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पटना के 20 संवेदनशील इलाकों में स्पेशल महिला पुलिस तैनात, छेड़खानी पर होगी जीरो टॉलरेंस

पटना पटना में महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए Shakti Safety Squad एक नया बड़ा कदम उठाने जा रहा है। टीम ने ऐसे 20 पॉइंट्स को चिह्नित किया है, जहां महिलाओं की आवाजाही ज्यादा होती है और जहां से लगातार छेड़छाड़ व असुरक्षा की शिकायतें मिलती रही हैं। जल्द ही इन स्थानों पर सिविल ड्रेस (Civil Dress) में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसकी जानकारी सिटी एसपी दीक्षा ने साझा की। सेंसिटिव लोकेशंस पर बढ़ाई जाएगी निगरानी शक्ति सुरक्षा दल द्वारा जिन जगहों को हॉट-स्पॉट माना गया है, उनमें एसके पुरी पार्क, जेपी गंगा पथ, ईको पार्क, सहदेव महतो मार्ग, बोरिंग रोड चौराहा और लोहिया पार्क जैसे भीड़भाड़ वाले स्पॉट शामिल हैं। इन क्षेत्रों से Harassment Complaints काफी संख्या में मिली थीं। इसी वजह से ग्राउंड पर महिला सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह बड़ा फैसला लिया गया है।  सिर्फ नवंबर में 1909 महिलाओं ने मांगी मदद सिटी एसपी दीक्षा ने बताया कि नवंबर महीने में ही Shakti Squad Helpline पर कुल 1909 महिलाओं ने संपर्क किया। इनमें से—     62 मामलों में काउंसिलिंग की गई     45 शिकायतों पर जांच व कार्रवाई हुई     23 युवतियों को थाने भेज आगे की प्रक्रिया कराई गई शक्ति सुरक्षा दल का गठन 11 जून को किया गया था और तब से यह टीम शहरभर में सक्रिय है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां महिलाओं की भीड़ अधिक रहती है, वहां टीम तुरंत पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराती है। 24×7 हेल्पलाइन नंबर एक्टिव किसी भी आपात स्थिति में महिलाएं सीधे 24×7 Active Helpline Numbers पर कॉल कर सकती हैं—     9296598170     9296580210 इन नंबरों पर तत्काल मदद उपलब्ध कराई जाती है। सिटी एसपी के अनुसार, टीम की सक्रियता के कारण महिलाओं में भरोसा बढ़ा है और कई मामलों में शिकायतों पर तुरंत एक्शन लिया गया है। जल्द बढ़ेगा सुरक्षा का घेरा जल्द ही चिन्हित स्थानों पर Female Cops in Civil Dress की तैनाती से सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो जाएगी। इससे महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा और असामाजिक तत्वों पर भी लगाम लगेगी।  

स्टडी में दावा: शुगर के मरीजों की बॉडी में कैंसर सेल्स को मिलती है अतिरिक्त ऊर्जा

