑपरेशन और सूचना युद्ध जैसे साधन यूक्रेन और गाजा संघर्ष में निर्णायक कारक रहे हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल तकनीक को और अधिक एडवांस बनाने की जरूरत बताई। वायुसेना अधिकारी ने बताई उभरती तकनीकों की अहमियत भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण कमान के एओसी-इन-सी एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने ‘युद्ध को प्रभावित करने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने खासतौर से एआई और मशीन लर्निंग, साइबर, क्वांटम, अंतरिक्ष एवं प्रति-अंतरिक्ष तकनीक, निर्देशित ऊर्जा हथियार (DEW) और हाइपरसोनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। 

सरकारी व्यवस्था मजबूत करे और सभी के लिए उपलब्ध हो

चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा देना सरकार की जिम्मेदारी सरकारी व्यवस्था मजबूत करे और सभी के लिए उपलब्ध हो  मध्य प्रदेश में पीपीपी मोड मेडिकल कॉलेजों का विरोध भोपाल/ इंदौर मध्य प्रदेश सरकार का 25 एकड़ भूमि 1 रुपये के नाममात्र मूल्य पर निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए उपलब्ध कराने का निर्णय, स्वास्थ्य सेवाएँ और चिकित्सा शिक्षा, मजबूत सार्वजनिक व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराने की राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी के विपरीत है। इससे पहले, मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ  विभिन्न संगठनों ने  विरोध किया —जिनमें      एमपीएमटीए-एमपी मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन, शासकीय स्वायत्तशासी चिकित्सा अधिकारी संघ, एमपीएमओए-एमपी मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, ईएसआई चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी चिकित्सा शिक्षा, मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन, मध्य प्रदेश नर्सिंग ऑफिसर एसोसिएशन,  कॉन्ट्रैक्चुअल डॉक्टर्स एसोसिएशन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान, संविदा चिकित्सक संघ,  एमपी आशा/उषा सहयोगिनी श्रमिक संघ) जन स्वास्थ्य अभियान मध्य प्रदेश, अस्पताल बचाओं जीव बचाओ संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश, और अन्य संगठनों ने भाग लिया—इनके दबाव में सरकार को 12 जिला अस्पतालों को निजी हाथों में सौंपने का अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। लेकिन अब, जनविरोध के बावजूद, सरकार भूमि और सुविधायें निजी संस्थाओं को देकर पीपीपी के नाम पर निजीकरण को फिर से लागू कर रही है। यह कोई वास्तविक साझेदारी नहीं है, बल्कि राज्य की मदद से निजी चिकित्सा क्षेत्र का विस्तार है, जिससे धार, बेतुल, पन्ना और कटनी में निजी मेडिकल कॉलेजों का रास्ता साफ हो रहा है। निजीकृत चिकित्सा शिक्षा मॉडल विशेष रूप से निम्न सामाजिक-आर्थिक स्तर के छात्रों के लिए समावेशी नहीं होते हैं बल्कि बहिष्कृत करने वाले होते हैं । ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना के तहत भारत सरकार पहले ही राज्य और केंद्र के संयुक्त वित्त से मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा कर चुकी है। इसलिए राज्य सरकार को चाहिए कि — 1.    निजी मेडिकल कॉलेजों को सब्सिडी देने के बजाय सार्वजनिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना जारी रखे। 2.    मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त शिक्षक, बुनियादी ढाँचा और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराकर मजबूत करे। 3.    निजी कॉलेजों के साथ किए गए इन नए पीपीपी मॉडल एमओयू (MoU) की प्रति सार्वजनिक करे और इनको रद्द करें। जिसमें यह स्पष्ट हो:  •    सब्सिडी देने की प्रक्रिया क्या रही। •    क्या छात्रों की फीस पर सीमा (कैप) होगी। •    क्या कम से कम 25% सीटें गरीब छात्रों के लिए निःशुल्क होंगी। •    इस तरह की साझेदारी से लंबे समय में जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। अभी तक का अनुभव बताता है कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में ऐसे पीपीपी मॉडल अक्सर सस्ती, समान और गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने में असफल रहे हैं। इसके बजाय, ये छात्रों और मरीजों के लिए खर्च बढ़ाते हैं, असमानता बढ़ाते हैं और सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं। सरकार को इस त्रुटिपूर्ण पहल को छोड़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक चिकित्सा शिक्षा को मजबूत और विस्तारित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि मध्य प्रदेश के सभी नागरिकों को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें। भवदीय  अमूल्य निधि, एस. आर. आजाद, राजकुमार सिन्हा, राहुल यादव, रामप्रसाद काजले, समीना युसुफ, लक्ष्मी कौरव, उमेश तिवारी, विष्णु बाजपेयी  जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश, बारगी बांध प्रभावित एवं विस्थापित संघ, नर्मदा बचाओ आंदोलन, जिंदगी बचाओ अभियान, पत्थर खदान मजदूर संघ, आशा / उषा सहयोगी श्रमिक संघ , टोंको रोको ठोको क्रांतिकारी मोर्चा, कटनी जिला जन अधिकार मंच 

कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ीं, साथी दलों ने राहुल गांधी को छोड़कर बढ़ाया कदम खींचने का दबाव

