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UPPSC भर्ती 2025: 513 लेक्चरर पदों पर आवेदन शुरू, तकनीकी स्नातकों के लिए बड़ा मौका

लखनऊ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा-2025 के तहत पॉलीटेक्निक संस्थानों में लेक्चरर और अन्य समकक्ष पदों के लिए 513 रिक्तियों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 2 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार जल्द से जल्द आवेदन करके इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। यह भर्ती कुल 513 पदों के लिए हो रही है। इन पदों में मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, कंप्यूटर, आर्किटेक्चर, फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित जैसे विभिन्न विषय शामिल हैं। आवेदन शुरू होने की तिथि: 2 दिसंबर 2025 आवेदन और फीस जमा करने की अंतिम तिथि: 2 जनवरी 2026 आवेदन में सुधार की अंतिम तिथि: 9 जनवरी 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि से पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इन पदों पर आवेदन करने के लिए अलग-अलग विषयों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता भी अलग-अलग निर्धारित की गई है। इंजीनियरिंग/टेक्निकल ब्रांच के लेक्चरर: उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ बी.ई./बी.टेक. या समकक्ष डिग्री होनी चाहिए। कुछ पदों के लिए मास्टर डिग्री भी आवश्यक है। नॉन-इंजीनियरिंग (साइंस एवं ह्यूमैनिटीज) लेक्चरर: संबंधित विषय में फर्स्ट क्लास के साथ मास्टर डिग्री (जैसे फिजिक्स, केमिस्ट्री, अंग्रेजी, गणित)। आयु सीमा: उम्मीदवारों की आयु 1 जुलाई 2025 तक 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया और वेतन लेक्चरर के पदों पर चयन मुख्य रूप से तीन चरणों में होगा। लिखित परीक्षा : यह पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इंटरव्यू: लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को 100 अंकों के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: अंतिम चयन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के तहत आकर्षक वेतनमान दिया जाएगा। शुरुआती वेतन लगभग 56,100 रुपये से 57,700 रुपये प्रति माह (पे लेवल 9A/10) तक होगा, जिसके साथ अन्य सरकारी भत्ते भी मिलेंगे। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ें ताकि वे सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।  

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

दिल्ली में BJP का मास्टरस्ट्रोक: दो सीट कम, पर बढ़त सबसे दमदार!

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की 12 सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 7 जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। भाजपा दिल्ली में सरकार बनने के बाद हुई अपनी पहली परीक्षा में 'टॉप' करके गदगद है तो आम आदमी पार्टी यह कहकर उसकी जीत को कमतर कर रही है कि सत्ताधारी के पास मौजूद रहीं 9 सीटों पर उपचुनाव हुआ था और वह अब सात ही जीत पाई है। हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा ने वोट शेयर के मामले में बड़ी छलांग लगाई है और उसकी खुशी की असली वजह भी यही है।   2022 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। तब पार्टी को 39 फीसदी वोट शेयर हासिल हुए थे, जबकि 42 फीसदी वोट शेयर लेकर अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली वाली 'आप' पहली बार निगम में काबिज हुई थी। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद आप के कई पार्षदों ने मिलकर नया गुट बना लिया और भाजपा ने दोबारा एमसीडी पर कब्जा कर लिया। इस उपचुनाव में भाजपा के वोट शेयर में बड़ा उछाल देखने को मिला है। 45 फीसदी वोटर्स ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। 2022 के मुकाबले पार्टी को 6 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। जनसमर्थन में हुई इस वृद्धि से निश्चित तौर पर पार्टी गदगद है। चुनाव नतीजों के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा से जब दो सीटें कम होने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थानीय समीकरणों की वजह से ऐसा हुआ होगा, लेकिन उन्हें आम आदमी पार्टी से करीब 10 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका आप भले ही अपने प्रदर्शन को बरकरार रख पाई, लेकिन वोट शेयर के मामले में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। जिन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं उनमें से आप के पास पहले तीन सीटें थीं और अब भी पार्टी इतनी ही सीटें जीत पाई है और इसे गिनाकर वह अपना संतोष जाहिर कर रही है। हालांकि, वोट शेयर के मामले में उसे 7 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा है। 2022 में 42 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली आप को अस बार 35 फीसदी वोटर्स ने ही चुना है। कांग्रेस के वोट शेयर में भी वृद्धि इस उपचुनाव में कांग्रेस भी एक सीट पर जीत हासिल करने में सफल रही। तब कांग्रेस को 11.68 फीसदी वोट मिले थे तो इस बार 13.4 फीसदी वोट मिले हैं।  

