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हार्ट डिज़ीज़ अलर्ट! अध्ययन में सामने आए भारत के सबसे जोखिम वाले राज्य

भारत में दिल की बीमारी लंबे समय से सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बनी हुई है, लेकिन बेंगलुरु में हुई एक ताज़ा रिसर्च ने ऐसा सच सामने रखा है जिसने डॉक्टरों और हेल्थ एक्सपर्ट्स को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हार्ट डिज़ीज़ का खतरा समान नहीं है—और दक्षिण भारत इस मामले में ज्यादा संवेदनशील दिखाई दे रहा है। यह बात सिर्फ जीवनशैली या खान-पान तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के अंदर छिपे उन जेनेटिक बदलावों से जुड़ी है जो सामान्य टेस्ट में भी पकड़ में नहीं आते। रिसर्च में क्या मिला? पीयर-रिव्यूड राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, दक्षिण भारत के कई राज्यों में हार्ट डिज़ीज़ से मौतों का जोखिम उत्तर और मध्य भारत की तुलना में अधिक पाया गया। बेंगलुरु की इस स्टडी ने बताया कि दक्षिण भारतीयों में दिल से जुड़ी कुछ गंभीर बीमारियों से जुड़े जेनेटिक वेरिएंट ज्यादा मिलते हैं, जैसे Hypertrophic Cardiomyopathy (HCM)—एक ऐसी स्थिति जिसमें दिल की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं और अचानक हृदयगति रुकने का खतरा बढ़ जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह कि ये जेनेटिक बदलाव अक्सर आम जांच में दिखाई नहीं देते। दक्षिण भारत में जोखिम ज्यादा क्यों? स्टडी ने कई कारण बताए— जेनेटिक म्यूटेशन का अधिक पाया जाना दक्षिण भारतीय समुदायों में कुछ विशेष जीन वेरिएंट ज़्यादा मिलते हैं जो दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ाते हैं। शरीर की मेटाबॉलिक बनावट दक्षिण एशियाई लोगों में–     इंसुलिन रेसिस्टेंस जल्दी बढ़ता है     पेट की चर्बी तेजी से जमा होती है     खराब कोलेस्ट्रॉल जल्दी बढ़ जाता है ये सभी हार्ट डिज़ीज़ के बड़े कारण हैं। लाइफस्टाइल का प्रभाव लंबे समय तक बैठना, स्ट्रेस, बाहर का खाना और कम एक्सरसाइज जोखिम को और बढ़ाते हैं। पश्चिमी देशों की टेस्टिंग गाइडलाइन भारत पर फिट नहीं बैठती यूरोप-अमेरिका के आधार पर बनाए टेस्ट भारतीय जीन को पूरी तरह पहचान नहीं पाते, इसलिए कई लोग जोखिम में होने के बावजूद अनजान रहते हैं। भारत के लिए संदेश क्या है? यह रिसर्च साफ कहती है कि पूरे देश के लिए एक समान हेल्थ गाइडलाइन अब काफी नहीं है। हर क्षेत्र की जेनेटिक और लाइफस्टाइल अलग है, इसलिए—     जोखिम पहचानने का तरीका भी अलग होना चाहिए     परिवार में शुरुआती उम्र में हार्ट की बीमारी हो तो जेनेटिक स्क्रीनिंग जरूरी है     ब्लैकआउट, बेहोशी या अचानक चक्कर जैसे सिम्पटम्स को हल्के में न लें दिल को सुरक्षित रखने के आसान उपाय     तैलीय और रिफाइंड फूड कम करें     रोज 30–45 मिनट वॉक या एक्सरसाइज     BP, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच     स्ट्रेस कम करें और 7–8 घंटे की नींद     धूम्रपान और शराब से दूरी     डॉक्टर को फैमिली हिस्ट्री ज़रूर बताएं क्या दक्षिण भारतीयों में खतरा तय है? नहीं— यह सिर्फ रिस्क फैक्टर है, बीमारी की गारंटी नहीं। सही जांच, समय पर स्क्रीनिंग और थोड़े से लाइफस्टाइल बदलाव दिल को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।

गंभीर विवाद पर शास्त्री का बड़ा बयान: ‘मेरे साथ ऐसा होता तो खेल बदल देता’—गंभीर का समर्थन करने से इंकार

