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भारत में Meta के स्मार्ट ग्लास की एंट्री, ग्लास से अब कॉल और रिकॉर्डिंग संभव

 नई दिल्ली Meta ने भारत में Oakley AI पावर्ड ग्लासेस लॉन्च कर दिए हैं. इससे पहले तक भारत में सिर्फ MetaRayban Wayfarer 1 ही बेचे जा रहे थे. आपको बता दें कि हाल ही में Meta ने MetaRayban 2 लॉन्च किया है जो फ़िलहाल भारत में एवेलेबल नहीं है.  Oakley Meta HSTN स्मार्ट ग्लासेस की बिक्री भारत में 1 दिसंबर से स्टार्ट हो जाएगी. इसे आज यानी 25 नवंबर से प्री ऑर्डर किया जा सकता है. इसे सन ग्लास हट से ख़रीद सकते हैं. Oakley Meta HSTN की कीमत 41,800 रुपये से शुरू होगी. इस स्मार्ट ग्लासेस को एथलीट और स्पोर्ट्स ऐक्टिविटी करने वाले लोगों के लिए ख़ास तौर पर डिज़ाइन किया गया है.  मेटा के ये नए ग्लासेस IPX4 वॉटर रेजिस्टेंट हैं और कंपनी का दावा है कि ये 8 घंटे तक की बैटरी बैकअप देंगे. केस के साथ एडिशनल 48 घंटे तक का बैकअप मिलेगा.  इस स्मार्ट ग्लासेस से यूजर्स Ultra HD 3K वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं. इस चश्मे में बिल्ट इन Meta AI दिया गया है जो आपके कमांड सुन कर काम करेगा.  Oakley Meta HSTN में दिया गया MetaAI हिंदी सपोर्ट करता है. Hey Meta बोल कर आप इससे कोई भी सवाल पूछ सकते हैं या कोई टास्क परफॉर्म करने के लिए इससे कह सकते हैं.  हाल ही में Deepika Padukone के साथ Meta ने पार्टनरशिप किया है. इसके तहत अब मेटा स्मार्ट ग्लासेसज में Deepika Padukone की आवाज़ सुनाई देगी. इसके अलावा और भी सेलिब्रिटी वॉयस का ऑप्शन है.  जल्द मिलेगा UPI सपोर्ट  जल्द ही मेटा के स्मार्ट ग्लासेस के ज़रिए UPI पेमेंट कर पाएंगे. वॉयस कमांड के ज़रिए बोलना होगा Hey Meta, scan and pay, इसके बाद मेटा ग्लासेस में लगा हुआ कैमरा QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर देगा.  Meta स्मार्ट ग्लासेस इन दिनों दुनिया भर में काफी पॉपुलर हो रहे हैं. इससे कॉलिंग, म्यूज़िक सहित वीडियो और फोटो क्लिक किए जा सकते हैं. दिलचस्प ये है कि ये नॉर्मल चश्मे जैसे ही लगते हैं. 

वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा, छत्तीसगढ़ में नई गोद लेने की पहल शुरू

 रायपुर  प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण और प्राणी उद्यानों के बेहतर रखरखाव को लेकर वन विभाग ने एक नई पहल शुरू करने की तैयारी की है। कर्नाटक और उत्तरप्रदेश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी नागरिकों के साथ विभिन्न संस्थाएं और सामाजिक संगठन वन्य प्राणियों को गोद ले सकेंगे। इस योजना के माध्यम से वन्य प्राणियों की देखभाल, पोषण के साथ-साथ उनके आवास व स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही सरकार के स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है। अनुमति मिलते ही योजना को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा। पहले चरण में राजधानी रायपुर स्थित जंगल सफारी और बिलासपुर के कानन पेंडारी चिड़ियाघर से कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद जरूरत और परिस्थितियों के अनुरूप राज्य के अन्य चिड़ियाघरों तथा संरक्षित क्षेत्रों में भी इसे विस्तारित किया जाएगा। वार्षिक दान दे सकेंगे योजना के तहत नागरिक या संस्थाएं किसी भी वन्य प्राणी के संरक्षण के लिए वार्षिक दान दे सकेंगे। इस दान की न्यूनतम राशि और गोद लेने की शर्तें योजना के औपचारिक लॉन्च के बाद सार्वजनिक की जाएगी। अनुमान है कि राशि प्राणी के आहार और सेवा-सुविधाओं की लागत के आधार पर तय होगी, जिसमें शेर, बाघ जैसे बड़े प्राणियों के लिए अधिक और हिरण, पक्षी आदि श्रेणियों के लिए अपेक्षाकृत कम दान निर्धारित किया जाएगा। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसी भी प्राणी को गोद लेने का अर्थ केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना होगा, इसमें प्राणी के स्वामित्व या उसके अधिकारों का हस्तांतरण शामिल नहीं होगा। गोद लेने वालों को विशेष अवसर पर प्राणी दर्शन की अनुमति, देखभाल संबंधी गतिविधियों की जानकारी और विभाग के कार्यक्रमों में आमंत्रण जैसे प्रोत्साहन भी प्रदान किए जाएंगे। संबंधित बाड़े में होंगे नाम विशेष बात यह है कि दान देने वाले नागरिकों और संस्थाओं के नाम संबंधित प्राणी के बाड़े के बाहर और चिड़ियाघर के प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर पट्टिका के रूप में अंकित किए जाएंगे। इससे सामाजिक सहभागिता बढ़ेगी और वन्य प्राणियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता भी मजबूत होगी। वन विभाग का मानना है कि इस योजना के लागू होने से जहां संरक्षण कार्यों को आर्थिक मजबूती मिलेगी। वहीं आम नागरिकों में वन्य जीवों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव भी बढ़ेगा। विभाग को उम्मीद है कि राज्य के उद्योग, शैक्षणिक संस्थान, सामाजिक संगठन और संवेदनशील नागरिक इस अभियान में उत्साहपूर्वक भागीदारी करेंगे।

