samacharsecretary.com

टोल पेमेंट हुआ आसान : FASTag में नई छूट, UPI से करें पेमेंट

नई दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दीवाली से पहले आम लोगों को बड़ी राहत दी है। गाड़ी में फास्टैग न होने की दशा में मालिकों को दोगुनी कीमत चुकानी होती थी। लेकिन अब इस नियम में बदलाव होने जा रहा है। नए नियम के तहत अब फास्टैग न होने पर दोगुना नहीं, बल्कि 1.25 गुना टोल शुल्क देना होगा। बड़ी बात यह है कि वाहनों में फास्टैग न होने पर भुगतान अब यूपीआई से भी किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि फास्टैग ने टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को कम किया है। 2022 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, टोल प्लाजा पर औसत वेटिंग समय अब ​​केवल 47 सेकंड है। देश में लगभग 98% राजमार्ग यूजर्स फास्टैग का उपयोग करते हैं। यह प्रणाली न केवल समय बचाती है, बल्कि टोल कलेक्शन को भी पारदर्शी बनाती है। हालांकि, कुछ लोग अभी भी फास्टैग का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे नकद भुगतान को प्राथमिकता देते हैं। इससे टोल वसूली में अनियमितता का खतरा बढ़ जाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जून 2024 में सैटेलाइट आधारित टोल कलेक्शन प्रणाली के शुभारंभ के दौरान कहा था कि नकद भुगतान से सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। फैसले से टोल वसूली में आएगी पारदर्शिता नए नियम से नकद भुगतान में कमी आएगी। यूपीआई के इस्तेमाल में बढ़ोतरी से टोल वसूली और पारदर्शी होगी। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। इस कदम से उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो किसी कारण से फास्टैग नहीं ले पाते थे। मंत्रालय का मानना ​​है कि इससे टोल प्लाजा पर आवाजाही और तेज होगी।

17 अक्टूबर: रांची में आदिवासियों का शोर, कहा – कुछ समाज खुद को आदिवासी दिखा रहे हैं

  रांची झारखंड में कुरमी समुदाय को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर गहराता विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। इसके विरोध में राज्यभर के आदिवासी संगठनों ने 17 अक्तूबर को राजधानी रांची के प्रभात तारा मैदान में आदिवासी हुंकार महारैली आयोजित करने का एलान किया है। इस महारैली में लाखों की संख्या में आदिवासियों के जुटने की संभावना है। शनिवार को सिरम टोली सरना स्थल पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा और पूर्व मंत्री देवकुमार धान समेत कई आदिवासी नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आदिवासियों के अस्तित्व और अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। गीताश्री उरांव ने कहा कि कुरमी समाज आदिवासियों के संवैधानिक हक, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण, जमीन और गौरवशाली इतिहास पर कब्जा करने की साजिश रच रहा है। कल तक हमें असभ्य और जाहिल कहने वाले आज खुद को आदिवासी साबित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। लेकिन सभी ऐतिहासिक प्रमाण, मानवशास्त्रीय अध्ययन, डीएनए शोध और लोकुर कमेटी की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि कुरमी जाति आदिवासी/अनुसूचित जनजाति नहीं है। नेताओं ने आरोप लगाया कि कुरमी समाज अपने आपको आदिवासी दिखाने के लिए ऐतिहासिक विद्रोहों में झूठे तरीके से अपने नेताओं को जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चुआड़ विद्रोह में रघुनाथ महतो, कोल विद्रोह में बुली महतो और संथाल विद्रोह में चान्कू महतो जैसे नामों को जबरन आदिवासी इतिहास में घुसाया जा रहा है, जबकि यह ऐतिहासिक सच्चाई के साथ छल है। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि 17 अक्तूबर की रैली आदिवासी समाज की एकता और ताकत का प्रदर्शन होगी। उन्होंने मांग की कि एसटी आरक्षण की पात्रता की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए ताकि कोई भी समुदाय फर्जी इतिहास गढ़कर आदिवासी अधिकारों पर अतिक्रमण न कर सके। आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि कुरमी को आदिवासी सूची में शामिल करने का हर प्रयास आदिवासी समाज को हाशिए पर डालने की साजिश है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 17 अक्टूबर को रांची में होने वाली यह हुंकार महारैली आदिवासी एकजुटता और अस्तित्व की बड़ी परीक्षा मानी जा रही है।

