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तेजस्वी ने सम्राट से मिलाया हाथ, विजय सिन्हा ने छुए सीएम नीतीश के पैर—सदन में दिखे रोचक पल

पटना बिहार विधानसभा की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को नवनिर्वाचित विधायकों के शपथग्रहण के साथ शुरू हुआ। वहीं, शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में कई रोचक पल भी देखने को मिले। तेजस्वी ने सम्राट से हाथ मिलाया दरअसल, गृहमंत्री सम्राट चौधरी की शपथ के बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अपनी सीट से खड़े हो गए और सम्राट चौधरी के साथ हाथ मिलाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। वहीं, डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुनार के पैर छुए। इसके बाद तेजस्वी यादव से गले मिले। शपथ ग्रहण के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच सौहार्द दिखाई दिया। बता दें कि तारापुर विधानसभा सीट से निर्वाचित उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सबसे पहले शपथ ली। उनके बाद उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शपथ ली, जो लगातार चौथी बार लखीसराय से विधायक हैं। शपथ ग्रहण के बाद मंत्रियों ने प्रोटेम स्पीकर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अभिवादन किया। गौरतलब हो कि राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र खास माना जा रहा है। लगभग 10 वर्षों बाद सत्ता पक्ष में 200 से अधिक विधायक बैठेंगे, जिससे सदन का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रचंड बहुमत के कारण सरकार के लिए विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना आसान होगा, जबकि विपक्ष मात्र 38 सदस्यों तक सिमट गया है। ऐसे में विपक्ष पर अधिक प्रभावी ढंग से अपनी भूमिका निभाने का दबाव रहेगा। गौरतलब है कि इससे पहले 2010 में राजग विधायकों की संख्या 200 से अधिक थी। 

भोपाल में खेलो इंडिया वूमेन्स शूटिंग बॉल टूर्नामेंट सम्पन्न, भोपाल टीम ने विदिशा को हराकर जीता खिताब

भोपाल में खेलो इंडिया वूमेन्स शूटिंग बॉल टूर्नामेंट सम्पन्न, भोपाल टीम ने विदिशा को हराकर जीता खिताब भोपाल देश के हृदय मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित महाराणा प्रताप जागीराबाद शासकीय स्कूल में आज खेलो इंडिया वूमेन्स शूटिंग बॉल टूर्नामेंट का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। राज्य स्तरीय इस प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश की कुल 10 महिला टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। निर्णायक फाइनल में भोपाल महिला टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए विदिशा महिला टीम को सीधे दो सेटों में पराजित किया।पहला सेट : 21–12 दूसरा सेट : 21–17 ।दोनों सेटों में खिलाड़ियों ने बेहतरीन तालमेल, सटीक रणनीति और मजबूत खेल भावना दिखाते हुए दर्शकों का उत्साह लगातार बनाए रखा और अंततः खेलो इंडिया वूमेन्स शूटिंग बॉल चैम्पियनशिप अपने नाम की। टूर्नामेंट के दौरान मध्य प्रदेश प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और अपने संबोधन में कहा कि “खेल समाज की ऊर्जा और युवा शक्ति का प्रतीक हैं। आवश्यक है कि हम सब मिलकर खेलों को प्रोत्साहित करें। सरकार को भी महिला खिलाड़ियों के लिए बजट बढ़ाकर अधिक संसाधन और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए।”उनके प्रेरक शब्दों ने खिलाड़ियों में नया उत्साह भरा। इस आयोजन में खेल जगत से जुड़े कई सम्मानित व्यक्तित्व प्रमुख रूप से उपस्थित रहे,राधेश्याम भार्गव, अध्यक्ष, भोपाल शूटिंग बॉल एसोसिएशन कैलाश तवानी, अध्यक्ष, महाराणा प्रताप क्लब हिमायतुल्लाह हाशमी, वरिष्ठ खेलप्रेमी,भानु भारद्वाज खेल संरक्षक,पुरुषोत्तम रूपचंदानी, सामाजिक कार्यकर्ता,जितेंद्र सिंह बघेल, कोषाध्यक्ष, शूटिंग बॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया,हिमांशी चौबे, संरक्षक, भोपाल शूटिंग बॉल संघ,रोहित सिंह, महासचिव,टूर्नामेंट में उपस्थित प्रदेश की प्रतिष्ठित महिला खिलाड़ी प्रथम महिला विक्रम अवार्ड से सम्मानित हेमलता, रेखा, तबस्सुम, शानू ,एकलव्य अवार्ड प्राप्त खिलाड़ी: सिद्धि छतवानी, छवि, संजना, अदिति, इशिका, वंशिका इन सभी खिलाड़ियों ने नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।सभी अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। खिलाड़ी भी ऐसे आयोजन से उत्साहित नजर आए और उन्होंने खेलो इंडिया द्वारा मंच प्रदान करने पर आभार व्यक्त किया।