ध्वजारोहण के साथ श्रीराम मंदिर में नया अध्याय, 5 तरीके जो बदल रहे तीर्थ यात्रा का अर्थ

अयोध्या अयोध्या में नवनिर्मित राम लला मंदिर न केवल हिंदुओं के पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है बल्कि सदियों की प्रतीक्षा के बाद यह मंदिर अब तीर्थ यात्रा के पारंपरिक मायने को भी बदल रहा है. यह भव्य मंदिर न केवल हिंदुओं के धार्मिक महत्व का प्रतीक है बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय लिख रहा है. पहले जहां तीर्थ यात्रा केवल आध्यात्मिक शांति और भक्ति तक सीमित थी, वहीं अब यह पर्यटन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का माध्यम बन गई है. इसके साथ ही अयोध्या, जो कभी एक छोटा-सा शहर था, अब उत्तर प्रदेश की प्रगति का प्रमुख इंजन बन चुका है. परंपरागत रूप से, तीर्थ यात्रा का अर्थ था पैदल या साधारण साधनों से पवित्र स्थलों की यात्रा करना, जहां भक्त अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए जाते थे. लेकिन राम मंदिर के निर्माण ने इस अवधारणा को पूरी तरह बदल दिया है. अब तीर्थ यात्रा एक आधुनिक, सुविधाजनक और बहुआयामी अनुभव बन गई है. मंदिर के उद्घाटन के बाद, अयोध्या में पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. 2024 में 13.77 करोड़ से अधिक दर्शनार्थी आए, जो ताजमहल के पर्यटकों से अधिक हैं. 2025 के पहले छह महीनों में ही 23 करोड़ पर्यटक पहुंचे, और वर्ष के अंत तक यह संख्या 50 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है. यह बदलाव केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है. बहुत कुछ बदला है. 1-विदेशी पर्यटक और अमीर भारतीय अब योग और आयुर्वेद के साथ राम मंदिर को जोड़कर आते हैं अयोध्या ने हिंदुओं की तीर्थ यात्रा को वैश्विक पर्यटन का हिस्सा बना दिया है.राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में आने वाले विदेशी पर्यटकों का चरित्र पूरी तरह बदल गया है. पहले जहां ज्यादातर विदेशी केवल इंडिया का एक्सोटिक सर्किट (दिल्ली-आगरा-जयपुर-वाराणसी) देखकर चले जाते थे, अब वे जानबूझकर अयोध्या को अपने इटीनेरेरी में शामिल कर रहे हैं. वह भी केवल मंदिर देखने के लिए नहीं, बल्कि एक संपूर्ण वेलनेस + स्प्रिचुअल अनुभव के लिए. 2024-25 में अयोध्या आने वाले विदेशी पर्यटकों में सबसे तेज़ बढ़ोतरी अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड से दर्ज की गई है. इनमें से अधिकांश 30-55 आयु वर्ग के हैं, और वे योग, ध्यान, आयुर्वेद और भारतीय दर्शन से पहले से परिचित हैं. उनके लिए राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रामायण के उस महाकाव्य का जीवंत केंद्र है जिसकी कहानियां वे बाली, कंबोडिया, थाईलैंड के मंदिरों में पहले ही देख चुके हैं. अब वे उसी कथा के मूल स्रोत को अनुभव करना चाहते हैं. इस नए ट्रेंड को समझते हुए अयोध्या में कई विशेष पैकेज शुरू हो गए हैं. उदाहरण के लिए रामायण वेलनेस रिट्रीट जिसमें सुबह सरयू तट पर सूर्य नमस्कार और प्राणायाम, फिर राम मंदिर दर्शन, दोपहर में पंचकर्म या अभ्यंगम मसाज, शाम को रामकथा या भजन संध्या.   योग इन द लैंड ऑफ राम 5 दिन का पैकेज है. इसमें हनुमान गढ़ी में अष्टांग योग, कनक भवन के पास ध्यान सत्र, और नमामि गंगे घाट पर साउंड हीलिंग शामिल है.   