वॉर हीरो जिसने AI से दुश्मनों के सीक्रेट कोड किए हैं क्रैक

आजकल AI की जरूरत हर किसी को पड़ने लगी है। कुछ लोग तो दिनभर में जितना सर्च इंजन नहीं खोलते, उससे अधिक बार AI यूज करने लगे हैं। जब लोग स्मार्टफोन पर चैटबॉट से बात करते हैं या AI से तस्वीरें बनवाते हैं, तो लगता है कि यह तकनीक नई है। लेकिन क्या आप जानते हैं, AI की जड़ें दूसरे विश्व युद्ध तक जाती हैं? यह कहानी उस समय की है, जब एक जटिल कोड ने दुनिया को हिला दिया था और एक शख्स ने उस कोड को तोड़कर AI की नींव रखी। कहानी एनिग्मा कोड और एलन ट्यूरिंग की, जिन्‍होंने आज के AI को जन्म दिया। सीक्रेट कोड नहीं टूटा ​गार्जियन की रिपोर्ट बताती है कि दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी ने एनिग्मा नाम की मशीन बनाई थी। यह दिखने में टाइपराइटर जैसी थी। जब कोई अक्षर दबाया जाता, यह मशीन उसे अलग-अलग कोड में बदल देती थी। हर 24 घंटे में इसकी सेटिंग बदल दी जाती थी। इतने सारे कोड थे कि इन्हें समझ पाना बाकी लोगों के लिए नामुमकिन था। जर्मन सेना इसका इस्तेमाल सीक्रेट मैसेज भेजने के लिए करती थी, दुश्मन को इसका मतलब समझने में सालों लग जाते। एलन ट्यूरिंग ने तोड़ दिखाया कोड तब बात उठी कि एलन ट्यूरिंग इसके कोड ब्रेक कर सकते हैं। ट्यूरिंग के महान गणितज्ञ और कोडब्रेकर थे। ट्यूरिंग ने 'बम' नाम की मशीन बनाई, जो एक तरह का शुरुआती कंप्यूटर था। यह मशीन लाखों कोड की जांच करती थी। 1943 तक यह हर मिनट दो मैसेज को डिकोड करने लगी। ट्यूरिंग ने एनिग्मा की कमजोरियों का फायदा उठाया। उनकी इस मेहनत ने दूसरे वर्ल्ड वॉर को दो साल पहले खत्म किया। इस वाकये से पहले मशीन सिर्फ काम करती थी, पहली बार मशीन ने सोचने का काम शुरू किया। इसके बाद साल 1956 में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान इसे 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' यानी 'AI' नाम दिया गया। इंटरनेट के आने के बाद AI तेजी से आगे बढ़ा, फिर जो तकनीक सोचने का काम करती थी, उसे AI कहा जाने लगा। ट्यूरिंग न होते तो AI भी नहीं होता एनिग्मा को तोड़ना उस समय एक चमत्कार था। मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के डॉ. मुस्तफा कहते हैं कि युद्ध के दौरान इसे तोड़ना आसान नहीं था। ट्यूरिंग और उनकी टीम ने महीनों की मेहनत से असंभव को संभव किया। उनकी बनाई मशीनें और तकनीकें आज के AI की बुनियाद हैं। अगर एनिग्मा न टूटा होता, तो शायद युद्ध का नतीजा कुछ और होता। शायद AI की शुरुआत भी ना होती। अब तो मिनटों में टूट सकता है सीक्रेट कोड आज की तकनीक के सामने एनिग्मा कोड मिनटों में टूट जाता। ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर माइकल वूल्ड्रिज बताते हैं कि आज के कंप्यूटर और AI इतने तेज हैं कि वे बम मशीन की तुलना में हजारों गुना तेजी से कोड तोड़ सकते हैं। मसलन, चैटजीपीटी जैसा AI आसानी से 'बम' मशीन की तरह काम कर सकता है। आधुनिक डेटा सेंटर की ताकत इतनी है कि ट्यूरिंग भी हैरान रह जाते।

