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नए साल के जश्न पर मौलाना की सख्त राय: इस्लाम में नाजायज, बिगड़ता है माहौल

 बरेली भारत समेत दुनियाभर में नए साल के जश्न की तैयारियां चल रही हैं। लोग नए साल को लेकर प्लानिंग कर बना रहे हैं। लेकिन इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबु्द्दीन रजवी बरेलवी ने मुसलमानों से नए साल का जश्न न मनाने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा है कि ये फिजुलखर्ची है। इस्लाम में इसकी मनाही है। मौलाना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मौलाना बरेलवी ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा नए साल पर जश्न मनाने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इस संबंध में स्पष्ट करना जरूरी है कि शरीयत-ए-इस्लामिया की रोशनी में नए साल का जश्न मनाना जायज नहीं है। इसका कारण यह है कि इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नया साल मोहर्रम माह से शुरू होता है, जबकि हिंदू कैलेंडर में नया वर्ष चैत्र मास से आरंभ होता है। 1 जनवरी को मनाया जाने वाला नया साल यूरोपीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है और यह ईसाई समुदाय के लोग ये जश्न मनाते हैं। मौलाना ने नौजवानों को दी नसीहत मौलाना ने कहा, 'जश्न क्या होता है? 31 दिसंबर की रात में फूहड़ता, हंगामा, शोर-शराबा, नाच-गाना और फिजूलखर्ची करना होता है जश्न का तरीका। शरीयत इसकी इजाजत नहीं देता है। इसलिए मुस्लिम नौजवान लड़के और लड़कियों से गुजारिश करूंगा कि वह कतई जश्न न मनाए। अगर कही से खबर मिली कि कुछ लड़के-लड़कियां जश्न मना रहे हैं तो उलमा-ए-किराम सख्ती से रोकेंगे। इस्लाम में खुदा के सिवा किसी और की पूजा हराम इससे पहले बरेलवी ने संतकबीरनगर में आयोजित धार्मिक सम्मेलन में कहा था कि इस्लाम मजहब पूरी तरह अपने उसूलों पर कायम है और हमारे समाज के लोग सिर्फ एक खुदा की ही इबादत करते हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस्लाम की बुनियादी शिक्षाओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कुछ संगठन और नेता सूर्य नमस्कार, धरती, नदी और पेड़-पौधों की पूजा करने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन इस्लाम में इन तमाम चीजों की पूजा करना शरीयत में हराम है।  

मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला प्रदेशव्यापी अभियान, एनडीपीएस और बीएनएस के तहत हुई सख्त कानूनी कार्रवाई

