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फिल्मी परिवार से ताल्लुक, फिर भी 19 साल में कास्टिंग काउच का शिकार हुईं संयमी

मुंबई  संयमी खेर के करियर को लगभग दस साल हो चुके हैं। एक तेलुगू फिल्म ‘रे’ से इस एक्ट्रेस ने करियर की शुरुआत की। इसके बाद साल 2016 में राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मिर्जिया’ से बॉलीवुड में कदम रखा। अब तक वह कई फिल्में और कुछ वेब सीरीज में नजर आ चुकी हैं। हाल ही में इस एक्ट्रेस ने बताया कि जब करियर शुरू कर रही थी, स्ट्रगल कर रही थी तो उन्हें भी कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ा।  साउथ में काम करने के दौरान हुआ बुरा अनुभव  संयमी खेर ने हाल ही में बॉलीवुड बबल से की गई बातचीत में कहा, ‘शुरुआती दौर में फिल्म इंडस्ट्री में एक एजेंट थी जिसने मुझे 19 या 20 साल की उम्र में एक तेलुगू फिल्म के लिए बुलाया था। उसने कहा कि तुम्हें पता है, तुम्हें समझौता करना पड़ेगा। तो मैंने उनसे पूछा कि मैम मैं समझ नहीं पा रही हूं कि आप क्या कह रही हैं? इस पर वह बोलीं, ‘देखो, तुम्हें समझना होगा।' तब मैंने कहा कि आपको लगता है कि मुझे इस रास्ते पर चलने की जरूरत है। मेरी अपनी लिमिट है, जिन्हें मैं अपनी जिंदगी में कभी पार नहीं करूंगी।’   इन फिल्मों-वेब सीरीज में संयमी नजर आईं  अब तक संयमी 'चोक्ड', 'अनपॉज्ड' और 'वाइल्ड डॉग' और 'हाईवे' जैसी साउथ की फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। वह आर. बाल्की की फिल्म ‘घूमर’ में लीड रोल भी कर चुकी हैं। हाल ही में वह सनी देओल की फिल्म ‘जाट’ में भी नजर आईं। वेब सीरीज ‘स्पेशल ऑप्स’, ‘ब्रीद’ और ‘फाडू’ में भी वह अहम किरदार निभा चुकी हैं।  फिल्मी परिवार से है नाता  50 के दशक की मशहूर अभिनेत्री उषा किरण संयमी खेर की दादी हैं। संयमी के पिता मॉडल रह चुके हैं। साथ ही संयमी की बुआ तन्वी आजमी भी नामी एक्ट्रेस हैं। संयमी की बड़ी बहन संस्कृति भी मराठी फिल्मों में एक्टिंग करती हैं। इस तरह संयमी का लगभग पूरा परिवार ही फिल्मों से जुड़ा है। 

इस बार दशहरे पर रिकॉर्ड बनेगा: कोटा में खड़ा होगा दुनिया का सबसे ऊंचा रावण, रिमोट से होगा दहन

कोटा कोटा में इस बार दशहरे पर 215 फीट ऊंचा रावण तैयार किया जा रहा है. इसे बनाने वालों का दावा है कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा रावण होगा. रावण का पुतला 12 टन यानी 12 हजार किलो वजनी है. खास बात यह है कि इसे खड़ा करने में केवल 3 घंटे का समय लगेगा और दहन पहली बार रिमोट से किया जाएगा. रावण के पतले में 9500 किलो लोहे का इस्तेमाल हुआ है. पुतले का सिर 25 फीट का है जबकि बाकी 9 सिर 3×6 फीट के बनाए गए हैं. रावण का चेहरा फाइबर से तैयार किया गया है जिसका वजन करीब 300 किलो है. पुतले का मुकुट 60 फीट ऊंचा होगा और इसमें मल्टीकलर LED लाइट्स लगाई जाएंगी. तलवार 50 फीट लंबी और जूतियां 40 फीट की बनाई गई हैं. कुंभकर्ण और मेघनाद भी खास रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के 60-60 फीट ऊंचे पुतले भी बनाए जा रहे हैं. इनका वजन 1-1 हजार किलो है और चेहरे 10-10 फीट के फाइबर से तैयार किए गए हैं. 3 घंटे में होगा खड़ा, पहली बार रिमोट से दहन विशाल पुतले को खड़ा करने के लिए 6 फीट गहरा और 25 फीट चौड़ा पक्का फाउंडेशन बनाया गया है. दो क्रेन, जेसीबी और 100 से ज्यादा लोगों की मदद से रावण को खड़ा किया जाएगा. इस बार दहन रिमोट सेंसर से होगा. पुतले में 20 सेंसर लगाए गए हैं. जैसे ही बटन दबेगा, आतिशबाजी शुरू होगी और मुकुट से लेकर शरीर तक पुतला जलता जाएगा. कलाकार का जुनून और रिकॉर्ड रावण बनाने वाले कलाकार तेजेंद्र चौहान पिछले 39 साल से इस काम में लगे हैं. अब तक उन्होंने 7 रिकॉर्ड बनाए हैं जिनमें 5 लिम्का बुक और 2 वर्ल्ड रिकॉर्ड इंडिया में दर्ज हैं. बड़े रावण बनाने के शौक में उन्होंने साढ़े 12 एकड़ जमीन भी बेच दी.  