सोने के रेट में बदलाव: 4 दिसंबर का नया 10 ग्राम भाव, देखें अपने शहर के 22-24 कैरेट रेट

इंदौर  दिसंबर के महीने में परिवार में शादी या कोई विशेष फंक्शन है ऐसे में सोने व चांदी खरीदने का प्लान बना रहे है और बाजार जाने की सोच रहे है तो पहले ताजा चेक कर लीजिए। आज 4 दिसंबर को सोने के दाम में 220 रूपए प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है लेकिन चांदी की कीमतों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है। गुरूवार को 22 कैरेट सोने के दाम (Gold Rate Today) 1, 19,650 , 24 कैरेट का भाव 1, 30,510 और 18 ग्राम सोने का रेट 98,930 रुपए पर ट्रेंड कर रहे है। वहीं 1 किलो चांदी का रेट (Silver Rate Today) 1, 91,000 रुपए चल रहा है। आईए जानते है आपके शहर का 18, 22 और 24 कैरेट सोने का भाव…… गुरूवार का 18 कैरेट सोने का ताजा भाव     दिल्ली व जयपुर सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 97,930/- रुपये।     कोलकाता और मुंबई सराफा बाजार में 97,780/- रुपये।     इंदौर और भोपाल में सोने का भाव 97,830 चल रहा है।     चेन्नई सराफा बाजार में कीमत 10,025/- रुपये पर ट्रेड कर रही है। गुरूवार का 22 कैरेट सोने का ताजा भाव     भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 1,19,550/- रुपये ।     जयपुर, लखनऊ, दिल्ली सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold price Today) 1,19, 650/- रुपये ।     हैदराबाद, केरल, कोलकाता, मुंबई सराफा बाजार में 1 19,500/- रुपये ट्रेंड कर रहा है। गुरूवार का 24 कैरेट सोने का ताजा भाव     भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1,30,410 रुपये     दिल्ली जयपुर लखनऊ और चंडीगढ़ सराफा बाजार में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1, 30, 510/- रुपये।     हैदराबाद, केरल, बैंगलुरू और मुंबई सराफा बाजार में 1,30, 360/- रुपये ।     चेन्नई सराफा बाजार में कीमत 1,31, 130 /- रुपये पर ट्रेंड कर रहा है। पढ़िए गुरूवार का आपके शहर का चांदी का लेटेस्ट रेट     जयपुर कोलकाता अहमदाबाद लखनऊ मुंबई दिल्ली सराफा बाजार में 01 किलोग्राम चांदी की कीमत (Silver Rate Today) 1,91,000 /- रुपये     चेन्नई, मदुरै , विजयवाड़ा, विशाखापटनम, हैदराबाद और केरल सराफा बाजार में कीमत 2,01,000/- रुपये।     भोपाल और इंदौर में 1 किलो चांदी की कीमत 1,91,000/ रुपए ट्रेंड कर रही है। कैसे चेक करें प्योरिटी? सोना खरा है या नहीं?     ISO (Indian Standard Organization) द्वारा सोने की शुद्धता पहचानने के लिए हॉल मार्क दिए जाते हैं।     24 कैरेट गोल्ड 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है और 22 कैरेट लगभग 91 प्रतिशत शुद्धता होती है।     24 कैरेट सोने में 1.0 शुद्धता (24/24 = 1.00) होनी चाहिए।     22 कैरेट गोल्ड में 9% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक मिलाकर जेवर तैयार किए जाते हैं।     22 कैरेट सोने में 0.916 शुद्धता (22/24 = 0.916) होनी चाहिए।     24 कैरेट सोने के आभूषण पर 999, 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है।     24 कैरेट में कोई मिलावट नहीं होती, इसके सिक्के मिलते है, लेकिन 24 कैरेट सोने के आभूषण नहीं बनाए जा सकते, इसलिए ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट सोना बेचते हैं और इसी के आभूषण बनाते है। चांदी पर हॉलमार्किंग का नियम     सोने के बाद अब 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्यूलरी पर हॉलमार्किंग का नियम लागू कर दिया है।     चांदी के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं है। आप बिना हॉलमार्क वाली चांदी भी खरीद सकते हैं।     हॉलमार्किंग के नियमों के तहत, चांदी पर 6 अंकों का यूनिक HUID कोड होगा। इससे तुरंत पता चल जाएगा कि गहना किस शुद्धता का है और वह असली है या नहीं।     भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी की शुद्धता के लिए 6 नए स्टैंडर्ड 800, 835, 900, 925, 970 और 990 तय किए हैं। 925 या 9250 अंक का मतलब है कि चांदी 92.5% शुद्ध है।  

रिश्तों में जलन और खौफ़: पूनम ने कैसे रंजिश को बनाया चार कत्लों का कारण?

