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धार्मिक स्थलों की यात्रा आसान: पंजाब से स्पेशल ट्रेन की शुरुआत

पंजाब  धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वालों के लिए एक बेहद ही खास खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRCTC) ने धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा ऐलान किया है।  दरअसल, IRCTC ने चार ज्योतिर्लिंग और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी यात्रा की शुरूआत की है। भारत गौरव ट्रेन यात्रा 25 अक्तूबर से शुरू होगी जोकि अमृतसर रेलवे स्टेशन से रवानी होगी। इसका सफर कुल 9 दिन और 8 रातों का होगा। श्रद्धालुओं के लिए खुशी बात ये है कि इस धार्मिक यात्रा के दौरान चार ज्योतिर्लिंग उज्जैन महाकालेश्वर, द्वारका नागेश्वर व द्वारकाधीश मंदिर, इंदौर औंकारेश्वर, वेरावल सोमनाथ और केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के दर्शन कर सकेंगे। कौन से स्टेशनों पर होगा ठहराव मिली जानकारी के अनुसार भारत गौराव पर्यटक ट्रेन अमृतसर से रवाना होकर जालंधर, लुधियाना, चंडीगढ़, दिल्ली और रेवाड़ी से होते हुए धार्मिक स्थलों पर पहुंचेगी। 25 से यात्रा शुरू होकर 2 नवंबर को यात्रा फिर अमृतसर स्टेशन पर समाप्त होगी। कितना आएगा खर्चा जानकारी के अनुसार इस ट्रेन 640 स्लीपर क्लास सीट, 70 सीटें 3 एसी स्टैंडर्ड, 52 सीटें 2 एसी कम्फर्ट उपलब्ध है। वहीं रही बात किराए की तो इसमें सफर करने वाले यात्रियों को स्लीपर क्लास सीट के लिए 19,555 रुपए, 3 एसी स्टैंडर्ट के लिए 27,815 और 2 एसी कम्फर्ट के लिए 39,410 रुपए टिकट प्रति व्यक्ति खर्च करने होगे। सबसे बड़ी बात ये है कि, अब तक 300 से अधिक टिकटे बिक भी चुकी हैं। अगर आप भी इस यात्रा के लिए जाना चाहते हैं तो जल्दी से टिकट बुल कर लें।

ऑपरेशन सिंदूर का असर: दहशत में आतंकी सरगना, PoK से बदल रहे ठिकाने

नई दिल्ली भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 बड़े आतंकवादी ठिकाने ध्वस्त कर दिए गए थे. भारत के इस प्रहार से आतंक के आका डरे हुए हैं. लिहाजा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन विशेषकर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) ने अपनी गतिविधियों का केंद्र बदलकर PAK के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है. ये बदलाव दिखाता है कि अब वे पीओके को असुरक्षित मानते हैं. जबकि, खैबर पख्तूनख्वा उन्हें बेहतर सुरक्षा देता है, क्योंकि ये अफगान सीमा के नज़दीक है और यहां अफगान युद्ध से जुड़े पुराने जिहादी ठिकाने मौजूद हैं. जैश-ए-मोहम्मद का भर्ती अभियान खुला  14 सितंबर 2025 को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच शुरू होने से करीब 7 घंटे पहले जैश-ए-मोहम्मद ने खैबर पख्तूनख्वा के मनसेहरा ज़िले के गढ़ी हबीबुल्लाह कस्बे में खुलेआम भर्ती अभियान चलाया था. ये आयोजन दिखावे में तो देवबंदी धार्मिक सभा था, लेकिन असल में इसे जैश-ए-मोहम्मद और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) ने मिलकर आयोजित किया था. इसका असल मकसद लोगों को कट्टरपंथ की तरफ खींचना और भर्ती करना था, यानी कट्टरपंथी स्पीच देकर उनका ब्रेनवॉश करना था. मसूद इलियास कश्मीरी का भड़काऊ भाषण भारत में वांछित आतंकवादी और जैश-ए-मोहम्मद का बड़ा चेहरा मसूद इलियास कश्मीरी, जो संगठन के संस्थापक मौलाना मसूद अजहर का करीबी माना जाता है, उसने सभा में भड़काऊ भाषण दिया. उसने ओसामा बिन लादेन की तारीफ करते हुए उसे 'शोहदा-ए-इस्लाम' और 'अरब का राजकुमार' बताया. कश्मीरी ने जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा को अल-कायदा की विरासत से जोड़ते हुए खैबर पख्तूनख्वा को मुजाहिदीन की स्थायी पनाहगाह बताया. जैश का अगला ठिकाना बना पेशावर जैश अब 25 सितम्बर को पेशावर में एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहा है. इस बार जैश नए नाम अल-मुराबितून का इस्तेमाल करेगा, ताकि दुनिया की नजरों से बचा जा सके. 'अल-मुराबितून' का मतलब है इस्लाम की जमीन के रक्षक. नए ट्रेनिंग सेंटर्स का निर्माण सूत्रों ने बताया कि जैश-ए-मोहम्मद मनसेहरा में एक नया ट्रेनिंग सेंटर बना रहा है, जिसका नाम मरकाज़ शोहदा-ए-इस्लाम रखा गया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस कैंप का दायरा बढ़ा है, इसका मकसद इस इलाके में जैश की भर्ती और ट्रेनिंग के कामों को सुगम बनाना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक हिज्बुल मुजाहिदीन के पूर्व पाकिस्तानी कमांडो खालिद खान के नेतृत्व में खैबर पख्तूनख्वा के निचले दीर के बंदाई इलाके में 'HM313' नाम से नया प्रशिक्षण केंद्र बन रहा है. ये कैंप पीओके में तबाह हुए शिविरों की जगह लेना चाहता है. साथ ही कश्मीर में विचारधारा और सीमा पार योजना बनाने का एक मंच बनेगा. जिहादी नेटवर्क का फायदा उठा रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन का खैबर पख्तूनख्वा में एक्टिव होना क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है. ये दिखाता है कि ये आतंकी संगठन धार्मिक और राजनीतिक सभाओं के बहाने लोगों की भर्ती को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं और इलाके में पहले से मौजूद जिहादी नेटवर्क का फायदा उठा रहे हैं, इन गतिविधियों से यह सवाल भी उठता है कि क्या पाकिस्तानी सरकार सच में आतंकवाद के खिलाफ सख्त है और क्या वह क्षेत्रीय स्थिरता लाने में ईमानदारी से काम कर रही है. पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाना जरूरी पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों का ये रणनीतिक बदलाव भारत और पूरी दुनिया के लिए बड़ी चिंता है. जैश-ए-मोहम्मद के खुलेआम भर्ती अभियान और हिज्बुल मुजाहिदीन के नए शिविर साफ दिखाते हैं कि पाकिस्तान अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठा रहा. इसलिए, पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए रखना जरूरी है, ताकि वह इन संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी पाकिस्तान को उसके कामों के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह आतंकवाद रोकने और क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए गंभीर कदम उठाए. खैबर पख्तूनख्वा (KPK) क्यों चुना गया? – PoK पर अब भारत की सीधी मार पड़ रही है. – KPK पहाड़ी इलाका है, अफगानिस्तान के पास है और पहले से आतंकी छिपने की जगहें हैं. – यहां आतंकियों को ज़्यादा सुरक्षित महसूस होता है.