नई दिल्ली  पूर्व कप्तान और टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री भारतीय टेस्ट क्रिकेट के धीरे-धीरे हो रहे पतन से दुखी हैं। 2012 से 2024 तक घर में एक भी सीरीज नहीं हारने वाली टीम इंडिया गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद 2 होम सीरीज हार चुकी है। हार भी ऐसी-वैसी नहीं। सफाया वाली हार। पिछले साल न्यूजीलैंड ने 3-0 से हराया तो इस साल दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से मात दी। रवि शास्त्री ने टेस्ट में भारत के शर्मनाक प्रदर्शन के लिए कोच गौतम गंभीर का बचाव करने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि अगर ये उनके साथ होता तो वह सारी जिम्मेदारी खुद पर लेते। मीडिया की तरफ से एक पॉडकास्ट के टीजर में रवि शास्त्री कहते हैं, ‘आप बताइए मुझे। गुवाहाटी में क्या हुआ- 100 रन पर एक विकेट से आप 130 रन पर 7 पर पहुंच जाते हैं। ये टीम खराब भी नहीं है। उनके पास बहुत टैलेंट हैं। खिलाड़ियों को भी कुछ जिम्मेदारी लेनी चाहिए। आप क्रिकेट खेलने की जब शुरुआत करते हैं, तब से स्पिन खेले हैं।’ जब इंटरव्यू करने वाले ने उनसे ये पूछा कि क्या वह मुख्य कोच गौतम गंभीर का बचाव कर रहे हैं, तब शास्त्री ने कहा, 'मैं (उनका) बचाव नहीं कर रहा। 100 प्रतिशत (वह भी जिम्मेदार हैं)। क्या मैं कुछ गलत कह रहा हूं? अगर यह मेरे साथ होता, मैं पहली रिस्पॉन्सबिलिटी लेता। लेकिन उसके बाद मैं टीम मीटिंग में खिलाड़ियों को भी नहीं बख्शता।' रवि शास्त्री जब कोच थे तब विराट कोहली टेस्ट में कप्तान हुआ करते थे। उस दौर में भारत घर में क्या, दूसरे देशों में जाकर उन्हें उनके ही घर में हराने और सीरीज जीतने का मद्दा रखता था। शास्त्री-कोहली के दौर में भारत ने घर में सिर्फ दो टेस्ट हारे थे। एक 2017 में पुणे टेस्ट और दूसरा 2021 में चेन्नई टेस्ट। लेकिन गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारत घर में खेले गए पिछले 7 टेस्ट मैच में 5 में हार चुका है। रवि शास्त्री भारत के सबसे सफल कोच में से एक हैं। उनके कार्यकाल में 2017 से 2021 तक भारत का टेस्ट में जीत प्रतिशत 65 का था। उनके ही कार्यकाल में भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीता था और तीन साल बाद फिर से वो कारनामा दोहराया था। 2016 से 2021 तक लगातार 42 महीनों तक भारतीय टीम टेस्ट रैंकिंग में नंबर-1 पर विराजमान रही और 2021 का वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप भी खेला था।  

योगी सरकार का कदम: नई पर्यटन सेवा नियमावली 2025 से व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार

पर्यटन सेवा नियमावली 2025 प्रख्यापित, योगी सरकार ने किए बड़े सुधार पर्यटन सम्वर्ग में नई नियमावली लागू, सीधी भर्ती व पदोन्नति दोनों माध्यमों से भरे जाएंगे पद लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन विभाग में संरचनात्मक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप, पर्यटन विभाग में व्यापक संरचनात्मक सुधार करते हुए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ पर्यटन सेवा नियमावली-2025 का प्रख्यापन किया गया है। नई नियमावली के लागू होने से पूर्व के सभी नियम, आदेश तथा दिशा-निर्देश अवक्रमित हो गए हैं। नई नियमावली से भर्ती प्रक्रिया हुई सुदृढ़ नई प्रख्यापित नियमावली के तहत पर्यटन अधीनस्थ सेवा सम्वर्ग में प्रकाशन अधिकारी, अपर जिला पर्यटन अधिकारी तथा पर्यटन सूचना अधिकारी के पद अब सीधी भर्ती तथा पदोन्नति दोनों माध्यमों से भरे जाएंगे। विभाग के अनुसार, प्रकाशन अधिकारी के पदों के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा, जबकि पर्यटन सूचना अधिकारी के पदों की भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के द्वारा की जाएगी। नई व्यवस्था से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व प्रतिस्पर्धात्मक होने की उम्मीद है। सेवा संरचना में व्यापक प्रावधान नई नियमावली में नियुक्ति, सेवा शर्तों, पदोन्नति, अर्हता तथा वरिष्ठता सहित अन्य प्रशासनिक प्रावधानों का भी समावेश किया गया है। प्रमुख सचिव पर्यटन, अमृत अभिजात ने कहा कि यह नियमावली पर्यटन विभाग में एक समन्वित, सक्षम व आधुनिक सेवा संरचना सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार का मानना है कि इन सुधारों से प्रदेश में पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी और प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी।

