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अयोध्या में उमड़ा आस्था का सागर, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु

ध्वजारोहण के क्षण भक्तिमय हुई अयोध्या, चारों दिशाओं में गूंजा जय श्रीराम अयोध्या में उमड़ा आस्था का सागर, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु   आधुनिक और त्रेतायुगीन अयोध्या का अद्भुत संगम, संत समाज ने सराहा अयोध्या  श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज फहराए जाने के ऐतिहासिक क्षण ने संपूर्ण अयोध्या को भक्ति भाव से ओतप्रोत कर दिया। धर्मपथ सहित शहर की सभी प्रमुख सड़कों पर जयघोष करते श्रद्धालु उमड़ पड़े और राम नाम की गूंज से नगर भक्तिरस से सराबोर हो गया। लता मंगेशकर चौक पर हजारों की संख्या में भक्त एकत्रित होकर ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण देखते रहे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर शिखर पर धर्मध्वजा स्थापित की, उपस्थित जनसमूह भावविभोर होकर जय श्रीराम के उद्घोष में डूब गया। श्रद्धालुओं में अपार उमंग, कहा त्रेता युग जैसा वैभव अयोध्या के पड़ोसी जिलों सुल्तानपुर, बस्ती, अंबेडकर नगर और बाराबंकी सहित उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रावस्ती से आए राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय ने कहा कि वह 17 नवंबर को ही अयोध्या पहुंच गए थे और आज स्वयं को अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी ने अयोध्या का गौरव वापस दिलाया है और शहर को स्वस्थ व सुंदर बनाया है। श्रावस्ती के ही विश्वनाथ जायसवाल ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का कार्य ऐतिहासिक रहा है और मोदी-योगी ने वह किया है जो पूर्व में कोई नहीं कर सका। सांस्कृतिक और भावनात्मक उत्सव में बदला समारोह बिहार के गोपालगंज से हनुमान जी की वेशभूषा में पहुंचे एक रामभक्त ने अपने नृत्य और गायन से माहौल को भक्ति रस में रंग दिया। दिल्ली से आई श्रद्धालु महिलाएं मधु, धारणा, संतोष और पूजा ने कहा कि राम मंदिर परिसर पहुंचते ही उन्हें देवलोक जैसी अनुभूति हुई। संत रमाकांत शर्मा, जो पिछले 25 वर्षों से अयोध्या आते रहे हैं, ने कहा कि अयोध्या आधुनिक भी हुई है और अपनी त्रेतायुगीन झलक भी पा चुकी है। ढोल और मंजीरों के मधुर स्वरों के बीच संतों की टोली ने इस आयोजन को एक दिव्य सांस्कृतिक पर्व में परिवर्तित कर दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं रहा, बल्कि आस्था, इतिहास और आधुनिकता के संगम का जीवंत प्रतीक बनकर उदित हुआ, जिसमें अयोध्या ने अपनी आध्यात्मिक प्रतिष्ठा विश्व के सामने पुनः स्थापित की।

वन विभाग ने स्पष्ट किया, वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित, पदावनति की चिंता खत्म

भोपाल  मध्य प्रदेश के वन विभाग ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उच्चतर पद के प्रभार में पदस्थ वन कर्मचारियों और अधिकारियों को अब पदावनत (डिमोट) नहीं किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के वन कर्मचारियों में राहत और संतोष का माहौल है। जिला स्तर पर गलत कार्रवाई पर रोक वन मुख्यालय ने बताया कि 15 अक्टूबर 2025 को उच्चतर पद का प्रभार देने वाले आदेश को भले ही निरस्त कर दिया गया था, लेकिन किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को पदावनत करने का निर्देश कभी जारी नहीं हुआ था। उसके बावजूद कुछ जिला वन अधिकारियों ने आदेशों की गलत व्याख्या करते हुए उच्चतर पद पर कार्यरत कर्मचारियों को पदावनत करना शुरू कर दिया था, जिसे अब स्पष्ट रूप से नियम विरुद्ध माना गया है। नए आदेश में बताया कब होगी पदावनति मुख्यालय द्वारा जारी नए निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि केवल वही कर्मचारी या अधिकारी पदावनत माना जाएगा, जिसे भविष्य में पदोन्नति सेवा नियम 2025 लागू होने के बाद पदोन्नति समिति द्वारा अपात्र घोषित किया जाएगा। यानी, वर्तमान में जो कर्मचारी उच्चतर पद पर कार्य कर रहे हैं, उनका पद सुरक्षित रहेगा और उन्हें किसी तरह का डिमोशन नहीं दिया जाएगा। वन कर्मचारी मंच ने किया निर्णय का स्वागत मध्य प्रदेश वन कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम वन कर्मचारियों और अधिकारियों के हित में है। उन्होंने इसे लंबे समय से चल रही असमंजस की स्थिति को दूर करने वाला निर्णय बताया।

