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पराली मुद्दे पर सख्त CJI गवई, बोले – किसानों को जेल भेजने से सुधरेगी स्थिति

नई दिल्ली जैसे ही पराली के सीजन की हलचल शुरू हुई है वैसे ही एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को लेकर डिबेट शुरू हो गई है. इसी कड़ी में एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है. मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने  सुनवाई के दौरान कहा कि किसानों का सम्मान किया जाता है क्योंकि वे हमारे अन्नदाता हैं. मगर किसी को भी पर्यावरण को प्रदूषित करने की छूट नहीं दी जा सकती. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि पराली जलाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. क्या कुछ किसानों को जेल भेजना सही मैसेज नहीं देगा?  शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर पराली जलाने वाले कुछ को जेल भेजा तो सब ठीक हो जाएंगे क्योंकि यह मिसाल कायम करेगा। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि वह पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई चाहता है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को तीन महीने के भीतर सभी रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया। दिल्ली-एनसीआर में हर साल अक्टूबर में होने वाले वायु प्रदूषण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई ने बुधवार को कहा कि कुछ किसानों को पराली जलाने के लिए जेल भेजना दूसरों के लिए एक कड़ा संदेश हो सकता है। उन्होंने पूछा कि किसानों पर कार्रवाई करने से कतरा क्यों रहे हैं? तीन महीने के भीतर भरें रिक्तियां सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में रिक्तियों को लेकर राज्यों को फटकार भी लगाई और दिल्ली से सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब को तीन महीने के भीतर रिक्तियों को भरने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण रोकने के उपायों पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से तीन हफ्ते में रिपोर्ट भी मांगी है। इसके अलावा कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से वायु प्रदूषण रोकने के लिए विचार-विमर्श कर योजनाएँ बनाने को कहा है। न्यायमित्र ने क्या कहा? इससे पहले, मामले में न्यायमित्र नियुक्त अपराजिता सिंह ने CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए किसानों को सब्सिडी और उपकरण दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “लेकिन किसानों की भी यही कहानी है। पिछली बार, किसानों ने कहा था कि उन्हें ऐसे समय पराली जलाने के लिए कहा गया था, जब उपग्रह उस क्षेत्र से नहीं गुज़र रहा था। मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि 2018 से सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक आदेश पारित किए हैं, और वे आपके सामने केवल लाचारी जताते हैं।” पराली का इस्तेमाल ईंधन बनाने के लिए हो सकता है? CJI ने पूछा इस पर CJI ने सवाल किया कि अधिकारी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दंडात्मक प्रावधानों पर विचार क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर कुछ लोग सलाखों के पीछे जाएंगे, तो इससे सही संदेश जाएगा। आप किसानों के लिए दंडात्मक प्रावधानों के बारे में क्यों नहीं सोचते? अगर पर्यावरण की रक्षा करने का आपका सच्चा इरादा है, तो फिर आप क्यों पीछे हट रहे हैं?" CJI ने आगे कहा, "किसान हमारे लिए खास हैं, और हम उनकी बदौलत खा रहे हैं… लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पर्यावरण की रक्षा नहीं कर सकते।" सीजेआई बीआर गवई ने इस दौरान ये भू पूछा कि क्या जलाई जाने वाली पराली का इस्तेमाल ईंधन बनाने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने कुछ अखबारों में ऐसा पढ़ा है।” हर साल अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली की हवा हो जाती है जहरीली बता दें कि पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के कारण साल अक्टूबर और नवंबर में दिल्ली की हवा जहरीली हो जाती है और प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है। किसान खेतों से पराली को हटाने के लिए उसे जला देते हैं। इसके विकल्प के तौर पर खेतों को साफ़ करने के लिए विशेष मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। किसानों का तर्क है कि ये विकल्प काफ़ी महंगे हैं। इसलिए पराली जलाने की घटनाएँ हर साल सामने आती रहती हैं, हालाँकि दर्ज मामलों में कमी आई है।

