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यशस्वी जायसवाल ने दिल्ली में जमाया बल्ला, 7वीं बार शतक ठोक कर दिखाया कमाल

नई दिल्ली  यशस्वी जायसवाल का बल्ला भले ही अहमदाबाद टेस्ट में नहीं चला लेकिन दिल्ली टेस्ट में उन्होंने इसकी कसर पूरी कर दी. बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने दिल्ली टेस्ट की पहली पारी में शानदार सेंचुरी लगाई. यशस्वी जायसवाल ने 7वीं बार टेस्ट क्रिकेट में सैकड़ा जड़ा है. यशस्वी जायसवाल ने वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर पहला शतक लगाया है. वहीं इस टीम के खिलाफ ये उनका दूसरा शतक है. यशस्वी ने अपने इस शतक के साथ कई और बड़े कारनामो को अंजाम दिया लेकिन पहले जानिए कि कैसे ये खिलाड़ी अपने 7वें शतक तक पहुंचा. पहली गेंद से टच में नजर आए जायसवाल यशस्वी जायसवाल ने पारी की शुरुआत संयम से की. आमतौर पर ये खिलाड़ी तेजी से रन बनाने के लिए जाना जाता है लेकिन दिल्ली की पिच पर उन्होंने टाइम लिया. इस खिलाड़ी ने राहुल के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 15.4 ओवर में 50 रन जोड़े. राहुल आउट हो गए लेकिन जायसवाल टिके रहे और उन्होंने 10 चौकों की मदद से 82 गेंदों में हाफसेंचुरी पूरी की. इसके बाद इस खिलाड़ी ने साई सुदर्शन के साथ शतकीय साझेदारी करते हुए टीम इंडिया को और मजबूत स्थिति में पहुंचाया और इसके बाद जायसवाल ने 145 गेंदों में अपना शतक पूरा कर लिया. जायसवाल ने बनाए ये रिकॉर्ड यशस्वी जायसवाल सुनील गावस्कर के बाद सबसे तेजी से यशस्वी जायसवाल भारत के लिए सबसे तेजी से 3000 रन बनाने वाले बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं. उन्होंने 71 पारियों में ये आंकड़ा पार किया. सुनील गावस्कर ने 69 पारियों में 3000 रन बनाए थे. सिर्फ सचिन से पीछे यशस्वी यशस्वी जायसवाल की उम्र महज 23 साल है और इस खिलाड़ी ने 7 टेस्ट शतक लगा दिए हैं. इतनी कम उम्र में उनसे ज्यादा शतक सिर्फ सचिन ने लगाए थे. उन्होंने 11 सेंचुरी ठोकी थी. जायसवाल ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में शतकों के मामले में पंत और राहुल को पीछे छोड़ दिया है. इन दोनों ने 6-6 टेस्ट शतक लगाए हैं जबकि इस टूर्नामेंट में जायसवाल के 7 शतक हो गए हैं.  

भारत-अफगान नज़दीकियों से बौखलाया पाकिस्तान, सीमा पार की एयरस्ट्राइक में दिखी बौखलाहट

काबुल अफगानिस्तान की राजधानी काबुल शुक्रवार सुबह तेज धमाकों से दहल उठी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विस्फोट पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) की कथित एयरस्ट्राइक के कारण हुए हैं. पाकिस्तानी चैनलों ने दावा किया कि इन हमलों का निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकाने थे. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब तालिबान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी भारत दौरे पर हैं. मुत्तकी का यह दौरा अफगानिस्तान की नई सरकार और भारत के बीच संवाद की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान की ज़मीन अगर पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होती है, तो ‘कड़ी कार्रवाई’ की जाएगी. उसी के कुछ दिन बाद यह कथित एयरस्ट्राइक सामने आई है. कतर में तालिबान के राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने बयान जारी कर कहा, ‘काबुल में दो धमाकों की आवाज सुनी गई, लेकिन अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.’ पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि हमले में TTP प्रमुख नूर वली महमूद मारा गया. अफगान मीडिया के मुताबिक, अटैक के बाद TTP के प्रमुख नूर वली महसूद का एक ऑडियो सामने आया जिसमें उसने खुद के जिंदा होने की बात कही और पाकिस्तान पर ‘फर्जी प्रचार’ करने का आरोप लगाया. ख्वाजा आसिफ ने दी थी धमकी इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को धमकी भरे लहजे में अफगानिस्तान के अंतरिम प्रशासन को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को अपने देश के अंदर सुरक्षित पनाहगाह दे रहा है. उन्होंने कहा था कि ‘इनफ इज इनफ’ यानी अब बहुत हो गया. पाकिस्तानी सेना लगातार TTP के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है. गुरुवार को कम से कम सात टीटीपी आतंकी मारे गए. मुत्ताकी की भारत यात्रा के बीच हमला एक कहावत है घर वाला घर नहीं हमें किसी का डर नहीं. यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अफगानिस्तान के संबंध बेहतर हो रहे हैं और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे. अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद यह पहली बार है, जब काबुल से कोई मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधि नई दिल्ली का दौरा कर रहा है. मुत्तकी की यह यात्रा लगभग एक सप्ताह की है. इसे दोनों देशों के बीच संवाद की नई पहल के रूप में देखा जा रहा है.  