मौसम अपडेट: दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश, उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी बरसेंगे बादल

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिजाज फिर बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 6 अक्टूबर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दिन 24 घंटे बारिश होने की संभावना है। साथ ही, तेज हवाएं चलेंगी और गरज-चमक भी होगी। इस बदलाव से तापमान में गिरावट आएगी। लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिलेगी। सुबह से ही हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। यह बारिश दिनभर रुक-रुक कर जारी रह सकती है। इससे पहले आज दिल्ली-एनसीआर में कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तूफान देखने को मिल सकता है। वहीं 7 अक्टूबर को एनसीआर में बादल छाए रहने की संभावना है। इस दिन मध्यम बारिश हो सकती है। 8 और 9 अक्टूबर से मौसम धीरे-धीरे साफ होना शुरू होगा। 8 अक्टूबर को आसमान आंशिक रूप से बदला रहेगा। 9 अक्टूबर को मुख्य रूप से साफ मौसम की संभावना जताई गई है। इन दिनों अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, आज यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर-भारत के अधिकांश हिस्सों में भी बारिश की संभावना बन रही हैं। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती है। तमिलनाडु के 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट तमिलनाडु के 14 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर मौसम प्रणालियां लगातार सक्रिय हो रही हैं। नए बुलेटिन के अनुसार, 2 अक्टूबर से बंगाल की खाड़ी के मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में बना एक गहरा दबाव क्षेत्र उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया है और शाम तक दक्षिणी ओडिशा तट पर गोपालपुर के पास पहुंच गया है। शनिवार को तिरुवल्लुर, चेन्नई, चैंगलपट्टू, कांचीपुरम, विल्लुपुरम, रानीपेट, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, तिरुवन्नामलाई, कृष्णागिरी, धर्मपुरी और रामनाथपुरम के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश की उम्मीद है। राजस्थान में भी जमकर बरस सकते हैं बादल राजस्थान में मॉनसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि रविवार, 5 अक्टूबर से बारिश और तेज हो सकती है। विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को राजस्थान के सभी जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। राज्य के 21 जिलों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यह बारिश पिछले तीन दिनों से हो रही है और अगले तीन दिनों तक जारी रहने का अनुमान है।

ये 5 AI टूल्स भारतीयों ने बनाए, दुनिया कर रही है तारीफ – जानें कैसे आपकी कर सकते हैं मदद