सीएम योगी के निर्देश पर एफएसडीए का बड़ा एक्शन, कोडीनयुक्त कफ सिरप की पैरेलल सप्लाई चेन ध्वस्त  – 52 जिलों में सघन जांच, 161 फर्मों पर एफआईआर, 36 जनपदों में अवैध डायवर्जन का हुआ खुलासा – कोडीन कफ सिरप का गैर-चिकित्सीय उपयोग सिद्ध, 700 करोड़ से अधिक की संदिग्ध आपूर्ति जांच के घेरे में – मुख्यमंत्री के निर्देश पर चला प्रदेशव्यापी अभियान, एनडीपीएस और बीएनएस के तहत हुई सख्त कानूनी कार्रवाई लखनऊ  योगी सरकार ने पिछले पौने नौ वर्षों में अवैध नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ताबड़तोड़ एक्शन ने अवैध नशे के सौदागरों की कमर तोड़ दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) को कोडिनयुक्त कफ सिरप एवं एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिये। इस पर तीन माह पहले अभियान शुरू किया।      कई प्रदेशों में विवेचना की गई और सुपर स्टॉकिस्ट के साथ होलसेलर के कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए विभाग ने कोडिनयुक्त कफ सिरप के अवैध डायवर्जन को लेकर देश का सबसे बड़ा क्रैक डाउन शुरू करने से पहले अंदरुनी गहन जांच शुरू की। इस दौरान झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड जैसे राज्यों में विवेचना की गई और यूपी के सुपर स्टॉकिस्ट और होलसेलर के साथ उनके कारोबारी रिश्तों के सबूत जुटाए। इसके बाद प्रदेश में क्रैक डाउन शुरू हुआ, जिसने सिरप के अवैध डायवर्जन की परतें उधेड़ दीं। एसएसडीए की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने नशे के सौदागरों को दबोचने के लिए एक्शन शुरू किया। सीएम के निर्देश पर सिरप का नशे के रूप में इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ एनडीपीएस और बीएनएस के तहत मुकदमे दर्ज किये गये। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा चलाने को सही ठहराते हुए 22 मामलों में आरोपियों की रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने 22 मामलों में आरोपियों द्वारा अरेस्ट स्टे की रिट याचिकाओं को भी खारिज कर दिया। 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की गई एफएसडीए ने पिछले तीन माह में कोडिनयुक्त कफ सिरप और एनडीपीएस श्रेणी की औषधियों के अवैध भंडारण, क्रय-विक्रय, वितरण तथा अवैध डायवर्जन पर कुल 52 जनपदों में 332 से अधिक थोक औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों की जांच की। जांच के दौरान प्राप्त अभिलेखीय एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर 36 जनपदों की कुल 161 फर्मों/संचालकों के विरुद्ध बीएनएस तथा एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई। वहीं, जिलाधिकारियों को गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई के लिए पत्र लिखा ताकि अवैध नशे के अर्जित संपत्ति को जब्त किया जा सके। सीएम के निर्देश पर एफएसडीए ने कोडिनयुक्त कफ सिरप की नशे के रूप में तस्करी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, जो पूरे देश में सबसे बड़ा क्रैक डाउन है।  मामले की तह तक पहुंची एफएसडीए और पकड़ में आया पूरा नेक्सेज  एफएसडीए आयुक्त ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए जनपद स्तर पर कई टीमें बनाईं। टीमों की निगरानी के लिए मुख्यालय पर एक टीम बनाई गई। विभिन्न टीमें जांच के लिए विभिन्न प्रदेशों में गई और गोपनीय तरीके से साक्ष्य जुटाए। टीम ने केंद्रीय नॉरकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर, मध्य प्रदेश से कोडीन फॉस्फेट का कोटा एवं उठान के विवरण को एकत्रित किया। वहीं टीम ने कोडिनयुक्त कफ सिरप निर्माता फर्मों की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड गई। यहां से सिरप के निर्माण और वितरण से संबंधित अभिलेख जुटाए। इसके बाद सिरप के क्रय विक्रय अभिलेख के लिए रांची, दिल्ली और लखनऊ का रूख किया। इस दौरान पाया गया कि अधिकांश होलसेल के पास स्टॉक पहुंचने का सत्यापन नहीं है और रिटेल मेडिकल स्टोर के नाम पर कोई भी विक्रय बिल नहीं मिला जबकि दिल्ली, रांची के सुपर स्टॉकिस्ट और इनसे जुड़े कुछ चिन्हित होल सेलर के नाम पर बिलिंग करके सिरप के साथ एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं की एक सामानान्तर वितरण श्रृखंला बनायी गयी। इसका खुलासा करने के लिए विभाग द्वारा कड़ी मेहनत की गयी। इसके बाद पूरी चेन को कनेक्ट किया, जिसके बाद सिरप के अवैध डायवर्जन का मामला सामने आया। वर्ष 2024-25 में कफ सिरप की आपूर्ति चिकित्साीय आवश्यकता से कई गुना अधिक मिली कई मामलों में फर्में विक्रय बिल प्रस्तुत करने में असफल रहीं, जबकि कुछ फर्मों द्वारा केवल कागजी अभिलेखों में सिरप का क्रय-विक्रय दर्शाया गया। प्रस्तुत विक्रय विवरणों में भी किसी भी फुटकर औषधि प्रतिष्ठान को कोडीनयुक्त कफ सिरप की वास्तविक आपूर्ति का सत्यापन नहीं हो सका, जिससे कथित आपूर्ति को अप्रमाणित पाया गया। वर्ष 2024-25 प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप की आपूर्ति वास्तविक चिकित्सीय आवश्यकता से कई गुना अधिक पाई गई। जांच में ऐबोट हेल्थ केयर द्वारा निर्मित फेन्सिडिल की 2.23 करोड़ से अधिक बोतलें, लैबोरेट फार्मास्युटिकल्स द्वारा निर्मित एस्कॉफ की 73 लाख से अधिक बोतलें तथा अन्य कंपनियों द्वारा निर्मित लगभग 25 लाख बोतलों की आपूर्ति दर्ज मिली, जिनका चिकित्सीय उपयोग प्रमाणित नहीं हो सका। पुलिस और एसटीएफ ने कुल 85 अभियुक्तों को किया अरेस्ट एफएसडीए ने रिपोर्ट सीएम और पुलिस को सौंपी। इसके आधार पर पुलिस और एसटीएफ ने 79 अभियोग दर्ज किये। इसमें अब तक 85 अभियुक्तों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वर्तमान में एक्शन चल रहा है। वहीं मामले में गठित एसआईटी भी जांच कर रही है। जानकारों की मानें तो अगले माह एसआईटी जांच रिपोर्ट सीएम को सौंप सकती है। लाइसेंसिंग प्रणाली सख्त करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के निर्देश पर एफएसडीए मुख्यालय द्वारा थोक औषधि विक्रय लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें थोक प्रतिष्ठान की जीओ टैगिंग, भंडारण क्षमता की पुष्टि और इनकी फोटोग्राफ कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं प्रतिष्ठान के टेक्निकल पर्सन का अनुभव प्रमाण पत्र को ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा सत्यापन करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है। कोडीनयुक्त कफ सिरप के निर्माण, बल्क सप्लाई, वितरण एवं निगरानी के लिए भारत सरकार से आवश्यक अधिसूचना एवं दिशा-निर्देश जारी करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

