samacharsecretary.com

ऑक्सफोर्ड डिबेट में पाकिस्तान की पोल खुली, सवालों से बचकर भारत पर ठीकरा फोड़ा

ब्रिटेन  ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑक्सफोर्ड में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली एक बहस रद्द कर दी गई है। इस बहस के रद्द होने का दुनिया के ज्यादातर लोगों को कोई पता नहीं चला। लेकिन झूठे पाकिस्तान को यह कहां बर्दाश्त था। भारत के खिलाफ मिली हर हार को अपनी जीत बनाकर पेश करने वाले पाकिस्तान ने यहाँ पर भी बहस से भागकर इसे जीत बनाने की कोशिश करनी शुरू कर दी। ब्रिटेन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग ने ट्वीट करके दावा किया कि ऑक्सफोर्ड में होने वाली बहस से भारतीय प्रतिनिधि पीछे हट गए हैं। बाद में भारतीय सुप्रीम कोर्ट के वकील जे साईं दीपक ने पाकिस्तान के इस झूठ का सबूतों के साथ पर्दाफाश कर दिया।   पाकिस्तानी उच्चायोग की तरफ से ट्वीट करके कहा गया कि ऑक्सफोर्ट यूनिवर्सिटी में 'भारत की पाकिस्तान नीति एक सुरक्षा नीति के रूप में बेची गई जनप्रिय रणनीति है।' नामक शीर्षक पर बहस होनी थी, लेकिन भारतीय वक्ता अंतिम समय पर इस बहस से पीछे हट गए। पाकिस्तानी उच्चायोग ने इस बहस के लिए भारत की तरफ से जिन वक्ताओं के नाम बताए उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाणे, सुब्रमण्यम स्वामी और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का नाम था। वहीं, पाकिस्तान की तरफ से पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार, ब्रिटेन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त मोहम्मद फैसल और पाकिस्तानी सेना के पूर्व जनरल जुबैर महमूद हयात शामिल थे। जे साईं दीपक ने खोली पोल पाकिस्तान के ब्रिटेन स्थित हाईकमीशन द्वारा फैलाए जा रहा यह झूठ जब तक दुनिया तक पहुंचता उससे पहले भी भारतीय सुप्रीम कोर्ट के वकील जे साईं दीपक ने इसकी बखियां उधेड़ दीं। उन्होंने पाकिस्तानी दावों का खंडन सबूतों के साथ किया। उन्होंने कहा ऑक्सफोर्ड द्वारा भेजी गई अपनी भागीदारी की पुष्टि वाली ईमेल को भी साझा करते हुए लिका कि उनके साथ पूर्व सेना प्रमुख नरवाने और स्वामी भी भारतीय पक्ष की तरफ से वक्ता थे। उन्होंने लिखा, "पाकिस्तानी लोग ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी को भी गड़बड़ कर देते हैं और हमेशा की तरह इस बार भी वह सच बोलने की ताकत नहीं रखते।" दीपक ने कहा, "इस ईमेल के बाद यूनिवर्सिटी की तरफ से बताया गया कि नरवाने और स्वामी इस कार्यक्रम में नहीं आ सकते हैं। उन्होंने मुझसे कोई नए नाम भेजने के लिए कहा। लेकिन जब तक मैं विकल्प भेज पाता उससे पहले ही मुझे बताया गया कि इस बहस के लिए सुहेल सेठ और राज्य सभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से संपर्क किया गया है और उन्होंने शामिल होना स्वीकार किया है। मुझे लगा की ठीक है मामला खत्म हुआ। लेकिन इसके बाद मुझे बताया गया कि दोनों ने एक दम से नोटिस देने की वजह से इस कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया है।" प्रियंका चतुर्वेदी ने भी की पुष्टि प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें जुलाई में ही इसका आमंत्रण मिल गया था लेकिन उसके बाद कोई संपर्क नहीं किया गया। इसलिए मैंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन हाल ही में एक दम उनका फोन आया। इसलिए उन्होंने इनकार कर दिया। दीपक अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इसके बाद भी अंतिम समय पर मैं लंदन पहुंच कर बहस में शामिल होने के लिए तैयार था। यहां पर उन्होंने मनु खजूरिया और पंडित सतीश शर्मा के साथ मिलकर एक टीम भी तैयार कर ली। लेकिन बहस के तीन घंटे पहले उन्हें बताया गया कि बहस रद्द कर दी गई है क्योंकि पाकिस्तानी दल लंदन पहुंचा ही नहीं है। दीपक ने लिखा, “इस बात में मैं गुस्सा था, क्योंकि इसमें काफी मेहनत लगी थी।” इतना ही नहीं दीपक ने सबूत के तौर पर इस पूरी बहस के आयोजक मूसा हरराज की कॉल लॉग भी साझा की। पाकिस्तान को दी चुनौती इसके बाद दीपक ने पाकिस्तान की पोल खोलते हुए लिखा कि बाद में मुझे पता चला कि इस बहस के आयोजक मूसा हरराज, जिनके पिता पाकिस्तान में मंत्री हैं। उन्होंने इस पूरी झूठी कहानी को गढ़ा है। पाकिस्तान की टीम लंदन में ही मौजूद थी। लेकिन बहस नहीं करना चाहती थी। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान की टीम तैयारी के साथ है तो फिर बहस के लिए सामने आ जाए। उन्हें इसमें आतंकियों की तरह छिपने की जरूरत नहीं है।  