Mobikwik पर बड़ा झटका! ₹40 करोड़ यूजर्स के अकाउंट से हुए गायब

मुंबई  MobiKwik चलाने वाले कई यूजर्स के साथ एक बड़ी प्रॉब्लम सामने आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 48 घंटों के दौरान कई लोगों के बैंक अकाउंट्स से 40 करोड़ रुपये निकाल लिए गए. ये ट्रांसफर UPI के जरिए किया गया है. ये घटना 11 -12 सितंबर को हुई.  इस घटना के बाद जब मामले की जांच हुई तो उसके बाद 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया.  ये गिरफ्तारी हरियाणा के जिले नूंह और पलवल से हुई हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों के बैंक अकाउंट से चोरी किए गए 9 लाख रुपये भी बरामद हुए .  सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद शुरू हुई प्रॉब्लम टेक्निकल प्रॉब्लम की शुरुआत हाल ही में जारी किए गए सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद शुरू हुई है. इस अपडेट में एक ग्लिच था, जिसका फायदा कुछ लोगों ने उठाया. जांचकर्ताओं का मानाना है कि इस गलत अपडेट की वजह से सिक्योरिटी चेक को डिसेबल कर दिया गया.  UPI पिन के बाद भी बैंक खाते से निकाले रुपये  टेक्निकल ग्लिच के चलते एक खामी सामने आई और ठगों ने इस खामी का इस्तेमाल करके कई लोगों के खातों से रुपये उड़ा लिए हैं.   अथॉरिटीज ने 8 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया है, जो अलग-अलग बैंक अकाउंट ने निकाले गए थे.  पुलिस ने लोगों से की अपील  नूंह जिले में रहने वाले लोगों से पुलिस ने अपील की है कि 11 -12 सितंबर के दौरान जिन लोगों के बैंक अकाउंट से MobiKwik ऐप के जरिए फर्जी ट्रांजैक्शन हुई हैं, वे लोग SP ऑफिस आकर कंप्लेंट दर्ज कराएं. बचाव के लिए क्या करें?  UPI के जरिए होने वाले किसी भी साइबर ठगी से बचाव के लिए जरूरी है कि आप एक से ज्यादा बैंक अकाउंट को यूपीआई ऐप से लिंक ना करें. MobiKwik ऐप वॉलेट और UPI दोनों की सुविधा देता है. 

भारत फिर करेगा ताकत का प्रदर्शन, बंगाल की खाड़ी में बड़ी मिसाइल टेस्टिंग की तैयारी