नई दिल्ली AI का दुनियाभर में डंका बज रहा है। हर कोई इसका इस्तेमाल करके अपना काम आसान कर रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर दफ्तर में काम करने वाले लोगों तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्रेज है। इसी के इस्तेमाल से घर में काम करने वाली महिलाएं भी रेट्रो साड़ी का ट्रेंड फॉलो करते हुए गूगल जेमिनी से इमेज बना रही हैं। AI से घिरी हुई इस दुनिया में कुछ टूल्स ऐसे भी हैं, जो भारत के लोगो ने बनाएं हैं। चलिए, भारतीयों द्वारा बनाए गए 5 AI टूल्स के बारे में जान लेते हैं। Sarvam AI यह टूल भारत की भाषाओं के लिए खास AI मॉडल बना रहा है। यह कंपनी हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली जैसी भाषाओं में काम करने वाले AI टूल्स बनाती है, जो बातचीत, अनुवाद और वॉयस बेस्‍ड असिस्टेंट जैसे काम करते हैं। इसका मकसद है कि जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते, वे भी डिजिटल सेवाओं का आसानी से उपयोग कर सकें। एआई टूल क्‍या आपके करियर की दिशा बदल सकते हैं? Krutrim Krutrim भारतीयों के लिए एक ऐसा AI असिस्टेंट है जो उनकी भाषा और संस्कृति को समझता है। यह हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी जैसी भाषाओं में काम करता है। यह रोजमर्रा के काम जैसे ईमेल लिखना, सवालों के जवाब देना या जर्नी को प्लान करने का काम आसान करता है। Veena Veena एक ऐसा AI है जो हिंदी और हिंग्लिश में स्वाभाविक आवाज बनाता है। यह भारतीय लहजे और भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि आवाज रोबोट जैसी ना लगे। यह कॉल सेंटर, ऑनलाइन एजुकेशन और सरकारी सेवाओं के लिए उपयोगी है। Gan.ai Gan.ai एक AI टूल है, जो हजारों पर्सनल वीडियो बना सकता है। इसमें हर वीडियो में ग्राहक का नाम, ऑफर या लोकेशन अपने आप जुड़ जाती है। इससे बिजनेस को बार-बार वीडियो शूट करने की जरूरत नहीं पड़ती। जैसे- किसी कस्टमर का नाम रोहन है और वह कोई फूड डिलीवरी ऐप यूज करता है है, तो कंपनी उसके लिए ऐड भेज सकती है 'हाय राहुल, ये हैं आपके आसपास के आज के ऑफर।' Rephrase.ai Rephrase.ai टेक्स्ट को एक ऐसे वीडियो में बदल देता है जिसमें AI अवतार बोलता हुआ नजर आता है। इसे Adobe ने खरीद लिया है और अब यह तकनीक, बड़े क्रिएटिव टूल्स का हिस्सा है।

बाढ़ राहत पैकेज जल्द शुरू! पंजाब में 10 से 15 अक्टूबर तक भुगतान का आदेश

लहरागागा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि 10 से 15 अक्टूबर तक बाढ़ पीड़ितों को मुआवजा देना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार दिवाली से पहले ही लोगों को मुआवजा देने की शुरुआत कर देगी। इसके साथ ही उन्होंने घग्गर नदी के किनारे रहने वाले लोगों की मेहनत की भी बहुत सराहना की, जिन्होंने बांध को मजबूत बनाने के लिए कड़ी मेहनत की और घग्गर को ओवरफ़्लो नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज संगरूर के हल्का लहीरागागा के लोगों को कई बड़े तोहफे दिए। उन्होंने बिजली बोर्ड के कार्यालय का उद्घाटन किया। इसके अलावा इलाके में नए तहसील परिसर का उद्घाटन भी किया गया, जिसकी लागत 16 करोड़ रुपये है। इसके साथ ही एक फाउंडेशन द्वारा तैयार किए गए ‘सौरव कॉम्प्लेक्स’ कम्युनिटी हॉल को भी जनता के लिए समर्पित किया गया, जिसमें लोग विवाह-शादियों और अन्य कार्यक्रम करवा सकते हैं। उन्होंने पुरानी सब्जी मंडी में कम्युनिटी रसोई की भी शुरुआत की, जिसमें लोग केवल 10 रुपये में ढेर सारी रोटियां खा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने जरूरतमंद परिवारों की 101 लड़कियों के सामूहिक विवाह समारोह में भी हिस्सा लिया। 

खजाने की हुई बरसात! माता टेकरी में भक्तों ने दिया दिल खोलकर दान, करोड़ों के रत्न और विदेशी नोट बरामद

