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आज का राशिफल 23 दिसंबर 2025: हनुमान जी की विशेष कृपा इन राशियों पर, किसकी चमकेगी किस्मत?

मेष राशि- आज मन में उतार-चढ़ाव रह सकता है। किसी बात को लेकर जल्दी रिएक्शन देने से बचें। कामकाज में जिम्मेदारी बढ़ सकती है, लेकिन आप उसे संभाल लेंगे। पैसों के मामले में आज जोखिम न लें। घर के किसी बड़े की सलाह काम आ सकती है। शाम के समय मन थोड़ा हल्का होगा। वृषभ राशि- आज का दिन सामान्य लेकिन सुकून देने वाला रहेगा। घर-परिवार से जुड़ी कोई छोटी खुशी मिल सकती है। काम में धीमी लेकिन स्थिर प्रगति होगी। खर्च करने से पहले ज़रूरत और शौक में फर्क समझ लें। सेहत ठीक रहेगी, बस खानपान पर ध्यान रखें। मिथुन राशि- आज बातचीत में सावधानी ज़रूरी है। किसी की बात गलत तरीके से समझी जा सकती है। काम में दौड़भाग रहेगी, लेकिन दिन के अंत तक राहत मिलेगी। पुराने काम निपटाने का अच्छा मौका है। मोबाइल या स्क्रीन से थोड़ी दूरी बनाना फायदेमंद रहेगा। कर्क राशि- आज भावनाएं थोड़ी ज्यादा हावी रह सकती हैं। परिवार या रिश्तों से जुड़ा कोई फैसला सोच-समझकर लें। काम के मामले में आपकी मेहनत नजर आएगी। किसी करीबी का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। नींद पूरी लेने की कोशिश करें। सिंह राशि- आज दिन थोड़ा चुनौती वाला हो सकता है। हर बात अपने मन के मुताबिक नहीं चलेगी। काम में धैर्य और समझदारी दिखाने की ज़रूरत है। किसी से टकराव से बचें। शाम के समय हालात बेहतर होंगे और आत्मविश्वास लौटेगा। कन्या राशि- आज आपके लिए अच्छा दिन है। अटके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। पैसों से जुड़ी कोई राहत मिल सकती है। काम में फोकस बना रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन लापरवाही न करें। कोई अच्छी खबर मन खुश कर सकती है। तुला राशि- आज मन असमंजस में रह सकता है। किसी फैसले को लेकर दो राय हो सकती है। जल्दबाज़ी से नुकसान हो सकता है, इसलिए समय लें। रिश्तों में साफ़ और सीधी बात करना बेहतर रहेगा। खर्च पर नियंत्रण रखें। वृश्चिक राशि- आज मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। काम का दबाव रहेगा, लेकिन आप संभाल लेंगे। किसी पुराने विवाद का हल निकल सकता है। गुस्से में कुछ भी कहने से बचें। शाम को थोड़ा आराम जरूरी रहेगा। धनु राशि- आज नई सोच और नए प्लान बन सकते हैं। काम या पढ़ाई में बदलाव की इच्छा जागेगी। किसी दोस्त या करीबी से मदद मिल सकती है। खर्च बढ़ सकता है, लेकिन ज़रूरी होगा। बाहर जाने या छोटी यात्रा का योग बन सकता है। मकर राशि- आज जिम्मेदारियां बढ़ी हुई रहेंगी। काम को टालने से बचें, वरना दबाव और बढ़ेगा। परिवार में आपकी राय को महत्व मिलेगा। सेहत में हल्की थकान रह सकती है, खुद को आराम दें। कुंभ राशि- आज दिन मिलाजुला रहेगा। काम में मन भटक सकता है, लेकिन कोशिश करें कि फोकस बनाए रखें। किसी दोस्त की परेशानी में मदद करनी पड़ सकती है। पैसों के मामले में सोच-समझकर कदम उठाएं। मीन राशि- आज मन शांत और संतुलित रहेगा। जो है, उसी में संतोष महसूस होगा। रिश्तों में अपनापन बढ़ेगा। काम में धीरे-धीरे सुधार दिखेगा। कोई छोटी-सी खुशी दिन को खास बना सकती है।

राज्यसभा की 75 सीटों के गणित ने बढ़ाई शरद पवार और उपेंद्र कुशवाहा की वापसी की चुनौती

