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Apple का भारत में विस्तार तेज: 11 दिसंबर को नोएडा में खुलेगा पांचवां स्टोर

नोएडा  Apple ने घोषणा की है कि वह 11 दिसंबर को नोएडा के DLF मॉल ऑफ इंडिया में अपना पांचवां रिटेल स्टोर लॉन्च करेगा। यह दिल्ली-NCR का दूसरा स्टोर होगा। इससे पहले अप्रैल 2023 में दिल्ली में पहला स्टोर खुला था। बेंगलुरु में 2 सितंबर और पुणे में 4 सितंबर को स्टोर लॉन्च करने के बाद यह Apple का 2025 में तीसरा नया भारतीय आउटलेट होगा। नए नोएडा स्टोर में iPhone 17 सीरीज, M5 चिप वाले मैकबुक प्रो और 14 इंच मैकबुक प्रो जैसे कंपनी के नवीनतम डिवाइस उपलब्ध होंगे। कस्टमर यहां नए फीचर्स का अनुभव कर सकेंगे। साथ ही Apple के स्पेशलिस्ट, क्रिएटिव, जीनियस और बिजनेस टीम उपयोगकर्ताओं को एक्सपर्ट सपोर्ट प्रदान करेंगे। भारत में तेजी से बढ़ रहा है Apple का प्रभाव भारत Apple के लिए तेजी से उभरता हुआ प्रमुख बाजार बन गया है। IDC के अनुमान के मुताबिक, कंपनी 2025 में देश में 15 करोड़ iPhone बेच सकती है। इसके साथ ही Apple का मार्केट शेयर पहली बार 10% से अधिक हो सकता है। सितंबर तिमाही में Apple भारत का चौथा सबसे बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड बन गया, जहां कंपनी ने करीब 5 मिलियन यूनिट्स की बिक्री दर्ज की और सालाना 25% की वृद्धि हासिल की। Apple CEO टिम कुक कई एनालिस्ट कॉल में भारत को “स्टैंडआउट मार्केट” बता चुके हैं, जहां कंपनी लगातार 15 तिमाहियों से रिकॉर्ड रेवेन्यू दर्ज कर रही है।

ई-अटेंडेंस अनिवार्य, वरना वेतन नहीं! ग्वालियर DEO ने किया कड़ा निर्देश, शिक्षकों में तनाव

 ग्वालियर  अब शिक्षकों की मनमानी नहीं चलेगी, ग्वालियर में जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने साफ कर दिया है कि नवंबर महीने का वेतन केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर ही जारी होगा। एक भी दिन ई-अटेंडेंस मिस हुई तो उतने दिन का वेतन कट जाएगा। DEO ने सभी डीपीसी, बीईओ, संकुल प्राचार्यों और स्कूल प्रधानाचार्यों को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि नवंबर 2025 का वेतन पूरी तरह ई-अटेंडेंस के आधार पर ही दिया जाएगा। जितने दिन शिक्षक ने पोर्टल पर ई-अटेंडेंस लगाई होगी, उतने दिन का ही वेतन जारी होगा। जिन शिक्षकों ने पूरे महीने ई-अटेंडेंस नहीं लगाई, उनका वेतन आंशिक या पूरी तरह रोक दिया जाएगा। आदेश में स्पष्ट लिखा है कि  कोई भी छुट्टी (CL/EL/ML) हो या ड्यूटी, बिना ई-अटेंडेंस के मान्य नहीं होगी। संकुल प्राचार्य और बीईओ रोजाना मॉनिटरिंग करेंगे। लापरवाही बरतने वाले प्राचार्यों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। शिक्षकों में हड़कंप आदेश जारी होते ही जिले भर के शिक्षक कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। कई शिक्षक जो अब तक मोबाइल ऐप या पोर्टल पर अटेंडेंस लगाना टालते थे, अब परेशान हैं। सोशल मीडिया पर शिक्षक ग्रुप में एक ही बात चर्चा में है, “अब तो रोज सुबह 10 बजे से पहले अटेंडेंस लगानी ही पड़ेगी वरना पगार कट जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षक स्कूल में उपस्थित हों, यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। ई-अटेंडेंस से पारदर्शिता आएगी और अनुपस्थित शिक्षकों पर लगाम लगेगी। कोई ढील नहीं बरती जाएगी।”यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है। अब देखना यह है कि दिसंबर की सैलरी आने तक कितने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 100% हो पाती है!