रायपुर: पीएम सूर्यघर योजना से हर घर में पहुंचेगी सूरज की रोशनी, बिजली बनेगी, ज़िंदगी बदलेगी

रायपुर देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक स्वच्छ, सस्ती एवं निरंतर बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल नागरिकों को बिजली बिल से हमेशा के लिए राहत दिला रही है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी योगदान दे रही है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में अत्यंत प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है।  देश की “पावर कैपिटल” कहलाने वाले कोरबा जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का प्रभाव विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक परिवार इस योजना का लाभ उठाकर हर महीने बचत कर रहे हैं और बिजली बिल आने जाने के झमेले से मुक्त हो रहे हैं। इन्हीं में से एक प्रेरक उदाहरण हैं नकटीखार, कोरबा निवासी रंजीत कुमार है, जिन्होंने अपने परिवार के जीवन में ऊर्जा क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है।  रंजीत कुमार जो एसईसीएल, कुसमुंडा में डंपर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, मेहनतकश व्यक्ति हैं।  हर महीने आने वाला बिजली बिल, परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई के खर्चों के बीच बिजली बिल अक्सर उनके बजट को बिगाड़ देते थे। यही कारण था कि जब प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत आवेदन कर इसका लाभ उठाने का निश्चय किया। दो माह पहले आवेदन करके उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। जिसकी कुल लागत लगभग 2 लाख 10 हजार रुपए रही, 78 हजार रुपए केंद्र सरकार की सब्सिडी पहले ही मिल चुकी है। शेष राशि में उन्होंने सस्ती व आसान दर पर लोन लेकर तथा कुछ नकद भुगतान देकर किया। सिर्फ कुछ हफ्तों में ही यह निवेश उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। पहले जहां उनके घर का बिजली बिल हर महीने एक हजारों रुपए तक पहुँच जाया करता था, वहीं अब सौर ऊर्जा से चल रहे घर का मासिक बिल मात्र 130 रुपए आ रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण की भी बड़ी मित्र है। सौर ऊर्जा से न केवल कोयला और डीज़ल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। कोरबा जैसे औद्योगिक जिले में, जहाँ कोयला आधारित बिजली उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, वहां सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान है। परिवारों को बिजली बिल से मुक्तिमिल रही है, घरों में रोशनी और उपकरणों का संचालन संभव हो रहा है, लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।  कुमार और उनके परिवार ने बताया “अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। सौर पैनल ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और घर के उपकरण भी बिना रुकावट चलते हैं।  आज उनका घर न केवल रोशन है बल्कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक आदर्श भी बन गया है। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के सशक्त क्रियान्वयन से आमजन का जीवन बदल रहा है। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो अब तक बिजली का स्थाई उपाय ढूंढ रहें थे। पीएम सूर्यघर योजना ने उन्हें आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की राह दिखाई है।

क्या स्मार्टफोन का युग खत्म? ज़ुकरबर्ग का चौंकाने वाला डिवाइस आएगा आंखों के पास, काम करेगा बिना टच के!

