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मुख्यमंत्री ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की

मुख्यमंत्री ने वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का शुभारम्भ किया, शुभारम्भ कार्यक्रम में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती  पतये हर हर महादेव से सम्बोधन की शुरुआत की प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में तमिल पावन कार्तिक मास में काशी  तमिल संगमम् के चतुर्थ संस्करण का आयोजन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’  के उनके संकल्प को सुदृढ़ करने और जीवन्त बनाने वाला : मुख्यमंत्री  काशी तमिल संगमम् भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना काशी तमिल संगमम् की थीम ‘लर्न तमिल’ अर्थात ‘तमिल करकलाम, आओ तमिल सीखें’ यह पहल प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कृति और भाषा के  माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी  उ0प्र0 सरकार ने वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में तमिल, कन्नड़, मलयालम,  तेलुगू , मराठी और बंगाली भाषाओं को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की श्री रामेश्वरम धाम, मदुरई और कन्याकुमारी का दर्शन करने के लिए प्रदेश के  श्रद्धालुओं के लिए विशेष यात्रा का आयोजन उ0प्र0 का पर्यटन विभाग करेगा त्रिवेणी संगम के जल से रामेश्वरम के श्री रामनाथ स्वामी और कोडीतीर्थम के जल  से श्री काशी विश्वनाथ के अभिषेक की परम्परा हर माह नियमित रूप से आगे बढ़ रही आई0आई0टी0 मद्रास और बी0एच0यू0 की संयुक्त शिक्षा योजनाएं  बौद्धिक और राष्ट्रीय एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरक कदम अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर परिसर में महर्षि अगस्त्य का  मन्दिर बनकर तैयार, उनकी भव्य प्रतिमा की स्थापना हो चुकी  दक्षिण भारत में श्रीराम की भक्ति का गान करने वाले सन्त त्यागराजा, सन्त पुरन्दर दास और सन्त अरुणाचल कवि की प्रतिमाएं बृहस्पति कुण्ड, अयोध्या में स्थापित हुईं विगत 04 वर्षों में 26 करोड़ से अधिक श्रद्धालु काशी में पधारे भारत एक बहुभाषी देश, हमें एक दूसरे की सांस्कृतिक  विविधताओं का सम्मान करना चाहिए : केन्द्रीय शिक्षा मंत्री मुख्यमंत्री तथा केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने श्री काशी विश्वनाथ  मन्दिर एवं श्री काल भैरव मन्दिर में दर्शन-पूजन किया लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज वाराणसी के नमो घाट पर ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान भी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी0पी0 राधाकृष्णन का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। मुख्यमंत्री जी ने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों से युक्त दण्डक्रम पारायण को बिना किसी रुकावट के 50 दिनों में पूरा करने वाले 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। ज्ञातव्य है कि ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ का आयोजन केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों की भागीदारी से किया जा रहा है। आई0आई0टी0 मद्रास तथा बी0एच0यू0 संगमम् के नॉलेज पार्टनर हैं।  मुख्यमंत्री जी ने वड़क्कम काशी, हर हर महादेव, नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के साथ अपने सम्बोधन की शुरुआत की। उन्होंने उनगालाई काशीयिल वरावेरकिरोम अर्थात काशी में सभी का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में तीनों लोकों में न्यारी, मोक्षदायिनी भगवान शिव की पावन नगरी, आनन्द कानन और सर्वविद्या की राजधानी अविमुक्त क्षेत्र काशी में तमिल कार्तिक मास की पावन अवधि में काशी तमिल संगमम् के चतुर्थ संस्करण का आयोजन हो रहा है। यह ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के उस संकल्प को सुदृढ़ करने और जीवन्त बनाने वाला है, जो प्रधानमंत्री जी ने आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष के अवसर पर देशवासियों को दिया था। मुख्यमंत्री जी ने रामेश्वरम की पावन धरा से पधारे सभी तमिल भाइयों और बहनों का प्रदेश सरकार की ओर से अभिनन्दन किया।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि काशी और तमिल के पुराने सम्बन्धों के केन्द्र में भगवान शिव हैं। इस सम्बन्ध सेतु को आदि शंकराचार्य जी ने भारत के चार कोनों में पवित्र पीठ स्थापित कर आगे बढ़ाया। उत्तर प्रदेश में आपका यह प्रवास काशी की शिव भक्ति, प्रयागराज के पवित्र संगम और अयोध्या में धर्म ध्वजा आरोहण के उपरान्त प्रभु श्रीराम के दिव्य दर्शन का अद्वितीय और आध्यात्मिक सौभाग्य प्रदान करने वाला होगा। यह आयोजन उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक और आध्यात्मिक साझेदारी को सशक्त करते हुए भारत के उज्ज्वल भविष्य के नए द्वार खोल रहा है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस बार काशी तमिल संगमम् की थीम ‘लर्न तमिल’ अर्थात ‘तमिल करकलाम, आओ तमिल सीखें’ है। यह पहल प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कृति और भाषा के माध्यम से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और सुदृढ़ करेगी। तमिल करकलाम कार्यक्रम तमिल भाषा सीखने के लिए हमारे छात्रों को एक नया प्लेटफार्म उपलब्ध करा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश सरकार ने वोकेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में तमिल, कन्नड़, मलयालम, तेलुगू , मराठी और बंगाली भाषाओं को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की है। राज्य के वोकेशनल एजुकेशन के छात्र अपनी रुचि के अनुसार किसी एक भाषा का चयन करेंगे, सरकार उसका पूरा खर्च उठाएगी।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस आयोजन का महत्व इस वर्ष तेनकाशी, तमिलनाडु से प्रारम्भ हो रही उस यात्रा से और बढ़ जाता है, जो सड़क मार्ग से कार रैली के माध्यम से 2000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा तय करते हुए काशी की पवित्र धरती पर पहुंचने वाली है। यह यात्रा पांड्य वंश के महान शासक हरिकेसरी परिक्किराम पांड्यिम की यात्रा की पुनःस्मृति है। शिव मन्दिर और तेनकाशी की कथा सांस्कृतिक इतिहास में अंकित है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में चल रहा काशी तमिल संगमम् अभियान ज्ञान, साधना, सांस्कृतिक एकता और हमारी साझा भारतीय सभ्यता को एक नई ऊंचाई पर स्थापित करेगा। ‘अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका। पुरी द्वारावती चैव सप्तैते मोक्षदायकाः।’ यह सभी तीर्थ स्थल मोक्ष प्रदान करने वाले पावन तीर्थ हैं। महर्षि अगस्त्य द्वारा रचित आदित्य हृदय स्त्रोत भगवान सूर्य की स्तुति है, जिसे उन्होंने रावण से युद्ध करने से पहले भगवान श्री राम को सुनाया था। महर्षि अगस्त्य, आदि गुरु शंकराचार्य, संत तिरुवल्लुवर, जगतगुरु रामानुजाचार्य, सर्वपल्ली डॉ0 राधाकृष्णन ने दक्षिण की धरा से निकलकर सम्पूर्ण भारत में ज्ञान का प्रकाश स्थापित किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि नयनार और अलवार की शैव-वैष्णव भक्ति परम्परा तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक समृद्धि को दर्शाती है। कैलाश, काशी तथा चिदम्बरम अपराजित शिव भक्ति के प्रतीक … Read more

