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क्यों बदला जाए चांदनी चौक का नाम? पंजाब BJP ने बताई बड़ी वजह

चंडीगढ़ पंजाब भाजपा द्वारा दिल्ली के ऐतिहासिक चांदनी चौक का नाम बदलकर ''शीश गंज चौक'' रखने की मांग की गई है। इसे लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पंजाब बीजेपी प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलिएवाल ने पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर इसे लेकर घोषणा की जाए। पंजाब बीजेपी प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलिएवाल ने पत्र में लिखा है कि चांदनी चौक वही स्थान है जहां गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म और मानवता की रक्षा के लिए शहादत दी थी, इसलिए यह स्थान उनके बलिदान को समर्पित होना चाहिए। इसके साथ ही पार्टी ने सुझाव दिया है कि चांदनी चौक से सटे तीन मेट्रो स्टेशनों के नाम भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाल दास के नाम पर रखे जाएं, जिन्होंने गुरु तेगबहादुर जी के साथ बलिदान दिया था। बलिएवाल ने कहा कि यह कदम न सिर्फ इतिहास को सम्मान देगा, बल्कि देश की नई पीढ़ी को सिख गुरुओं के त्याग और शौर्य की प्रेरणा भी प्रदान करेगा। 

‘छावा’ के बाद विक्की कौशल का नया अवतार: महावतार में परशुराम की भूमिका निभाएंगे

मुंबई  छावा की सक्सेस के बाद विक्की कौशल अपने नए प्रोजेक्ट में लग गए हैं. उनकी नई फिल्म भी काफी बड़े पैमाने पर आने वाली है जिसके लिए उन्होंने अपनी डाइट से लेकर लाइफस्टाइल में कई बड़े बदलाव करने का फैसला लिया है. विक्की कौशल जल्द ही स्त्री 2 के डायरेक्टर अमर कौशिक के साथ विष्णु के चिरंजीवी परशुराम पर बनने वाली कहानी में काम करेंगे. इसका टाइटल ‘महावतार’ बताया जा रहा है. एक रिपोर्ट का दावा है कि इस फिल्म के लिए वह शराब-नॉनवेज तक छोड़ देंगे. इस तरह की खबरें रणबीर कपूर को लेकर भी आई थीं. वह नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में प्रभु राम की भूमिका निभा रहे हैं. पिछले साल कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि रणबीर कपूर श्रीराम का रोल निभाने के लिए अंडा-मांस व शराब से दूर हो गए हैं. ‘महावतार’ के लिए विक्की कौशल का त्याग अब ‘महावतार’ के लिए विक्की कौशल ने भी कुछ ऐसा ही त्याग किया है. ‘बॉलीवुड हंगामा’ की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि विक्की कौशिल और अमर कौशिक ने ‘महावतार’ के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. वह दर्शकों को एक शानदार कहानी और विजुअल के साथ ग्रैंड एक्सीपीरियंस देना चाहते हैं. एक्टर ने तो ‘महावतार’ के लिए नॉनवेज छोड़ने का भी फैसला लिया है. अगले साल पूजा मुहूर्त के बाद फिल्म पर काम शुरू होगा. डायरेक्टर ने भी छोड़ा नॉनवेज सूत्रों ने बताया कि अमर कौशिक ने तो ‘महावतार’ के लिए अभी से खाने-पीने की आदतों में कई बदलाव किए हैं. वहीं विक्की कौशल भी उनसे सहमत है. वह संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ के बाद इस फिल्म पर काम करेंगे और भगवान परशुराम के किरदार को पूरी शिद्दत और शक्ति से निभाने के लिए वह भी मांस-मछली और शराब जैसी आदतों से तौबा करेंगे. कब तक आएगी ‘महावतार’ रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘महावतार’ अगले साल अंत तक फ्लोर पर आएगी. उम्मीद की जा रही है कि 2028 तक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो. बता दें विक्की कौशल इस वक्त रणबीर कपूर और आलिया भट्ट के साथ भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर पर काम कर रहे हैं. ये फिल्म अगले साल आएगी. पहला मौका होगा जब ये तिकड़ी पर्दे पर दिखेगी.