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत

अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के जयकारे संग पुष्पवर्षा से प्रधानमंत्री का किया स्वागत  राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साकेत हैलीपेड पर किया प्रधानमंत्री का स्वागत  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करने मंगलवार को अयोध्या पहुंचे प्रधानमंत्री  अयोध्या  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के जरिए ‘संकल्प सिद्धि’ के लिए रामनगरी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग अयोध्यावासियों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर पुष्पवर्षा भी की। श्रीराम की अयोध्या ने प्रधानमंत्री का पूरे रास्ते में अभूतपूर्व स्वागत किया। अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहरा रहा था। वहीं स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। अयोध्या पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया।  अयोध्यावासियों के एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे में तिरंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह अयोध्या पहुंचे। साकेत महाविद्यालय पर उनका हेलीकॉप्टर उतरा। वहां से काफिले संग टेढ़ी बाजार होते हुए उन्होंने श्रीराम मंदिर परिसर में प्रवेश किया। इस दौरान अयोध्यावासियों ने जयश्रीराम, जय जय हनुमान के गगनभेदी नारों संग उनका स्वागत किया। अयोध्यावासी एक हाथ में भगवा ध्वज तो दूसरे हाथ में तिरंगा फहराते हुए प्रधानमंत्री का स्वागत करते रहे। प्रधानमंत्री ने भी पूरे रास्ते में हाथ हिलाकर अयोध्यावासियों का अभिवादन किया।  सप्त मंदिरों में झुकाया शीश, की पूजा-अर्चना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सप्त मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, महर्षि वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुह्य और माता शबरी मंदिर में पहुंचकर प्रधानमंत्री ने शीश झुकाया। प्रधानमंत्री ने शेषावतार मंदिर व माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया।  मुख्यमंत्री व राज्यपाल ने किया प्रधानमंत्री का स्वागत  प्रधानमंत्री अयोध्या में साकेत विश्वविद्यालय हैलीपेड पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की तरफ प्रस्थान किया। प्रधानमंत्री व सर संघ चालक ने रामलला के दरबार में झुकाया शीश  श्री राम मंदिर परिसर में राम दरबार पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दर्शन-पूजन व आरती की। यहां पुजारियों ने तीनों विशिष्टजनों को राम नामी गमछा ओढ़ाया व प्रसाद दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने विधिविधान से पूजन-अर्चन कर रामलला का भी आशीर्वाद प्राप्त किया।

दिल्ली में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट सम्मेलन शुरू, CM विष्णुदेव साय निवेशकों से कर रहे संवाद

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार का महत्वपूर्ण निवेशक सम्मेलन छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट आज नई दिल्ली में प्रारम्भ हो गया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय पहुँचे और उन्होंने उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों से मुलाक़ात का क्रम प्रारंभ कर दिया है। इस आयोजन में स्टील क्षेत्र, पर्यटन उद्योग और अन्य प्रमुख सेक्टरों के नामी उद्योगपति तथा विभिन्न कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल हो रहे हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य देश भर के निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति, उभरते अवसरों और निवेश–अनुकूल वातावरण को प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय निवेशकों से सीधे संवाद कर रहे हैं तथा उन्हें राज्य में उद्योग स्थापित करने के लिए उपलब्ध सुविधाओं, स्थिर एवं पारदर्शी नीति, तेज़ी से विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सरल और समयबद्ध प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से अवगत करा रहे हैं।

रायपुर में क्रिकेट क्रेज: India-Africa ODI टिकट के लिए हुई धक्का मुक्की, Rohit और Kohli के दीवाने