जबलपुर : SIR के दौरान BLOs की सराहना, जताई गई प्रशंसा और शानदार पुरस्कारों का मज़ा

 रीवा/जबलपुर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में मिसाल पेश करने वाले बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन दिनों जिला प्रशासन की अनूठी पुरस्कार योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. टारगेट को तय समय सीमा से पहले पूरा करने वाले 'सुपर बीएलओ' को टाइगर सफारी, मूवी टिकट और यहां तक कि हेलीकॉप्टर जॉय राइड जैसे शानदार इनाम मिल रहे हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर की स्नेहलता पटेल अपने अधीन सभी बूथों का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा करने वाली जिले की पहली बीएलओ सुपरवाइजर बनीं. उन्होंने  समय से पहले पनागर विधानसभा क्षेत्र के 7 हजार 706 वोटर्स फॉर्म अपलोड कर सभी को चौंका दिया.  जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार, स्नेहलता पटेल को पुरस्कार स्वरूप पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कान्हा और बांधवगढ़ की हवाई यात्रा (जॉय राइड) कराई गई. ऐसे ही अन्य बीएलओ को नकद पुरस्कार के साथ उनके तनाव को कम करने के लिए मूवी टिकट भी प्रशासन दे रहा है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार बीएलओ एवं सुपरवाइजरों को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठी पुरस्कार योजना शुरू की गई है। स्नेहलता पटेल को पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा से जाय राइड इसी पहल का हिस्सा है। उन्होंने इस सम्मान के लिए कलेक्टर का आभार व्यक्त किया और सभी बीएलओ को निष्ठा एवं लगन से कार्य करने का संदेश दिया। स्नेहलता पटेल को पनागर विधानसभा के बूथ क्रमांक 52 से 61 तक कुल 10 बूथों के सत्यापन और डिजिटाइजेशन का दायित्व सौंपा गया था। उनके अधीन 7,706 मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन मंगलवार को पूरा कर लिया गया था। 73.34 फीसदी गणना पत्रक हुए डिजिटाइज जिले में मतदाताओं से प्राप्त गणना प्रपत्रों में से 73.34 प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 19 लाख 25 हजार 472 है। इनमें से अभी तक 14 लाख 12 हजार 151 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। पाटन विधानसभा में 86 प्रतिशत डिजिटाइजेशन शुक्रवार की रात आठ बजे की रिपोर्ट के अनुसार 86.50 प्रतिशत गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ पाटन विधानसभा जिले की आठो विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर है। मतदाताओं से प्राप्त गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन में विधानसभा क्षेत्र सिहोरा 85.04 फीसदी के साथ दूसरे तथा विधानसभा क्षेत्र बरगी 84.20 फीसदी गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ जिले में तीसरे स्थान पर है। 78.10 फीसदी के साथ पनागर चौथे, 67.41 फीसदी के साथ उत्तर पांचवें एवं 61.81 फीसदी के साथ कैंट छठे स्थान पर है। वहीं पश्चिम में 59.94 और पूर्व में 59.94 फीसदी गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन हुआ है।

ZEE5 पर आने जा रही RSS के सौ वर्षों की यात्रा पर आधारित स्पेशल डॉक्यूमेंट्री सीरीज़

मुंबई   ओटीटी प्लेटफॉर्म जी-5 ने अपनी नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'केसरिया एट 100' की घोषणा कर दी है। यह सीरीज सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि एक ऐसा प्रयास है जो दर्शकों को भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिवर्तनों से जोड़कर देखने का मौका देती है। भारत के सार्वजनिक जीवन में आरएसएस की भूमिका अक्सर चर्चा का विषय रही है, ऐसे में इसके 100 साल के सफर को एक शोध आधारित और संपूर्ण डॉक्यूमेंट्री के रूप में पेश करना दर्शकों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव साबित हो सकता है। जी-5 ने घोषणा की है कि यह डॉक्यूमेंट्री 12 दिसंबर को रिलीज होगी।  सीरीज़ के निर्माताओं ने इसके लिए गहन शोध किया है ताकि दर्शकों को आरएसएस की शुरुआत से लेकर इसके वर्तमान स्वरूप तक की यात्रा साफ, तथ्यों पर आधारित और समझने योग्य तरीके से दिखाई जा सके। इस सीरीज़ को इस तरह तैयार किया गया है कि आम दर्शक भी इसे आसानी से समझ सकें और इतिहास के उन पहलुओं को जान सकें जो अक्सर चर्चा में नहीं आते। 'केसरिया एट 100' में अभिनेता और प्रस्तुतकर्ता नितीश भारद्वाज बतौर एंकर काम कर रहे हैं। उनकी आवाज और प्रस्तुति शैली इस कहानी को गंभीरता के साथ-साथ सहजता भी देती है। डॉक्यूमेंट्री में आरएसएस की शुरुआत के दौर को खास महत्व दिया गया है, खास तौर पर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचार, उनके उद्देश्य और परिस्थितियां, जिनमें संगठन का निर्माण हुआ। इसके साथ ही, सीरीज उन अहम क्षणों को भी सामने लाती है जब देश संकट में था और संगठन ने राहत और सेवा कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीरीज में आरएसएस के सामुदायिक और सामाजिक कार्यों को भी विस्तार से दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे संगठन ने शिक्षा के क्षेत्र में अनेक प्रयास किए, कैसे उन्होंने गांवों में समाज को जोड़ने की कोशिश की, और किस तरह स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य और जनसेवा से जुड़े काम किए। डॉक्यूमेंट्री का हर एपिसोड एक अलग समय, घटना या थीम पर आधारित है, जिससे दर्शकों को संगठन के विकास को अलग-अलग नजरियों से समझने में आसानी होगी। जी-5 ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीरीज़ की एक झलक भी साझा की, जिसमें नितीश भारद्वाज शो की गंभीर और लंबी यात्रा को दर्शकों के सामने पेश करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा, "सदी भर की परंपरा, त्याग और निर्माण! आरएसएस की यह कहानी अब पूरा देश देखेगा।" इस झलक में पुराने आर्काइव फुटेज, दुर्लभ तस्वीरें और संगठन से जुड़ी कई ऐतिहासिक जानकारियां देखने को मिलती हैं।