सोनीपत दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत में एक बेहद डरावनी और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां पूनम नाम की एक महिला ने चार सालों में चार बच्चों का बेरहमी से कत्ल कर डाला, जिनमें उसका अपना बेटा भी शामिल है। वह जलन की वजह से सुंदर बच्चियों को चुन-चुनकर मारती रही। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि जिस भतीजी विधि को पानी में डुबोकर मारने की वजह से पूनम पकड़ी गई, उसकी हत्या की एक कोशिश उसने चार साल पहले भी की थी। तब उसने 2 साल की उस बच्ची के चेहेरे पर एक बड़ी केतली से चाय उड़ेल दी। तब परिवारवालों ने इसे एक हादसा समझा था। सोमवार को पूनम ने अपने दूसरे प्रयास में विधि की जान ले ली। आरोप है कि पूनम ने 6 साल की भतीजी को एक टब में डुबा दिया। बच्ची के दम तोड़ने के बाद उसकी दादी ने बच्ची की लाश को देखा तो चीख-पुकार मच गई। एक बार फिर शुरुआत में विधि की मौत को हादसा समझा गया, लेकिन जांच में जो बातें सामने आईं उससे सभी हैरान रह गए। पता चला कि सुंदरता से जलन की वजह से पूनम ने रिश्तेदारों की तीन बेटियों को मार डाला था। उसने अपने बेटे की जान क्यों ली यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पुलिस का मानना है कि उसने अपने बेटे शुभम को 2023 में इसलिए मारा क्योंकि पहली हत्या के बाद कुछ लोगों को उस पर शक होने लगा था और वह खुद को भी पीड़ित दिखाकर ध्यान भटका सके। पूनम मूल रूप से पानीपत के सिवाह गांव की रहने वाली है और शादी के बाद सोनीपत के भावर गांव में रहती है। पूनम को बुधवार को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी का पति नवीन और विधि के पिता संदीप चचेरे भाई हैं। पूनम की पहली शिकार 2023 में 9 साल की इश्किा थी। तीसरी मृतक 8 वर्ष की जिया थी। पुलिस का मानना है कि उसे भी इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह ‘ज्यादा सुंदर’ थी। अब तक 3 बच्चों को मार चुकी पूनम को यकीन हो चला था कि वह इसी तरह कत्ल करके अपनी सनक मिटाती रहेगी और पकड़ी नहीं जाएगी, लेकिन विधि के कत्ल के बाद उसका पर्दाफाश हो गया। सोमवार को एक शादी समारोह को लेकर चल रही हंसी-खुशी के बीच 6 साल की विधि अचानक गायब हो गई थी। एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाली उसकी दादी ने बताया कि उनके एक परिवार में 30 नवंबर से एक दिसंबर तक शादी समारोह था। इसमें आरोपी समेत कई मेहमान आए थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक महिला ने वारदात को 1 दिसंबर को तब अंजाम दिया जब सभी मेहमान घर से बाहर गए थे और उसने पीड़ित को सीढ़ियों से ऊपर जाते देखा। पुलिस ने कहा कि आरोपी बच्ची के पीछे-पीछे छत पर गई। उससे बातचीत करती रही। उसने इस बीच एक स्टोररूम के बाहर प्लास्टिक के एक टब में पानी भरा और विधि को उसमें डुबाकर मार डाला। इसके बाद वह दरवाजे को बाहर से बंद करके नीचे आ गई। जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता की चाची ने यह कत्ल किया है। एसपी सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान पूनम ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।  