बिहार में सियासी बवाल: विजय सिन्हा के काफिले पर हमला, उपमुख्यमंत्री ने RJD पर लगाया आरोप

पटना बिहार चुनाव के बीच लखीसराय से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। दरअसल राजद (RJD) समर्थकों ने उपमुख्यमंत्री और लखीसराय निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा की कार को घेर लिया, चप्पल फेंकी और "मुर्दाबाद" के नारे लगाते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद हैं। बिहार के उपमुख्यमंत्री और  लखीसराय विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा ने कहा, "ये राजद के गुंडे हैं। NDA सत्ता में आ रही है… गुंडे मुझे गांव में जाने नहीं दे रहे हैं। विजय सिन्हा जीतने वाले हैं…उन्होंने मेरे पोलिंग एजेंट को भगा दिया और उसे वोट नहीं देने दिया…उनकी गुंडागर्दी देखिए…।" आरजेडी के गुंडों ने बूथ कैप्चर किया है। आरोपियों पर बुलडोडर एक्शन होगा। हम निर्वाचन आयोग से शिकायत करेंगे।

भाजपा प्रवक्ता ने की मांग, चांदनी चौक का नाम बदलकर शीश गंज चौक रखने का पत्र दिल्ली सरकार को भेजा

चंडीगढ़  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की पंजाब ईकाई ने दिल्ली के चांदनी चौक का नाम शीश गंज रखने की मांग की है. 25 नवंबर को गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी वर्षगांठ से पहले पार्टी ने ये अपील की है. पंजाब बीजेपी के नेता और पार्टी प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेटर लिखकर ये मांग की. बलियावाल ने लिखा, यह भारत के सहिष्णुता, बहादुरी और आस्था की स्वतंत्रता के मूल्यों के प्रति ऐतिहासिक श्रद्धांजलि होगी. उन्होंने कहा कि वह एक सिख और एक भारतीय दोनों के रूप में गहरी श्रद्धा के साथ गुरु तेग बहादुर जी, हिंद की चादर के अद्वितीय बलिदान को याद करने के लिए लिख रहे हैं. गुरु तेग बहादुर ने धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा और मानवता की अंतरात्मा की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. चुप्पी के बजाय बलिदान को चुना उन्होंने कहा कि चांदनी चौक का नाम बदलकर शीश गंज रखने से गुरु तेग बहादुर जी की शहादत की भावना अमर हो जाएगी और आने वाली पीढ़ियों को याद दिलाया जाएगा कि भारत उन लोगों की वजह से मजबूत है, जिन्होंने चुप्पी के बजाय बलिदान को चुना. उन्होंने मुख्यमंत्री से इस प्रस्ताव पर संवेदनशीलता और गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया. मानवता की अंतरात्मा की रक्षा के लिए दिया बलिदान  बलियावाल ने अपने पत्र में लिखा है कि वह गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती के इस पवित्र अवसर पर ‘हिंद की चादर’ गुरु तेग बहादुर के अद्वितीय बलिदान को याद करने के लिए एक सिख और एक भारतीय दोनों रूप में गहरी श्रद्धा के साथ यह पत्र लिख रहे हैं. गुरु तेग बहादुर ने धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा और मानवता की अंतरात्मा की रक्षा के लिए बलिदान दिया. निर्दोष लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए किया गया मजबूर  उन्होंने लिखा कि औरंगजेब के अधीन मुगल शासन के दौरान 1675 में धार्मिक उत्पीड़न अपने चरम पर था. उस समय मंदिरों को नष्ट कर दिया गया, धर्मग्रंथों को जला दिया गया और निर्दोष लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया. पंडित कृपा राम के नेतृत्व में 500 से अधिक कश्मीरी पंडितों ने अपने धर्म की रक्षा के लिए श्री आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर से मुलाकात की. गुरु साहिब ने उनकी पीड़ा सुनकर सर्वोच्च बलिदान देने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर का सिर उसी स्थान पर काटा गया था, जहां आज गुरुद्वारा शीशगंज साहिब स्थित है, यह स्थान साहस, बलिदान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का प्रतीक है. बलियावाल ने आग्रह किया कि चांदनी चौक का नाम बदलकर शीशगंज करना और आसपास के मेट्रो स्टेशन को इन शहीदों को समर्पित करना एक प्रशासनिक निर्णय से कहीं बढ़कर होगा. शीश गंज गुरुद्वारा का क्या है महत्व? शीश गंज गुरुद्वारा का क्या महत्व है, बलियावाल ने इसके बारे में भी बताया.उन्होंनेलिखा कि 1675 में मुग़ल शासन के दौरान धार्मिक उत्पीड़न अपने चरम पर था. मंदिरों को नष्ट कर दिया गया, धर्मग्रंथों को जला दिया गया और निर्दोष लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया. पंडित कृपा राम के नेतृत्व में 500 से ज़्यादा कश्मीरी पंडितों ने अपने धर्म की रक्षा के लिए श्री आनंदपुर साहिब में गुरु तेग बहादुर से संपर्क किया. बीजेपी नेता ने लिखा कि गुरु साहिब ने सरबत दा भला के सिद्धांत को कायम रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान देने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर का सिर उसी स्थान पर काटा गया था जहां आज गुरुद्वारा श्री शीश गंज साहिब स्थित है, यह स्थान आज भी साहस, बलिदान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का प्रतीक है. उन्होंने लिखा, इस पवित्र स्थान से गुजरने वाले हर व्यक्ति को यह याद दिलाया जाएगा कि यह वह भूमि है जहां सत्य के लिए सिर कुर्बान किया गया था, लेकिन सत्य से कभी समझौता नहीं किया गया. बलियावाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ऐसा निर्णय दुनिया भर के करोड़ों सिखों और भारतीयों को गर्व और श्रद्धा से भर देगा और एकता तथा सर्वधर्म सम्मान का एक मजबूत संदेश देगा  