नई दिल्ली साल 2025 अब अलविदा हो रहा है और 2026 में दस्तक के लिए तैयार हैं. भारत के सियासी परिदृश्य के लिहाज से 2026 को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है. दक्षिण भारत में केरल और तमिलनाडु से लेकर पूर्वोत्तर के असम और बंगाल सहित पांच राज्यो में विधानसभा चुनाव होंगे. इस दौरान उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक में राज्यसभा चुनाव की असल इम्तिहान होगा, जो संसद के उच्च सदन की तस्वीर काफी बदल जाएगी? साल 2026 में अप्रैल से लेकर जून और नंबर तक तकरीबन 75 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने है, जिसमें बिहार की पांच और उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीट है. 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव एनडीए और विपक्षी दलों के 'इंडिया गठबंधन' दोनों के लिए अहम माने जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शरद पवार और कई केंद्रीय मंत्री जैसे हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा, रवनीत सिंह बिट्टू, जॉर्ज कुरियन जैसे दिग्गज नेताओं के राज्यसभा का कार्यकाल 2026 में खत्म हो जाएगा. ऐसे में देखना है कि किस दिग्गज नेता की वापसी होती है और कौन से नए चेहरे की संसद में एंट्री होती है? 2026 में 75 राज्यसभा सीटें हो रही खाली साल 2026 में अप्रैल से लेकर जून और नवंबर तक करीब 75 राज्यसभा की सीटें खाली हो रही है. महाराष्ट्र की 7 राज्यसभा सीटें अप्रैल में खाली हो रही है तो बिहार की पांच सीटें भी अप्रैल में खाली हो जाएंगी. इसके अलावा झारखंड की दो सीटें, आंध्र प्रदेश की 4, झारखंड की 2, तेलंगाना की एक, पश्चिम बंगाल की 5, तमिलनाडु की 6 राज्यसभा सीट खाली हो रही है. उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटें है, जो नवंबर तक खाली होंगी. इसके अलावा मध्य प्रदेश से लेकर असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर और मिजोरम जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों से चुनकर आए राज्यसभा का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है. उत्तराखंड और हिमाचल की भी एक-एक राज्यसभा सीट खाली हो रही है. इसके अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सीटों का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा. राज्यसभा में एनडीए के पास 129 सीटें हैं जबकि विपक्ष के पास 78 सीटें हैं. इसलिए ये चुनाव उच्च सदन में शक्ति संतुलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इन चुनावों से पता चलेगा कि राज्यसभा में किस पार्टी का दबदबा रहेगा. बिहार में किसकी होगी उच्च सदन से छुट्टी बिहार की पांच राज्यसभा सीटें 9 अप्रैल 2026 को खाली हो रही हैं, जिसके चलते मार्च तक चुनाव करा लिए जाएंगे. बिहार से राज्यसभा के जिन 5 नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें आरजेडी के प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह), जेडीयू के हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्यसभा चुनाव के लिए भी सीन बदल गया है. एक राज्यसभा सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है. इस लिहाज से बीजेपी और जेडीयू दो-दो सीटें जीतने की हैसियत में है तो एक सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है. बीजेपी से राज्यसभा के लिए कई दावेदार है. ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की राज्यसभा में वापसी पर संकट गहरा सकता है. महाराष्ट्र में किसे मिलेगा राज्यसभा का मौका महाराष्ट्र में सात सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही है. शरद पवार (NCP-SP), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना UBT) और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले जैसे बड़े नेताओं के उच्च सदन का कार्यकाल खत्म हो रहा है. 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सीन बदल गया है. शरद पवार और प्रियंका चतुर्वेदी की संसद में वापसी पर ग्रहण लग सकता है. महाराष्ट्र में महायुति आसानी से 7 सीटें जीत लेगी और विपक्ष के खाते में सिर्फ एक सीट जा सकती है. ऐसे में कांग्रेस क्या खुद अपने नेता को राज्यसभा भेजी या फिर शरद पवार या उद्धव ठाकरे की पार्टी को भेजने के लिए रजामंद होगी. महाविकास अघाड़ी में सबसे ज्यादा विधायक कांग्रेस के पास है. यही वजह है कि आगामी राज्यसभा चुनाव काफी रोचक होने जा रहा है. खड़गे और देवगौड़ा में कौन करेगा वापसी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कर्नाटक से राज्यसभा सदस्य हैं. उनका कार्यकाल 25 जून 2026 को खत्म हो रहा है. मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी रिटायर होंगे, वे भी कर्नाटक से ही हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 25 जून 2026 को रिटायर होंगे। एचडी देवेगौड़ा और हरिवंश 9 अप्रैल 2026 को रिटायर होंगे. कर्नाटक में चार राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसमें से तीन सीटें कांग्रेस जीत सकती है. विपक्ष के खाते में सिर्फ एक सीट आनी है. बीजेपी अपने किसी नेता को संसद भेजेगी या फिर जेडीएस को समर्थक करेगी. यूपी में 10 सीटों पर राज्यसभा चुनाव उत्तर प्रदेश से मोदी सरकार के दो मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी रिटायर होने वाले हैं. उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है. इनके साथ ही उत्तर प्रदेश से 8 और सदस्य भी रिटायर होंगे. इन 10 सीटों में 8 सीटें बीजेपी और एक सीट सपा और एक बसपा के पास है. 2026 में रिटायर होने वाले राज्यसभा सांसदों में बृजलाल, सीमा द्विवेदी, चंद्रप्रभा उर्फ गीता, हरदीप सिंह पुरी, रामजी, दिनेश शर्मा, नीरज शेखर, अरुण सिंह और बीएल वर्मा का नाम शामिल हैं. सपा से प्रोफेसर रामगोपाल यादव हैं. यूपी विधानसभा की मौजूदा संख्याबल की बात करें तो बीजेपी के 258, सपा के 103, अपना दल के 13, रालोद के 9, निषाद पार्टी के 5, सुभासपा के 6, कांग्रेस के 2, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के 2 बसपा 1 और सपा के बागियों कुल 3 सदस्य हैं. यानी कुल 402 सदस्यों की संख्या पूरी है और 1 सीट रिक्त है. इस आधार पर एक राज्यसभा सीट के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है.इस गणित के लिहाज से सपा 2 और बीजेपी 8 राज्यसभा सीटें जीत सकती है. बसपा राज्यसभा में जीरो पर सिमट सकती है. जाने किसकी होगी वापसी और किसकी नहीं कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए रवनीत सिंह बिट्टू भी रिटायर होने वाले हैं. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था. पंजाब के लुधियाना से चुनाव … Read more