लखनऊ डायबिटीज में कैंसर कोशिकाओं को अनुकूल माहौल मिल जाता है। केजीएमयू के अध्ययन में देखा गया कि डायबिटीज और प्रोस्टेट कैंसर से एक साथ पीड़ित व्यक्तियों में इंसुलिन और आइजीएफ- 1 का स्तर सामान्य कैंसर रोगियों की तुलना में लगभग दोगुणा होता है। एचबीएसी का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर कैंसर की गंभीरता से जुड़ा पाया गया। लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड) में गड़बड़ी भी कैंसर की आशंका बढ़ा देती है । 300 मरीजों पर अध्ययन शोध में शामिल 100 पुरुष बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) से, 100 केवल प्रोस्टेट कैंसर से और 100 डायबिटीज के साथ प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। इन सभी के हार्मोनल और मेटाबोलिक प्रोफाइल से निष्कर्ष निकाला गया कि डायबिटीज, प्रोस्टेट कैंसर को अधिक आक्रामक बना देता है। कैंसर को बढ़ावा देने वाले तत्व की अधिकता शोधकर्ताओं ने पाया कि डायबिटीज में इंसुलिन, आइजीएफ – 1, एचबीए | सी और पीएसए का स्तर सामान्य पुरुषों से अत्यधिक ऊंचा रहता है। इंसुलिन और आइजीएफ-1 दोनों ही ऐसे हार्मोन हैं, जो कोशिका वृद्धि को उत्तेजित करते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सभी मधुमेह रोगियों को प्रोस्टेट कैंसर नहीं होता, परंतु जोखिम सामान्य पुरुषों की तुलना में काफी अधिक रहता है। यह तभी कम हो सकता है, जब शुगर नियंत्रित रखी जाए, वजन सामान्य हो, भोजन संतुलित हो और जीवनशैली सक्रिय हो। प्रोस्टेट के समस्या लक्षण     बार-बार पेशाब लगना     रात में कई बार उठकर पेशाब जाना     पेशाब का फ्लो धीमा होना     पेशाब रुक-रुक कर आना     पेशाब में जलन     निचले पेट या पेल्विस में भारीपन कई बार प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती अवस्था में बिल्कुल लक्षणहीन भी रहता है, इसलिए नियमित जांच सबसे महत्त्वपूर्ण है। कब कराएं प्रोस्टेट की जांच     सामान्य पुरुषों को 50 वर्ष के बाद     डायबिटिक वालों को 45 की उम्र के बाद     जिनके परिवार में इसका इतिहास है, उन्हें 40 वर्ष के बाद     पीएसए टेस्ट और डिजिटल रेक्टल एग्जाम (डीआरई) साल में एक बार जरूर कराना चाहिए। यदि शुगर अधिक समय से अनियंत्रित हो या मोटापा अधिक हो तो यह जांच 6-12 महीने में दोहरानी चाहिए। बचाव के आसान तरीके     रोज 30-45 मिनट तेज चाल से चलना     वजन (बीएमआई) के अनुसार रखना     मीठे, तले और प्रोसेस्ड फूड से बचना     फाइबर युक्त भोजन- सलाद, सब्जियां     नियमित ब्लड शुगर और पीएसए जांच विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है। सही जीनवशैली और समय पर जांच जरूरी हर डायबिटिक पुरुष को 50 वर्ष की उम्र के बाद प्रोस्टेट की नियमित जांच करानी चाहिए भले ही कोई लक्षण न हों। डायबिटीज के चलते होने वाली सूजन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और डीएनए की मरम्मत प्रणाली को कमजोर करती है। ऐसे में कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने आसानी होती है। डायबिटीज और प्रोस्टेट कैंसर का मेल कैंसर को अधिक खतरनाक बना देता है। मोटे पुरुषों में एस्ट्रोजन बढ़ता है, टेस्टोस्टेरोन घटता है और इंसुलिन प्रतिरोध बढ़ जाता है । इस स्थिति को ही 'मेटाबोलिक सिंड्रोम' कहा जाता है। पेट की चर्बी, हाइ ब्लड प्रेशर, हाइ ट्राइग्लिसराइड, कम एचडीएल (अच्छा कोलेस्ट्राल) और हाइ ब्लड शुगर प्रोस्टेट कोशिकाओं के कैंसर में बदलने की आशंका बढ़ाते हैं। कुछ शोधों में पाया गया है कि मेटफार्मिन जैसी दवाएं कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि धीमा कर सकती है। हालांकि जीवनशैली पर नियंत्रण, वजन प्रबंधन और नियमित जांच सेहतमंद रहने के लिए जरूरी है।  

IMD अलर्ट: राजस्थान में मौसम पलटेगा, जयपुर-बीकानेर में शीतलहर के आसार

जयपुर राजस्थान में गुरुवार से शीतलहर की चेतावनी जारी कर दी गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटों में राजस्थान में सर्दी का प्रभाव तेजी से बढ़ने वाला है। हिमालय पर अगले 48 घंटों में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। इसके प्रभाव से आने वाले एक सप्ताह में तेज सर्दी पड़ने का अनुमान  है। उत्तर भारत से आने वाली बर्फीली हवाओं के कारण राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में तापमान में भी गिरावट दर्ज होगी। मौसम विभाग ने शेखावाटी क्षेत्र में सुबह-शाम कड़ाके की सर्दी पड़ने की संभावना जताई है। गुरुवार से शेखावाटी के सीकर, चूरू और झुंझुनू में शीतलहर का अलर्ट भी जारी किया गया है। खास तौर पर सीकर के फतेहपुर में मौसम में जबरदस्त गलन महसूस की जा रही है।  बीते 24 घंटों में मौसम पूरी तरह साफ रहा, दिन में धूप निकली, लेकिन शाम ढलते ही ठंड तेजी से बढ़ी। बीकानेर के लूणकरणसर में न्यूनतम तापमान 4.7°C रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा।फतेहपुर में 6.6°C, गंगानगर 6.9°C, चूरू 9°C, बीकानेर 9.3°C, अलवर 8°C और जैसलमेर में 10°C तापमान दर्ज हुआ। उधर सीकर और पिलानी में मंगलवार को हल्की बढ़ोतरी के साथ न्यूनतम तापमान क्रमशः 12°C और 10.4°C रेकॉर्ड किया गया। दिन में भी ठंडक बनी रही और कई शहरों में अधिकतम तापमान में गिरावट देखी गई। सीकर में 24.5°C, पिलानी में 26.2°C, जयपुर में 26.6°C और अलवर में 26.5°C अधिकतम तापमान दर्ज हुआ। वहीं राष्ट्रीय राजमार्गों की बात करें तो मौसम विभाग ने आज किसी भी राजमार्ग पर कोहरे की चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि जयपुर सीकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शीतलहर चलने का अनुमान जारी किया गया है।

टॉप 100 में सिर्फ 3 ने चुना सर्जरी: आखिर क्यों बढ़ रही विशेषज्ञता चुनने की दुविधा?