मतदान के दौरान छपरा में बड़ी गड़बड़ी — 150 वोटर लिस्ट से नदारद!

छपरा बिहार में पहले चरण की 121 सीटों पर जारी मतदान के  बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। दरअसल, छपरा विधानसभा के ब्रह्मपुर मोहल्ले के 150 लोगों का नाम वोटर लिस्ट से गायब है, जिसके चलते लोगों में भारी आक्रोश है।   वोट डालने पहुंचे लोग इसे बड़ी साजिश बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि 'BLO की लापरवाही के कारण हम वोट नहीं दे पा रहे हैं। सारे डॉक्यूमेंट देने के बाद भी लिस्ट में नाम नहीं है। दूसरी ओर राजद ने लखीसराय में बूथ कैपचरिंग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के 'मजबूत बूथों' पर वोटिंग की गति को धीमा करने के लिए जानबूझकर बिजली काटी जा रही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने आरजेडी के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद का भविष्य

सीहोर  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से ठीक एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने वहां के दौरे के अनुभव बताए. शिवराज ने बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम और मुख्यमंत्री पद को लेकर दावा किया. शिवराज सिंह चौहान का कहना है "इसमें एक परसेंट भी शक नहीं कि बिहार में किसकी सरकार बनने जा रही है. उन्होंने खुद बिहार का दौरा किया और और वह दावे से कह सकते हैं कि एनडीए बहुत से सरकार बनाने जा रही है." राहुल गांधी के मछली पकड़ने पर चुटकी ली सीहोर में शिवराज सिंह चौहान ने कहा "बिहार में महागठबंधन तो वोटिंग से पहले ही उखड़ गया. उनका आत्मविश्वास हिल गया है. उनको पता है कि जंगलराज आज भी लोगों को याद है. महागठबंधन के नेता हथियार डाल चुके हैं. यहां तक कि राहुल गांधी चुनाव प्रचार छोड़कर मछली पकड़ने का काम कर रहे हैं. जलेबी तल रहे हैं, उनको पता है कि चुनाव NDA भारी बहुमत से जीतेगा. परिणाम स्पष्ट है कि NDA की महाविजय होने वाली है. इस बात को महागठबंधन के नेता भी एक प्रकार से स्वीकार कर चुके हैं." दो दिन पहले पटना में थे शिवराज केंद्रीय कृषि शिवराज सिंह चौहान 4 अक्टूबर को पटना में ही थे. उन्होंने पटना के गांधी मैदान स्थित ज्ञान भवन में आयोजित मखाना महोत्सव 2025 में भाग लिया. इससे पहले भी शिवराज सिंह चौहान लगातार बिहार का दौरा कर चुके हैं. उनका कहना है "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 64 हजार करोड़ करोड़ रुपये की सौगात दी है. एनडीए के कार्यकाल में बिहार में विकास हुआ है. इस बात को बिहार की जनता भी कह रही है. बिहार की जनता आज भी लालू के जंगलराज को याद करके डर जाती है." बिहार में सबसे बड़ा मुद्दा सुशासन शिवराज का कहना है "बिहार में इस बार चुनाव के मुद्दे विकास के अलावा सुशासन भी है. नीतीश कुमार के कार्यकाल कानून व्यवस्था दुरुस्त है. राज्य में हर ओर विकास किया गया है. एनडीए ने जन कल्याण की कई योजनाएं बनाई हैं. महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया है. बिहार में लखपति दीदी बनाने का अभियान सारहनीय है. हर बहन के खाते में 10,000 रुपये डाले गए हैं." बिहार में मुख्यमंत्री को लेकर कोई गफलत नहीं बिहार में मुख्यमंत्री के सवाल पर शिवराज ने साफ किया "कहीं कोई भ्रम नहीं है. एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है. मुख्यमंत्री के पद को लेकर विपक्षी दल भ्रम फैला रहे हैं. लेकिन बिहार की जनता विपक्षी दलों की बातों में नहीं आने वाली. बिहार में महागठबंधन का मतलब डर है और एनडीए यानी भरोसा है. बिहार की जनता महागठबंधन की सच्चाई जान चुकी है." 

