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नीतीश सरकार का बड़ा फैसला: पानी की फिजूलखर्ची रोकने को नया नियम लागू

पटना बिहार सरकार ने ‘हर घर नल का जल’ योजना को और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब पानी की बर्बादी करना सीधे जेब पर भारी पड़ेगा। सरकार का साफ कहना है—अब नल खुला छोड़ना या बेवजह पानी बहाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। क्या लागू हुआ नया नियम? राज्य में लगातार गिरते भू-गर्भीय जलस्तर को देखते हुए सरकार ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए सख्त पेनल्टी सिस्टम लागू किया है। जो लोग नल बहता छोड़ देते हैं या घरेलू पेयजल का गलत उपयोग करते हैं, उनके खिलाफ अब पंचायत स्तर पर तुरंत कार्रवाई होगी। अब ये गलती की… तो जुर्माना तय सरकार ने तीन-स्तरीय पेनल्टी का प्रावधान बनाया है:     पहली बार गलती: ₹150 जुर्माना     दूसरी बार: ₹400 जुर्माना     तीसरी बार: ₹5,000 जुर्माना + पानी का कनेक्शन तत्काल काट दिया जाएगा अगर कोई उपभोक्ता जुर्माना नहीं भरता है, तो उसके खिलाफ सर्टिफिकेट वाद दर्ज कर वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी। कनेक्शन कट गया तो दोबारा कैसे मिलेगा? दुबारा पानी का कनेक्शन चाहिये तो उपभोक्ता को सभी बकाया राशि और लगाया गया जुर्माना पूरी तरह जमा करना होगा। इसके बाद WIMC यानी वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की अनुमति पर ही कनेक्शन बहाल होगा। पेयजल का गलत उपयोग करने पर सख्त प्रतिबंध सरकार ने साफ निर्देश जारी किए हैं कि पेयजल का उपयोग सिर्फ घरेलू और पीने से जुड़ी जरूरतों के लिए किया जाए। इन कामों पर पूरी तरह पाबंदी होगी:     नल खुला छोड़कर पानी बहाना     गाड़ी, आंगन या घर धोने में पेयजल का उपयोग     जानवरों को नहलाने के लिए नल का पानी     खराब या लीक टोंटी को नजरअंदाज करना     कहीं भी लीकेज देखने पर सूचना न देना मोटर पंप लगाया तो मुश्किल में पड़ जाएंगे सरकारी नल पर मोटर पंप चलाना अब अपराध माना जाएगा।     तुरंत ₹5,000 का जुर्माना     मोटर पंप जब्त     बार-बार गलती पर FIR दर्ज सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है जो सरकारी सुविधा का दुरुपयोग कर रहे थे। सरकार ने क्यों अपनाई कड़ी नीति? जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, और कई जगहों पर पेयजल की कमी देखी जा रही है। सरकार के अनुसार “योजना का उद्देश्य हर घर को स्वच्छ पानी देना है, लेकिन कुछ लोग गैर-जरूरी उपयोग कर पानी की बर्बादी बढ़ा रहे हैं। नए नियम जल संरक्षण और सामुदायिक जिम्मेदारी दोनों को मजबूत करेंगे।” अगर आप भी ‘हर घर नल का जल’ योजना के लाभार्थी हैं, तो इन नए नियमों का पालन करना अब जरूरी है, नहीं तो भारी जुर्माना झेलना पड़ेगा।