ट्रेन से सफर हुआ महंगा: लंबी दूरी का किराया बढ़ा, ज्यादा सामान ले जाना पड़ेगा भारी

नई दिल्‍ली.  भारतीय रेलवे ने यात्रियों को दोहरा झटका दिया है. एक तरफ लंबी दूरी की ट्रेनों में किराया बढ़ाया जा रहा है, तो दूसरी तरफ तय वजन से ज्यादा सामान ले जाने पर एक्‍शन की तैयारी कर ली गयी है. यानी इस साल के अंत में सफर करना और तय वजन से ज्‍यादा सामान ले जाना दोनों भारी पड़ने जा रहा है. हालांकि 215 किमी. से कम दूरी की जनरल टिकट से यात्रा और एमएसटी में कोई बढ़ोत्‍तरी नहीं हुई है. दोनों ही तरह से भारतीय रेलवे को राजस्‍व में इजाफा होगा. भारतीय रेलवे ने 26 दिसंबर से किराए में बढ़ोतरी का फैसला किया है. जनरल क्लास में 215 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर 1 पैसा प्रति किलोमीटर अतिरिक्त लगेगा, जबकि मेल या एक्सप्रेस की स्लीपर और सभी एसी क्लास में 2 पैसे प्रति किलोमीटर इजाफा होगा. उदाहरण के लिए, 500 किमी की स्लीपर यात्रा पर करीब 10 रुपये ज्यादा देने होंगे. रेलवे अतिरिक्‍त राजस्‍व से क्‍या करेगा रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक (सूचना एवं प्रसार) दिलीप कुमार ने कहा कि 215 किमी से कम दूरी की जनरल क्लास, सबअर्बन ट्रेनें और मासिक सीजन टिकट पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इस बढ़ोतरी से रेलवे को करीब 600 करोड़ रुपये अतिरिक्त आएंगे, जो स्टेशनों और ट्रेनों में सुविधाएं और सुरक्षा बढ़ाने पर खर्च होंगे. रेलवे का मकसद है कि रोजाना सफर करने वाले यात्रियों और कम व मध्यम आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और उनकी यात्रा सस्ती बनी रहे. तय सामान से ज्‍यादा ले जाने पर छह गुना अधिक जुर्माना देना होगा. क्यों करनी पड़ी बढ़ोत्‍तरी रेल मंत्रालय के अनुसार पिछले दस वर्षों में रेलवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है और अब सेवाएं दूर-दराज इलाकों तक पहुंच रही हैं. यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई है. इससे कर्मचारियों पर खर्च बढ़कर 1.15 लाख करोड़ रुपये और पेंशन पर खर्च करीब 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल खर्च 2.63 लाख करोड़ रुपये हो गया है. ज्‍यादा लगेज में क्‍या होगी सख्‍ती ट्रेनों में तय लगेज से ज्‍यादा सामान ले जाने पर एक्‍शन की तैयारी की रही है. यहां पर फ्लाइट जैसा एक्‍स्‍ट्रा सामान ले जाने पर ज्‍यादा चार्ज देना पड़ेगा. रेलवे के अनुसार अभी ट्रेन में तय वजन से ज्‍यादा सामान ले जाने पर आपके सहयात्री को परेशानी हो सकती है. इसी को ध्‍यान में रखते हुए ऐसे यात्रियों पर एक्‍शन लिया जा सकता है, जो तय वजन से ज्‍यादा सामान लेकर सफर कर रहे हैं. इस तरह यह फैसला यात्रियों की सुविधाजनक सफर के लिए लिया जा रहा है. रेल मंत्रालय के एडीजी धर्मेन्‍द्र तिवारी के अनुसार रेलवे के अनुसार एक्‍स्‍ट्रा चार्ज को लेकर कोई नया आदेश नहीं है, पुराना आदेश ही है. इसी को ओर प्रभावी बनाया जा रहा है. हर क्‍लास के लिए क्‍या है नियम ट्रेनों हर क्‍लास के लिए अलग वजह का नियम है, जनरल, स्‍लीपर और एसी के लिए वजन तय है. अगर आप ऐसी फर्स्‍ट क्‍लास से सफर कर रहे हैं तो एक यात्री 70 किलो तक वजह ले जा सकता है. इसके साथ ही 15 किलो अतिरिक्‍त सामान की छूट होती है. इसके अलावा अधिकतम बुकिंग कराकर 65 किलो लगेज पार्सल वैन में ले जा सकता है. इसी तरह सेंकेड ऐसी में 50 किलो के साथ 10 किलो की एक्‍स्‍ट्रा की छूट रहती है और 30 किलो बुक कराकर पार्सल वैन से ले जाया जा सकता है. थर्ड ऐसी या एसी चेयरकार में 40 किलो लगेज के साथ 10 किलो की छूट रहती है. पार्सल वैन में 30 किग्रा. बुकिंग कराकर साथ ले जा सकते हैं. स्‍लीपर क्‍लास के लिए क्‍या है नियम स्‍लीपर क्‍लास में 40 किग्रा. के साथ 10 किलो और लगेज ले जाने की छूट होती है. बुकिंग कराकर अतिरिक्‍त 70 किलो वजन तक ले जा सकते हैं. वहीं सेकेंड क्‍लास में 35 किग्रा. के साथ 10 किग्रा तक ले जा सकते हैं. वहीं बुक कराकर 60 किग्रा. अतिरिक्‍त लगेज पार्सल वैन से ले जा सकते हैं. रेलवे की नई गाइडलाइंस के अनुसार यात्री तय सीमा से अधिक और बिना बुक किया गया सामान ले जाते हुए कोई पकड़ा जाता है तो उसे सामान की बुकिंग का छह गुना भुगतान करना होगा.