नई दिल्ली  स्मार्टफ़ोन की जगह फ्यूचर में कौन सा डिवाइस लेगा? कुछ समय से ऐसी डिस्कशन देखने को मिल रही है. आपको याद हो तो हाल ही में Humane AI Pin लॉन्च किया गया था. इसे ऐपल के ही एक फॉर्मर एग्जिक्यूटिव ने लॉन्च किया था. इस AI डिवाइस की हाइप भी काफी थी, लेकिन ये फ्लॉप हो गया.  स्मार्ट ग्लासेज का कॉन्सेप्ट नया नहीं है, लेकिन पिछले दो सालों में AI पावर्ड स्मार्ट ग्लासेज का क्रेज़ तेजी से बढ़ा है. ख़ास तौर पर MetaRayban स्मार्ट ग्लासेज दुनिया भर में हॉट सेलिंग रहे हैं. मेटा को लग रहा है कि कंपनी स्मार्ट ग्लासेज के ज़रिए पूरा इकोसिस्टम तैयार कर सकती है.  Meta CEO मार्क जकरबर्ग ने हाल ही में कहा कि फ्यूचर में जिनके पास स्मार्ट ग्लासेज नहीं होंगे वो पीछे रह जाएंगे. ज़ाहिर है ये बात उनके प्रचार का हिस्सा है, लेकिन ये कई मायनों में सही भी है.  Meta Connect इवेंट में मार्क जकरबर्ग ने लेटेस्ट जेनेरेशन Meta Rayban Display लॉन्च किया है. ये मौजूदा Meta RayBan स्मार्ट ग्लासेज से काफी अलग हैं और इसमें इनबिल्ट स्क्रीन भी है जहां आप वीडियोज भी देख सकते हैं और यहां लाइव नेविगेशन भी दिख सकता है. इसे ऑग्मेंटेड रिएलिटी (AR) ग्लास कहा जा सकता है.  Meta ने कुछ समय पहले Orion Glasses भी अनवील किया था जो Snapchat के ऑग्मेंटेड रिएलिटी ग्लासेज का राइवल है. हालांकि ये अभी बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है. लेकिन कंपनी इसपर काफी अग्रेसिवली काम कर रही है. कुछ सालों में इसका फाइनल बिल्ड किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो Apple Vision Pro जैसे डिवाइसेज के लिए बड़ा खतरा होगा. क्योंकि Apple Vision Pro काम तो बेहतर करता है, लेकिन ये काफी भारी है और लंबे समय तक पहन कर रहने में लोग कंफर्टेबल नहीं हो सकते.  स्मार्ट ग्लासेज़ का मार्केट मार्केट में जो भी मौजूदा स्मार्ट ग्लासेज हैं उनमें स्पीकर्स, माइक्रोफोन्स और कैमरे दिए गए हैं, लेकिन डिस्प्ले नहीं होता है. हाल ही में Halliday Glasses लॉन्च हुए थे जिनमे एक व्यू फ़ाइंडर दिया गया है. एक ग्लास में आप स्क्रीन देखने लगते हैं, लेकिन Meta का RayBan Display में ग्लास पर ही स्क्रीन एंबेड कर दी गई है.  आपको ऐसा लग रहा होगा कि चश्मे में डिस्प्ले दी गई है तो इससे काफी डिस्ट्रैक्शन होगा. यानी आप सामने देखेंगे और डिस्प्ले ऑन हो गई तो मुश्किल हो जाएगी. लेकिन ऐसा नहीं है.  इससे आपको विजन ब्लॉक नहीं होगा, क्योंकि  आपको ऐसा लगेगा कि आपके सामने डिस्प्ले प्रोजेक्ट की जा रही है. अगर आपने कार में HUD देखा है तो ये कमोबेश वैसा ही लगता है. यानी स्क्रीन आपसे दूर दिखेगी और पेरिफेरल विजन में रहेगी.  स्मार्टफोन को रिप्लेस कर पाएगा? स्मार्ट ग्लासेज के साथ बड़ा पॉजिटिव प्वाइंट ये है कि आप इसे पहन कर अनकंफर्टेबल नहीं होते जैसे Vision Pro या Meta Quest जैसे ऑग्मेंटेड रिएयलिटी हेडसेट को पहन कर होते हैं. अमूमन ऑग्मेंटेंड रियलिटी हेडसेट काफी भारी होते हैं. अगर Meta या कोई भी कंपनी Apple Vision Pro जैसे तमाम फीचर्स अगर स्मार्ट ग्लासेज में ही फिट करने में पूरी तरह सफल रहती है तो ये एक बड़ा ब्रेकथ्रू होगा. फिलहाल कुछ सालों तक स्मार्टफोन को पूरी तरह रिप्लेस करने वाला कोई डिवाइस नहीं आएगा, लेकिन वेयरेबल कैटिगरी के स्मार्ट गाल्सेज में पूरी पोटेंशियल है कि ये स्मार्टफोन्स पर लोगों की निर्भरता कम कर दें. हालांकि ऐपल के पूर्व चीफ डिजाइनर और OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन एक AI डिवाइस पर काम कर रहे हैं, इसलिए ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या वो डिवाइस स्मार्टफोन को रिप्लेस कर पाएगा?  Meta RayBan Display ग्लासेज से आप क्या-क्या कर सकते हैं? पहले वाले MetaRayban वेरिएंट्स को आप बोल कर कमांड दे सकते थे, लेकिन यहां आप देख कर जेस्चर के ज़रिए कमांड दे सकते हैं. पहनने के बाद आपको ऐसा लगेगा कि आपसे कुछ फ़ीट की दूरी पर डिस्प्ले है जिससे आपका विजन भी ब्लॉक नहीं होगा. आप इसे चाहें तो ऑफ भी कर सकते हैं और इसे नॉर्मल सनग्लासेज की तरह यूज़ कर सकते हैं.  आपके सामने हर समय एक फ़्लोटिंग स्क्रीन दिखेगी जिसे आप कमोबेश फ़ोन की तरह ही यूज़ कर पाएंगे. कोई दूसरा ये डिस्प्ले नहीं देख पाएगा, सिर्फ आपको ही ये स्क्रीन दिखेगी.  आप चश्मे में ही शॉर्ट वीडियोज या रील्स स्क्रॉल कर सकते हैं जैसे फ़ोन पर करते हैं. ऑडियो क्वॉलिटी भी अच्छी होती है, इसलिए सिर्फ आपको ही ऑडियो भी सुनाई देगी, पास वालों को अंदाजा भी नहीं होगा कि आप चश्मे में ही वीडियो देख रहे हैं. कॉलिंग, मैसेजिंग से लेकर म्यूजिक का एक्स्पीरिएंस भी इसमें मिलता है.  MetaRaban Display के साथ एक न्यूरल रिस्ट बैंड भी आता है. इसके जरिए आप हैंड जेस्चर यूज करके स्क्रीन पर नेविगेशन कर सकते हैं, यानी कोई भी ऑप्शन को सेलेक्ट कर सकते हैं या बंद करके कुछ नया ओपन कर सकते हैं.  मैप्स रियल टाइम चलता है, इसलिए आपको फ़ोन निकालने की ज़रूरत नहीं होगी. स्मार्ट ग्लास की ही स्क्रीन में आपको रियल टाइम नेविगेशन मिल जाएगा.  ऐसे कई फीचर्स हैं जो यूजफुल हैं, लेकिन अभी ये परफ़ेक्शन से दूर हैं. लेकिन MetaRayban Display के बाद ये तो साफ है कि स्मार्ट ग्लासेज फ्यूचर में एक जरूरी गैजेट बन सकते हैं. इतना ही नहीं इससे स्मार्टफोन की डिपेंडेंसी भी कम हो सकती है.  फ़िलहाल ये अर्ली वर्जन्स हैं, लेकिन कुछ सालों के बाद स्मार्ट ग्लासेज के फीचर्स परफ़ेक्शन की तरफ़ जाएंगे और ये प्रैक्टिकल भी होंगे. दूसरी कंपनियां भी लगातार स्मार्ट ग्लासेज पर काम कर रही हैं. 

