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प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा, अभियान की शुरुआत

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को मिलेगा आवासीय भूमि का पट्टा,  अभियान की हुई शुरूआत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा, अभियान की शुरुआत भूमिहीन परिवारों के लिए खुशखबरी, नगरीय इलाकों में आवासीय भूमि के पट्टे वितरण का अभियान शुरू भोपाल राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन और आवासहीन परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टाधिकार प्रदान करने के लिए 20 नवम्बर गुरूवार से व्यापक अभियान शुरू किया है। आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि यह अभियान 13 दिसम्बर 2025 तक चलेगा। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा राजस्व विभाग ने संयुक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत बीएलसी और एएचपी घटकों के सुचारू क्रियान्वयन के लिए यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने वर्ष 1984 के मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधिकार) अधिनियम में संशोधन करते हुए पात्रता तिथि को 31 दिसम्बर 2020 निर्धारित किया है। इस तिथि तक सरकारी, नगर निकाय या विकास प्राधिकरण की भूमि पर वास्तविक रूप से काबिज ऐसे आवासहीन परिवार पट्टाधिकार प्राप्त करने के पात्र होंगे। राज्य के सभी नगरीय क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य 20 नवम्बर से 13 दिसम्बर तक चलेगा। सूची 14 दिसम्बर को प्रकाशित की जाएगी। किसी भी आपत्ति या सुझाव के निराकरण के बाद 29 दिसम्बर को अंतिम सूची संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा जारी की जाएगी। यह सूची संबंधित जिला कार्यालय की वेबसाइट और विभागीय वेबसाइट www.mpurban.gov.in पर भी उपलब्ध रहेगी। प्रत्येक जिले में सर्वेक्षण दल गठित किए जाएंगे, जिनमें राजस्व अधिकारी प्रमुख होंगे और सर्वेक्षण के दौरान आधार e-KYC आधारित समग्र ID अनिवार्य रहेगी। नगरीय विकास आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद पात्र हितग्राहियों को आवासीय भूमि के स्थाई एवं अस्थायी पट्टों का वितरण 4 जनवरी 2026 से 20 फरवरी 2026 के मध्य किया जाएगा। स्थाई पट्टे लाल रंग में और अस्थायी पट्टे पीले रंग में प्रदान किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में झुग्गी बस्तियों का अन्यत्र पुनर्व्यवस्थापन आवश्यक है, वहां समिति के निर्णय के अनुसार हितग्राहियों को वैकल्पिक स्थान पर व्यवस्थित किया जाएगा। स्थाई रूप से पट्टा प्राप्त क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, नालियां, बिजली और अन्य आवश्यक अधोसंरचना का विकास नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरणों द्वारा प्राथमिकता से किया जाएगा। राज्य शासन ने पट्टा वितरण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जन-जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। अवैध अधिपत्य, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के आधार पर पट्टा प्राप्त करने जैसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर ब्लैकलिस्ट तैयार की जाएगी। राज्य सरकार का यह अभियान शहरी गरीबों को सुरक्षित आवासीय अधिकार प्रदान करने, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के सुचारू क्रियान्वयन और “सबके लिए आवास” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का यह प्रयास शहरी गरीबों के लिए स्थायी समाधान प्रदान करने वाला है।  

शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को अंतिम विदाई, प्रहलाद पटेल ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की

नरसिंहपुर  देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले बलिदानी आशीष शर्मा को समूचे नरसिंहपुर जिले ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने गोटेगांव विधानसभा के खापा गांव, जो सिवनी और नरसिंहपुर की सीमा पर स्थित है, पहुंचकर बलिदानी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस भावुक क्षण में मंत्री पटेल के साथ ज़िलाध्यक्ष रामस्नेही पाठक, पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल, विधायक महेन्द्र नागेश और रवीन्द्र पटेल सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में जनजातीय बंधुओं और स्थानीय बच्चों की उपस्थिति रही, जो शहीद के सम्मान में एकत्रित हुए थे। बलिदानी के सम्मान में रास्ते भर जनसैलाब उमड़ा रहा। खापा रोड ग्राम से लेकर पूरे रास्ते में हर ग्राम पंचायत और स्कूल के बच्चों ने कतारबद्ध होकर खड़े होकर पुष्प मालाएं अर्पित कीं और भारत माता के वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। नरसिंहपुर जिले की सीमा पर, खापा रोड ग्राम में, हाई सेकेंडरी स्कूल के एनसीसी छात्रों ने भी मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ मिलकर बलिदानी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त रहा, जहां हर आंख नम थी और हर हृदय में बलिदानी के प्रति गहरा सम्मान था। यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम बलिदानी आशीष शर्मा के सर्वोच्च बलिदान के प्रति राष्ट्र के अटूट सम्मान को दर्शाता है।