अब न अमेरिका पर निर्भरता, न फ्रांस पर… भारत के फाइटर जेट को मिलेगा स्वदेशी इंजन

नई दिल्ली भारत हमेशा से अपने फाइटर जेट इंजन को स्वदेशी बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिका या अन्य देशों पर निर्भरता खत्म हो. हाल ही में फ्रांस की कंपनी साफरान (Safran) के साथ 120 kN थ्रस्ट वाले इंजन के विकास का समझौता हुआ है, जो एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बनेगा.  यह प्रोजेक्ट 61,000 करोड़ रुपये का है. 10 साल में पूरा होगा. आइए, समझतें हैं कि यह प्रोजेक्ट भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है?  भारत की इंजन समस्या: विदेशी निर्भरता भारत के फाइटर जेट्स जैसे तेजस, सुखोई-30 और राफेल में ज्यादातर इंजन विदेशी हैं. तेजस में GE F404 (अमेरिका) और सुखोई में AL-31FP (रूस) लगे हैं. कावेरी इंजन प्रोजेक्ट 1980 के दशक से चल रहा है, लेकिन यह 90-100 kN थ्रस्ट नहीं दे पाया. कावेरी को तेजस से अलग कर दिया गया. अब इसका डेरिवेटिव वर्जन ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. कावेरी पर 35 साल और 400 मिलियन डॉलर खर्च हुए, लेकिन तकनीकी चुनौतियां (जैसे सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और थर्मल कोटिंग) ने इसे रोक दिया. इस निर्भरता से समस्या बढ़ी. 2021 में GE F404 इंजन की डिलीवरी में देरी हुई, जिससे तेजस Mk1A प्रोडक्शन रुका. रूस-यूक्रेन युद्ध ने AL-31FP की सप्लाई प्रभावित की. AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) के लिए 110-120 kN इंजन चाहिए, जो स्वदेशी न होने से देरी हो रही है. साफरान प्रोजेक्ट इसी समस्या का समाधान है. साफरान प्रोजेक्ट: क्या है और कैसे काम करेगा? साफरान (फ्रांस की कंपनी, जो राफेल के M88 इंजन बनाती है) के साथ यह प्रोजेक्ट 22 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषित किया. यह 120 kN थ्रस्ट वाला टर्बोफैन इंजन AMCA Mk2 के लिए बनेगा. लागत 7 बिलियन डॉलर (लगभग 61,000 करोड़ रुपये) है. 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. समझौते की मुख्य बातें     10 साल का विकास: 2035 तक इंजन तैयार. AMCA के साथ एकीकृत.     सह-विकास: GTRE (DRDO का लैब) और साफरान मिलकर डिजाइन करेंगे.     स्वदेशी निर्माण: भारत में ही इंजन बनेंगे, जिसमें सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, थर्मल बैरियर कोटिंग और एडवांस्ड कॉम्बस्टर जैसी तकनीकें शामिल.     निर्यात संभावना: AMCA के साथ निर्यात बढ़ेगा, क्योंकि स्वदेशी इंजन से लागत कम होगी. रक्षा मंत्रालय ने साफरान को चुना क्योंकि इसका प्रस्ताव सबसे फायदेमंद था. अमेरिका की GE और ब्रिटेन की Rolls-Royce भी दौड़ में थे, लेकिन साफरान ने 100% ट्रांसफर और कावेरी से लिंकेज का वादा किया. साफरान पहले कावेरी पर सहयोग कर चुकी है (2016 में €1 बिलियन का ऑफर). साफरान प्रोजेक्ट का महत्व: आत्मनिर्भर भारत के लिए मील का पत्थर यह प्रोजेक्ट भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी है. इसके फायदे… विदेशी निर्भरता खत्म: कावेरी की असफलता के बाद भारत GE, Safran और Rolls-Royce पर निर्भर था. अब AMCA, TEDBF और भविष्य के फाइटर जेट्स के लिए स्वदेशी इंजन मिलेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह 5th जेनरेशन फाइटर के लिए बड़ा कदम है. AMCA प्रोग्राम को गति: AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) 2035 तक तैयार होगा. पहले GE F414 इंजन इस्तेमाल होगा, लेकिन साफरान इंजन से AMCA Mk2 स्वदेशी बनेगा. लागत 15,000 करोड़ रुपये की और 5 प्रोटोटाइप बनेंगे. तकनीकी आत्मनिर्भरता: इंजन सबसे जटिल भाग है. साफरान से 100% ट्रांसफर मिलने से भारत सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, लेजर ड्रिलिंग और हॉट-एंड कोटिंग जैसी तकनीक सीखेगा. कावेरी का अनुभव (49 kN थ्रस्ट) साफरान प्रोजेक्ट को मदद करेगा. आर्थिक और निर्यात लाभ: इंजन 40% लागत होता है. स्वदेशी इंजन से AMCA सस्ता बनेगा. निर्यात बढ़ेगा. HAL और GTRE को नया बिजनेस मिलेगा. MSMEs को भी अवसर. रणनीतिक सुरक्षा: युद्ध या प्रतिबंध के समय विदेशी इंजन की सप्लाई रुक सकती है. स्वदेशी इंजन से भारत सुरक्षित रहेगा. चुनौतियां और भविष्य प्रोजेक्ट में चुनौतियां हैं: फंडिंग (केवरी पर 35 साल में $400 मिलियन खर्च, लेकिन असफल), तकनीकी जटिलताएं और समय (10 साल). लेकिन साफरान का अनुभव (M88 इंजन) मदद करेगा. कावेरी डेरिवेटिव इंजन अब ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. भविष्य में कावेरी 2 (90-110 kN) और कावेरी 3 (125 kN) साफरान से प्रेरित होंगे. 2025 में साफरान हैदराबाद में मेंटेनेंस सेंटर खोलेगा.