UP बिजली बिल राहत: 100% तक छूट का लाभ लेने के लिए जानें जरूरी स्टेप्स

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में एक दिसंबर से शुरू हुई बिजली बिल राहत योजना (UP Electricity Bill Relief Scheme) उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने जा रही है। इस योजना के तहत घरेलू और छोटे व्यापारिक उपभोक्ताओं को उनके बकाया बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत तक ब्याज माफी का लाभ मिलेगा। योजना का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को केवल दो हजार रुपये जमा कर पंजीकरण कराना होगा। मुख्य अभियंता मुनीश चोपड़ा ने बताया कि प्रदेश भर के 33 केवी उपकेंद्रों पर उपभोक्ताओं को योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही अधिक से अधिक लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए जगह-जगह प्रचार कैंप भी लगाए जाएंगे। इन कैंपों के माध्यम से उपभोक्ताओं को योजना की प्रक्रिया, पात्रता और लाभों के बारे में जागरूक किया जाएगा। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पविविनिलि) के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक दिसंबर से शुरू हो रही इस योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पहली बार प्रदेश सरकार उपभोक्ताओं को बिजली बिल के ब्याज पर 100% छूट प्रदान कर रही है, इसलिए अधिक से अधिक लोगों को इसका फायदा दिलाने के लिए मुहिम चलानी जरूरी है। यह योजना मुख्य रूप से एलएमवी-1 श्रेणी के दो किलोवाट तक के घरेलू उपभोक्ताओं और एलएमवी-2 श्रेणी के एक किलोवाट तक के वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए लागू की गई है। पंजीकरण के बाद उपभोक्ता एकमुश्त भुगतान का विकल्प चुन सकते हैं, जिसके तहत एक दिसंबर 2023 से 31 दिसंबर 2025 तक भुगतान करने वालों को मूलधन में 25 प्रतिशत की विशेष छूट भी मिलेगी।  

HIV स्क्रीनिंग में मध्यप्रदेश की धीमी प्रगति, गर्भवती महिलाओं का केवल 46% हुआ टेस्ट; आम जनता का आंकड़ा बेहतर

भोपाल  मध्यप्रदेश में HIV नियंत्रण को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सामान्य आबादी की HIV जांच रिकॉर्ड तेजी से लक्ष्य के करीब पहुंच रही है, लेकिन गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग लगातार पिछड़ रही है, जो मां से बच्चे में वायरस के संक्रमण रोकने के लक्ष्य को सीधे चुनौती देती है। जबकि ICTC और PPP-ICTC मिलाकर राज्य में हुई HIV जांचों ने इस साल कमाल कर दिया है। अक्टूबर 2025 तक ही 12.23 लाख के लक्ष्य में 12.13 लाख जांच हो चुकी हैं। कई जिलों में आंकड़े लक्ष्य को पार कर चुके हैं। यह दर्शाता है कि आमजन के बीच टेस्टिंग नेटवर्क मजबूत और सक्रिय है। दूसरी ओर, वही अवधि में गर्भवती महिलाओं की HIV जांच जो सबसे संवेदनशील श्रेणी मानी जाती है। 22.85 लाख के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 10.54 लाख तक ही पहुंच पाई। यह आंकड़ा सिर्फ 46% उपलब्धि को दर्शाता है। मतलब आधी महिलाएं अभी भी HIV टेस्ट से बाहर हैं, जबकि यही टेस्ट भविष्य में जन्म लेने वाले बच्चों को HIV के खतरे से बचाता है। गर्भवती महिलाओं की HIV जांच,   2023-24: लक्ष्य 22.25 लाख – उपलब्धि 20.98 लाख 2024-25: लक्ष्य 22.58 लाख – उपलब्धि 18 लाख  2025-26: (अक्टूबर तक) लक्ष्य 22.85 लाख- उपलब्धि 10.54 लाख लगातार तीन साल से लक्ष्य अधूरा यानी तीन साल लगातार MP गर्भवती महिलाओं की HIV जांच का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह मां से बच्चे में HIV संक्रमण रोकथाम कार्यक्रम (PPTCT) की सबसे कमजोर कड़ी है। कम जांच से घटते संक्रमण के आंकड़ों की असल तस्वीर भी धुंधली संक्रमित गर्भवती महिलाओं की संख्या सन                  संक्रमित की  संख्या – 2023-24         754 – 2024-25         671 – 2025-26        492 (अक्टूबर तक) जांच कम होने के प्रमुख कारण  संक्रमितों की संख्या कम दिख रही है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जांच कम होगी तो संक्रमण वास्तविकता से कम दिखाई देगा। अधूरी स्क्रीनिंग का मतलब है कि कई महिलाएं और उनके नवजात जोखिम में बने रह सकते हैं। जांच कम होने का मुख्य कारण ग्रामीण इलाकों में समय पर ANC विजिट नहीं हो रही है। ICTC केंद्रों तक पहुंच की दूरी होने के कारण लोग जांच नहीं करवा पाते हैं। जागरूकता की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जांच करने में अभी भी शर्मिंदगी महसूस होती है। कुछ जिलों में ट्रेनिंग की कमी है। सब मिलकर गर्भवती महिलाओं की टेस्टिंग के आंकड़े नीचे खींच रहे हैं।  मां-बच्चे की सुरक्षा के लिए टेस्टिंग की रफ्तार बढ़ाना जरूरी जहां आम नागरिकों की HIV जांच में प्रदेश अच्छी प्रगति दिखा रहा है, वहीं गर्भवती महिलाओं की धीमी टेस्टिंग राज्य के स्वास्थ्य मॉडल पर बड़ा सवाल छोड़ती है। यदि गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग पर फोकस तेज़ नहीं किया गया, तो मां से शिशु में संक्रमण रोकने का राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो सकता है। 