 नई दिल्ली नीट पीजी टॉपरों की पसंद में बीते कुछ सालों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मेडिकल पीजी की जिन ब्रांचों पर टॉप रैंकर्स टूट कर पड़ते थे, अब वे पहली पसंद नहीं रह गई हैं। पिछले पांच सालों में नीट पीजी काउंसलिंग में हिस्सा लेने वाले ज्यादातर टॉप परफॉर्म करने वाले मेडिकल ग्रेजुएट्स का झुकाव नॉन-सर्जिकल मेडिसिन ब्रांच एमडी जनरल मेडिसिन की तरफ हो गया है। मास्टर इन सर्जरी (एमएस) में जबरदस्त गिरावट देखी गई है। टॉप 100 में से सिर्फ तीन उम्मीदवारों ने वर्तमान में चल रही नीट पीजी काउंसलिंग में एमएस को चुना है, जबकि 2021 में कम से कम 11 उम्मीदवारों ने एमएस कोर्स चुना था। इसी तरह रेडियोलॉजी और डर्मेटोलॉजी में एमडी, जो कभी टॉप रैंकर्स के बीच सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले कोर्स थे, उनमें दिलचस्पी में भारी गिरावट देखी गई है। कैंडिडेट्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के आने को लेकर परेशान हैं, जिसके रेडियोलॉजी में डॉक्टरों की जगह लेने का डर है। डर्मेटोलॉजी में आर्टिफिशियल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट में हालिया बढ़ोतरी ने मेडिकल ग्रेजुएट्स की दिलचस्पी बदल दी है। जनरल सर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और न्यूरोसर्जरी जैसी सर्जिकल ब्रांच में दिलचस्पी बहुत ज्यादा सीखने पढ़ने, काम के बोझ, मेडिको-लीगल रिस्क, इमरजेंसी अधिक होना और वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी की वजह से कम हुई है। मेडिसिन टॉप प्रेफरेंस पिछले पांच सालों में टॉप रैंक वाले कैंडिडेट्स के बीच सीट प्रेफरेंस पैटर्न में काफी बदलाव आया है। लगभग 44-47 फीसदी ग्रेजुएट्स मेडिसिन और 40-43 फीसदी रेडियोलॉजी चुन रहे हैं। सर्जरी लाइन की पसंद कम क्यों टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (एमसीसी) के सदस्य सचिव कहते हैं, 'सर्जिकल स्पेशियलिटी सबसे ज्यादा डिमांड वाले फील्ड्स में से हैं, जिनमें काम के लंबे घंटे होते हैं जो कई लोगों, खासकर महिलाओं को हतोत्साहित करते हैं। जबकि डॉक्टर टेक्निकली अपने क्लिनिक खोल सकते हैं, इंडिपेंडेंट प्रैक्टिस बहुत कम होती है क्योंकि ज्यादातर सर्जिकल काम के लिए हॉस्पिटल से अटैचमेंट की जरूरत होती है। सर्जरी सेक्टर सीमित है क्योंकि सीनियर स्पेशलिस्ट के रिटायर होने तक नए लोगों के लिए कम जगह बची है। जब तक वे रिटायर नहीं होते, नए डॉक्टरों के लिए मौके कम होते हैं।' रैंक ही नहीं, मेहनत से भी ग्रोथ होती है 2025 सेशन के लिए एमएस जनरल सर्जरी के लिए लगभग 5,119 सीटें उपलब्ध थीं। घटती दिलचस्पी के कारण इनमें से कई सीटें टॉप 100 से नीचे रैंक वाले कैंडिडेट्स द्वारा भरी जाने की उम्मीद है। डॉ. एस श्रीनिवास कहते हैं, 'सिर्फ रैंक ही डॉक्टर की क्षमता को नहीं दिखाती है। हर ट्रेनी की ग्रोथ आखिरकार उनके डेडिकेशन, मेंटरशिप और पूरे कोर्स के दौरान हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है।' देखें बीते 5 सालों में किस मेडिकल पीजी ब्रांच का क्या हाल रहा डर्मेटोलॉजी को 2025 में 4, 2024 में 1, 2023 में 6, 2022 में 2 और 2021 ने 3 ने चुना रेडियोलॉजी को 2025 में 41, 2024 में 28, 2023 में 41, 2022 में 41 और 2021 ने 36 ने चुना सर्जरी को 2025 में 3, 2024 में 2, 2023 में 4, 2022 में 4 और 2021 में 11 ने चुना मेडिसिन को 2025 में 46, 2024 में 41 , 2023 में 41, 2022 में 45 और 2021 में 43 ने चुना ओब गायने को 2025 में 3, 2024 में 2, 2023 में 1, 2022 में 1 और 2021 में 1 ने चुना पीडियाट्रिशियन को 2025 में 1, 2024 में 0, 2023 में 5, 2022 में 2 और 2021 में 2 ने चुना ओर्थोपेडिक्स को 2025 में 1, 2024 में 1, 2023 में 1, 2022 में 1 और 2021 में 2 ने चुना  