नई दिल्ली भारत जल्द ही बंगाल की खाड़ी में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मिसाइल परीक्षण करने जा रहा है. इसके लिए 24 और 25 सितंबर के बीच एक NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया गया है, जिसमें बंगाल की खाड़ी के एक हिस्से को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है.  यह परीक्षण 1400 km से ज्यादा दूरी तक हो सकता है, जो दर्शाता है कि यह शक्तिशाली और लंबी दूरी की मिसाइल हो सकती है. यह परीक्षण ओडिशा तट पर अब्दुल कलाम द्वीप से होगा.  क्या है यह मिसाइल परीक्षण? रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) इस बड़े मिसाइल परीक्षण की तैयारी कर रहा है. यह मध्यम या लंबी दूरी की मिसाइल हो सकती है, जिसमें अग्नि-प्राइम (Agni-P) का नाम सामने आ रहा है. अग्नि-प्राइम एक नई पीढ़ी की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज 1000 से 2000 किलोमीटर तक है. NOTAM में बताई गई 1,400 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी इस बात का संकेत देती है कि यह एक रणनीतिक और शक्तिशाली मिसाइल होगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह NOTAM दर्शाता है कि हम एक बहुत ही रणनीतिक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहे हैं, जो शायद लंबी दूरी की हो. यह भारत की रक्षा को और मजबूत करने की दिशा में DRDO का एक बड़ा कदम है.  भारत की मिसाइल ताकत बढ़ रही है पिछले कुछ सालों में DRDO ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के विकास में जबरदस्त प्रगति की है. इससे भारत की क्षेत्रीय ताकत और सैन्य क्षमता मजबूत हुई है. एक अन्य सूत्र ने बताया कि आने वाले हफ्तों में कई और मिसाइल परीक्षण होने वाले हैं. इनमें अलग-अलग रणनीतिक भूमिकाओं के लिए मिसाइलें शामिल हैं. हमारा लक्ष्य है कि हमारा हथियार भंडार आधुनिक और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो. ये मिसाइल परीक्षण क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की रणनीतिक ताकत को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी हैं. हाल के सफल परीक्षण पिछले कुछ हफ्तों में भारत ने तीन उन्नत मिसाइल सिस्टमों का सफल परीक्षण किया है…     अग्नि-5 (20 अगस्त 2025): यह 5,000 किलोमीटर तक की रेंज वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में ITR से किया गया. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इसने सभी तकनीकी और परिचालन मानकों को पूरा किया. अग्नि-5 पूरे एशिया, उत्तरी चीन और यूरोप के कुछ हिस्सों को अपने दायरे में ला सकती है.     पृथ्वी-II: यह परमाणु-सक्षम छोटी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका पिछले महीने सफल परीक्षण हुआ.     अग्नि-I: यह भी परमाणु-सक्षम छोटी दूरी की मिसाइल है, जिसका हाल ही में परीक्षण हुआ. ये परीक्षण DRDO के निरंतर प्रयासों का हिस्सा हैं, जो भारत की आक्रामक और रक्षात्मक मिसाइल क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं. अग्नि-प्राइम: नई पीढ़ी की मिसाइल इस बार परीक्षण होने वाली मिसाइल अग्नि-प्राइम हो सकती है. यह मिसाइल हल्की, तेज और ज्यादा सटीक है. यह पुरानी अग्नि मिसाइलों की तुलना में उन्नत तकनीक से लैस है. अग्नि-प्राइम की रेंज 1000-2000 km है, जो इसे क्षेत्रीय रक्षा के लिए प्रभावी बनाती है. इसका छोटा आकार और गतिशीलता इसे लॉन्च करने में आसान बनाती है. क्यों जरूरी है यह परीक्षण? भारत के आसपास सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं. पड़ोसी देशों की सैन्य गतिविधियों और वैश्विक तनाव के बीच भारत को अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है. अग्नि-प्राइम और अन्य मिसाइलें भारत को रणनीतिक ताकत देती हैं, जिससे वह किसी भी खतरे का जवाब दे सकता है. ये परीक्षण भारत के आत्मनिर्भर रक्षा कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जो स्वदेशी तकनीक पर जोर देता है. सुरक्षा और सावधानियां परीक्षण के लिए सभी जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल और तैयारियां पूरी की जा रही हैं. नो-फ्लाई जोन सुनिश्चित करेगा कि नागरिक और वाणिज्यिक उड़ानों में कोई रुकावट न आए. परीक्षण के बाद मिसाइल के प्रकार और उसकी क्षमताओं के बारे में और जानकारी दी जाएगी. भारत का यह मिसाइल परीक्षण उसकी बढ़ती सैन्य ताकत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. अग्नि-प्राइम जैसे उन्नत हथियार भारत को क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाते हैं. DRDO के लगातार प्रयासों से भारत का मिसाइल भंडार और रक्षा प्रणाली दिन-ब-दिन और सशक्त हो रही है. 24-25 सितंबर का यह परीक्षण भारत की रक्षा यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित होगा.

दिव्यांगता की जल्द पहचान के लिए कदम, स्क्रीनिंग शिविरों में जांचेंगे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे

15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक चलाया जा रहा है अभियान भोपाल  प्रदेश के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान एवं त्वरित दिव्यांगता प्रमाण-पत्र उपलब्ध करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किये जा रहे हैं। यह शिविर 15 सितंबर से 14 नवंबर 2025 तक आयोजित किए जाएंगे। चिन्हित बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं और परिचय-पत्र मुहैया कराए जाएंगे। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि मध्यप्रदेश में हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित जुनाईविल जस्टिस कमेटी की अनुशंसा पर 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान के लिए शिविर आयोजित किये जा रहे है। शिविरों में जिला मेडिकल बोर्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सूक्ष्म परीक्षण कर प्रमाण-पत्र जारी किए जाएंगे। नव चिन्हित दिव्यांग बच्चों को 30 नवंबर तक यूडीआईडी (UDID) नंबर जारी करने तथा शासन की पेंशन व अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है श्रीमती वायंगणकर ने बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में सभी संबंधित विभाग सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा विभाग, जनजाति कल्याण, लोक स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा, आयुष, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग शिविरों के आयोजन में भूमिका निभाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 7 से 8 पंचायत का तथा शहरी क्षेत्रों में 5 से 6 वार्डों का एक क्लस्टर बनाकर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तथा शहरी क्षेत्र में आयुक्त नगर निगम को नोडल अधिकारी बनाया गया है।  