इतिहास में नया अध्याय: दरगाह में खादिमों के लिए शुरू हुई लाइसेंस प्रक्रिया

अजमेर अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की विश्वप्रसिद्ध दरगाह में जल्द ही केवल लाइसेंसधारी खादिम ही जायरीन को जियारत करा सकेंगे। केंद्र सरकार के निर्देश पर दरगाह कमेटी ने 75 वर्षों में पहली बार खादिमों के लाइसेंस की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। सोमवार को दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने इसका आधिकारिक विज्ञापन जारी किया। इसके लिए 5 जनवरी 2026 तक आवेदन जमा करवाए जा सकेंगे। नाजिम ने बताया कि यह प्रक्रिया केवल दरगाह ख्वाजा साहब से संबद्ध खादिम समुदाय सैयद जादगान एवं शेख जादगान के लिए लागू की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों, केंद्र व राज्य सरकारों के निर्देशों, जिला प्रशासन की रिपोर्टों तथा दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण की सिफारिशों के अनुपालन में लाइसेंस प्रणाली लागू की जा रही है। दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11(एफ) में खादिमों के कर्तव्यों, पहचान, मानक प्रक्रियाओं, सुविधाओं और जायरीन के हित सुनिश्चित करने के विशेष प्रावधान हैं, जिनके अनुसार इस पूरी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा रहा है। दरगाह कमेटी ने पात्र खादिमों से आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं। आवेदन-पत्र, नियम और शर्तें कमेटी की वेबसाइट gharibnawaz.minorityaffairs.gov.in से डाउनलोड की जा सकती हैं। इच्छुक आवेदक नाजिम कार्यालय से भी आवेदन प्राप्त कर सकते हैं। पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र के साथ आवश्यक दस्तावेजों और स्वप्रमाणित प्रतियों को 5 जनवरी 2026 तक कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होगा। यह पहली बार है जब खादिमों को लाइसेंस देने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई है। दरगाह कमेटी के गठन के बाद से अब तक तीन एडमिनिस्ट्रेटर और 37 नाजिम अपने-अपने कार्यकाल पूरे कर चुके हैं, लेकिन इस दौरान किसी ने भी लाइसेंस प्रक्रिया को लागू नहीं किया। कमेटी के पहले एडमिनिस्ट्रेटर अब्दुल रऊफ सिद्दीकी 9 जनवरी 1954 को नियुक्त हुए थे। उनके बाद अनीस मुज्तबा जुबैरी और आले मोहम्मद शाह यूपीएससी 1956 तक एडमिनिस्ट्रेटर रहे। बाद में एडमिनिस्ट्रेटर की जगह नाजिम का पद सृजित किया गया और 1 मार्च 1956 को आले मोहम्मद शाह को ही पहला नाजिम नियुक्त किया गया। मार्च 1956 से मार्च 2025 तक 37 नाजिम दरगाह कमेटी का कार्यभार संभाल चुके हैं, जबकि 28 अध्यक्ष भी अपनी सेवा दे चुके हैं। अंतिम सदर सैयद शाहिद हुसैन रिजवी 4 जून 2023 तक पद पर रहे। कई कार्यकालों में खादिमों को लाइसेंस देने की चर्चा और प्रस्ताव बने, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब वर्तमान नाजिम, बीएसएफ से रिटायर्ड मोहम्मद बिलाल खान के प्रयासों से यह ऐतिहासिक कदम संभव हो पाया है। लाइसेंस के मुद्दे पर दरगाह नाजिम ने दो बार खादिमों के साथ बैठक बुलाने की कोशिश की। 24 और 27 नवंबर को आयोजित बैठकों में एक भी खादिम उपस्थित नहीं हुआ। दूसरी ओर, खादिम मोहल्ले में अंजुमन सदर की अध्यक्षता में खादिम समुदाय ने अलग बैठक की और मुद्दे पर चर्चा की। नए बदलाव के बाद दरगाह में जियारत व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह कदम जायरीन की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने की दिशा में दरगाह प्रशासन का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