अंतिम चरण में साँईखेड़ा जल-प्रदाय परियोजना, 40 हजार से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपक्रम मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्प़नी द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से नरसिंहपुर जिले के साँईखेडा, सालीचौका और चिचली कस्बों में समूह जल‑प्रदाय परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका है। परियोजना से 40 हजार से अधिक नागरिक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। परियोजना पर 52 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। परियोजना के अंतर्गत नर्मदा नदी से जल संग्रहण कर 6.5 एमएलडी क्षमता का जल शोधन संयंत्र स्थापित किया गया है। परियोजना से हर घर को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से व्यापक वितरण नेटवर्क स्थापित किया गया है।साँईखेडा में 33 किलोमीटर, सालीचौका में 41 किलोमीटर और चिचली में 40 किलोमीटर लंबी पाइप-लाइन बिछाई गई है। जल संग्रहण की व्यवस्था को मजबूत करने के लिये साँईखेडा और चिचली में दो‑दो नए ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं, जो मौजूदा टैंकों के साथ मिलकर आपूर्ति नेटवर्क की स्थिरता में सहयोग कर रहे हैं।परियोजना में प्रस्तावित 7 हजार 396 घरेलू कनेक्शनों में से अब तक 6 हजार 348 कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। क्षेत्र में शीघ्र ही परियोजना का प्रायोगिक परीक्षण भी प्रारंभ किया जायेगा।  