NDA का दबदबा महाराष्ट्र निकाय चुनाव में, बीजेपी का प्रत्याशी 1 वोट से हारा

मुंबई  महाराष्ट्र निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (NDA) को बंपर जीत हासिल हुई है। 288 सीटों (246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों) के रिजल्ट में महायुति को 207 सीटों पर जीत मिली। रविवार रात तक स्टेट इलेक्शन कमीशन ने फाइनल रिजल्ट जारी कर दिए। गठबंधन में भाजपा 117 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 53 सीटें, NCP अजित को 37 सीटें मिलीं। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन 44 सीटों तक सीमित रहा। इसमें कांग्रेस कांग्रेस को 28 सीटें मिलीं, जबकि शरद पवार की NCP को केवल 7 और शिवसेना (UBT) को 9 सीटें हासिल हुईं। 32 सीटें अन्य को मिली हैं। गढ़चिरौली में वार्ड नंबर 4 में बीजेपी उम्मीदवार संजय मंडवगड़े केवल एक वोट से चुनाव हार गए। लास्ट काउंटिंग के बाद उन्हें 716 वोट मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी श्रीकांत देशमुख को 717 वोट मिले। दरअसल, महाराष्ट्र की 288 नगर परिषदों और नगर पंचायत के लिए दो चरणों में चुनाव हुआ था। पहले चरण में 2 दिसंबर को 263 निकायों में मतदान हुआ था। बाकी 23 नगर परिषदों और कुछ खाली पदों पर 20 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। धुले की डोंडाइचा नगर परिषद और सोलापुर की उंगर नगर पंचायत में अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव निर्विरोध हुआ था। जलगांव जिले की जामनेर नगर परिषद में भी अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला नहीं हुआ था। तीनों पदों पर भाजपा ने निर्विरोध जीत हासिल की। पीएम ने बधाई दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महायुति को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र के मतदाताओं का धन्यवाद किया और इसे विकास पर जनता के भरोसे से जोड़ा। गृहमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को बधाई दी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिणामों को सुशासन और विकास की राजनीति की जीत बताया। BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसे ऐतिहासिक सफलता कहा और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजित पवार और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण को बधाई दी। लोहा नगर परिषद में एक ही परिवार के 6 लोग हारे लोहा नगर परिषद में बीजेपी की फैमिली पैक रणनीति फेल हो गई। यहां अध्यक्ष पद के लिए उसके उम्मीदवार गजानन सूर्यवंशी और उनके पांच रिश्तेदार हार गए। CM फडनवीस बोले- भाजपा पार्षद 1602 से बढ़कर 3325 हुए वहीं, निकाय चुनाव में महायुति की जीत पर सीएम देवेंद्र फडणवीस ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा- नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और महायुति को मिली जबरदस्त सफलता के लिए मैं महाराष्ट्र की जनता का आभार व्यक्त करता हूं। 2017 में 94 नगरपालिकाओं की तुलना में इस बार हमने 129 नगरपालिकाओं (45 प्रतिशत) में जीत हासिल की है। फडणवीस ने कहा कि महायुति के तौर पर हमने 215 नगरपालिकाएं (74.65 प्रतिशत) जीती हैं। 2017 में भाजपा के 1602 पार्षद थे। अब बढ़कर 3325 हो गए हैं। पार्षद की कुल संख्या 6952 है, इनमें से महायुति के 4331 पार्षद जीते हैं। इस बीच आइए आपको महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव की 5 पांच बातें बताते हैं… महायुति गठबंधन को मिली शानदार जीत महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति गठबंधन को शानदार जीत मिली है। बता दें कि इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शामिल हैं। महायुति गठबंधन ने नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनावों में दबदबा बनाया और 288 नगर परिषद अध्यक्ष पदों में से 207 पर जीत हासिल की। वहीं, विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) सिर्फ 44 सीटों तक ही सीमित रह गई, जिससे जमीनी स्तर पर सत्ताधारी गठबंधन की संगठनात्मक बढ़त साफ दिखती है। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी BJP विधानसभा चुनाव के जैसे ही इस स्थानीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस स्थानीय निकाय निकाय चुनाव में बीजेपी ने 117 नगर पालिका अध्यक्ष पदों और 3,300 से ज़्यादा पार्षद सीटों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। किस मुद्दे का रहा असर गौरतलब है कि बीजेपी और उसके सहयोगियों ने बार-बार नतीजों को विकास-केंद्रित अभियान के समर्थन के तौर पर पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नतीजे जन-केंद्रित विकास में जनता के भरोसे को दिखाते हैं, जबकि फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन ने निजी हमलों से बचते हुए शासन, इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरों और कस्बों के लिए भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। MVA ने मानी हार कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और NCP (SP) वाली महा विकास अघाड़ी ने हार स्वीकार कर ली, लेकिन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं थे, जबकि शिवसेना (UBT) नेताओं ने पैसे की ताकत और EVM में हेरफेर का आरोप लगाया, इन दावों को सत्ताधारी गठबंधन ने खारिज कर दिया। अजित पवार की एनसीपी ने प्रमुख गढ़ों में कब्जा रखा बरकरार विधानसभा चुनाव के तरह ही, महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में भी अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP ने पुणे जिले और बारामती में खास ताकत दिखाई। एनसीपी ने ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल की। यह प्रदर्शन राज्य स्तर पर गठबंधन बदलने के बावजूद, छोटे शहरी केंद्रों पर पवार की पकड़ को मजबूत करता है।   संजय राउत बोले- चुनाव में पैसों की बारिश हुई शिवसेना (उद्धव) सांसद संजय राउत ने कहा- BJP को 120-125 सीटें मिलीं, शिंदे ग्रुप को 54 मिलीं और अजित पवार को 40-42 सीटें मिलीं। ये नंबर असेंबली वाले ही हैं, है ना? वही मशीन, वही सेटिंग और वही पैसा। यही हमारी डेमोक्रेसी है। नंबरों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। BJP ने मशीनें उसी तरह सेट की हैं। इसीलिए वही नंबर दिख रहे हैं। उन्हें कम से कम नंबर तो बदलने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि इस इलेक्शन में पैसों की बारिश हुई। उस बारिश से कौन बचेगा? हमारे उगाए और बोए हुए खेत भी उसके आगे झुक गए हैं। BJP और शिंदे ग्रुप 30 करोड़ रुपए के बजट वाली म्युनिसिपैलिटी पर 150 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। राउत ने कहा कि अभी तक हमने म्युनिसिपल इलेक्शन में कैंपेनिंग के लिए हेलिकॉप्टर और प्राइवेट प्लेन का इस्तेमाल नहीं किया है। हमने ये इलेक्शन वर्कर्स पर छोड़ दिए थे, लेकिन यहां तो … Read more