नई दिल्ली सबको जोड़कर चलने की कोशिश में जुटी कांग्रेस एक बार फिर अकेली पड़ती जा रही है. पीएम-सीएम वाले बिल पर विपक्षी एकता का गुब्बारा फुटने लगा है. पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर जीपीसी में शामिल होने को लेकर इंडिया ब्लॉक में दो फाड़ नजर आ रहा है. इंडिया गठबंधन के प्रमुख साथियों ने कांग्रेस को फंसा दिया है. जेपीसी मामले पर राहुल गांधी अब बीच मझधार फंस चुके हैं. यहां से वह किस ओर जाएंगे, यह आने वाले वक्त में पता चल जाएगा. दरअसल, भ्रष्टाचार यानी आपराधिक मामलों में कम से कम 30 दिनों तक बिना बेल के जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने वाले बिलों को जेपीसी के लिए भेजा गया है. इस बिल पर विचार करने के लिए बनने वाली जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होने को लेकर ही विपक्षी खेमे यानी इंडिया ब्लॉक मतभेद है. कांग्रेस की क्या प्लानिंग? ET की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि DMK के TKS एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिल के विरोध करने और उसे दर्ज कराने के लिए जेपीसी में शामिल होने का फैसला लिया है। वहीं कांग्रेस के एक सांसद ने कहा, "हमारे पास यह सोचने के उपयुक्त कारण हैं कि जेपीसी में शामिल होना कैसे उपयोगी हो सकता है।" उन्होंने कहा कि हम हर किसी को बीजेपी के खिलाफ एक साथ ले जाना चाहते हैं। विपक्षी दल कह रहे JPC बेमतलब बता दें कि इंडिया गठबंधन में शामिल रही आम आदमी पार्टी ने भी तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ही तरह जेपीसी में अपने सदस्य नामित नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, वामपंथी दलों ने अपनी स्थिति णअभी स्ष्ट नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ है और जेपीसी में अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। कई विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मुद्दे पर जेपीसी बेमतलब है। विपक्षी एकता में दरार? जब संसद में 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश हुआ तब विपक्षी खेमा एकजुट नजर आया था. मगर अब धीरे-धीरे इस एकता की दीवार ढहने लगी है. पीएम-सीएम वाले बिल पर जेपीसी में हिस्सा लेने को लेकर इंडिया ब्लॉक के प्रमुख दलों में गहरी दरार उभर आई है. अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सबने कांग्रेस को फंसा दिया है. सपा, टीएमसी, आप और उद्धव गुट वाली शिवसेना ने जेपीसी से अलग रहने का फैसला किया है. हालांकि, कांग्रेस ने अब तक जेपीसी में शामिल होने के संकेत दिए हैं. इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के इस फैसले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बीच मजधार में अकेला छोड़ दिया है. अब कांग्रेस के सामने यह मुसीबत है कि वह अकेले जेपीसी में जाएगी या फिर अन्य साथियों की तरह अलग रहने का ही फैसला लेगी? क्या है पीएम-सीएम बिल दरअसल, बीते दिनों संविधान (130वां) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश हुआ. यह बिल और इसके साथ जुड़े जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश शासन संशोधन विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री किसी ऐसे अपराध में गिरफ्तार या हिरासत में रहता है, जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक है, और यह हिरासत लगातार 30 दिन तक रहती है, तो वह अपने पद से खुद ब खुद बर्खास्त हो जाएंगे. हालांकि, जेल से आने के बाद वह पद ग्रहण कर सकते हैं. यह विधेयक 20 अगस्त को लोकसभा में पेश हुआ. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया. इसके बाद सरकार ने पीएम-सीएम वाले बिल को 31 सदस्यीय जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया. जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे.अभी तक इसका गठन नहीं हुआ है. जानिए किसका क्या स्टैंड ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी जेपीसी से अलग होने का फैसला किया है. टीएमसी का कहना है कि यह बिल भाजपा की ‘राजनीतिक साजिश’ है, जो विपक्ष को फंसाने और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उलझाने का प्रयास है. जेपीसी में शामिल होकर टीएमसी भाजपा के खेल में नहीं पड़ेगी. अखिलेश की समाजवादी पार्टी का भी यही स्टैंड है. खिलेश यादव ने इसे ‘संघीय ढांचे पर हमला’ करार दिया. अखिलेश ने कहा कि यह बिल राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करेगा. हमारा फैसला स्वतंत्र है, और इस मामले में हम कांग्रेस के साथ नहीं चलेंगे. वहीं, उद्धव गुट वाली शिवसेना ने भी ममता और अखिलेश की राह अपनाई है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि विपक्षी एकता चुनावों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस बिल पर जेपीसी में शामिल होना मतलब भाजपा की रणनीति को वैधता देना है। हम बाहर रहकर जनता के बीच मुद्दा उठाएंगे. शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उद्धव ठाकरे को लगता है कि जेपीसी का कोई मतलब नहीं है. वहीं, अरविंद केजरीवाल की आप के सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी जेपीसी में शामिल नहीं होगी, क्योंकि ये बिल भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया गया है. राजद भी इससे अलग रहने का मन बना रही है. कांग्रेस फंस गई कांग्रेस? इस तरह इन चार दलों के फैसले ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है. हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक फैसला नहीं लिया, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में हैं, ताकि बिल के कमजोर पक्षों को उजागर किया जा सके. हालांकि, अखिलेश, ममता, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे के फैसले के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है. कांग्रेस असमंजस में है. वह क्या करे और क्या नहीं, अभी इस पर मंथन कर रही है. अगर कांग्रेस अकेले जाती है, तो यह इंडिया ब्लॉक की एकता को और कमजोर कर सकता है. साथ ही भाजपा को विपक्ष की कमजोरी का फायदा मिल सकता है. यह स्थिति राहुल गांधी के लिए चुनौतीपूर्ण है और ऐसा लग रहा है कि वह बीच मझधार में हैं. अब देखने वाली बात होगी कि इससे राहुल गांधी कैसे पार पाते हैं.