हेलीकॉप्टर उड़ानें परेशान, इंदौर-उज्जैन-ओंकारेश्वर रूट पर यात्रियों की संख्या कम, ऑनलाइन बुकिंग भी नहीं मिल रही

इंदौर  इंदौर से उज्जैन और ओंकारेश्वर के बीच पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा के तहत शुरू की गई हेलीकॉप्टर सेवा को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। वहीं पोर्टल पर नवंबर और दिसंबर की बुकिंग तारीख नहीं दिख रही है। धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान देने के लिए शुरू की गई विशेष हेलीकॉप्टर सुविधा को पीएमश्री वायु सेवा की तरह ही यात्रियों का टोटा है। ऐसे में रोजाना उड़ानों का संचालन नहीं हो पा रहा है। इंदौर-उज्जैन के बीच शुरू की गई हेलीकॉप्टर सेवा के शुभारंभ के बाद यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। 29 नवंबर की तारीख की बुकिंग तो हो रही है, लेकिन अन्य तारीख की बुकिंग नहीं दिख रही है। इंदौर से उज्जैन के बीच 50 प्रतिशत छूट के बाद 5000 हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है, लेकिन इसमें भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। इसलिए बुकिंग आने पर ही उड़ान संचालित की जा रही है। ट्रांसपोर्टेशन भारत एविएशन हेलीकॉप्टर के अंशु कुमार का कहना है कि बुकिंग आने पर ही उड़ान संचालित की जा रही है। गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले इंदौर के बिचौली मर्दाना मैदान से हेलीकॉप्टर सेवा का शुभारंभ किया गया था। इसमें इंदौर से उज्जैन और ओंकारेश्वर दोनों शहरों की यात्रा एक दिन में पूरी की जा सकती है। उज्जैन से ओंकारेश्वर के लिए 6500 रुपये किराया देना होगा। वहीं इंदौर से उज्जैन होते हुए ओंकारेश्वर के लिए किराया 11500 रुपये है।  

सोशल मीडिया पर छाया MOM गैजेट, बेंगलुरु के शख्स ने बनाया AI जो भूख लगते ही खाना मंगाए