ब्रजेश पाठक बोले: सपा शासन में अस्पतालों का ढांचा बेहद कमजोर, हालत थी तबेला जैसी

लखनऊ यूपी के उपमुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को विधानसभा में आरोप लगाया कि 2017 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार ने अस्पतालों को तबेला बनाकर रख दिया था। पाठक ने कहा, प्रदेश में निजी चिकित्सकों का परामर्श शुल्क एवं विभिन्न चिकित्सकीय जांचों आदि का रेट निर्धारित कर एक समान करने और उनमें मनचाही वृद्धि रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई नीति नहीं लाई गयी थी। प्रदेश में 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के नेतृत्‍व की सरकार थी। राज्य सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा विभाग संभाल रहे उपमुख्‍यमंत्री पाठक विधानसभा के प्रश्नकाल में सपा सदस्य समरपाल सिंह और अखिलेश के प्रश्नों का उत्‍तर दे रहे थे। सपा सदस्य समरपाल सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था बदहाल हो गई है और सरकारी चिकित्सक अपने घरों पर मरीजों का इलाज कर उनसे पैसे ऐंठते हैं। उन्‍होंने अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव बताया। आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर क्षेत्र से सपा विधायक अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि मरीजों को अस्पतालों में सुविधा नहीं मिलती और निजी अस्पतालों में भारी शुल्क लिया जाता है। अखिलेश ने अपने पूरक प्रश्न में पूछा कि क्या सरकार निजी अस्पतालों के एक समान शुल्क के लिए कोई नियम बनाएगी। ब्रजेश पाठक ने अखिलेश का जवाब देते हुए कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा जांच, उपचार और दवाएं मुफ्त दी जाती हैं। उन्‍होंने प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र और जिला अस्पतालों से लेकर उच्‍च स्‍तरीय सुविधा वाले सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाओं का ब्‍यौरा दिया। पाठक ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित विभिन्न चिकित्सालय में जन सामान्य को निशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत आयुष्मान कार्ड धारकों को सरकारी एवं निजी चिकित्सालय में निर्धारित पैकेज के अनुसार पांच लाख रुपये की सीमा तक निशुल्क चिकित्सा दी जाती है तथा 70 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदन योजना के अंतर्गत चिकित्सकीय लाभ प्रदान किया जाता है।

मंत्री सारंग ने पांढुर्णा के बोरगांव स्थित सेवा सहकारी समिति का किया औचक निरीक्षण

भोपाल सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को जिला पांढुर्णा प्रवास के दौरान बोरगांव स्थित सेवा सहकारी समिति का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समिति के प्रशासकीय कार्यों का विस्तार से अवलोकन किया तथा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण में लेखाकार द्वारा किए जा रहे संतोषजनक कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। वहीं समिति के प्रबंधक को सीपीपीपी (को-ऑपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के माध्यम से नए व्यवसायिक अवसर सृजित करने के निर्देश दिए। मंत्री सारंग ने कहा कि बोरगांव क्षेत्र में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। सहकारिता विभाग के नवाचार सीपीपीपी के तहत औद्योगिक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर तलाशे जाएं, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी सहकारिता को सशक्त करने और पैक्स को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम है। मंत्री सारंग ने सहकारिता विभाग के नवाचार सीपीपीपी के माध्यम से औद्योगिक कंपनियों के साथ साझेदारी के अवसर खोजने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीपीपीपी एक ऐसा आयाम है, जिससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी और साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मंत्री श्री सारंग के इस दौरे से सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संदेश गया है। निरीक्षण के बाद मंत्री सारंग ने सुरुचि मसाला के प्रबंधक के साथ बैठक कर किसानों की आय बढ़ाने एवं पैक्स को नए व्यवसायिक अवसरों से जोड़ने को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में इस बात पर विचार किया गया कि किसानों से कच्चा माल क्रय कर उसे सुरुचि मसाला जैसी कंपनियों को उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही अन्य कॉर्पोरेट संस्थाओं का चयन कर पैक्स को नए व्यवसायों से जोड़ने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया गया। मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है और इस दिशा में ठोस व व्यावहारिक प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।  