₹88 लाख तक की फीस के बाद अब H-1B में नई सख्ती! ट्रंप की तैयारी से भारतीयों को लग सकता है झटका

नई दिल्ली अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन फिर से H-1B वीजा के नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. ये वीजा खासतौर पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और विद्यार्थियों के लिए बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इसी से अमेरिका में काम करने और आगे चलकर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता बनता है. लेकिन अब अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने ‘रिफॉर्मिंग द H-1B वीजा नॉन इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम’ नाम से एक नया प्रस्ताव जारी किया है. इसमें सिर्फ 1 लाख डॉलर की नई फीस ही नहीं, बल्कि कई सख्त बदलाव भी शामिल हैं- जैसे कौन सी कंपनी यह वीजा इस्तेमाल कर सकती है, कौन से पदों के लिए आवेदन मान्य होंगे और थर्ड पार्टी कंपनियों की निगरानी बढ़ाई जाएगी. क्या है नया प्रस्ताव? नए नियमों के तहत H-1B वीजा के चयन में अब ‘वेतन आधारित प्रणाली’ (Wage-Based Selection) लागू करने की योजना है. यानी जिन लोगों को ज्यादा वेतन मिलेगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. अब तक यह चयन पूरी तरह लॉटरी सिस्टम पर आधारित था. DHS का कहना है कि इन बदलावों का मकसद है ‘अमेरिकी मजदूरों के हितों की रक्षा करना और वीजा प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाना.’ अगर यह नियम लागू हुआ तो अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले छात्रों और कम एक्सपीरियंस वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स को एंट्री मुश्किल हो जाएगी. साथ ही, सरकार उन कंपनियों पर कड़ी नजर रखेगी जिन्होंने पहले वीजा नियमों का उल्लंघन किया है. च-1बी वीजा कैटिगरी की शुरुआत 1990 के इमिग्रेशन ऐक्ट के तहत की गई थी। इसके तहत यह प्रावधान किया गया था कि अमेरिकी कंपनियां बाहर के लोगों को ला सकें, जिनके पास जरूरी तकनीकी स्किल हो। इसी नियम के चलते बड़े पैमाने पर भारतीयों को अमेरिका में जाने का मौका मिला। खासतौर पर अमेरिकी टेक कंपनियों में भारतीय की बड़ी संख्या है। अब तक नियम था कि 65 हजार एच-1बी वीजा ही साल में जारी किए जा सकते थे। इसके अलावा 20 हजार ऐसे लोगों को भी छूट थी, जिन्होंने अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली हो। इसके अलावा कई यूनिवर्सिटी और गैर-लाभकारी संस्थानों को इससे छूट रही हो। प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार 2023 में एच-1 बी वीजा के तहत अमेरिका जाने वाले लोगों में तीन चौथाई भारतीय ही थे। 2012 से अब तक एच-1 बी वीजा हासिल करने वाले 60 फीसदी लोग कंप्यूटर से संबंधित नौकरियों में गए। इसके अलावा हेल्थ सेक्टर, बैंक, यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के लिए भी एच-1 बी वीजा जारी किए गए। कब लागू होंगे नियम? अभी यह प्रस्ताव फेडरल रजिस्टर में सार्वजनिक सुझावों के लिए रखा गया है. अगर सब कुछ तय समय पर हुआ तो दिसंबर 2025 तक यह नया नियम लागू हो सकता है. H-1B वीजा 1990 के इमीग्रेशन Act के तहत शुरू हुआ था ताकि अमेरिकी कंपनियां ऐसे कुशल लोगों को ला सकें जिनकी विशेषज्ञता अमेरिका में आसानी से नहीं मिलती. यही वजह है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न जैसी कंपनियों में हजारों भारतीय इसी वीजा पर काम कर रहे हैं. अभी हर साल अमेरिका 65,000 H-1B वीजा जारी करता है, और 20,000 अतिरिक्त वीजा अमेरिकी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स या उससे ऊपर की डिग्री धारकों को मिलते हैं. 2023 में मिले सभी H-1B वीजा में से करीब 75% भारतीय नागरिकों को मिले थे. ऐसे में यह कदम भारत के लिए भी बड़ी खबर है.