रायपुर  जल्दी ही भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज खेली जानी है। वनडे सीरीज का दूसरा मैच छत्तीसगढ़ की राजधानी में खेला जाएगा। ऐसे में रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में 3 दिसंबर को होने वाले भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच दूसरे वनडे मैच को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। विराट कोहली (Virat Kohli) और रोहित शर्मा (Rohit SHarma) को लाइव देखने के लिए दर्शक बड़ी संख्या में टिकट लेने के लिए स्टेडियम और इंडोर कॉम्प्लेक्स पहुंच रहे हैं। इंडोर स्टेडियम में टिकट कलेक्शन और छात्रों के लिए बिक्री शुरू सोमवार से इंडोर स्टेडियम में पहले चरण में ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले लोग अपने फिजिकल टिकट ले रहे हैं। इसी के साथ छात्रों के लिए आरक्षित सीटों की टिकट बिक्री भी शुरू की गई, जिसके चलते सुबह 4 बजे से ही काउंटर पर भीड़ जुटना शुरू हो गया। टिकट बिक्री 10 बजे शुरू हुई, लेकिन उससे पहले ही लंबी कतारों में छात्रों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। कई छात्राओं ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद उनकी पुलिस के साथ बहस भी हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। छात्रों के लिए 1500 सीटें, टिकट 800 रुपये इस बार छात्रों के लिए 1,500 सीटें रिजर्व की गई हैं, जिनकी कीमत 800 रुपये तय की गई है। एक छात्र केवल एक ही टिकट खरीद सकेगा और स्कूल/कॉलेज का आईडी कार्ड अनिवार्य है। छात्र 24 नवंबर से 2 दिसंबर तक इंडोर स्टेडियम में जाकर फिजिकल टिकट खरीद सकेंगे। पहले चरण में 17–18 हजार टिकट 15 मिनट में सोल्ड आउट शनिवार को पहले चरण में शाम 5 बजे टिकट बिक्री शुरू होते ही 17 से 18 हजार टिकट मात्र 15 मिनट में ही सोल्ड आउट हो गए। वेबसाइट पर ‘Sold Out’ दिखने से लोग भ्रमित हुए कि सभी टिकट खत्म हो चुके हैं, जबकि आयोजकों के अनुसार दूसरे चरण में बाकी टिकट जल्द जारी किए जाएंगे। इन्हें ऑनलाइन बुक करने वालों को बाद में फिजिकल टिकट में बदलने की सुविधा मिलेगी। टीमें 1 दिसंबर को रायपुर आएंगी     पहला वनडे 30 नवंबर को रांची में खेला जाएगा।     दोनों टीमें 1 दिसंबर को रायपुर पहुंचेगी।     2 दिसंबर को प्रैक्टिस सेशन होगा।     3 दिसंबर को रायपुर में दूसरा वनडे खेला जाएगा। स्टेडियम में सुविधाएं: पानी मुफ्त, फूड रेट तय दर्शकों के लिए स्टेडियम में 22 बड़े वाटर फिल्टर लगाए गए हैं, जिससे पानी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हर फूड वेंडर को अपनी रेट-लिस्ट डिस्प्ले करना अनिवार्य होगा। ओवर चार्जिंग रोकने के लिए स्टेडियम के भीतर कई जगह रेट-चार्ट भी लगाए जाएंगे। दिव्यांग खिलाड़ियों को मुफ्त एंट्री 3 दिसंबर वर्ल्ड डिसेबिलिटी डे के अवसर पर राज्य के सभी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए मैच देखना पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा। उनके आने-जाने की व्यवस्था भी क्रिकेट संघ द्वारा की जाएगी। रायपुर में होने वाला India – South Africa का यह हाई-वोल्टेज मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि फैंस के जुनून, खिलाड़ियों की जुझारू चुनौती और क्रिकेट के रोमांच का संगम बनने जा रहा है। अब नज़रें टिकी हैं 3 दिसंबर पर, जब विराट-रोहित की धाक और अफ्रीकी तेज़ तर्रार खेल आमने-सामने होंगे। बस इंतज़ार है उस पहली गेंद का… जो रायपुर के मैदान में इतिहास लिखने जा रही है। आपको बता दें कि फिलहाल India और South Africa के बीच Test Series जारी है, जिसमें भारत पहला मैच हार चुका है।

