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घर के एंट्रेंस पर लटकाएं ये शुभ वस्तु, झगड़े और नेगेटिव एनर्जी होगी खत्म

वास्तु शास्त्र में घर में नमक की पोटली रखने या लटकाने से जुड़े कई लाभ माने जाते हैं। नमक को शुद्धता और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। घर में सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए नमक का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है। घर में नमक की पोटली रखने या लटकाने के लाभ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना वास्तु शास्त्र के अनुसार, नमक की पोटली घर में नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने का काम करती है। यह वातावरण को शुद्ध करके सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। खासकर वह स्थान, जहां मानसिक तनाव या विवाद होते हैं, वहां नमक की पोटली रखने से वातावरण में सुधार हो सकता है। वातावरण को शुद्ध करना: नमक में विशेष गुण होते हैं जो वातावरण में मौजूद गंदगी और नकारात्मकता को अवशोषित करते हैं। जब नमक की पोटली घर में रखी जाती है या लटकाई जाती है तो यह किसी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर वातावरण को शुद्ध करती है। शांति और संतुलन बनाए रखना नमक की पोटली रखने से घर में शांति और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। यह मानसिक तनाव और अवसाद को दूर करने में सहायक हो सकती है। यह घर के माहौल को शांत और खुशहाल बनाती है। व्यावसायिक समृद्धि नमक की पोटली को घर के व्यापारिक स्थान पर या कार्यक्षेत्र में लटकाने से समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। यह व्यापार में सफलता और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है। स्वास्थ्य लाभ नमक को घर में रखने से स्वास्थ्य में भी सुधार हो सकता है। वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि नमक का उपयोग घर के वातावरण को शुद्ध रखने और बीमारियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसे विभिन्न स्थानों पर रखने से हानिकारक बैक्टीरिया और विषाणु दूर हो सकते हैं। घर के प्रवेश द्वार के पास रखना घर के मुख्य द्वार या प्रवेश द्वार के पास नमक की पोटली रखने से घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोका जा सकता है। यह एक प्रकार की सुरक्षा का काम करती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश सुनिश्चित करती है। अशांति और विवादों को कम करना यदि घर में लगातार अशांति, झगड़े या आपसी विवाद होते रहते हैं तो नमक की पोटली को घर के विभिन्न स्थानों पर रखकर इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है। यह वातावरण को शांत करता है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बनाए रखने में मदद करता है। सपने और मानसिक स्थिति में सुधार नमक की पोटली को तकिए के नीचे रखने से मानसिक स्थिति में सुधार हो सकता है। यह नकारात्मक विचारों को दूर करने और अच्छे सपने देखने में सहायक हो सकती है। घर में नमक की पोटली रखने का तरीका नमक की पोटली को एक सफेद कपड़े में बांधकर घर के किसी कोने में या मुख्य द्वार के पास लटकाया जा सकता है। इसे विशेष रूप से घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिशा घर की ऊर्जा को स्थिर रखने में मदद करती है। नमक की पोटली को एक स्थान पर कुछ समय के लिए रखें और जब वह पूरी तरह से नमक को अवशोषित कर ले, तो उसे बदल दें। पुराने नमक को घर से बाहर फेंक दें क्योंकि वह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। नमक की पोटली रखते समय ध्यान देने योग्य बातें नमक का उपयोग शुद्धता के प्रतीक के रूप में किया जाता है लेकिन इसे किसी भी स्थान पर स्थायी रूप से नहीं रखना चाहिए। समय-समय पर इसे बदलते रहना चाहिए। नमक की पोटली का उपयोग छोटे या अंधेरे स्थानों पर करना अधिक लाभकारी हो सकता है, जहां नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा हो। निष्कर्ष वास्तु शास्त्र में नमक का उपयोग नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, घर के वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मकता को बढ़ाने के लिए किया जाता है। नमक की पोटली को घर में सही स्थान पर रखना मानसिक शांति और समृद्धि लाने में सहायक हो सकता है। यह सरल उपाय घर में शांति, सुख और समृद्धि बनाए रखने में मदद करता है।  

नए साल से पहले मध्यप्रदेश में मंदिरों की सुरक्षा चाक-चौबंद, DGP कैलाश मकवाना के आदेश