बिना वोटर ID भी मिलेगा वोट डालने का अधिकार, ECI बोले – पहचान की प्रक्रिया होगी सुनिश्चित

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए दो चरणों में वोट डाले जाएंगे। इससे पहले चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं लेकिन उनके पास मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) नहीं है तो भी वे वोट डाल सकते हैं। ऐसे मतदाताओं के लिए 12 विकल्प दिए गए हैं। यह निर्देश आयोग ने 7 अक्टूबर 2025 को जारी अधिसूचना के माध्यम से दिया, ताकि ऐसे मतदाता भी आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें जिनके पास मतदान के समय वोटर आईडी कार्ड उपलब्ध नहीं है। चुनाव आयोग के अनुसार, मतदाता निम्नलिखित पहचान पत्रों में से किसी एक को दिखाकर मतदान कर सकते हैं। 1. आधार कार्ड 2. मनरेगा जॉब कार्ड 3. बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटोयुक्त पासबुक 4. श्रम मंत्रालय या आयुष्मान भारत योजना के तहत जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड 5. ड्राइविंग लाइसेंस 6. पैन कार्ड (PAN Card) 7. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के तहत जारी स्मार्ट कार्ड 8. भारतीय पासपोर्ट 9. फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज 10. केंद्र/राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों या पब्लिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र 11. सांसद (MP), विधायक (MLA), विधान परिषद सदस्य (MLC) को जारी आधिकारिक पहचान पत्र 12. समाज कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड हालांकि चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार और जिन आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, वहां लगभग सभी मतदाताओं को EPIC कार्ड जारी किए जा चुके हैं। साथ ही सभी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नए मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के 15 दिनों के भीतर EPIC कार्ड प्रदान कर दिए जाएं। चुनाव आयोग ने दोहराया कि मतदान का अधिकार केवल उन नागरिकों को है जिनके नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। पहचान पत्र दिखाना आवश्यक है, परंतु नाम सूची में न होने पर कोई भी व्यक्ति मतदान नहीं कर सकेगा। आयोग ने इस बार बुर्का या पर्दा ओढ़ने वाली महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा, “पर्दानशीन महिलाओं की गरिमा और गोपनीयता बनाए रखने हेतु महिला मतदान अधिकारियों और सहायक कर्मियों की उपस्थिति में उनकी पहचान की जाएगी।” आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा की 243 सीटों के चुनाव कार्यक्रम की भी घोषणा कर दी है। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। मतों की गिनती 14 नवंबर को की जाएगी। आयोग के अनुसार, अंतिम मतदाता सूची में कुल 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। इस वर्ष 24 जून तक यह संख्या 7.89 करोड़ थी, जबकि 1 अगस्त 2025 की ड्राफ्ट सूची में 7.24 करोड़ मतदाता दर्ज किए गए। आयोग ने बताया कि करीब 65 लाख नामों को हटाया गया है।

रिटायर्ड इंजीनियर के साम्राज्य पर छापेमारी, आलीशान फार्महाउस से निकला सोना, कैश और टनों शहद