1.10 लाख पार पहुंचा सोना, रतलाम सहित प्रदेश भर में सराफा कारोबार मंदा

रतलाम   सोने के दाम सातवें आसमान पर हैं, जिसका सीधा असर जेवरों की डिमांड पर पड़ रहा है. सोने में तूफानी तेजी के साथ सराफा बाजार में ज्वेलरी की खरीदी बुरी तरह से गिरी है. बारिश के सीजन में डिमांड पहले से ही कमजोर थी, जिसके बाद अब सोने की ऊंची कीमतों की वजह से 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी के ऑर्डर्स में बड़ी गिरावट आई है. जिससे ज्वेलरी निर्माण से जुड़े कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. रतलाम सराफा बाजार पड़ा ठंडा शुद्ध सोने और कारीगरी के लिए प्रसिद्ध रतलाम के सराफा बाजार से ग्राहकों की रौनक गायब है. ऐसे में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े सुनार समाज और बंगाली कारीगरों को नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं. जिससे इन कारीगरों का काम करीब 3 महीनो से बंद पड़ा हुआ है. रतलाम सराफा में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े व्यावसायी  ने बताया, '' सोने की कारीगरी से जुड़े लोगों की स्थिति बहुत खराब है. रतलाम ही नहीं पूरे भारत में स्वर्णकारो की यही हालत है.'' कोरोना काल से ज्यादा बुरा हाल थेवा कला आर्टिस्ट और स्वर्णकार ने बताया, '' सोने के दाम में तेजी और अनिश्चितता की वजह से पूरे सराफा का कामकाज ठप्प हो गया है. यह स्थिति कोरोना काल और लॉकडाउन से भी अधिक गंभीर है क्योंकि सोने के दाम को लेकर अस्थिरता बनी हुई है. ऐसे में ग्राहक भी हल्के कैरेट ज्वेलरी या अन्य विकल्पों पर जा रहे हैं. ग्राहकी मंदी होने से नए ऑर्डर मिलना बिल्कुल बंद हो गए हैं.'' गौरतलब है कि रतलाम में 500 के करीब बंगाली कारीगर स्वर्णकारी का कार्य करते हैं. बताया कि 3 महीने से कोई काम ही नहीं मिला है. कुछ कारीगर तो वापस अपने गांव चले गए हैं. क्यों नहीं मिल रहा काम? दरअसल, वर्तमान में 24 कैरेट सोने के दाम 1 लाख 10 हजार प्रति 10 ग्राम के करीब हैं, जिससे ग्राहकी कमजोर हुई है. बाजार की अस्थिरता की वजह से सोने के दामों में वृद्धि या कमी होने का डर बना हुआ है जिसकी वजह से 22 कैरेट ज्वैलरी की मांग तेजी से घटी है. यही वजह है कि वर्तमान में ज्वेलरी निर्माण से जुड़े लोगों को कम नहीं मिल पा रहा है. 3 महीने से काम नहीं मिलने की वजह से खाली हाथ बैठे ज्वेलरी निर्माताओं और कारीगरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. इसके बाद इन कारीगरों ने सरकार से राहत देने और कोई ठोस कदम उठाने की गुहार लगाई है.