देवास नवरात्र में माता टेकरी पर दर्शन करने पहुंचे लगभग दस लाख भक्तों की आस्था से भरी दान पेटियां शनिवार को खोली गईं। शनिवार को बड़ी माता मां तुलजा भवानी और छोटी माता मां चामुंडा के दोनों मंदिरों की कुल 24 दान पेटियों की गिनती सुबह 11 बजे शुरू हुई और शाम करीब 6 बजे तक चलती रही। दान पेटियों से लगभग 44 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा नवरात्र में माता को एवं दान पेटियों में कई आभूषण भी भक्तों ने अर्पित किए। नवरात्र पर लाखों भक्तों ने किए दर्शन नवरात्र के दौरान माता टेकरी पर देश-विदेश के लाखों भक्त दर्शन के लिए आए और भारी मात्रा में चढ़ावा चढ़ाया। नवरात्र समाप्त होने के बाद शनिवार को माता टेकरी पर स्थित मंदिरों की दान पेटियों को खोला गया। सुबह करीब 10 बजे से टेकरी पर मंदिरों में तहसीलदारों की निगरानी में पेटियों को खोला गया और दान की संपूर्ण राशि बोरियों में भरकर देव स्थान प्रबंध समिति कार्यालय में लाई गई। दान पेटियों से निकले दान के अलावा ऑनलाइन, क्यूआर व रसीद के माध्यम से भी भक्तों ने दान किया है।   नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही बता दें कि पूरे नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। इस दौरान व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कलेक्टर ऋतुराज सिंह, एसपी पुनीत गेहलोद सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी माता टेकरी पर मौजूद रहे। नवरात्र में करीब 800 सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। कोटवार, पटवारी, आरआई व तीन तहसीलदार शामिल हैं। दान पेटियों से भगवान को अर्पित किए गए दानों में आभूषण और नेपाल, सिंगापुर सहित अन्य देशों के करेंसी नोट भी पाए गए। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्य, पटवारी, कोटवार, राजस्व निरीक्षकों सहित 100 से अधिक कर्मचारी गिनती में शामिल रहे। साथ ही तहसीलदार सपना शर्मा, हरिओम ठाकुर ने भी गिनती में सहयोग के साथ निगरानी की। दान और पत्रों की संपूर्ण गिनती पारदर्शी तरीके से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई। 52 लाख 92 हजार 868 रुपये दान में आए इस नवरात्र में रसीद के माध्यम 3 लाख 61 हजार 280 रुपये और दान पेटियों में 43 लाख 91 हजार 588 रुपये प्राप्त हुए। बैंक बार कोड के माध्यम से 5 लाख 40 हजार रुपये नवरात्र में प्राप्त हुए। कुल 52 लाख 92 हजार 868 रुपये शारदीन नवरात्र में भक्तों ने दान दिया। इसके अलावा चांदी के 11 छत्र, एक चांदी का मुकुट, 5 जोड़ी बिछिया, 4 स्वास्तिक, 8 जोड़े पायल दान पेटियों से प्राप्त हुए। नवरात्र में कुछ दर्शनार्थियों ने माता को चांदी के हार भी चढ़ाए थे। साथ ही नवरात्र में छोटी माता जी को एक स्वर्ण मुकुट और एक जोड़े सोने के कंगन भी भक्तों ने अर्पित किए। पिछले साल 45 लाख 51 हजार रुपये प्राप्त हुए माता टेकरी प्रभारी तहसीलदार हरिओम ठाकुर ने बताया कि शनिवार को बड़ी माता मंदिर की 11 और छोटी माता मंदिर की 13 दान पेटियां खोली गईं। नवरात्र के पूर्व सभी पेटियां 19 सितंबर को खोली गई थी। सामान्यत: नवरात्र के पूर्व और नवरात्र के बाद सभी मंदिरों की दान पेटियां खोली जाती हैं। इसके अलावा तीन-चार माह के अंतर में नियमित रूप से दान पेटियां खोली जाती हैं। बता दें कि विगत वर्ष शारदीय नवरात्र में दान पेटियों से लगभग 45 लाख 51 हजार रुपये दान व आभूषण प्राप्त हुए थे।

उत्तर कोरिया में महिलाओं के लिए बड़ा आदेश, ब्रेस्ट इम्प्लांट और प्लास्टिक सर्जरी पर रोक