कोहली की शतकीय पारी पर बोला साथी खिलाड़ी, ‘ऐसा लगा जैसे मैं 8-9 साल पीछे चला गया हूं’

नई दिल्ली  विराट कोहली ने रविवार को प्रोटियाज के खिलाफ 135 रन की जबरदस्त पारी खेलकर समय को पीछे कर दिया, जब दोनों टीमें रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में तीन मैचों की सीरीज के पहले ODI में आमने-सामने थीं। भारत ने ये मैच 17 रन से जीता। मैच के बाद साथी खिलाड़ी और भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव ने कहा कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ विराट कोहली की पारी देखने के बाद उन्हें ऐसा लगा जैसे वह लगभग एक दशक पीछे चले गए हों। उन्होंने कहा कि पूर्व कप्तान अभी भी उसी तरह बल्लेबाजी कर रहे हैं जैसे वह 2016 और 2019 के बीच करते थे।  37 साल के कोहली ने शांतचित्त होकर फिफ्टी बनाई और इसे जल्दी ही शतक में बदल दिया क्योंकि उन्होंने अपने स्टाइल और विरोधी गेंदबाजों का सामना किया। हालांकि वह पारी के आखिर में नाबाद नहीं रह सके, लेकिन उनकी शानदार बल्लेबाजी भारत की जीत के लिए काफी साबित हुई और उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला। कुलदीप ने कोहली की कॉन्फिडेंट पारी की तारीफ करते हुए कहा, 'मेरा करियर विराट भाई के साथ शुरू हुआ जब वह कप्तान थे। जिस तरह से उन्होंने बैटिंग की, मुझे लगा कि मैं 8-9 साल पीछे चला गया हूं, जिस तरह से वह 2016, 2017, 2018, 2019, में बैटिंग कर रहे थे। यह बहुत अच्छी पारी थी और वह बहुत कॉन्फिडेंट लग रहे थे। उनका शॉट सिलेक्शन जो भी हो, गेंद बल्ले से अच्छी तरह आ रही थी।'  कुलदीप ने यह भी कहा कि कोहली और टीम के सीनियर खिलाड़ी बॉलर्स को लगातार जानकारी देते रहते हैं और पेसर और स्पिनर अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकते हैं, इस पर इनपुट शेयर करते हैं। उन्होंने कहा, 'उनके साथ रहना अच्छा लगता है। आपको बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आपको हमेशा इनपुट मिलते हैं। बॉलिंग में भी, आपको इनपुट मिलते हैं कि आप क्या कर सकते हैं। सीनियर्स के साथ रहना अच्छा लगता है। टीम में एनर्जी और इंटेंसिटी है जैसा कि आपने फील्ड में देखा है। हम इसके लिए बहुत लकी हैं।'  सीरीज के पहले मैच में 17 रन की जीत के साथ 1-0 की बढ़त लेने के बाद भारत अब बुधवार को दूसरे ODI के लिए रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में साउथ अफ्रीका की मेजबानी करेगा।   