आज से MP में हेलमेट नियम सख्त, पीछे बैठने वालों को भी पहनना होगा, इन 5 जिलों पर फोकस

भोपाल  मध्यप्रदेश में सड़क हादसों में बढ़ती मौतों को देखते हुए आज से प्रदेशभर में हेलमेट अनिवार्यता को लेकर पुलिस का विशेष अभियान शुरू हो गया है. अब न केवल दोपहिया वाहन चालक, बल्कि पीछे बैठने वाले व्यक्ति को भी हेलमेट पहनना जरूरी होगा. राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 6 नवंबर से पूरे प्रदेश में यह अभियान शुरू किया गया है. इस दौरान ट्रैफिक पुलिस हेलमेट न पहनने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी. पुलिस का कहना है कि यह अभियान केवल चालान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी फोकस किया जाएगा. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन इन पांच जिलों में अभियान को लेकर विशेष सख्ती बरती जाएगी. कारण यह है कि पूरे प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में से 58 प्रतिशत मौतें इन्हीं जिलों में दर्ज हुई हैं.  2 व्हीलर्स पर अगर एक शख्स ने हेलमेट पहना है और दूसरे ने नहीं तो 300 रुपए का चालान होगा और अगर दोनों ने हेलमेट नहीं पहना तो 500 रुपए का जुर्माना होगा.  4 साल की उम्र से बड़े पिलियन राइडर (दोपहिया पर ड्राइवर के पीछे बैठने वाले) के हेलमेट न पहनने पर 300 रुपए का चालान बनता है। डीआईजी टीके विद्यार्थी ने कहा- फिलहाल 5 बड़े शहरों में इसे लागू किया गया है। अगले चरण में इसे पूरे प्रदेश में लागू करेंगे। इस अभियान के पहले दिन गुरुवार को भोपाल में ट्रैफिक पुलिस 20 पॉइंट्स पर चालानी कार्रवाई कर रही है। इस दौरान अलग-अलग नजारे सामने आ रहे हैं। कोई कह रहा है कि पुलिसकर्मी सामने से गुजरा, तब चालान क्यों नहीं किया? किसी ने कहा- बच्ची एडमिट है। जल्दी में हेलमेट भूल गया।  एक नजर आंकड़ों पर:- – 2024 में प्रदेशभर में 14 हजार 791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई  – इंदौर: शहर में 2 हजार 425 और ग्रामीण क्षेत्र में 290 मौतें – भोपाल: शहर में 945 और ग्रामीण क्षेत्र में 235 मौतें – जबलपुर: 2,035 मौतें – उज्जैन: 1,536 मौतें – ग्वालियर: 1,049 मौतें – इन पांच जिलों में कुल 8 हजार 515 लोगों की जान गई, जो राज्य की कुल मौतों का 58 प्रतिशत है.