भारतीय समुदाय के लिए खतरा: बांग्लादेश में हादी के साथियों ने जारी किया 24 दिन का अल्टीमेटम

ढाका  इंकलाब मंच के प्रवक्ता उस्मान हादी की मौत के मामले में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार घर में ही घिर गई है। अब मंच ने 24 दिनों में हत्या का ट्रायल पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही तीन मांग भी रखी हैं, जिनमें बांग्लादेश में रहकर काम कर रहे भारतीयों के परमिट रद्द करने के लिए कहा गया है। हालांकि, इन मांगों को लेकर अंतरिम सरकार ने प्रतिक्रिया नहीं दी है। द डेली स्टार के अनुसार, इंकलाब मंच के सचिव अब्दुल्लाह अल जब्बार ने रविवार को ढाका के शाहबाग से यूनुस सरकार को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा, 'हत्यारे, मास्टरमाइंड, सहयोगी, भागने में मदद करने वालों और पनाह देने वालों समेत पूरे स्क्वॉड का ट्रायल अगले 24 दिनों में पूरा हो जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'बांग्लादेश की संप्रभुता को बचाने के लिए भारतीयों को जारी वर्क परमिट भी रद्द किए जाने चाहिए।' मंच की मांग है कि अगर भारत शरण पाए दोषियों को लौटाने से इनकार करता है, तो उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में केस दर्ज कराया जाए। हत्यारों के भारत में प्रवेश के दावे खारिज मेघालय की सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेश पुलिस के उन दावों को रविवार को सिरे से खारिज कर दिया कि हादी के हत्यारे भारतीय राज्य में दाखिल हो गए हैं। मेघालय में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रमुख, महानिरीक्षक (IG) ओ पी उपाध्याय ने कहा कि ये दावे निराधार और भ्रामक हैं। उपाध्याय ने पीटीआई-भाषा से कहा, 'इस बात का कोई सबूत नहीं है कि किसी व्यक्ति ने हलुआघाट सेक्टर से मेघालय में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार की हो। बीएसएफ को ऐसी किसी घटना की न तो सूचना मिली है और न ही ऐसी कोई रिपोर्ट मिली है।' मेघालय पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गारो पर्वतीय क्षेत्र में संदिग्धों की मौजूदगी के दावे की पुष्टि करने के लिए 'कोई जानकारी या खुफिया प्रमाण नहीं' है। अधिकारी ने कहा कि स्थानीय पुलिस इकाइयों को इस तरह की किसी गतिविधि की सूचना नहीं मिली है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय जारी है। ढाका महानगर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिन में दावा किया था कि हादी हत्याकांड के दो मुख्य संदिग्ध 'स्थानीय सहयोगियों की मदद से' हलुआघाट सीमा के रास्ते मेघालय में प्रवेश कर गए हैं।

ग्वालियर स्टेशन की सुरक्षा में लापरवाही: 33 सीसीटीवी कैमरे डेढ़ साल से बंद, यात्रियों की सुरक्षा खतरे में

ग्वालियर  झांसी मंडल का दूसरा बड़ा स्टेशन ग्वालियर है। जहां प्रतिदिन करीब 65 हजार से अधिक यात्रियों का आवागमन होता है। वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही आ रही है। स्टेशन परिसर में लगभग डेढ साल से जीआरपी के 33 सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हुए है। जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इन बंद कैमरों के कारण किसी भी घटना के बाद फुटेज तक नहीं मिल पाते है। जिससे महीनों तक उस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। जबकि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़ भाड़ वाले इलाके में सीसीटीवी निगरानी काफी जरूरी है। स्टेशन परिसर में चोरी, झपटमारी, गुमशुदगी या संदिग्ध गतिविधियों के मामले जीआरपी के पास ही आते है। रेलवे स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्य के चलते इन कैमरों को हटा दिया गया है। इंटरसिटी में चोरी का नहीं लगा सुराग ग्वालियर से इंदौर की तरफ जाने वाली इंटरसिटी में 20 नवंबर को एक महिला यात्री के ट्रेन में चढ़ते समय बैग से आभूषणों का डिब्बों गायब हो गया। महिला यात्री के पर्स में से किसी ने इस डिब्बे को निकाल लिया। इस मामले में जीआरपी नैरोगेज ने कुछ लोगों से पूछताछ की। लेकिन फुटेज नहीं मिलने से अभी तक चोर पकड़ में नहीं आ पाए है। इसी तरह की अन्य घटनाएं भी हो चुकी है। लेकिन फुटेज के चक्कर में जांच पूरी नहीं हो पाई है। इससे पीडि़त आज भी थानों के चक्कर काट रहा है। अपराधियों के हौसले बुलंद रेलवे स्टेशन पर लगातार कैमरे नहीं होने से अपराधियों के हौसले भी बुलंद है। यहां सबसे ज्यादा प्लेटफार्म एक पर परेशानी है। जबकि सबसे ज्यादा यात्रियों की भीड़ भी इसी प्लेटफार्म पर रहती है। ऐसे में अपराधी भी इसी प्लेटफॉर्म पर ज्यादा निशाना किसी भी घटना को लेकर बनाते है। सबसे अच्छे जीआरपी के कैमरे वहीं बंद रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए रेलवे, आरपीएफ और जीआरपी के कैमरे लगे हुए है। इसमें सबसे अच्छी क्वालिटी के कैमरे जीआरपी के ही है। यहीं कैमरें बंद पड़े हुए है। उसके बाद सबसे खराब क्वालिटी के कैमरे के है। इन कैमरों में पास के लोग ही नहीं दिखते है। वहीं आरपीएफ के कैमरें प्लेटफॉर्म चार पर सबसे ज्यादा है। इनका कहना है एजीएम से कर चुके है शिकायत कैमरें न होने की शिकायत अभी हाल ही में एजीएम के निरीक्षण के दौरान की थी। लेकिन कैमरे न होने से कई बार मामले नहीं सुलझ पाते है। ऐसे में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर रेलवे के कई अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन कुछ नहीं हुआ है। दीपशिखा सिंह, टीआई नैरोगेज जीआरपी अधिकारियों को है जानकारी जीआरपी के कैमरे लगभग डेढ साल से बंद है। इसकी जानकारी रेलवे के अधिकारियों को भी है। इन कैमरों के बंद होने से कई बार हमारी जांचे भी प्रभावित होती है। ऐसे में काफी परेशानी आ रही है। इसके लिए स्टेशन निर्माण कर रही कंपनी से भी अब बात करेंगे। जितेंद्र सिंह चंदेलिया, टीआई जीआरपी

छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा

ईयर एंडर 2025  सीएम योगी के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण की योजनाओं ने रची नए विकास की कहानी छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति से पिछड़े वर्ग के छात्रों की शिक्षा को मिला व्यापक सहारा शादी अनुदान योजना ने वंचित समाज की बेटियों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान को किया गया मजबूत कंप्यूटर प्रशिक्षण से युवाओं को मिला कौशल और रोजगार का मार्ग डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से बढ़ी पारदर्शिता, घटा भ्रष्टाचार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में पिछड़ा वर्ग कल्याण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और डिजिटल सशक्तिकरण—तीनों क्षेत्रों में सरकार की योजनाएं न केवल निरंतर चलीं, बल्कि लाभार्थियों की संख्या और बजट के लिहाज से पहले से अधिक प्रभावी साबित हुईं। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के आधिकारिक आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियां सीधे तौर पर समाज के अंतिम पायदान तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पिछड़ा वर्ग कल्याण महज योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सम्मान और कौशल के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने का मजबूत माध्यम बना है। योगी सरकार की यह नीति-आधारित और परिणाम-केंद्रित कार्यशैली ही उत्तर प्रदेश को सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में आगे ले जा रही है। शिक्षा को प्राथमिकता, रिकॉर्ड छात्रवृत्ति वितरण वर्ष 2025-26 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पिछड़ा वर्ग के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्रदान की। इस अवधि में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 6 लाख 90 हजार 349 छात्रों को 147.75 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। वहीं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से 5 लाख 85 हजार 954 छात्रों को 175.54 करोड़ रुपये प्रदान किए गए। इस तरह केवल वर्ष 2025 में ही कुल 12 लाख 76 हजार 303 विद्यार्थियों को 323.29 करोड़ रुपये की सीधी मदद मिली। कुल मिलाकर योगी सरकार ने नौ वर्षों में कुल 2 करोड़ 20 लाख 29 हजार 760 छात्रों को 13,858.62 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की।  बेटियों के सम्मान में सरकार की संवेदनशीलता  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सामाजिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण शादी अनुदान योजना है। वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में पिछड़ा वर्ग की 72 हजार 296 बेटियों को इस योजना के तहत 144.59 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। पूर्व वर्षों में भी यह योजना लगातार मजबूत होती रही। 2019-20 और 2024-25 में एक-एक लाख बेटियों को 200-200 करोड़ रुपये की सहायता दी गई। कुल मिलाकर नौ वर्षों में योगी सरकार ने शादी अनुदान योजना के तहत कुल 6 लाख 47 हजार 863 लाभार्थियों को 1,295.72 करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई। इस योजना के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतम आय सीमा एक लाख वाले अन्य पिछड़े वर्ग के परिवारों की बेटियों की शादी हेतु अनुदान दिये जाने का प्राविधान है। शादी योजना में लड़की की उम्र 18 वर्ष एवं लड़के की उम्र 21 वर्ष होना आवश्यक है।  डिजिटल भविष्य की तैयारी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुखी बनाने की रही है। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 (23 दिसंबर 2025 तक) में कम्प्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत 18,159 बालकों और 4,233 बालिकाओं, कुल 22,392 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिस पर 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बीते वर्षों में यह योजना लगातार विस्तार पाती रही। 2017-18 में जहां 9,431 युवाओं को प्रशिक्षण मिला था, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 29,769 युवाओं तक पहुंच गई। नौ वर्षों में कुल 1 लाख 62 हजार 046 युवाओं को 154.56 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल रूप से प्रशिक्षित किया गया। इनमें ओ लेवल सर्टिफिकेट के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या एक लाख, 1139 रही, जबकि सीसीसी सर्टिफिकेट के प्रशिक्षणार्थियों की संख्या 60,907 रही। इस योजना के अंतर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के इंटरमीडिएट पास बेरोजगार युवक और युवतियों को जिनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय एक लाख तक या उससे कम है को भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करना है। इन सभी योजनाओं में लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से लाभ प्रदान किया गया, जिससे पारदर्शिता में वृद्धि हुई और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई।