अयोध्या में पीएम मोदी का संबोधन: राम मंदिर पर ध्वजारोहण, धर्म ध्वज बनेगा प्रेरणा

अयोध्या  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अयोध्या के राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहरा दिया है. इस मौके पर पीएम मोदी के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे. पीएम मोदी दिल्ली से अयोध्या से महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिये साकेत महाविद्यालय पहुंचे. पीएम मोदी साकेत महाविद्यालय से सड़क मार्ग से रोड शो की शक्ल में सप्त मंदिर पहुंचे.पीएम मोदी सप्त मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद राम मंदिर पहुंचे और गर्भगृह के साथ ही मंदिर के प्रथम तल पर निर्मित राम दरबार में भी पूजा-अर्चना की. पीएम मोदी का यह दौरा आध्यात्मिक रूप से भी बेहद खास है. यह ध्वज सदियों के सपने साकार होने का प्रतीक- पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और पल की साक्षी बन रही है. आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है. आज रामभक्तों के दिल में असीम आनंद है. सदियों के घाव भर रहे हैं. सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है. आज उस यज्ञ की पूर्णाहूति है, जिसकी अग्नि पांच सौ वर्ष तक प्रज्ज्वलित रही. आज भगवान श्रीराम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा प्रतिष्ठापित हुआ.यह धर्मध्वज इतिहास के सुंदर जागरण का रंग है. इसका भगवा रंग, इस पर लगी सूर्यवंश की थाती रामराज की कीर्ति को. यह ध्वज संकल्प है, यह संकल्प से सिद्धि की भाषा है, यह सदियों के संघर्ष की सिद्धि है, सदियों के सपने का साकार स्वरूप है, राम के आदर्शों का उद्घोष है. संतों की साधना और समाज की सहभागिता की गाथा है. यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के आदर्शों का उद्घोष करेगा, सत्यमेव जयते का उद्घोष करेगा. यह ध्वज 'प्राण जाए पर वचन न जाई' की प्रेरणा है.  राम मंदिर की धर्म ध्वजा की विशिष्टता और महत्व अयोध्या के राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे  शिखर पर फहराई गई यह केसरिया धर्म ध्वजा अनेक मायनों में बेहद खास है. इस 10 फीट ऊंचे और 20 फीट लंबे धर्म ध्वज पर एक तेजस्वी सूर्य की छवि है, जो भगवान श्री राम की प्रतिभा और वीरता का प्रतीक है, इस पर कोविदार वृक्ष की छवि के साथ एक 'ॐ' अंकित है. यह विशेष धर्म ध्वजा गुजरात की एक पैराशूट निर्माण कंपनी द्वारा 25 दिनों में तैयार की गई है. इसे टिकाऊ पैराशूट-ग्रेड कपड़े और प्रीमियम सिल्क के धागों से बनाया गया है. यह ध्वज 60 किमी/घंटा तक की हवा, बारिश और धूप का सामना करने में सक्षम है, जो इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करता है. ध्वज के आयाम-  लंबाई: 20 फीट चौड़ाई: 10 फीट ध्वजदंड की ऊंचाई: 42 फीट केसरिया रंग का महत्व: केसरिया (भगवा) रंग सनातन परंपरा में त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है. यह ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का भी प्रतिनिधित्व करता है. रघुवंश के शासनकाल में इस रंग का विशेष महत्व था. ध्वज पर अंकित पवित्र चिह्न: ध्वज पर तीन मुख्य चिह्न अंकित हैं: सूर्य, ऊँ, और कोविदार वृक्ष. कोविदार वृक्ष: यह चिह्न रघुवंश की परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. प्राचीन ग्रंथों में इसे पारिजात और मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष बताया गया है, जो आज के कचनार वृक्ष जैसा दिखता है. सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज पर सदियों से इसी वृक्ष का प्रतीक अंकित होता रहा है. वाल्मीकि रामायण में भी भरत के ध्वज पर इसका वर्णन मिलता है. ऊँ: सभी मंत्रों का प्राण माना जाने वाला 'ऊँ', ध्वजा पर अंकित होकर संपूर्ण सृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है. सूर्य: सूर्यदेवता को भी ध्वज पर चिह्नित किया गया है, जो विजय का प्रतीक माने जाते हैं. माना जाता है कि यह पूरा ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है.  जैसा सपना देखा था, उससे भी शुभकर मंदिर बन गया है- मोहन भागवत मोहन भागवत ने कहा कि इस दिन के लिए कितने राम भक्तों ने अपने प्राण अर्पण किए. मंदिर बनने में भी समय लगता है. यह धर्म ध्वज है. इसका भगवा रंग है. इस धर्मध्वज पर रघुकूल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है. कोविदार वृक्ष दो देव वृक्षों के गुणों का समुच्चय है. धर्मध्वज को शिखर तक पहुंचाना है. आज हमारे संकल्प की पुनरावृत्ति का दिवस है. सबको शांति बांटने वाला, सुफल देने वाला भारतवर्ष हमें खड़ा करना है. जैसा सपना देखा था कुछ लोगों ने, बिल्कुल वैसा, उससे भी अधिक शुभकर यह मंदिर बन गया है. अयोध्या धाम में आज हर प्रकार की सुविधा- योगी आदित्यनाथ यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर पर धर्मध्वज के आरोहरण को नए युग का शुभारंभ बताया और कहा कि यह भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर लहराता यह केसरिया ध्वज धर्म का, भारत की संकल्पना का प्रतीक भी है. संकल्प का कोई विकल्प नहीं. योगी आदित्यनाथ ने 'लाठी-गोली खाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे' नारे का भी उल्लेख किया और कहा कि भगवान राम की पावन नगरी एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है. हर प्रकार की सुविधा आज अयोध्या धाम में है. उन्होंने अयोध्या में हुए विकास के काम भी गिनाए और जय जय श्रीराम के नारे के साथ अपनी बात पूरी की. राम मंदिर पर लहराया धर्म ध्वज राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराने लगा है. पीएम मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज लहराया.