सुरक्षा में लापरवाही, भिलाई इस्पात संयंत्र ने दो महाप्रबंधकों को किया निलंबित, अन्य अफसरों को दी चेतावनी

दुर्ग भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के शीर्ष प्रबंधन ने बीते कुछ समय में कार्यस्थल पर हुए कर्मचारियों की मृत्यु और घायल होने की घटना को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है. सिंटर प्लांट-3 के महाप्रबंधक शंकर मोरी और उर्जा प्रबंधन विभाग के महाप्रबंधक सुब्रमणि रमणी को निलंबित कर दिया है. इसके अलावा उर्जा प्रबंधन विभाग के दो कार्यपालकों को चेतावनी पत्र जारी किया है. वहीं दो महाप्रबंधकों को एडवाइजरी पत्र प्रदान किए गए हैं. जीरो टॉलरेंस की नीति प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि असुरक्षित कार्य और असुरक्षित कार्यप्रणाली के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति पहले की तरह आगे भी कड़ाई से लागू रहेगी.  सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाना प्रत्येक स्तर पर सामूहिक उत्तरदायित्व है, और किसी भी प्रकार की लापरवाही या असुरक्षित व्यवहार को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. इसी संदर्भ में दुर्घटना-जनित परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चूक की गंभीरता को देखते हुए कठोर प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं. सभी घटनाओं का मूल कारण विश्लेषण किया गया है, ताकि प्रत्येक पहलू का तथ्यपरक मूल्यांकन हो सके. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक और निवारक उपायों की रूपरेखा तैयार कर संबंधित विभागों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.

मैप अपडेट से पहले जनता की राय जरूरी: मतलौड़ा सेक्टर प्लान में संशोधन प्रस्ताव जारी

चंडीगढ़ पानीपत जिले के मतलौड़ा कस्बे में प्रस्तावित सेक्टर-1 से सेक्टर-7 की शहरी विकास योजना में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस योजना के तहत जो मास्टर रोड पहले तय की गई थी, वह अब जमीन पर संभव नहीं है, इसलिए हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने सेक्टरल प्लान में संशोधन कर दिया है और अब इस बदलाव पर आम जनता की राय मांगी गई है। अंतिम स्वीकृति से पहले स्थानीय निवासी, भूमि मालिक, किसान, डेवलपर और संस्थान इस नए प्रस्ताव को समझ सकेंगे और यदि उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति या सुझाव है, तो वह निर्धारित समय में विभाग के संज्ञान में ला सकेंगे। इसके लिए आम लोगों को एक माह का समय दिया है। यह सेक्टोरल प्लान मतलौड़ा क्षेत्र के भविष्य के विकास की नींव माना जा रहा है। इस प्लान के लागू होने के बाद यहां सड़क नेटवर्क, रिहायशी सेक्टर, सुविधाएं और ज़मीन का उपयोग तय होगा। ऐसे में संशोधन का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव स्थानीय लोगों की जमीनों, भावी निर्माण, निवेश और क्षेत्रीय विकास मॉडल पर पड़ेगा। पुराना मास्टर रोड संभव नहीं, इसलिए बदली योजना 14 जनवरी, 2025 को तैयार किए गए मूल प्लान में सेक्टर-1 में एक मास्टर रोड प्वाइंट-ए से प्वाइंट-बी तक चलाई गई थी। लेकिन विभाग की साइट जांच में पाया गया कि यह रोड जमीन पर तकनीकी और व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसी वजह से इस रोड की दिशा बदलकर नई अलाइनमेंट तैयार की गई है। संशोधित ड्रॉइंग ऑनलाइन, अब नागरिकों की बारी विभाग ने संशोधित प्लान की स्कैन कॉपी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। लोग यहां जाकर यह देख सकते हैं कि योजना में क्या बदलाव किए गए हैं और उसका असर किन हिस्सों पर पड़ेगा। जिस भी व्यक्ति या संस्था को प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति हो या वह कोई सुझाव देना चाहता हो, उसे 30 दिनों के भीतर लिखित रूप में अपनी प्रतिक्रिया भेजनी होगी। आपत्तियों की जांच के बाद होगा अंतिम फैसला सीनियर टाउन प्लानर कार्यालय प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा कर 15 दिनों में रिपोर्ट विभाग को भेजेगा, जिसके बाद इस सेक्टर प्लान पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक अमित खत्री के अनुसार, जमीन की वास्तविक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक था और इससे क्षेत्र का विकास अधिक योजनाबद्ध और व्यवहारिक रहेगा।