इसी तरह आयुर्वेदिक रामायण ट्रेल का भी एक पैकेज पॉपुलर हो रहा है. इसमें दर्शन के साथ-साथ स्थानीय जड़ी-बूटियों से बने सात्विक भोजन, तुलसी-गिलोय काढ़ा और केसर-दूध प्रसाद शामिल है.इन पैकेजों को प्रमोट करने में विदेशी योग टीचर्स और इन्फ्लुएंसर्स की बड़ी भूमिका है. 2-अयोध्या की तीर्थ यात्रा में डिजिटल क्रांति राम मंदिर के बाद अयोध्या की तीर्थयात्रा में आस्था और टेक्नोलॉजी का ऐसा संगम हुआ है कि पहले की पीढ़ी कल्पना भी नहीं करेगी इतना सब कुछ बदल गया. घर बैठे ही रामलला के दर्शन की बात पुरानी हो चुकी है क्योंकि कई मंदिरों में यह पहले से ही हो रहा है. यहां कतार में घंटों खड़े होने से पहले पता चल जाता है कि लाइन कितनी लंबी है. कतार में खड़े लोगों के मोबाइल पर रियल-टाइम अपडेट आता है कि 'आपकी बारी में अभी 42 मिनट बाकी हैं, कृपया रामपथ पर बने डिजिटल वेटिंग एरिया में विश्राम करें'.  बड़े-बड़े एलईडी स्क्रीन पर रामचरितमानस की चौपाइयां, 360° वर्चुअल टूर और लाइव आरती चलती रहती है. इतना ही नहीं सरयू की आरती का लाइव प्रसारण मोबाइल पर देखकर लोग अपने-अपने शहर में दीया जला लेते हैं.  दिवाली 2025 के दीपोत्सव को 187 देशों के 4.2 करोड़ लोगों ने लाइव देखा. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, मॉरीशस, फिजी और इंडोनेशिया से लाखों प्रवासी भारतीय उसी समय अपने घरों में टीवी खोलकर जय श्री राम बोलते हैं और दिया जलाते हैं. अब अयोध्या की दीपावली सिर्फ़ अयोध्या की नहीं, विश्व हिंदू समाज की दीपावली बन गई है. मोबाइल ऐप पर 22 भाषाओं में ऑडियो गाइड उपलब्ध है . 3- जीवनशैली और सांस्कृतिक उत्सव में बदली तीर्थयात्रा  भक्त अब रामायण-थीम वाली हेरिटेज वॉक, सात्विक भोजन ट्रेल्स और लेजर शो का आनंद लेते हैं. पहले जहां यात्रा कष्टपूर्ण होती थी, वहीं अब इलेक्ट्रिक शटल, एयर-कंडीशंड होटल और साफ-सुथरी सड़कें उपलब्ध हैं. यह मंदिर न केवल राम लला के दर्शन का केंद्र है बल्कि सूर्या कुंड, गुप्तार घाट और भारत कुंड जैसे अन्य स्थलों को भी जोड़ता है, जो यात्रा को एक पूर्ण सांस्कृतिक पैकेज बनाते हैं.  सांस्कृतिक रूप से, राम मंदिर ने राम नवमी और दीपोत्सव जैसे त्योहारों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है. राम लीला प्रदर्शन बढ़े हैं, और कला-शिल्प में रामायण की थीम प्रमुख हो गई है. विदेशी पर्यटक अब योग और आयुर्वेद के साथ राम मंदिर को जोड़कर आते हैं, जिससे तीर्थ यात्रा वैश्विक पर्यटन का हिस्सा बन गई है.  यह बदलाव महिलाओं और युवाओं को भी सशक्त बना रहा है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. कुल मिलाकर, राम मंदिर ने तीर्थ यात्रा को मात्र धार्मिक कृत्य से ऊपर उठाकर एक जीवनशैली और सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया है.  4-नया पर्यटक वर्ग अयोध्या को केवल देखने नहीं, बल्कि अनुभव करने आ रहा है अयोध्या अब एक फोटो-पॉइंट नहीं रहा. 2024 के बाद जो पर्यटक यहां आ रहे हैं, वे सेल्फी लेकर लौटने वाले साधारण सैलानी नहीं हैं. वे यहां अपनी आत्मा को छूने, अपने भीतर कुछ बदलने, और घर लौटकर उस बदलाव को दूसरों तक पहुंचाने आते हैं. तीर्थयात्री सुबह चार बजे सरयू तट पर पहुंचते हैं. वहां कोई टूर गाइड नहीं, कोई लाउडस्पीकर नहीं—बस घंटों का … Read more