एंटी-ड्रोन गन्स से लेकर फेस रिकग्निशन तक—भारत में पुतिन की सुरक्षा होगी फ़ुल हाई-टेक

 नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के चार साल बाद भारत दौरे को लेकर दिल्ली पूरी तरह सतर्क हो गई है. 4-5 दिसंबर को होने वाले इस दो दिवसीय दौरे के लिए राजधानी को किले में बदल दिया गया है. लगभग 130 सदस्यीय रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ पुतिन के आने से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, पैरामिलिट्री फोर्सेस और रूसी स्पेशल फोर्सेस मिलकर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी रिंग तैयार कर चुकी हैं. हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट की घटना के बाद सुरक्षा पहले से ही हाई अलर्ट पर थी, अब पुतिन के दौरे के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही हैं.   पुतिन का दौरा: क्या है प्लान? पुतिन का यह दौरा भारत-रूस के 23वें वार्षिक समिट के लिए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर वे 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे. पहले दिन शाम को पीएम मोदी के साथ प्राइवेट डिनर होगा, उसके बाद द्विपक्षीय बातचीत. 5 दिसंबर को बिजनेस मीटिंग्स और स्टेट बैनक्वेट (राजकीय भोज) का कार्यक्रम है. एजेंडा में रक्षा, ऊर्जा, स्पेस और ट्रेड पर फोकस होगा. रूस S-400 मिसाइल सिस्टम की नई डील, Su-57 फाइटर जेट्स और तेल निर्यात बढ़ाने की बात करेगा. यह दौरा यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा है, जो दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत करेगा. सुरक्षा का मल्टी-लेयर जाल: कोई चूक नहीं होगी दिल्ली को हाई सिक्योरिटी जोन बना दिया गया है. रूसी एडवांस सिक्योरिटी टीम के 50 से ज्यादा सदस्य पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं. उन्होंने रूट्स, वेन्यूज और पूरी सिक्योरिटी प्लानिंग चेक की है. रूसी स्पेशल फोर्सेस आंतरिक सर्कल में रहेंगी, जबकि भारतीय फोर्सेस के साथ तालमेल बिठाएंगी.    भारतीय एजेंसियां: दिल्ली पुलिस, सेंट्रल सिक्योरिटी, पैरामिलिट्री और एनएसजी कमांडोज मुख्य भूमिका निभाएंगे. एसडब्ल्यूएटी टीम्स, एंटी-टेरर स्क्वॉड्स और क्विक रिएक्शन फोर्सेस को रणनीतिक जगहों पर तैनात किया गया है. ये तुरंत किसी भी खतरे का जवाब देंगी.  रूसी सिक्योरिटी: पुतिन की पर्सनल सिक्योरिटी में 50+ जवान हैं. उनका खाना रूस से ही आएगा. कई चेक के बाद ही परोसा जाएगा. उनके साथ पोर्टेबल सिक्योरिटी किट भी है, जो कार और होटल में रहेगी.     ट्रैफिक और एरिया कंट्रोल: दिल्ली पुलिस के टॉप ऑफिसर्स ट्रैफिक मैनेजमेंट और एरिया सैनिटाइजेशन देखेंगे. पुतिन के कन्वॉय के रास्ते पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लेकिन आम लोगों को कम परेशानी हो, इसके लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी.  सभी जगहों को पहले से साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाया जा रहा है. पुतिन के ठहरने की जगह की डिटेल्स सिक्योरिटी कारणों से गुप्त रखी गई हैं. टेक्नोलॉजी से निगरानी: ड्रोन, सीसीटीवी और एंटी-ड्रोन गन्स सुरक्षा सिर्फ इंसानों पर नहीं, टेक्नोलॉजी पर भी निर्भर है. मिनट-टू-मिनट रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं…     एंटी-ड्रोन गन्स: हवाई खतरे से बचाव के लिए ड्रोन को मार गिराने वाली गन्स तैनात.       मूविंग ड्रोन सर्विलांस: हवा में ड्रोन उड़ाकर लगातार नजर रखी जा रही है.       सीसीटीवी और सिग्नल मॉनिटरिंग: रूसी डेलिगेशन पर एरियल, सिग्नल और ग्राउंड लेवल की निगरानी. फेस रिकग्निशन कैमरे कन्वॉय को ट्रैक करेंगे. दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में 24×7 मॉनिटरिंग डेस्क बनी है. सभी एजेंसियां रीयल-टाइम कोऑर्डिनेशन करेंगी, ताकि कोई गलती न हो. हाल के दिल्ली ब्लास्ट के बाद ये इंतजाम और सख्त हो गए हैं.  हाल के ब्लास्ट का असर: अतिरिक्त सावधानियां नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को और अलर्ट कर दिया. उसके बाद से ही हाई अलर्ट था, लेकिन पुतिन के दौरे के लिए दो दिनों के लिए अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू किए गए. खुफिया एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे पर नजर रख रही हैं. विशेषज्ञ कहते हैं, पुतिन की सिक्योरिटी दुनिया की सबसे सख्त है, इसलिए भारत-रूस का संयुक्त प्रयास फूलप्रूफ होगा.  मजबूत दोस्ती का संदेश यह दौरा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा. रक्षा में Su-57 जेट्स, ऊर्जा में तेल डील और ट्रेड में नई संभावनाएं खुलेंगी. लेकिन सुरक्षा पहले, इसलिए दिल्ली किले जैसी हो गई है. पुतिन के आने पर सबकी नजरें टिकी हैं. क्या होगा बड़ा ऐलान? जल्द पता चलेगा.  