बुलडोजर चला तो आगे आए पड़ोसी: हिंदू युवक ने पत्रकार को दिया प्लॉट, नया घर बनवाने का वादा

जम्मू-कश्मीर  जम्मू-कश्मीर में एक मुस्लिम पत्रकार के घर पर जब बुलडोजर चला दिया गया तो उसके हिंदू पड़ोसी मदद के लिए आगे आ गए। बीजेपी नेता रविंदर रैना ने भी पत्रकार के परिवार से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा था कि हमारे प्रधानमंत्री लोगों को घर देने पर विश्वास करते हैं और यह सरकार लोगों के घर उजाड़ रही है। पत्रकार ने कहा था कि घर पर बुलडोजर चलवाने से पहले उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि प्रशासन की यह कार्रवाई तानाशाही है। जम्मू डिवेलपमेंट अथॉरिट ने पत्रकार अराफाज अहमद दैंग का घर ढहा दिया था। इस मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसबल को तैनात कर दिया गया था।   पत्रकार ने बताया था कि उनका घर 40 साल पुराना था और उनके पिता भी इसी घर में रहते थे। उन्होंने कहा कि पिछले साल उनका एक घर ढहा दिया गया था और इसके बाद वह इस घर में रहने लगे ते। बता दें कि दैंग जम्मू- में एक न्यूज पोर्टलल चलाते थे। उन्होंने सरकार की डिमोलिशन ड्राइव के खिलाफ रिपोर्टिंग करनी शुरू कर दी थी। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह केवल सरकार को बदनाम करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल की तरफ से नियुक्त किए गए अधिकारियों ने ही यह कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार के खिलाफ साजिश रची जा रही है। सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है सोशल मीडिया पर लोग हिंदू समुदाय के इस कदम की सराहना कर रे हैं। वहीं पत्रकार का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि घर ढहाने के वक्त पुलिसबल उन्हें खींचकर दूर ले जा रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि इस तरह से किसी का घर ढहाना तानाशाही है। कुलदीप शर्मा ने गिफ्ट कर दिया प्लॉट पड़ोसी पत्रकार का घर ढहाए जाने के बाद उनके पड़ोसी कुलदीप शर्मा सामने आए और उन्होंने एक प्लॉट उन्हें गिफ्ट कर दिया। उन्होंने कहा, मैं अपने भाई को इस तरह टूटने नहीं दे सकता। कुछ भी हो जाए, मैं उनका घर बनवाऊंगा। उन्होंने तीन मारला प्लॉट पर बने घर को गिराया, मैं उन्हें पांच मारला का प्लॉट दे रहा हूं।  

CM भगवंत मान ने PU सीनेट नतीजों को बताया ऐतिहासिक, कहा—जनता की सोच की जीत

चंडीगढ़ मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राजधानी चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय (Punjab University) के सीनेट चुनाव के कार्यक्रम को मंजूरी दिए जाने को राज्य के लिए ‘‘शानदार जीत'' करार दिया है। मान ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह संस्थान केवल एक विश्वविद्यालय नहीं है, बल्कि पंजाब की विरासत है। मुख्यमंत्री ने आंदोलन में भाग लेने वाले शिक्षकों, छात्रों और संकाय सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ‘भारी दबाव' को झेला और महीने भर चले आंदोलन के दौरान अपना जज्बा नहीं टूटने दिया।   मान ने कहा, ‘‘छात्र, शिक्षक, संकाय सदस्य और सभी पंजाबी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने संघर्ष जारी रखा और अंततः उनका संघर्ष रंग लाया।'' उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पंजाब विश्वविद्यालय (Punjab University) के सीनेट चुनाव कार्यक्रम को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी। उपराष्ट्रपति पंजाब विश्वविद्यालय (PU) के कुलाधिपति भी हैं। यह घटनाक्रम छात्रों द्वारा सीनेट चुनाव कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर किये जा रहे जोरदार प्रदर्शन के बीच हुआ है। यह चुनाव एक वर्ष से अधिक समय से नहीं हुआ है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव सात सितंबर 2026 से चार अक्टूबर 2026 तक कराये जाएंगे। उपराष्ट्रपति सचिवालय से पंजाब विश्वविद्यालय (Punjab University) की कुलपति रेणु विग को भेजे गए पत्र में लिखा है, ‘‘मुझे यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब विश्वविद्यालय (Punjab University) के कुलाधिपति ने उपरोक्त पत्र में प्रस्तावित सीनेट चुनाव के कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है।'' सफाई कर्मचारियों को मिलेगा एरियर, मेयर का आभार जताया' विश्वविद्यालय की कुलपति ने इससे पहले कुलाधिपति को पत्र लिखकर सीनेट चुनाव कार्यक्रम की मंजूरी मांगी थी। पंजाब विश्वविद्यालय (Punjab University) बचाओ मोर्चा के बैनर तले पीयू के छात्र चुनाव कार्यक्रम की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पंजाब के कई राजनीतिक दलों आम आदमी पार्टी (आप), शिरोमणि अकाली दल (शिअद), कांग्रेस, साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा जैसे किसान संगठनों ने छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था।