ज्वालामुखी की राख ने 4500 KM की दूरी तय की, पढ़ें 5 अहम सवालों के जवाब

इथियोपिया        अफ्रीका के एक दूरस्थ कोने में मौजूद एक ज्वालामुखी 12 हजार साल बाद अचानक फट पड़ा. और उसकी राख 4,500 किलोमीटर दूर भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच रहा है. 23 नवंबर 2025 को इथियोपिया के अफार इलाके में हायली गुबी ज्वालामुखी में विस्फोट हुई. यह ज्वालामुखी इतने सालों से सोया हुआ था, लेकिन अब इसने आसमान में 14 किलोमीटर ऊंची राख की चादर बिछा दी है.  आइए समझते हैं यह राख इतनी दूर कैसे पहुंची? क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ेगा? अन्य महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजते हैं. पहले घटना की पूरी जानकारी समझते हैं, फिर 5 सवालों पर नजर डालते हैं. हायली गुबी ज्वालामुखी: कौन है यह 'सोया हुआ राक्षस'? हायली गुबी एक शील्ड ज्वालामुखी है, जो इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित है. यह एर्ता अले ज्वालामुखी श्रृंखला का सबसे दक्षिणी हिस्सा है. अफार क्षेत्र को 'पृथ्वी का नर्क' भी कहा जाता है, क्योंकि यहां तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. यह पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट वैली का हिस्सा है – जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें (प्लेटें जो पृथ्वी की सतह को बनाती हैं) लगातार अलग हो रही हैं. विस्फोट का समय और आकार: 23 नवंबर 2025 को भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजे यह फटा. राख का गुबार समुद्र तल से 14 km ऊपर चला गया. वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले 12000 साल (होलोसीन काल) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. सैटेलाइट डेटा से पता चला कि इसमें सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) गैस की भारी मात्रा थी. वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी फटने से पहले, एर्ता अले के नीचे 50 किलोमीटर लंबी मैग्मा की दीवार (मैग्मा डैम) टूट गई. इससे घंटों पहले 4.7 तीव्रता का भूकंप आया था. पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट में सुपर प्लूम (गर्म मैग्मा का विशाल गुबार) का दबाव बढ़ रहा था, जो प्लेटों के अलग होने से पैदा होता है. यह रिफ्ट वैली अफ्रीका महाद्वीप को दो भागों में बांटने वाली प्रक्रिया का हिस्सा है. स्थानीय प्रभाव: राख पास के गांव अफदेरा पर गिरी. कोई मौत नहीं हुई, लेकिन चरवाहों को चिंता है कि राख से चरागाह खराब हो जाएंगे और पशु बीमार पड़ सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में कुछ पर्यटक फंस गए. विमानन पर असर: राख लाल सागर पार यमन और ओमान की ओर बढ़ी, फिर पूर्व की ओर पाकिस्तान, उत्तरी भारत और चीन तक. भारत में कई उड़ानें रद्द हुईं – जैसे एयर इंडिया की मुंबई-हैदराबाद और इंडिगो की कन्नूर-अबू धाबी. डीजीसीए ने एयरलाइंस को चेतावनी दी कि राख इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है. अब सवाल आता है – यह राख दिल्ली कैसे पहुंची? और क्या इससे हमारी हवा खराब हो जाएगी? आइए, 5 प्रमुख सवालों के सरल जवाब समझते हैं, वैज्ञानिक कारणों के साथ. 1. साढ़े 4 हजार किलोमीटर दूर से दिल्ली कैसे पहुंची ज्वालामुखी की राख? हायली गुबी से दिल्ली की दूरी लगभग 4,500 किलोमीटर है. राख इतनी दूर पहुंचने का मुख्य कारण है वायुमंडलीय हवाओं की जेट स्ट्रीम.   