पौष मास 5 दिसंबर से आरंभ: इस महीने में विवाह रुक जाते हैं, क्या है धार्मिक कारण?

  हिंदू कैलेंडर का दसवां महीना पौष है, जिसे पूस माह भी कहते हैं. मार्गशीर्ष पूर्णिमा के बाद यह महीना शुरू होता है और इसके बाद माघ माह शुरू हो जाता है. पंचांग के अनुसार, इस बार यह माह 5 दिसंबर 2025 से शुरू होने जा रहा है. फिर अगले साल 3 जनवरी 2025 को इसका समापन होगा. यह महीना वैसे तो धार्मिक और ज्योतिष की दृष्टि से खास है. लेकिन इसमें कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. आइए जानते हैं कि पौष मास में विवाह क्यों नहीं होता है. पौष मास का महत्व पौष मास को सूर्य देव का महीना कहा जाता है. इस महीने में सूर्य देव की उपासना करना विशेष महत्व है, जिससे ऊर्जा, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. साथ ही, पौष मास महीना पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए बहुत शुभ है. इस दौरान किए गए तर्पण से पितरों को संतुष्टि और शांति मिलती है, जिससे पितृ दोष दूर होता है. पौष माह में मध्य रात्रि की साधना तुरंत फलदायी मानी गई है. पौष मास में शुभ कार्य क्यों नहीं होते हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष महीने में विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. इसका मुख्य कारण है सूर्य का धनु राशि में प्रवेश करना. सूर्य के धनु राशि में गोचर के कारण पौष मास अशुभ माना जाता है, जो खरमास कहलाता है. खरमास 1 महीने तक चलता है और इस दौरान सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन आदि नहीं किए जाते हैं. खरमास का समय देवताओं के लिए विश्राम काल भी माना जाता है. पौष महीना अशुभ क्यों है? सूर्य का प्रभाव कम: पौष महीने में सूर्य धनु राशि में होते हैं, जो ज्योतिष में अशुभ माना जाता है. खरमास: सूर्य की इस स्थिति के कारण इस पूरे महीने को खरमास या मलमास कहा जाता है. छोटे दिन और लंबी रातें: खरमास के दौरान सूर्य दक्षिणायन होते हैं, जिससे दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं. मांगलिक कार्यों पर रोक: सूर्य के शुभ प्रभाव में कमी आने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक और शुभ कार्य इस महीने में करना वर्जित होता है. पौष महीने में क्या करना शुभ है? आध्यात्मिक कार्य: पौष महीने में पूजा-पाठ, हवन और आध्यात्मिक कार्यों को करना बहुत शुभ माना जाता है. तीर्थ यात्रा: पौष के महीने में किसी तीर्थ स्थल की यात्रा करना भी बहुत फलदायी माना जाता है. सूर्य की पूजा: इस महीने में रोज तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करना और सूर्य पूजा करना लाभकारी होता है. दान-पुण्य: पौष महीने में दान-पुण्य और स्नान का विशेष महत्व माना गया है. पौष मास में क्या नहीं करना चाहिए?     पौष मास में शादी, गृह प्रवेश, मुंडन और जनेऊ जैसे शुभ कार्यों से बचना चाहिए.     पौष में शराब, मांस और किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए.     पौष के महीने में भारी और गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए.     पौष मास में उड़द और मसूर की दाल, मूली, बैंगन, फूलगोभी और तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए.     पौष के महीने में नमक का सेवन कम करना चाहिए या इससे बचना चाहिए.     पौष मास में बहुत ज्यादा चीनी और तेल या घी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.  

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहल: झारखंड स्वास्थ्य मंत्री खुद पहुँचे OPD में

रांची  झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारीइन दिनों एक्शन मोड में है और राज्य के अलग-अलग अस्पतालों का निरीक्षण कर रहे हैं और ओपीडी वार्ड में खुद ही बैठकर मरीजों का भी इलाज कर रहे हैं।        आज जमशेदपुर में OPD का लेंगे जायजा डॉक्टर अंसारी ने आज कहा कि आज मैं जमशेदपुर में रहूंगा। ओपीडी की सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण करूंगा और यह सुनिश्चित करूँगा कि किसी भी मरीज को इलाज में ज़रा भी परेशानी न हो। मैं स्वयं स्थल पर मौजूद रहकर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को पूरा सहयोग दूंगा। बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ जनता तक पहुँचाना-इसी मिशन के लिए हम पूरी तरह संकल्पित हैं।' स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि नई उम्मीद, नया विश्वास – जनता से मिले संकल्प को जिला स्वास्थ्य व्यवस्था के ज़मीनी स्तर तक ले जाना हमारा प्रमुख लक्ष्य है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दूरद्दष्टि और निष्ठा का परिणाम है कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था आज नई दिशा में आगे बढ़ रही है।