भोपाल मध्य प्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) के रिटायर्ड इंजीनियर-इन-चीफ जीपी मेहरा (गोविंद प्रसाद मेहरा) के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस भोपाल ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में बड़ा छापा मारा है. फरवरी 2024 में रिटायर हुए मेहरा पर अपने पूरे सेवाकाल के दौरान भ्रष्टाचार से वैध आय से कई गुना अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है.  लोकायुक्त पुलिस महानिदेशक योगेश देशमुख की अगुवाई में पूर्व चीफ इंजीनियर जीपी मेहरा के भोपाल, गोविंदपुरा और नर्मदापुरम में चार ठिकानों पर छापा मारा गया. देखिए कहां से क्या मिला?  सोहागपुर (नर्मदापुरम): सैनी गांव में छापेमारी के दौरान मिनी मालदीव की तर्ज पर एक रिसॉर्ट बनाने की तैयारी का खुलासा हुआ. यहां  – 32 निर्माणाधीन कॉटेज और 7 निर्मित कॉटेज मिले. – 17 टन शहद और 2 बड़े तालाब (संभवतः रिसॉर्ट के लिए) मिले. – कृषि भूमि, महंगे 6 ट्रैक्टर सहित कृषि उपकरण, 2 गौशाला और 2 मछली पालन केंद्र की जानकारी मिली. तालाब किनारे बना रहे थे कॉटेज. ओपल रेजेंसी (भोपाल): इस फ्लैट में बड़ी मात्रा में नकदी और सोना-चांदी मिला. – करीब ₹26 लाख नकद बरामद. – 2 किलो 649 ग्राम सोना (अनुमानित कीमत लगभग ₹3 करोड़ 5 लाख)  – 5 किलो 523 ग्राम चांदी (अनुमानित कीमत लगभग ₹5 लाख 93 हजार)  इंजीनियर की 10 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी मिली. मणीपुरम कॉलोनी (भोपाल): पॉश कॉलोनी स्थित निवास से कुल ₹8 लाख 79 हजार नकद, लगभग ₹50 लाख के सोने-चांदी के जेवर, ₹56 लाख की फिक्स डिपॉजिट (FD) और लगभग ₹60 लाख का अन्य सामान मिला. फैक्ट्री और लग्जरी गाड़ियां भी मिलीं केटी इंडस्ट्रीज (गोविंदपुरा): पीवीसी पाइप बनाने वाली इस फैक्ट्री में कच्चा और तैयार माल मिला. इसमें रोहित मेहरा के साथ कैलाश नायक की पार्टनरशिप की जानकारी मिली. फैक्ट्री से लगभग ₹1.25 लाख नकद मिले. भोपाल गोविंदपुरा एरिया में फैक्ट्री मिली. गाड़ियां: जीपी मेहरा के परिवार के सदस्यों के नाम पर 4 फोर-व्हीलर वाहन (फोर्ड एंडेवर, स्कोडा स्लाविया, किया सोनेट और मारुति सियाज) होने की जानकारी भी मिली है.  लोकायुक्त पुलिस ने जीपी मेहरा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है. संपत्ति संबंधी दस्तावेज, एफडी, शेयर और बीमा संबंधी दस्तावेजों की जांच जारी है और छापे की कार्यवाही अभी भी जारी है. 

Cough Syrup Case: SIT ने कंपनी मालिक को किया गिरफ्तार, परासिया थाने में पूछताछ के बाद कोर्ट में पेश करेगी

छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप कोल्ड्रिफ के मालिक रंगनाथन को एमपी पुलिस SIT टीम छिंदवाड़ा पहुंच गई है। जानकारी मिल रही है कि SIT उसे थोड़ी देर में परासिया कोर्ट में पेश कर रिमांड पर ले सकती है। बता दें कि रंगनाथन को एमपी पुलिस पिछले कई दिनों से तलाश रही थी। तमिलनाडु और चेन्नई में छापामारी कर रही थी। आखिरकार गुरुवार को SIT ने उसे तमिलनाडु से गिरफ्तार किया। उसे ट्रांजिट रिमांड पर एमपी लाया गया है। बता दें कि उसे नागपुर एयरपोर्ट से एसआईटी की आधी टीम एमपी लेकर पहुंची है। जबकि आधी टीम वहीं रह गई। मेडिकल जांच के लिए भेजा जानकारी मिल रही है कि आरोपी रंगनाथन को लेकर एमपी पुलिस की एसआईटी टीम परासिया थाने पहुंच चुकी है। यहां से उसे जिला अस्पताल भेजा गया है। जहां उसका मेडिकल चेकअप किया जाएगा। टीम ने साइबर सेल के जरिए लोकेशन ट्रेस कर चेन्नई से ही गिरफ्तार कर लिया। एसआइटी ने कंपनी से महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाओं के नमूने और उत्पादन रिकार्ड भी जब्त किया है। प्रदेश में जहरीली कफ सीरप पीने के बाद हुए संक्रमण से अब तक 23 बच्चों की मौत हो चुकी है। अब तक छिंदवाड़ा-पांढुर्णा जिलों के 21 और बैतूल के दो बच्चों की मौत हो चुकी है। तीन बच्चों का अभी नागपुर में उपचार चल रहा है। रंगनाथन गोविंदन को छिंदवाड़ा के लिए रवाना हुई SIT टीम गुरुवार की रात फ्लाइट से एसआईटी की टीम रंगनाथन को लेकर रवाना हुई और सुबह करीब 6 बजे नागपुर पहुंची. यहां पहुंचते ही एसआईटी रंगनाथन को दौड़ाते हुए कार की तरफ ले गई. इसके बाद टीम कार से छिंदवाड़ा के लिए रवाना हुई है. ऐसे गिरफ्तार हुआ था रंगनाथन बता दें कि मध्य प्रदेश पुलिस ने बुधवार तड़के लगभग 1:30 बजे चेन्नई से श्रीसन फार्मास्युटिकल्स के मालिक और जहरीले कफ सिरप कांड के मुख्य आरोपी रंगनाथन गोविंदन को गिरफ्तार किया गया था. दरअसल, रंगनाथन घटना के बाद से अपनी पत्नी के साथ फरार था. पुलिस ने सटीक इनपुट्स के आधार पर गिरफ्तारी की कार्रवाई की थी. श्रीसन फार्मा फैक्ट्री से महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त एसडीओपी परासिया के नेतृत्व में मध्य प्रदेश पुलिस की एक विशेष टीम 5 अक्टूबर को चेन्नई पहुंची थी. हालांकि इससे एक दिन पहले सिरप कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. वहीं गिरफ्तारी के बाद रंगनाथन को कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा फैक्ट्री ले जाया गया, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए. इसके बाद पुलिस अब चेन्नई की अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेने की प्रक्रिया में है, जिसके बाद आरोपी को छिंदवाड़ा लाया जाएगा.

शिक्षा विभाग एक्शन में, प्राइवेट स्कूलों को नोटिस भेजकर दी अंतिम चेतावनी

लुधियाना लुधियाना जिला शिक्षा अधिकारी (डी.ई.ओ.) ने 393 प्राइवेट स्कूलों को सख्त नोटिस जारी किया है। स्कूलों को कहा गया है कि वे SHVR(स्वच्छ और हरित विद्यालय ) पोर्टल पर आज दोपहर 2 बजे तक अपना डाटा भरें, अन्यथा उनकी एन.ओ.सी. रद्द कर दी जाएगी। शिक्षा अधिकारी डिंपल मदान ने स्पष्ट किया कि बिना एन.ओ.सी. के कोई स्कूल संचालित नहीं हो सकता। स्कूल प्रिंसिपल डाटा भरने के बाद कम्प्लीशन सर्टिफिकेट ब्लॉक नोडल अधिकारी को जमा करेंगे। SHVR पोर्टल भारत सरकार की पहल है, जिसका उद्देश्य स्कूलों का वातावरण साफ-सुथरा और हरित बनाना है। स्कूलों को पोर्टल पर अपने प्रांगण, क्लासरूम, लड़कियों के टॉयलेट और पेड़-पौधों की जानकारी के साथ फोटो और वीडियो भी अपलोड करनी होगी।  