आखिर खत्म हुई पंजाब में बसों की हड़ताल, लोगों को बड़ी राहत

अमृतसर  पिछले चार दिनों से किलोमीटर स्कीम टेंडर के विरोध में हड़ताल पर गए पंजाब रोडवेज कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन आखिरकार अपनी ड्यूटी पर वापस आ गए हैं। कर्मचारियों के ड्यूटी पर वापस आने पर अब रोडवेज और पनबस की बसें फिर से पंजाब की सड़कों पर घूमती दिखाई देंगी। इससे प्रभावित हो रहा आम जनजीवन कहीं ना कहीं दोबारा सुचारू ढंग से चलना शुरू हो जाएगा। आज सुबह यूनियन के मुख्य अधिकारियों ने हड़ताल छोड़ दोबारा से ड्यूटी ज्वाइन करने का फैसला किया। इसके बाद अमृतसर बस स्टैंड पर फिर से बसों की आवागमन दोबारा शुरू हो गया है।

पूजा में बढ़ेगी सकारात्मक ऊर्जा: जानें मंदिर की सही दिशा और वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि सही दिशा का पालन करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और जीवन में कोई संकट नहीं आता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की शुभ दिशा में मंदिर होने से परिवार के सदस्यों को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। इसलिए वास्तु शास्त्र में मंदिर के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं कि मंदिर से जुड़े नियम के बारे में। किस दिशा में होना चाहिए मंदिर वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर के लिए पूर्व दिशा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिशा में मंदिर होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इसके अलावा पूर्व-उत्तर दिशा को भी मंदिर के लिए उत्तम माना जाता है। इससे पूजा सफल होती है। कैसा होना चाहिए मंदिर घर में मंदिर बनवाने के लिए ऐसी जगह का चयन करें, जहां बाथरूम पास न हो और स्वच्छता के नियम का पालन जरूर करना चाहिए। मंदिर लकड़ी या पत्थर का बनवा सकते हैं। कहां नहीं होना चाहिए मंदिर वास्‍तु शास्‍त्र के अनुसार, मंदिर को भूलकर भी सीढ़ियों के नीचे नहीं बनवाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि सीढ़ियों के नीचे मंदिर होने से जातक को जीवन में परेशनियों का सामना करना पड़ सकता है और घर में क्‍लेश की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके अलावा मंदिर को बेडरूम में भी नहीं बनवाना चाहिए। किस रंग का बनवाएं मंदिर मंदिर के रंग का विशेष ध्यान रखें। मंदिर सफेद, पीला या लाल रंग का होना चाहिए। इन रंग को शुभता का प्रतीक माना जाता है। इन बातों का रखें विशेष ध्यान पूजा के दौरान भगवान को फूल अर्पित किए जाते हैं। कुछ समय के बाद फूल सुख जाते हैं। सूखे हुए फूलों को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, मंदिर में सूखे फूल रखने से जातक को वास्तु दोष की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए फूल सुख जाने पर किसी बहते हुए पवित्र नदी में बहा दें या फर किसी पौधे में ड़ाल दें। मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमा को विराजमान करने से पहले उनके नीचे लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर प्रतिमा को स्थापित करें।  

स्नेहा राणा ने महाकालेश्वर में अर्चना, विश्व कप जीत में बाबा महाकाल को माना प्रेरणा