 नई दिल्ली सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के फूड हैक्स और किचन ट्रिक्स मिल जाते हैं, लेकिन एक भारतीय इंजीनियर का नया आइडिया लोगों को हैरान कर रहा है. इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक ऐसा अनोखा डिवाइस दिखाया गया है, जो आपकी भूख पहचान कर अपने-आप खाना ऑर्डर कर देता है. कंटेंट क्रिएटर @zikiguy की सीरीज़ “Inventions You Will Never Think Of” में दिखाया गया यह गैजेट लोगों की एक आम परेशानी समय पर खाना भूल जाना का मजेदार और अनोखा समाधान पेश करता है. ऐसा गैजेट जो भूख पहचान लेता है वीडियो में दिखाया गया डिवाइस का नाम MOM (Meal Ordering Module) है, इसे बेल्ट पर लगाया जाता है. यह पेट से आने वाली भूख की आवाज सुनकर पहचान लेता है और जैसे ही आवाज मिलती है, यह ज़ोमैटो के ज़रिए अपने-आप खाना ऑर्डर कर देता है. क्रिएटर मज़ाक में कहते हैं, “इसका नाम MOM इसलिए है, क्योंकि ये मुझे माँ की तरह समय पर खाना खाने के लिए मजबूर करता है.” भूख पहचानने वाला यह गैजेट कैसे काम करता है? इस अनोखे डिवाइस को बनाने के लिए इंजीनियर ने अपनी बहन का स्टेथोस्कोप इस्तेमाल किया. उन्होंने पेट की आवाज रिकॉर्ड करने के लिए एक छोटा माइक्रोफोन, एक साउंड सेंसर, छोटी बैटरी और ESP32 माइक्रोकंट्रोलर लगाकर अंदर की पूरी सिस्टम तैयार की. यह गैजेट पेट की आवाजें सुनकर उनका डेटा वाई-फाई के जरिए एक लोकल सर्वर तक भेज देता है. डिवाइस को पूरा रूप देने के लिए उसने एक 3D-प्रिंटेड बॉडी बनाई और एक ऑन/ऑफ स्विच भी लगाया. इंजीनियर के मुताबिक, इस डिवाइस का कोड पेट की गुर्राने की तीव्रता और कितनी देर तक आवाज चलती है, इसका विश्लेषण करता है अगर पेट की आवाज ज्यादा तेज और लंबी होती है, तो यह मानता है कि भूख ज्यादा है — और ऐसे में डिवाइस दो पिज़्ज़ा या पूरी बिरयानी जैसा बड़ा ऑर्डर कर देता है. ज़ोमैटो से अपने-आप खाना ऑर्डर करने की क्षमता ( डिवाइस) MOM की सबसे रोचक खासियत है इसका ज़ोमैटो के MCP सर्वर से कनेक्शन है. इससे यह गैजेट अपने आप आसपास के रेस्टोरेंट्स को तलाश सकता है, उनकी रेटिंग देख सकता है, दामों के हिसाब से फिल्टर कर सकता है, और फिर यूज़र की पिछली पसंद के आधार पर एक डिश चुनकर ऑर्डर कर देता है. वीडियो में, क्रिएटर दिखाता है कि कैसे डिवाइस ने अपने आप खाना ऑर्डर कर दिया और जब वह दरवाजा खोलता है, तो कई पिज्जा बॉक्स देखकर दंग रह जाता है. सोशल मीडिया पर जमकर कर रहे कमेंट एक यूजर ने लिखा, “इसे अनावश्यक आविष्कारों की लिस्ट में डाल देना चाहिए. जब किसी ने पूछा कि “आपने इसे टेस्ट कैसे किया?”, तो क्रिएटर ने मज़ाक में कहा कि उसे पूरा दिन बिना खाना खाए बैठना पड़ा. एक ने लिखा, “भाई, तुम तो मेरा बैंक बैलेंस ही खत्म कर दोगे. दूसरे ने कहा, “लगता है, तुम्हारी इंजीनियरिंग की डिग्री आखिर काम आ ही गई.” एक मजाकिया कमेंट था, “ये वीडियो खास उन लोगों के लिए बना है जिनकी फुल-टाइम नौकरी है, नियम और शर्तें लागू।” क्या यह गैजेट सच में भविष्य में आएगा? अभी यह साफ नहीं है कि MOM जैसे उपकरण कभी असली प्रोडक्ट बन पाएंगे या नहीं. लेकिन एक बात तय है—यह गैजेट इंटरनेट पर लोगों को खूब हंसी और मनोरंजन दे रहा है। खाने के शौकीनों और टेक्नॉलजी पसंद करने वालों, दोनों को यह आइडिया काफी मजेदार लगा।

नक्सलियों में हड़कंप: 15 लाख के इनामी धनुष ने पत्नी सहित चुनी शांति की राह, MP में सरेंडर बढ़े