फियोंगयांग उत्तर कोरिया में अब ब्रेस्ट इम्प्लांट की सर्जरी पर भी रोक लगा दी गई है. यह देश पहले से ही रोजमर्रा की चीजों पर कड़े नियमों के लिए जाना जाता है, जैसे पश्चिमी कपड़े पहनना या हेयरस्टाइल. अब ब्रेस्ट इम्प्लांट और प्लास्टिक सर्जरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. यहां एक डॉक्टर और दो महिलाओं पर ब्रेस्ट सर्जरी कराने के आरोप में सार्वजनिक मुकदमा चल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन की सरकार अब ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए मोहल्लों में गश्त और गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि ऐसी महिलाओं की पहचान की जा सके जिन्होंने यह सर्जरी करवाई है. अगर किसी महिला ने किस भी तरह का कोई भी बदलाव करवाया, तो नेताओं को पुलिस में रिपोर्ट करना होगा.  गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही सरकार उत्तर कोरिया में ब्रेस्ट इम्प्लांट को गैर-समाजवादी काम (Non-socialist work) माना गया है और यह कानूनन मना है. हाल ही में एक डॉक्टर पर, जिसने छुपकर यह सर्जरी की थी, सार्वजनिक सुनवाई हुई. इसी तरह दो 20 साल की लड़कियों पर भी ब्रेस्ट सर्जरी करवाने का आरोप लगा. बताया गया कि दोनों अपने फिगर को बेहतर बनाना चाहती थीं. डॉक्टर ने अपने घर पर अवैध रूप से चीन से लाए गए सिलिकॉन का इस्तेमाल करके सर्जरी की थी. 20 साल की दोनों महिलाओं ने अपने शरीर का आकार बदलवाने के लिए यह ऑपरेशन कराया था. सरकार अब ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है और संदिग्ध महिलाओं की पहचान करने के लिए पड़ोस में गश्त और गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. 20 साल की लड़कियों ने कराई ब्रेस्ट सर्जरी  एक सूत्र के मुताबिक, सितंबर के बीच में दक्षिणी उत्तरी ह्वांगहे प्रांत के एक सूत्र ने बताया कि सितंबर के बीच में सारिवॉन जिले के सांस्कृतिक हॉल में एक डॉक्टर और उन महिलाओं का सार्वजनिक मुकदमा हुआ, जिन्होंने अवैध ब्रेस्ट सर्जरी करवाई थी. डॉक्टर पर आरोप था कि उसने अपने घर पर अवैध रूप से ब्रेस्ट सर्जरी की और इसके लिए चीन से तस्करी कर लाया गया सिलिकॉन इस्तेमाल किया. मुकदमे के दौरान डॉक्टर मंच पर सिर झुकाए खड़ा रहा, जबकि 20 साल की दोनों लड़कियां शर्म के कारण अपना चेहरा नहीं उठा सकीं. 