स्वर्णजीत खालसा का बड़ा कारनामा: जालंधर से कनेक्टिकट तक, अब मेयर बनें

जालंधर अमेरिका के कनेक्टिकट शहर में हुए स्थानीय चुनाव में जालंधर के रहने वाले परमिंदर पाल खालसा के बेटे स्वर्णजीत सिंह खालसा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वह कनेक्टिकट के पहले सिख मेयर बने हैं। चुनाव में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार पीटर नाइस्ट्रम की जगह लेते हुए नॉरविच शहर की कमान संभाल ली है। इससे सिख समुदाय में खुशी की लहर है। स्वर्णजीत सिंह ने 2458 वोट पाकर जीत हासिल की जबकि उनके मुकाबले ट्रेसी गॉल्ड को 2250 और स्वतंत्र प्रत्याशी मार्शिया विल्बर को केवल 110 वोट मिले। इस जीत से डैमोक्रेटिक पार्टी को भी नॉरविच में महत्वपूर्ण बढ़त मिली, जहां पहले लंबे समय तक रिपब्लिकन का प्रभाव रहा था। खालसा का परिवार पंजाब में पंथक राजनीति में सक्रिय रहा है। स्वर्णजीत सिंह खालसा का परिवार 1984 के सिख नरसंहार के दौरान विस्थापित हुआ था। उनके पिता परमिंदर पाल खालसा ने जालंधर में प्रापटी का कारोबार शुरू किया और एक मुकाम हासिल किया। स्वर्णजीत 2007 में रोजगार और अपने नए भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। नॉरविच में उन्होंने शुरुआत में गैस स्टेशन चलाया और बाद में रियल एस्टेट कारोबार में भी पहचान बुनाई।  2021 में वह नॉरविच सिटी काऊंसिल में चुने गए, जो कनेक्टिकट में किसी सिख समुदाय का पहला प्रतिनिधित्व था। अब 2025 में वह शहर के मेयर बन गए हैं, यह सिख समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। स्वर्णजीत सिंह खालसा ने यूएसए में स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर पुलिस अधिकारियों को सिख धर्म, पगड़ी और कृपाण की वास्तविकता व महत्व के बारे में शिक्षित किया। उनके काम के सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए एक अमरीकी कानून प्रवर्तन एजेंसी ने उनका नामांकन किया था और उन्हें एफबीआई लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया। चुनाव प्रचार के दौरान स्वर्णजीत ने स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखा जिनमें किफायती आवास, स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा, समुदाय में एकजुटता प्रमुख रहे। खालसा अब शहर के बुनियादी ढांचे और डाऊनटाउन विकास को आगे बढ़ाने के लिए नगर विकास एजेंसी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों, जिनमें पंजाबी और भारतीय समुदाय भी शामिल है, पहचान और मूल्यों से जुड़ी छवि एक अमृतधारी सिख होने के नाते उन्होंने समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का काम भी किया। उन्होंने स्कूलों में जाकर बच्चों को सिख इतिहास और पगड़ी की गरिमा के बारे में समझाया और नफरत अपराधों के खिलाफ आवाज उठाई।  

अचानक बिगड़ी ADJ तपेश कुमार दुबे की तबियत, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया

आमला बैतूल जिले के आमला में पदस्थ अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) तपेश कुमार दुबे के निधन से न्याय जगत के साथ ही प्रशासनिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई. वह आमला क्षेत्र के लादी गांव में विजिट करने गए थे. अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई. तुरंत ही मौके पर डॉक्टर्स को बुलाया गया. डॉक्टर्स ने चेकअप करने के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. माना जा रहा है कि उन्हें अचानक हार्ट अटैक पड़ा. वह 55 वर्ष के थे. तबियत बिगड़ते ही डॉक्टर्स को बुलाया मौके पर मौजूद अफसरों ने लादी गांव में विजिट के दौरान एडीजे तपेश कुमार दुबे को अचानक अस्वस्थता महसूस हुई. दौरे में साथ चल रहे अफसरों ने तुरंत मौके पर चिकित्सकों को बुलाया. लेकिन डॉक्टरों ने जांच करने के बाद उन्हें मृत बताया. इससे सभी न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा कर्मचारी स्तब्ध रह गए. एसडीएम बडोनिया ने बताया "एडीजे तपेश कुमार दुबे एक अत्यंत समर्पित और ईमानदार अधिकारी थे. यह पूरी न्यायिक सेवा के लिए एक बड़ी क्षति है. प्रशासन इस घटना से गहराई से स्तब्ध हैं.” छिंदवाड़ा में हुआ अंतिम संस्कार अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) तपेश कुमार दुबे मूल रूप से छिंदवाड़ा शहर के पटेल कॉलोनी के रहने वाले थे. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. शासन की ओर से उनके पार्थिव शरीर को उनके गृह ग्राम छिंदवाड़ा भेजने की आवश्यक व्यवस्था की गई. उनका अंतिम संस्कार छिंदवाड़ा के पातालेश्वर मोक्षधाम में हुआ. एडीजे तपेश दुबे ने वकील के रूप में छिंदवाड़ा में कई वर्षों तक काम किया. हार्ट अटैक के लक्षण हार्ट अटैक आने से पहले हार्ट की मांसपेशियों में रक्त संचार रुक जाता है. इस पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. हार्ट अटैक आने से पहले इन संकेतों को समझें.     सीने में दर्द या बेचैनी     शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द     सांस लेने में कठिनाई     पसीना आना     मतली या उलटी     थकान     चक्कर आना