अपस्किलिंग ही है करियर रीस्टार्ट का सबसे बड़ा मंत्र

कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। और सीखना तब ज्यादा जरूरी हो जाता है, जब बात अस्तित्व की हो। एक महिला का जीवन चारदीवारी के बाहर भी होता है। पर, घर के बाहर की ओर नजर डालें तो स्थितियां अभी भी चुनौतीपूर्ण ही हैं क्योंकि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों की तुलना में बेहद कम नजर आती है। इसका एक बड़ा कारण है घर की जिम्मेदारी। घर संभालने और बच्चों की देखरेख के लिए अधिकांश कामकाजी महिलाओं को अपने काम से ब्रेक लेना ही पड़ता है। कई लोगों के लिए यह छुट्टी आजीवन हो जाती है। जो वापस आना चाहती हैं, उनके लिए राहें आसान नहीं होती क्योंकि चार-पांच साल का करियर गैप और उस बीच उद्योग में आए बदलाव उनकी वापसी की राह कठिन कर देते हैं। एक अध्ययन बताता है कि भारत में कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा केवल 25 प्रतिशत है, जिसमें भी अकसर बच्चों की देखरेख के चलते काम छोड़ने वाली महिलाओं में से करीब 60-70 प्रतिशत की वापसी वर्क फोर्स में नहीं होती है। हालांकि अच्छी बात यह है कि कुछ महिलाओं को अब इसका अहसास होने लगा है। और काम पर वापसी के लिए वह खुद को नए दौर के लिए तैयार भी करने लगी हैं। एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म की मानें तो कोविड महामारी के बाद करीब 53 प्रतिशत महिलाएं अब उनके अलग-अलग कोर्स में दाखिल ले रही हैं। यह आंकड़ा महामारी से पहले के आंकड़े का दोगुना है। लिंक्डइन के ट्रेंड पर नजर डालें तो पिछले कुछ समय में नौकरी की दुनिया में छोटे-छोटे स्किल्स की मांग बढ़ी है। ऐसे में ऐसे शॉर्ट टर्म कोर्स करके खुद को बेहतर बनाना और नई दुनिया के लिए खुद को तैयार करना आपके करियर को नए पंख दे सकता है। अगर आप अभी भी कामकाजी हैं, तब भी अपस्किल आपके करियर को उड़ान देगी। सीखना जारी रखें माना की जिम्मेदारियां कम नहीं हैं, लेकिन यह बात भी ध्यान में रखें कि समय तेजी से बदल रहा है। ऐसे में आपका भी सीखना जारी रखना बेहद जरूरी है। करियर काउंसलर जितिन चावला कहते हैं कि चाहे आप नौकरी कर रही हैं या फिर ब्रेक के बाद वापसी कर रही हैं, आपको जमाने के हिसाब से ही चलना होगा। दौर टेक्नोलॉजी का है और जो इसमें पीछे हो गया, वह पिछड़ता चला जाएगा। आप ऐसा नहीं चाहतीं तो अपने क्षेत्र को समझें, उसमें आने वाले बदलावों को भांपें और खुद को तैयार करें। सीखने के लिए ऑनलाइन कई प्लेटफॉर्म हैं, जो आपकी राह आसान बनाते हैं। इसके अलावा कुछ जाने-माने संस्थान भी समय-समय पर शॉर्ट टर्म कोर्स निकालते हैं। ऐसी जगह से कोर्स करने पर आप खुद को और बेहतर दर्शा सकती हैं। इनका लाभ उठाएं और अपने रेज्यूम को और बेहतर बनाएं। इंटर्नशिप का लाभ उठाएं अगर आपके हाथ में किसी तरह का काम नहीं है तो नौकरी में वापसी के लिए इंटर्नशिप आपकी मदद कर सकता है। इसकी जानकारी जॉब पोर्टल पर आसानी से मिल जाएगी। यहां तक कि सरकार भी कई बार इंटर्नशिप प्रोग्राम निकालती है। कई बार इसमें उम्र की सीमा निर्धारित होती है, लेकिन हर प्रोग्राम में ऐसा नहीं होता। आप अपने क्षेत्र में ऐसे प्रोग्राम तलाशें और काम पर वापसी की तैयारी करें। इंटर्नशिप से आप कार्यक्षेत्र के नएपन को तो समझ ही पाएंगी, साथ ही उसी संस्थान में आपके लिए नौकरी की संभावना भी खुल सकती है। यह एक तरह से बिना पैसे लगाए कोई कोर्स करने जैसा ही हुआ। कुछ इंटर्नशिप नि:शुल्क होती हैं, वहीं कुछ में पैसे मिलते हैं। बदलते दौर को समझें करियर का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं है। अब समय स्टार्टअप का भी है। आपका करियर किसी भी क्षेत्र का रहा हो, लेकिन नए स्किल सीखकर भी आप खुद के लिए कई संभावनाएं बना सकती हैं। ऑनलाइन ऐसे कई प्लेटफॉर्म हैं, जो महिलाओं को इसके लिए तैयार कर रहे हैं। मान लीजिए आप पहले एचआर में काम करती थीं, लेकिन अब कॉर्पोरेट में वापसी नहीं हो पा रही। ऐसे में निराश होने की जगह आप ऑनलाइन आर्ट सीखकर किसी स्कूल में आर्ट टीचर बन सकती हैं या खुद का आर्ट बिजनेस शुरू कर सकती हैं। यहां तक कि ऐसे कई कोर्स भी हैं, जिन्हें करने के बाद आप खुद ऑनलाइन पढ़ा सकती हैं। इस काम में पंखुड़ी, मॉम्सप्रेसो, द गुड ग्लैम ग्रुप जैसे ऐप आपकी मदद करेंगे।  