ट्रम्प ने किया ऐतिहासिक फैसला, बाइडेन के कार्यकाल के अधिकांश एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स रद्द

वाशिंगटन एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने सभी को हैरान कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में जारी किए गए 92% एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स को कैंसिल कर दिया है। इसकी जानकारी डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ के जरिए दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि यह सभी ऑर्डर्स ऑटोपेन से साइन किए गए थे, यानी जो भी ऑर्डर्स जारी किए गए थे वे मशीन द्वारा साइन किए गए थे और इस पर जो बाइडेन की मंजूरी नहीं थी। डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े कदम से जो बाइडेन के कई महत्वपूर्ण एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स प्रभावित हुए हैं। इन ऑर्डर्स में पर्यावरण, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बड़े आदेश शामिल थे। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने जो बाइडेन को भी निशाने पर लिया और कहा कि अगर जो बाइडेन इन दस्तावेजों पर अपनी सहमति का दावा करेंगे तो उन पर झूठे बयान के आरोप लगेंगे। जो बाइडेन को डोनाल्ड ट्रंप ने सुस्त और चालाक बताया है। जानकारी दे दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह फैसला व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर हुए हमले के बाद लिया है। यह अवैध रूप से किया गया था: डोनाल्ड ट्रंप दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि ‘जो बाइडेन के ऑटोपेन से साइन किए गए लगभग 92% ऑर्डर्स रद्द किए जाते हैं और ऑटोपेन का इस्तेमाल तभी वैध है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट मंजूरी दी हो। यह अवैध रूप से किया गया था, बिडेन ऑटोपेन प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।’ हालांकि ऐसा नहीं है कि जो बाइडेन के सभी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स रद्द कर दिए गए हैं। जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल में कुल 162 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी किए थे, लेकिन इनमें से 80 ऑर्डर्स को डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालने के तुरंत बाद ही रद्द कर दिया था। ये बड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स हो सकते हैं प्रभावित अभी भी जो बाइडेन के कई एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बाद अब इन पर भी संकट मंडराने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब इन ऑर्डर्स में से कुछ रद्द होने का खतरा है। इनमें एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14087 शामिल है, जो अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों से जुड़ा हुआ है। इस ऑर्डर से ही दवा कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जाता है और यह आम नागरिकों को सस्ती दवाएं प्रदान करवाता है। एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14096 प्रभावित हो सकता है। दूसरा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14096 प्रभावित हो सकता है। यह ऑर्डर पर्यावरणीय न्याय पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को पर्यावरण प्रदूषण से बचाना था। इसके अलावा एक और ऑर्डर प्रभावित हो सकता है, जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14110 है। इस ऑर्डर के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को लेकर नियम बनाए गए थे, खास तौर पर इसके उपयोग में क्षमता, जोखिम भरे कामों से बचाव और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी नियमों पर नजर डालें तो कोई भी मौजूदा राष्ट्रपति पूर्व राष्ट्रपति के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स को रद्द, संशोधित और अमान्य करने की पावर रखता है। यानी डोनाल्ड ट्रंप चाहे तो जो बिडेन के इन ऑर्डर्स को रद्द कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि कुछ सीमाएं भी हैं, खासकर सजा में माफी और कमी से जुड़े मामलों में ये ऑर्डर्स वापस नहीं लिए जा सकते हैं।

उदाहरण CM यादव के बेटे अभिमन्यु यादव की शादी में दिखेगी सादगी, गृहनगर में जुटेंगे VVIP मेहमान