कलेक्टर की पहल और किसान की दानशीलता, दतिया में जल्द शुरू होगा बड़ा अस्पताल

दतिया    दतिया जिले में एक किसान ने उदारता दिखाई है। गांव में 30 साल पहले बना अस्पताल में अब लोगों के लिए छोटा पड़ रहा था। मरीजों की संख्या के हिसाब से अब अस्पताल में जगह नहीं थी। दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े वहां पहुंचे और अस्पताल का निरीक्षण किया। गांव के लोगों ने विस्तार की बात कही तो कलेक्टर ने कहा कि यहां जमीन ही नहीं है। कलेक्टर ने जमीन देने की अपील की अस्पताल के पास ही खड़े होकर कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े वहां लोगों से बात करने लगे। बातचीत के दौरान उन्होंने किसानों से कहा कि यहां निर्माण के लिए जमीन ही नहीं है। अगर जमीन नहीं है तो विस्तार कैसे होगा। ग्रामीणों ने कलेक्टर की अपील को सुना। इस बीच उन्हीं में से एक किसान ने उदारता दिखाई। किसान ने जमीन दान कर दी कलेक्टर स्वपनिल वानखेड़े की बातों को सुनकर मौके पर मौजूद एक किसान ने उदारता दिखाई। किसान ने तुरंत कलेक्टर से कहा कि अस्पताल निर्माण के लिए मैं दो-तीन बीघा जमीन दान दूंगा। इससे ज्यादा भी जरूरत पड़ी तो मैं देने के लिए तैयार हैं। किसान ने कहा कि सड़क किनारे भी हमारी जमीन है, वहां भी दे दूंगा। इसके साथ किसान ने कलेक्टर से कहा कि हमारे परिवार ने पहले भी जमीन दान में दी है। अस्पताल और स्कूल गांव में उसी जमीन पर बने हुए हैं। कलेक्टर ने कहा कि सम्मानित करूंगा वहीं, मौके पर मौजूद दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने अधिकारी से कहा कि दान पत्र बन जाए तो स्थानीय स्तर पर एक कार्यक्रम आयोजित कर इन्हें सम्मानित करें। कलेक्टर ने यह भी कहा कि मैं भी इस कार्यक्रम में आऊंगा। गौरतलब है कि जमीन दान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गांव में अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया शुरु होगी। इससे गांव और आसपास की महिलाओं को डिलीवरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कलेक्टर ने किसान से बात करते हुए वीडियो शेयर किया है।

एमी अवॉर्ड्स में दिलजीत को निराशा, ‘अमर सिंह चमकीला’ को भी नहीं मिला सम्मान

न्यूयॉर्क     53वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स 2025 का शानदार आगाज मंगलवार को न्यूयॉर्क सिटी में हुआ. विनर्स की पूरी लिस्ट रिवील हो गई है. यहां भारत के हाथ थोड़ी निराशा लगी है. दिलजीत दोसांझ की बायोग्राफिल ड्रामा 'अमर सिंह चमकीला' एक भी अवॉर्ड नहीं जीत पाई है. दिलजीत को बेस्ट एक्टर और फिल्म को बेस्ट TV मिनी मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया था. दोनों ही कैटिगरी में अवॉर्ड जीतने से ये फिल्म चूक गई है. एमी अवॉर्ड जीतने से चूके दिलजीत दिलजीत के बजाय बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड Oriol Pla को फिल्म 'आई, एडिक्ट' के लिए मिला है. वहीं बेस्ट TV मूवी/मिनी सीरीज कैटिगरी में लॉस्ट बॉयज एंड फेयरीज ने जीत हासिल की है. बेस्ट परफॉर्मेंस कैटिगरी में दिलजीत के साथ डेविड मिशेल (लुडविग), Oriol Pla (आई, एडिक्ट) और Diego Vasquez (वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सॉलिट्यूड) नॉमिनेटेड थे. अमर सिंह चमकीला फिल्म के एमी अवॉर्ड्स में चूकने से भारतीय फैंस निराश हैं. उन्हें मूवी की जीत पर भरोसा था क्योंकि इसे ग्लोबल लेवल पर भी काफी पॉपुलैरिटी मिली थी.  क्या बोले इम्तियाज अली? एमी वर्ल्ड टेलीविजन फेस्टिवल के दौरान एक पैनल में बोलते हुए इम्तियाज अली ने कहा- मेरे लिए ये फिल्म एक कलाकार और उसकी कला के बीच की लव स्टोरी थी. एक गायक और उसकी परफॉर्मेंस का रिश्ता प्रेमियों की तरह होता है. एक समय ऐसा आता है जब आप इसे पैसे, शोहरत या चमक-दमक के लिए नहीं, बल्कि उस कला के प्यार में करते हैं. ये एक ऐसा जुनून होता है जो तर्क से परे जाकर दर्शकों से जुड़ने की कोशिश करता है. इसी भाव पर मैंने अमर सिंह चमकीला के कैरेक्टर को गढ़ा.  अली के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म पंजाबी लोक-गायक अमर सिंह चमकीला की जिंदगी पर बेस्ड है. चमकीला को पंजाब के एल्विस के नाम से भी बुलाया जाता था. दिलजीत और परिणीति चोपड़ा लीड रोल में थे. ये फिल्म पिछले साल अप्रैल में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई थी. फिल्म को क्रिटिक्स ने खूब सराहा था. चमकीला के गाने उस दौर में लोगों के बीच जितने पॉपुलर थे, उतना ही विवाद इनपर हुआ था. सिंगर के गानों को अश्लील का टैग दिया गया था. 8 मार्च 1988 को गोलियों से भूनकर उनकी हत्या कर दी गई थी. देखें विनर्स की पूरी लिस्ट… बेस्ट एक्ट्रेस: ​​एना मैक्सवेल मार्टिन (अनटिल आई किल यू) बेस्ट किड्स: एनिमेशन: ब्लूई इंटरनेशनल एमी फॉर किड्स: लाइव-एक्शन: फॉलन इंटरनेशनल एमी कॉमेडी: 'लुडविग' बेस्ट एक्टर: ओरिओल प्ला [आई, एडिक्ट] इंटरनेशनल एमी फॉर डॉक्यूमेंट्री: हेल जम्पर इंटरनेशनल एमी फॉर टेलीनोवेला: द गुड एंड द बैड इंटरनेशनल एमी फॉर ड्रामा सीरीज: राइवल्स आर्ट्स प्रोग्रामिंग अवॉर्ड: रयुइची साकामोटो: लास्ट डेज़ बेस्ट शॉर्ट-फॉर्म सीरीज: 'ला मेडिएट्रिस' (द मेडिएटर) करंट अफेयर्स फॉर एमीज: 'डिस्पैचेस: किल ज़ोन: इनसाइड गाज़ा' बेस्ट स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री: इट्स ऑल ओवर: द किस दैट चेंज्ड द स्पैनिश फुटबॉल' इंटरनेशनल एमी फॉर न्यूज: 'गाजा, सर्च फॉर लाइफ' बेस्ट टीवी मूवी/मिनी-सीरीज: लॉस्ट बॉयज़ एंड फेयरीज बेस्ट नॉन-स्क्रिप्टेड एंटरटेनमेंट: शाओलिन इन हीरोज: डेनमार्क