सरकार का वादा निवेशकों को निवेश करने के लिए भूमि की नहीं होगी कमी

बिहार की औद्योगिक तस्वीर बदलने वाले पैकेज को कैबिनेट की मंजूरी  सरकार का वादा निवेशकों को निवेश करने के लिए भूमि की नहीं होगी कमी  बिहार में औद्योगिक क्रांति की ओर बड़ा कदम: नीतीश सरकार ने लॉन्च किया औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025  पटना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में उद्योगों को नई ऊँचाई देने और युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर सृजित करने के उद्देश्य से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025) की घोषणा की है। जिसे आज कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई है। इस पैकेज को सरकार की महत्वाकांक्षी पहल बताया जा रहा है, जिसके तहत अगले पाँच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को रोजगार और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।  पैकेज की प्रमुख विशेषताएँ  # 40 करोड़ रुपए तक ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) # नई इकाइयों को 14 वर्षों तक स्वीकृत परियोजना लागत का 300% तक SGST की प्रतिपूर्ति # 30% तक पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) # निर्यात प्रोत्साहन की सीमा 14 वर्षों तक 40 लाख रुपए प्रतिवर्ष # कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा, स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क की प्रतिपूर्ति # निजी औद्योगिक पार्कों, पेटेंट पंजीकरण एवं गुणवत्ता प्रमाणन को सहयोग  निवेशकों को भूमि मुफ्त  # सरकार ने निवेशकों के लिए भूमि आवंटन को भी आकर्षक बनाया है। # 100 करोड़ से अधिक का निवेश और 1000 से अधिक रोजगार देने वाली इकाइयों को 10 एकड़ भूमि मुफ्त # 1000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली कंपनियों को 25 एकड़ भूमि मुफ्त # फॉर्च्यून 500 कंपनियों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क  आवेदन की अंतिम तिथि  इस पैकेज का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को 31 मार्च 2026 तक आवेदन करना अनिवार्य होगा।  सीएम नीतीश कुमार का लक्ष्य  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि इस नई औद्योगिक नीति से बिहार के युवाओं को राज्य के अंदर ही बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। उनका उद्देश्य है कि बिहार आत्मनिर्भर, औद्योगिक रूप से सशक्त और युवाओं का भविष्य सुरक्षित राज्य बने।  बिहार को मिलेगा औद्योगिक बढ़ावा  विशेषज्ञों का मानना है कि BIPPP-2025 से राज्य में न केवल निवेश का माहौल बेहतर होगा, बल्कि बिहार उद्योग और रोजगार का हब बनकर उभरेगा।

मनाली में बाढ़ का कहर, कुल्लू-मनाली-लेह NH-3 यातायात के लिए बंद

मनाली.  हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का दौर चलातार जारी है. मौसम विभाग की तरफ से रेड अलर्ट के बाद मनाली में बीती रात को भारी बारिश हुई और अब भी जारी है. ऐसे में ब्यास नदी चंडीगढ़ मनाली नेशनल हाईवे पर बहने लगी थी. बीती रात को लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण ब्यास नदी का पानी आलू ग्राउंड तक सड़क पर आ गया और आलू ग्राउंड, वॉल्वो बस स्टैंड, ग्रीन टैक्स बैरियर डूब गए. मनाली में प्रशासन ने मंगलवार के लिए स्कूल और कॉलेज बंद करने का फैसला लिया है. उधर, बाहंग क्षेत्र के किनारे रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है. उधर, मनाली के बाहंग में कुछ दुकानें, और शेरे-ए-पंजाब होटल और घर नदी में बह गया है. बीती रात को ब्यास नदी के ऊफान में कैफे का केवल गेट ही बचा, बाकी सामान सहित सब कुछ बह गया. इसके साथ में शेड्स भी नदी में बह गए हैं. जानकारी के अनुसार, रात को आलू ग्राउंड में सब्ज़ी मंडी किसान भवन (एपीएमसी बिल्डिंग) में एपीएमसी का एक कर्मचारी दीप चंद (36, निवासी कटराई, कुल्लू भवन में फंस गया था. ब्यास नदी का पानी भवन के दोनों ओर भर गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और बाद में पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची. फिर हाइड्रा क्रेन और स्थानीय कर्मचारियों की मदद से दीप चंद को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसी बीच मनाली-केलांग-लेह मार्ग पर समाहन के पास सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है. भूस्खलन और कटाव से कई जगहों पर यातायात बाधित हुआ है. प्रशासन ने कहा कि हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है. मनाली में ब्यास नदी की तबाही से लोगों में दहशत का माहौल है, वहीं प्रशासन ने अपील की है कि लोग नदी किनारे न जाएं और सावधानी बरतें. मनाली में होटल में फंसे ओम ठाकुर ने बताया कि वह टूअर लेकर स्पीति गए थे और फिर लौटते हुए तीन दिन से मनाली में फंसे हुए हैं. बीती रात से ही मनाली में बारिश हो रही है और ब्यास नदी पूरे ऊफान पर है. उधर, मनाली में ब्यास नदी के उफान और लगातार भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है. मनाली–कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-3) ढँकार के पास क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. वहीं मनाली से कुल्लू तक राइट बैंक मार्ग पर भी वाहनों की आवाजाही रुक गई है. प्रशासन ने वाहनों को रायसन से लेफ्ट बैंक मार्ग होकर मनाली की ओर भेजना शुरू किया है, ताकि लोगों को राहत मिल सके. लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से मनाली के कई इलाक़ों में भूस्खलन और जलभराव की घटनाएँ सामने आई हैं. कई जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. पूर्व मंत्री और विधायक गोविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के चलते मनाली लेह सड़क समाहण के पास पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. वहीं, ओल्ड मनाली से बुरुआ सड़क संपर्क मार्ग भी टूट चुका है. अभी मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों के साथ स्थिति का जायजा लिया।व्यास नदी और मनालसु नाले का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ हुआ है. मेरी सभी लोगों से अपील है कि नदी-नालों के पास न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें. माता हिडिंबा सबकी रक्षा करें. पानी की सप्लाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित मनाली में पानी की सप्लाई व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. नगर का मेन डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसके कारण मनाली शहर में पानी की आपूर्ति बाधित रहेगी. प्रशासन ने जानकारी दी है कि बहाल करने का काम तभी शुरू किया जाएगा जब मनालसु नाले का जलस्तर कम होगा. पुरानी मनाली पंपिंग स्टेशन पर हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है. जल विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी और संयम के साथ करें, ताकि इस आपात स्थिति से निपटा जा सके. 2023 की याद दिलाने लगी ब्यास गौरतलब है कि 2023 में भी मनाली में भंयकर बारिश हुई थी और इस वजह से ब्यास नदी हाईवे पर आ गई थी. इस दौरान कुल्लू से मनाली तक ब्यास ने हाईवे को क्षति पहुंचाई थी.