स्पीकर पद BJP के हिस्से, प्रेम कुमार बने दावेदार—नामांकन प्रक्रिया पूरी

पटना बिहार विधानसभा का पहला सत्र आज यानी एक दिसंबर से शुरू हो गया है। बिहार विधानसभा के नए स्पीकर के लिए बीजेपी के विधायक डॉ. प्रेम कुमार ने सोमवार को विधानसभा सचिवालय में अपना नामांकन भर दिया। वहीं स्पीकर का पद बीजेपी के खाते में आ गया है। बता दें कि प्रेम कुमार पिछले तीन दशकों से लगातार चुनाव जीतते आए हैं और संगठन में भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। प्रेम कुमार गया टाउन से लगातार नौ बार जीते चुके है। वे मंत्री के रूप में भी कई महतवपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं। कृषि, पशुपालन, पर्यटन, सहकारिता, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण और स्वास्थ्य इंजीनियरिंग जैसे लगभग हर बड़े विभाग का कुश्लतापूर्वक संचालन किया है।  

गेमिंग की सनक बनी जानलेवा: पत्नी की हत्या कर पति फरार, छह माह पहले हुई थी शादी

रीवा  मध्य प्रदेश में एक खौफनाक वारदात सामने आई है। मोबाइल पर पबजी गेम खेलने से मना करने पर पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। पति के दिनभर पबजी गेम खेलने से परेशान होकर पत्नी ने उसे गेम खेलना छोड़कर काम करने की सलाह दी। इससे नाराज होकर उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत गुढ़ कस्बे के वार्ड संख्या 15 में नव विवाहिता का शव उसके घर में मिलने के बाद हड़कंप मच गया। मृतका की पहचान नेहा पटेल के रूप में हुई है। उसके पति पर ही उसकी हत्या करने का आरोप लगा है। आरोप है कि लगातार दहेज की मांग और पबजी गेम खेलने पर मना करने से विवाद बढ़ा, जिसके बाद पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। पति के दिनभर पबजी गेम खेलने से परेशान होकर पत्नी ने उसे काम करने की सलाह दी, जिससे नाराज होकर उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी। हत्या के बाद अपने साढू को घटना की जानकारी देकर और पत्नी की लाश को कमरे में बंद कर वह फरार हो गया। बताया जा रहा है कि 5 मई 2025 को नेहा की शादी हिंदू रीति रिवाज के अनुसार, गुढ़वा निवासी रंजीत से हुई थी। छह माह पहले अग्नि के सात फेरे लेकर जिसके साथ सात जन्मों तक साथ निभाने की कसमें खाईं, उसी पति पर अब अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा है। मोबाइल पर पबजी गेम खेलने की लत पति रंजीत पटेल को ऐसी लगी कि पत्नी की हर बात उसे नागवार गुजर रही थी। वो लगातार पत्नी से दहेज की मांग कर रहा था जिसे उसके ससुराल वाले पूरा नहीं कर पा रहे थे। इस बात को लेकर भी वो अपनी पत्नी से अक्सर विवाद करता था। पति दिनभर पबजी गेम खेलता था और कोई काम भी नहीं करता था। इसे लेकर अक्सर पत्नी उसे कुछ काम करने की सलाह देती थी, और इसी बात पर दोनों में झगड़ा भी होता था। घटना के दिन भी देर रात पत्नी ने पति को पबजी खेलने की बजाय रोजी रोजगार करने की सलाह दी तो वह भड़क उठा। उसने गमछे से नेहा का गला घोंट दिया। घटना के वक्त परिजन दूसरे कमरे में थे। उन्हें इस घटना की भनक तक नहीं लगी। इसके बाद रंजीत घर का दरवाजा बाहर से बंद कर फरार हो गया। बाद में उसने अपने साढ़ू को मैसेज भेज कर नेहा को जान से मारने की जानकारी दी। मृतका के परिजनों का आरोप है कि रंजीत और उसके परिवार वाले लगातार दहेज को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। मायके वालों के भी बयान लिए गए हैं। पुलिस हर पहलुओं को लेकर जांच कर रही है और मृतिका के पति की तलाश कर रही है।  