जिला प्रभारियों में कांग्रेस ने की नई नियुक्तियां, जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण खाली

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस ने जिला स्तर पर संगठन को फिर से व्यवस्थित करने के लिए व्यापक बदलाव किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लगभग सभी जिलों में नए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि पटवारी के गृह जिले इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल खाली रखी गई है, जबकि बाकी 70 जिलों में प्रभारियों की घोषणा कर दी गई है। पार्टी के इस कदम को आगामी राजनीतिक गतिविधियों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोट हुए नेताओं की जगह नए प्रभारी     पीसीसी अध्यक्ष ने खासतौर पर खंडवा सिटी, नरसिंहपुर और ग्वालियर सिटी जैसे अहम जिलों के प्रभारी बदले हैं। खंडवा सिटी की पूर्व प्रभारी रीना बौरासी, अब महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं।     इनके स्थान पर खंडवा ग्रामीण के जिला प्रभारी आरके दोगने को प्रभारी बनाया गया है। ये हरदा के विधायक भी हैं। इनको दोनों जिलों का प्रभारी बनाया गया है। ग्वालियर सिटी की प्रभारी हिना कांवरे राष्ट्रीय सचिव बनी हैं। इसके बाद ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों जिलों का जिम्मा पीसी शर्मा को सौंपा गया है। पीसी शर्मा पूर्व मंत्री हैं। वहीं, सुखदेव पांसे को कांग्रेस के संगठन प्रभारी के तौर पर नरसिंहपुर जिले का जिम्मा सौंपा गया था। इनकी जगह नरसिंहपुर की जिम्मेदारी आलोक मिश्रा को दी गई है। जीतू पटवारी का गृह जिला इसलिए खाली पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का गृह जिला इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी अवनीश भार्गव मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल के मुख्य संगठक बनाए गए हैं। भार्गव जैसे सीनियर और समन्वय बनाने वाले नेता का नाम तय नहीं हो पाया। इसलिए फिलहाल इंदौर ग्रामीण के जिला प्रभारी को घोषित नहीं किया गया है। अब जिले वार कांग्रेस के प्रभारियों की लिस्ट देखिए     मुरैना सिटी– राम किंकर गुर्जर     मुरैना ग्रामीण– लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष)     श्योपुर– सुनील शर्मा (महासचिव)     भिंड शहर व ग्रामीण– बैजनाथ कुशवाह (महासचिव)     ग्वालियर शहर व ग्रामीण– पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री)     अशोकनगर– रोशनी यादव (महासचिव)     दतिया- गुड्डू राजा (महासचिव)     शिवपुरी- देवेंद्र शर्मा     गुना- दिनेश गुर्जर (महासचिव)     सागर सिटी- मनोज कपूर (सचिव)     सागर ग्रामीण- घनश्याम सिंह (महासचिव)     छतरपुर- सुरेश राजे (महासचिव)     दमोह- हर्ष यादव (महासचिव)     पन्ना- राजभान सिंह (सचिव)     टीकमगढ़- राव यादवेंद्र सिंह यादव (महासचिव)     निवाड़ी– रामलखन दंडोतिया     रीवा शहर व ग्रामीण- संजय शर्मा (महासचिव)     मऊगंज– मकसूद अहमद     सतना सिटी– सुनील सर्राफ (सचिव)     सतना ग्रामीण- विनय सक्सेना (महासचिव)     मैहर– गुरमीत सिंह (मंगू) (महासचिव)     सीधी– दिलीप मिश्रा     सिंगरौली शहर व ग्रामीण- कविता पांडे (महासचिव)     शहडोल– नारायण पट्टा (महासचिव)     अनूपपुर– सुखेन्द्र सिंह बन्ना     उमरिया – नीरज बघेल (सचिव)     डिंडोरी – फुंदेलाल मार्को (महासचिव)     जबलपुर सिटी – राजकुमार