BIPPP-2025: बिहार में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए नया निवेश पैकेज लागू

पटना  बिहार में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बियाडा एमनेस्टी पॉलिसी 2025 के बाद अब नया बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIPPP-2025) लागू किया है। इसके तहतः- (1) 40 करोड़ रूपए तक की ब्याज सब्सिडी (Interest Subvention) दी जाएगी। (2) नई इकाइयों को स्वीकृत परियोजना लागत का 300 प्रतिशत तक शुद्ध SGST की प्रतिपूर्ति 14 वर्षों के लिए की जाएगी। (3) 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy) प्रदान की जाएगी। (4) निर्यात प्रोत्साहन की सीमा 14 वर्ष की अवधि के लए 40 लाख रूपए प्रतिवर्ष होगी। इसके अतिरिक्त कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग, स्टाम्प ड्यूटी एवं भूमि रूपांतरण शुल्क की प्रतिपूर्ति, निजी औद्योगिक पार्कों को सहयोग, पेटेंट पंजीकरण एवं गुणवत्ता प्रमाणन हेतु सहायता दी जाएगी। इस नए औद्योगिक पैकेज 2025 के तहत निवेश को बढ़ावा देने के लिए निःशुल्क भूमि आवंटित की जाएगी। 100 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली एवं 1000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। 1000 करोड़ से अधिक का निवेश करने वाली औद्योगिक इकाइयों को 25 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। फॉर्च्यून 500 कंपनियों को 10 एकड़ तक भूमि निःशुल्क आवंटित की जाएगी। इस औद्योगिक पैकेज 2025 के अंतर्गत लाभ लेने के लिए निवेशकों को 31 मार्च 2026 से पूर्व आवेदन करना अनिवार्य होगा। इस नए औद्योगिक पैकेज 2025 से 5 वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने में सहायता मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य है कि बिहार में उद्योगों को और ज्यादा बढ़ावा मिले, बिहार के युवा दक्ष एवं आत्मनिर्भर हों तथा उन्हें राज्य के अंदर ही अधिक से अधिक रोजगार मिल सके एवं उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। उद्योग विभाग  बिहार औधोिंगक निवेश पोरसाहन पैकेज (BIPp), 2025 की रचीकित के संबंध में। 2. उधोग विभाग  बिहार  में औधोिंगक सेज के िवरतार हेतु भोजपुर (आर)ि जला अ्तगत अंचल-तरारी के मौजा-मिनकप्र थानासंछया-174, रकबा-56.02 एकड मौजा-पटखोली, थानासंया-173, रकबा-15.48 एकड, मौजा-बौरी, थानानं0-175, रकबा-71.53 एकड, मौजा-बेलिउहरी, थानानं0-110, रकबा-9.98; एकड एवं मौजा-र्नी,शाना नं0-172, रकबा-96.47 अथित कुल समिकत रकबा-249.48 एकड भिम का 3आधारभत संरचना िवकास पािधकार, पटना के मायम से िधगहण एवं िधगहण कीपावकिलत रिश 50 52, 62, 22, 910/-(लपये बावन करोडबासठ लाख बाईस हजार नौ सौ दस) माब के यय कीरवीकित के संबंध में। 3. उछोग िवभाग शेखपुरा िजला अलगत अंचल-चेवड़ा, मौजा-हंसापुर थाना नं0-07 एवं मौजा-अरथावाँ, थाना नं0-04 में कुलरकबा-250.06 एकड भिम का आधारभूत संरचना िवकासािधकार, पटना के मायम से िधघहण एवं िधणहण कीपावकिलत रिश 50 42, 16, 30, 233.00 (लपये िबयािलसकरोड सोलह लाख तीस हजार दो सौ तैंतीस) माज केयय की रवीकित के संबंध में। 4. उछोग िवभाग रोहतास िजला अलतगत अंचल-िशवसागर के मौजा-तारडीह, थाना नं -574 में कुल रकबा-492.85 एकड भूमका आधारभूत संरचना ियकास पािधकार, पटना के माะयमसे धगहण एवं िधयहण की पावकिलत रिश कमश:西0 1, 54, 07, 12, 370.00 (सपये एक अरब चौबन करोडसात लाख बारह हजार तीन सौ सतर) माब के यय कीरवीकित के संबंध में। उद्योग विभाग 5. शिवहर जिला अन्तर्गत अंचल तरियानी, मौजा-सलेमपुर थाना नं०-06, रकबा 147.43 एकड़ एवं मौजा बेलाही दुल्लाह, थाना-141 रकबा 122.58 अर्थात समेकित कुल रकबा 270.01 