भोपाल नए साल के जश्न और हालिया सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए मध्यप्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ और पहलगाम की घटना के मद्देनज़र प्रदेश के प्रमुख मंदिरों, धार्मिक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सतर्कता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने कहा कि नए साल के अवसर पर मॉल, बाजार, होटल, रिसॉर्ट और पिकनिक स्पॉट पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। ऐसे में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए गश्त बढ़ाई जाए और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए। हुड़दंग, शांति भंग करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का फैसला किया है। छेड़खानी, अभद्र व्यवहार और महिलाओं के खिलाफ किसी भी अपराध पर तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों, तेज रफ्तार और लापरवाही से ड्राइविंग करने वालों पर भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्पष्ट किया कि नए साल के दौरान प्रदेशभर में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। पुलिस न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखेगी, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर सतर्क रहेगी।

2023 के बाद पहली बार शरद-पवार और अजित पवार गुट साथ, भाजपा को टक्कर देने के लिए पिंपरी-चिंचवड़ में गठबंधन

मुंबई  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को बड़ा ऐलान कर दिया कि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) चुनावों के लिए उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट एक साथ चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने इसे परिवार का फिर से एकजुट होना करार दिया. अजित पवार पिंपरी-चिंचवड़ में 15 जनवरी को होने वाले चुनावों के लिए प्रचार करने पहुंचे थे. पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के लिए ‘घड़ी’ (एनसीपी का चुनाव चिह्न) और ‘तुतारी’ (एनसीपी-एसपी का चिह्न) एक साथ आए हैं. परिवार फिर से एकजुट हो गया है. अब इस गठबंधन का सीधा मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन है. भाजपा ने कई नगर निगमों में एनसीपी को दरकिनार कर दिया है. बीएमसी में भी भाजपा ने एनसीपी को अपने गठबंधन से बाहर रखा है. यह घोषणा उम्मीदवारों की सूची अंतिम रूप देने के दौरान हुई चर्चा के बाद की गई. अजित पवार ने कार्यकर्ताओं से कड़ी मेहनत करने और रैलियों में विवादास्पद बयानबाजी से बचने की अपील की. उन्होंने कहा कि हम विकास करने वाले लोग हैं. हम उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाएंगे जिन्होंने इस नगर निगम को कर्ज में डुबोने की कोशिश की. पिंपरी-चिंचवड़ को विकास के मामले में उन्होंने एनसीपी का योगदान बताया और हिंजेवाड़ी आईटी पार्क का जिक्र किया. अन्य नगर निगमों में गठबंधन की संभावना इस बीच, दोनों गुटों के बीच पुणे नगर निगम चुनावों के लिए भी गठबंधन की बातचीत चल रही है. इससे संकेत मिलता है कि पिंपरी-चिंचवड़ में हुआ समझौता अन्य प्रमुख नगर निगमों तक विस्तारित हो सकता है. महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे, जबकि मतगणना अगले दिन होगी. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 दिसंबर है. यह गठबंधन 2023 में एनसीपी के विभाजन के बाद पहली बार दोनों गुटों का एक साथ आना है. अजित पवार ने 2023 में शरद पवार से अलग होकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे. उस समय उन्होंने चाचा की उम्र का हवाला देकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे. शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.उसी दिन बारामती में पवार परिवार एक साथ नजर आया, जहां उद्योगपति गौतम अडानी ने शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्घाटन किया. यह स्थानीय गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ है, जहां राज्य स्तर पर दोनों गुट अलग-अलग गठबंधनों में हैं. पिंपरी-चिंचवड़ एनसीपी का पारंपरिक गढ़ रहा है, जहां 2017 तक अविभाजित एनसीपी का शासन था. जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन वोटों के बंटवारे को रोकने और भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश करने की रणनीति है.