Z-Plus सुरक्षा विवाद: अभय चौटाला की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र को नोटिस जारी

चंडीगढ़  Z Plus Security पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इंडियन नेशनल लोकदल नेता अभय सिंह चौटाला की जेड-प्लस या जेड श्रेणी की केंद्रीय सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर मंगलवार को केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया। जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने मामले को गंभीर बताते हुए अगली सुनवाई 16 दिसंबर तय की। अदालत ने कहा कि चौटाला द्वारा जताए गए खतरे और राज्य की कथित ‘निष्क्रियता’ पर विस्तृत जवाब आवश्यक है। याचिका में कहा गया है कि आईएनएलडी के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की हत्या के बाद चौटाला को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय गैंगस्टरों से विश्वसनीय धमकियां मिली हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन धमकियों की जानकारी बार-बार राज्य सरकार को दी गई, लेकिन ‘कोई कार्रवाई नहीं हुई’। चौटाला के अनुसार, न तो सुरक्षा आकलन किया गया, न कोई समिति गठित हुई और न ही उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी गई। उन्होंने अदालत को बताया कि स्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं और खतरा ‘गंभीर और बढ़ता हुआ’ है। राठी हत्याकांड पर मुखर रुख के बाद खतरा बढ़ा याचिका के अनुसार, अभय चौटाला ने राठी हत्याकांड के बाद सबसे पहले खुलकर सीबीआई जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने यह मुद्दा 27 फरवरी 2024 को विधानसभा के बजट सत्र में उठाया और अगले ही दिन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि राठी की हत्या संगठित अपराध की ओर संकेत करती है।चौटाला का कहना है कि अपराध जगत के खिलाफ उनके लगातार रुख और सरकार पर दबाव की वजह से वे कई गैंगस्टर नेटवर्क के निशाने पर आ गए हैं। राजनीतिक प्रोफ़ाइल और सक्रिय भूमिका को बताया कारण एडवोकेट संदीप गोयत के माध्यम से दायर याचिका में बताया गया कि चौटाला वर्ष 2000 से लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। वे कई बार एलनाबाद से विधायक चुने गए और नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। याचिका में कहा गया कि किसान आंदोलन से लेकर कानून-व्यवस्था और राठी हत्याकांड तक, चौटाला ने कई संवेदनशील मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई है। उनकी ‘निर्भीक और स्पष्ट’ राजनीतिक कार्यशैली उन्हें ‘अपराधी गिरोहों के निशाने पर’ रखती है। परिवार भी खतरे में, आर्टिकल 21 का हवाला अभय चौटाला ने दावा किया है कि न सिर्फ वे, बल्कि उनका परिवार भी बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के तहत राज्य का दायित्व है कि वह नागरिक को पर्याप्त सुरक्षा दे, खासकर तब जब खतरा ज्ञात हो और उसके प्रमाण मौजूद हों। चौटाला ने हाई कोर्ट से निवेदन किया है कि उन्हें केंद्रीय एजेंसी के माध्यम से जेड-प्लस या जेड श्रेणी की चौबीस घंटे सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। ‘राज्य ने अनुरोधों पर विचार तक नहीं किया’ याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई बार भेजे गए ‘स्पष्ट, तात्कालिक और विशिष्ट’ अनुरोधों के बावजूद राज्य सरकार ने सुरक्षा के आकलन पर विचार तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस लगातार अनदेखी के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जहां अब केंद्र और राज्य दोनों को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

MP में 76 हजार टीबी केस सामने आए, 2025 का लक्ष्य कमजोर; इंदौर में 1,833 मौतों ने बढ़ाई चिंता