एमपी में शाकाहारी-मांसाहारी होटलों की होगी अलग पहचान, सरकार लाई नया प्लान

भोपाल  शाकाहारी व मांसाहारी भोजन परोसने वाले होटलों और उनके मालिकों की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करने मध्य प्रदेश सरकार ऐसी व्यवस्था करवाने की तैयारी कर रही है ताकि बाहर से ही पता चल जाए कि होटल में भोजन शाकाहारी है या मांसाहारी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के एक्ट में ऐसा प्रविधान करवाने का प्रयास है कि होटल-रेस्टोरेंट के बाहर लगने वाले बोर्ड में पूर्णतः शाकाहारी के लिए हरा गोल निशान और पूर्णतः मांसाहारी के लिए लाल गोल निशान लगाया जाए। क्या है प्रस्ताव? खाने के पैकेट पर भी इस तरह के निशान लगाए जाते हैं, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से समझ लेता है। होटल-रेस्टोरेंट में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का भोजन मिलता है तो आधा हरा और आधा लाल निशान रखने का भी प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त होटल चलाने का लाइसेंस लेने वाले का नाम भी बोर्ड पर लिखना अनिवार्य करवाने का सुझाव दिया गया है। मालिक का नाम भी अनिवार्य अब एफएसएसएआइ इसका परीक्षण कर ड्राफ्ट जारी करेगा। इसके बाद एफएसएसएआइ के एक्ट में इसे लेकर संशोधन की उम्मीद है। संशोधन होने पर यह व्यवस्था मध्य प्रदेश ही नहीं, देशभर में लागू करना अनिवार्य हो जाएगी। इसके अतिरिक्त कई बार होटल के बोर्ड से उसके मालिक का पता नहीं चलता। इस तरह का मामला तब चर्चा में आया था जब कावड़ यात्रा के दौरान इसी वर्ष उत्तर प्रदेश में मेरठ के आसपास कुछ होटलों के बाहर लगे बोर्ड में होटलों के नाम हिंदू रीति-रिवाज वाले थे पर उनके मालिक अन्य समुदाय के थे। इसके बाद उप्र सरकार ने दुकान, रेस्टोरेंट पर मालिक का नाम लिखने का आदेश दिया था। सरकार का प्लान प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि सरकार यह प्रयास कर रही है कि खाने के पैकेट की तरह होटलों के बोर्ड में भी हरा और लाल निशान रहे। यह कोशिश भी है कि विभिन्न कंपनियों द्वारा घरों में खाने-पीने की चीजें पहुंचाने वाले भी उसी तरह का भोजन करने वाले हों यानी शाकाहारी खाद्य सामग्री पहुंचाने वाले भी शाकाहारी हों।  

इजरायल का UN पर निशाना, गाजा रिपोर्ट को खारिज किया; एक दिन में 150 हमले, हालात बिगड़े