खुराना     जबलपुर ग्रामीण- रजनीश सिंह (महासचिव)     कटनी शहर व ग्रामीण – वीरेंद्र द्विवेदी (महासचिव)     बालाघाट – लखन घनघोरिया (उपाध्यक्ष)     छिंदवाड़ा सिटी – सुनील जायसवाल (महासचिव)     पांढुर्ना – रामू टेकाम (महासचिव)     मंडला – किरण अहिरवार (महासचिव)     नरसिंहपुर – आलोक मिश्रा     सिवनी – सोहन वाल्मीकि (महासचिव)     नर्मदापुरम – ओम पटेल     बैतूल – सुनील उइके     हरदा – रचना जैन (संयुक्त सचिव)     भोपाल सिटी – रवि जोशी (उपाध्यक्ष)     भोपाल ग्रामीण – विनय बाकलीवाल (महासचिव)     रायसेन – शैलेन्द्र पटेल (महासचिव)     राजगढ़ – सुरेंद्र सिंह हनी बघेल (उपाध्यक्ष)     सीहोर – जयश्री हरिकिरण (महासचिव)     विदिशा – प्रभु सिंह ठाकुर (महासचिव)     उज्जैन सिटी – अमित शर्मा (महासचिव)     उज्जैन ग्रामीण – चंदर सौंधिया (महासचिव)     देवास सिटी – सुरेंद्र सिंह (शेरा)     देवास ग्रामीण – सदाशिव यादव     रतलाम शहर व ग्रामीण- प्रताप ग्रेवाल (महासचिव)     शाजापुर – निर्मल मेहता     मंदसौर – मनोज राजानी     नीमच – अरविंद बागड़ी     आगर–मालवा – आतिफ अकील (महासचिव)     इंदौर सिटी – संजीव सक्सेना (महासचिव)     इंदौर ग्रामीण- (रिक्त)     खंडवा शहर व ग्रामीण- आरके दोगने (महासचिव)     बुरहानपुर शहर व ग्रामीण- ग्यारसीलाल रावत (महासचिव)     धार – रघु परमार (महासचिव)     झाबुआ – अमन बजाज     खरगोन – जय सिंह ठाकुर (महासचिव)     अलीराजपुर – रामवीर सिकरवार (महासचिव)     बड़वानी – झूमा सोलंकी (उपाध्यक्ष) पदाधिकारियों के प्रमोशन से खाली हुई जगह कुछ जिलों में प्रभारी इसलिए बदले गए क्योंकि मौजूदा पदाधिकारी प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट हो चुके हैं। खंडवा सिटी की प्रभारी रीना बौरासी महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष बनाई गई हैं। उनकी जगह खंडवा ग्रामीण के प्रभारी आरके दोगने को खंडवा शहर और ग्रामीण दोनों की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह ग्वालियर शहर की प्रभारी हिना कांवरे के राष्ट्रीय सचिव बनने के बाद ग्वालियर ग्रामीण के प्रभारी पीसी शर्मा को शहर और ग्रामीण दोनों का प्रभार सौंपा गया है। नरसिंहपुर में भी बदलाव हुआ है। यहां संगठन प्रभारी सुखदेव पांसे के पास जिले का प्रभार था, जिसे अब आलोक मिश्रा को सौंप दिया गया है। गृह जिले इंदौर ग्रामीण का प्रभार खाली क्यों रखा गया इंदौर ग्रामीण के प्रभारी अवनीश भार्गव को मध्य प्रदेश कांग्रेस सेवा दल का मुख्य संगठक नियुक्त किया गया है। पार्टी अंदरूनी तौर पर ऐसे वरिष्ठ और सर्वमान्य नेता की तलाश में है, जो इस महत्वपूर्ण जिले में समन्वय कायम रख सके। इसी वजह से इंदौर ग्रामीण की जिम्मेदारी फिलहाल रिक्त रखी गई है। जिलों के हिसाब से नियुक्त किए गए नए प्रभारी मुरैना जिले में राम किंकर गुर्जर (सिटी) और लाखन सिंह यादव (उपाध्यक्ष, ग्रामीण) को प्रभार मिला है। श्योपुर में सुनील शर्मा (महासचिव), भिंड में बैजनाथ कुशवाह (महासचिव), ग्वालियर शहर और ग्रामीण दोनों में पीसी शर्मा (पूर्व मंत्री) की नियुक्ति की गई है। अशोकनगर में रोशनी यादव (महासचिव), दतिया में गुड्डू राजा (महासचिव), शिवपुरी में देवेंद्र शर्मा और गुना में दिनेश गुर्जर (महासचिव) को दायित्व दिया गया है। सागर सिटी में मनोज कपूर (सचिव) और सागर ग्रामीण में घनश्याम सिंह (महासचिव) को जिम्मेदारी … Read more