भोपाल मेट्रो में लागू नए नियम, नो डिस्टरबेंस जोन में शांति बनाए रखना जरूरी, उल्लंघन पर सजा

भोपाल  भोपाल मेट्रो के शुरू होते ही प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहता, इसी का नतीजा है कि यात्रियों की सुविधाओं के साथ ही प्रशासन ने उनकी सुरक्षा को लेकर भी बड़ा कदम उठाया है। दरअसल मेट्रो प्रबंधन ने प्लेटफॉर्म पर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं। ये वही पोस्टर हैं, जिनपर लिखा है… भोपाल मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों को अब नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की जेल और जुर्माने समेत दोनों के तहत दंड दिए जाने का प्रावधान भी किया गया है। मेट्रो भोपाल में सफर करने से पहले… क्या करें और क्या न करें…? परिचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 के तहत होगी सजा इन पोस्टर्स पर लिखे गए नियमों को लेकर यात्रियों को सख्त हिदायत दी गई है। यदि वे किसी भी नियम का उल्लंघन करते पाए गए, तो उनके खिलाफ मेट्रो रेलवे परिचालन और अनुरक्षण अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस अधिनियम के मुताबिक नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना और जेल तक की सजा का प्रावधान है। इन गतिविधियों पर रोक इन पोस्टर्स पर स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि मेट्रो परिसर में और ट्रेन में भीख मांगना, भीड़ जुटाना या किसी भी तरह की नारेबाजी, उत्पादों की मांग करना और किसी भी तरह की सामुहिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है। धारा 62 रहेगी लागू यहां मेट्रो अधिनियम की धारा 62 भी लागू की गई है। इसके तहत मेट्रो परिसर में प्रदर्शन करने, लिखने, चिपकाने और निर्देशों का पालन न करने पर 500 रुपए तक का जुर्माना और यात्री को ट्रेन से बाहर करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा मेट्रो परिसर में या ट्रेन में पालतू जानवरों को लाने की अनुमति नहीं है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित होंगी। धारा 73 के तहत सामान बेचा तो जुर्माना भीड़ और अव्यवस्था को रोक्ने के लिए मेट्रो परिसर में भीख मांगना, सामान बेचना या यात्रियों को किसी भी तरह से परेशान करने पर भी सख्ती से निपटा जाएगा। धारा 73 के तहत मेट्रो परिसर में अनाधिकृत रूप से सामान बेचने पर 400 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। प्रबंधन ने की अपील, कतार में रहें मेट्रो प्रबंधन ने यात्रियों से अपील भी की है कि वे मेट्रो परिसर में कतार में रहें। अपने सामान का ध्यान रखें। टिकट जांच के समय अधिकृत कर्मचारी को ही टिकट दिखाएं, जरूरत पड़ने पर मेट्रो सुरक्षा और ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करें। यहां पढ़ें यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सख्त नियम मेट्रो ट्रैक पर उतरने या चलने पर धारा 64-2 के तहत 6 महीने की जेल या 500 रुपए का जुर्माना महिलाओं के आरक्षित कोच में बैठने पर 3 महीने की जेल या 250 रुपए जुर्माना इमरजेंसी अलार्म का दुरुपयोग करने पर 10 हजार रुपए तक का जुर्माना ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के काम में बाधा डालने वाले पर 1000 रुपए का जुर्माना और 1 साल की जेल का प्रावधान मेट्रो अधिनियम 2002 के तहत ये धाराएं लागू धारा- 59:भोपाल मेट्रो या मेट्रो परिसर में शराब पीना, उपद्रव करना, ट्रेन में फर्श पर बैठना, थूकना या झगड़ा करने पर 200 रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। टिकट या पास जब्त किया जा सकता है, ट्रेन से बाहर भी निकाला जा सकता है। धारा 60: आपत्तिजनक सामग्री ले जाने पर 200 रुपए का जुर्माना। धारा 62: रेलवे पर प्रदर्शन करने, कोच में लिखने/चिपकाने या हटने से इनकार करने पर 500 रुपए का जुर्माना और ट्रेन से बाहर निकाला जाना धारा 63: मेच्रो की छत पर यात्रा करने पर 5 हजार का जुर्माना धारा 64-1: महिलाओं के आरक्षित कोच में बैठने पर 3 महीने की जेल औऱ 250 रुपए जुर्माने का या दोनों का प्रावधान धारा 64-2: मेट्रो ट्रेक पर अवैध प्रवेश, पैदल चलने पर 69 महीने की जेल या 500 रुपए जुर्माना या दोनों की सजा धारा 68: ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के कार्य में बाधा डाले जाने पर 1 साल की जेल या 1000 रुपए जुर्माना या दोनों। धारा 69: बिना वैध पास या टिकट के यात्रा करने पर 50 रुपए का सरचार्ज और तय किराये का अधिकतम किराया देना होगा।