तेल अवीव संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट को इजरायल ने खारिज कर दिया है, जिसमें 'फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार' का आरोप लगाया गया था। इजरायल ने इसे 'विकृत और झूठा' करार दिया और लेखकों को 'हमास प्रॉक्सी' बताकर खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र जांच आयोग की 72 पृष्ठों की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल गाजा में नरसंहारकारी कृत्य कर रहा है। इजरायल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह रिपोर्ट पूरी तरह से हमास के झूठ पर आधारित है, जिसे दूसरों ने दोहराया और प्रचारित किया। इजरायल इस विकृत और झूठी रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से खारिज करता है और इस जांच आयोग को तत्काल समाप्त करने की मांग करता है। मंत्रालय ने आयोग के लेखकों पर यहूदी-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि तीनों सदस्यों ने जुलाई में अपने इस्तीफे की घोषणा की थी, जबकि अध्यक्ष नवी पिल्लै का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। इजरायल विदेश मंत्रालय ने क्या कहा? विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि इजरायल नागरिक हताहतों से बचने की कोशिश करता है और हमास पर गैर-लड़ाकों को खतरे में डालने का आरोप लगाया। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट के झूठ के विपरीत, हमास ने ही इजरायल में नरसंहार की कोशिश की, 1200 लोगों की हत्या की, महिलाओं के साथ बलात्कार किया, परिवारों को जिंदा जलाया और हर यहूदी को मारने के अपने लक्ष्य की खुलेआम घोषणा की। इजरायली विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को झूठे दावों की पुनरावृत्ति बताकर खारिज किया, जिन्हें स्वतंत्र शोध, जिसमें सितंबर की शुरुआत में जारी एक अध्ययन शामिल है, पहले ही खारिज किया जा चुका है। बार-इलान विश्वविद्यालय के बेगिन-सादात सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि नरसंहार के दावे त्रुटिपूर्ण आंकड़ों पर आधारित हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करते हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र आयोग ने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल में हुए हमले क्रूर युद्ध अपराध थे, लेकिन इनसे इजरायल के अस्तित्व को कोई खतरा नहीं था। इजरायल अपनी आबादी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन इसके तरीकों में यह तथ्य ध्यान में रखना होगा कि उसने बलपूर्वक फिलिस्तीनी क्षेत्र पर कब्जा किया है और अवैध रूप से बस रहा है, जिससे फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का हनन हो रहा है। गाजा में धमाकों के बीच गुजरी रात; 4 लाख भागे इजरायल की ओर से गाजा पर लगातार भीषण हमले जारी हैं।  रात को इजरायल ने कुल 50 हमले गाजा पर किए हैं। इसके साथ ही बीते एक दिन के अंदर इजरायल ने गाजा पर 150 से ज्यादा हमले किए हैं। हालात ऐसे हैं कि गाजा से कुछ दिनों के अंदर ही 4 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। गाजा की आबादी 10 लाख के करीब थी और वहां से लगभग 4 लाख लोग पलायन कर गए हैं। स्पष्ट है कि करीब 40 फीसदी आबादी गाजा से पलायन कर चुकी है। इजरायल डिफेंस फोर्सेज की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बीते दो दिनों के अंदर ही 150 ठिकानों पर गाजा में हमले किए गए हैं। बीती रात में ही 12 लोगों की इजरायली हमलों से मौत हो गई है। इजरायली सेना का कहना है कि उन्होंने अपने हमलों में सुरंगों को टारगेट किया है तो वहीं कई इमारतों को भी निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि इन इमारतों में हमास के आतंकी छिपे हुए थे। इजरायली सेना ने कहा कि हमारे सुरक्षा बल लगातार आतंकियों को खत्म कर रहे हैं। अब तक आतंकी संगठन के कई ढांचों को ध्वस्त किया जा चुका है। गाजा को हमास का शक्ति केंद्र माना जाता है। ऐसे में इजरायल का कहना है कि हमास को खत्म करने के लिए गाजा को टारगेट करना होगा। सोमवार से ही इजरायल की सेना ने गाजा पर जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं। इससे पहले बीते सप्ताह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला कर दिया था। इस हमले के बाद से मुसलमान देशों में गुस्सा है। मंगलवार को दोहा में 60 मुसलमान देशों की मीटिंग थी, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। इस मीटिंग में आने वाले देशों में पाकिस्तान, सऊदी अरब, ईरान, तुर्की और बहरीन जैसे मुस्लिम देश शामिल थे। इस दौरान मौजूद नेताओं ने कहा कि इजरायल के खिलाफ एकजुट होना होगा। यही नहीं पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों ने तो इस्लामिक नाटो की स्थापना की भी बात की। हालांकि किसी चीज पर सहमति नहीं बनी है बल्कि एक निंदा प्रस्ताव ही पारित किया जा सका। आरोपों पर नई बहस आयोग के तीन सदस्यों (नवी पिल्लै, क्रिस सिडोटी और मिलून कोठारी) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इजरायल-विरोधी पूर्वाग्रह के आरोपों पर नई बहस छेड़ दी है। 2014 में अमेरिकी कांग्रेस के 100 से अधिक सदस्यों ने उनके नेतृत्व की निंदा करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया कि परिषद इजरायल के प्रति पूर्वाग्रह का पैटर्न दर्शाता है और इसे मानवाधिकार संगठन के रूप में गंभीरता से नहीं लिया जा सकता। कोठारी 2022 में विवाद के केंद्र में थे, जब उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया 'काफी हद तक यहूदी लॉबी द्वारा नियंत्रित' है और इजरायल की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता पर सवाल उठाया। उनके बयान की यहूदी-विरोधी बताकर निंदा की गई। पिल्लै ने इस प्रतिक्रिया को 'दिखावा' बताकर खारिज किया और यहूदी-विरोधी चिंताओं को 'झूठ' करार दिया। सिडोटी की भी यहूदी समूहों पर यहूदी-विरोधी आरोपों को 'शादी में चावल की तरह' उछालने के लिए आलोचना हुई। 2021 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद द्वारा स्थापित इस आयोग को इजरायल और फिलिस्तीनी पक्षों द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघनों की जांच का कार्य सौंपा गया था। लेकिन इसके निष्कर्षों ने मुख्य रूप से इजरायल को निशाना बनाया, जिसके कारण यरुशलम, दुनिया भर के यहूदी संगठनों और कई पश्चिमी सरकारों ने इसकी निंदा की। यह आयोग अभूतपूर्व था, क्योंकि इसकी कोई निश्चित समाप्ति तिथि नहीं थी और यह परिषद की सर्वोच्च स्तर की जांच थी।