मध्य प्रदेश की ऋषिका का दमदार प्रदर्शन, करनाल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 65 किग्रा उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम

नर्मदापुरम  हरियाणा के करनाल के कल्पना चावला ऑडिटोरियम में 28 से 30 नवंबर तक वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता में इटारसी की रहने वाली ऋषिका पटेल ने पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीता. रॉ पावरलिफ्टिंग फेडरेशन रजिस्टर्ड इंडिया, वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग यूनियन और ब्रिटिश पावरलिफ्टिंग फेडरेशन ने संयुक्त रूप से इस तीन दिवसीय प्रतियोगिता का आयोजन किया. इसमें भारत, इंग्लैंड और ब्रिटेन सहित कई देशों की टीमों ने हिस्सा लिया. ऋषिका पटेल ने बढ़ाया मध्य प्रदेश का मान चैंपियनशिप में फुल पावरलिफ्टिंग, स्ट्रिक्ट कर्ल, बेंच प्रेस, डेडलिफ्ट, इक्विप्ड और अनइक्विप्ड रॉ जैसी विभिन्न कैटेगरी शामिल थीं. खिलाड़ियों ने युवा, टीन्स, जूनियर, सीनियर, मास्टर और फिजिकली डिसेबल्ड वर्गों में प्रतिस्पर्धा की. इसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर रविवार को इटारसी की ऋषिका पटेल ने देश और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया. 48 किग्रा वेट कैटेगरी में 65 किग्रा उठाया वजन ऋषिका ने सब-जूनियर 48 किलोग्राम वेट कैटेगरी में 65 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान प्राप्त किया. उनके इस प्रदर्शन से भारतीय टीम के स्कोर को भी मजबूती मिली. ऋषिका ने मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है. ऋषिका ने सब-जूनियर 48 किलोग्राम वेट कैटेगरी में 65 किलोग्राम वजन उठाकर पहला स्थान प्राप्त किया. उनके इस प्रदर्शन से भारतीय टीम के स्कोर को भी मजबूती मिली. ऋषिका इटारसी पॉलिटेक्निक कॉलेज की छात्रा है. उनके पिता राकेश पटेल इटारसी के वरिष्ठ पत्रकार हैं. ऋषिका की इस उपलब्धि पर परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों और खेलप्रेमियों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. बहुत मेहनती खिलाड़ी हैं ऋषिका ऋषिका के कोच ने बताया कि, ''वह एक मेहनती, अनुशासित और लक्ष्य पर केंद्रित खिलाड़ी है. उनके नियमित अभ्यास और फिटनेस रूटीन ने उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह सफलता दिलाई है. भविष्य में उसे राष्ट्रीय और एशियाई स्तर पर भी एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है.'' ऋषिका ने अपनी जीत का श्रेय अपने माता-पिता, कोच और कॉलेज प्रबंधन को दिया. उन्होंने कहा कि, ''अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व का पल है.''