लाड़ली बहना योजना: इंतजार खत्म! आज आएगी 28वीं किस्त

भोपाल  मध्य प्रदेश की लाडली बहनों के लिए सितंबर महीने की खुशखबरी आ गई है। मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा कब आएगा, इसकी तारीख के बारे में जानकारी मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इस बार झाबुआ जिले से लाडली बहना योजना का पैसा 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में ट्रांसफर करेंगे। झाबुआ जिले में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियां हुई पूरी । सीएम के आगमन के लिए झाबुआ में तैयारियां पूरी । हेलीपैड और कार्यक्रम स्थल का निर्माण हुआ पूर्ण  । सूत्रों से जानकारी म‍िली है क‍ि मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की 28वीं किस्त का पैसा 12 सितंबर यानी आज शुक्रवार को लाडली बहना योजना का बड़ा कार्यक्रम होगा। झाबुआ कलेक्‍टर ऑफ‍िस ने भी फेसबुक पोस्‍ट में 12 स‍ितंंबर की ही जानकारी दी है। कहा जा रहा था कि पैसा 13 सितंबर को ट्रांसफर होगा। हालांक‍ि अभी तक सरकार की ओर से कार्यक्रम को लेकर आध‍िकार‍िक ऐलान नहीं क‍िया गया है। इस बार आएंगे कितने पैसे पिछले महीने अगस्त में लाडली बहनों को रक्षाबंधन के शगुन के रूप में 250 रुपये अलग से मिले थे और उनके खाते में 1500 रुपये आए थे। लेकिन इस महीने 28वीं किस्त के रूप में पहले की तरह 1250 रुपये मिलेंगे। महिलाओं के खाते में पैसा भेजने के लिए सरकार को हर महीने करीब 1550 करोड़ रुपये खर्च करने होते हैं। कब से मिलेंगे 1500 रुपये लाडली बहना योजना के लिए 1500 रुपये कब से मिलने शुरू होंगे? इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अपडेट दे चुके हैं। महिलाओं का 1500 रुपये का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। सीएम मोहन यादव के मुताबिक भाई दूज से 1500 रुपये हर महीने मिलना शुरू हो जाएंगे। इस बार भाई दूज अगले ही महीने 23 अक्टूबर को है। इस बात की पूरी संभावना है कि लाडली बहना योजना की 29वीं किस्त के रूप में महिलाओं को 1500 रुपये मिलना शुरू हो जाए। लाडली बहना योजना की 27वीं किस्त पिछले महीने 7 अगस्त को ही मिल गई थी। रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1.26 करोड़ महिलाओं के खाते में 1250 रुपये की किस्त और 250 रुपये रक्षाबंधन का शगुन एक साथ भेज दिया था। लाड़ली बहना योजना के तहत हर महीने 1,500 रुपये कब से मिलेंगे? पहले ही सीएम मोहन यादव ऐलान कर चुके हैं कि लाडली बहनों को मिलने वाली राशि को हर महीने बढ़ाया जाएगा। 2028 तक लाभार्थियों के खाते में 3000 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। उन्होंने हाल ही में कहा था कि लाड़ली बहनों के खाते में अक्टूबर से हर महीने 1500 रुपये आने शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के बारे में पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Scheme) शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था। जून 2023 को इस योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। सरकार ने 2023 रक्षाबंधन में इस राशि को बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया था। तभी से अभी तक लाड़ली बहना योजना के तहत 1250 रुपए महीना मिल रहे हैं। सरकार ने अब इस योजना की राशि को बढ़ाने का निर्णय लिया है। किन्हें मिलेगा लाड़ली बहना योजना का फायदा? – 1 जनवरी 1963 के बाद लेकिन 1 जनवरी 2000 तक जन्मी प्रदेश की समस्त विवाहित महिलाएं लाड़ली बहना योजना में 2023 में आवेदन के लिए पात्र मानी जाती है। किन्हें नहीं मिलेगा लाड़ली बहना योजना का फायदा? – महिलांए या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते है। – अगर ज्वाइंट फैमिली है और 5 एकड़ से अधिक भूमि है। फटाफट चेक कर लें अपना नाम आपके खाते में 1250 रुपये आएंगे या नहीं, इसका पता आप आज ही लगा सकती हैं। इसके लिए लाडली बहना योजना के पोर्टल पर जाएं और 'आवेदन एवं भुगतान की स्थिति' पर क्लिक करें। यहां अपने रजिस्ट्रेशन नंबर या समग्र आईडी और ओटीपी से अपना नाम चेक कर सकती हैं।  