सनातन गौरव का क्षण, धर्मध्वज से आलोकित हुआ अयोध्या धाम

सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में धर्मध्वज का आरोहण, संत समाज भावविभोर सनातन गौरव का क्षण, धर्मध्वज से आलोकित हुआ अयोध्या धाम योगी मोदी नेतृत्व में धर्म संस्कृति का पुनर्जागरण, मंदिरों में लौट रहा वैभव अयोध्या  सनातन परंपरा और आस्था के प्रतीक धर्मध्वज का आज राम मंदिर के शिखर पर प्रतिष्ठापन अयोध्या के संत समाज के लिए भावपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बन गया। 500 वर्षों की प्रतिक्षा, संघर्ष और तपस्या के उपरांत प्रभु श्रीराम के दिव्य मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण केवल एक धार्मिक क्षण ही नहीं बल्कि सनातन आस्था की वैश्विक प्रतिष्ठा का साक्ष्य बन रहा है। अवधपुरी के संत समाज श्रद्धा और भावनाओं से अभिभूत होकर इस पल को सनातन गौरव का क्षण बता रहे हैं। वे इसे उस संघर्षपूर्ण यात्रा का फल मानते हैं जिसमें संतों, भक्तों और समाज ने सैकड़ों वर्षों में अदम्य धैर्य और आस्था का परिचय दिया। साधु संतों का कहना है कि आज वह क्षण साकार हो रहा है जिसकी कल्पना उनके पूर्वजों ने सदियों पूर्व की थी। धर्म ध्वजा का आरोहण भारतवर्ष की आध्यात्मिक विरासत को और भी मजबूत करता है तथा संपूर्ण विश्व में सनातन आस्था की महिमा को प्रखरता से स्थापित करता है। संत समाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार मानता है। उनका कहना है कि डबल इंजन सरकार ने सनातन परंपराओं के संरक्षण और मंदिर संस्कृति के पुनरुद्धार का जो कार्य किया है वह देश की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ कर रहा है। मठ मंदिरों का संवर्धन, धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार और संतों के प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान की गई है। राम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने कहा कि अयोध्या मिशन के अंतर्गत सनातन संस्कृति का जिस प्रकार पुनरुद्धार हुआ है वह प्रशंसनीय है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धर्म की रक्षा और स्थापना के उद्देश्य से सतत संलग्न बताते हुए कहा कि वह केवल एक मुख्यमंत्री नहीं बल्कि धर्म परंपरा की रक्षा के प्रहरी हैं। विवाह पंचमी के अवसर पर आयोजित इस प्रतिष्ठा समारोह में साधु संतों द्वारा प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का पूजन अर्चन भी किया गया। संत समाज का विश्वास है कि यह क्षण भारत के उज्ज्वल भविष्य की आस्था को और अधिक मजबूत करेगा तथा सनातन समाज के आत्मगौरव का शंखनाद साबित होगा।

द. अफ्रीका की बढ़त ने छुआ 500 का आंकड़ा, कप्तान बावुमा का आक्रामक रुख—घोषणा दूर की बात

नई दिल्ली  इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका दो मैच की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला गुवाहाटी में जारी है। चौथे दिन टी-ब्रेक तक साउथ अफ्रीका की बढ़त 395 रनों की हो गई है। दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका का स्कोर 3 विकेट के नुकसान पर 107 रन है। भारत को अब यह मैच जीतने के लिए इतिहास रचना होगा। दरअसल, भारत में आज तक 387 रनों से ज्यादा का टारगेट चेज नहीं हुआ है।  साउथ अफ्रीका को इस पारी में तीन झटके रायन रिकल्टन, ऐडन मार्करम और टेंबा बावुमा के रूप में लगे। रिकल्टन और मार्करम को जडेजा ने तो बावुमा को सुंदर ने आउट किया। साउथ अफ्रीका की नजरें टी-ब्रेक के बाद लीड को तेजी से 500 के करीब पहुंचाकर पारी घोषित करने पर होगी। बता दें, साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग करते हुए 489 रन बनाए थे, जिसके सामने टीम इंडिया 201 रनों पर सिमट गई थी। पहली पारी के बाद साउथ अफ्रीका ने 288 रनों की बढ़त हासिल की थी। लंच ब्रेक तक साउथ अफ्रीका की लीड 500 के पार लंच ब्रेक तक साउथ अफ्रीका की लीड 508 रनों की हो गई है, मगर टेंबा बावुमा ने अभी भी पारी घोषित नहीं की है। पहले हर किसी को लग रहा था कि साउथ अफ्रीका की नजरें 500 की लीड पर होगी, मगर यह मुकाम हासिल करने के बाद भी साउथ अफ्रीका बैटिंग कर रहा है। साउथ अफ्रीका की लीड 500 के पार पारी का 69वां ओवर लेकर आए यशस्वी जायसवाल की चौथी गेंद पर मुल्डर ने चौका लगाकर साउथ अफ्रीका की लीड को 500 के पार पहुंचा दिया है, मगर अभी भी टेंबा बावुमा ने पारी घोषित नहीं की है। साउथ अफ्रीका के 200 रन पूरे साउथ अफ्रीका के दूसरी पारी में 200 रन पूरे हो गए हैं। 288 रनों की लीड के साथ उनकी कुल बढ़त 488 रनों की हो गई है। निश्चित रूप से अब टेंबा बावुमा की नजरें 500 के आंकड़े पर है।