डोनाल्ड ट्रंप बोले, भारत-पाक संघर्ष में 8 विमान हुए ध्वस्त, 7 नहीं

मियामी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के अपने दावे को दोहराया है और युद्ध के दौरान गिराए गए लड़ाकू विमानों की संख्या सात से बढ़ाकर आठ कर दी है. उन्होंने कहा कि दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों ने मई में "शांति स्थापित" तभी की जब ट्रंप ने अपने व्यापार समझौते रद्द करने की धमकी दी थी. उन्होंने  मियामी में अमेरिका व्यापार मंच पर अपने बेतुके दावे को फिर दोहराया. अमेरिका बिजनेस फोरम पर उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच मई वाली तनाव की कहानी दोहराई. लेकिन इस बार ट्विस्ट ये कि उन्होंने लड़ाई में गिराए गए फाइटर जेट्स की संख्या 7 से बढ़ाकर 8 करके लोगों को खूब जोश में अपनी बातें कहीं.  ट्रंप ने अपनी स्पीच में बड़े ही जोश के साथ बताया कि वो भारत-पाक के साथ ट्रेड डील पर बात कर रहे थे. अचानक अखबार में पढ़ा कि दोनों के बीच युद्ध छिड़ गया. "मैंने सुना, 7 प्लेन शूट डाउन हो गए, और आठवां बुरी तरह घायल था. मतलब 8 प्लेन गिरे," ट्रंप ने कहा. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये दो न्यूक्लियर नेशन थे, इसलिए मैंने साफ कह दिया- "ट्रेड डील भूल जाओ जब तक शांति न हो." ट्रेड की धमकी ने कैसे बदला खेल? ट्रंप ने आगे बताया कि दोनों देशों ने कहा, "ये ट्रेड से जुड़ा नहीं." लेकिन मैंने साफ ललकारा, "ये सब कुछ से जुड़ा है. तुम न्यूक्लियर पावर हो, युद्ध में रहोगे तो कोई डील नहीं." अगले ही दिन फोन आया- "हम शांति कर चुके." ट्रंप ने तालियां बजवाते हुए कहा, "थैंक यू, अब ट्रेड करते हैं. बिना टैरिफ के ये कभी न होता." उन्होंने इसे अपनी 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ' पॉलिसी का हिस्सा बताया. ट्रंप ने ये भी जोड़ा कि उनके दूसरे टर्म में 8 महीनों में 8 युद्ध रोके जिसमें कोसोवो-सेरबिया, कांगो-रवान्डा समेत. भारत-पाक को भी इसमें गिना. लेकिन हकीकत ये है कि भारत ने कभी अमेरिकी दखल माना ही नहीं. भारत ने नकारा, ट्रंप फिर भी अलाप रहे राग भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे का खंडन किया है और हमेशा कहा कि 10 मई को पाकिस्तानी कमांडरों द्वारा अपने भारतीय समकक्षों से आक्रमण रोकने की विनती करने के बाद युद्धविराम हुआ था. हालांकि, इसके बाद भी ट्रंप अपने अपने दावे को दोहराने से नहीं रुक रहे. वह मई से ही अपना दावा दोहरा रहे हैं कि अमेरिका की मध्यस्थता में लंबी रात की बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हुए हैं. रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के अपने दावे को कम से कम 60 बार दोहराया है, जबकि भारत ने लगातार वाशिंगटन के किसी भी हस्तक्षेप से इनकार किया है.