वाड्रा-दिग्गी पर खंडवा सांसद पाटिल का जवाब, EVM पर तंज—जीत और हार के हिसाब से आरोप बदलते हैं

बुरहानपुर  बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद भी नेताओं की जुबानी जंग जारी है. इस चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला है, जिसके बाद सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ईवीएम मशीन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सरकार पर महिलाओं के वोट 10 हजार में खरीदने के आरोप लगाए हैं. इसके बाद खंडवा लोकसभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार किया है. जहां कांग्रेस जीतती है वहां ईवीएम सही, जहां हारी वहां खराब खंडवा सांसद ने कहा, '' जिन प्रदेशों में कांग्रेस चुनाव जीतती है, वहां चुनाव निष्पक्ष मानती है, लेकिन जिन प्रदेशों में चुनाव कांग्रेस हारती है, कांग्रेस वहां चुनाव आयोग और बीजेपी सरकार पर सवाल उठाती है.'' बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस नेताओं को नसीहत देते हुए कहा, '' यदि इस चुनाव में कांग्रेस जनता की नब्ज़ को टटोलती तो उनकी ऐसी दुर्गति नहीं होती, जबकि बीजेपी जनता की योजनाओं पर विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ती है. बिहार चुनाव के परिणामों पर अनर्गल बयानबाजी देने की बजाय कांग्रेस के नेताओं को बिहार की जनता से पूछना चाहिए कि उन्होंने किसे वोट दिया, इससे उनकी सारी शंका दूर हो जाएगी.'' कांग्रेसी अपना घर भरते हैं, बीजेपी वादा पूरा करती है : पाटिल सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आगे कहा, '' कांग्रेस सरकार के समय उनके अब्बा और सचिव केंद्र से 1 रु डालते थे, यहां तक आते-आते 15 पैसे मिलते थे. बाकी 85 पैसे से इनके घर भरते थे. हमारी सरकार जनता से जो वादा करती है, उसे पूरा किया जाता हैं. सिंगल क्लिक के जरिए किसानों के खातें में सीधे 6 हजार रु किसान सम्मान निधि ट्रांसफर की जाती है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूरा ढाई लाख सीधे हितग्राही के खातें में भेजते हैं.'' उन्होंने आगे कहा, '' कांग्रेस और बीजेपी में यही फर्क है, हमारी सरकार जन हितैषी हैं, हम जनता की मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखते हैं, यही वजह है कि जनता ने बिहार चुनाव में एनडीए को चुना है.''

आम आदमी पार्टी के नेता पर हमला! विधायक बोले— सुरक्षा में बड़ी चूक, जिम्मेदार कौन?

खन्ना  पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेता पर हमाले का मामला सामने आया है। नगर पंचायत मलौद के आम आदमी पार्टी पार्षद रछपाल सिंह पाला सोमलखेड़ी के साथ मारपीट की गई है। हलका विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा ने कांग्रेसियों पर इसका आरोप लगाया है। घटना के बाद उन्हें घायल अवस्था में सिविल अस्पताल मलौद में भर्ती कराया गया। जैसे ही यह सूचना पायल हलका विधायक मनविंदर सिंह ग्यासपुरा को मिली, वे तुरंत अस्पताल पहुंचे और पार्षद का हालचाल जाना। इस अवसर पर विधायक ग्यासपुरा ने कहा कि तरनतारन उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेसी गुस्से में हैं, जिसके चलते ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। विधायक ने पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए और कहा कि दोषियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए, ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी गुंडागर्दी करने की हिम्मत न कर सके। 