एमपी में ट्रैफिक सुविधा के लिए बड़ा कदम, 4-लेन बायपास 3000 करोड़ में बनेगा

भोपाल  राजधानी भोपाल में पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से भू-अर्जन शुरू किया जा रहा है। कलेक्टर ने प्रोजेक्ट के लिए तय 155 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने के लिए हुजूर एसडीएम की अध्यक्षता में टीम बनाई है। इसमें तहसीलदार, वार्ड पार्षद, सरपंच- सदस्य समेत संबंधित ग्राम के पटवारी व राजस्व निरीक्षक को शामिल किया है। अगले छह माह में इन्हें भू- अर्जन की प्रक्रिया पूरी करना होगी। 35.60 किमी लंबा पश्चिमी बायपास रतनपुर सड़क स्थित 11 मील जोड़ से रोड का काम शुरू होगा जो फंदा कला तक चार लेन बनेगा। सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए करीब 3000 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यहां की इतनी जमीन लेंगे तब बनेगा बायपास     15.9929 हेक्टेयर जमीन भानपुर केकडिया     14.0685 हेक्टेयर जमीन समसगढ़     10.2719 हेक्टेयर जमीन समसपुरा     2.0694 हेक्टेयर जमीन सरवर     17.8365 हेक्टेयर जमीन झागरिया खुर्द     12.8594 हेक्टेयर जमीन मूंडला     13.5931 हेक्टेयर जमीन नरेला     4.5198 हेक्टेयर जमीन टीलाखेड़ी     8.2897 हेक्टेयर जमीन जाटखेड़ी     7.0626 हेक्टेयर जमीन खोकरिया     4.0910 हेक्टेयर जमीन हताईखेड़ी     7.5226 हेक्टेयर जमीन दूबड़ी     7.4606 हेक्टेयर जमीन पिपलिया धाकड़ 9163 हेक्टेयर जमीन फंदा खुर्द 14.1189 हेक्टेयर जमीन फंदा कलां 155.731 हेक्टेयर कुल अर्जित क्षेत्र है इसलिए जरूरी पूरा बायपास बायपास एक तरह से शहर की सीमा को तय करता है और जिन वाहनों को शहर में नहीं आना होता है वह बायपास से बाहर निकल जाते हैं। छह माह में प्रक्रिया पूरी नए सिरे से भू अर्जन करने हमने टीम तय कर दी है। आगामी छह माह में प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बायपास जल्द बने इसके लिए जल्द से जल्द काम पूरा किया जाएगा।-कौशलेंद्र विक्रमसिंह, कलेक्टर

PWD ने धार के लिए भेजा प्रस्ताव: 8 स्थाई हेलीपैड से बढ़ेगी सुविधा

धार  एमपी के धार जिले में पर्यटन और तीर्थ स्थल को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं। अब इसमें एक कदम और आगे बढ़ाते हुए हवाई सफर की सौगात शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए जिले में आठ स्थानों पर स्थाई हेलीपैड बनाने की योजना पर काम चल रहा है। सबकुछ ठीक रहा है, तो जिल के प्रमुख स्थान हेलीपैड जैसी सुविधा से जुड़ जाएंगे। जहां आने वाले समय में आमजन हेलीकॉप्टर उड़ान भरते देखे जा सकते हैं। सरकार द्वारा वीआईपी कल्चर को फोकस करते हुए दिशा में काम शुरू कर दिया है। पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जिले के प्रमुख जगह पर स्थाई हेलीपैड बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार के विमानन विभाग को भेजा है, जहां से स्वीकृति मिलने के बाद स्थाई तौर पर