बांग्लादेश में अशांति और हिंदुओं पर अत्याचार पर कवि कुमार विश्वास ने जताई गहरी चिंता

रायपुर छत्तीसगढ़ के रायपुर पहुंचे मशहूर कवि कुमार विश्वास ने बांग्लादेश में फैली अशांति और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे दुखद बताते हुए पूरी दुनिया और भारत सरकार से इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेने की अपील की है। बांग्लादेश में अशांति के हालात पर कवि कुमार विश्वास ने कहा, "बहुत ही दुखद है और भारत सरकार को कठोरता से संज्ञान लेना चाहिए। निश्चित रूप से सरकार सोच भी रही होगी। लेकिन मैं उन लोग से अनुरोध करना चाहता हूं जो किसी भी घटना पर बहुत विलाप करते हैं उन्हें वहां के युवा नेता की अज्ञात हमलावर द्वारा होने वाली हत्या पर तो चिंता है। लेकिन उस पर पता नहीं कहां से भारत सरकार का हस्तक्षेप निकाल लिया, जबकि उसमें भारत का क्या मतलब है, लेकिन एक निरपराध अल्पसंख्यक को भीषण तरीके से जला दिया गया, जब ऐसे समय में लोगों का बयान नहीं आता, लोग चिंता नहीं करते तो उनके दोहरे व्यवहार का पता चलता है। तो मैं आशा करता हूं कि पूरा विश्व इसका संज्ञान लेगा।" एक हफ्ते में दो हिन्दुओं की हत्या बांग्लादेश के मैमनसिंह शहर में कथित ईशनिंदा के आरोप में 18 दिसंबर की रात दीपू चंद्र दास की उग्र और बेकाबू भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी और फिर शव को आग के हवाले कर दिया था। वहीं इसके कुछ दिन बात एक अन्य घटना में एक और हिंदू युवक 29 वर्षीय अमृत मंडल को 24 दिसंबर को राजबाड़ी के पांगशा उपजिला में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। भारत में हुए थे विरोध-प्रदर्शन गौरतलब है कि बीते दिनों बंगलादेश में दीपू दास की हत्या के खिलाफ भारत में हिन्दू संगठनों विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और हिंदू जागरण मंच सहित संघ परिवार से जुड़े कई संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई थी। दिल्ली में तो बंगलादेश उच्चायोग के बाहर विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस से झड़पें तक हुईं थीं। राजधानी में प्रदर्शनकारी जब पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने और उच्चायोग की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे तब पुलिस को दखल देना पड़ा और लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके बाद दिल्ली में बंगलादेश उच्चायोग के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई।

ED की अंतिम चालान से हड़कंप: शराब घोटाले में आशीष श्रीवास्तव फंसे, निलंबन की चर्चाएं तेज