रमा निषाद बनीं औराई की नई विधायक: शपथ ग्रहण समारोह में दिखा उत्साह

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में औराई सीट से पहली बार जीत दर्ज करने वाली बीजेपी की रमा निषाद ने बुधवार को विधायक पद की शपथ ली। बड़े नेताओं की मौजूदगी में शपथ लेने के साथ ही उनके राजनीतिक करियर में नई शुरुआत हुई है। गौरतलब है कि रमा निषाद ने इस चुनाव में जबरदस्त जीत हासिल करते हुए 57 हजार से अधिक वोटों के बड़े अंतर से महागठबंधन के प्रत्याशी भोगेन्द्र सहनी को हराया था। वे बिहार चुनाव में शीर्ष तीन सबसे अधिक वोटों से जीतने वाली विधायक बनी थीं। इतनी बड़ी जीत के बाद से ही उनका नाम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार के मंत्रिमंडल में संभावित मंत्री के तौर पर चल रहा था। रमा निषाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत है। वे मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पति अजय निषाद दो बार मुजफ्फरपुर से सांसद रह चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान रमा निषाद उस समय चर्चा में आई थीं जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मीनापुर हाई स्कूल मैदान में जनसभा के बाद उन्हें मंच पर माला पहनाई थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी चर्चा हुई और उनकी खूब सराहना भी की गई। बीजेपी ने पहली बार रमा निषाद को टिकट दिया था, वह भी तब जब पार्टी ने निवर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री राम सूरत राय का टिकट काटकर उन्हें मौका दिया। उस समय इसका जमकर विरोध भी हुआ, लेकिन बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया।  

कुत्ते के काटने के मामलों में मुआवजा तय, कर्नाटक सरकार देगी 5 लाख और चोट पर 5 हजार

बेंगलुरु   कर्नाटक सरकार ने राज्य में बढ़ते कुत्तों के काटने के मामलों को देखते हुए बड़ा ऐलान किया है. सरकार ने तय किया है कि कुत्ता काटने से किसी व्यक्ति की मौत होने पर परिवार को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. यह मुआवजा राज्य सरकार की ओर से सीधे पीड़ित परिवार को मिलेगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर या सामान्य चोट लगने की स्थिति में पीड़ितों को कुल 5,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसमें से 3,500 रुपये सीधे पीड़ित को और 1,500 रुपये सुवर्ण आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट को दिए जाएंगे, जिससे पीड़ित के इलाज का खर्च कवर होगा। किस तरह की चोटों पर मिलेगा मुआवजा? सरकार की नई गाइडलाइन में यह साफ किया गया है कि स्ट्रे डॉग द्वारा होने वाली निम्न स्थितियों पर मुआवजा मिलेगा;- त्वचा पर छेद होने पर  गहरी चोट या कट लगना शरीर पर काले-नीले निशान बनना कई जगह काटने की स्थिति पर तमिलनाडु में बढ़ती डॉग-बाइट घटनाओं पर चिंता सरकार का कहना है कि यह कदम पीड़ितों की वित्तीय मदद के साथ-साथ डॉग-बाइट मामलों की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया है. इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने तमिलनाडु में तेजी से बढ़ते डॉग-बाइट और रैबीज मौतों पर चिंता जताई है. उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि तमिलनाडु में साल 2024 में अब तक 5.25 लाख कुत्ता काटने के मामले दर्ज हुए है. 28 लोगों की मौत रैबीज से हो चुकी है. चिदंबरम ने कहा कि कुत्तों से प्यार करने में कोई बुराई नहीं, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्ट्रे डॉग्स का टीकाकरण, स्टरलाइजेशन और नियंत्रित प्रबंधन जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट का राज्यों को बड़ा आदेश डॉग-बाइट घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि स्कूल, अस्पताल, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों से सभी स्ट्रे डॉग्स को हटाया जाए. इन जगहों को ठीक से फेंसिंग किया जाए. पकड़े गए कुत्तों को वापस उसी जगह नहीं छोड़ा जाएगा. उन्हें स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद निर्धारित डॉग शेल्टर में रखा जाएगा. कोर्ट ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा. 