8589 पदों पर पुलिस भर्ती: परीक्षा से पहले होगी कड़ी जांच, टैटू वाले candidates रखें सतर्क

भोपाल  मध्य प्रदेश में 2022 में पटवारी भर्ती परीक्षा और 2023 में हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर बड़े सवाल उठे थे. एक बार फिर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा 8589 पदों पर पुलिस भर्ती कराई जा रही है. पिछली परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी से बड़ा सबक लेते हुए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल इस बार खास सर्तकता बरत रहा है. गड़बडी रोकने के लिए अभ्यार्थियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना होगा. मुन्नाभाईयों पर नकेल कसने के लिए इस बार सिर्फ आधार वेरिफिकेशन और थंप इंप्रेशन से काम नहीं चलेगा, बल्कि एआई तकनीक से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान भी किया जाएगा. उधर फिजिकल के लिए भी पुलिस मुख्यालय नियम तैयार कर रहा है. इस बार शरीर पर टैटू बनवाने वालों को भर्ती प्रक्रिया से अलग किया जा सकता है. अब सिर्फ फिंगर प्रिंट से नहीं चलेगा काम मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में सिर्फ आधार कार्ड और फिंगर प्रिंट मिलान से ही काम नहीं चलेगा. इसके अलावा कई सुरक्षा फीचर्स का उपाए इस बार किया जाएगा. मध्य प्रदेश में 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा से सबक लेकर यह किया गया है. 2023 में पुलिस भर्ती परीक्षा में मुन्नाभाई फिल्म की तर्ज पर भर्ती में फर्जीवाड़ा किया गया था. अभ्यर्थियों ने अपने स्थान पर मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठाकर एग्जाम पास किया था. इस परीक्षा में शामिल होने वाले एग्जाम सेंटर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों के थंब इंप्रेशन का मिलान किया गया था, लेकिन कई अभ्यर्थियों ने सांठगांठ कर आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट ही अपडेट करा लिए और अपने स्थान पर मुन्नाभाई को परीक्षा केन्द्र में पहुंचा दिया. हालांकि जब ज्वाइनिंग का मौका आया तो फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया. 2022 में हुई पटवारी परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे. इसमें मेरिटी लिस्ट के 10 में से 7 टॉपर एक ही सेंटर से परीक्षा देने वाले थे. दो परीक्षाओं के बाद यह लिया निर्णय मध्य प्रदेश में अब हो रही 8589 पदों पर भर्ती को लेकर एमपी कर्मचारी चयन मंडल ने 3 बड़े बदलाव किए हैं, ताकि मुन्नाभाईयों को परीक्षा में बैठने से रोका जा सके. पुलिस भर्ती परीक्षा में इस बार सिर्फ आधार कार्ड, फिंगर प्रिंट मिलान से काम नहीं चलेगा. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले अभ्यर्थियों का आधार कार्ड में लगाए गए फोटो से अभ्यर्थियों के चेहरे का मिलान किया जाएगा. इसके लिए सभी सेंटर पर फेस रिकग्नीशन कैमरे लगाए जाएंगे. परीक्षा सेंटर पर पहुंचने वाले सभी अभ्यर्थियों के फिंगर प्रिंट का मिलान तो होगा ही, साथ ही अभ्यर्थियों की आंखों की पुतली के पैटर्न का भी मिलान करेगा, ताकि यदि कोई फिंगर प्रिंट चैंज भी करा ले, तो आंखों की पुतली से उसे पकड़ा जा सके. इस बार परीक्षा सेंटर बनाने में भी विशेष सर्तकता बरती जा रही है. इस बार 11 प्रमुख शहरों में ही परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. भोपाल, इंदौर, जबलपुर, खंडवा, नीमच, रतलाम, रीवा, सागर, सतना, सीधी और उज्जैन में ही ऑनलाइन परीक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. पूर्व में विवादित हो चुके शहरों में परीक्षा केन्द्र नहीं बनाए गए हैं. मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के संचालक साकेत मालवीय कहते हैं कि "परीक्षा पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए इस बार आंखों की पुतली की स्कैनिंग और एआई के उपयोग जैसे कई कदम उठाए जा रहे हैं." टैटू बनवाने से बचें अभ्यर्थी उधर पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट से भी गुजरना होगा. इसमें अभ्यर्थियों का मेडिकल टेस्ट और फिजिकल टेस्ट भी होगा. इसमें ऐसे उम्मीदवारों को परेशानी आ सकती है, जिनके शरीर पर किसी तरह के फैशनेबल टैटू बने होंगे. आमतौर पर नवरात्री में गरबा जैसे आयोजन में हिस्सा लेने के पहले युवा शरीर पर आकर्षक टैटू बनवा लेते हैं. पुलिस भर्ती में सिलेक्शन में ऐसे टैटू परेशानी बन सकते हैं. एडीजी चयन एवं भर्ती शाहिद अबसार कहते हैं कि "सेना में आमतौर पर नियम होता है कि शरीर पर किसी तरह का टैटू आदि नहीं होना चाहिए, जो उनके शिष्टाचार के नियम को तोड़े. मध्य प्रदेश पुलिस में भी शिष्टाचार का विशेष ध्यान रखा जाता है. पुलिस भर्ती को लेकर शासन स्तर से इसको लेकर नियम आए तो ऐसे अभ्यर्थियों को समस्या हो सकती है."