बालाघाट   मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कई जिले, जो कभी लाल आतंक के खौफ से दहल जाते थे, जहां माओवादियों बंदूक की दम पर अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहते थे, अब वहां परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जारी की गई डेडलाइन के बाद नक्सली पूरी तरह बैकफुट पर आ गए है. इसके अलावा हॉक फोर्स द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन ऑपरेशन का भी असर दिखने लगा है. बालाघाट और आसपास नक्सलियों का सरेंडर हाल ही में मध्य प्रदेश के बालाघाट में नक्सली सुनीता ने आत्मसर्पण किया था. अब बालाघाट में सक्रिय रहे धनुष और उसकी पत्नी ने छत्तीसगढ़ में सरेंडर किया है. इस प्रकार नक्सली अब सरेंडर की राह पर चल पड़े हैं. माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के मेंबर रामदेर के साथ 15 नक्सली बालाघाट आए थे, जिनकी आधी टीम अब खाली हो चुकी है. इसके बाद इसी टीम में सक्रिय रहे नक्सली कपल ने भी अब समर्पण की राह चुनी है. दोनों ने छत्तीसगढ़ में खैरागढ़ के बकरकट्टा थाने में सरेंडर किया है. नक्सली धनुष पर 14 लाख इनाम घोषित था सरेंडर करने वाले धनुष और उसकी पत्नी रोनी उर्फ तुले दोनों 25 वर्ष के हैं. धनुष पर सरकार ने 14 लाख का इनाम रखा था. ये नक्सली कपल जीआरबी डिवीजन के टांडा मलाजखण्ड दलम के सदस्य थे, जो कई नक्सली गतिविधियों में शामिल थे. विगत 20 मई को बिलालकसा के जंगल में हुई मुठभेड़ मे धनुष भी शामिल था. नक्सली कपल ने सरेंडर करते हुए कहा है "अब वे सम्मानजनक और शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं. दोनों नक्सली सीसी मेंबर रामदेर के साथ बालाघाट आए थे. जो जनवरी 2025 से एमएमसी जोन में सक्रिय थे." फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है नक्सली धनुष सरेंडर करने वाला नक्सली धनुष संगठन में टेक्नीकल काम संभालता था. उसे हिंदी और अंग्रेजी भाषा की अच्छी जानकारी है और वह कंम्प्यूटर सहित अन्य दूसरी चीजों की भी गहरी जानकारी रखता है. नक्सली धनुष न केवल फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है बल्कि जबरदस्त स्पीड के साथ वह टायपिंग भी करता है. धनुष के सरेंडर के बाद बालाघाट में एंटी नक्सल ऑपरेशन के एडिशनल एसपी आदर्शकान्त शुक्ला ने बताया "धनुष नक्सल साहित्य, प्रेस नोट, और मैगजीन प्रभात के लिए कंटेट राईटिंग का काम करता था."  सरकार ने तय की है मार्च 2026 तक डेडलाइन धनुष की पत्नी रोनी उर्फ तुले सीसी मेंबर रामदेर के साथ काम कर चुकी है. वहीं, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में नक्सलियों के बड़े नेताओं द्वारा बड़ी संख्या में नक्सलियों के साथ सरेंडर किया जा रहा है. मार्च 2026 नक्सलवाद के पूरी तरह से खात्मे की तारीख पहले ही गृह मंत्री अमित शाह द्वारा घोषित कर दी गई है. लगता है इस तारीख से पहले ही नक्सलवाद देश से पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. एमएमसी जोन (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़) में तीनों राज्यों का संयुक्त ऑपरेशन जारी है. ऐसे में नक्सलियों पर काफी दबाव बढ़ गया है. नक्सलियों ने सरेंडर की डेडलाइन बढ़ाने की लगाई गुहार नक्सलियों ने पहले एक प्रेस नोट जारी कर समय मांगते हुए जवानों द्वारा चलाये जा रहे ऑपरेशन को रोकने की मांग की थी, उसके बाद फिर नक्सलियों की तरफ से समय दिये जाने की अपील की गई है. लेकिन सरकार की तरफ से फिलहाल नक्सलियों द्वारा मांगी गई मोहलत पर कोई विचार नहीं किया गया है और न ही किसी तरह का जवाब दिया गया है. मध्य प्रदेश के बालाघाट में सरकार ने एक होनहार हॉक फोर्स निरीक्षक को खोया है. ऐसे में प्रदेश सरकार किसी तरह से नक्सलियों से बातचीत के मूड में फिलहाल नजर नहीं आ रही है. 

भारत को IMF का नया लक्ष्य—कुछ साल बाद 5 ट्रिलियन डॉलर क्लब में एंट्री!

 नई दिल्‍ली       इंटरनेशल मोनिटरी फंड (IMF) ने भारत को नया टारगेट दे दिया है. IMF ने 26 नवंबर को अपनी एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार भारत के अब वित्त वर्ष 29 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के मील के पत्थर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पहले के अनुमान से एक पूरा वर्ष बाद है.  भारत का लंबे समय से 5 ट्रिलियन डॉलर के जीडीपी टारगेट पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. आईएमएफ की रिपेार्ट में कहा गया है कि लक्ष्य तक पहुंचने में देरी, उम्‍मीद से धीमी ग्रोथ और अनुमान से कहीं ज्‍यादा तेज रुपये में बदलाव को दिखाती है.  आईएमएफ के 2025 के अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 28 में भारत का GDP सिर्फ़ 4.96 ट्रिलियन डॉलर रहेगा, जो इस साल की शुरुआत में अनुमानित 5.15 ट्रिलियन डॉलर से कम है और 2023 के 5.96 ट्रिलियन डॉलर के अनुमान से भी काफी कम है.  जीडीपी अनुमान में क्‍यों कटौती?  आईएमएफ ने कहा कि डॉलर बेस्‍ड GDP पूर्वानुमान में कटौती का मुख्‍य कारण रुपये में गिरावट है. आईएमए ने वित्त वर्ष 2025 के लिए विनिमय दर अनुमान को 82.5 रुपये प्रति डॉलर से संशोधित कर 84.6 रुपये प्रति डॉलर कर दिया है.र्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 के लिए, अब यह क्रमशः 87 रुपये और 87.7 रुपये तक और कमजोर होने का अनुमान है. 21 नवंबर को रुपया 89.49 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा था.  नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान इस बदलाव ने IMF को भारत के एक्‍सचेंज रेट व्‍यवस्‍था को 'स्थिर' से 'क्रॉल जैसे' में क्‍लासिफाइड करने के लिए प्रेरित किया है, जो करेंसी में हुए बदलाव के ट्रांसपैरेंसी का संकेत देता है. आईएमएफ ने नॉमिननल जीडीपी ग्रोथ अनुमानों  में भ्‍ली कटौती की है.  आईएमएफ अब वित्त वर्ष 26 में 8.5% की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है, जो 2024 के 11% के अनुमान से कम है. डॉलर के संदर्भ में इसका अर्थ है कमजोर ग्रोथ वित्त वर्ष 26 में 5.5% और वित्त वर्ष 27 में 9.2% रहेगा, क्योंकि विनिमय दर संबंधी अनुमान वास्तविक विस्तार को कमज़ोर कर रहे हैं.  इन झटकों के बावजूद, आईएमएफ का मानना ​​है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है, जिसका श्रेय मज़बूत घरेलू मांग और बेहतर होते इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को जाता है. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर प्रमुख व्यापार समझौते अंतिम रूप ले लेते हैं और सुधारों की गति बनी रहती है, तो भारत का भविष्य बेहतर हो सकता है.  भारत ने कुछ धारणाओं को खारिज कर दिया है, विशेष रूप से इस उम्मीद को कि भारतीय निर्यात पर 50% अमेरिकी टैरिफ जारी रहेगा, मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में आईएमएफ के नजरिए को अत्यधिक रूढ़िवादी बताया गया है.