इंदौर   प्रधानमंत्री द्वारा साल 2025 तक टीबीमुक्त भारत बनाने की घोषणा के सात वर्ष बाद भी इंदौर में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। 2018 में अभियान शुरू होने से अब तक इंदौर में 76,549 नए टीबी मरीज सामने आ चुके हैं, जो यह संकेत देता है कि लक्ष्य काफी पीछे छूट गया है। हर साल औसतन 7–8 हजार नए रोगी मिल रहे हैं। इनमें से 1,833 मरीजों की मौत भी दर्ज की जा चुकी है, जो अभियान की सफलता पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपलब्ध इलाज और साधनों के बावजूद मौतों का यह आंकड़ा बेहद गंभीर है। देशभर में बढ़ता टीबी का बोझ, इंदौर का योगदान भी बड़ा इंदौर सहित पूरे देश में टीबीमुक्त भारत अभियान चलने के बावजूद राष्ट्रीय टीबी आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखी गई है। वर्ष 2021 में जहां 21 लाख मरीज थे, वहीं 2022 में 28 लाख, 2023 में 25 लाख, 2024 में 26 लाख और 2025 में अब तक 26 लाख मरीज दर्ज किए जा चुके हैं। डाक्टरों की मानें तो वर्ष के अंत तक यह संख्या 30 लाख तक पहुंच सकती है। इन बढ़ते आंकड़ों में इंदौर का योगदान भी बड़ा है, क्योंकि यहां हर वर्ष हजारों मरीज सामने आ रहे हैं। उपलब्ध दवाएं और सुविधा केंद्र होने के बावजूद 1,833 मौतें अभियान को लगभग असफल साबित कर रही हैं। टीबी जांच के 44 केंद्र सक्रिय, इलाज और आर्थिक सहायता भी उपलब्ध इंदौर में सामान्य टीबी की जांच 44 माइक्रोस्कोपी सेंटरों में की जाती है। अभियान शुरू होने से अब तक 76,549 सामान्य टीबी मरीज मिले हैं। जांच से लेकर इलाज तक का सारा खर्च सरकार वहन करती है। साथ ही उपचार अवधि के दौरान मरीजों को 6 महीने तक हर माह 1,000 रुपये की सहायता भी दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यदि मरीज बिना नागा 6 महीने तक नियमित दवा लेते रहें तो वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। इसके बावजूद लापरवाही के कारण कई मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। एमडीआर टीबी के 1,745 मरीज, सबसे ज्यादा मौतें इसी श्रेणी में सामान्य टीबी के अतिरिक्त इंदौर में 1,745 एमडीआर (मल्टीड्रग रेजिस्टेंस) मरीज भी मिले हैं। यह टीबी का सबसे खतरनाक रूप माना जाता है, जो आमतौर पर उन्हीं मरीजों में विकसित होता है जो बीच में दवा छोड़ देते हैं या इलाज पूरा नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी से होने वाली कुल मौतों में सबसे अधिक मौतें एमडीआर टीबी के कारण होती हैं। साल 2018 से 2025 तक मिलने वाले सामान्य और एमडीआर मरीजों के आधिकारिक आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि बीमारी पर रोक नहीं लग सकी। सरकार का उद्देश्य यह है कि कोई भी मरीज बिना जांच और बिना इलाज के न रहे, न कि शहर में टीबी पूरी तरह खत्म हो। बड़ी संख्या में ठीक हो रहे मरीज जिला क्षय अधिकारी डाक्टर शैलेंद्र जैन ने बताया कि टीबीमुक्त भारत अभियान का मतलब यह नहीं है कि इंदौर में एक भी मरीज नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी मरीज बिना इलाज और बिना जांच के न रहे। इसके लिए हम हर तरह की सुविधा दे रहे हैं। बड़ी संख्या में मरीज ठीक हो रहे हैं और भविष्य में जल्द ही इस पर पूरी तरह से लगाम कसने में भी मदद मिलेगी।  

सेविंग अकाउंट पर बड़ा बदलाव, RBI ने सभी बैंकों को 1 लाख तक समान ब्याज दर लागू करने के निर्देश दिए