उज्जैन  सत्ता के गलियारों में जहां शादियाँ अक्सर वैभव, शक्ति और प्रतिष्ठा के प्रदर्शन का माध्यम बन जाती हैं, वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक अलग मिसाल पेश कर रहे हैं। 30 नवंबर को उनके छोटे बेटे अभिमन्यु यादव का विवाह इशिता यादव पटेल से उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर एक साधारण और बेहद सादगीपूर्ण समारोह में संपन्न होगा। इसी कार्यक्रम में 21 अन्य जोड़े भी विवाह बंधन में बंधेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “यहां न कोई भव्य सजावट होगी, न चमक-दमक भरे हॉल, न दिखावा। यह समारोह केवल उन मूल्यों पर केंद्रित है जो वास्तव में मायने रखते हैं।'' उन्होंने कहा कि सभी मेहमानों से उपहार नहीं लाने का अनुरोध भी किया गया है। वैसा ऐसा पहली बार नहीं है। मुख्यमंत्री के बड़े बेटे वैभव यादव की शादी भी पिछले वर्ष राजस्थान में अत्यंत सरल तरीके से संपन्न की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय के पीछे CM यादव का स्पष्ट संदेश है— “प्यार, सम्मान और सामाजिक सद्भाव किसी भी दिखावटी ऐश्वर्य से कहीं बड़े मूल्य हैं।”  30 नवंबर 2025 को अपने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी में उन्होंने किसी भव्य महल या शाही आयोजन की बजाय उज्जैन में सामूहिक विवाह सम्मेलन का चयन किया है. सीएम मोहन यादव के बेटे के साथ ही इस समारोह में कुल 21 नवयुगल साथ में गृहस्थ जीवन की शुरुआत करेंगे.  एमपी के मुख्यमंत्री का यह कदम न सिर्फ व्यक्तिगत सादगी का उदाहरण है, बल्कि समाज में समानता और सामाजिक समरसता का संदेश भी देता है. बेटे की शादी का कार्ड इस बात का एक उदाहरण है. इस विवाह का निमंत्रण पत्र भी बेहद सामान्य, सीधा और प्रेरणा देने वाला है, जिसमें सादगी के साथ सामाजिक समरसता का संदेश साफ दिखाई देता है.  सीएम डॉ. मोहन यादव अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करने जा रहे हैं। इस पहल से वे खर्चीले विवाह समारोह में मितव्ययिता का संदेश दे रहे हैं। आयोजन में न्योता देने के लिए उन्होंने जो कार्ड छपाया है, उसकी कीमत बमुश्किल 10 से 12 रुपए है। कार्ड पर अपने बेटे और होने वाली बहू के साथ सभी 21 जोड़ों के नाम भी हैं। सीएम न सिर्फ अपने बेटे, बल्कि 21 जोड़ों के बाबुल बनकर आशीर्वाद देंगे। कार्ड में लिखा है, उपहार न लाएं। सादगी से होगी मोहन यादव के बेटे अभिमन्यु की शादी रविवार को उज्जैन में शिप्रा तट पर होने वाला यह सादगी पूर्ण आयोजन देश भर में सुर्खियां बना हुआ है। यहीं सीएम 20 जोड़ों के साथ अपने छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु की शादी डॉ. ईशिता पटेल से करने जा रहे हैं। सम्मेलन के लिए पूरी कैबिनेट को न्योता दिया गया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल, सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों, पार्टी पदाधिकारियों, रिश्तेदारों, समाज के लोगों और ईष्ट-मित्रों को निमंत्रण दिया है। ये VVIP Guest हो सकते हैं शामिल सादगी से होने वाली सीएम के बेटे की शादी में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, थावरचंद गेहलोत, आनंदीबेन पटेल के अलावा कई दिग्गज VVIP शामिल होंगे। मुख्‍यमंत्री के बेटे की शादी के कार्ड पर क्या लिखा है?  