अमेरिका वेनेजुएला पर कार्रवाई कर सकता है—डोनाल्ड ट्रंप ने दिया ऑपरेशन का संकेत

वॉशिंगटन कैरिबियन में कथित वेनेजुएला के ड्रग तस्करों की नावों पर अमेरिका के बार-बार हवाई हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द वेनेजुएला के अंदर रहने वाले 'बुरे लोगों' पर हमला करना शुरू कर देगा. मंगलवार की कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप की टिप्पणी से वॉशिंगटन और काराकास के बीच और तनाव बढ़ने का इशारा मिलता है. ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग के दौरान कहा, 'हम जमीन पर भी ये हमले शुरू करने जा रहे हैं. जमीन पर हमला करना ज्यादा आसान है. हम जानते हैं कि बुरे लोग कहाँ रहते हैं, और हम यह बहुत जल्द शुरू करने जा रहे हैं.' ट्रंप की यह बात तब आई है जब उनके प्रशासन पर ड्रग तस्करी करने वाली नावों को निशाना बनाने के लिए किए गए हमले को लेकर कड़ी जांच हुई है, जिसमें अब तक 80 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. बैठक में ट्रंप ने वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का बचाव किया और कहा कि न तो उन्हें और न ही वॉर सेक्रेटरी को संदिग्ध ड्रग जहाज पर दूसरे हमले के बारे में पता था. अमेरिकी सेना ने 2 सितंबर को कैरिबियन में चल रहे एक संदिग्ध ड्रग जहाज पर एक और हमला किया था, जब शुरुआती हमले में जहाज पर सवार सभी लोग नहीं मारे गए थे. ट्रंप ने कहा, 'मुझे दूसरे हमले के बारे में नहीं पता था. मुझे लोगों के बारे में कुछ नहीं पता था. मैं इसमें शामिल नहीं था और मुझे पता था कि उन्होंने एक नाव ली थी, लेकिन मैं यह कहूंगा कि उन्होंने हमला किया था.' राष्ट्रपति ने कहा कि हेगसेथ हमले से संतुष्ट थे लेकिन उन्हें दूसरे हमले के बारे में पता नहीं था, जिसमें दो लोग शामिल थे. हेगसेथ ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने पहला हमला लाइव देखा था, लेकिन फिर अपनी अगली मीटिंग में चले गए. वॉर सेक्रेटरी ने आगे कहा कि उन्हें दूसरे हमले के बारे में कुछ घंटे बाद पता चला और उन्होंने किसी भी जिंदा को नहीं देखा. हेगसेथ ने कहा, 'कुछ घंटों बाद मुझे पता चला. मैंने खुद किसी को जिंदा नहीं देखा क्योंकि उस चीज में आग लगी हुई थी. इसे युद्ध का कोहरा कहते हैं. व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के कमांडर एडमिरल फ्रैंक एम 'मिच' ब्रैडली ने दूसरे हमले का आदेश दिया था.

झारखंड में नया सियासी बम—पोस्टर विवाद और हेमंत सोरेन की दिल्ली यात्रा ने बढ़ाई अटकलें