नई दिल्ली देश में सेविंग अकाउंट में पैसे जमा करने वाले लाखों लोगों के लिए RBI ने एक बड़ा फैसला लिया है. कई लोग यह सोचकर परेशान रहते थे कि किस बैंक में खाता खुलवाएं, किस बैंक में ब्याज ज्यादा मिलेगा या कौन सा बैंक सुरक्षित है. अब RBI के नए नियम ने इस उलझन को काफी हद तक खत्म कर दिया है. क्योंकि अब 1 लाख रुपये तक की जमा राशि पर पूरे देश के सभी कमर्शियल बैंक एक जैसा ब्याज देंगे. यानी चाहे आपका खाता SBI में हो, कैनरा बैंक में या किसी और बैंक में अब ब्याज में फर्क नहीं पड़ेगा. RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI ने सभी कमर्शियल बैंकों को निर्देश दिया है कि सेविंग अकाउंट  में 1 लाख रुपये तक जो भी रकम जमा रहेगी, उस पर सभी बैंक एक समान ब्याज दर लागू करेंगे. अब तक हर बैंक अपने हिसाब से अलग-अलग ब्याज देता था, जिसकी वजह से ग्राहकों में कन्फ्यूजन रहता था. लेकिन नए नियम के बाद इस रकम तक ब्याज दर पूरी तरह एक जैसी होगी, जिससे आम ग्राहको को सुविधा होगी. न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर ब्याज नहीं आरबीआई ने बचत, चालू बैंक खाते समेत सावधि जमा (एफडी) और ओवरड्यू एफडी समेत अन्य नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। इसके मुताबिक, बैंक द्वारा तय न्यूनतम अवधि से पहले एफडी तोड़ने पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। आरबीआई ने एफडी की न्यूनतम मानक अवधि सात दिन की है, लेकिन बैंक अपने मुताबिक इसे अधिक न्यूनतम अवधि तय कर सकते हैं। नए नियमों में न्यूनतम अ‌वधि पूरी होने पर एफडी तोड़ी जाती है तो बैंक आपको वही ब्याज देगा, जो उस अवधि के लिए लागू है। यानी जितने समय तक पैसा बैंक में रहा, इस अ‌वधि का ही ब्याज मिलेगा। पहले से तय तय की गई ऊंची ब्याज दर लागू नहीं होगी। यही नहीं, नए नियमों में यह भी जोड़ा गया है कि अगर किसी एफडी की मेच्योरिटी पीरियड गैर-कारोबारी दिन पर पड़ती है, तो ग्राहक को उस दिन का भी ब्याज मिलेगा और बैंक अगले कार्यदिवस को भुगतान करेगा। बैंकों को स्पष्ट करने होंगे नियम नए नियमों के अनुसार, अब बैंकों को एफडी से जुड़े सभी नियम ग्राहकों को पहले से स्पष्ट रूप से बताने होंगे। मसलन, एफडी की न्यूनतम अ‌वधि की सीमा कितनी है। यदि इससे पहले एफडी तोड़ने हैं तो कितना जुर्माना लगेगा। जुर्माना की रकम बैंक खुद तय कर सकते हैं। सभी शाखाओं में एक जैसी दरें सभी शाखाओं में एफडी की दरें एक ही तरह की लागू होंगी। ग्राहकों और बैंक के बीच ब्याज दर पर कोई मोलभाव नहीं होगा। हालांकि, बड़े जमा यानी तीन करोड़ रुपये या उससे अधिक की एफडी पर अलग ब्याज दरें लागू हो सकती हैं। बैंक यह नहीं कर सकेंगे आरबीआई ने नए नियमों के तहत स्पष्ट किया है कि जमा कराने पर लॉटरी, इनाम, विदेश यात्रा जैसी स्कीम नहीं दे सकेंगे। जमा के बदले किसी एजेंट को अवैध कमीशन नहीं दे सकेंगे। सिर्फ कंपाउंड ब्याज दिखाकर भ्रामक विज्ञापन भी नहीं करेंगे। कुछ संस्थाओं और राजनीतिक पार्टियों को सेविंग अकाउंट खोलने की अनुमति नहीं। ये नियम भी लागू     बैंक कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मचारी और उनके कुछ परिजनों को सावधि जमा व बचत खाते पर एक फीसदी अतिरिक्त ब्याज दिया जा सकता है।     वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक चाहे तो अलग और अधिक ब्याज दर वाली एफडी स्कीम चला सकते हैं।     टाइम डिपॉजिट (टीडी) मैच्योर होने के बाद पैसे न निकालने पर बचत खाते की ब्याज दर या टीडी की मूल ब्याज दर यानी दोनों में से कम ब्याज वहीं मिलेगा।     चालू खाते पर सामान्य रूप से कोई ब्याज नहीं मिलेगा। लेकिन खाता धारक की मृत्यु होने की स्थिति में मृत्यु की तारीख से भुगतान तक बचत खाते वाली दर से ब्याज मिलेगा।     जमा खातों पर ब्याज दर से जुड़े पुराने सभी दिशानिर्देश रद्द कर दिए गए हैं। अब बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों को लेकर एकीकृत और सरल नियमों को लागू किया गया है। एनआरई और एनआरओ सावधि खाता अनिवासी भारतीयों के लिए भी आरबीआई ने निर्देश जारी किए हैं। एनआरआई जमा पर ब्याज दर घरेलू सावधि जमा से अधिक नहीं हो सकती। एनआरआई की सावधि जमा की न्यूनतम अवधि एक वर्ष होगा। जबकि एनआरओ की सात दिन होगी। एनआरआई/एनआरओ को जमाओं पर वरिष्ठ नागरिक या बैंक स्टाफ को अतिरिक्त ब्याज नहीं मिलेगा। एनआरई खाता अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) के लिए एक प्रकार का बैंक खाता है जो उन्हें अपनी विदेशी आय को भारत में रखने और भारतीय रुपये में बदलने की सुविधा देता है। जबकि एनआरओ खाता एक अनिवासी साधारण खाता है जो अनिवासी भारतीयों को भारत में अर्जित आय जैसे कि किराया, लाभांश और पेंशन को प्रबंधित करने की अनुमति देता है। SBI हो या Canara… अब सबका ब्याज एक जैसा! RBI का यह नियम सभी बैंकों पर लागू है.भले ही  देश का सबसे बड़ा पब्लिक सेक्टर बैंक SBI है या Canara बैंक बचत खाते में 1 लाख तक की राशि पर ब्याज अब सभी जगह समान मिलेगा. इससे छोटे ग्राहकों का फायदा होगा, क्योंकि  वे अब बैंक चुनने का फैसला केवल सर्विस और सुविधा देखकर ले सकेंगे, ब्याज दरों के अंतर पर नहीं. 1 लाख से ज्यादा रकम पर क्या होगा? नया नियम केवल 1 लाख रुपये तक की रकम पर लागू होगा. इस सीमा से ऊपर जमा रकम पर बैंक अपनी अलग ब्याज दर तय कर सकते हैं. यानी अगर किसी के खाते में 1 लाख से ज्यादा बैलेंस है, तो उस पर ब्याज पहले की तरह बैंक की अपनी दरों के अनुसार मिलेगा. ब्याज की गणना कैसे होगी? RBI ने यह भी साफ किया है कि ब्याज की गणना हर दिन के अंत में आपके खाते में जितनी राशि है, उसके आधार पर होगी. इससे फायदा यह है कि जिस दिन आपके खाते में बैलेंस ज्यादा होगा, उस दिन ज्यादा ब्याज मिलेगा. आपके खाते में कब आएगा ब्याज ? बैंकों को निर्देश दिया गया है कि बचत खाते का ब्याज कम से कम तीन महीने में एक बार खाते में जरूर जमा किया जाए. इससे ग्राहकों को समय-समय पर ब्याज मिल जाएगा और यह … Read more

रतलाम मंडल के यात्रियों के लिए बुरी खबर, 60 दिनों के ट्रैक ब्लॉक से कई जरूरी ट्रेनें प्रभावित