बाबर नाम के निर्माणों को लेकर उमा भारती का विवादित वक्तव्य, सरकार पर साधा निशाना

भोपाल  पूर्व सीएम और बीजेपी की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने बाबर को लेकर बड़ा हमला बोला है। उमा ने कहा कि  जिस बाबर ने भारत पर हमला किया, भारत को अपमानित किया , उसके नाम की कोई इमारत इस देश में बन नहीं सकती। भारत की धरती पर बाबर के नाम से बनने वाली इमारत को ध्वस्त करेंगे- उमा अगर कोई ऐसा करने का काम करने तो वो इमारत ध्वस्त कर दी जाएगी। जो सरकार इसको संरक्षण देगी वो सरकार भी ध्वस्त कर दी जाएगी । सारे राजनीतिक दलों को मिलकर इसकी निन्दा करके इसको रोकना चाहिए ।दरअसल उमा भारती का ये बयान टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर के ऐलान के बाद सामने आया है। हूंमायूं कबीर ने कहा है कि वे 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ का शिलान्यास करेंगे। हम सम्मान करेंगे उमा भारती ने एक्स पर लिखा कि खुदा, इबादत, इस्लाम के नाम पर मस्जिद बने हम सम्मान करेंगे लेकिन बाबर के नाम से बनी हुई इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था। ईंटें भी गायब हो गई थीं। उन्होंने कहा कि मेरी मित्र ममता बनर्जी जी को सलाह है कि बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने की बात करने वालों पर कार्रवाई कीजिए। बंगाल और देश की अस्मिता आपकी भी जिम्मेदारी है। गौरतलब है कि उमा भारती राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही हैं। साथ ही वह बाबरी मस्जिद विध्वंस में भी शामिल थीं। पश्चिम बंगाल चुनाव में इस नाम पर ध्रुवीकरण भी होगा। मुर्शिदाबाद मुस्लिम बाहुल इलाका है। विधायक ने बाबरी मस्जिद निर्माण की घोषणा कर एक समाज को एकजुट करने की घोषणा की है। हालांकि अब देखना यह होगा कि उनकी पार्टी टीएमसी का रुख क्या रहती है। 6 दिसंबर को ही बाबरी मस्जिद की वर्षी है। कबीर के इस ऐलान के बाद से न सिर्फ़ बंगाल बल्कि पूरे देश की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। कबीर के इसी बयान पर उमा भारती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है । 

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए, मानव-वन्यजीव संघर्ष की नीति पर सुप्रीम कोर्ट पालन की स्थिति रिपोर्ट पेश करनी होगी

जबलपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में बनाई जा रही नीति की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राज्य शासन को चार सप्ताह का समय दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद जनहित याचिकाकर्ता के सुझावों पर विचार किया जाएगा।  हुई सुनवाई में किसानों द्वारा हाई-वोल्टेज तार लगाने से वन्य प्राणियों की मौतें होने का बिंदु भी रेखांकित हुआ। जनहित याचिकाकर्ता रायपुर निवासी नितिन संघवी की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाथियों को रेस्क्यू के नाम पर लंबे समय तक कैद में रखने का रवैया बेहद चिंताजनक है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में फसलों और संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन इसकी भरपाई की प्रक्रिया बेहद धीमी है। मुआवजा पटवारी स्तर पर तय होता है और इसे सामान्य प्राकृतिक आपदा जैसा माना जाता है। राहत मिलने में काफी समय लगता है। आंकड़ों के अनुसार किसानों को सिर्फ 17 प्रतिशत तक ही मुआवजा मिल पाता है। फसल और संपत्ति के नुकसान का मामला वन विभाग संभाले। पटवारी के बजाय वन विभाग को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा तय किया जाए सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर, 2025 को सभी राज्यों को टीएन गोदावर्मन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में यह निर्देश दिए थे कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को उत्तर प्रदेश और केरल की तर्ज पर प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में रखा जाए। ऐसे मामलों में मौत पर 10 लाख रुपये मुआवजा तय किया जाए और छह महीने के भीतर विस्तृत नीति बनाई जाए। प्रदेश में बाघों की मौत का कारण करंट विगत सुनवाई में एक्सपर्ट कमेटी ने बताया था कि कान्हा में रखे गए जंगली हाथियों को 15 दिनों में छोड़ दिया जाएगा और उनकी ट्रैकिंग के लिए रेडियो कॉलर आईडी मंगवाई गई है। आज की सुनवाई में बताया गया कि दो हाथियों को कॉलर आईडी लगाकर जंगल में छोड़ दिया गया है। इसी देरी और परेशानियों के कारण किसान खेतों की सुरक्षा के लिए हाई टेंशन करंट वाले तार लगाने लगते हैं। इसके कारण प्रदेश में बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत करंट लगने से हो रही है। याचिकाकर्ता ने कहा कि बाघों की मौत के मामलों में करंट एक बड़ा कारण है।