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत

केवल गीत नहीं, राष्ट्र की चेतना व साहस का मंत्र है वंदे मातरम् : योगी आदित्यनाथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा सत्र की मुख्यमंत्री योगी ने की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोलेः स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा का उद्घोष है वंदे मातरम् केवल काव्य नहीं बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है वंदे मातरम्ः मुख्यमंत्री योगी लखनऊ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस चर्चा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभवतः उत्तर प्रदेश पहली विधानसभा है, जहां इस ऐतिहासिक विषय पर विस्तार से चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, यह चर्चा किसी गीत की वर्षगांठ भर नहीं है, बल्कि भारत माता के प्रति राष्ट्रीय कर्तव्यों की पुनर्स्थापना का अवसर है। वंदे मातरम् का सम्मान केवल एक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराता है। यह राष्ट्र की आत्मा, संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है। उनके अनुसार, यह केवल काव्य नहीं था, बल्कि मातृभूमि की आराधना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश शासन में भी बना स्वतंत्रता की चेतना का स्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब वंदे मातरम् अपनी रजत जयंती मना रहा था, तब देश ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद अंग्रेजी शासन दमन और अत्याचार की पराकाष्ठा पर था। काले कानूनों के माध्यम से जनता की आवाज को दबाया जा रहा था, यातनाएं दी जा रही थीं, लेकिन वंदे मातरम् ने देश की सुप्त चेतना को जीवित रखा। जब देश इसकी रजत और स्वर्ण जयंती मना रहा था, तब भी ब्रिटिश शासन कायम था। उस समय स्वतंत्रता की चेतना को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस के अधिवेशन रहे, जहां वर्ष 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे स्वर दिया। यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया। विधानसभा में वंदे मातरम पर बोले माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति की, जिन्ना जबतक कांग्रेस में थे, वंदेमातरम कोई निर्णायक विवाद नही था। कांग्रेस छोड़ते ही जिन्ना ने इसे मुस्लिम लीग का औजार बनाया और गीत को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया। गीत वही रहा, लेकिन एजेंडा बदल गया : मुख्यमंत्री  15 अक्टूबर 1937 को इसी लखनऊ से मो अली जिन्ना ने वंदेमातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया और उस समय कांग्रेस अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। 20 अक्टूबर 1937 को नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस जी को पत्र लिखा और कहा इसकी पृष्टभूमि मुस्लिमों को असहज कर रही है : मुख्यमंत्री देश की आत्मा जगाने वाला गीत है वंदे मातरम् मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब वंदे मातरम् की शताब्दी आई, तब वही कांग्रेस सत्ता में थी, जिसने कभी देश की आत्मा जगाने वाले इस गीत को अपने मंच पर स्थान दिया था, मगर उसने देश पर आपातकाल थोपकर संविधान का गला घोंटने का कार्य किया। यह इतिहास का एक ऐसा कालखंड था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, आज जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रगीत के अमर रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जो सपना था, उसे नया भारत साकार करने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। इसी कारण यह चर्चा सदन में अत्यंत सामयिक है। 