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि क्रमशः रु० 1,05,27,12,000/- (रूपये एक अरब पांच करोड़ सताईस लाख बारह हजार) मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। उद्योग विभाग दरभंगा जिला अन्तर्गत अंचल बहादुरपुर, मौजा-तारालाही, थाना नं०-251 एवं मौजा-मोतनाजा तारालाही थाना-252 से कुल रकबा 361.38 एकड़ एवं अंचल-हनुमाननगर, मौजा-बिहारी मुकुन्द, थाना नं 221 एवं मौजा-अम्माडीह, थाना नं०-220 से कुल रकबा 24.07 एकड़ अर्थात समेकित कुल रकबा 385.45 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि क्रमशः रू० 3,76,07,79,329.00 (रूपये तीन अरब छिहत्तर करोड़ सात लाख उनासी हजार तीन सौ उनतीस) मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। उद्योग विभाग थाना पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के समीप पूर्णिया जिला अन्तर्गत अंचल-के० नगर के मौजा-बिठनौली खेमचंद, नं०-24 में रकबा 119.55 एकड़, मौजा-गणेशपुर, थाना नं०-36 में रकबा 152.40 एकड़ एवं मौजा-डरवे चकला, थाना नं०-29 रकबा 7.70 एकड़ अर्थात कुल समेकित रकबा-279.65 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि रू० 66,91,91,318.00 (रूपये छियासठ करोड़ इकानवें लाख इकानवें हजार तीन सौ अठारह) मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। उद्योग विभाग 8. पटना जिला अन्तर्गत अंचल-फतुहाँ में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (MMLP) परियोजना से सटे भू-भाग में GIFT- सामान औद्योगिक परियोजना के अधीन Fin Tech City विकसित करने हेतु मौजा-जैतीया, थाना नं०-79 में कुल रकबा 242 एकड़ भूमि का आधारभूत संरचना विकास प्राधिकार, पटना के माध्यम से अधिग्रहण एवं अधिग्रहण की प्राक्कलित राशि 4,08,81,30,503.00 (चार सौ आठ करोड़ इक्यासी लाख तीस हजार पाँच सौ तीन) रूपये मात्र के व्यय की स्वीकृति के संबंध में। ऊर्जा विभाग 9. बिहार राज्य जल विद्युत निगम के अंतर्गत 12 निर्माणाधीन परियोजनाओं में से 09 परियोजनाओं (तेजपुरा, डेहरा, सिपहा, वलिदाद, पहरमा, मथौली, राजापुर, अमेठी एवं डेहरी स्केप) के लिए पुनरीक्षित प्राक्कलित राशि 166.81 करोड़ (एक सौ छियासठ करोड़ इक्यासी लाख) रूपये की स्वीकृति एवं शेष 03 परियोजनाओं (बरबल, रामपुर एवं नटवार) को बन्द करने की स्वीकृति प्रदान करने के संबंध में। 10. जल संसाधन विभाग पटना मुख्य नहर के बायें बांध-सह-सोन सुरक्षा तटबंध पर बैदराबाद में राष्ट्रीय राज्य मार्ग 139 (NH-139) से पालीगंज वितरणी के शीर्ष नियामक तक एवं पालीगंज वितरणी के सेवापथ पर पालीगंज शीर्ष नियामक से कोरियम मोड़ तक कालीकृत सड़क का निर्माण कार्य, प्राक्कलित राशि 10000.00 लाख रूपये (एक सौ करोड़ रूपये) की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति। पथ निर्माण विभाग 11. पथ प्रमंडल बेनीपुर अंतर्गत कुशेश्वर स्थान (एस.एच-56) से फुलतोड़ाघाट पथ के कि०मी० 0.00 से 20.80 तक (कल लंबाई 20.80 कि०मी०) में मिट्टी कार्य, सीमेन्ट कंक्रीट पथ कार्य, आर०सी०सी० उच्चस्तरीय पुल निर्माण कार्य, क्रॉस ड्रेन कार्य, ड्रेन निर्माण कार्य, डायवर्सन निर्माण कार्य, बचाव कार्य, रिटेनिंग वाल निर्माण कार्य, कम्पेन्सेटरी एफोरेटेशन कार्य, युटिलिटी शिफ्टिंग कार्य, भू-अर्जन कार्य, विविध कार्य एवं पथ फर्निचर कार्य सहित उन्नयन / निर्माण कार्य हेतु स्वीकृत्यादेश संख्या 7025 (एस.) डब्लु.ई., दिनांक 11.09. 2018 से प्रदत्त मूल प्रशासनिक स्वीकृत राशि ₹24304.42 लाख का पुनरीक्षित राशि ₹38122.67 लाख (तीन सौ इक्कासी करोड़ बाईस लाख सड़सठ हजार) का प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने के … Read more