रायपुर शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 29 हजार 800 पन्नों की चार्जशीट पेश की, जिसमें आबकारी विभाग के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर आशीष श्रीवास्तव का नाम जोड़ा गया है. ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं था. हालांकि अब आशीष श्रीवास्तव की सुगबुगाहट तेज हो गई है. बताया जा रहा है कि सचिव कम आयुक्त आर संगीता के तीन जनवरी को छुट्टी से लौटने के बाद कार्रवाई की जाएगी. इसके अलावा मामले में आरोपी बनाए गए 31 अधिकारियों के खाते को सीज कर दिया गया है. कुल 38.21 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की गई है. साथ ही उन अफसरों की खाते कार्रवाई में शामिल हैं, जिनकी पत्नियों के कहते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले हैं. बता दें कि ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में 29 अफसर आरोपी बनाए गए थे. इनमें से 22 को 7 जुलाई 2025 को सस्पेंड कर दिया गया था. बाकी 7 रिटायर हो चुके हैं. हाल ही में आयुक्त निरंजन दास को भी गिरफ्तार किया गया है. 90 करोड़ की हुई बंदरबांट हंडी ने जांच में पाया है कि शराब घोटाले में अफसरों को करीब 90 करोड़ रुपए बांटे गए. इसमें पूर्व आयुक्त निरंजन दास को 18 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई. इकबाल खान को 12 करोड़, नोहर सिंह ठाकुर को 11 करोड़, नवीन प्रताप सिंह तोमर को 6.7 करोड़, राजेश जायसवाल को 5.79 करोड़, अनिमेष नेताम को 5.28 करोड़ और दिनकर वासनिक, गंभीर सिंह, अरविंद पटले, आशीष कोसम, अनंत सिंह, सौरभ बक्शी, प्रकाश पाल, गरीबपाल सिंह, मोहित जायसवाल को 2 करोड़ रुपए से अधिक की रिश्वत दी गई. आशीष श्रीवास्तव को भी 54 लाख रुपए दिए जाने के सबूत ईडी को मिले हैं. आय से अधिक संपत्ति का केस अधिकतर अफसरों के पास आय से अधिक संपत्ति मिली है. इसलिए इन पर एक केस आय से अधिक संपत्ति का भी चलेगा. इन्हें यह बताना होगा कि इतनी संपत्ति कहां से आई. क्योंकि अधिकतर अफसरों का वेतन वर्तमान में 1 से 1.5 लाख रुपए महीने है. ऐसे में 20 साल की नौकरी में औसत एक करोड़ से अधिक वेतन नहीं पा सकते. जबकि कई अफसरों के पास 5 करोड़ से अधिक की संपत्ति -मिली है.   इनकी संपत्ति अटैच कर चुकी है ईडी क्रमांक नाम अचल संपत्ति (₹) चल संपत्ति (₹) 1 नवीन प्रताप सिंह 2,44,92,905 36,19,524 2 गंभीर सिंह 1,14,15,275 49,76,561 3 मोहर सिंह ठाकुर 1,76,46,857 2,14,17,682 4 नीतू नोतानी 61,45,535 1,47,40,739 5 अरविंद पटले 1,34,06,000 92,12,729 6 प्रकाश पाल 65,41,000 70,30,866 7 अनंत कुमार सिंह 38,98,266 86,59,494 8 अश्वनी कुमार अनंत 34,08,000 8,86,559 9 अनिमेष नेताम 3,30,330 88,72,166 10 मंजूश्री केसर 34,88,000 97,17,938 11 जनार्दन सिंह कौरब 49,00,000 45,35,201 12 प्रमोद कुमार नेताम 45,23,300 28,92,454 13 देवलाल वैद्य 7,36,000 45,94,541 14 दिनकर वासनिक 45,19,582 69,12,733 15 बेदराम लहरे 48,51,000 8,42,799 16 इकबाल अहमद खान 15,61,650 49,89,359 17 मोहित जयसवाल 16,32,000 66,564 18 नितिन खंडूजा 81,81,897 3,04,391 19 जीतूराम मंडावी 30,54,324 40,85,030 20 अरलेखा राम सिदार   15,95,177 21 लखन लाल ध्रुव   1,36,51,570 22 आशीष कोसम   90,39,696 23 गरीबपाल सिंह   47,19,082 24 विजय सेन शर्मा   69,81,522 25 विकास गोस्वामी   84,595 26 सौरभ बक्शी   85,08,994 27 राजेश जायसवाल   14,11,529 28 सोनल नेताम   3,21,105 29 रामकृष्ण मिश्रा — 9,33,717 30 आशीष श्रीवास्तव 54,00,000   31 निरंजन दास 8,83,33,291   अफसरों ने कराई थी करोड़ों की एफडी क्रमांक नाम एफडी की राशि 1 अनंत सिंह ₹75.26 लाख 2 आलेख राम सिदार ₹3.90 लाख 3 देवलाल वैद्य ₹1.10 करोड़ 4 गंभीर सिंह नेताम ₹40 लाख 5 सौरभ बक्शी ₹9 लाख   अफसरों की बहाली अब कोर्ट के फैसले के बाद ही संभव सस्पेंड किए गए अफसरों को 50% वेतन दिया जाता है. नियमानुसार 90 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो वेतन 75% कर दिया जाता है. लेकिन अब ईडी ने अपनी अंतिम कंप्लेन दाखिल कर दी है, ऐसे में इन अफसरों की बहाली का रास्ता भी बंद हो गया है. अब न्यायालय से निर्णय आने के बाद ही बहाली संभव हो पाएगी. इसमें से कुछ अफसर अगले एक-दो साल में रिटायर होने वाले हैं. – वेतन लेने के लिए इन अफसरों को अब कोर्ट से अनुमति लेनी होगी, क्योंकि 5 इनके खाते ईडी ने सीज कर रखे हैं.