इतिहास रचते हुए बलौदाबाजार के युवाओं ने की बाइक से चारधाम यात्रा, कहा – हर किसी को करनी चाहिए ऐसी सफर

बलौदाबाजार  कभी केवल आस्था का केंद्र समझी जाने वाली चारधाम यात्रा अब साहस और रोमांच का प्रतीक भी बन रही है. बलौदाबाजार नगर के दो युवाओं ने साहस और आस्था का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा दिया है. नगर के शालीन साहू और हरि पटेल ने बाइक से 16 दिनों में करीब 4400 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी कर उत्तराखंड स्थित चार धाम – केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन किए. इससे पहले भी ये दोनों युवा अपनी साहसिक यात्राओं के लिए जाने जाते रहे हैं. वे उत्तरप्रदेश के प्रयाग कुंभ, महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और आंध्रप्रदेश के श्री शैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की लंबी यात्राएं बाइक से पूरी कर चुके हैं. सोनपुरी मंदिर से शुरू हुई यात्रा: दोनों युवाओं ने अपनी यात्रा 2 सितम्बर को बलौदाबाजार के सोनपुरी स्थित श्री सिद्धेश्वर मंदिर से आशीर्वाद लेकर शुरू की. रास्ते में छत्तीसगढ़ के मुंगेली, पंडरिया, मध्यप्रदेश के शहडोल और कटनी होते हुए उत्तरप्रदेश के कई शहरों को पार किया. इसके बाद हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचे और वहां से उत्तराखंड के सोन प्रयाग तक बाइक से सफर किया. केदारनाथ की यात्रा उन्होंने पैदल पूरी की, क्योंकि यहां तक पहुंचने के लिए करीब 22 किलोमीटर दुर्गम चढ़ाई करनी पड़ती है. बाकी धामों के दर्शन बाइक से ही किए. बलौदाबाजार के युवाओं ने रचा इतिहास  16 दिन, 4400 किलोमीटर और रोज 200 से 250 किलोमीटर का सफर: इस यात्रा में दोनों युवाओं ने करीब 16 दिन में 4400 किलोमीटर की दूरी तय की. रोजाना लगभग 200 से 250 किलोमीटर बाइक चलाकर वे आगे बढ़ते थे. सुबह 8 बजे यात्रा शुरू होती, दोपहर में भोजन और विश्राम के लिए रुकते और शाम तक शिविर डालकर विश्राम करते. यात्रा के दौरान उनके पास स्वयं का टेंट और भोजन बनाने का सामान और बाकी जरूरत के सामान थे. वे जहां रुकते, वहीं टेंट लगाकर रात बिताते और खुद ही भोजन तैयार करते. बाइक से 4400 किलोमीटर का सफर "चलचित्र देखने जैसी नहीं, उसका हिस्सा बनने जैसी होती है यात्रा": यात्रा के अनुभव साझा करते हुए शालीन साहू ने कहा,"जब हम किसी यात्रा पर बाइक से निकलते हैं तो वह सिर्फ देखने भर की चीज नहीं रहती, बल्कि हम खुद उस यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. उसका रोमांच और आनंद बिल्कुल अलग होता है. चारधाम यात्रा का सबसे खास अनुभव यह है कि यहां आप एक साथ भारत के सभी मौसम – गर्मी, सर्दी और बरसात का एहसास कर पाते हैं." बाइक से चारधाम यात्रा  युवाओं के लिए संदेश: शालीन साहू ने युवाओं से आह्वान किया कि भारत जैसे आध्यात्मिक देश में ऐसी साहसिक यात्राएं करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यात्रा सिर्फ दर्शन नहीं, बल्कि आत्म अनुशासन, साहस और धैर्य सिखाती है. युवाओं को इस तरह की यात्राओं के लिए आगे आना चाहिए.

भोपाल में 26 सितंबर से शुरू होगा विज्ञान मेला, ISRO निदेशक देंगे युवाओं को खास क्लास