डराने वाले आंकड़े! संयुक्त राष्ट्र ने कहा—हर 10 मिनट में एक महिला की होती है हत्या

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध निरोधक कार्यालय (UNODC) और महिला सशक्तिकरण के लिए संस्था (UN Women) ने एक साझा रिपार्ट प्रकाशित की है, जो बताती है कि वर्ष 2024 में, 50 हज़ार लड़कियों और महिलाओं को, उन्हीं के अंतरंग साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मार डाला गया. रिपोर्ट के अनुसार, हर 10 मिनट में 1 लड़की या महिला की हत्या होना यह दर्शाता है कि वैश्विक प्रतिबद्धताओं के बावजूद, आज भी कुछ विशेष परिवर्तन नहीं आया है.हर दिन औसतन 137 लड़कियों और महिलाओं की हत्या कर दी जाती है.  83 हज़ार इरादतन हत्या के मामले महिलाओं की हत्या – 2025 नामक यह रिपोर्ट, महिलाओं के प्रति हिंसा उन्मूलन के अन्तरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर प्रकाशित की गई है.2024 में, 83 हज़ार लड़कियों और महिलाओं की इरादतन हत्या कर दी गई, जिनमें से 50 हज़ार यानि 60 प्रतिशत हत्याएँ अंतरंग साथी या परिवार के किसी सदस्य के हाथों की गई.  रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, इस तरह की हत्याएँ सबसे अधिक अफ़्रीका में – हर 1 लाख में से 3 लड़की या महिला, और योरोप में सबसे कम दर्ज की गई हैं.जबकि, इसके उलट अपने किसी अंतरंग साथी या पारिवारिक सदस्य के हाथों हत्या के शिकार होने वाले पुरुषों का आँकड़ा 11 प्रतिशत है. संयुक्त राष्ट्र के 'इंटरनेशनल डे फॉर द एलिमिनेशन ऑफ वॉयलेंस अगेंस्ट विमेन' के मौके पर जारी 2025 फेमिसाइड रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनियाभर में महिलाओं और लड़कियों की हत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इनमें कोई वास्तविक सुधार नहीं दिख रहा. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष 83,000 महिलाओं और लड़कियों की हत्या की गई, जिनमें से 60% यानी 50,000 महिलाएं और लड़कियां अपने करीबी साथी या परिवार के सदस्यों के हाथों मारी गईं. इसका मतलब है कि हर दस मिनट में एक महिला या लड़की घर के अंदर या परिवार के हाथों जान गंवा रही है. इसके उलट पुरुषों की हत्याओं में केवल 11% मामलों में साथी या परिवार जिम्मेदार थे. यह अंतर हिंसा की प्रकृति और खतरे की गंभीरता को उजागर करता है. यूएन विमेन की नीति विभाग की निदेशक सारा हेंड्रिक्स ने कहा कि फेमिसाइड अकेले नहीं होता. यह अक्सर नियंत्रण, डराने-धमकाने, ऑनलाइन उत्पीड़न या डिजिटल हिंसा की शुरुआत से लेकर बढ़ते-बढ़ते जानलेवा रूप ले लेता है. उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल हिंसा अक्सर ऑफलाइन भी फैलती है और कई बार महिलाओं की हत्या तक पहुंच जाती है. यूएनओडीसी के कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में ‘घर’ महिलाओं और लड़कियों के लिए सबसे खतरनाक जगह बन चुका है. उन्होंने महिलाओं की हत्या को रोकने के लिए बेहतर रणनीतियों, मजबूत कानूनों और प्रभावी आपराधिक न्याय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया.2025 की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यह हिंसा दुनिया के लगभग हर क्षेत्र में मौजूद है. सबसे ज्यादा फेमिसाइड दर अफ्रीका (3 प्रति 1 लाख महिलाएं) में दर्ज की गई, जिसके बाद