सरगुजा में जनजातीय गौरव दिवस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जोर—परंपराओं को जीवित रखना बेहद जरूरी

सरगुजा छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला के अंबिकापुर पीजी कॉलेज ग्राउंड में जनजातीय गौरव दिवस समारोह में गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी संस्कृति को जीवित रखना बहुत जरूरी है। छत्तीसगढ़ के जनजाति समाज के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा को बनाए रखे हुए हैं, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देती हूं। मैं भी जनजाति समाज की बेटी हूं और जनजाति परिवार में जन्म लेने पर मुझे बहुत गर्व है। जनजाति समाज की परंपरा को मैं पहले भी जीती थी और अब भी जीती हूं। शिक्षा, स्वास्थ्य, जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही बोलीं, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों से वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन सुनिश्चित होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि जनजाति समाज का इस देश में बहुत बड़ा योगदान है। आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि यह बेहद खूबसूरत और सुंदर है। ऐसे कार्यक्रमों में मैं जब जाती हूं तो जनजाति परिवार के लोगों से मुलाकात करती हूं। जनजाति महिलाओं से मुलाकात करने पर मुझे गर्व महसूस होता है। स्थानीय स्तर पर भी जनजाति समाज की संस्कृति और उनके विकास को प्राथमिकता से ध्यान देने की जरूरत है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य 25 साल का हो गया है। छत्तीसगढ़ के रहने वाले सभी लोगों को मैं बधाई देती हूं। भगवान बिरसा मुंडा के इस कार्यक्रम में शामिल होने और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ है। अंबिकापुर में व्यापक स्तर पर 15 नवंबर से लेकर 20 नवंबर तक जनजाति गौरव दिवस मनाया गया है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोगों में रोटी और बेटी का रिश्ता राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा एक दूसरे लगी हुई है ,छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लोगों में रोटी और बेटी का संबंध है। छत्तीसगढ़ के लोग ओडिशा में शादी करते हैं और ओडिशा वाले छत्तीसगढ़ में शादी करते हैं। ओडिशा और छत्तीसगढ़ की दोस्ती बहुत पुरानी है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जनजाति समाज की विरासत बहुत गहरी है।  

राज्य गंगा समिति में 5 विशेषज्ञ सदस्य नामांकित

भोपाल प्रदेश में प्रवाहित गंगा की सहायक नदियों में जल का सतत् पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित करने एवं उनमें प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण एवं उपशमन के लिए राज्य शासन ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में ''राज्य गंगा समिति मध्यप्रदेश में 5 विशेषज्ञ सदस्य नामांकित किये गये है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश अनुसार समिति में डॉ अभय सक्सेना, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, म.प्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भोपाल को विषय विशेषज्ञ प्रदूषण अनुश्रवण,  कार्तिक सप्रे, समन्वयक, नर्मदा समग्र एनजीओ, भोपाल को नदी संरक्षण, प्रो. एस.पी. गौतम, पूर्व अध्यक्ष केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली को पर्यावरण संरक्षण,  सुनील चतुर्वेदी, संचालक, विभावरी संस्थान को जल संरक्षण और डॉ, जे.पी. शुक्ला, से.नि. प्रिंसिपल सांईटिस्ट, सी.एस.आई.आर./एमपी को वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट के लिए नामांकित किया गया है। नामित सदस्यों का कार्यकाल 2 वर्ष की अवधि के लिए होगा। नामित सदस्यों को यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता और सिटिंग फीस राज्य सरकार के नियमों के अनुसर देय की जायेगी।  