‘पूरा सिस्टम उलझा’, सरकार पर PCC चीफ डोटासरा का तीखा वार

जयपुर राजस्थान कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष माणिक्य लाल वर्मा की जयंती के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रेस से बातचीत में उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी कैबिनेट को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि मैं तो हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि अपने मंत्रियों की सुनवाई करवा दें, क्योंकि आज उनकी भी कोई नहीं सुन रहा। डोटासरा ने भाजपा की ‘वर्कर्स सुनवाई’ पहल पर व्यंग्य करते हुए कहा कि असली समस्या मंत्रियों की सुनवाई न होना है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य सचिव सुधांशु पंत ‘SA लगाकर’ निकल गए और अब मंत्री शिकायत कर रहे हैं कि SA उनकी फाइलें नहीं सुनता, जबकि SA कह रहा है कि मंत्री फाइलें भेजते ही नहीं। “सरकार का पूरा सिस्टम उलझा हुआ है और मंत्री खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं,” डोटासरा ने कहा। उन्होंने आगे कहा कि जब मंत्री अपने प्रभारी जिलों में जाते हैं तो उनके पास कार्यकर्ता भी नहीं आते। “इनको फोन करके कार्यकर्ताओं को बुलाना पड़ता है, अपनी ही इज्जत बचाने की गुहार लगानी पड़ती है। इसका साफ मतलब है कि न जनता को विश्वास है, न कार्यकर्ताओं को कि ये कोई सुनवाई करेंगे,” उन्होंने कहा। डोटासरा ने दावा किया कि आज ऐसा परसेप्शन बन चुका है कि मंत्रियों की सुनवाई नहीं हो रही और अब तो मुख्यमंत्री की भी नहीं। ऐसे में आम जनता की सुनवाई होने की संभावना ही खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा, “यह कहते हैं कि 24 घंटे मंत्रियों के दरवाजे खुले हैं, पर मैं चुनौती देता हूं। किसी भी मंत्री का दरवाजा वास्तव में खुला दिखा दें।” खाद संकट पर बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि किसान खाद के लिए तरस रहे हैं और सरकार उन्हें लाठियां दे रही है। उन्होंने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के हाल ही के स्टिंग पर भी सवाल उठाया और पूछा कि उसका लाभ क्या निकला आज स्थिति यह है कि असली हो या नकली, कोई भी खाद उपलब्ध नहीं है। सरकार को तो असली खाद का ज्ञान ही नहीं, क्योंकि सरकार ही असली नहीं है, उन्होंने तंज कसा।  

विवादित मस्जिद टिप्पणी: ममता बनर्जी की नाखुशी के बाद TMC ने विधायक के खिलाफ तुरंत लिया एक्शन