एसएस प्लाजा में आग से मचा हड़कंप, कई दुकानों को भारी नुकसान, घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन

कोरबा कोरबा के एसएस प्लाजा में सोमवार सुबह भीषण आग लग गई. घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई है. पद्मिनी ज्वैलर्स, बालाजी स्टील सहित कई दुकानें आग की चपेट में आ गई. सूचना पर दमकल की 10 से अधिक गाड़ियां और 3 पानी टैंकर मौके पर पहुंची गई है. घटना कोतवाली थाना क्षेत्र की है. जानकारी के मुताबिक, पद्मिनी ज्वैलर्स और बालाजी स्टील सहित अन्य दुकानों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है. आग इतनी भीषण है कि अबतक काबू नहीं पा जा सका है. 14 दमकल वाहनों और 3 पानी टैकर की मदद ली जा चुकी है. फिलहाल आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है. आग बुझाने में दमकल टीम को आ रही दिक्कत मौके पर मौजूद अधिकारियों ने आग बुझाने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए जेसीबी और हाइड्रा बुलवाए हैं. जिनकी मदद से आग की चपेट में आए दुकान के प्रथम तल को तोड़ा जा रहा है. वहीं निगम जल आपूर्ति को जारी रखने के लिए टैंकर को रवाना किया है.

महिलाओं के लिए दिल्ली की मुफ्त बस सुविधा में बदलाव, नए साल में लागू हो सकता है नया सिस्टम

 दिल्ली दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर का तरीका जल्द बदलने जा रहा है। नए साल के शुरुआती दिनों में ही नए सिस्टम को लागू किया जा सकता है। पिंक सहेली कार्ड को लेकर तैयारी पूरी हो चुकी है। मुफ्त बस सफर का फायदा लेने के लिए महिलाओं को स्मार्ट कार्ड बनवाना होगा। इसके साथ ही पेपर वाले पिंक टिकट की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने अक्टूबर 2019 में महिलाओं के लिए मुफ्त बस सफर की शुरुआत की थी। भाजपा सरकार ने मुफ्त सफर की सुविधा को जारी रखते हुए इसके तरीके में बदलाव की घोषणा की थी। सरकार का कहना है कि नए सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी। भाजपा पिंक टिकट सिस्टम में गड़बड़ी का आरोप लगाती रही है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट (DTC) ने स्मार्ट कार्ड जारी करने के लिए दो प्राइवेट वेडर्स को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार शहरभर में इसके लिए काउंटर्स खोलेगी। दिल्ली के पते वाला आधार कार्ड का इस्तेमाल करत हुए महिलाएं पिंक सहेली कार्ड के लिए अप्लाई कर सकेंगी। कहां बनेंगे कार्ड, क्या शर्तें रिपोर्ट के मुताबिक काउंटर डीएम, एसडीएम के दफ्तरों, बस डिपो और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर खोले जाएंगे ताकि लोग आसानी से वहां पहुंच सकें। अधिकारियों के मुताबिक सहेली कार्ड प्राप्त करने के लिए दिल्ली निवासी होना अनिवार्य है। कार्ड के लिए न्यूनतम उम्र 12 साल होनी चाहिए। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड कैसे काम करेगा नया सिस्टम, कार्ड नहीं तो क्या होगा सफर के दौरान महिलाओं को अपने स्मार्ट कार्ड को इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) पर टच करना होगा। मौजूदा व्यवस्था में कंडक्टर महिलाओं को पिंक टिकट देते हैं। लेकिन नई व्यवस्था में वह सफर कर रही महिलाओं से कार्ड लेंगे और ईटीएम पर टच करके वापस कर देंगे। यदि किसी महिला के पास स्मार्ट कार्ड नहीं हुआ तो टिकट खरीदनी होगी। बस पास भी होंगे स्मार्ट पिंक सहेली कार्ड के अलावा दो अन्य श्रेणी के स्मार्ट कार्ड भी बनाए जाएंगे। वरिष्ठ नागरिक, विकलांग, खिलाड़ी, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता समेत 12 श्रेणियों के लोगों को पास भी स्मार्ट कार्ड में बदले जाएंगे। इसके अलावा आम लोग भी स्मार्ट कार्ड बनवाकर इसे रिचार्ज करा सकेंगे। यह मेट्रो कार्ड की तर्ज पर काम करेगा।

रिंग रोड विवाद: अनुमति के बिना बनी सड़क, उग्रवादियों के नाम पर नामकरण, NGT ने किया रोक लगा