उज्जैन   महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 में शानदार प्रदर्शन कर देश का नाम रोशन करने वाली भारतीय टीम की ऑलराउंडर स्नेहा राणा मंगलवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। सुबह चार बजे होने वाली भस्म आरती में शामिल होकर उन्होंने ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दर्शन किए और विजय के उपरांत पुनः मंदिर आने का अपना संकल्प पूरा किया। विश्व कप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए राणा ने 6 मैचों में 7 विकेट चटकाए और 99 महत्वपूर्ण रन भी जोड़े। फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी। टूर्नामेंट के दौरान वे पहले भी महाकाल का आशीर्वाद लेने पहुंची थीं और मन्नत मांगी थी कि यदि भारत विश्व कप जीतेगा तो वे पुनः भस्म आरती में शामिल होंगी। विश्व कप जीतने के बाद मंगलवार को उन्होंने अपना वचन निभाते हुए महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई।  दर्शन के बाद स्नेहा राणा ने कहा कि महाकाल की नगरी में आकर उन्हें विशेष ऊर्जा मिलती है। “पिछली बार बोला था कि जीतकर वापस आऊंगी। भगवान से यही प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद सदैव हम पर बना रहे,” उन्होंने मंदिर प्रबंधन की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि महाकालेश्वर मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा अद्वितीय है। मंदिर समिति की ओर से उप प्रशासक एस.एन. सोनी ने स्वागत एवं सम्मान किया।

‘रेड कार्पेट किसे?’ रोहिंग्याओं पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की कड़ी नाराज़गी

नई दिल्ली  रोहिंग्या समुदाय से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता दोनों से तीखे सवाल किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि रोहिंग्याओं की कानूनी स्थिति तय किए बिना उनके अधिकारों पर चर्चा नहीं की जा सकती और यह भी पूछा कि क्या भारत सरकार ने कभी उन्हें ‘शरणार्थी’ घोषित किया है। सीजेआई ने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि 'क्या घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट बिछाएं? दरअसल मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मई महीने में दिल्ली पुलिस ने कुछ रोहिंग्या व्यक्तियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल रहा। साथ ही याचिका में मांग की गई कि यदि उनको उनके देश लौटाना हो, तो यह प्रक्रिया कानून के अनुसार ही होनी चाहिए। केंद्र के पास शरणार्थी घोषित करने का कोई आदेश है?- CJI लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई की शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार की ओर से किसी भी आधिकारिक अधिसूचना का अभाव उठाते हुए पूछा- भारत सरकार का कौन-सा आदेश है जो उन्हें ‘शरणार्थी’ घोषित करता है? ‘शरणार्थी’ एक विधिक परिभाषित शब्द है। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से घुसपैठ करता है, तो क्या हमारे पास उसे यहां रखने की बाध्यता है? पीठ ने पूछा- अगर किसी का कानूनी दर्जा ही नहीं है और वह घुसपैठिया है, तो क्या हमारा दायित्व बनता है कि हम उसे यहां रखें? बेंच ने आगे कहा- अगर उनके पास भारत में रहने का कानूनी अधिकार नहीं है और वे घुसपैठिए हैं, तो क्या हम उत्तर भारत की बेहद संवेदनशील सीमा पर आए किसी घुसपैठिए का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करें? याचिकाकर्ता की वकील ने स्पष्ट किया कि वे रोहिंग्याओं के लिए शरणार्थी दर्जा मांग ही नहीं रही हैं, बल्कि केवल यह मांग कर रही हैं कि किसी भी निर्वासन की प्रक्रिया कानून के मुताबिक हो। घुसपैठ कर प्रवेश करें और फिर अधिकार मांगें?- CJI इस पर CJI ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- पहले आप अवैध रूप से घुसते हैं। सुरंग खोदकर या बाड़ काटकर भारत में दाखिल हो जाते हैं। फिर कहते हैं कि अब मैं आ गया हूं, इसलिए भारत के कानून मेरे ऊपर लागू हों और मुझे खाना, रहने की जगह, बच्चों को शिक्षा मिले। क्या हम कानून को इस तरह खींचना चाहते हैं? उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पहले से करोड़ों गरीब नागरिक हैं जिन पर ध्यान देना आवश्यक है। हालांकि सीजेआई ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही कोई अवैध रूप से घुस आया हो, उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का तर्क- हम केवल वैधानिक प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि वे न तो रोहिंग्याओं के लिए विशेष अधिकार मांग रही हैं और न ही किसी को वापस बुलाने की मांग है। याचिका का एकमात्र उद्देश्य है कि सरकार अपने ही बनाए निर्वासन प्रक्रिया का पालन करे। उनका कहना था कि अदालत पहले ही सलीमुल्लाह मामले (2020) में कह चुकी है कि रोहिंग्याओं को सिर्फ वहीं वापस भेजा जा सकता है जब प्रक्रिया कानून के अनुसार हो। ‘देश धर्मशाला नहीं है’- पहले की टिप्पणियां गौरतलब है कि इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने श्रीलंकाई तमिल शरणार्थी से जुड़े एक अन्य मामले में कहा था कि भारत दुनिया की धर्मशाला नहीं बन सकता जहां हर तरफ से शरणार्थियों को स्वीकार किया जाए। इसके अलावा मई में अदालत ने एक और याचिका में यह टिप्पणी भी की थी कि रोहिंग्याओं को समुद्र में फेंकने की कहानी एक सुलेख कथा जैसी लगती है। सरकार ने PIL की ‘लोकस स्टैंडी’ पर उठाए सवाल सुनवाई में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिका एक ‘पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ के रूप में दायर की गई है, लेकिन इसे किसी प्रभावित व्यक्ति ने दाखिल नहीं किया। इस पर याचिकाकर्ता की वकील ने कहा कि PIL में ‘लोकस’ का प्रश्न नहीं उठता। पीठ ने कहा कि यह मुद्दा कई अन्य याचिकाओं से भी जुड़ा है, इसलिए इसे उन मामलों के साथ समग्र रूप से सुना जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि बिना कानूनी दर्जे वाले विदेशी नागरिकों से जुड़े मामले संवेदनशील और जटिल हैं, जिनमें कई लॉजिस्टिक मुद्दे शामिल होते हैं।