वैज्ञानिक कारण: ज्वालामुखी विस्फोट से राख बारीक कणों (जैसे कांच और चट्टान के टुकड़े) के रूप में निकलती है. यह इतनी ऊंची (14 किमी) जाती है कि स्ट्रेटोस्फीयर (उपरी वायुमंडल) में पहुंच जाती है. यहां जेट स्ट्रीम नाम की तेज हवाएं (100-130 किमी/घंटा की रफ्तार) चलती हैं, जो पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं.  23 नवंबर को राख लाल सागर पार यमन-ओमान पहुंची, फिर अरब प्रायद्वीप से पाकिस्तान होते हुए राजस्थान में घुसी. 24 नवंबर रात 11 बजे तक यह दिल्ली पर छा गई. सैटेलाइट मैप्स (जैसे टूलूज VAAC) से पता चला कि यह 15,000 से 45,000 फीट ऊंचाई पर बह रही थी. अगर हवाएं न होतीं, तो राख बस 50-100 किमी दूर गिर जाती. याद कीजिए 2010 का आइसलैंड विस्फोट – उसकी राख भी यूरोप भर में फैली थी. 2. क्या इससे दिल्ली का प्रदूषण बढ़ जाएगा? नहीं, ज्यादा चिंता की कोई बात नहीं. राख ऊंचाई पर है, इसलिए सतह पर प्रदूषण का बड़ा असर नहीं पड़ेगा. वैज्ञानिक कारण: दिल्ली का AQI पहले से ही खराब (स्मॉग से) है, लेकिन यह राख स्ट्रेटोस्फीयर में है, जहां हवा साफ रहती है. IMD के निदेशक एम. मोहपात्रा ने कहा कि यह नीचे नहीं उतरेगी, इसलिए PM2.5 या PM10 पर ज्यादा प्रभाव नहीं. हां, आकाश धुंधला दिख सकता है. विजिबिलिटी कम हो सकती है. सल्फर डाइऑक्साइड गैस बादल बनाकर बारिश ला सकती है, जो प्रदूषण धो दे. लंबे समय में, SO₂ एसिड रेन पैदा कर सकती है, लेकिन यहां मात्रा कम है. कुल मिलाकर, स्थानीय प्रदूषण (कारें, फैक्टरियां) से ज्यादा खतरा नहीं. 3. ज्वालामुखी इतने साल बाद क्यों फटा? क्या कारण था? 12,000 साल की नींद टूटने का राज है पृथ्वी के अंदर की उथल-पुथल. वैज्ञानिक कारण: हायली गुबी पूर्वी अफ्रीकी रिफ्ट का हिस्सा है, जहां अफ्रीकी प्लेट दो भागों में बंट रही है. नीचे सुपर प्लूम नाम का गर्म मैग्मा का विशाल भंडार दबाव बना रहा था. विस्फोट से पहले मैग्मा की 50 किमी लंबी दीवार टूटी, जो एर्ता अले से मैग्मा लाई. भूकंप (4.7 तीव्रता) ने इसे ट्रिगर किया. वैज्ञानिक कहते हैं, यह रिफ्ट वैली की नया महाद्वीप बनने की प्रक्रिया है – लाखों साल बाद यहां नया समुद्र बन सकता है. पहले के विस्फोट अनदेखे रह गए क्योंकि इलाका दूरदराज है. 4. स्थानीय लोगों और पर्यावरण पर क्या असर पड़ा? इथियोपिया में तत्काल खतरा कम है, लेकिन लंबे समय के प्रभाव चिंताजनक हैं.     वैज्ञानिक कारण: राख मिट्टी की उर्वरता कम कर देती है, क्योंकि इसमें सिलिका (कांच जैसे कण) होते हैं जो पानी सोख लेते हैं.     चरवाहों के लिए खतरा: पशु राख की वजह से सांस की बीमारी पा सकते हैं. दनाकिल रेगिस्तान में पर्यटक फंस गए, क्योंकि राख से सड़कें फिसलन भरी हो गईं.     पर्यावरण पर: SO₂ से एसिड रेन हो सकती है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाए. लेकिन कोई मौत नहीं हुई, क्योंकि इलाका कम आबादी वाला है. वैज्ञानिक अब राख के नमूने ले रहे हैं ताकि इतिहास की जांच हो सके. 5. क्या यह रिफ्ट वैली में बाढ़ का कारण बन सकता है? सुपर प्लूम का क्या रोल? यह सवाल दिलचस्प है – हायली गुबी रिफ्ट वैली के उत्तरी छोर पर है. सुपर प्लूम से बाढ़ का कनेक्शन हो सकता है, लेकिन सीधा नहीं. वैज्ञानिक कारण: … Read more