हेलीपैड बनाने का काम शुरू किया जाएगा। अभी इसी प्रकार की सुविधा केवल धार जिला मुख्यालय और पीथमपुर में है। धार में पुलिस लाइन में पक्का हेलीपैड बना है। हवाई सुविधा से सीधे कनेक्ट होगा धार आजादी के बाद से धार जिला विकास के मामले में पड़ोसी जिलों से पिछड़ा हुआ है। आवागमन के रूप में सडक़ परिवहन और संसाधन कम रहे। हालांकि अब इंदौर-दाहोद रेलवे परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। निकट भविष्य में धार में रेल सेवा भी शुरु हो जाएगी। ऐसे ही वीआईपी सुविधा के दृष्टि से हवाई सफर की सौगात मिल सकती है। अभी ये आ रही परेशानी राजनेता, वीआईपी और अन्य बड़े मेहमानों के आने पर हवाई सेवा की सुविधा नहीं है। इंदौर हवाई अड्डे पर उतरने के बाद टैक्सी या फिर प्राइवेट वाहन से पर्यटक और मेहमानों को मांडू और मोहनखेड़ा पहुंचना पड़ता है। इसी प्रकार चुनाव अथवा किसी राजनेता के दौरा कार्यक्रम के समय अस्थाई हेलीपैड तैयार करना होता है। इसमें बार-बार पैसा खर्च होता है। इसलिए सरकार की मंशा है कि जिले में कुछ चुंनिदा जगह पर स्थाई हेलीपैड तैयार किया जाए। मांडू, अमझेरा और मोहनखेड़ा तीर्थ स्थल शामिल ऐतिहासिक पर्यटन स्थल मांडू, अमझेरा सहित जैन तीर्थस्थल मोहनखेड़ा में स्थाई हेलीपैड तैयार करने की योजना है। इसके अलावा कुक्षी, गंधवानी, मनावर, धरमपुरी और बदनावर में स्थाई हेलीपैड बनाने की योजना है। जिसका प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी विभाग ने तैयार किया है। बदनावर को छोडक़र अन्य सभी स्थानों पर जगह का चयन हो चुका है। पीडब्ल्यूडी द्वारा दो प्रकार के स्थाई हेलीपैड बनाए जाते हैं। इसमें एक सीमेंट कांक्रीट और दूसरा डामरी-गिट्टी से बनता है। जिले में बनने वाले आठों हेलीपैड डामर से बनाएं जाएंगे। प्रस्ताव भेजा है… विभाग द्वारा आठ स्थानों पर स्थाई हेलीपैड बनाने के लिए जगह चयनित कर प्रस्ताव बनाया है। इसे भारत सरकार के विमानन विभाग को भेजा गया है, जहां से स्वीकृति और बजट सेशन होने पर काम शुरू किया जाएगा।- बबीता सोनगर, ईई पीडब्ल्यूडी विभाग धार पूरे साल पहुंचते हैं सैलानी मांडू: ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विख्यात। जहां पूरे साल देशी-विदेशी पर्यटक व सैलानी आते हैं। एक साल में तकरीबन चार लाख से अधिक पर्यटक आते हैं, जिससे स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी चलती है। मोहनखेड़ा: जैन श्वेतांबर ट्रस्ट की पेढ़ी और प्रमुख जैन तीर्थस्थल। गुरुपूर्णिमा पर भव्य आयोजन। जनसंतों व अनुयायियों की साधना स्थली, जहां पूरे साल देशभर से समाज के लोग पहुंचते हैं। अमझेरा: अमका-झमका माता मंदिर। द्वापर में इसी जगह से भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी हरण कर ले गए थे। धार्मिक मान्यता है कि रुक्मिणी हरण के लिए जो रथ इस्तेमाल हुआ था, वह आज भी मंदिर के पास स्थापित है। मुयमंत्री डॉ. मोहन यादव अमझेरा को धार्मिक स्थल घोषित कर चुके हैं।