सम्माननीय, सादर वंदन. आप सादर सविनय आमंत्रित है, मेरे आत्मज डॉ. अभिमन्यु यादव (M.B.B.S., M.S.) संग डॉ. ईशिता यादव पटेल (M.B.B.S.) के मंगल परिणय के पावन प्रसंग पर शुभदिन है 30 नवम्बर 2025, अगहन शुक्ल दशमी, रविवार. बेटे के शुभ विवाह को हमारे परिजनों की शुभेच्छानुसार सामूहिक विवाहोत्सव में परिणीत किया है, सामाजिक सरोकार के पावन उद्देश्य से रचे पगे सामूहिक विवाह समारोह के उल्लास में सामाजिक समरसता और सद्भाव से परिपूर्ण इस सामूहिक परिणय मंगल समारोह में 21 नवयुगल परिणय बंधन में गुंथित होंगे. इन्हीं 21 जोड़ो के साथ गठबंधन में सप्तपदी सप्तवचनों के साथ मेरे सुपुत्र भी गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करेंगे. इस पवित्र आयोजन में आपका आगमन हमारा और नवयुगलों का परम सौभाग्य होगा . सभी नवदम्पत्ति आपके आशीर्वाद से अभिसिंचित होकर सौभाग्यशाली होंगे . आपके पधारने से कार्यक्रम की गरिमा में भी अभिवृद्धि होगी. आपके शुभाशीष के आकांक्षी …उपहार के लिये क्षमा…, आपका आशीर्वाद ही नवयुगल हेतु अमूल्य उपहार है. विनयवट   डॉ. मोहन यादव मुख्‍यमंत्री ने बेटे की शादी में पहले भी दी मिसाल इससे पहले फरवरी 2024 में भी सीएम मोहन यादव ने अपने बड़े बेटे वैभव यादव की शादी राजस्थान के पुष्कर में बेहद सादगीपूर्ण समारोह में की थी. तब उन्हें मुख्यमंत्री बने केवल तीन महीने हुए थे. उनके करीबी बताते हैं कि यादव कई बार कह चुके हैं कि "शादी हो या कोई कार्यक्रम, वैभव (वैभव) नहीं, सादगी होनी चाहिए." सामाजिक समानता और सादगी का संदेश  मुख्यमंत्री का यह कदम ऐसे समय में आया है जब सामाजिक जीवन में शादी समारोह अक्सर दिखावे की प्रतिस्पर्धा में बदल जाते हैं. लोग शादी समारोह में पैसा पानी की तरह बहा देते हैं. ऐसे में एक मुख्यमंत्री के बेटे का विवाह सामूहिक सम्मेलन में होना सामाजिक समानता और सादगी का मजबूत संदेश माना जा रहा है.  विवाह का खर्च उठाएगा समाज सामूहिक विवाह समारोह का खर्च यादव परिवार उठा रहा है। 42 परिवारों से कोई राशि नहीं ली। आयोजन समिति के मुताबिक नव दंपती को सोने-चांदी के जेवर, बाइक आदि उपहार में दी जाएंगी। सीएम निवास पर आयोजनों की बेला शुक्रवार कोउज्जैन की गीता कॉलोनी स्थित पुश्तैनी घर से माता पूजन के साथ कार्यक्रम की बेला शुरू हुई। इसमें सीएम पत्नी सीमा यादव सहित रिश्तेदार, पड़ोसी, ईष्ट-मित्र समेत अन्य सदस्य शामिल हुए। कौन हैं सीएम मोहन यादव की छोटी बहू? मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री मोहन यादव की होने वाली छोटी बहू डॉ. ईशिता यादव पटेल खरगोन जिले के सेल्दा गांव की रहने वाली हैं. साधारण किसान परिवार में जन्मी इशिता बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं. उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें मेडिकल क्षेत्र में एक पहचान दिलाई है. वह एमबीबीएस के बाद वर्तमान में पीजी कर रही हैं.  दूल्हा डॉ. अभिमन्यु यादव भी डॉक्टर है. दोनों की सगाई जून 2024 में सीएम हाउस में हुई थी. 