रतलाम मुंबई सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर ट्रैक नवीनीकरण कार्य के चलते 23 नवंबर, 2025 से 60 दिनों का ब्लॉक लिया जा रहा है। इस ब्लॉक के कारण पश्चिम रेलवे की कई ट्रेनें प्रभावित होंगी। इस अवधि के दौरान, पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया जाएगा या आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा। यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए रेलवे ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं। ये ट्रेन हो रहीं प्रभावित प्रभावित होने वाली ट्रेनों में निम्नलिखित शामिल हैं: ट्रेन संख्या 22210 हजरत निजामुद्दीन – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर तथा मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 09086 इंदौर – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होगी और दादर-मुंबई सेंट्रल के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। ये ट्रेन भी रहेंगी रद्द अन्य प्रभावित ट्रेनों में ट्रेन संख्या 09076 काठगोदाम – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस और ट्रेन संख्या 09186 कानपुर अनवरगंज – मुंबई सेंट्रल एक्सप्रेस शामिल हैं। ये दोनों ट्रेनें भी दादर स्टेशन पर शॉर्ट-टर्मिनेट होंगी तथा दादर और मुंबई सेंट्रल स्टेशनों के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेंगी। मेंटिनेंस की वजह से ये रूट भी प्रभावित उत्तर पश्चिम रेलवे के चूरू-आसलू-दुधवाखारा स्टेशन के चूरू-सादुलपुर सेक्शन में पैच डबलिंग और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के कारण पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। ब्लॉक कार्य के चलते कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है और कुछ स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव भी दिए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए प्रभावित ट्रेनों का विवरण जारी किया गया है। इन ट्रेनों का बदला गया रूट 20497 रामेश्वरम – फिरोजपुर एक्सप्रेस: 06, 13, 20 और 27 जनवरी, 2026 को रामेश्वरम से चलने वाली यह ट्रेन सीकर-लोहारू-सादुलपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे झुंझुनू और लोहारू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 20498 फिरोजपुर – रामेश्वरम एक्सप्रेस: 24 जनवरी, 2026 को फिरोजपुर से चलने वाली यह ट्रेन सादुलपुर-लोहारू-सीकर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। इसे लोहारू और झुंझुनू स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव दिया गया है। 04711 बीकानेर – बांद्रा टर्मिनस स्पेशल: 21 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04712 बांद्रा टर्मिनस – बीकानेर स्पेशल: 22 जनवरी, 2026 को बांद्रा टर्मिनस से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन जयपुर – मेरटा रोड बाईपास – बीकानेर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। फुलेरा, मकराना, डेगाना, मेरटा रोड बाईपास, नागौर और नोखा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे। 04715 बीकानेर – साईंनगर शिर्डी स्पेशल: 24 जनवरी, 2026 को बीकानेर से चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन बीकानेर, मेरटा रोड बाईपास – जयपुर के परिवर्तित मार्ग से चलेगी। नोखा, नागौर, मेरटा रोड बाईपास, डेगाना, मकराना और फुलेरा स्टेशनों पर इसके अतिरिक्त ठहराव होंगे।  

भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार से शुक्रवार, दोपहर 1 से 3 बजे तक दो मंत्री करेंगे कार्यकर्ताओं से मुलाकात

भोपाल  कार्यकर्ताओं को क्षेत्र के काम से अब मंत्रियों से मिलने के लिए बंगले या मंत्रालय के चक्कर नहीं लगाने होंगे। सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश भाजपा कार्यालय में दो मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक बैठेंगे। कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्या का यथासंभव समाधान करेंगे। सत्ता और संगठन में समन्वय के लिए गठित समन्वय टोली की बैठक में हुए निर्णय के बाद इसकी शुरुआत भी सोमवार एक दिसंबर से हो गई। उप मुख्यमंत्री और राज्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से किया संवाद उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कार्यालय में कार्यकर्ताओं से संवाद किया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की उपलब्धता से संगठन और शासन के बीच समन्वय और मजबूत होगा तथा समस्याओं का समाधान त्वरित, प्रभावी और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। यह प्रयास संगठनात्मक गति, कार्यकर्ता संपर्क और समस्या-निराकरण को नई दिशा देगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा वहीं, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मंत्री-दिन प्रणाली का उद्देश्य कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है। सोमवार को हमने और गौतम टेटवाल ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुना और समाधान भी कराया। प्राप्त आवेदनों को सूचीबद्ध कर संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जिन समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं हो सका, उनका फालोअप किया जाएगा। समाधान होने पर कार्यकर्ताओं को अवगत भी कराया जाएगा। यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी कार्यकर्ताओं से मिलने की यह व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। केवल बड़े आयोजनों या विशेष कार्यक्रमों की स्थिति में ही इसे समायोजित किया जाएगा। इस निर्णय से भाजपा कार्यकर्ता भी बहुत खुश हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए मंत्री से मिलना जरूरी होता है। इस व्यवस्था से अब सीधे मंत्री से मिलकर क्षेत्र की समस्या उठाई भी जा सकती है और उसका समाधान भी किया जा सकेगा। कब कौन मंत्री रहेगा कार्यालय में उपलब्ध     2 दिसंबर- राकेश सिंह, दिलीप अहिरवार     3 दिसंबर- विश्वास सारंग, लखन पटेल     4 दिसंबर- कैलाश विजयवर्गीय, प्रतिमा बागरी     5 दिसंबर- विजय शाह, नरेंद्र शिवाजी पटेल  