AICC के SC विभाग ने मध्यप्रदेश की नई कार्यकारिणी घोषित की, कुल 106 पदाधिकारी शामिल

भोपाल  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के अनुसूचित जाति विभाग ने मध्यप्रदेश में अपनी नई राज्य कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम द्वारा जारी सूची में कुल 106 पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी का मानना है कि यह नई टीम प्रदेश में दलित समाज से जुड़े मुद्दों को अधिक सशक्त तरीके से उठा सकेगी और संगठनात्मक मजबूती भी बढ़ाएगी। कार्यकारिणी में पदों का वर्गीकरण जारी सूची के अनुसार पदों का वितरण इस प्रकार है— उपाध्यक्ष: 23 महासचिव: 30 सचिव: 44 स्टेट एग्जीक्यूटिव मेंबर: 9 इसके अलावा विभिन्न जिम्मेदारियों और क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए अन्य पद भी घोषित किए गए, जिससे प्रदेशभर के सभी संभागों और ज़िलों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। सभी संभागों का ध्यान रखा गया: प्रदीप अहिरवार मध्यप्रदेश कांग्रेस SC विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने बताया कि यह कार्यकारिणी प्रदेश के सभी संभागों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उन्होंने कहा, “सूची में प्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक विविधता का पूरा ध्यान रखा गया है। हमारा लक्ष्य संगठन को मजबूत करना और समाज के बीच कांग्रेस की विचारधारा को और प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।” अहिरवार ने आगे कहा कि कांग्रेस SC विभाग प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्याचारों, सामाजिक भेदभाव और शासन की उपेक्षात्मक नीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाएगा। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा सरकार में दलितों पर हो रहे अन्याय के हर मामले को मुद्दा बनाकर जनता के सामने रखा जाएगा। सामाजिक न्याय की विचारधारा से प्रेरित होगी कार्यशैली प्रदीप अहिरवार ने यह भी कहा कि विभाग राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और पार्टी की सामाजिक न्याय की विचारधारा को केंद्र में रखकर काम करेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का SC विभाग प्रदेश में न केवल संगठन का विस्तार करेगा, बल्कि दलित समाज में जागरूकता, शिक्षा, अधिकार संरक्षण और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए भी काम करेगा। नई कार्यकारिणी से बढ़ी उम्मीदें 9 महिलाओं को स्थान दिया गया है | नई कार्यकारिणी से पार्टी को उम्मीद है कि यह दलित समुदाय के सवालों को नए दृष्टिकोण और मजबूत रणनीति के साथ उठाएगी। पार्टी का दावा है कि यह टीम गांवों, कस्बों और शहरों में जाकर दलितों की समस्याओं को समझकर उन्हें संगठन की मुख्य धारा से जोड़ेगी और उनकी आवाज को बड़े स्तर पर उठाएगी। कुल 106 पदाधिकारियों वाली यह कार्यकारिणी मध्यप्रदेश में कांग्रेस एससी विभाग को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है। पार्टी का लक्ष्य है कि आने वाले समय में यह टीम न केवल संगठन को मजबूत करेगी, बल्कि प्रदेश की राजनीति में दलित हितों की प्रभावी आवाज के रूप में उभरेगी।

वक्फ संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी—‘UMEED’ पर डेटा न अपलोड किया तो भुगतनी पड़ेगी सजा

नई दिल्ली  वक्फ की संपत्तियों की डीटेल 'UMEED' पोर्टल पर अपलोड करने की समय सीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे संबंधित ट्राइब्यूनल में जाकर अपनी बात रखें। बता दें कि समय सीमा बढ़ाने वाली याचिकाओं में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोल्ड (AIMPLB) और AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल थी। वक्फ संपत्तियों का ब्यौरा पोर्टल पर अपलोड करने के लिए 5 दिसंबर तक का समय दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था को सजा भी हो सकती है।   इससे पहले 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को पूरी तरह से स्थगित करने से इनकार कर दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई थी। नियमों के मुताबिक वक्फ संपत्ति ना अपलोड करने वालों को छह माह की सजा और 20 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। जो लोग संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज नहीं करवाएंगे उनकी संपत्ति का दर्जा खत्म कर दिया जाएगा और बाद में केवल वक्फ ट्राइब्यूनल के आदेश पर ही दोबारा पंजीकरण किया जा सकेगा।  