देशी तकनीक से सशक्त हुई नौसेना, पहला 3D एयर रडार कमीशन — हवाई खतरे होंगे नाकाम

नई दिल्ली टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) ने स्पेन की डिफेंस कंपनी इंद्रा के साथ मिलकर भारतीय नौसेना के लिए पहला 3D एयर सर्विलांस रडार (3D-ASR) – लांजा-एन कमीशन किया है. यह रडार एक भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर लगाया गया है. यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. लांजा-एन रडार क्या है? लांजा-एन इंद्रा का लांजा 3D रडार का नौसैनिक संस्करण है, जो दुनिया के सबसे एडवांस लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस और एंटी-मिसाइल रडार में से एक है. यह रडार हवा और सतह दोनों के लक्ष्यों को 3D में ट्रैक करता है. इसकी रेंज 254 नॉटिकल माइल्स (लगभग 470 किमी) है. यह ड्रोन, सुपरसोनिक फाइटर जेट, एंटी-रेडिएशन मिसाइल, और नौसैनिक प्लेटफॉर्म को पकड़ सकता है. यह खराब मौसम में भी काम करता है और दुश्मन के हमलों को रोकने में माहिर है. यह पहली बार है जब लांजा-एन रडार स्पेन के बाहर काम करेगा. इंद्रा ने इसे भारतीय महासागर की नमी और गर्मी के लिए अनुकूलित किया है. रडार को युद्धपोत के सभी सिस्टम से जोड़ा गया है. सख्त समुद्री परीक्षणों के बाद इसे स्वीकार किया गया. परीक्षणों में विभिन्न नौसैनिक और हवाई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया. टाटा और इंद्रा का सहयोग यह उपलब्धि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) और इंद्रा के बीच 2020 में हुए समझौते का नतीजा है. इस समझौते में 23 रडारों की डिलीवरी का प्रावधान है, जिनमें से तीन पूरे इंद्रा से आएंगे. बाकी 20 टाटा भारत में असेंबल करेगा. टाटा ने कर्नाटक में एक रडार असेंबली, इंटीग्रेशन और टेस्टिंग फैसिलिटी बनाई है, जो डिलीवरी को तेज करेगी. TASL के CEO और MD सुकर्ण सिंह ने कहा कि इंद्रा के साथ हमारा सहयोग भारत में रडार निर्माण क्षमता को मजबूत करने का प्रतीक है. हम स्थानीय सप्लाई चेन और तकनीकी विशेषज्ञता से उन्नत रक्षा प्रणालियों का इकोसिस्टम बना रहे हैं. इंद्रा के नेवल बिजनेस यूनिट की हेड आना बुएंडिया ने कहा कि यह प्रोजेक्ट रडार डिलीवरी से आगे है. हमने बेंगलुरु में टाटा के साथ रडार फैक्ट्री बनाई, जो हमें स्थानीय उत्पादन और सेवा प्रदान करने में मदद करेगी.  भारतीय नौसेना के लिए महत्व यह रडार भारतीय नौसेना के फ्रिगेट, डिस्ट्रॉयर और एयरक्राफ्ट कैरियर पर लगाया जाएगा. पहले कमीशंड रडार एक युद्धपोत पर लगाया गया है. बाकी जल्द ही आएंगे. यह नौसेना की निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा. खासकर दुश्मन के ड्रोन, जेट और मिसाइलों के खिलाफ.  इंद्रा का लांजा-एन रडार मॉड्यूलर, सॉलिड-स्टेट और पल्स्ड टैक्टिकल रडार है, जो सभी प्रकार के हवाई और सतही लक्ष्यों को ट्रैक करता है. यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. टाटा पहली भारतीय कंपनी बनी जो नेक्स्ट-जनरेशन नेवल सर्विलांस रडार बना और इंटीग्रेट कर रही है. 50% से ज्यादा लोकलाइजेशन होगा, जो ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा.

सीएम डॉ. यादव करेंगे गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट का शुभारंभ, लक्ज़री कैंपिंग और हवाई रोमांच का केंद्र बनेगा

लक्ज़री कैंपिंग से हवाई एडवेंचर का मिलेगा रोमांचक अनुभव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार 12 सितम्बर को मंदसौर में गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के चौथे संस्करण का शुभारंभ करेंगे। यह रिट्रीट लल्लूजी एंड संस द्वारा मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से विकसित किया गया है, जो लक्ज़री कैंपिंग, एडवेंचर टूरिज्म और सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा संगम है। गांधीसागर फॉरेस्ट रिट्रीट के दौरान पर्यटक टेंट सिटी में हॉट-एयर बलूनिंग, पैरामोटरिंग, जेट स्कीइंग, कायाकिंग और मोटर बोटिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे। हिंगलाजगढ़ किले की हेरिटेज ट्रेल, गांधीसागर अभयारण्य में वन्यजीव सफारी और ग्रामीण जीवन के अनुभव भी पर्यटकों के आकर्षण का हिस्सा रहेंगे। इस रिट्रीट में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता पर विशेष ध्यान दिया गया है। लगभग 2,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित बटरफ्लाई गार्डन में 4,000 से अधिक पोषक एवं पराग प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यहां पहले से ही 40 से अधिक तितली प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। यह केंद्र शिक्षा एवं इंटरप्रिटेशन स्थल के रूप में पर्यटकों को तितलियों के जीवन चक्र की जानकारी प्रदान करेगा। इसके अलावा इस सीज़न में रॉक आर्ट इंटरप्रिटेशन ज़ोन, जो चतुर्भुज नाला की प्राचीन शैलचित्र कला से प्रेरित है, तथा बायोडायवर्सिटी वॉक जैसी गतिविधियां भी शामिल की गई हैं। पर्यटक इस रिट्रीट में गाइडेड बटरफ्लाई गार्डन टूर, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, वाटर स्पोर्ट्स (स्पीड बोट, बनाना राइड, जेट स्की, कयाकिंग) और हवाई एडवेंचर (हॉट एयर बैलूनिंग व पैरामोटरिंग) जैसी शानदार गतिविधियों का अनुभव लेकर प्रकृति के और करीब आ सकेंगे।