वीजा मामले में पुलिस की चूक, अब शहर में रह रहे विदेशी नागरिकों की फाइलें खंगाली जाएंगी

इंदौर   इंदौर के एमआईजी इलाके के गायत्री नगर में रहने वाले केन्याई नागरिक रिचर्डसन का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। सुबह वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी मिली, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने रिचर्डसन से पूछताछ शुरू कर दी।एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने माना कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की ओर से गंभीर लापरवाही हुई है। अब शहर में रह रहे सभी विदेशी नागरिकों का रिकॉर्ड फिर से जांचा जा रहा है। वीजा 1996 में खत्म, एफआईआर दर्ज एडिशनल डीसीपी दंडोतिया ने बताया कि जांच में सामने आया है कि रिचर्डसन का पासपोर्ट वैध है। मगर, उसका वीजा 1996 में खत्म हो चुका था। इसके आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट की सख्ती के चलते उसे इंदौर छोड़ने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए वह यहीं रहकर नियमित तौर पर अदालत में पेश होता रहा। शहर न छोडने की शर्त पर जमानत मिल गई उसने 'युगांडा भले ही चारों ओर से घिरा हुआ है, लेकिन हिंद महासागर भी हमारा है' जैसी बातें लिखी पोस्ट साझा की है। कुछ तस्वीरों पर खून-खराबा दिखाया गया है। पुलिस के अनुसार रिचर्ड 1991 से इंदौर में निवासरत है। 2018 में शिवशक्ति नगर में कन्हैयालाल गौर के मकान में रहता था। उस दौरान जांच में पता चला था कि वीजा 1998 तक था। उसे गिरफ्तार कर पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज जब्त कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से शहर न छोडने की शर्त पर जमानत मिल गई। वीजा 1996 में ही हुआ था समाप्त, FIR दर्ज एडिशनल डीसीपी दंडोतिया के अनुसार जांच में पाया गया कि रिचर्डसन का पासपोर्ट वैध है, लेकिन उसका वीजा वर्ष 1996 में खत्म हो चुका था। इसी आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट की सख्ती के चलते उसे इंदौर छोड़ने की अनुमति नहीं थी, इसलिए वह यहीं रहकर नियमित रूप से अदालत में पेश होता था। 2018 में हुई थी पहली कार्रवाई रिचर्डसन पर 2018 में पहली बार कार्रवाई की गई थी। तब यह सामने आया कि वह वीजा समाप्त होने के बाद भी वर्षों से इंदौर में रह रहा है। उसके खिलाफ फेमा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था, जबकि उसके पूर्व मकान मालिक पर धारा 188 में केस बना। पुराने घर से निकलने के बाद वह गायत्री नगर में शेखर कुशवाहा के यहां किराए से रहने लगा। पुलिस की जांच में यह पुष्टि हुई कि शेखर ने नियम अनुसार उसकी जानकारी थाने में दी थी। पड़ोसी बोले-कोरोना काल में कई का इलाज किया रिचर्डसन पेशे से डॉक्टर हैं। जब पुलिस उसके घर पहुंची और इलाके में पूछताछ की तो कई पड़ोसियों ने बताया कि उसका स्वभाव अच्छा है और वह सभी से सौहार्दपूर्वक बात करता है। कोरोना काल में उसने कई लोगों को प्राथमिक उपचार भी दिया था। लोग इलाज के बदले उसे थोड़ी-बहुत आर्थिक मदद भी कर देते थे। उसके परिवारजन समय–समय पर केन्या से आर्थिक सहायता भेजते हैं। पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पाया रिचर्डसन ने दावा किया कि उसने पासपोर्ट रिन्यू कराने की कोशिश की, लेकिन जरूरी दस्तावेज अदालत में जमा होने के कारण आवेदन स्वीकार नहीं हुआ। कोर्ट में लंबित मामले के कारण नया वीजा और पासपोर्ट दोनों बनना संभव नहीं था। पासपोर्ट भी निरस्त, अब बनना मुश्किल सूत्रों के अनुसार भारतीय कानून के प्रावधानों के तहत रिचर्डसन का पासपोर्ट निरस्त हो चुका है। ऐसे में कोर्ट से दस्तावेज वापस मिलने के बावजूद वह भारत से नया पासपोर्ट या वीजा आवेदन नहीं कर सकता, क्योंकि वह भारतीय नागरिक नहीं है। पुलिस इस मामले में हुई अपनी पुरानी लापरवाही को लेकर कई तथ्य दबाने की कोशिश कर रही है। पासपोर्ट न्यायालय से सुपुर्दगी पर प्राप्त किए गए फिलहाल, जिला कोर्ट में मामला विचाराधीन है। 28 अप्रैल 2026 को सुनवाई होनी है। केनियन के वकील वाजिद खान ने बताया कि आरोपित द्वारा 2019 में जब्तशुदा पासपोर्ट न्यायालय से सुपुर्दगी पर प्राप्त किए गए हैं। वीजा और पासपोर्ट की अवधि बढ़ाने के प्रयास उसने किए हैं, लेकिन अवधि नहीं बढ़ सकी। वर्तमान में वह शेखर कुशवाह के घर में रह रहा है। थाने में सूचना दी गई है।