नौकरियों पर असर: सरकार ने सभी पुरानी भर्ती मांगें की खत्म, विभागों को नई रिक्तियां भेजने को कहा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तथ्यपूर्ण बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि पहले भेजी गई ग्रुप-सी के खाली पदों की मांग अब मान्य नहीं मानी जाएगी। यानी अब तक विभागों द्वारा कर्मचारी चयन आयोग को भेजी गई रिक्विज़िशन पूरी तरह निरस्त मानी जाएगी और उन पर आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि कई विभागों द्वारा भेजी गई रिक्तियों में गलतियां, दोहराव और अधूरी जानकारी पाई गई थी। अब सभी विभागों, बोर्डों और निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर रिक्तियों की नई, सत्यापित और अद्यतन सूची तैयार करें। यह सूची अब 10 दिसंबर तक कर्मचारी चयन आयोग के पोर्टल पर अपलोड करनी अनिवार्य होगी। पहले यह समय सीमा 15 नवंबर थी, जिसे अब बढ़ाकर 10 दिसंबर किया गया है ताकि विभागों को सही आंकड़ा तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। क्लर्क भर्ती पर रोक पत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा क्लर्क के पदों को लेकर है। आदेश में स्पष्ट लिखा है कि फिलहाल क्लर्क के पदों पर कोई नई मांग नहीं भेजी जाएगी। यदि किसी विभाग ने पहले से क्लर्क पदों की मांग भेज दी है, तो उसे तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही, कर्मचारी चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि ऐसी मांगों पर आगे कोई कार्यवाही न करे। इससे साफ संकेत मिलता है कि क्लर्क श्रेणी के पदों की संख्या और आवश्यकता की सरकार पुनर्समीक्षा कर रही है। अब प्रक्रिया नए सिरे से यह बदलाव किसी नियम में संशोधन नहीं है, बल्कि रिक्तियों को सही रूप में संकलित करने की प्रक्रिया का पुनर्गठन है। पहले विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग समय पर डिमांड भेजे जाने से आंकड़ों में असमानता और भ्रम पैदा हो जाता था। अब सभी विभाग एक साथ अद्यतन सूची भेजेंगे, जिसके आधार पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भर्ती सही, सटीक और एकीकृत जानकारी के आधार पर हो, न कि पुराने या गलत आंकड़ों पर। सभी विभागों को भेजे गए आदेश यह पत्र राज्य के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और सभी बोर्डों एवं नगर निकायों के प्रबंध निदेशकों को भेजा गया है। यानी यह आदेश पूरे प्रदेश की शासन प्रणाली पर लागू होगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अब भर्ती प्रक्रिया तभी आगे बढेगी, जब सभी विभाग सही और अद्यतन रिक्तियों की सूची भेज देंगे। इसका असर सीधे उन युवाओं पर पड़ेगा जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि अब आगे होने वाली भर्तियां नई रिक्विज़िशन के आधार पर ही होंगी।  

तकरार थमने का नाम नहीं ले रही! DK vs Siddaramaiah की खींचतान पर जानकारों का बड़ा दावा