CCTV में कैद अस्पताल स्टाफ की करतूत: मृतक के गहने उड़ाए, पुलिस ने दर्ज की FIR

नई दिल्ली  दिल्ली के कृष्णा नगर स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में महिला मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई. मगर हद तो तब पार हो गई जब महिला के शव से गहने ही चुरा लिए गए. ये सब अस्पताल के अंदर हुआ. इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया. मामला 11 नवंबर का था. 12 नवंबर को महिला के परिजनों ने थाने में इस बाबत शिकायत दी थी. मगर आज इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है. ये शर्मनाक घटना गोयल हॉस्पिटल की है. शिकायत के अनुसार, 11 नवंबर की सुबह करीब 5 बजे बुजुर्ग महिला को गंभीर हालत में गोयल हॉस्पिटल लाया गया, जहां उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया. परिजनों का कहना है कि प्रारंभिक इलाज के दौरान महिला के पास मौजूद सोने की ज्वेलरी सुरक्षित थी. लेकिन रात करीब 5:45 बजे महिला की हालत को ‘क्रिटिकल’ बताकर जीटीबी अस्पताल रेफर कर दिया गया. जब तक महिला को वहां ले जाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. महिला के कानों के टॉप्स और चेन गायब थी परिजनों का आरोप है कि शव को ले जाते समय उन्होंने देखा कि महिला के कानों के टॉप्स और चेन गायब थी. परिवार ने कहा कि अस्पताल के स्टाफ ने न तो ज्वेलरी का जिक्र किया और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया. वहीं, पुलिस ने भी मामला दर्ज करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. परिवार के मुताबिक शिकायत देने पर पुलिस ने कहा कि उनके पास और भी बहुत सारे काम हैं और ऐसे मामलों के लिए पर्याप्त समय नहीं है. सीसीटीवी कैमरे जांच करने की मांग परिवार ने तब मांग की कि अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महिला की ज्वेलरी कहां और कैसे गायब हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के स्टाफ ने ही चोरी की. इसके बाद सीसीटीवी में लेडी स्टाफ ही मृतका के गहने चुराती दिखी. मामले में अब जाकर पुलिस ने FIR दर्ज की है. वहीं, अस्पताल प्रशासन का भी दावा है कि गहने चोरी करने वाली महिला स्टाफ को टर्मिनेट कर दिया गया है. इधर, सोशल मीडिया पर भी गहने चुराने वाला वीडियो वायरल हुआ है.  

अब सिर्फ 3 दिन में मिलेगा वजन माप सत्यापन सर्टिफिकेट

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की एक प्रमुख सेवा में बड़ा बदलाव किया है। विधिक माप विज्ञान संगठन के तहत अब वजन व माप उपकरणों के सत्यापन प्रमाण-पत्र के जारी करने और नवीनीकरण की अधिकतम समय सीमा 30 दिन से घटाकर सिर्फ 3 दिन कर दी गई है। इससे व्यापारियों, उद्योगों और व्यवसाय जगत को तेज़, पारदर्शी और सुगम सेवा का लाभ मिलेगा। इस सेवा के लिए विधिक माप विज्ञान अधिकारी (निरीक्षक) को निर्धारित अधिकारी, सहायक नियंत्रक को प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी तथा उप नियंत्रक को द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी नामित किया गया है। यह बदलाव हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत लागू होगा। यह निर्णय नागरिकों को समयबद्ध, डिजिटल और कुशल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दो शौहर छोड़ चुकी थीं डॉ. शाहीन, 8 साल छोटे मुजम्मिल संग निकाह किया—पर किस्मत ने फिर कर दिया अधूरा