मुरीदके एयरबेस का दर्द अभी बाकी, ऑपरेशन सिंदूर की सच्चाई गूगल पर उजागर

इस्लामाबाद  मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मुरीदके एयरबेस पर किए गए हमलों के निशान आज भी साफ दिख रहे हैं. गूगल अर्थ की नई तस्वीरों से पता चलता है कि सितंबर 2025 तक हमले वाली दोनों जगहें अभी भी ढकी हुई हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अब भी मरम्मत कर रहा है. यह खुलासा भारत की सैन्य ताकत और पाकिस्तान की कमजोरी को दिखाता है. ऑपरेशन सिंदूर: मई 2025 का बड़ा हमला 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. यह पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम था. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर सटीक हमले किए. इनमें मुरीदके एयरबेस भी शामिल था, जो पाकिस्तान का महत्वपूर्ण हवाई अड्डा है. मई के अंत में जारी सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिखा कि हमले ने भारी नुकसान पहुंचाया. मुरीदके एयरबेस पर हमले का मुख्य निशान एक बड़ा गड्ढा था. यह गड्ढा करीब तीन मीटर चौड़ा था और एयरबेस सुविधा से सिर्फ 30 मीटर दूर था. यह सुविधा पाक वायुसेना के लिए बहुत गोपनीय मानी जाती है. हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों से पुष्टि हुई कि भारत ने सटीक निशाना साधा. हमले से एयरबेस की संरचना को गहरा नुकसान हुआ, जिसमें छतें उड़ गईं और इमारतें टूट गईं. सितंबर 2025 की गूगल अर्थ तस्वीरें: मरम्मत के संकेत अब सितंबर 2025 की गूगल अर्थ तस्वीरों से नया खुलासा हुआ है. हमले वाली दोनों जगहें – गड्ढा और क्षतिग्रस्त हिस्से – अभी भी ढकी हुई दिख रही हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने तिरपाल या अन्य सामग्री से इन्हें छिपाया है, ताकि मरम्मत जारी रख सके. अन्य पाकिस्तानी एयरबेस जैसे सरगोधा में जून 2025 तक रनवे की मरम्मत हो चुकी थी, लेकिन मुरीदके में काम धीमा चल रहा है. यह ढकाव नुकसान की गहराई दिखाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंडरग्राउंड सुविधा को ठीक करने में महीनों लग सकते हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मई के हमलों से पाकिस्तानी सुविधाओं को सीमित लेकिन साफ नुकसान हुआ. पाकिस्तान की हवाई ताकत पर सवाल ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की हवाई ताकत को कमजोर कर दिया. मुरीदके एयरबेस पर हमला न सिर्फ बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पाकिस्तान के आत्मविश्वास को भी झकझोर दिया. भारत ने न्यूनतम नुकसान के साथ सटीक हमले किए, जो वायुसेना की क्षमता दिखाता है. पाकिस्तान ने शुरुआत में नुकसान को कम बताया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने सच्चाई उजागर कर दी. नूर खान और सरगोधा जैसे अन्य बेस भी प्रभावित हुए. मुरीदके पर फोकस इसलिए, क्योंकि यह अंडरग्राउंड हथियार भंडारण का केंद्र था. भारत की सतर्कता बरकरार यह तस्वीरें दिखाती हैं कि मई के हमले का असर आज भी है. पाकिस्तान मरम्मत में जुटा है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा. भारत के लिए यह चेतावनी है कि सीमा पर सतर्कता जरूरी है. ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी तस्वीरें निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं. गूगल अर्थ जैसी तकनीक से दुनिया को सच्चाई पता चलती है.

वैश्विक जिओपार्क की दिशा में कदम: धार के बाग को मिलने की उम्मीद अनुशंसा

 धार  यूनेस्को के वैश्विक जिओपार्क के कार्यकारी विज्ञानी डॉ. अलीरेजा (ईरान) एवं लखनऊ के विज्ञानी डॉ. सतीश त्रिपाठी और खोजेमा नजमी (भू-गर्भशास्त्र विशेषज्ञ) ने बाग क्षेत्र स्थित डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का गुरुवार को निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने उद्यान में संरक्षित किए गए डायनासोर के जीवाश्म, विभिन्न प्रकार की चट्टानों, समुद्री जीवों के जीवाश्म और वानस्पतिक जीवाश्मों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। डॉ. अलीरेजा ने जीवाश्म की प्रचुर मात्रा को देख आश्चर्य व्यक्त किया एवं वनमंडल धार द्वारा जीवाश्म संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को सराहा। डॉ. अलीरेजा ने डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक जिओपार्क की मान्यता के लिए प्रस्तावित करने की अनुशंसा की बात कही। बाग गुफाओं का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन करने पर विशेष जोर दिया गया है। जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन डॉ. त्रिपाठी ने सभी जीवाश्मों की विशेषता बताई एवं शोध व संरक्षण की भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। वनमंडलाधिकारी धार विजयनंथम टीआर ने बताया कि डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को आधुनिक जिओपार्क बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्त जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन भी किया जाएगा, जो इसे वैश्विक पहचान देगा। उपवनमंडलाधिकारी संतोष कुमार रनशोरे द्वारा बाग के आसपास स्थित समस्त जीवाश्म स्थलों एवं बाग की गुफाओं की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों के दल के साथ वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सोलंकी एवं सुनील बघेल व वेस्ता मंडलोई उपस्थित रहे। संपूर्ण डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराया गया एवं आज दिवस तक किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।