कोलकाता  बाबरी से मिलती जुलती मस्जिद बनाने का दावा कर रहे विधायक हुमायूं कबीर के तृणमूल कांग्रेस ने निलंबित कर दिया है। कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले में मस्जिद की नींव रखने की बात कही थी। इसके बाद से ही प्रशासन अलर्ट मोड पर था। खबर है कि टीएमसी विधायक के इस फैसले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज थीं। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया। कोलकाता मेयर फिरहाद हाकिम ने टीएमसी के फैसले की जानकारी दी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कहा, 'हमने देखा था कि मुर्शिदाबाद के हमारे विधायकों में से एक ने अचानक ऐलान कर दिया कि वह बाबरी मस्जिद बनाएंगे। अचानक बाबरी मस्जिद क्यों? हम उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी थी। हमारी पार्टी टीएमसी के फैसले के आधार पर हम विधायक हुमायूं कबीर को निलंबित कर रहे हैं।' क्या ममता बनर्जी थीं नाराज मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि विधायक कबीर के फैसले से सीएम बनर्जी नाराज हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सीएम और उनकी पार्टी इस फैसले के साथ नहीं हैं और यह संदेश विधायक को पहुंचा दिया गया है। एक दिन पहले भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी भी इस फैसले से दूरी बनाते हुए नजर आए थे उन्होंने कहा था, 'पश्चिम बंगाल के लोग ममता बनर्जी पर भरोसा करते हैं। कौन क्या कहता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका कोई महत्व नहीं है।' रैली में जाने वाले थे कबीर खबरें थीं कि विधायक कबीर मुर्शिदाबाद में होने वाली सीएम बनर्जी की रैली में भी शामिल होने वाले थे। उन्हें टीएमसी की तरफ से न्योता भी दिया गया था। अब एनडीटीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधायक को रैली में से हटा लिया गया है। खास बात है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी टीएमसी विधायक की तरफ से की गई घोषणा के मद्देनजर सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। प्रशासन को दी थी चेतावनी कबीर ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में मुर्शिदाबाद प्रशासन पर 'आरएसएस एजेंट' के रूप में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे उनके कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं करें, वरना यह 'आग से खेलने' जैसा होगा। कबीर ने कहा, 'मैंने एक साल पहले कहा था कि मैं बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखूंगा। आपको दिक्कत क्यों हो रही है? क्या आप भाजपा के इशारे पर चल रहे हैं?' तृणमूल विधायक ने कहा कि अगर उन्हें बाबरी मस्जिद की नींव रखने से रोका गया, तो 'एनएच-34 उनके नियंत्रण में होगा, मुसलमानों के नियंत्रण में होगा।' उन्होंने राज्य की तृणमूल सरकार पर 'आरएसएस के एजेंट' के रूप में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा, 'मैं शांति भंग नहीं करूंगा, लेकिन अगर कोई शांतिपूर्ण कार्यक्रम में बाधा डालता है, तो मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं।'  

पीएम का आभार जताने पर विरोध, तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति चर्चा में