दिसंबर में शादी के 3 शुभ दिन तय, साथ ही देखें नामकरण व गृह प्रवेश मुहूर्त

हिंदू धर्म में कोई भी मांगलिक या शुभ कार्य पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त देखने के बाद ही किए जाते हैं। क्योंकि यह माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य शुभ परिणाम देते हैं। साल 2025 के आखिरी माह यानी दिसंबर में विवाह  के लिए केवल 3 ही दिन शुभ बताए जा रहे हैं। विवाह मुहूर्त – दिसंबर में विवाह के लिए बस 3 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं जो 4, 5 और 6 दिसंबर को रहने वाले हैं। गृह प्रवेश मुहूर्त – हिंदू पंचांग के अनुसार गृह प्रवेश के लिए 1, 5 और 6 दिसंबर का दिन शुभ रहने वाला है। नामकरण संस्कार मुहूर्त – दिसंबर में नामकरण संस्कार के लिए 4, 8, 13, 14, 17, 22, 24, और 28 दिसंबर का दिन शुभ रहने वाला है। प्रॉपर्टी खरीद के लिए शुभ मुहूर्त – दिसंबर में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 5, 11, 18, 19, और 26 दिसंबर की तिथियां शुभ मानी जा रही हैं। नया काम शुरू करने का मुहूर्त – अगर आप दिसंबर में नया काम शुरू करने का मन बना रहे हैं, तो इसके लिए 3, 11, 17, 21, 26 और 27 दिसंबर का दिन शुभ रहेगा। इन दिन से बंद हो जाएंगे शुभ काम 16 दिसंबर 2025 को सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिससे खरमास की शुरुआत हो जाएगी। वहीं खरमास का समापन 14 जनवरी 2026 को होने जा रहा है। ऐसे माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में देवगुरु बृहस्पति और सूर्य देव की कृपा प्राप्त नहीं होती, जिससे उस कार्य से शुभ परिणाम नहीं मिलते। ऐसे में इस दौरान विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश आदि जैसे कार्य करने की मनाही होती है।  

शादी की सालगिरह पर निक का रोमांटिक अंदाज़, प्रियंका चोपड़ा की ग्लैमरस फोटो शेयर कर लिखा– ड्रीम गर्ल