भोपाल राजधानी भोपाल में 12 वें विज्ञान मेले का आयोजन किया जा रहा है. इसमें पहली बार राजधानी के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी आयोजन में पार्टनर बनाया गया है. अब तक इसका आयोजन विज्ञान भारती और मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में किया जाता था. लेकिन इस बार बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को भी शामिल किया गया है. इसरो निदेशक से संवाद करेंगे युवा वैज्ञानिक मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक अनिल कोठारी ने बताया कि, ''इस बार विज्ञान मेला में जो भी बच्चे सम्मिलित होंगे, उनको देश और प्रदेश के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बात करने का मौका मिलेगा.'' कोठारी ने बताया कि, ''अभी इसरो के निदेशक डॉ. वी. नारायणन ने इस संवाद में शामिल होने की सहमति दी है. इनके अलावा भोपाल में भी 16 शोध संस्थान हैं, उनके वैज्ञानिक भी संवाद में शामिल होंगे.'' 4 दिन तक बीयू परिसर में लगेगा मेला विज्ञान की नवीनतम उपलब्धियों और नवाचारों का भव्य विज्ञान मेला का आयोजन किया जा रहा है. बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) के मैदान एवं ज्ञान विज्ञान भवन परिसर में 12वां विज्ञान मेला 26 से 29 सितंबर तक आयोजित होगा. इस आयोजन में देश के विभिन्न अंचलों से विज्ञानी, शोधकर्ता, विद्यार्थी और शिक्षक शामिल होंगे. इस मेले का उद्देश्य नवाचार और संवाद के माध्यम से समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत करना है. विज्ञान मेले में ये रहेगा खास इस आयोजन में प्रमुख आकर्षण अत्याधुनिक विज्ञान प्रदर्शनी, टेक्नोलॉजी शो और इनोवेशन स्टॉल होंगे. इसमें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थान इसरो, एनटीपीसी, एम्प्री सहित अन्य सस्थानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसमें सरकारी, निजी, गैर सरकारी संगठन, संस्थान, कंपनियां, सामाजिक संगठन और स्कूल-कालेज सक्रिय रूप से भाग लेंगे. पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. इच्छुक प्रतिभागी निर्धारित पोर्टल पर पंजीयन कर सकते हैं. कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे इस विज्ञान मेले में कार्यशालाएं, व्याख्यान और विशेष सत्र होंगे. नवाचार संगम में कृषि, पर्यावरण से संबंधित सामाजिक समस्याओं पर तकनीकी समाधान के नवाचार पर आधारित इस प्रतियोगिता में आमंत्रित किए गए हैं. इसमें 315 पंजीकरण हुए हैं. वहीं ज्ञान सेतु में विज्ञान शिक्षक कार्यशाला, उपस्थित विज्ञान शिक्षकों को विज्ञान प्रयोग किट का वितरण किया जाएगा. वहीं भारतीय ज्ञान परंपरा संगोष्ठी में विविध राष्ट्रीय एवं राज्य के शोध एवं शिक्षा संस्थानों से करीब 200 विज्ञानी एवं प्राध्यापक रहेंगे. इस गोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा-राष्ट्रीय प्रकोष्ठ के संयोजक आईआईटी इंदौर के प्रोफेसर गंटी सूर्यनारायण मूर्ती का मार्गदर्शन भी मिलेगा. सीधा संवाद कार्यक्रम में 300 विद्यार्थी प्रतिदिन विज्ञानियों से संवाद का अवसर पाएंगे. इसके अलावा स्कूल और कॉलेज विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक एवं विशेष प्रस्तुतियां होंगी.  

भोपाल मेट्रो का किराया तय: ₹20 से ₹80 के बीच, शुरुआती 7 दिन मुफ्त यात्रा और 3 महीने तक डिस्काउंट

भोपाल  भोपाल में अक्टूबर से लोग मेट्रो ट्रेन में सफर कर सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो को हरी झंडी दिखाने राजधानी आ सकते हैं। इससे पहले डिपो और गाड़ी को देखने के लिए कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की एक टीम 24 सितंबर को भोपाल पहुंचेगी।  मेट्रो की किराया सूची पर भी मंथन किया जा रहा है। अफसरों की मानें तो 7 दिन तक लोग मेट्रो में फ्री सफर कर सकेंगे। वहीं, 3 महीने तक टिकट पर 75%, 50% और 25% की छूट दी जाएगी। छूट खत्म होने के बाद सिर्फ 20 रुपए में मेट्रो का सफर किया जा सकेगा। इसका अधिकतम किराया 80 रुपए होगा। 31 मई को इंदौर में चलाई गई मेट्रो के लिए भी यही मॉडल रहा था। भोपाल में ऑरेंज लाइन के पहले फेज में मेट्रो सुभाषनगर से एम्स तक करीब 6 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। दूसरा फेस सुभाषनगर से करोंद तक है। हालांकि, इसका काम अगले 2 से 3 साल में पूरा हो सकेगा। 15 दिन में काम पूरा करने का टारगेट अगला स्टेशन एम्स है। दरवाजे बाईं तरफ खुलेंगे। कृपया, दरवाजों से हटकर खड़े हों…इस तरह का अनाउंसमेंट आपको अक्टूबर में सुनाई देने लगेगा। मेट्रो के ट्रायल रन के बीच कमर्शियल रन शुरू होगा। हालांकि, अभी एम्स, अलकापुरी और डीआरएम ऑफिस स्टेशन पर गेट लगाने समेत अन्य काम किए जा रहे हैं। इन्हें अगले 15 दिन में पूरा करने का टारगेट है। 30 से 80 किमी प्रति घंटा रहेगी मेट्रो की स्पीड भोपाल के सुभाष नगर से रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (RKMP) और इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर तक मेट्रो कोच को ट्रैक पर दौड़ाकर ट्रायल रन किया जा रहा है। ट्रायल रन में न्यूनतम 30 और अधिकतम 80 किमी प्रतिघंटा रफ्तार रखी जा रही है। बीच-बीच में 100 से 120 किमी की रफ्तार से भी मेट्रो दौड़ाई जा रही है। सिग्नल लग चुके हैं। इनकी टेस्टिंग भी हो रही है। ट्रेन की तर्ज पर मेट्रो में भी टिकट लेनी पड़ेगी मेट्रो का टिकट सिस्टम ऑनलाइन न होकर मैन्युअल ही रहेगा। जैसे आप ट्रेन में टिकट लेकर सफर करते हैं, वैसे ही मेट्रो में भी कर सकेंगे। इंदौर में अभी यही सिस्टम है। भोपाल और इंदौर मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगाने वाली तुर्किए की कंपनी 'असिस गार्ड’ से काम छिनने और नई कंपनी के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू किए जाने से यह स्थिति बनेगी। बता दें कि असिस गार्ड का मामला पिछले 4 महीने से सुर्खियों में था। आखिरकार अगस्त में असिस गार्ड का टेंडर कैंसिल कर दिया गया। नई कंपनी के लिए टेंडर भी कॉल किए हैं। इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन महीने का वक्त लग सकता है। मैन्युअल टिकट ही एक मात्र ऑप्शन अफसरों ने बताया कि असिस गार्ड कंपनी इंदौर में स्टेशनों पर भी सिस्टम लगा रही थी, लेकिन विवाद के बाद इंदौर में मैन्युअल टिकट ही ऑप्शन बचा था। पिछले साढ़े 3 महीने से इंदौर में ट्रेन जैसा ही सिस्टम है। इसमें मेट्रो के कर्मचारी ही तैनात किए गए हैं। यही ऑप्शन अब भोपाल मेट्रो के लिए भी बचा है। दरअसल, 'असिस गार्ड’ के जिम्मे ही सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम था। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करती। अब अनुबंध खत्म होने पर नई कंपनी काम करेगी, लेकिन उसे टेंडर और फिर अन्य प्रक्रिया से गुजरने में समय लगेगा। इसलिए मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल में भी मैन्युअली टिकट सिस्टम ही लागू कर सकता है। अफसरों के अनुसार, मैन्युअली सिस्टम के लिए अमला तैनात किया जा रहा है।