नई दिल्ली  दिल्ली धमाके को अंजाम देने वाले डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल की अहम सदस्य शाहीन सईद को लेकर कई नई बातें सामने आ रही हैं। पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ है कि डॉ. शाहीन मॉड्यूल के दूसरे आरोपी डॉ. मुजम्मिल की बेगम थी। खुद से 8 साल छोटे मुजम्मिल संग निकाह करने वाली शाहीन इससे पहलो दो शौहर को छोड़ चुकी थी। हालांकि, तीन निकाह के बावजूद शाहीन की एक ख्वाहिश अधूरी रह गई। वह विदेशी चकाचौंध की कायल थी, लेकिन भारत से निकलने में कामयाब नहीं हुई। कभी बुर्के से नफरत करने वाली शाहीन मुजम्मिल से इश्क के बाद इतनी कट्टरपंथी बनी कि वह जैश-ए-मोहम्मद की महिला ब्रिगेड में शामिल हो गई। दिल्ली धमाके और फरीदाबाद में मिले विस्फोटक से कनेक्शन की वजह से गिरफ्तार किए गए शाहीन और मुजम्मिल ने सितंबर 2023 में निकाह किया था। सूत्रों के मुताबिक मुजम्मिल ही शाहीन को आतंक की राह पर ले गया। लखनऊ में पली-बढ़ी सईद डालीगंज में रहती थी। सईद बचपन में बहुत होनहार विद्यार्थी थी। उसने इलाहाबाद से एमबीबीएस की । सईद के पिता अहमद अंसारी सरकार अस्पताल में कर्मचारी थे। शाहीन की पहली निकाह आंखों के डॉक्टर जफर हयात से 2003 में हुई थी। दोनों की दो संतानें भी हुईं पर करीब 9 साल बाद दोनों की राहें अलग हो गईं। डॉ. जफर ने कहा, 'हमारी शादी नवंबर 2003 में हुई थी। 2012 में हम अलग हो गए। मुझे नहीं पता कि उसके दिमाग में ऐसा क्या था जिसकी वजह से उसने ऐसा किया, जबकि हमारे बीच कभी कोई झगड़ा नहीं होता था। वह बहुत ध्यान रखती थी मेरा।' जफर का यह भी कहना है कि शाहीन ने निकाह के अलावा कभी बुर्का नहीं पहना। वह याद करते हैं कि शाहीन को विदेशी चकाचौंध बहुत पसंद थी। उसने जफर से कहा था कि अच्छी सैलरी और बेहतर जिदंगी के लिए ऑस्ट्रेलिया या यूरोप चलना चाहिए। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह सबकुछ है और सभी रिश्तेदार भी यहीं हैं। विदेश में अकेलापन हो जाएगा। शाहीन ने तलाक के बाद गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज भी अचानक छोड़ दिया। वह कई सालों तक गायब रही। जांचकर्ताओं के मुताबिक, शाहीन ने बताया कि जफर से तलाक के कुछ सालों बाद उसने गाजियाबाद के एक टेक्सटाइल कारोबारी संग निकाह किया। लेकिन कारोबारी संग भी वह अधिक दिनों तक नहीं रह पाई और उससे भी तलाक लेकर आगे बढ़ गई। फरीदाबादा की अल फलाह यूनिवर्सिटी में 43 साल की डॉ. शाहीन की मुलाकात 35 साल के डॉ. मुजम्मिल से हुई। एक साथ कामकाज करते हुए दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई। गिरफ्तारी के बाद मुजम्मिल ने पूछताछ में बताया कि शाहीन उसकी दोस्त नहीं बल्कि बेगम है। दोनों ने सितंबर 2023 में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास एक मस्जिद में निकाह कर दिया था। मुजम्मिल ने निकाह करते हुए 6 हजार मेहर (इस्लाम में निकाह के दौरान दूल्हे की ओर से दुल्हन को दिया जाने वाला तोहफा) दिया। दोनों एक साथ रहने लगे। इसी दौरान मुजम्मिल ने सईद को धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय किया और फिर कट्टरपंथ की राह पर ले गया। मुजम्मिल के साथ अब वह आतंकी समूह का हिस्सा बन चुकी थी। बताया जाता है कि शाहीन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात उल-मोमिनात में शामिल हो चुकी थी। डॉक्टर होने का फायदा उठाते हुए वह चुपचाप बिना किसी के निगाह में आए आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाती रही। वह जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीार, हरियाणा में कई स्थानों पर जाकर फंड एकत्रित कर चुकी थी और साजिशों को अंजाम देने में अहम किरदार थी। इतना ही नहीं आतंकी हमलों के लिए उसने लाखों रुपये भी दिए थे। तीन पासपोर्ट थे शाहीन के पास शाहीन विदेश जाने के लिए कितनी बेचैन थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपने लिए तीन-तीन पासपोर्ट बना रखे थे। अलग-अलग समय में अलग-अलग पते पर उसने इन पासपोर्ट को बनावाया। बताया जाता है कि धमाके से पहले वह विदेश भागने की फिराक में थी। मुजम्मिल की गिरफ्तारी के बाद वह जल्दी देश छोड़कर निकल जाना चाहती थी लेकिन पासपोर्ट को लेकर कुछ औपचारिकताएं पूरी नहीं होने की वजह से उसकी ख्वाहिश अधूरी रह गई।