रांची.  अब नया बम झारखंड में हेमंत अब जीवंत होंगे… 14 नवंबर को बिहार चुनाव परिणाम के तीसरे दिन 17 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किया था. उस समय से ही यह कयास लगने लगे थे कि संभव है कि झारखंड में कुछ राजनीतिक उथल-पुथल हो. इस एक लाइन ने पूरे झारखंड में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया. वजह भी साफ थी- बिहार चुनाव के दौरान सीट शेयरिंग को लेकर झामुमो और महागठबंधन में जारी तनातनी ने पहले ही संकेत दे दिया था कि रिश्तों में दरार गहरी हो रही है. बिहार सीमा से लगी 12 सीटों पर लड़ने का दावा करने वाला झामुमो जब सीटें नहीं मिलीं तो उसने सीधा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. तब से ही चर्चा थी कि – बिहार की हार, झारखंड की राजनीति बदल देगी! इसकी पृष्ठभूमि बनी और सियासी कहानी क्रमवार बढ़ती गई है. बिहार में हार… और झारखंड में वार? दरअसल, इसकी वजह बिहार चुनाव के दौरान से ही दिख रही थी, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर जिस तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन के दलों में समन्वय की कमी दिखी, वह कुछ तो संकेत कर रही थी. बिहार झारखंड सीमा से लगी 12 सीटों पर झामुमो चुनाव लड़ने का दावा कर रहा था तो दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से झामुमो के लिए किसी भी प्रकार की तवज्जो नहीं देना, इसकी पृष्ठभूमि तैयार करता हुआ दिखा. बाद में यह भी चर्चा हुई कि जेएमएम को 3 सीटें दिए जाने पर सहमति बन गई है. लेकिन, तभी खबर आई कि झामुमो ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है. महागठबंधन में सीटें नहीं मिलने पर जेएमएम ने उम्मीदवार खड़े नहीं किए और बिहार चुनाव बाद झारखंड में गठबंधन को लेकर समीक्षा यानी रिव्यू की बात कही थी. बिहार में चुनाव हुए फिर परिणाम भी आए और महागठबंधन की करारी हार हुई. इसके बाद अजय आलोक के इस पोस्ट ने झारखंड में सियासी सरगर्मी भी तेज कर दी. हेमंत-कल्पना दिल्ली में, झारखंड में हलचल इसके बाद तो भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की लगातार चुप्पी और फिर महागठबंधन को लेकर हेमंत सोरेन की लंबी खामोशी और संशय के माहौल में पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली दौरा और वहां कथित तौर पर भाजपा नेताओं से गुप्त मुलाकात… जाहिर है कयासों ने सियासी कहानी गढ़ दी है. दरअसल, इसकी पृष्ठभूमि भी साफ-साफ दिख रही है क्योंकि, पिछले कुछ दिनों से हेमंत सोरेन और कांग्रेस की दूरी साफ-साफ दिख रही है. मुख्यमंत्री का सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होना और कार्यक्रम कैंसल होना भी कुछ तो संकेत कर रहा था. बता दें कि पिछले साल इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिला-जिला जाते थे और जिक्र करते थे कि सरकार AC कमरे से नहीं गांव से चल रही है, पर इस बार किसी जिले में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम नहीं हुआ. महागठबंधन में दरार की चर्चा तेज बात और आगे तब बढ़ती दिखी जब दुमका में फ्लाईंग इंस्टिट्यूट के उद्घाटन कार्यक्रम के मौके पर सीएम हेमंत सोरेन के मंच पर सहयोगी कंग्रेस एवं राजद के मंत्री और विधायक नदारद रहे. बता दें कि इससे पहले महागठबंधन में जब भी मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम किया तो दोनों दल के मंत्री मौजूद रहते थे. इसके आगे की कहानी बढ़ी तो मोरहाबादी मैदान में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के पोस्टर से राजद और कांग्रेस के नेताओं के पोस्टर नहीं लगे थे.पोस्टर नहीं लगने के बाद कांग्रेस और राजद के कुछ नेताओं के बीच यह बात चर्चा का विषय रही. इसके बाद तो झारखंड में इस सियासी सस्पेंस को और मजबूत किया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी और उनके दिल्ली दौरे ने. क्या झारखंड की सियासत में परिवर्तन की तैयारी है? पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हेमंत सोरेन का दिल्ली में कई दिनों तक रहना और वहां भाजपा नेताओं के साथ कथित गोपनीय मुलाकातों की खबरें, गठबंधन में असहजता के संकेत देती दिख रही हैं. उसके बाद सरकार-आपके-द्वार जैसे बड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी, दुमका फ्लाइंग इंस्टिट्यूट के मंच से कांग्रेस-राजद के नेताओं की दूरी और सरकारी पोस्टरों से सहयोगियों की गायब तस्वीरों ने सवालों को और गहरा कर दिया. अब परिस्थिति इस मोड़ पर है कि सियासत सिर्फ अफवाहों पर नहीं चल रही, बल्कि घटनाएं खुद कहानी लिख रही हैं. फिलहाल स्थिति साफ नहीं है और न ही किसी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि, लेकिन सत्ता गलियारों की भाषा बताती है कि झारखंड की राजनीति अगले कुछ दिनों शांत नहीं रहने वाली.