राजीव शुक्ला बोले: मौलाना शमाइल नदवी के बयान पर हो कड़ी कार्यवाही, संविधान सर्वोपरि

 नई दिल्ली ईश्वर के अस्तित्व पर डिबेट में हिस्सा लेने वाले मुफ्ती शमाइल नदवी अब अपने विवादित बयान के कारण चर्चा में हैं। यही नहीं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कांग्रेस के सीनियर नेता राजीव शुक्ला ने भी कर दी है। मौलाना नदवी के विवादित बयान वाला वीडियो शुजात अली कादरी ने एक्स पर शेयर किया था। इसी को रीपोस्ट करते हुए राजीव शुक्ला ने कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा, 'इस मौलाना के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए । संविधान के ऊपर कुछ नहीं है।' मौलाना मुफ्ती शमाइल नदवी ने कहा था कि भारत में मुसलमान गलत रास्ते पर चलते रहे हैं। उन्होंने हमेशा यह सोचा कि सेकुलर शासन और पार्टियां उनके हित में होंगी। ऐसा नहीं है। प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ेंउन्होंने कहा कि मुसलमान हमेशा अपने दीन से ऊपर संविधान को रखते आए हैं, लेकिन ऐसा करना गलत था। नदवी ने कहा था, 'हम चाहते हैं कि हमारे मौजूदा हालात ठीक हो जाएं तो उसका हल किसी सियासी पार्टी में नहीं है बल्कि दीन में है। हमारा इस मुल्क में एप्रोच गलत रहा। हम यह कहते फिरते रहे कि हमारा वतन हमारे दीन से ज्यादा मुकद्दस है। हम यह कहते रहे कि सेकुलर निजाम हमारे दीन से ज्यादा बेहतर है। यह तय करते रहे कि फलां दरबार से फैसला हो जाएगा तो हम उसे स्वीकार कर लेंगे। क्या ऐसा किया जा सकता है। यदि किसी मामले में अल्लाह ने कोई फैसला कर लिया है तो यह जायज नहीं है कि उसकी बजाय हम किसी और की बात को मानें।' मुफ्ती शमाइल नदवी की ओर से दिए बयान को लेकर आपत्ति इसलिए है क्योंकि उन्होंने संविधान और देश से ऊपर दीन को रखने की बात कही है। पहले भी ऐसे सवाल उठते रहे हैं कि आखिर कट्टरपंथी मुसलमान देश से पहले मजहब की बात क्यों करते हैं। ऐसे में नदवी के बयान ने उस सवाल को फिर से खड़ा किया है। मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन शुजात अली कादरी ने भी सवाल उठाया है। शुजात अली कादरी ने लिखा- हमारा रास्ता वहाबी शरीयत नहीं है उन्होंने लिखा, 'मौलाना नदवी का यह बयान भारत के संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है। भारत का मुसलमान न तो हिन्दू राष्ट्र का समर्थक है और न ही वहाबी शरीयत के नाम पर किसी धार्मिक शासन का। हमारा रास्ता संविधान, लोकतंत्र और समान नागरिक अधिकार हैं। ऐसे बयान अनुच्छेद 14, 15, 19 व 25 की भावना के ख़िलाफ़ हैं और BNS धारा 196 व 197 के तहत दंडनीय हैं।'

सीएम मोहन यादव का बड़ा कदम, स्विट्ज़रलैंड से निवेश लाने के लिए वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम में एमपी का रोडमैप पेश करेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए किए गए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव जैसे नवाचार अब स्विट्जरलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम के सम्मेलन में भी बताए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल के साथ 19 से 23 जनवरी के बीच दावोस में होने वाले इस सम्मेलन में शामिल होने स्विट्जरलैंड जाएंगे। सम्मेलन में मुख्यतः इकोनोमिक ग्रोथ, एआइ के प्रभाव, जलवायु परिवर्तन, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ाने पर चर्चाएं होगी। उद्योग, ऊर्जा में निवेश के लिए प्रदेश का रोडमैप दुनिया के सामने रखा जाएगा। साझा करेंगे जानकारियां वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम की बैठक में विश्व भर के नेता और बिजनेस लीडर्स शामिल होते हैं। भारत का भी एक केन्द्रीय प्रतिनिधिमंडल मंत्री की अध्यक्षता में फोरम की बैठक में शामिल होता है। इसमें राज्यों के भी प्रतिनिधि शामिल होते हैं। उल्लेखनीय है कि इसके पहले पूर्व सीएम कमलनाथ फोरम की बैठक में शामिल हुए थे। अब सीएम डॉ यादव देश में चल रहे आर्थिक परिवर्तन के हिस्से के रूप में मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, नवाचार, निवेश अवसरों और सफलता की कहानियों के बारे में फोरम के मंच पर जानकारियां साझा करेंगे। 'पीपीपी' पर रहेगा जोर कार्यक्रम पांच वैश्विक चुनौतियों पर केंद्रित होगा। जहां आर्थिक प्रगति के लिए सभी की भागीदारी के साथ सार्वजनिक-निजी संवाद और सहयोग को बढ़ाने पर चर्चाएं होंगी। प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में होने वाली पैनल चर्चाओं, राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और सरकार-से-व्यवसाय तथा सरकार-से-सरकार बैठकों की श्रृंखला में भाग लेगा। साथ ही वैश्विक राजनीतिक और बिजनेस लीडर्स के साथ स्थिरता सहित अन्य विषयों पर होने वाले सत्रों में भी भाग लेगा।