गिरफ्तारी के डर से कानून अवैध नहीं, PM-CM हटाने वाले बिल में सरकार के पक्ष में रोहतगी

नई दिल्ली सीनियर वकील और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने गिरफ्तार प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को उनके पद से हटाने से जुड़े बिल पर सरकार का बचाव किया है. उन्होंने कहा है कि दुरुपयोग की आशंका किसी कानून को अवैध नहीं बनाती है. विशेष साक्षात्कार में उन्होंने इन विधेयकों को देश की राजनीति और राजनेताओं को शुद्धिकरण का प्रयास बताया और कहा कि इस कानून का विरोध करना “राई का पहाड़ बनाने” के समान है.  रोहतगी ने कहा, "दुरुपयोग की आशंका कानून को अमान्य नहीं बनाती. इसे कानून द्वारा स्थापित किया जा चुका है, अब अगर यह पाया जाता है कि कुछ मामलों में सत्तारूढ़ सरकार विपक्षी मंत्रियों को जेल वगैरह में डालने की कोशिश कर रही है, तो फिर आपके पास अदालतें तो हैं न? आप अदालत जा सकते हैं और अदालत आपको जमानत दे देती है." जब उनसे विपक्ष के इस तर्क के बारे में पूछा गया कि यह विधेयक कुचलने वाला है, तो उन्होंने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि पद से हटाया जाना अस्थायी है और व्यक्ति जमानत पर रिहा होने पर फिर से पदभार ग्रहण कर सकता है. उन्होंने कहा, "मेरी पहली राय यह है कि यह कानून इस देश की राजनीति में शुचिता बहाल करने और भ्रष्ट राजनेताओं को दूर करने का प्रयास है. उन्होंने आगे कहा, "अब यह स्पष्ट है कि यह अकल्पनीय है कि कोई सरकार जेल से चलाई जा सकती है, वह भी एक महत्वपूर्ण मंत्री द्वारा. इसलिए, यह कानून स्वागत योग्य है." उन्होंने कहा, "इसमें बहुत ज्यादा हल्ला-गुल्ला है और मुझे नहीं लगता कि यह कोई क्रूर विधेयक है. मेरा मतलब है कि यह राई का पहाड़ बनाने जैसा है." रोहतगी ने बताया कि नया कानून वास्तव में किसी आरोपी को कानूनी लड़ाई में सशक्त बना सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि 30-दिन का नियम "उनके हाथ में एक हथियार होगा जिससे वे अदालत से जल्द से जल्द मामले पर विचार करने का अनुरोध कर सकेंगे" और जमानत प्रक्रिया में तेजी ला सकेंगे बजाय इसके कि जमानत प्रक्रिया में कई महीने लगें. उन्होंने आगे कहा, "एक बार यह 30-दिन का नियम लागू हो जाने के बाद संबंधित अदालत से संपर्क करना और मामले का जल्द से जल्द निपटारा करने का अनुरोध करना उचित होगा ताकि 30-दिन की समय सीमा पार न हो. वास्तव में इससे अदालत तक पहुंचने में तेजी आएगी, बजाय इसके कि जमानत प्रक्रिया महीनों यहां तक कि छह से आठ महीनों तक खिंच जाए." मुकुल रोहतगी ने इस तर्क का भी जवाब दिया कि यह बिल 'दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष' के सिद्धांत का खंडन करता है, उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में ये एक बुनियादी खामी तो है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि सजा होने में 10 से 20 साल तक लग सकता है और इस दौरान एक व्यक्ति राजनीति में सक्रिय रह सकता है.  उन्होंने कहा, "हमारे देश में समस्या यह है कि दोषसिद्धि में 10 साल लग जाते हैं और चुनाव लड़ने की अयोग्यता भी दोषी साबित होने पर ही आधारित होती है. इसलिए 10 से 20 साल तक आप सक्रिय राजनीति में बने रह सकते हैं." वरिष्ठ वकील रोहतगी ने कहा कि मौजूदा बहस आपराधिक न्याय प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन पर केंद्रित होनी चाहिए.