बेंगलुरु  कर्नाटक के विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि राज्य सरकार के नेतृत्व को लेकर कई दिनों तक चली ‘खींचतान’ के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच ‘समझौता’ अस्थायी है। उन्होंने कहा, यह तूफान से पहले की शांति और एक ‘रणनीतिक समायोजन’ है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भ्रम पैदा करने के लिए विपक्ष और मीडिया को जिम्मेदार ठहराया।   एक महीने से चल रहे सत्ता संघर्ष के बाद दोनों नेताओं ने शनिवार को सिद्धरमैया के आवास पर नाश्ते पर मुलाकात की और मतभेदों के दूर होने की घोषणा की। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने बाद में संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया, एकता का प्रदर्शन किया और घोषणा की कि वे पार्टी आलाकमान का कहना मानेंगे। इस तरह, उन्होंने मुख्यमंत्री परिवर्तन पर विवाद को खत्म करने की कोशिश की। कथित तौर पर 2023 में सरकार बनाते समय सहमति बनी थी कि ढाई साल के कार्यकाल के बाद शिवकुमार मुख्यमंत्री पद पर आसीन होंगे और ढाई साल नवंबर 2025 में पूरे हुए। अस्थायी समझौते का दावा राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के नेता प्रकाश शेषराघवचार के मुताबिक जिस बैठक के परिणामस्वरूप संघर्ष विराम हुआ, वह ‘‘हर असहमति को सुलझाने के बारे में कम और कामकाजी सद्भाव को बहाल करने के बारे में अधिक थी’’। उन्होंने दावा किया, ‘‘यह केवल एक अस्थायी समझौता है। एक बार जब कोई राजनीति में अति महत्वाकांक्षी हो जाता है, तो आप उसे कुछ समय के लिए शांत करा सकते हैं, लेकिन यह फिर से उभरेगा।’’ शेषराघवचार के मुताबिक, शिवकुमार ने अपने समर्थकों को उनके पक्ष में आवाज उठाने के लिए उकसाया था। शेषराघवचार ने कहा, ‘‘शिवकुमार के समर्थक विधायक दिल्ली गए और कुछ संत भी उनके समर्थन में आए। अब उप मुख्यमंत्री पीछे नहीं हट सकते। इससे उनकी प्रतिष्ठा को धक्का लगेगा। अब उनके सामने करो या मरो की स्थिति है, जिसे उन्होंने खुद न्योता दिया है। हो सकता है कि मीडिया या किसी और माध्यम से इसे नए सिरे से शुरू करने के लिए वह कुछ समय तक चुप रहें।’’ भाजपा बोली, कांग्रेस दो गुटों में बंट गई भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस अब दो गुटों में बंट चुकी है और इसकी लड़ाई राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जैसी हो गई है, जहां गुटबाजी ने चुनाव में इसकी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाया है। अन्य विपक्षी पार्टी जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) के विधान पार्षद (एमएलसी) टी ए शरवण ने ‘पीटीआई-भाषा’से कहा कि इस विवाद ने दोनों नेताओं और उनकी पार्टी को जनता के सामने पहले ही बेनकाब कर दिया है, लेकिन अब वे अपने झगड़े को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘राज्य के लोग एकता के इस प्रदर्शन को स्वीकार नहीं करेंगे। सरकार लोगों से किए गए वादों को पूरा करने में असमर्थ है और विकास कार्यों को करने में विफल रही है। इसलिए, मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने नाटक का मंचन किया।’’ वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रामकृष्ण उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस आलाकमान ने सिर्फ सुलह-समझौते का काम किया है, जो ज्यादा दिन तक नहीं टिकेगा। उन्होंने कहा, ‘‘कल की नाश्ते पर बैठक आलाकमान के आदेश पर हुई थी, जिसे उन्होंने (मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने) स्वेच्छा से नहीं किया था। उनके बीच पहले से ही मतभेद थे। नाश्ते पर बैठक और संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आलाकमान द्वारा पूरी तरह से सुनियोजित कदम था।’’ उपाध्याय ने कहा, ‘‘सिद्धरमैया और शिवकुमार ने ठीक वही किया, जो उन्हें बताया गया था – कि वे साथ हैं, उनमें एकता है, उनके बीच कोई मतभेद नहीं हैं और वे कांग्रेस आलाकमान की बातों पर अड़े रहेंगे। लेकिन इतने महीनों और पिछले एक हफ्ते से चल रही तीखी खींचतान के बाद, क्या समाधान की कोई संभावना है? नतीजा शून्य है।’’ उनके अनुसार, नाश्ते की बैठक में कुछ भी हासिल नहीं हुआ, क्योंकि इसमें स्पष्टता का अभाव था कि क्या आलाकमान ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने के संबंध में कोई वादा किया था। कांग्रेस प्रवक्ता एम. लक्ष्मण ने जोर देकर कहा कि दोनों नेताओं के बीच किसी भी समय कोई मतभेद नहीं था। लक्ष्मण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मतभेदों का विमर्श भाजपा और जनता दल (एस) और मीडिया के एक वर्ग का नतीजा है। अगर कोई समझौता हुआ था, तो वह कांग्रेस का अंदरूनी मामला था और फैसले पार्टी को लेने थे। कर्नाटक ने मीडिया का ध्यान विशेष रूप से क्यों आकर्षित किया? ऐसा इसलिए क्योंकि कर्नाटक में एक गैर-भाजपा पार्टी का शासन है। इरादा सरकार को अस्थिर करके कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ना था।’’ ‘कांग्रेस मुक्त भारत’, भाजपा द्वारा अपने प्रतिद्वंदी के खिलाफ बार-बार दोहराया जाने वाला एक नारा है।  