हाईकोर्ट का फैसला: अनुसूचित जाति–जनजाति आरक्षण का लाभ केवल मूल धर्म की स्थिति में मान्य

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभ का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि यह लाभ केवल हिंदू धर्म में रहने वाले व्यक्तियों को ही प्राप्त हो सकता है. हाई कोर्ट के जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने कहा कि धर्म बदलने के बाद भी अनुसूचित जाति का लाभ लेना संविधान के साथ धोखा है. कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए इस पर कानूनी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए. चार माह में जांच कर कार्रवाई का आदेश हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया है कि धर्म बदल चुके हिंदुओं की ओर से SC लाभ लिए जाने के मामलों की चार माह में जांच करें और जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही महाराजगंज के डीएम को विशेष रूप से निर्देश दिया गया है कि ईसाई धर्म अपना चुके व्यक्ति की ओर से खुद को हिंदू दिखाने के मामले की तीन माह में जांच कर कार्रवाई की जाए. केंद्र व राज्य सरकार को भी निर्देश इसके साथ ही कोर्ट ने निम्न अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिए: 1. भारत सरकार के कैबिनेट सचिव 2. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव 3. अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग 4. प्रमुख/अपर मुख्य सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग याची जितेंद्र साहनी की याचिका खारिज यह निर्णय जितेंद्र साहनी की याचिका पर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने धर्म परिवर्तन के आरोप में एसीजेएम कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किए जाने की मांग की थी. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची चाहे तो अधीनस्थ अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दे सकता है. कोर्ट ने हिंदू कौन है, इसका स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, आर्य समाजी आदि हिंदू परंपरा के अंतर्गत आते हैं. जो व्यक्ति मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है, वह हिंदू माना जाता है. SC की सुविधाएं केवल हिंदू (और संबंधित धर्मों) को ही दी जाती हैं. धर्म बदलने के बाद व्यक्ति इन लाभों का हकदार नहीं रहता है. सुप्रीम कोर्ट के इस केस का दिया हवाला सुप्रीम कोर्ट के C. Selvarani मामले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लाभ लेने के उद्देश्य से धर्मांतरण करना संविधान के साथ धोखा बताया गया है. याची पर आरोप है कि उसने गरीबों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया. साथ ही हिंदू देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कीं और धार्मिक शत्रुता भड़काई. ग्राम मथानिया लक्ष्मीपुर एकडंगा के याची पर आरोप है कि उसने जीसस क्राइस्ट की स्पीच के लिए गरीबों का धर्म परिवर्तन कराया है. SC/ST एक्ट का मकसद भी स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने कहा कि SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम का उद्देश्य उन समुदायों की रक्षा करना है. जो ऐतिहासिक रूप से जातीय भेदभाव का शिकार रहे हैं, उनके लिए ये एक्ट है. इसलिए इस संरक्षण को उन लोगों तक नहीं बढ़ाया जा सकता, जिन्होंने ऐसा धर्म अपना लिया है जहां जाति व्यवस्था मान्य नहीं है.

मध्यप्रदेश में सरकारी हवाई खर्च 90 करोड़ के पार, मेंटेनेंस पर ही 45 करोड़ रुपए खर्च

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले 11 महीनें में 90 करोड़ रुपए का हवाई सफर कर डाला. जबकि पिछले 4 सालों में हवाई यात्राओं पर 290 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. पिछले छह सालों में विमान किराए की राशि में करीबन 80 फीसदी की बढोत्तरी हुई है. साल 2019 में विमान के किराए पर 1.63 करोड़ रुपए खर्च होते थे, जो साल 2025 में बढ़कर 90.7 करोड़ रुपए पहुंच गया है. विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय के सवाल के जवाब में यह जानकारी सरकार ने विधानसभा में दी है. एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि, 'भुगतान मद में बजट राशि न होने की वजह से 15.30 करोड़ का भुगतान अभी बाकी है. मेंटेनेंस पर खर्च हुए 45 करोड़ मध्य प्रदेश सरकार के पास अभी 1 शासकीय हेलीकॉप्टर है, जिसका हवाई यात्राओं में उपयोग होगा है. जबकि एक अन्य विमान 2020 में ग्वालियर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. विधानसभा में सरकार द्वारा जानकारी दी गई कि राज्य सरकार के पास मौजूदा हवाई वाहन के रखरखाव पर साल 2011-12 से अभी तक 45.24 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है. वहीं इस दौरान इसके ईंधन खर्च पर 11.05 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. इस हेलीकॉप्टर पर साल 2022-23 ने सबसे ज्यादा उड़ान भरी. इस साल इसमें 14 करोड़ रुपए का ईंधन खर्च हुआ. इसी साल इसके मेंटेनेंस पर भी 10.49 करोड़ हुए खर्च हुए. विमान कंपनियों को चुकाए 290 करोड़ जानकारी में बताया गया कि, राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2021 से लेकर नंवबर 2025 के दौरान विमान किराए पर 290 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई. वहीं इस साल 2025 में जनवरी से लेकर नवंबर माह के दौरान निजी विमान कंपनियों पर 90.7 करोड़ रुपए की राशि हवाई उड़ान में खर्च की गई. हवाई उड़ान में खर्च की राशि में पिछले 4 सालों के दौरान भारी बढोत्तरी हुई है. साल 2019 में विमान किराए पर सिर्फ 1.63 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई थी, लेकिन अब बढ़कर 90.7 करोड़ रुपए पहुंच गई है. 2022-23 से बढ़ाया विमान का किराया कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया कि, ''सरकार ने उनके सवाल में जानकारी दी है कि 2022-23 से 2024-25 तक विमान किराए में 20 से 30 फीसदी की बढोत्तरी की गई है. 4 अप्रैल 2023 को आयुक्त विमानन द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि पोस्ट कोविड में पर्यटन बढ़ने के कारण विमान की मांग बढ़ गई है. कोविड के कारण विमान हेलीकॉप्टर का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोकसभा चुनाव होने से विमान किराए की मांग बढ गई है. साथ ही इनके रखरखाव और ईंधन में बढोत्तरी हुई है, इसलिए किराया बढ़ाया जाना तय किया गया है. इस आधार पर जिन विमान का किराया 2022-23 में 4.45 लाख प्रतिघंटा उसे बढ़ाकर 2024 में 5.70 लाख प्रति घंटा किया गया और जिन विमान का किराया 3.5 लाख प्रति घंटा था, उसे बढ़ाकर 4.75 लाख प्रतिघंटा किया गया.''