1857 से राष्ट्र चेतना के प्रवाह का माध्यम बना वंदे मातरम् मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हुआ। स्वातंत्र्य समर की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया।  औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का माध्यम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।  उन्होंने कहा कि भारत माता केवल भूभाग नहीं थी, बल्कि हर भारतीय की भावना थी। स्वाधीनता राजनीति नहीं, बल्कि साधना थी। 'सुजलाम, सुफलाम् मलयज-शीतलाम् शस्यश्यामलाम् मातरम्' की पंक्तियों ने भारतीय मानस में चेतना का संचार किया और भारत की प्रकृति, समृद्धि, सौंदर्य और शक्ति को एक साथ मूर्त रूप दिया।

हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ मनाया जाएगा गणतंत्र दिवस

अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक श्री चंचल शेखर ने बैठक लेकर सौंपी जिम्‍मेदारियाँ भोपाल हर साल की तरह इस साल भी हर्षोल्‍लास एवं धूम-धाम के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। प्रदेश का मुख्‍य समारोह 26 जनवरी को जहाँगीराबाद स्थित लाल परेड मैदान में आयोजित होगा। बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन 29 जनवरी को किया जाएगा। इन दोनों आयोजनों की तैयारी के सिलसिले में अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एस.ए.एफ श्री चंचल शेखर ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक ली। नवीन पुलिस मुख्यालय केभूतल स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक में श्री शेखर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियों को गणतंत्र दिवस की गरिमा को ध्‍यान में रखकर अंतिम रूप दें। उन्‍होंने गणतंत्र दिवस परेड के लिए विभिन्‍नईकाईयों से बल बुलाना, परेड मैदान की साफ सफाई, सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, दर्शकों और आमंत्रित अतिथियों की बैठक व्यवस्था सहित झांकी एवं चिकित्सा व्यवस्था आदि के लिए विभिन्न अधिकारियों को जिम्मेदारियाँ सौंपी। बीटिंग द रिट्रीट में बजने वाली धुनों का चयन, आतिशबाजी एवं विद्युत व्यवस्था के संबंध में भी उन्‍होंने आवश्‍यक निर्देश दिए और अधिकारियों को जवाबदेही भी सौंपी। बैठक में तय किया गया कि गणतंत्र दिवस समारोह के लिए परेड रिहर्सल 4 जनवरी से शुरू होगी। फुल ड्रेस फायनलरिहर्सल 24 जनवरी को की जाएगी। बैठक मेंपुलिस महानिरीक्षक एसएएफ श्री इरशाद वली, उप पुलिस महानिरीक्षक विसबलमध्‍य क्षेत्र श्री ओमप्रकाश त्रिपाठी, सेनानी 7 वीं वाहिनी श्री हितेश चौधरीसहित पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के पुलिस अधिकारी तथा लोक निर्माण विभाग, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, नगर निगम, महिला बाल विकास के अधिकारी मौजूद थे। ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ का आयोजन 29 जनवरी को होगा ’’बीटिंग दरिट्रीट’’ सैन्य व अर्द्ध सैन्य बलों की प्राचीन परम्परा है। युद्ध के बाद जब सैन्य टुकड़ियाँ वापस अपने कैम्पों में आती थीं तो तनाव कम करने के लिए बैण्ड वादन इत्‍यादि मनोरंजक एवं सांस्‍कृतिक कार्यक्रम रखे जाते थे। भारत में इस कार्यक्रम के साथ ही गणतंत्रदिवस के कार्यक्रमों का औपचारिक समापन होता है। मध्यप्रदेश में गणतंत्र दिवस समारोह का समापन 29 जनवरी को भोपाल के मोतीलाल नेहरु स्टेडियम में ’’बीटिंग द रिट्रीट’’ समारोह आयोजन के साथ होगा।  