नेतन्याहू ने PM मोदी को कॉल करने के लिए रोकी अहम बैठक, सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली यरूशलम में गुरुवार रात एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे. एजेंडा बेहद गंभीर था. गाजा में सीजफायर और बंधकों की रिहाई पर बड़ा फैसला होना था. लेकिन अचानक नेतन्‍याहू ने बैठक रोक दी. वजह? भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आ गया था. जी हां, नेतन्‍याहू ने अपने सारे मंत्री और अफसर कुछ मिनटों के लिए इंतजार में छोड़ दिए, ताकि वो सीधे पीएम मोदी से बात कर सकें. दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत लगभग दस मिनट चली, लेकिन उसका असर अब दोनों देशों के रिश्तों पर साफ दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू ने गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का फोन रिसीव किया. मोदी ने उन्हें इस समझौते पर बधाई दी और कहा कि भारत इस मानवीय प्रयास का समर्थन करता है. बयान में आगे लिखा है कि मोदी ने नेतन्‍याहू को करीबी दोस्त बताया और कहा कि भारत-इजरायल की दोस्ती हर परिस्थिति में मजबूत रहेगी. नेतन्‍याहू ने भी पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वो भारत के साथ मिलकर काम जारी रखना चाहते हैं. नेतन्याहू को दी बधाई, गाज़ा समझौते का किया स्वागत पीएम मोदी ने नेतन्याहू को फोन लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के गाज़ा में शांति प्लान के तहत हुई प्रगति पर इज़रायली पीएम को बधाई दी। इसके साथ ही पीएम मोदी ने बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों को मानवीय सहायता बढ़ाने पर हुए समझौते का स्वागत भी किया। पीएम मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि दुनिया में कहीं भी किसी भी रूप या स्वरूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है। मोदी बोले-आतंकवाद कहीं भी बर्दाश्त नहीं इस बातचीत के तुरंत बाद पीएम मोदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, मैंने अपने मित्र प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू को फोन करके गाजा शांति योजना में हुई प्रगति पर बधाई दी. हमने बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों के लिए बढ़ाई जा रही मानवीय मदद का स्वागत किया. मैंने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में और कहीं भी स्वीकार्य नहीं है. मोदी के इस ट्वीट को कुछ ही मिनटों में लाखों व्यूज़ मिले और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे हाथों-हाथ लिया. कई विश्लेषकों ने कहा कि यह बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत अब पश्चिम एशिया की राजनीति में एक संतुलित लेकिन प्रभावी भूमिका निभा रहा है. सोमवार तक रिहा होंगे सभी बंधक इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि गाज़ा में हामास के कब्जे में मौजूद बंधकों को सोमवार या मंगलवार को रिहा कर दिया जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि वे मिस्र में आयोजित होने वाली समझौते की हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे. ट्रंप ने व्हाइट हाउस कैबिनेट बैठक में बताया कि बुधवार को बंधकों की रिहाई और गाज़ा के पुनर्निर्माण के पहले चरण पर समझौता हुआ. हामास 72 घंटे के संघर्षविराम के बाद 20 बचे बंधकों को एक साथ रिहा करेगा. ट्रंप ने इसे खुशी का दिन बताया और कहा कि इससे क्षेत्र में “स्थायी शांति” की उम्मीद है. गाजा डील और नेतन्‍याहू की मुश्किलें इजरायल और हमास के बीच महीनों से चल रहे संघर्ष में यह सीजफायर डील बेहद अहम मानी जा रही है. इसमें सभी बंधकों की रिहाई और गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने की बात कही गई है. इजरायल के भीतर इस समझौते को लेकर मतभेद हैं. कुछ नेता मानते हैं कि यह आतंक के आगे झुकना है, तो कुछ इसे जरूरी राहत बता रहे हैं. ऐसे वक्त में नेतन्‍याहू का मोदी से बात करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश है कि भारत न सिर्फ गाजा संकट पर नज़र रखे हुए है, बल्कि शांति के हर प्रयास का समर्थन कर रहा है. पीएम मोदी ने इजरायल को बताया भारत का मित्र प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमेशा से भारत के घनिष्ठ मित्र रहे हैं और दोनों देशों के बीच यह मित्रता आने वाले समय में भी और मजबूत रहेगी. मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल के रिश्ते आपसी विश्वास, सहयोग और समान मूल्यों पर आधारित हैं और यह संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मोदी का इजरायल के प्रति समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि भारत और इजरायल आगे भी करीबी साझेदारी और समन्वय के साथ विभिन्न मुद्दों पर साथ काम करते रहेंगे. पीएम ने की ट्रंप से बात गुरुवार को इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की और उन्हें अमेरिका की ओर से कराए गए गाजा शांति समझौते के पहले चरण की सफलता पर बधाई दी. यह तीन हफ्तों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दूसरी फोन कॉल थी. प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक शांति योजना को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, मैंने मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात की और ऐतिहासिक गाजा शांति योजना की सफलता पर उन्हें बधाई दी. व्यापारिक वार्ताओं में हुई अच्छी प्रगति की भी समीक्षा की. गाजा में हुआ युद्धविराम अमेरिका ने घोषणा की कि इजराइल और हमास — जो पिछले दो साल से एक-दूसरे से लड़ रहे हैं — उन्होंने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर सहमति बना ली है. इस पहले चरण में गाजा पट्टी में युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जाएगा और इजराइली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की जाएगी. यह युद्ध उस समय शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइली पर हमला किया था. इस हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हो गई थी और हमास ने 251 लोगों को बंधक बना लिया था, जिनमें से अब भी 50 से अधिक लोग उसकी कैद में हैं. इजराइल ने इस हमले के बाद गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया. फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. यह शांति समझौता उस लंबे संघर्ष में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिसने गाजा … Read more