सोनिया व राहुल गांधी को ‘सर्वमान्य और जनप्रिय नेता’ बताया, अरुण वोरा का बड़ा बयान

नईदिल्ली  नेशनल हेराल्ड प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित कई वरिष्ठ नेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज होने पर पूर्व विधायक अरुण वोरा ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं का खुला दुरुपयोग कहा है। वोरा ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी देश के सर्वमान्य और जनप्रिय नेता हैं। वे करोड़ों भारतीयों के संवैधानिक मूल्यों की आवाज़ हैं। उनकी निष्ठा और त्याग पर कभी कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा है। दोनों बेदाग हैं, निर्भीक हैं और सत्य के मार्ग पर अडिग हैं। उनके विरुद्ध इस प्रकार की राजनीतिक प्रेरित कार्रवाइयाँ न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं बल्कि, केंद्र सरकार की असुरक्षा और घबराहट को भी उजागर करती हैं। वोरा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ ईडी, सीबीआई और पुलिस किसी भी व्यवस्था की रीढ़ होती हैं, लेकिन आज यही संस्थाएँ राजनीतिक दबाव और सत्ता की मंशा के आगे झुकाकर विपक्ष को बदनाम करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। वोरा ने कहा कि केंद्र सरकार अपनी नाकामियों, आर्थिक संकट और जनविरोधी नीतियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मामलों को हवा दे रही है। कांग्रेस कभी ऐसे दमन से नहीं झुकेगी। न्याय, सत्य और संविधान की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी रहेगा। इधर, पूर्व महापौर आरएन वर्मा ने इस मामले में केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब कार्रवाई देश के दो शीर्ष नेताओं पर हो और जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। लोकतांत्रिक संस्थाओं का इस प्रकार राजनीतिक मामलों में इस्तेमाल होना बेहद चिंताजनक है। यह प्रवृत्ति लंबी अवधि में लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है।