सौरभ भारद्वाज के घर ED के छापे, हॉस्पिटल निर्माण घोटाले में जांच तेज

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के 13 ठिकानों पर ईडी छापेमारी कर रही है. उनके घर पर भी रेड चल रही है. AAP सरकार के दौरान स्वास्थ्य ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मामले में पूर्व स्वास्थ्य मंत्रियों सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ ईडी ने जुलाई में केस दर्ज किया था. अब रेड की जा रही है, जिसपर पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मोदी सरकार आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ गई है" और ये कि "AAP को टारगेट किया जा रहा है." सौरभ भारद्वाज के घर ED की रेड पर पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, "यह मोदी सरकार द्वारा एजेंसीज के दुरुपयोग का एक और मामला है. मोदी सरकार आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ गई है. जिस तरह “आप” को टारगेट किया जा रहा है, ऐसे इतिहास में किसी पार्टी को नहीं किया गया. “आप” को इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि मोदी सरकार की गलत नीतियों और भ्रष्ट कामों के खिलाफ सबसे मुखर आवाज “आप” की है. मोदी सरकार हमारी आवाज दबाना चाहती है. ये कभी नहीं होगा." AAP के कार्यकाल के दो स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन की भूमिका 5,590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में जांच के दायरे में है. ईडी के मुताबिक, 2018-19 में आम आदमी पार्टी सरकार ने 24 अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी थी. योजना थी कि छह महीने के भीतर आईसीयू अस्पताल तैयार कर दिए जाएंगे, लेकिन दावा है कि अब तक काम पूरा नहीं हुआ, जबकि 800 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. अब तक सिर्फ 50% काम ही पूरा हुआ है. ईडी ने यह भी पाया कि दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल में निर्माण लागत 488 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,135 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. एजेंसी का आरोप है कि कई अस्पतालों में बिना सही मंजूरी के ही निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए. ACB ने अपने बयान में कहा था कि साल 2018-19 में अस्पताल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें 11 ग्रीनफील्ड और 13 ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट शामिल थे. एसीबी ने क्या आरोप लगए? एसीबी द्वारा दर्ज मामले में कहा गया था कि शहरभर में अस्पतालों, पॉलीक्लिनिक और आईसीयू इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भारी अनियमितताएं, बिना वजह देरी और बड़े पैमाने पर फंड की हेराफेरी सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, कई सौ करोड़ रुपये तक की लागत बढ़ोतरी दर्ज की गई और तय समय सीमा के भीतर एक भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ. केस उस समय का जब सौरभ नहीं थे मंत्री- आतिशी दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने एक एक्स पोस्ट में सौरभ भारद्वाज के घर रेड्स पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पोस्ट में कहा, "आज सौरभ जी के यहां रेड क्यों हुई? क्योंकि पूरे देश में मोदी जी की डिग्री पर सवाल उठ रहे हैं – क्या मोदी जी की डिग्री फर्जी है? इस चर्चा से ध्यान हटाने के लिए ही रेड डाली गई है. जिस समय का केस बताया जा रहा है, उस समय सौरभ जी मंत्री भी नहीं थे. यानी पूरा केस ही झूठा है. सत्येंद्र जी को भी तीन साल जेल में रखकर आखिरकार CBI/ED को क्लोजर रिपोर्ट देनी पड़ी. इससे साफ है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं पर लगाए गए सारे केस सिर्फ झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं." वीजेंद्र गुप्ता ने सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन के खिलाफ की थी शिकायत 22 अगस्त 2024 को उस समय के दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मामले की शिकायत की थी. इस शिकायत में जीएनसीटीडी (GNCTD) के तहत चल रही कई स्वास्थ्य से संबंधित परियोजनाओं में गंभीर अनियमितताओं और संदिग्ध भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया गया था. शिकायत में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज और सत्येंद्र जैन का नाम लिया गया था, उन पर परियोजनाओं के बजट में सुनियोजित हेरफेर, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और निजी ठेकेदारों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए गए थे.

ट्रंप ने कोरियाई राष्ट्रपति के सामने जताई ताकत, कहा- चीन को बर्बाद करने की क्षमता है