गरीबी नहीं छोड़ेगी साथ, अगर पैसों को लेकर आपकी सोच में हैं ये 5 गलतियां!

कई बार मेहनत के बाद भी लोगों के पास पैसा नहीं टिकता या उनका कोई काम बनते-बनते बिगड़ जाता है। इसके पीछे आपकी सोच भी जिम्मेदार हो सकती है।अगर आप भी पैसों को ले कर ये बातें जानें-अनजाने में बोलते रहते हैं, तो आज ही बंद कर दें। पैसों को ले कर बदलें नजरिया आपने सुना ही होगा कि जैसा हम बोलते हैं, वैसा ही जीवन में हमें मिलता हैं। पैसों के बारे में भी ठीक यही बात लागू होती है। पैसों को ले कर आपके विचार, आपकी धारण और आपका नजरिया कैसा है, ये तय करता है कि आपके पास पैसा रहेगा या नहीं। कई बार फुल मेहनत के बाद भी लोगों के पास पैसा नहीं टिकता या उनका कोई काम बनते-बनते बिगड़ जाता है। इसके पीछे आपकी सोच भी जिम्मेदार हो सकती है। ऐसे में अगर आप भी पैसों को ले कर ये बातें जानें-अनजाने में बोलते रहते हैं, तो आज ही इन्हें बंद कर दें। पैसा ही सब कुछ नहीं होता इमोशनली ये बात कहने में ठीक लग सकती है, लेकिन प्रैक्टिकली देखें तो ये पैसों को ले कर एक नेगेटिव धारणा ही है। जब आप पैसों को ले कर ये नजरिया रखते हैं, तो कहीं ना कहीं ये सिग्नल देते हैं कि पैसे उतने जरूरी भी नहीं है। इसके चलते आप पैसों की सही मैनेजमेंट से भी दूर हो जाते हैं। पैसे को इज्जत और ग्रेटीट्यूड की भावना से देखेंगे, तो आप अपनी तरफ उन्हें अट्रैक्ट भी कर पाएंगे। मेरे पास तो पैसा टिकता ही नहीं है कई लोग ये बात बड़े आराम से बोल देते हैं। जबकि ऐसा बोलने से वो पैसों को खुद से और दूर कर रहे होते हैं। दरअसल आपके शब्दों में बहुत ताकत होती है। कोई भी चीज आप बार-बार बोलते रहते हैं, तो आपके माइंड को उसपर विश्वास हो जाता है और फिर जीवन में आप वैसा ही अट्रैक्ट करते हैं। ऐसे में अगर जाने-अनजाने आप भी यही कहते रहते हैं, तो यकीन मानिए आपके पास कभी सच में पैसा नहीं टिकने वाला। हमारी किस्मत में इतना पैसा कहां ये बात बोलकर आप पहले ही खुद को विश्वास दिला देते हैं कि आप ज्यादा पैसों के काबिल हैं ही नहीं। पैसों को ले कर जबतक आपके मन में ये धारण बनी रहेगी, तब तक आप कभी भी ज्यादा पैसा नहीं काम पाएंगे। खुद को विश्वास दिलाएं कि आप भी पैसे के काबिल हैं और भूलकर भी अपनी किस्मत को तो दोषी ना ही ठहराएं। पैसा बुराई की जड़ है कई लोग पैसे को बड़ी नेगेटिविटी के साथ देखते हैं। उन्हें लगता है कि सारी बुराई की जड़ पैसा ही है और सारे बुरे लोग पैसे वाले ही हैं। खुद ही सोचिए जब आप इस गलत नजरिए से देखेंगे तो भाला कहां से पैसा आपकी लाइफ में अट्रैक्ट होगा? इसके बजाय ये भी देखिए कि अच्छे काम भी तो पैसे की वजह से ही हो रहे हैं। सकारात्मक नजरिया रखेंगे तो लाइफ में भी वैसा ही अट्रैक्ट करेंगे। पैसे पेड़ पर नहीं उगते ये बात तो जैसे हम इंडियंस की फेवरिट है। बच्चा कुछ मांगे कि झट से डायलॉग आता है पैसे पेड़ पर नहीं उगते। ऐसा बोल-बोल कर हम अपने माइंड को विश्वास दिला देते हैं कि पैसा कमाना बड़ी मुश्किल चीज है और शायद हमारे बस की बात भी नहीं। इसकी जगह सकारात्मक नजरिया रखें। पैसा कामना मुश्किल हो सकता है लेकिन सही मेहनत के साथ नामुमकिन बिल्कुल नहीं है। पॉजिटिविटी से अट्रैक्ट करें पैसे हम सभी की लाइफ में जरूरी हैं, इसलिए इन्हें ले कर अपना नजरिया जरूर ठीक करें। सकारात्मक सोचें और जितना भी आपके पास है उसके लिए भगवान का शुक्रिया अदा करें। बच्चों के या अपने मन में ये कभी ना डालें कि आप इतना पैसा नहीं कमा सकते हैं या पैसा बुरी चीज है। जैसी सोच रखेंगे यकीन मानें वैसी ही चीजें आपकी लाइफ में होती नजर आएंगी।