हाथियों का आतंक: गिरिडीह में रातभर दहशत, मस्जिद और फसलों को नुकसान

गिरिडीह झारखंड के गिरिडीह जिले में मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में बीती रात तेलोडीह पंचायत के कई गांवों में दर्जनों जंगली हाथियों ने अचानक घुसकर भारी उत्पात मचाया। गांव वालों ने बताया कि गांधी मैदान की ओर से पंचायत सचिवालय से गुजरते हुए खुट्टा मस्जिद के बगल वाली गली होते हुए हाथियों का झुंड बाउंड्री दीवार तोड़ते, फसलों को रौंदते आगे बढ़ता रहा। माहौल पूरी तरह अफरातफरी में बदल गया था, लेकिन इस संकट की घड़ी में पंचायत के मुखिया शब्बीर आलम ने पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कमान संभाली। हाथियों की एंट्री की सूचना मिलते ही वे तुरंत अलर्ट मोड में आए और बिना देर किए सभी मोहल्लों की मस्जिदों में घोषणा कर ग्रामीणों को सतर्क रहने का ऐलान करवाया गया। रात का समय होने के बावजूद उन्होंने खुद मौके पर रहकर लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखी। इसी बीच ग्रामीणों की सूझबूझ और मुखिया शब्बीर आलम की सक्रिय निगरानी में जंगली हाथियों को सुरक्षित खेत की ओर खदेड़कर गांव से बाहर निकाला गया। वन विभाग की टीम भी रात के अंधेरों में हाथियों को सुरक्षित दिशा में ले जाने में जुटी रही। स्थिति सामान्य होने के बाद भी मुखिया शब्बीर आलम ने गांव में घूमकर टूटे बाउंड्री वाल, बर्बाद फसलों और नुकसान का खुद मौके पर जाकर जायजा लिया। उन्होंने तत्काल संबंधित विभाग से मांग की कि कृषि और संपत्ति नुकसान का आधिकारिक सर्वे कर ग्रामीणों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि कोई भी परिवार संकट में न पड़े।  

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: आजम खान को रामपुर जेल में विशेष सुविधा, मेडिकल और क्लास अपग्रेड

 रामपुर समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद आजम खान को अदालत से बड़ी राहत मिली है. अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को रामपुर जेल भेज दिया गया था. पूर्व में भी आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम दो बार जेल जा चुके हैं. पहली बार 27 महीने तक दोनों सीतापुर जेल में रहे और उसके बाद जब 23 महीने जेल में रहे तो दोनों को अलग-अलग रखा गया. आजम खान सीतापुर जेल में और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम हरदोई जेल में रहे. इस बार 17 नवंबर 2025 को सजा सुनाए जाने के बाद आजम खान ने वकीलों द्वारा अदालत में अर्जी लगाई थी कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है और उनके विरुद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, 45 मुकदमे उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान के खिलाफ हैं, जिनमें से अधिकतर की सुनवाई रामपुर जिला अदालत में हो रही है. ऐसे में उन्हें रामपुर जिला जेल में ही रखा जाए और उनके साथ में उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम को भी रखा जाए, क्योंकि स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें एक मददगार की जरूरत है. आजम खान की दरखास्त का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया. उनका कहना था कि अभियुक्त ने जानबूझकर अलग-अलग केस में अलग-अलग बीमारियां बताईं, उसका कोई प्रमाण भी पेश नहीं किया. जेल से ट्रांसफर प्रशासनिक व्यवस्था है. ऐसे में न्यायालय में उनकी यह दरखास्त चलने योग्य नहीं है. रामपुर एमपी एमएलए विशेष न्यायाधीश शोभित बंसल ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए रामपुर जेल अधीक्षक को आदेश दिया कि आजम खान के विरुद्ध अनेकों मामलों की सुनवाई रामपुर में होनी है. इसलिए आजम खान को और उनके बेटे अब्दुल्लाह आजम खान को रामपुर जेल में ही रखा जाए.  कोर्ट ने कहा कि बिना न्यायालय की अनुमति के उनको रामपुर से बाहर दूसरे जिले की जेल में नहीं ट्रांसफर किया जाए, साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि आजम खान को सुपीरियर क्लास जेल उपलब्ध कराई जाए, यानी क्लास वन की सुविधाएं दी जाएं. स्वास्थ्य को देखते हुए समुचित मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए. अदालत का आदेश आजम खान के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि रामपुर जेल उनके घर से नजदीक है.