अमेरिका (1.5), ओशिआनिया (1.4), एशिया (0.7) और यूरोप (0.5) का स्थान आता है. रिपोर्ट बताती है कि घर के बाहर यानी सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली फेमिसाइड का डेटा अभी भी सीमित है, जिसकी वजह से वास्तविक स्थिति का पूरा आकलन करना मुश्किल है. डेटा की कमी दूर करने के लिए यूएन विमेन और यूएनओडीसी 2022 के सांख्यिकीय फ्रेमवर्क के आधार पर देशों के साथ काम कर रहे हैं ताकि ऐसी हत्याओं की बेहतर पहचान, रिकॉर्डिंग और वर्गीकरण किया जा सके. रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि 2024 में परिवार/साथी के हाथों मारी गई महिलाओं की संख्या (50,000) पिछली रिपोर्ट (51,100) से थोड़ी कम जरूर है, लेकिन यह गिरावट वास्तविक कमी का संकेत नहीं है, बल्कि कई देशों में डेटा उपलब्धता में बदलाव की वजह से ऐसा दिख रहा है. 16 Days Campaign क्या है?  हर साल 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाला 16 Days of Activism अभियान महिलाओं के खिलाफ हिंसा को खत्म करने के लिए UN Women की पहल है. 2025 में यह अभियान डिजिटल हिंसा को खत्म करने पर केंद्रित है, जिसमें ऑनलाइन उत्पीड़न, स्टॉकिंग, जेंडर्ड डिसइन्फॉर्मेशन, डीपफेक्स और बिना अनुमति निजी तस्वीरें शेयर करने जैसी समस्याएं शामिल हैं. यह सभी तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ तेजी से बढ़ रही हैं. UN Women ने सरकारों, टेक कंपनियों और समुदायों से अपील की है कि कानूनों को मजबूत बनाया जाए, डिजिटल हिंसा पर सख्त कार्रवाई हो, और पीड़ितों के लिए सुरक्षित व सहायक वातावरण तैयार किया जाए. सुरक्षित रहने का अधिकार यूएन वीमैन की नीति विभाग की निदेशक सारा हैंड्रिक्स का कहना है कि महिलाओं की हत्या, किसी एकाकी घटना का परिणाम नहीं होती. यह अक्सर हिंसा की निरन्तर श्रृंखला का हिस्सा होती है, जो नियंत्रण करने वाले व्यवहार, धमकियों और उत्पीड़न से भी शुरू हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र का 16 दिनों तक चला अभियान, यह उजागर करता है कि डिजिटल हिंसा, सिर्फ़ ऑनलाइन ही सीमित नहीं है. यह ऑनलाइन मंचों से हटकर वास्तविकता में भी गम्भीर रूप ले सकती है, और ये हिंसा, अत्यंत भयावह मामलों में हत्या का रूप भी ले सकती है.निदेशक सारा हैंड्रिक्स ने कहा कि हर लड़की और महिला को अपने जीवन के हर पहलू में, सुरक्षित रहने का अधिकार है.  इन हत्याओं से बचने के लिए ज़रूरत है ऐसे क़ानूनों को कड़ाई से लागू किए जाने की, जो महिलाओं और लड़कियों के जीवन में हिंसा के ऑनलाइन और ऑफ़लाइन रूपों को समझें और अपराधियों की कठोर जवाबदेही तय करें.UNODC के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक जॉन ब्रांडोलिनो ने कहा कि दुनिया भर में बहुत-सी महिलाओं और लड़कियों के लिए घर, आज भी एक ख़तरनाक और कई बार जानलेवा जगह बने हुए हैं.  महिलाओं की हत्याएँ घर के बाहर भी होती हैं, पर इनके आँकड़े बेहद सीमित हैं.  इन कमियों को दूर करने के लिए यूएन वीमैन और UNODC, वर्ष 2022 के सांख्यिकीय ढाँचे के ज़रिए, बेहतर पहचान और आलेखन पर काम कर रहे हैं. सटीक डेटा बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि समस्या की वास्तविक गम्भीरता समझी जा सके, प्रभावी क़दम उठाए जा सकें और पीड़ितों को न्याय मिल सके.