ठंड, घना कोहरा और जहरीली हवा ने बढ़ाई दिल्लीवासियों की परेशानी, येलो अलर्ट लागू

नई दिल्ली दिल्ली और आसपास के सटे इलाकों में कड़ाके की सर्दी बढ़ गई है। न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, वहीं घने कोहरे ने आम लोगों की आवाजाही और जीवन को मुश्किल बना दिया है। दिल्ली–NCR क्षेत्र के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, ठंडी हवाओं की गति बढ़ने के बावजूद वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुँच चुकी है, जिससे स्वास्थ्य और यातायात दोनों पर असर पड़ रहा है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता अब भी बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है और प्रदूषण में कमी का नाम नहीं लिया जा रहा है। दिन-ब-दिन हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। हालांकि, सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। राजधानी में GRAP-4 की पाबंदियां लागू की गई हैं, लेकिन इनका असर फिलहाल सीमित नजर आ रहा है और हवा जहरीली बनी हुई है। आज भी दिल्ली के अधिकांश इलाके रेड जोन में हैं। दिल्ली-NCR में बढ़ती ठंड और हवाओं की रफ्तार बीते दो दिनों से दिल्ली–एनसीआर में ठंड लगातार बढ़ रही है और सुबह से शाम तक धूप नदारद है। पूरे क्षेत्र में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे दृश्यता कम हो गई है और ठिठुरन का एहसास बढ़ गया है। ठंडी हवाएं पहले 8 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थीं, लेकिन आज से इनकी गति बढ़कर लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। इन तेज हवाओं के कारण तापमान में और गिरावट महसूस की जा रही है, जिससे आम नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियां बढ़ गई हैं। ठंड का कोल्ड अलर्ट भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, फिलहाल शीतलहर की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन मौसम की गंभीरता को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। सुबह और शाम के समय घना कोहरा कई इलाकों में बना रहता है। ठंडी हवाओं के कारण शरीर में ठिठुरन बढ़ेगी, और बुजुर्गों व बच्चों के लिए जोखिम अधिक रहेगा। IMD ने लोगों से सलाह दी है कि वे सावधानी बरतें, सुबह जल्दी बाहर निकलने से बचें और हाईवे पर अनावश्यक यात्रा न करें, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना कम से कम हो। कुछ शहरों का तापमान, AQI और आगे का मौसम दिल्ली में अधिकतम तापमान 20 और न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 334 रहा। नोएडा में तापमान 22 से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच और AQI 328 दर्ज किया गया। गाजियाबाद में हालात सबसे गंभीर रहे, जहां AQI 444 से 484 तक पहुंच गया और तापमान 21 से 11 डिग्री सेल्सियस रहा। गुड़गांव में AQI 323 और ग्रेटर नोएडा में 432 रिकॉर्ड किया गया। IMD के अनुसार, 27 दिसंबर तक पूरे सप्ताह ठंड का असर बना रहेगा, और अधिकतम तापमान 19 तथा न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इस दौरान घना कोहरा और ठंडी हवाएं लगातार बनी रहेंगी। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी येलो या अन्य अलर्ट जारी किए जा सकते हैं। दिल्ली पर प्रदूषण की घनी चादर छा जाने से राजधानी की रफ्तार धीमी हो गई है। धुंध और स्मॉग के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है, जिसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सुबह और शाम के समय हालात और भी गंभीर हो जाते हैं। दूर से दिखाई देने वाली इमारतें और स्मारक अब मुश्किल से दिखाई दे रहे हैं। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत BS-6 मानक से नीचे की गाड़ियों के दिल्ली में प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही, निर्माण कार्यों पर रोक, औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके। दिल्ली में सर्दी लगातार बढ़ रही है और राजधानी में दो दिन से येलो अलर्ट जारी है। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए भी कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।