कटक में क्रिकेट और आस्था का संगम—T20I मैच का पहला टिकट अर्पित हुआ भगवान जगन्नाथ को

भुवनेश्वर  ओडिशा क्रिकेट संघ (ओसीए) ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच नौ दिसंबर को होने वाले टी-20 मैच का पहला टिकट भगवान जगन्नाथ को भेंट किया। संघ ने खेल के सुचारू संचालन के लिए भगवान से आशीर्वाद मांगा। भुवनेश्वर में एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि क्रिकेट संघ के कई सदस्यों के साथ ओसीए सचिव संजय बेहरा ने रविवार को पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान को टिकट अर्पित किया। ओसीए अधिकारी ने कहा, ‘पहला टिकट भगवान के चरणों में समर्पित किया गया ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके।’ ओसीए सूत्रों के अनुसार, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कटक के बाराबती स्टेडियम में होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच के टिकट खरीदे हैं। उन्होंने बताया कि ओसीए अध्यक्ष पंकज लोचन मोहंती और बेहरा ने मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें टिकट सौंपे।

रायपुर में जुटेंगी भारत-दक्षिण अफ्रीका टीमें, कल तैयारी में जुटेंगे खिलाड़ी

रायपुर रांची में वनडे सीरिज की जीत के साथ शुरुआत करने के बाद टीम इंडिया सोमवार शाम को रायपुर पहुंचेगी. साथ ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाड़ी भी चार्टेड प्लेन से पहुचेंगे. इसके दूसरे दिन यानी 2 दिसंबर को दोपहर डेढ़ बजे दक्षिण अफ्रीका और शाम 5.30 बजे भारतीय टीम प्रैक्टिस सत्र में शामिल होगी. नवा रायपुर के शहीद वीर नारायाण सिंह स्टेडियम में 3 दिसंबर को वनडे सीरिज का दूसरा मुकाबला मैच खेला जाएगा. बीसीसीआई के क्यूरेटर्स ने मैच के लिए मैदान और पिच टेकओवर कर लिया है. क्यूरेटर्स ने रविवार को बताया कि रायपुर स्टेडियम की आउटफील्ड रांची स्टेडियम से तेज रहेगी, क्योंकि यहां मैदान में नियमित फर्टिलाइजर के उपयोग के साथ ही समय पर वाटरिंग और खुली धूप के कारण यह बेहतर बन चुका है. पिच बल्लेबाजी के लिए अनुकूल है. दूसरे सत्र में ओस के कारण यहां की बाद में गेंदबाजी करने वाली टीम को मुश्किल होगी. लक्ष्य बचाने उतरे गेंदबाजों को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है. बीसीसीआई के क्यूरेटर्स आने के साथ ही छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के क्यूरेटर्स अभी पिच को बेहतर बनाने के लिए रोलिंग हल्के रोलर से कर रहे हैं. इसके बाद रात में ओस से बचाने के लिए इसे ढंका जा रहा है. यहां दोपहर 2 बजे की धूप सेंटर पिच नंबर 5 व 6 को दी जा रही है. स्टेडियम के पास काउंटर पर असमंजस बूढ़ातालाब किनारे इंडोर स्टेडियम में ऑनलाइन टिकट बुकिंग वालों को 2 दिसंबर की शाम तक ही फिजिकल टिकट मिल पाएगी. क्रिकेट संघ ने इसके बाद दर्शकों की सुविधा के लिए नवा रायपुर रेलवे स्टेशन के आसपास उपयुक्त जगह पर अस्थायी टिकट काउंटर खोलने की अनुमति नवा रायपुर विकास प्राधिकरण से मांगी थी. उसका जवाब अब तक नहीं आ पाया, इसलिए तीन दिसंबर को खुलने वाले काउंटर पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. पहली बार लगेगा स्पाइडर कैमरा रायपुर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में बीसीसीआई की ब्रॉडकॉस्टिंग टीम ने मैदान के ऊपर बीचों-बीच स्पाइडर कैमरा लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी के साथ मैदान के चारों ओर लगभग 4 के अल्ट्रा क्वालिटी के 40 अतिरिक्त कैमरे भी लगाये जा रहे हैं. इसी प्रकार स्टेडियम के चारों ओर अधिकृत विज्ञापन एजेंसियों के बोर्ड बाउंड्री के पार लगाने का काम 1 दिसंबर को सुबह से शुरू कर दिया है.