मध्य प्रदेश में ग्राम पंचायतों को मिला नया अधिकार, विकसित करेंगी आवासीय कॉलोनी

विदिशा  मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतें भी शहरों में गृह निर्माण मंडल और विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों की तरह आधुनिक आवासीय कालोनियां विकसित करेंगी। शुरुआत विदिशा जिले से हो रही है। स्थानीय प्रशासन ने जिले की 12 ग्राम पंचायतों के 14 गांवों को इसके लिए चिन्हित किया है। इन गांवों में कॉलोनी बनाने के लिए पंचायतों को जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गांवों में आधुनिक आवासीय कालोनियों का विचार जिला प्रशासन का है। तय हुआ कि एकीकृत टाउनशिप नीति के तहत शहरी क्षेत्रों से लगे गांवों में भी इस तरह की सुविधा विकसित की जाए। उसके बाद जिला पंचायत ने जनपद पंचायतों से ऐसे गांवों के नाम मांगे थे, जहां शासकीय भूमि उपलब्ध हो, गांव शहरी सीमा से सटे हों और क्षेत्रफल व आबादी के लिहाज से बड़े हों। इस मापदंड पर 13 गांवों की सूची बनाई गई है, जहां कालोनियां विकसित की जानी है। विदिशा से प्रायोगिक परियोजना शुरू हो रही है इन गांवों को दो एकड़ से पांच एकड़ तक की जमीन कॉलोनी विकसित करने के लिए आवंटित की गई है। जिन गांवों में ये कालोनियां बननी हैं, उनकी नजदीकी कस्बे से दूरी 500 मीटर से 10 किमी तक है। यहां कॉलोनियों के विकास की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों को दी गई है। विदिशा से यह प्रायोगिक परियोजना शुरू हो रही है, जिसमें ग्राम पंचायत प्लाट बेचेंगी। उसपर भवन निर्माण खरीददार ही करेंगे। इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी हैं। पिपलधार ग्राम पंचायत की सरपंच केसर बाई रामराज सिंह यादव का कहना है कि उनके गांव पट्टन में 0.65 हेक्टेयर जमीन कॉलोनी के लिए आवंटित हुई है। गांव बड़ा है, इस योजना से लोगों को काफी फायदा होगा, लेकिन जो जमीन आवंटित है उसके बड़े हिस्से पर अतिक्रमण है। उसे हटाना हमारे लिए बड़ी चुनौती होगा। 2000 वर्गफीट तक के भूखंड होंगे योजना के मुताबिक इन ग्रामीण कालोनियों में भूखंड का आकार 800 वर्गफीट से लेकर दो हजार वर्गफीट तक होगा। उनकी कीमत ग्राम पंचायत तय करेगी। योजनाबद्ध विकास होगा इनका विकास योजनाबद्ध होगा। सबसे पहले सड़कों का निर्माण होगा। इसके साथ ही बिजली, पानी और पार्क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसकी निगरानी जिला एवं जनपद पंचायतें करेंगी। शुरुआती विकास पंचायत के बजट से होगा और बाद में प्लाट बिकने पर विकास कार्यों की गति बढ़ाई जाएगी। इन 14 गांवों में बनेगी पहली कॉलोनी गंज पंचायत का पठारी बासौदा, ग्यारसपुर विकासखंड का खुजराहर, सिरोंज का बगरोदा, चौड़ाखेड़ी पंचायत का कमरिया, नटेरन का रुसल्ली, पट्टन और डंगरवाड़ा, कुरवाई का मेहलुआ चौराहा और पठारी, लटेरी का मुरवास तथा विदिशा विकासखंड का ढोलखेड़ी, रंगई, करैयाहवेली और आमखेड़ा हवेली। कॉलोनियों में सभी सुविधाएं दी जाएंगी     पंचायतों में कॉलोनियां बनाने के लिए शहर से सटी और बड़ी पंचायतों का चयन किया गया है। यहां शहरों की तरह बिजली, सड़क और पानी जैसी सभी सुविधाएं दी जाएंगी। भूमि आवंटित कर दी गई है और अब लेआउट डिजाइन पर काम शुरू कर दिया गया है। – ओपी सनोडिया, सीईओ, जिला पंचायत, विदिशा  