पटना बुधवार को नेता प्रतिपक्ष विधान मंडल नहीं पहुंचे, जिसको लेकर जदयू के मुख्य प्रवक्ता ने उनपर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि जिनके परिवार की सुरक्षा के लिए 160 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं, वे स्वयं सदन में दिखाई नहीं दे रहे। आखिर कहां गायब हो गए तेजस्वी यादव ? इस खबर के प्रकाशित होने के बाद देर शाम राजद ने भी पलटवार करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। जवाब में बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि जिस तरह की राजनीति जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार जी आप करते हैं, ऐसा लगता है कि आपके राजनीति का एकमात्र आधार और सोच तेजस्वी प्रसाद यादव ही हैं। आप वास्कोडिगामा की तरह तेजस्वी यादव की खोज में मत लगिए, बिहार की जनता के हित में उनको बुलडोजर नीति से बचाइए।  हालांकि आज भी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सदन में आने का इंतजार जरुर किया जायेगा। नरेंद्र नारायण यादव को  निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन आज सदन को नया उपाध्यक्ष मिल गया है। मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से आठवीं बार विधायक बने नरेंद्र नारायण यादव को सर्वसम्मति से निर्विरोध उपाध्यक्ष चुना गया। वह इस सत्र के लिए प्रोटेम स्पीकर की भूमिका भी निभा रहे थे। उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी नए विधायकों को बधाई दी और बिहार के विकास पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। 2005 से है कानून का राज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में अपने सरकार की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि, जब 2005 में एनडीए (NDA) सरकार बनी थी, तब से ही बिहार में कानून का राज है। तभी से मैं लगातार बिहार के विकास में लगा हुआ हूं, और यही मेरा एकमात्र उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि अब बिहार में किसी तरह का डर और भय नहीं है, बल्कि चारों तरफ शांति और भाईचारे का माहौल है। अब नहीं होता हिंदू-मुस्लिम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पहले बिहार में बहुत हिंदू-मुस्लिम होता था, लेकिन अब कोई झगड़ा-झंझट नहीं होता है। अपनी सरकार के कार्यों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान की घेराबंदी कराई गई और 2016 से मंदिरों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  राजद विधायक भाई वीरेन्द्र से कहा कि आपको दो बार मौक़ा दिए। आपके साथ भी विकास किए न , गड़बड़ सड़बड़ किए तो छोड़ दिए। अब इनके साथ हैं। आपके साथ कभी नहीं आएंगे। कुमार सर्वजीत के बयान पर बिहार विधानसभा में बवाल, जदयू नेता रत्नेश सदा को दी चुनौती राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार ने गया के मगध मेडिकल अस्पताल की बदहाल स्थिति को लेकर कहा कि वहां जाने पर लगता है कि दलित के मोहल्ले में आ गए हैं। उनकी यह बात सुनते ही जदयू विधायक रत्नेश सदा ने राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार का विरोध करते हुए कहा कि मैं भी उसी दलित की कोख से पैदा हुआ हूं। दलितों के लिए जो हरकत इन्होंने की है वो इसे माफ नहीं करेंगे। उनके इस विरोध के बाद राजद विधायक कुमार सर्वजीत कुमार ने जदयू नेता रत्नेश सदा पर पलटवार करते हुए उनको चुनौती दे डाली। उन्होंने कहा कि अगर इनमें हिम्मत है तो हम इन्हें चुनौती देते हैं। ये हमारे साथ गया जिले के दलित मोहल्लों में चलें और देखें कि गया जिले के मुसहर इलाके में एक भी नाली-गली नहीं बनी है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के विरोध के बाद विपक्ष ने विधान परिषद् का किया वॉकआउट बिहार विधान परिषद में महामहीम राज्यपाल के अभिभाषण पर वाद-विवाद शुरू हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोल रहे थे, तभी पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अचानक उठीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि   पहले सत्ता पक्ष नहीं, बल्कि विपक्ष को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन उनकी बात नहीं मानने पर पर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत विपक्ष के सभी सदस्यों ने विधान परिषद् का वॉकआउट कर बाहर निकल गए। बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर चलेगा बुलडोजर बिहार विधानसभा में उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता विजय सिन्हा और राजद नेता विधायक भाई वीरेंद्र एक दूसरे से भिड़ गए। उप मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर  बुलडोजर चलाया जाएगा। इसी बात पर भाई वीरेन्द्र भड़क गए और खड़े होकर उनका विरोध करने लगे। उन्होंने कहा कि हर्ष फायरिंग के बारे में बोलिए। इस पर विजय सिन्हा ने कहा कि आप जिसे हर्ष फायरिंग बता रहे हैं वह शादी विवाह में पटाखा फोड़े जा रहे थे। इसकी जांच भी की जा चुकी है। अपनी बात खत्म करते करते विजय सिन्हा ने कहा कि मौसम बदल रहा है इसलिए बदलते मौसम में आप अपने कपड़े भी बदल लीजिये वरना तबियत खराब हो जाएगी। और रही बात बुलडोजर की तो बालू-दारू-भू-माफिया की छाती पर बुलडोजर चल के रहेगा। राजद विधायक ने सम्राट चौधरी को कहा – आप  स्मार्ट बुलडोजर चलाईये राजद विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने अंग्रेजी में अपनी बात शुरू की लेकिन फिर टोकने पर हिंदी में बोलने लगे। उन्होंने अपनी बात शुरू करते हुए सबसे पहले बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी का नाम लेते हुए कहा कि आप मजबूत आदमी हैं। आपको लोग बुलडोजर बाबा कहता है तो ऐसा लगता है कि यह कॉपी किया जा रहा है इसलिए आप सम्राट बुलडोजर नहीं बल्कि स्मार्ट बुलडोजर चलाइए। उन्होंने कहा कि सम्राट जी आप सिर्फ मानवीय पक्ष को सामने रखिए और उसके पीछे हिडन एजेंट को जरूर देखिए और मुझे लगता है कि आप सम्राट बुलडोजर से स्मार्ट बुलडोजर जरूर बनियेगा। राजद विधायक ने मुख्यमंत्री की जमकर की प्रशंसा इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बहुत बेहतर काम किया है, उनके कार्यों की हम प्रशंसा करते हैं। उन्होंने महिलाओं को 35% आरक्षण दिया है। मैं इसकी भी प्रशंसा करता हूं। उन्होंने जिस तरह से महिला पुलिस की एक बड़ी संख्या खड़ी कर दी है इसके लिए भी मैं उनकी प्रशंसा करता हूं।

महिला आतंकी नेटवर्क पर पर्दा फाश: जैश की योजना, 5000 महिलाओं की फिदायीन ट्रेनिंग और मकसद का खुलासा