संगीत सोम ने मौलाना मदनी के विवादित बयान पर जताया गुस्सा, बोले- ‘सनातनी दौड़ा-दौड़ा कर मारेगा’

 मेरठ  यूपी के मेरठ में बीजेपी के पूर्व विधायक और फायर ब्रांड नेता संगीत सिंह सोम ने मौलाना मदनी द्वारा दिए गए जिहाद वाले बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वो बीमार मौलाना हैं. उनकी मानसिकता बीमार है. संगीत सोम ने आरोप लगाते हुए कहा कि मदनी एक ऐसे संस्थान से आते हैं जहां से हमेशा आतंकी निकलते हैं, वह अपनी मानसिकता नहीं बदल सकते.  सोम ने कहा- 'ये लोग संविधान की बात करते हैं लेकिन पत्नी रखेंगे चार. बात संविधान की करेंगे और संविधान को ही अपने तरीके से मोड़ना चाहते हैं. देश में जब-जब आतंक होता है, उसको सही ठहराते हैं. मैं सलाह देना चाहता हूं कि कहीं ऐसा ना हो कि देश के सनातनी सड़कों पर उतर आएं और तुम जैसे मौलानाओं को दौड़ा-दौड़ा कर मारना शुरू कर दें. यहां से पाकिस्तान तक दौड़ाकर ले जाएं और वहीं तुम्हारे घर में घुसा के आएं.' संगीत सोम ने आगे कहा कि इनकी समझ में अभी आ नहीं रहा है, मैं एक बार फिर दोहरा रहा हूं, होश में आ जाओ. वैसे… इनके बारे में टिप्पणी करना बेकार है. ये किसी तरीके से संविधान को नहीं मानते और ये अपनी इस मानसिकता से बाहर भी नहीं आना चाहते हैं.  मदनी के 'जिहाद' वाले बयान पर भड़के संगीत सोम दरअसल, मदनी ने कहा था कि 'जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा'. इसपर संगीत सोम ने कहा कि ये लोग देश का संविधान अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं और जहां संविधान की बात आती है, वहां शरिया कानून की बात करते हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब चार बीवी और 21 बच्चे रखने की बात आती है, तब संविधान याद नहीं आता, लेकिन जिहाद को सही ठहराना चाहते हैं. सोम ने कहा, "पूरी दुनिया में अगर मुस्लिम कहीं सुरक्षित हैं तो वह भारत में हैं." उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग "खाते भारत की हैं और गाते पाकिस्तान की हैं." सोम ने सीधे तौर पर कहा कि आतंकी मदरसों से निकलते हैं, खासकर देवबंद से, और देश में मदरसे बंद होने चाहिए. संगीत सोम ने चेतावनी दी कि अगर मौलाना नहीं सुधरे, तो "यहां का सनातनी सड़कों पर उतर के इनको दौड़ा-दौड़ा कर मारेगा और दौड़ा-दौड़ा के पाकिस्तान तक छोड़कर आएगा." उन्होंने घुसपैठियों को चिन्हित कर बाहर भेजने की भी बात कही. मदनी का बयान- जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक कार्यक्रम में न्यायपालिका के हालिया फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 'बाबरी मस्जिद और तलाक जैसे मामलों के फैसलों से ऐसा लगता है कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं.' उन्होंने आगे कहा था कि अदालतों के कई ऐसे फैसले सामने आए हैं, जिनमें संविधान में दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का खुले तौर पर उल्लंघन हुआ है.