शैंपू-साबुन पर GST घटा, डव-लाइफबॉय के नए रेट जारी – जानें कितनी होगी बचत

नई दिल्ली 22 सितंबर से लागू होने वाले नए जीएसटी रेट के चलते अब हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के कई पॉपुलर प्रॉडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। दरअसल, कंपनी ने अपने इन प्रॉडक्ट्स के प्राइस में बड़ी कटौती की है। डव शैंपू, किसान जैम, हॉर्लिक्स, लक्स साबुन और लाइफबॉय साबुन जैसे प्रॉडक्ट्स की प्राइस अब 15% तक कम हो जाएगी। 22 सितंबर से ये बदलाव वाले रेट लागू होंगे। बता दें कि हाल ही में जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया था। सरकार द्वारा जीएसटी के मेथड को और भी सरल बनाने के लिए दो टैक्स स्लैब्स को इंट्रोड्यूस किया गया। पहले टैक्स स्लैब्स 5%, 12% और 18% के थे, लेकिन अब इन सभी को सिर्फ दो टैक्स स्लैब्स 5% और 18% में लाया गया। सस्ते होने वाले हैं डव शैंपू, हॉर्लिक्स और लाइफबॉय साबुन जैसे HUL के कई प्रोडक्ट्स, जानिए कितनी कम हो जाएगी कीमत ये प्रोडक्ट्स हो जाएंगे सस्ते जीएसटी में हुए इन बदलावों के चलते कई प्रॉडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। इनमें खास तौर पर फूड आइटम्स शामिल हैं। दूध, पनीर और जैम्स को जीएसटी से छूट मिली है, यानी इन पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि कुछ प्रॉडक्ट्स ऐसे हैं जिन्हें 5% टैक्स स्लैब में डाल दिया गया है। वहीं साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट जैसे प्रॉडक्ट्स पर लगने वाला 18% का टैक्स अब 5% कर दिया गया है। टैक्स कटौती से अब सीधा फायदा कंज्यूमर्स को पहुंचेगा। ऐसे में कई बड़ी कंपनियों के प्रॉडक्ट्स के रेट भी घट जाएंगे। 22 सितंबर से लागू होंगे नए रेट सरकार की ओर से 22 सितंबर से लागू होने वाले नए रेट के चलते कंपनियों को अपने पुराने बचे हुए स्टॉक की एमआरपी बदलने की इजाजत भी दी गई है। अब मैन्युफैक्चरर, पैकर्स और इंपोर्टर्स पुराने स्टॉक पर नई कीमतें स्टांप, स्टीकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग से लगा सकेंगे, जिससे मैन्युफैक्चर का स्टॉक खराब नहीं होगा। हालांकि 31 दिसंबर 2025 तक पुराना स्टॉक खत्म करना जरूरी होगा। नई कीमतों के साथ कंपनियों को अब पुराना एमआरपी दिखाना भी जरूरी होगा। कंपनी ने ये क्यों किया? इसी महीने 3 सितंबर 2025 को GST काउंसिल की 56वीं मीटिंग हुई। इस मीटिंग में सरकार ने GST को सरल बनाने का फैसला लिया। पहले टैक्स स्लैब 5%, 12% और 18% के थे, लेकिन अब 12% वाला स्लैब हटा दिया गया। इससे सिर्फ दो स्लैब 5% और 18% बचे रहेंगे। कई फूड आइटम्स जैसे UHT मिल्क, पनीर और जैम्स को या तो GST से छूट मिल गई या फिर 5% टैक्स स्लैब में डाल दिया गया। इसके अलावा साबुन, शैम्पू और टूथ पेस्ट पर GST को 18% से घटाकर 5% कर दिया है। सरकार ने साफ कहा कि ये टैक्स कटौती का फायदा कंज्यूमर्स तक पहुंचना है। इसी के चलते कंपनी ने दाम घटाने का फैसला किया है। सरकार ने कंपनियों को पुराने स्टॉक की MRP बदलने की इजाजत दी सरकार ने 22 सितंबर से लागू हो रहीं नई GST दरों से पहले सरकार ने कंपनियों को अपने पुराने बचे हुए माल (अनसोल्ड स्टॉक ) की मैक्सिमम रिटेल प्राइज (MRP) बदलने की इजाजत दे दी है। मैन्युफैक्चरर्स, पैकर्स और इम्पोर्टर्स अब पुराने स्टॉक पर नई कीमतें स्टैंप, स्टिकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग से डाल सकेंगे। भारत के कंज्यूमर अफेयर डिपार्टमेंट ने मंगलवार को आदेश जारी कर कहा कि ये अनुमति 31 दिसंबर 2025 तक या पुराना स्टॉक खत्म होने तक लागू रहेगी। नई कीमतों के साथ कंपनियों को पुराना MRP दिखना जरूरी होगा। लग्जरी आइटम्स पर ज्यादा टैक्स लगेगा लग्जरी आइटम्स और तंबाकू प्रोडक्ट्स पर अब 28% की जगह 40% GST लगेगा। मध्यम और बड़ी कारें, 350cc से ज्यादा इंजन वाली मोटरसाइकिलें इस स्लैब में आएंगे। इससे इनकी कीमतें बढ़ सकती हैं।