क्रेडिट स्कोर अपडेट होंगे हर हफ्ते, RBI के नए नियम से बढ़ सकती है लोन सुविधा

नई दिल्ली. अगर आप लोन लेना चाहते हैं या EMI भरते हैं तो आरबीआई के नए प्रस्तावित नियम आपके लिए गेमचेंजर साबित होंगे. अभी तक क्रेडिट स्कोर महीने में सिर्फ दो बार अपडेट होता था, लेकिन अप्रैल 2026 से यह हर 7 दिन में अपडेट हो सकता है. इससे आपका क्रेडिट प्रोफाइल (Credit Profile), लोन ब्याज (Loan Interest Rate) और क्रेडिट कार्ड लिमिट (Credit Card Limit) सबकुछ तेजी से बदल सकेगा.  भारत में क्रेडिट स्कोर से जुड़ी व्यवस्था जल्द ही बड़े बदलाव से गुजरने वाली है. RBI ने एक महत्वपूर्ण मसौदा जारी किया है, जिसके तहत अब क्रेडिट स्कोर हर हफ्ते अपडेट किया जाएगा. अभी स्कोर महीने में दो बार अपडेट होता है, लेकिन अप्रैल 2026 से यह प्रक्रिया और तेज हो जाएगी. इससे न सिर्फ उधारकर्ताओं के लिए लोन और क्रेडिट कार्ड लेना आसान होगा, बल्कि बैंकों को भी अधिक सटीक और अप-टू-डेट डेटा मिलेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव भारतीय क्रेडिट इकोसिस्टम को पहले से अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा. आरबीआई की नई ड्राफ्ट गाइडलाइंस (RBI Draft Directions) के मुताबिक अब क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां महीने में 5 दिन अपडेट जारी करेंगी. यानी अगर किसी ने बकाया क्लीयर किया, क्रेडिट कार्ड बंद किया, EMI चुकाई या रिपेमेंट हिस्ट्री सुधरी, तो इसका असर उसी हफ्ते क्रेडिट स्कोर (Credit Score Update) में दिखने लगेगा. इससे लाखों उधारकर्ताओं को तेज मंजूरी, कम ब्याज और ज्यादा पारदर्शिता मिलेगी. अब महीने भर नहीं, हर हफ्ते रिफ्रेश होगा आपका क्रेडिट डेटा RBI के Credit Information Reporting Amendment, 2025 के मसौदे के अनुसार, CRIF High Mark जैसी Credit Information Companies (CICs) को हर महीने की 7, 14, 21, 28 तारीख और माह के अंतिम दिन डेटा रिफ्रेश करना होगा. चाहें तो बैंक और NBFC के साथ समझौते की स्थिति में इससे ज्यादा बार भी अपडेट किया जा सकता है. बैंकों को महीने के अंत का पूरा डेटा तीन दिनों में भेजना होगा और हर साप्ताहिक अपडेट के लिए केवल नया या बदला हुआ डेटा दो दिनों के भीतर जमा करना होगा. इसमें नए खाते, बंद खाते, रिपेमेंट अपडेट, डेमोग्राफिक बदलाव और SMA जैसी क्लासिफिकेशन की सारी जानकारी शामिल होगी. समय सीमा का पालन न करने पर CICs को RBI के DAKSH पोर्टल पर रिपोर्ट करना होगा. तेज अपडेट से उधारकर्ताओं को तुरंत मिलेगा फायदा इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उधारकर्ताओं यानी Borrowers पर पड़ेगा. अभी तक क्रेडिट स्कोर में सुधार दिखने में दो हफ्ते से ज्यादा लग जाते थे, लेकिन अब साप्ताहिक अपडेट से यह सुधार जल्दी नजर आने लगेगा. कोई कर्ज चुकाया, क्रेडिट कार्ड बिल समय पर भरा या कोई गलती सुधारी- इनका असर स्कोर में तेजी से झलकेगा. इससे लोन अप्रूवल की संभावना बढ़ेगी और ब्याज दरें भी कम हो सकती हैं क्योंकि कई बैंक स्कोर-आधारित प्राइसिंग अपनाते हैं. वहीं, गलत रिपोर्टिंग या डेटा मिसमैच जैसी समस्याएं भी जल्दी पकड़ में आएंगी, जिससे विवादों और शिकायतों में कमी आ सकती है. बैंकों को मिलेगा नया टूल, जोखिम आंकना होगा आसान साप्ताहिक रिपोर्टिंग से बैंकों को भी बड़ा लाभ मिलेगा क्योंकि उन्हें ताजा और सटीक उधारकर्ता डेटा मिल सकेगा. इससे बैंक बेहतर Underwriting कर पाएंगे, यानी कौन-सा ग्राहक कितना जोखिम वाला है, इसका मूल्यांकन अधिक भरोसेमंद ढंग से हो सकेगा. नए डेटा से बैंक लोन की ब्याज दर, राशि और अवधि जैसे तत्वों को अधिक प्रभावी ढंग से तय कर सकेंगे. इसके अलावा ऋण गुणवत्ता पर भी बेहतर निगरानी रख पाएंगे. RBI का यह कदम भारतीय क्रेडिट सिस्टम को वास्तविक समय डेटा की दिशा में आगे बढ़ाता है, जिससे भविष्य में Daily या Real-Time Updates भी संभव हो सकते हैं.