अपने ही गढ़ में डर से जी रहे माओवादी, जानिए वो 5 बड़े कारण जिन्होंने तोड़ दिया नक्सलियों का हौसला

रायपुर  छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था लेकिन अब यहां फोर्स की गतिविधियां बढ़ गई हैं। फोर्स नक्सलियों के उन ठिकानों में पहुंच गई है जिसे सबसे सुरक्षित माना जाता था। जिसके बाद माओवादी संगठन बैकफुट पर हैं।  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने को लेकर लेटर लिखा है। यह लेटर CPI (माओवादी) के द्वारा जारी किया गया है। जो लेटर सामने आया है उस लेटर के सत्यता की जांच की जा रही है। आइए जानते हैं वो पांच कारण जिस कारण से नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया है। ताबड़तोड़ एनकाउंटर से टूटी कमर छत्तीसगढ़ में बीते डेढ़ सालों में सुरक्षाबल के जवानों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। सुरक्षाबल के जवानों बस्तर और नक्सल प्रभावित जिलों में लगातार एनकाउंटर कर रहे हैं। एनकाउंटर के कारण नक्सलियों की रीढ़ टूट गई है। सुरक्षाबल के जवान केवल बस्तर ही नहीं उस सभी जिलों में कार्रवाई कर रहे हैं जहां नक्सली गतिविधियों की जानकारी मिल रही हैं। छत्तीसगढ़ में इस साल अलग-अलग मुठभेड़ों में 244 नक्सली मारे जा चुके हैं। इनमें से 215 नक्सली बस्तर संभाग में मारे गए। जबकि 27 गरियाबंद जिले में मारे गए। इसके अलावा दुर्ग संभाग के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में दो नक्सली मारे गए हैं। आपूर्ति को किया प्रभावित छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के उन ठिकानों पर भी धावा बोला जो उनके लिए सुरक्षित माने जाते हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों की आपूर्ति को प्रभावित किया है। जिस कारण से नक्सली संगठनों तक हथियार और राशन नहीं पहुंच पा रहा है। सुरक्षाबलों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद किया है। हथियारों की बरामदगी माओवादियों के खिलाफ बड़ा झटका मानी जा रही है। जवानों ने माओवादियों द्वारा छिपाए गए हथियारों, विस्फोटक सामग्री और रसद के बड़े डंप का पता लगाकर उन्हें जब्त किया है। जवानों ने नक्सलियों के ठिकानों से बीजीएल लांचर, मजल लोडिंग बंदूक, बीजीएल सेल, बैरल पाइप, बैटरी, इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, डायरेक्शनल माइंस, पिठ्ठू बैग, बीजीएल पोच, माओवादी वर्दी, केरिपु पैटर्न की कॉम्बैट ड्रेस, बेल्ट, बेडशीट, माओवादी साहित्य, पटाखे और राशन सामग्री बरामद की है। नियद नेल्लानार योजना का प्रभाव छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जहां सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के साथ सीधे तौर पर मुकाबला कर रहे हैं वहीं, सरकार भी रणनीति तौर पर बड़ी तैयारी कर रही है। नक्सल प्रभावित गांवों में विकास पहुंचाने के लिए सरकार ने नियद नेल्लानार योजना की शुरुआत की है। इस योजना का लाभ बस्तर जिले के नक्सल प्रभावित लोगों को मिल रहा है। जिस कारण से ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ आवाज उठाई है। जिन इलाकों में विकास नहीं पहुंचा था वहां जिला प्रशासन, सुरक्षाबल के जवान के माध्यम से सरकार योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। लोगों के आधारकार्ड बनाए जा रहे हैं। उनको अलग-अलग योजनाओं का लाभ मिल रहा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ उनका मोहभंग हुआ है और सुरक्षाबल के जवानों को सहयोग दे रहे हैं। बड़े लीडरों के मारे जाने से संगठन कमजोर छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबल के जवानों ने रणनीति बदली है। जवानों ने नक्सलियों के टॉप लीडरों को टारगेट करते हुए ऑपरेशन शुरु किए हैं। सुरक्षाबल के जवानों ने नक्सलियों के कई टॉप लीडरों को मार गिराया है। जिन लीडरों को मारा गया है उनमें माओवादी संगठन का महासचिव भी शामिल है। सुरक्षाबल के जवानों ने सेंट्रल कमेटी मेंबर मोडेम बालकृष्ण, डेढ़ करोड़ के इनामी बसवाराजू, सेंट्रल कमेटी मेंबर जयराम उर्फ चलपति, सेंट्रल रीजनल ब्यूरो रेणुका जैसे नक्सलियों का एनकाउंटर किया है। नक्सली संगठनों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पालित ब्यूरो का मेंबर और डेढ़ करोड़ रुपये का इनामी बसवाराजू मारा गया है। माओवादी विचारधारा छोड़ रहे हैं नक्सली एक तरफ जहां नक्सलियों के खिलाफ जवान सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर भी कर रहे हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को नई सरेंडर पॉलिसी के तहत नई शुरुआत करने का मौका दिया जा रहा है। जिसके बाद बस्तर इलाके में बड़े पैमाने पर नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। नक्सलियों के सरेंडर और नए कैडरों की भर्ती में कमी के कारण भी नक्सली संगठन कमजोर हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 2023 में नई सरकार के गठन के बाद से अभी तक 1704 माओवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।  