बंगाल में बड़ा यू-टर्न! महीनों की ना के बाद ममता दीदी ने मंजूर किया नया वक्फ कानून, चुनाव से पहले रणनीति?

कोलकाता केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को महीनों तक टालने के बाद, पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को स्वीकार कर लिया है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की करीब 82000 वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित समयसीमा 6 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड कर दिया जाए। यह जानकारी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार देर शाम दी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र ने राज्यों से छह दिसंबर तक सभी अविवादित वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने को कहा है, जिसके कारण राज्य प्रशासन ने तुरंत डेटा-एंट्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं। उन्‍होंने कई मौकों पर कहा था कि वे इस संशोधित कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी. अब उनका रुख इस कानून को लेकर बदल गया है. ममता सरकार ने वक्‍फ संशोधन कानून-2025 को बंगाल में लागू करने को लेकर दिशा-न‍िर्देश जारी किए हैं. वक्‍फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड करने को लेकर डेडलाइन भी फिक्‍स कर दी है. प्रदेश के माइनॉरिटी डिपार्टमेंट की ओर से 8 बिंदुओं में प्रोग्राम भी जारी किया गया है. केंद्र के वक्फ़ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने से महीनों तक इंकार करने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को अपने यहां लागू करने पर सहमत हो गई है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि राज्य की लगभग 82,000 वक्फ़ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर की अंतिम तारीख से पहले केंद्र के पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए. यह कानून इस साल अप्रैल में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था. बंगाल के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पीबी सलीम ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र भेजकर कहा कि हर ज़िले की वक्फ़ संपत्तियों की जानकारी तय समय में umeedminority.gov.in पर अपलोड की जाए. राज्य सरकार का यू-टर्न क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि वह इस नए कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पारित हुआ था, तब राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 9 अप्रैल को जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा था- मैं वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी। हम 33 प्रतिशत मुसलमानों का राज्य हैं, जो सदियों से यहां रह रहे हैं। उनका संरक्षण करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन उसके बाद कानूनी लड़ाई में भी राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। अदालत में याचिका दाखिल करने के बावजूद सरकार को अनुकूल फैसला नहीं मिला। अधिनियम की धारा 3B के तहत सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर डालना अनिवार्य है। जिलाधिकारियों को राज्य सरकार का विस्तृत निर्देश राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पी. बी. सलीम ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में एक आठ बिंदु कार्रवाई कार्यक्रम भी जारी किया है, जिसके तहत उम्मीद पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा और प्रक्रिया को समझना और मुतवल्लियों, इमामों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें/कार्यशालाएं करना भी शामिल है। अधिकारी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट को भेजे गए पत्र में चार प्राथमिक निर्देश दिए गए हैं। उनसे इमामों, मुअज्जिनों (मस्जिद में प्रति दिन पांच वक्त की नमाज कराने के लिए अजान लगाने वाला) और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें बुलाने और उन्हें अपलोड करने प्रक्रिया समझाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को कहा गया है कि पोर्टल में केवल निर्विरोध संपत्तियों को ही दर्ज किया जाए। अधिकारी ने कहा कि सभी जिलों को कहा गया है कि जहां भी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो वहां सुविधा केंद्र स्थापित करें।" उन्होंने कहा कि जिलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्य बिना किसी देरी के हो। केंद्र सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में वक्फ अधिनियम 1995 के कई प्रावधानों में संशोधन किया। हालांकि इनमें से कुछ संशोधन अब भी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं, लेकिन राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि केंद्र के प्रस्तावित परिवर्तनों के कार्यान्वयन पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि राज्य को दी गयी समय-सीमा के भीतर निर्देश का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि संशोधित नियमों के तहत पश्चिम बंगाल में 8,063 वक्फ सम्पत्तियों के मुतवल्लियों (वक्फ की देखभाल करने वालों) को छह दिसंबर तक यूएमआईडी पोर्टल पर अपनी पूरी संपत्ति का विवरण दर्ज कराना होगा। कानून में प्रमुख बदलाव क्या हैं वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कुछ बड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनमें वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिए जाने का प्रावधान है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विरोध देखने को मिला था। वक्‍फ संशोधन अधिनियम- 2025 को लेकर ममता सरकार के 8 निर्देश -:     वेबसाइट (उम्मीद पोर्टल) को देख लें और उससे परिचित हो जाएं.     संबंधित मुतवल्लियों, इमामों/मदरसा शिक्षकों को शामिल करते हुए बैठकें/कार्यशालाएं आयोजित करें, ताकि वे केंद्रीय पोर्टल पर विवरण जल्द से जल्द अपलोड कर सकें (मुतवल्लियों की एक सूची साझा की जा चुकी है).     डेटा एंट्री दो हिस्सों में की जाएगी: पहला, व्यक्तिगत मुतवल्लियों द्वारा ओटीपी-आधारित प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन और दूसरा, वक्फ संपत्ति से जुड़े विवरणों का पंजीकरण.     विवादित वक्फ संपत्तियों को (यदि कोई हों) इस चरण में रजिस्‍टर्ड करने की आवश्यकता नहीं है.     कार्य के लिए अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त करें और दैनिक प्रगति की निगरानी करें.     राज्य स्तर के दफ्तरों से वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने ज़िलों के दौरे पर भेजा जाए.     आठ जिलों में हेल्प डेस्क बनाए जा चुके हैं और बाकी ज़िले भी ऐसे ही हेल्प डेस्क बना सकते हैं.     राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से हर दिन दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक वर्चुअल मोड में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें राज्यभर के सभी दफ्तरों से लोग जुड़ सकते हैं. ममता बनर्जी वक्‍फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गई थीं. क्‍यों अहम है यह फैसला? ममता … Read more