पेट की फैट और किडनी स्वास्थ्य का कनेक्शन: स्टडी में बताया गया सही कमर माप

मुंबई   मोटापा की स्थिति तब मानी जाती है, जब शरीर में फैट इस सीमा तक बढ़ जाता है कि वह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने लगता है और उसके कारण आप अपनी डेली लाइफस्टाइल के काम नहीं कर पाएं. एक्सपर्ट के मुताबिक, बॉडी मास इंडेक्स (BMI) अगर 30 या इससे अधिक है, तो इसे मोटापा माना जाता है. वैसे तो मोटापे के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं लेकिन हाल ही में BMC Nephrology जर्नल में पब्लिश स्टडी में दावा किया गया है कि सिर्फ वजन बढ़ना या मोटापे तक सीमित नहीं है बल्कि आपके कमर की चर्बी आपकी किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती है. क्या कहती है स्टडी? स्टडी में वैज्ञानिकों ने इस बात को जानने की कोशिश की कि कमर और ऊंचाई का अनुपात (Waist-to-Height Ratio, WHtR), किडनी की कार्यक्षमता में तेजी से गिरावट (Rapid Kidney Function Decline, RKFD) और गुर्दे की दीर्घकालीन बीमारी (Chronic Kidney Disease, CKD) के बीच क्या संबंध है. इस स्टडी में 4374 लोगों को शामिल किया गया था जिनकी किडनी की स्थिति स्टडी से पहले नॉर्मल थी. फिर हर इंसान की कमर और ऊंचाई का अनुपात निकाला गया और उन्हें लगभग चार साल तक फॉलो किया गया. स्टडी के दौरान देखा गया कि किन लोगों की किडनी की प्रोडक्टिविटी में गिरावट (RKFD) आई है और किन लोगों को क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD) की समस्या हुई है. रिसर्च के रिजल्ट में सामने आया कि जिन लोगों का कमर और ऊंचाई का अनुपात अधिक था, उनमें किडनी फंक्शन गिरने का खतरा 30% तक बढ़ गया और CKD का खतरा लगभग 50% अधिक था. वहीं जिन लोगों की कमर का अनुपात सबसे अधिक था, उनमें CKD का रिस्क कमर के सबसे कम कमर वाले ग्रुप के मुकाबले करीब 4 गुना अधिक पाया गया था. रिसर्चर्स ने यह भी बताया कि कमर और ऊंचाई का अनुपात, किसी व्यक्ति में किडनी डिजीज का खतरा जानने के लिए बीएमआई से कहीं ज्यादा सटीक है. क्या पाया वैज्ञानिकों ने वैज्ञानिकों को पता चला कि पेट की चर्बी सिर्फ मोटापे का नहीं बल्कि किडनी डिजीज का भी बड़ा कारण बन सकती है. चीन में की गई इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि अगर आपकी कमर आपकी ऊंचाई के मुकाबले ज्यादा है तो आपकी किडनी की प्रोडक्टिविटी धीरे-धीरे घट सकती है और आगे चलकर CKD जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. बीएमआई नहीं है सटीक पैमाना वैज्ञानिकों के मुताबिक, आम तौर पर लोग अपने स्वास्थ्य का आकलन BMI से करते हैं लेकिन बीएमआई केवल वजन और लंबाई के हिसाब से मोटापा बताता है, वह यह नहीं बताता कि शरीर में फैट कहां जमा है. अब ऐसे में यदि किसी के पेट के चारों ओर अधिक चर्बी जमा है तो वह सबसे नुकसान पहुंचाती है क्योंकि इसके कारण हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर को बढ़ाने की क्षमता होती है और यह मेटाबॉलिक सिस्टम को बिगाड़ देती है. कितना होना चाहिए कमर का साइज? स्टडी में यह भी देखा गया कमर और ऊंचाई का अनुपात और किडनी की प्रोडक्टिविटी में कमी के बीच सीधा-सीधा संबंध है. यानी जैसे-जैसे पेट की चर्बी बढ़ेगी, वैसे-वैसे किडनी की सेहत गिरती जाएगी. वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि अगर किसी व्यक्ति का कमर और ऊंचाई का अनुपात 0.50 से ज्यादा है यानी आपकी कमर आपकी ऊंचाई के आधे से अधिक तो उसे अपनी लाइफस्टाइल और डाइट पर तुरंत ध्यान देना चाहिए. उदाहरण के लिए यदि आपकी ऊंचाई 170 सेमी है तो आपकी कमर 85 सेमी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. यह छोटा-सा पैमाना आपकी किडनी की उम्र बढ़ा सकता है. हालांकि यह रिसर्च केवल चीन की आबादी पर आधारित थी और इसकी अवधि करीब चार साल की थी इसलिए इसे पूरी दुनिया की जनसंख्या पर लागू नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद, यह एक मजबूत सबूत देता है कि पेट की चर्बी से शरीर के अंदर की हेल्थ पर भी लागू होती है.