नई दिल्ली  आतंकी मसूद अजहर पाकिस्तान में बैठकर लगातार जिहादी साजिशों में लगा है. वह जिहाद के नाम पर महिला आतंकियों की फौज खड़ी कर रहा है. लगातार महिला आतंकियों की संख्या में इजाफा कर रहा है. इस बीच जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ‘जमात-उल-मुमीनात’ पर अब बड़ा खुलासा है. आतंकी मसूद अजहर ने खुद एक पोस्ट कर अपना नापाक प्लान लीक किया है. जी हां, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जैश-ए-मोहम्मद ने अपना नापाक प्लान बता दिया है. जैश की वुमन विंग यानी जमात-उल-मुमीनात में अब तक पांच हजार जिहादी महिलाओं की भर्ती की गई है. इन महिला आतंकियों का ब्रेन वॉश कर इन्हें फिदायीन ट्रेनिंग दी जा रही है. आतंकी मसूद अजहर ने पोस्ट में लिखा कि जैसे-जैसे जैश की इस महिला विंग में महिला सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, अब जरूरत है जिलावार जमात-उल-मुमीनात तंजीम तैयार की जाए. यानी पीओके (POK) के हर जिले में जमात-उल-मुमीनात का ऑफिस होगा, जहां भर्ती से लेकर आतंकी ट्रेनिंग पूरी होगी. आतंकी मसूद ने पोस्ट में ये भी लिखा है कि जमात उल मुमीनात में शामिल कुछ महिलाओं ने चिट्ठी लिखकर बताया कि जमात में शामिल होते ही उन्हें अपनी ज़िंदगी का मकसद मिल गया है. सोशल मीडिया पोस्ट में क्या?     आतंकी मसूद अजहर ने अपनी पोस्ट में अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी का जिक्र करते हुए लिखा है कि अमेरिका की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी ने पाकिस्तान में जिहादी माहौल पैदा किया. हालांकि यह ऐसा झूठ है जो शायद शैतान को भी न सूझे, लेकिन हमारे कई कॉलमिस्ट, कुछ मंत्री और कुछ बुद्धिजीवी इसे सच मान बैठे हैं. अजीब बात है कि एक यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम ने लाखों मुजाहिद खड़े कर दिए…और एक सुपर पावर को हरा दिया? आतंकी मसूद अजहर का क्या मकसद उसने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है, ‘अल्लाह तआला हर मुसलमान को अपनी ज़िंदगी का मकसद समझने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए. आज कुछ बातें संक्षेप में पेश कर रहा हूं… अगर मौका मिला तो आने वाले दिनों में इनकी तफसील भी लिखूंगा, इंशाअल्लाह.’ दरअसल, अपने पोस्ट के जरिए आतंकी मसूद अजहर महिला आतंकियों की फौज का गुनगान कर रहा है. वह क्लास में महिला आतंकियों को सुसाइड बॉम्बर बनने की ट्रेनिंग दे रहा है. क्या है जैश का महिला विंग अब सवाल है कि आखिर जैश की यह महिला विंग क्या है. दरअसल, आतंकी संगठन जैश की महिला विंग का नाम है जमात-उल-मोमीनात. इस विंग में आंतकवादी पतियों की विधवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर महिला को बहला-फुसला कर शामिल किया जा रहा है. उन्हें जिहाद के लिए बरगलाया जा रहा है. उन्हें बहला-फुसला कर जिंदगी का वह मकसद बताया जा रहा है, जो कहीं से उनकी जिंदगी के लिए सही नहीं है. बीते कुछ दिनों से पाकिस्तान बेस्ड इस आतंकी संगठन में महिलाओं को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ट्रेन किया जा रहा था. उन्हें डिजिटल क्लासेस में हिंदू महिलाओं के खिलाफ हेट स्पीच दी जा रही थी और यही नहीं पुरुष आंतकवादियों की तरह महिलाओं को भी फिदायीन बनने के लिए फिजिकल ट्रेनिंग भी दी जा रही थी. किसके हाथ में कमान खबरों की मानें तो आतंकी मसूद अजहर ने अपनी बहन सादिया अजहर को जैश की महिला विंग का प्रमुख बनाया है. दूसरी बहन समायरा अजहर (उर्फ उम्मे मसूद) और पुलवामा हमलावर उमर फारूक की पत्नी अफीरा फारूक ऑनलाइन भर्ती और प्रचार का काम संभाल रही हैं. यह नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जा रहा है. उसके इस वीडियो के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. महिलाओं को शामिल कर जैश खुफिया जानकारी जुटाने, फंडिंग और हमलों में नई रणनीति अपना रहा है.