अफगानिस्तान में आतंक की बारिश, बच्चों समेत 9 की दर्दनाक मौत

काबुल  पाकिस्तान के पेशावर में आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान खुद के बुने जाल में फंस रहा है. हालांकि इस देश की जड़ों में जो आतंक बसा है वो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. अब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया है. अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के एक रिहायशी इलाके में पाकिस्तानी सेना के हमले में नौ बच्चों समेत दस लोग मारे गए. अफगान सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी है. घरों को बनाया गया निशाना अधिकारियों के अनुसार, यह हमला आधी रात के कुछ समय बाद हुआ और इसमें एक स्थानीय निवासी के घर को निशाना बनाया गया, जिससे सीमा पर दुश्मनी बढ़ने की चिंता फिर बढ़ गई है. तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि यह हमला मंगलवार को सुबह करीब 12:00 बजे खोस्त के गुरबुज जिले के मुगलगई इलाके में हुआ. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी हमलावर सेनाओं ने एक लोकल नागरिक, वालियत खान, काजी मीर के बेटे के घर पर बमबारी की, इस हमले में 9 बच्चे (पांच लड़के और चार लड़कियां) और एक महिला की मौत हो गई और उनका घर तबाह हो गया. पहले भी पाकिस्तान ने किया था अटैक मुजाहिद ने यह भी बताया कि उसी रात कुनार और पक्तिका प्रांतों में अलग-अलग हवाई हमले हुए, जिनमें चार आम नागरिक घायल हो गए. खोस्त में हुआ ताजा हमला लोगों में डर पैदा कर रहा है कि पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर फिर से हिंसा का नया दौर शुरू हो सकता है. अक्टूबर में दोनों देशों के बीच भारी झड़पों के बाद कुछ समय के लिए लड़ाई रुकी हुई थी, लेकिन अब फिर तनाव बढ़ गया है. इससे पहले, 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने काबुल, खोस्त, जलालाबाद और पक्तिका में एयरस्ट्राइक की थी. इसके बाद अफगान तालिबान ने भी जवाबी कार्रवाई की. दोनों देशों में हुई थी गोलीबारी तालिबान सेनाओं ने 11 और 12 अक्टूबर की रात के बीच अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर कई पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर हमला किया, जिससे भारी गोलीबारी हुई. हमलों के बाद, तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनका ऑपरेशन खत्म हो गया है, हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों ने किसी भी सीजफायर की घोषणा को खारिज कर दिया और अपनी मिलिट्री कार्रवाई जारी रखी. उस समय तालिबान के एक प्रवक्ता ने कन्फर्म किया था कि लड़ाई 12 अक्टूबर की सुबह तक जारी रही. दोनों देशों ने कहा कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाया है और कई बॉर्डर पोस्ट को तबाह कर दिया है या उन पर कब्जा कर लिया है.

जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी…”—IAS अधिकारी संतोष वर्मा की आरक्षण पर दलीलें बनीं सुर्खियों में

भोपाल अनुसूचित जाति वर्ग के सरकारी कर्मचारियों के संगठन 'अजाक्स' के नए प्रांत प्रमुख चुने गए आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। आरोप है कि आरक्षण पर भाषण देते हुए उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर विवादित टिप्पणी कर डाली। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह कह रहे हैं कि आरक्षण तब तक जारी रहे जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को दान ना कर दे या उससे संबंध ना बनाए। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को वायरल वीडियो में मंच से कह रहे हैं, 'मैं तब तक यह नहीं मानूंगा कि एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान ना कर दे या उसका उससे संबंध नहीं बनाए। केवल आर्थिक आधार की बात है तो- जब तक यह रोटी-बेटी का व्यवहार ना होता तब तक हमको समाज के पिछड़ेपन, सामाजिक पिछड़ेपन के कारण आरक्षण की पात्रता मिलती रहेगी। आप खत्म कर दीजिए जाति- हमें नहीं चाहिए आरक्षण।' बताया जा रहा है कि संतोष वर्मा ने अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के प्रांतीय अधिवेशन में 23 नवंबर को यह टिप्पणी की थी। संतोष कुमार वर्मा मध्य प्रदेश काडर के 2012 के बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग में उप सचिव पद पर हैं। हाल ही में उन्हें अजाक्स का प्रांतीय प्रमुख भी चुना गया है। आईएएस संतोष कुमार वर्मा इससे पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन पर प्रमोशन पाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के आरोप लग चुके हैं। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और सस्पेंड हो गए थे। वर्मा पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर ज्यादती का आरोप भी लगाया था। आईएएस अधिकारी के बयान से ब्राह्मण और सवर्ण संगठनों ने नाराजगी जाहिर की है और सरकार से कार्रवाई की मांग की है। ब्राह्मणसभा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र व्यास ने कहा कि यह तुच्छ सोच है। उन्होंने कहा कि इस तरह की मानसिकता वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।