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर ग्वालियर में सड़क सुधार का बड़ा अभियान, 42 सड़कें होंगी मरम्मत

ग्वालियर शहर की बदहाल सड़कों से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम अब 32.55 करोड़ रुपये खर्च कर शहर की 42 सड़कों का कायाकल्प करने जा रहा है। इन सड़कों का निर्माण डामर और सीसी से किया जाएगा। जल्द ही इन सड़कों पर काम शुरू हो जाएगा। शहर की प्रमुख सड़कों के साथ-साथ गलीमोहल्लों की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। लोग रोज हादसों के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं। इसी बदहाल स्थिति से निपटने के लिए निगम ने यह कदम उठाया है। निगम ग्रामीण क्षेत्र में 9 किलोमीटर लंबी 8 सड़कें 7.19 करोड़ रुपये की लागत से बनाएगा। ग्वालियर विधानसभा क्षेत्र में 10.50 किलोमीटर लंबी 10 सड़कें 8.69 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगी। दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 11 किलोमीटर लंबी 10 सड़कों का निर्माण 11.26 करोड़ रुपये से किया जाएगा। वहीं पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 8 किलोमीटर लंबी 14 सड़कों को 5.41 करोड़ रुपये में डामरीकरण से बनाया जाएगा। सड़क पर ठेकेदार की जिम्मेदारी तय इन सड़कों के कार्यों की विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें सड़कों की लंबाई, उनकी संख्या और अनुमानित लागत, अधिकारी व ठेकेदार की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इतना ही नहीं, इन सड़कों को बनाने के बाद ठेकेदार द्वारा इनमें बोर्ड भी लगाया जाएगा, जिसमें उस सड़क के निर्माण की राशि, ठेकेदार और गारंटी पीरियड सहित अन्य सभी पैरामीटर को दर्शाया जाएगा। सड़क के तय मानकों की जांच के बाद ही ठेकेदार का भुगतान किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देश पर रेड, यलो और ग्रीन जोन में सड़कों को बांटने की कवायद नगर निगम ने शुरू कर दी है। गुरुवार को दक्षिण व पूर्व की 12 सड़कोंं को चिह्नित किया है। यह सड़कें पूरी तरह से खराब हैं। रेड जोन में इन्हें शामिल किया जा सकता है। इसमें हजीरा चौराहा से बिरला नगर पुल 283 लाख, हजीरा चौराहा से चार शहर का नाका 59.65, नौ नंबर पुलिया से 50 क्वाटर तक 46.16, लक्ष्मीपुरम में डामरीकरण एवं नाली निर्माण 225, पप्पू राय जिम से गिर्राज मंदिर तक डामरीकरण व नाला निर्माण 160 व शील नगर कशिश वाटिका के सामने मुख्य मार्ग तक डामरीकरण 100 लाख सहित कुल 873.81 करोड़ के विकास कार्य को लिस्ट तैयार की है साथ ही दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मांढरे की माता से कस्तूरबा तिराहा तक 3.43 करोड़, महाराज बाड़ा से सराफा होकर गस्त का ताजिया तक 1.02 करोड़, माधौगंज थाना से हेमसिंह की परेड 68 लाख रुपए खर्च होंगे। वहीं पारख जी का बाड़ा से जूता मार्केट दही मंडी 59 लाख, छप्पर वाला पुल से शान-ओ-शौकत तक 31 लाख और नहर पट्टर रोड 26 लाख सहित 6 करोड़ 32 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। हालांकि अभी यलो और ग्रीन जोन वाली सड़कों को चिह्नित करने की बात अफसरों द्वारा बताई जा रही है। ये टीम करेगी जांच सड़कों की जांच के लिए अपर आयुक्त, अधीक्षण यंत्री, सीसीओ व जेडओ लेवल पर टीम भी गठित की जाएगी, जो कि रोजाना निरीक्षण कर रिपोर्ट आयुक्त को देगी। बारिश से जर्जर सड़कें बनाने का प्रस्ताव तैयार बारिश से जर्जर हुई ग्वालियरशहर की सड़कों को बनाने के लिए 30 करोड़ से अधिक राशि का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें चारों विधानसभा की सड़कें को शामिल किया है। जल्द ही सड़कों का कार्य शुरू कराया जाएगा। शासन से भी सड़कों के संबंध में राशि की मांग की गई है। -संघप्रिय, आयुक्त नगर निगम