अपराध पर कड़ी चोट: हरियाणा में पुलिस अभियान ने 7,500 अपराधियों को पकड़ा

चंडीगढ़  हरियाणा में अपराध पर नकेल कसने के लिए चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैक डाउन’ के तहत मात्र 22 दिनों में हरियाणा पुलिस ने 3066 कुख्यात अपराधियों सहित कुल 7587 अपराधियों को गिरफ्तार किया है। हरियाणा की मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ के तहत पुलिस ने 305 कुख्यात अपराधियों की पहचान की और 304 को गिरफ्तार कर लगभग 100 प्रतिशत सफलता दर हासिल की। गुरुग्राम में कुल 865 अपराधियों की गिरफ्तारी हुई, जिसमें 74 अपराधी संगठित अपराध से जुड़े थे। अपराध पर और मजबूत पकड़ बनाने के लिए पुलिस ने 81 अपराधियों की हिस्ट्री शीट भी खोली, जिससे भविष्य में अपराधों को रोकने में सहायता मिलेगी। फरीदाबाद-सोनीपत ने दिखाई शानदार सतर्कता इस अभियान में फरीदाबाद ने दूसरे स्थान पर रहते हुए 138 कुख्यात अपराधियों को जेल भेजा, जबकि सोनीपत ने 106 गिरफ्तारी कर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा झज्जर में 90 और यमुनानगर में 86 अपराधियों को पकड़ा गया। इन आंकड़ों से साफ है कि अभियान पूरे राज्य में समान तीव्रता और दृढ़ता के साथ चलाया गया। हथियारों और नशा तस्करों पर बड़ा प्रहार पुलिस ने अपराधियों के हथियार और संसाधनों को भी जब्त किया। अभियान में अब तक 161 देसी कट्टे, 146 पिस्तौल और 537 कारतूस बरामद किए। 12 हजार से से अधिक अवैध शराब की बाेतल, 4.5 किलो हेरोइन, 402 किलो चरस, 397 किलो गांजा भी बरामद हुए हैं। एसटीएफ की रणनीतिक सतर्कता के चलते 2 हैंड ग्रेनेड और एक आईईडी भी पकड़ा गया, जिससे बड़ी वारदात टल गई। 168 करोड़ की अवैध संपत्ति चिह्नित अपराधियों की आर्थिक शक्ति को खत्म करने के प्रयास में पुलिस ने अब तक 201 अपराधियों की लगभग 168 करोड़ की अवैध संपत्तियों की पहचान की गई। लगभग 24 लाख की संपत्ति अटैच की गई है और 21 लाख की संपत्ति नष्ट की गई। 32 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस मामले में सोनीपत, नूंह, फतेहाबाद और पलवल जिले अग्रणी रहे। अलग-अलग जिलों में कार्रवाई के उदाहरण भिवानी में संगठित गिरोह के चौथे सदस्य अक्षय उर्फ राजपूत की गिरफ्तारी ने वहां के अपराध चक्र को बड़ा झटका दिया। गुरुग्राम में चेन स्नैचिंग गिरोह का दूसरा सदस्य पकड़ा गया। फरीदाबाद में हिमांशु हत्याकांड के मुख्य षड्यंत्रकारी को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया। अंबाला में गुप्त सूचना के आधार पर अवैध हथियार सहित आदित्य उर्फ हैप्पी को पकड़ा गया।

सुरक्षा के लिए NHRC का अलर्ट: बसों की खतरनाक डिजाइन पर राज्यों को भेजा नोटिस

नई दिल्ली राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर सार्वजनिक परिवहन बसों की असुरक्षित डिजाइन पर गंभीर चिंता जताई है। आयोग को मिली शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कई बसों में ड्राइवर केबिन को पूरी तरह अलग बनाया जा रहा है, जिससे आग लगने या आपात स्थिति में ड्राइवर और यात्रियों के बीच समय पर संवाद नहीं हो पाता। आयोग ने इसे यात्रियों की जान के लिए बड़ा खतरा बताया और इसे अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन माना है। शिकायत में कहा गया था कि हाल के दिनों में कई बसों में सफर के दौरान आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई लोगों की मौत हो गई। आयोग की पीठ (जिसकी अध्यक्षता सदस्य प्रियंक कानूनगो कर रहे थे) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संरक्षण मानव अधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया और परिवहन मंत्रालय व केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी) पुणे से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) मांगी। सीआईआरटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि राजस्थान परिवहन विभाग के अनुरोध पर की गई जांच में हादसे वाली बस में कई गंभीर कमियां मिलीं। बस बॉडी निर्माण में मानकों का उल्लंघन किया गया था। स्लीपर बसों में ड्राइवर पार्टिशन डोर नियमों के खिलाफ है, फिर भी लगाया गया था। 12 मीटर से लंबी बसों में कम से कम 5 आपात निकास अनिवार्य हैं पर उपलब्ध नहीं थे।2019 से अनिवार्य फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) बस में मौजूद नहीं था। स्लीपर कोच के स्लाइडर और चेसिस एक्सटेंशन जैसे खतरनाक हिस्से बगैर अनुमति लगाए गए थे। सीआईआरटी ने कई अहम सुझाव दिए। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान का कहना है कि सभी स्लीपर कोचों में ड्राइवर पार्टिशन हटाया जाए, एफडीएसएस अनिवार्य रूप से लगाया जाए, 10 किलो के फायर एक्सटिंग्विशर चेक किए जाएं और नियमों के उल्लंघन वाले सभी बस बॉडी डिजाइन तत्काल बंद किए जाएं। आयोग ने कहा कि 14 अक्टूबर को जिस बस में आग लगी, वह पूरी तरह नियमों की अनदेखी का परिणाम था। न केवल निर्माता और बॉडी बिल्डर, बल्कि फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने वाले अधिकारी भी गंभीर लापरवाही के दोषी हैं। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से क्रिमिनल नेग्लिजेंस करार दिया। आयोग ने कहा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार सभी राज्यों को नियमों के सख्त पालन के लिए एडवाइजरी जारी करे। कोई भी बस ऑपरेटर या बॉडी बिल्डर सुरक्षा मानकों से बच न सके, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर तंत्र तैयार किया जाए। सभी मुख्य सचिव सीआईआरटी की सभी सिफारिशों को राज्यभर में लागू करें। लापरवाह अधिकारियों और निर्माताओं पर तत्काल कार्रवाई हो। पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा व सहायता दी जाए। सभी राज्यों को दो सप्ताह के भीतर एटीआर भेजने का आदेश दिया गया है।