नायता मुंडला बस स्टैंड तैयार, इंदौर में नौलखा बस स्टैंड के स्थानांतरण का रास्ता साफ

 इंदौर  इंदौर में नायता मुंडला बस स्टैंड से बसों का संचालन अब संभव हो सकेगा। मंगलवार को हाईकोर्ट ने बस संचालकों की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे नायता मुंडला से बसों के संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। साथ ही तीन इमली बस स्टैंड को स्थानांतरित करने की याचिका भी कोर्ट ने खारिज कर दी है। अब आने वाले समय में दोनों बस स्टैंड को स्थानांतरित किया जा सकेगा। पिछले वर्ष फरवरी में क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार इंदौर संभाग ने नायता मुंडला स्थित आईएसबीटी को बस स्टैंड के रूप में अधिसूचित किया था, जबकि नौलखा बस स्टैंड को गैर अधिसूचित घोषित किया गया था। इस निर्णय के अनुसार, डबल चौकी, खातेगांव, चापड़ा, कन्नौद, नेमावर, हरदा, होशंगाबाद, बैतूल आदि शहरों के लिए बसों का संचालन नायता मुंडला से होना था, लेकिन बस संचालकों ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके कारण मामला लंबित रहा। तीन इमली से चलने वाली बसों को किया जाएगा स्थानांतरित अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद बसों को नायता मुंडला स्थानांतरित करने की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी। तीन इमली से संचालित होने वाली बसों को भी स्थानांतरित किया जाना है, लेकिन यह अभी तय नहीं है कि इन्हें नायता मुंडला भेजा जाएगा या एमआर-10 स्थित आईएसबीटी। नौलखा बस स्टैंड से प्रतिदिन 80 से अधिक बसों का संचालन होता है, जिनमें से अधिकांश बसें नेमावर रोड से होकर विभिन्न शहरों के लिए चलती हैं। सुबह से लेकर देर रात तक चलने वाली इन बसों के कारण तीन ईमली से नौलखा तक कई बार जाम की स्थिति उत्पन्न होती है, इसलिए प्रशासन ने इन्हें स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। विरोध के कारण रुकी थी प्रक्रिया जिला प्रशासन ने पिछले वर्ष नौलखा और तीन इमली बस स्टैंड को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। नायता मुंडला बस स्टैंड पर नौलखा की बसों को भेजने की तैयारी पूरी हो गई थी, लेकिन बस संचालकों के विरोध के कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया रुक गई थी। अब कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी गई है। यात्रियों का खर्च बढ़ेगा नायता मुंडला में बसों के स्थानांतरण से पहले जिला प्रशासन को लोक परिवहन की व्यवस्था करनी होगी। वर्तमान में यहां से बसों का संचालन नहीं होता है। देर रात आने वाले यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को भी सुनिश्चित करना होगा। शहर के बाहर होने के कारण यात्रियों को ऑटो से आने-जाने में अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। नोटिफिकेशन के अनुसार होगा बसों का संचालन     नोटिफिकेशन के अनुसार नौलखा से बसों का संचालन कराया जाएगा। यहां से चलने वाली बसों के लिए नायता मुंडला बस स्टैंड अधिसूचित किया गया है। – प्रदीप शर्मा, आरटीओ