फार्मा दिग्गज Corona का IPO लॉन्च—अगले हफ्ते खुलेगा इश्यू, प्राइस बैंड नोट करें

 नई दिल्ली आईपीओ मार्केट (IPO Market) में इस साल बहार देखने को मिल रही है. एक के बाद एक कई कंपनियां अपने इश्यू लॉन्च कर रही हैं, जिनमें कई निवेशकों को ताबड़तोड़ मुनाफा भी करा रहे हैं. अब लिस्ट में एक फार्मा कंपनी भी शामिल होने वाली है, जिसका नाम है कोरोना रेमेडीज (Corona Remedies), इस इश्यू को अगले हफ्ते सब्सक्रिक्शन के लिए ओपन किया जाएगा. इसके प्राइस बैंड, लॉट साइस समेत तमाम डिटेल्स सामने आ चुकी हैं.  कब खुलेगा Corona का आईपीओ? फार्मा कंपनी कोरोना रेमेडीज, प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रिसकैपिटल से समर्थित है और इसका आईपीओ (Corona IPO) अगले हफ्ते की शुरुआत में 8 दिसंबर को ओपन होगा. निवेशक इसमें तीन दिन यानी 10 दिसंबर तक पैसे लगा सकेंगे. क्लोज होने के बाद इस आईपीओ का अलॉटमेंट (IPO Allotment) 11 दिसंबर को होगा, जबकि शेयर मार्केट (Stock Market) के दोनों इंडेक्स बीएसई और एनएसई पर Corona Share की लिस्टिंग 15 दिसंबर को होगी.  655Cr का आईपीओ, ये है प्राइस बैंड कोरोना रेमेडीज के आईपीओ के बारे में आगे की जानकारी देखें, तो ये एक बुकबिल्ड इश्यू हैं और इसके तहत ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए शेयरों की पेशकश की जाएगी. कंपनी 61,71,101 शेयर बिक्री के लिए पेश करेगी. इसके शेयरों के लिए प्राइस बैंड की बात करें, तो ये 1008-1062 रुपये तय किया गया है और इस हिसाब से इस आईपीओ का साइज 655.37 करोड़ रुपये हो जाता है.  कम से कम लगाने होंगे इतने रुपये इस आईपीओ के लॉट साइज की बात करें, तो कंपनी ने 14 शेयरों का Lot तय किया है. इसका मतलब ये होता है कि अगर कोई निवेशक इस आईपीओ में निवेश करना चाहता है, तो उसे कम से कम इतने शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अब अपर प्राइस बैंड के हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो इसके लिए मिनिमम निवेश 14,868 रुपये का करना होगा. निवेशकों अधिकतम 183 शेयरों या 13 लॉट के लिए बोली लगा सकेंगे और मैक्सिमम निवेश 1,93,284 रुपये करना होगा.  तेजी से बढ़ा कंपनी का कारोबार अहमदाबाद में मुख्यालय वाली कोरोना रेमेडीज एक फार्मा कंपनी है, जो मेडिकल प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हुई है. बीते साल के अंत तक इसके कंपनी के पोर्टफोलियो में महिला स्वास्थ्य, हार्ट एंड डायबिटीज देखभाल समेत 67 मेडिसिन ब्रांड शामिल थे. रिपोर्ट्स की मानें तो घरेलू मार्केट में इसका कारोबार तेजी से ग्रोथ कर रहा है. क्रिसिल के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक ये टॉप-30 फार्मा कंपनियों में दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी रही थी.