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बगल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग बैठे थे. दक्षिण कोरिया और चीन तगड़े प्रतिद्वंद्वी हैं. इस दरम्यान डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं अगर वे चाहें तो चीन को बर्बाद कर सकते हैं, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे. ट्रंप ने कहा कि उनके पास ऐसे-ऐसे कार्ड्स जो चीन को तबाह कर सकता है.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान कहा कि अमेरिका चीन के साथ "बेहतरीन संबंध" बनाए रखेगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि वह ऐसे कदम नहीं उठाएंगे जो इस देश को तबाह कर दें. ट्रंप ने कहा, "चीन के साथ हमारे अच्छे संबंध होंगे… उनके पास कुछ कार्ड हैं. हमारे पास तुरुप के कई पत्ते हैं, लेकिन मैं उन कार्डों का इस्तेमाल नहीं करना चाहता. अगर मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल करता हूं, तो इससे चीन बर्बाद हो जाएगा. मैं उन कार्ड्स का इस्तेमाल नहीं करने वाला." कभी पुचकराना, कभी दुत्कारना ट्रंप की कूटनीति कभी पुचकराने तो कभी दुत्कारने की रही है. समय-समय पर वे इसका इस्तेमाल करते रहते हैं. ट्रंप ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि चीन को अपना मैग्नेट अमेरिका को देना ही पड़ेगा. अगर चीन ऐसा नहीं करता है कि उसे 200 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ेगा.  यहां मैग्नेट का अर्थ 'रेयर अर्थ मैग्नेट' या 'रेयर अर्थ एलिमेंट'से है.  ये मैग्नेट उच्च-तकनीकी और औद्योगिक प्रयोगों में महत्वपूर्ण घटक हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर, पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली जैसी रक्षा प्रणालियां शामिल हैं. चीन दुर्लभ 'रेयर अर्थ एलिमेंट' वैश्विक आपूर्ति में अग्रणी है, और दुनिया के लगभग 90% दुर्लभ रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन करता है. गौरतलब है कि जब से अमेरिका चीन पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहा है तब चीन ने भी रेयर अर्थ एलिमेंट के निर्यात को कंट्रोल कर दिया है. चीन ने इसे एक्सपोर्ट कंट्रोल की सूची में डाल दिया है इससे अमेरिका को इसका निर्यात बंद हो गया है और अमेरिका उद्योग प्रभावित हुए है.  उनके पास रेयर अर्थ है, हमारे पास टैरिफ राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन पर इस महत्वपूर्ण मैटेरियल की सप्लाई के लिए दबाव डालते हए कहा, "लेकिन हमारे पास टैरिफ जैसी बहुत शक्तिशाली चीज है. अगर हम 100% या 200% टैरिफ लगाना चाहें, तो हम चीन के साथ कोई व्यापार नहीं करेंगे. और अगर ऐसा करना पड़ा तो भी ठीक होगा. लेकिन जहां तक मैग्नेट की बात है हमारे पास उनके लिए बहुत शक्ति है, और उनके पास भी हमारे खिलाफ कुछ शक्ति है." राष्ट्रपति ट्रंप ने मैग्नेट को लेकर आगे का प्लान बताते हुए कहा कि हमारे पास बहुत सारे मैग्नेट होंगे. वास्तव में इतने ज्यादा होंगे कि हमें समझ नहीं आएगा कि उनके साथ क्या करना है. मैग्नेट की कहानी बहुत दिलचस्प है. यह इसलिए हुआ क्योंकि हमारे राष्ट्रपति बिजनेसमैन नहीं थे, इसलिए उन्होंने ऐसा होने दिया, जो नहीं होना चाहिए था.  उन्होंने आगे कहा कि हमारे पास बहुत बेहतर और बड़े विकल्प हैं. फिर भी मेरा मानना है कि हमारा चीन के साथ अच्छा रिश्ता है. मैंने हाल ही में राष्ट्रपति शी से बात की थी, और इस साल या उसके बाद, हम शायद चीन जाएंगे और वहां कुछ शानदार देखेंगे. यह एक महान देश है." बता दें कि अभी अमेरिका चीन से आने वाले अधिकांश वस्त्रों पर औसतन 145% टैरिफ वसूल रहा है, जबकि चीन अमेरिका से आयात होने वाली अधिकांश वस्तुओं पर 125% टैरिफ लगा रहा है.  अमेरिका ने अपने सुरक्षा, ड्रग तस्करी (फेंटेनल) और तकनीकी हितों के चलते टैरिफ बढ़ाए हैं, जिससे व्यापक तौर पर चीनी सामान पर 145% तक का टैरिफ लागू है. चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सामानों पर टैरिफ 125% तक बढ़ा दिए हैं, खासकर एग्रीकल्चर, ऑटो पार्ट्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाए हैं. 

रायपुर: CM साय ने वर्ल्ड एक्सपो 2025 में छत्तीसगढ़ पैवेलियन का किया दौरा, प्रदेश की संस्कृति रही आकर्षण का केंद्र

वर्ल्ड एक्सपो 2025 में दिखी प्रदेश की संस्कृति और समृद्धि की अद्भुत झलक रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज ओसाका (जापान) में चल रहे वर्ल्ड एक्सपो 2025 के भारत मंडपम के अंतर्गत स्थापित छत्तीसगढ़ पैवेलियन पहुँचे। यहाँ उन्होंने प्रदेश की संस्कृति, परंपरा और आधुनिक प्रगति को दर्शाती प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उल्लेखनीय है कि उद्घाटन दिवस पर ही छत्तीसगढ़ पैवेलियन में 22 हजार से अधिक दर्शक पहुँचे। यहाँ आने वाले लोग प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, आदिवासी लोककला, उद्योग और पर्यटन की अनूठी झलक देखकर उत्साहित हुए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी परंपरा और आधुनिकता के अनूठे संगम के साथ दुनिया के सामने उभर रहा है। “हमारी पहचान केवल धरोहर और लोकसंस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, नवाचार और वैश्विक सहयोग की दिशा में भी हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।” पवेलियन में छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, बुनाई, हस्तनिर्मित उत्पाद, हर्बल आइटम्स और पर्यटन स्थलों को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही, प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश अवसर और भविष्य की संभावनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। जापान और अन्य देशों से आए आगंतुकों ने छत्तीसगढ़ के पैवेलियन की सराहना करते हुए विशेष रूप से हस्तशिल्प और बांस उत्पादों, बस्तर आर्ट और लोकसंगीत पर आधारित प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। इससे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच प्रदेश की एक सकारात्मक छवि बनी। मुख्यमंत्री साय ने पवेलियन में मौजूद मेहमानों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ निवेश और साझेदारी के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रदेश के साथ जुड़कर विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “वर्ल्ड एक्सपो जैसे वैश्विक मंच पर हमारी भागीदारी यह संदेश देती है कि छत्तीसगढ़ केवल भारत का ही नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी का भी एक मजबूत केंद्र बन सकता है।” इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न देशों से आए निवेशकों और प्रतिनिधियों से भी चर्चा की। औद्योगिक विकास, पर्यटन संवर्द्धन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर केंद्रित इन मुलाकातों ने भविष्य में सहयोग के नए अवसर खोले। छत्तीसगढ़ पवेलियन की भव्यता और उसमें प्रदर्शित सामग्री ने यह संदेश दिया कि प्रदेश न केवल अतीत की सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध है, बल्कि आने वाले कल का भविष्य-रेडी हब भी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह प्रवास छत्तीसगढ़ को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।