सारी कोशिशें रहीं नाकाम, ट्रंप ने नहीं दी पाकिस्तान को AMRAAM मिसाइल की मंजूरी

वाशिंगटन पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शहबाज और मुनीर अमेरिका तक गए और उन्होंने रेयर अर्थ मिनरल का खजाना भी सौंप दिया. लेकिन इसके बावजूद अब अमेरिका ने भारत को झटका दिया है. भारत में अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया. अमेरिकी दूतावास ने उन मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका पाकिस्तान को एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल्स (AMRAAM) बेचने जा रहा है. दूतावास ने स्पष्ट कहा है कि यह जानकारी गलत व्याख्या पर आधारित है और पाकिस्तान को किसी प्रकार की नई या उन्नत मिसाइल प्रणाली नहीं दी जा रही है. अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 30 सितंबर 2025 को अमेरिकी ‘डिपार्टमेंट ऑफ वार’ (जो मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट की सार्वजनिक सूची जारी करता है) ने कई कॉन्ट्रैक्ट्स की जानकारी साझा की थी. उसी सूची में पाकिस्तान से जुड़ा एक विदेशी मिलिट्री बिक्री कॉन्ट्रैक्ट संशोधन भी शामिल था, लेकिन उसका उद्देश्य केवल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति था. दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है- ‘यह कॉन्ट्रैक्ट किसी नई मिसाइल डिलीवरी या पाकिस्तान की मौजूदा हवाई युद्ध क्षमता को अपग्रेड करने से जुड़ा नहीं है. सस्टेनमेंट का मतलब केवल मौजूदा सिस्टम के सपोर्ट से है, अपग्रेड से नहीं.’ नहीं मिलेंगी नई मिसाइलें बीते कुछ दिनों से कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलें उपलब्ध करा रहा है. रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि इससे पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा. नई मिसाइल सेल की खबरों ने इस धारणा को हवा दी थी कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते फिर से गर्म हो रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी दूतावास के बयान ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य केवल सिस्टम का रखरखाव, उपकरण अपडेट और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति है. इसे किसी भी रूप में पाकिस्तान की हवाई शक्ति बढ़ाने के कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जो कई देशों के साथ चलते रहते हैं. इसमें हथियार प्रणाली के रखरखाव, परीक्षण, और सप्लाई चेन के सुचारु संचालन से जुड़े तकनीकी अपडेट शामिल होते हैं. बयान में यह भी जोड़ा गया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन’ शब्द का गलत अर्थ निकालते हुए इसे नए हथियारों की सप्लाई समझ लिया.