लॉस एंजिल्स ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा और उनके पति निक जोनस आज अपना शादी की 7वीं सालगिरह मना रहे हैं. निक को राष्ट्रीय ‘जीजू’ बने आज 7 साल हो पूरे हो गए हैं. इस मौके पर उन्होंने अपनी पत्नी प्रियंका चोपड़ा की फोटो शेयर कर एक खास नोट लिखा है. निक जोनस का पोस्ट बता दें कि निक जोनस ने अपनी वेडिंग एनिवर्सरी पर अपने इंस्टाग्राम की स्टोरी पर प्रियंका चोपड़ा की एक हॉट फोटो शेयर किया है. जिसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा- ‘मेरी ड्रीम गर्ल से शादी को आज 7 साल पूरे हो गए हैं.’ शेयर किए गए फोटो में एक्ट्रेस को समुद्र किनारे लेटे देखा जा सकता है, उनकी ये फोटो पीठ साइड से लिया गया है. वहीं, इस कपल की लव स्टोरी की बात करें तो इसकी शुरुआत ट्विटर से हुई थी. निक जोनस ने ट्विटर (X) पर प्रियंका चोपड़ा को मैसेज किया था. जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत होने लगी और साल 2017 में वैनिटी फेयर ऑस्कर पार्टी में दोनों की पहली मुलाकात हुई. इसी साल दोनों को साथ में मेट गाला के रेड कार्पेट पर देखा गया था. हालांकि साल 2018 में इनकी डेटिंग की खबरें आईं और इसी साल इस कपल ने 1 और 2 दिसंबर 2018 को जोधपुर के उमैद भवन पैलेस में हिंदू और ईसाई रीति-रिवाजों से भव्य शादी कर लिया. प्रियंका चोपड़ा का वर्कफ्रंट वर्कफ्रंट की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा इस समय महाकाव्य एक्शन-एडवेंचर फिल्म ‘वाराणसी’  को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं. ये फिल्म निर्देशक एस.एस. राजामौली बना रहे हैं. इस फिल्म में प्रियंका चोपड़ा के साथ महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं.

कर्नाटक में सियासी गर्मी: सिद्धारमैया–डीके शिवकुमार की नाश्ता मुलाकात के पीछे क्या है ‘बड़ी बात’?

बेंगलुरु  कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने एकता का प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आवास पर नाश्ता किया। सत्ता को लेकर जारी खींचतान के बीच कुछ ही दिन पहले शिवकुमार ने सीएम सिद्धारमैया के घर पर जाकर नाश्ता किया था। आज के नाश्ते के बाद दोनों नेताओं ने फिर एक बार मीडिया के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता की। शिवकुमार और सिद्धारमैया ने कहा कि अगर कांग्रेस हाईकमान उन्हें बुलाता है तो दोनों नेता नई दिल्ली जाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वे हाईकमान के फैसले से बंधे हैं। सिद्धारमैया ने कहा, 'मैंने और शिवकुमार ने साथ में नाश्ता किया, पार्टी के मामलों और आठ दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र की रणनीति पर चर्चा की। हम विधानसभा सत्र में विपक्ष का सामना करेंगे।' उन्होंने कहा- 'हम आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे। हम हमेशा एकजुट हैं, हम भाई हैं और साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अगर आलाकमान बुलाएगा तो मैं उनसे मिलने जरूर जाऊंगा।' इससे पहले सिद्धारमैया यहां उपमुख्यमंत्री के सदाशिवनगर स्थित आवास पर पहुंचे, जहां शिवकुमार और उनके भाई तथा पूर्व कांग्रेस सांसद डी के सुरेश ने उनका स्वागत किया। हालांकि, इसे एक सौहार्द यात्रा के रूप में पेश किया जा रहा है क्योंकि तीन दिन पहले शिवकुमार इसी तरह नाश्ते के लिए मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास पर गए थे। शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि वह और मुख्यमंत्री दोनों एक टीम के रूप में मिलकर काम करते रहेंगे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सिद्धारमैया को नाश्ते पर आमंत्रित किया है ताकि कर्नाटक से किए गए वादों को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर चर्चा की जा सके।