इंफाल मणिपुर में बिना राज्य सरकार की अनुमति के बनाई जा रही एक ‘रिंग रोड’ का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और सरकार में हड़कंप मच गया है. यह सड़क राज्य के छह जिलों से होकर गुजरती बताई जा रही है और रिपोर्ट्स के अनुसार इसके कुछ हिस्सों को स्थानीय स्तर पर जर्मन रोड और टाइगर रोड कहा जा रहा है, जिनका नाम कुकी उग्रवादियों के उपनामों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सड़क निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी है.  रिंग रोड के निर्माण कार्य पर रोक: NGT रिपोर्ट के मुताबिक, 23 दिसंबर को एनजीटी ने मणिपुर सरकार को आदेश दिया कि इस रिंग रोड पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य आगे न बढ़ाया जाए. साथ ही एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि ये सड़क जिन 6 जिलों से होकर गुजरती है वहां जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आदेश के सख्त अनुपालन के लिए निर्देश जारी करें. बताया गया है कि यह सड़क स्थानीय वन क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है और यह इंफाल में एशियाई विकास बैंक की सहायता से बन रही अधिकृत रिंग रोड से अलग है जिसे राज्य सरकार की मंजूरी प्राप्त है. एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि विवादित सड़क को किसी भी तरह से आधिकारिक परियोजना से नहीं जोड़ा जा सकता. बता दें, ये पूरा मामला तब उजागर हुआ जब मणिपुर के मैतेई समुदाय के नागरिक संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कोलकाता स्थित एनजीटी कार्यालय में याचिका दायर की. याचिका में आरोप लगाया गया कि जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में बिना किसी पर्यावरणीय और भू-वैज्ञानिक प्रभाव आकलन के सड़क निर्माण किया जा रहा है जो कानून का गंभीर उल्लंघन है. याचिकाकर्ताओं ने एनजीटी से मांग की कि इस अवैध निर्माण पर तुरंत रोक लगाई जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. एनजीटी ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद इस मामले को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है. एनजीटी के अनुसार, याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि चुराचांदपुर, कांगपोकपी, नोनी और उखरूल सहित कई जिलों के वन और पहाड़ी इलाकों से गुजरने वाली इस सड़क का निर्माण कुकी समुदाय के कुछ लोगों द्वारा किया जा रहा था. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के अधीन है. स्थानीय गांव के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मणिपुर में यह स्थिति बेहद चिंताजनक है. उनका कहना था कि बिना किसी सरकारी अनुमति के सड़कें बनाई जा रही हैं और उन्हें उग्रवादियों के नाम से जोड़ा जा रहा है, जिससे आम लोगों में गुस्सा और असंतोष बढ़ रहा है. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इस सड़क का निर्माण मणिपुर संकट के दौरान शुरू हुआ था और इसकी जानकारी सबसे पहले सोशल मीडिया के जरिए सामने आई थी. सोशल मीडिया पर  उद्घाटन की तस्वीरें, एक विधायक की मौजूदगी और टाइगर रोड नाम से बने गेट की तस्वीरें भी सामने आई थीं. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस सड़क का इस्तेमाल गुप्त आवाजाही के लिए किया जा सकता है. इसके जरिए अवैध ड्रग्स, तस्करी, छोटे हथियार, गोला-बारूद और अवैध प्रवासियों की आवाजाही की आशंका जताई गई है. एनजीटी ने इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. फिलहाल, एनजीटी के आदेश के बाद सड़क निर्माण पर रोक लगा दी गई है और राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. 

गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने किया जनता दर्शन का आयोजन, करीब 150 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं

प्रचंड ठंड में भी जारी रहा सीएम योगी का जनसेवा अनुष्ठान गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री ने किया जनता दर्शन का आयोजन, करीब 150 लोगों से मुलाकात कर सुनीं समस्याएं जनता से बोले सीएम – घबराइए मत, हर समस्या का कराएंगे समाधान, सबकी होगी भरपूर मदद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, संवेदनशीलता और तत्परता से करें जन समस्याओं का निराकरण गोरखपुर जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रचंड ठंड में भी सोमवार को जनसेवा का अनुष्ठान जारी रखा। प्रतिकूल मौसम के बावजूद उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन कर लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं। समस्या लेकर आए लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘घबराइए मत, हर समस्या का समाधान कराएंगे, सरकार सबकी भरपूर मदद करेगी।’ जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने पास में मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित व्यक्ति की समस्या पर संवेदनशीलता से ध्यान दें और तत्परता से उसका समयबद्ध व पारदर्शी निस्तारण कराएं। सोमवार सुबह गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनका समाधान करने का निर्देश दिया। कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे। एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्हें आश्वस्त किया कि वह सभी की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कराएंगे। किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। प्रार्थना पत्रों को उन्होंने अधिकारियों को हस्तगत करते हुए निर्देश दिया कि हर समस्या का निस्तारण त्वरित, गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिप्रद होना चाहिए।  कुछ लोगों द्वारा जमीन कब्जाने की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने कठोर कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा यदि कोई दबंग, माफिया किसी की जमीन जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। गरीबों को उजाड़ने वाले कतई न बख्शे जाएं। जहां पैमाइश की जरूरत हो, वहां पैमाइश कराकर विवाद का निस्तारण कराया जाए। पारिवारिक विवाद के मामलों में उन्होंने उभयपक्षों के साथ संवाद कर समाधान की राह निकालने के लिए निर्देशित किया।  जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक मदद की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि इलाज में धन की कमी बाधक नहीं होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इलाज में अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द पूर्ण कराकर शासन में भेजें। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए पर्याप्त राशि दी जाएगी।

भोपाल पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक: ईरानी गैंग का गिरोह तोड़ा, दिल्ली तक फैली दहशत

भोपाल  राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक शहरों सहित दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरू सहित दर्जन भर सहित बड़े शहरों में अब तक सैकड़ों वारदात को अंजाम देने वाले भोपाल के ईरानी गैंग पर पुलिस ने छापा मारा है। देर रात भोपाल डीसीपी जोन-4 मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने एक साथ करोंद क्षेत्र में स्थित अमन कॉलोनी ईरानी डेरे में छापा मारा। छापेमारी काम्बिंग गश्त के तहत की गई।  पुलिस की इस कार्रवाई में 24 पुरुष आरोपी और 10 महिला अपराधी गिरफ्तार की गई हैं। एक साथ 34 ईरानी बदमाशों के खिलाफ भोपाल पुलिस की यह कार्रवाई वर्षों बाद की गई है। कार्रवाई का विरोध करने के लिए अपराधियों ने महिलाओं और बच्चों को आगे किया, लेकिन पुलिस भी पूरी तैयारी के साथ गई थी, इसलिए टीम में भारी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।    ईरानी डेरा … भोपाल में स्थित यह वह जगह है, जहां पुलिस भी जाने से डरती है। पुलिस इस इलाके में घुसने के लिए पूरी पलटन लेकर जाती है। रविवार अहले सुबह जब, पुलिस की टीम पहुंची तो हमला हो गया। हालांकि पुलिस की टीम डरी नहीं है और करीब 32 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इस डेरे में रहने वाले लोगों का आतंक दिल्ली से मुंबई तक है। देश के अलग-अलग शहरों इनका आतंक रहा है। पीट गई भोपाल पुलिस दरअसल, ईरानी डेरे में रहने वाले कुख्यात अपराधियों को पकड़ने के लिए गई थी। 40 गाड़ियों में करीब 150 जवानों की टीम गई थी। पुलिस की टीम जब ईरानी डेरे में घुसी तो उस समय भोपाल का तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस था। पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही डेरे की महिलाएं जाग गईं और पुलिस पर हमला बोल दिया। इसके बाद स्थिति बिगड़ने लगी। पुलिस ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए, उनसे डरी नहीं। डेरे से करीब 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 10 महिलाएं भी शामिल हैं। दिल्ली से मुंबई तक है इनका खौफ ईरानी डेरे में रहने वाले अधिकांश लोग अपराध में शामिल रहते हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई तक की पुलिस को इनकी तलाश है। अलग-अलग शहरों में जाकर ये लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। डेरे में कुछ नामी बदमाश भी रहते हैं। समय के हिसाब से अलग-अलग रूप धारण कर ईरानी डेरे के लोग ठगी भी करते हैं। सीबीआई अफसर से लेकर पत्रकार तक बन जाते वहीं, ईरानी डेरे के लोगों को फर्जी अफसर बनने में भी महारत हासिल है। ये लोग सीबीआई के नकली अफसर बनकर भी लोगों को डराते हैं। उनसे रुपए लूट लेते हैं। यही नहीं, लोगों को डराने के लिए डेरे के लोग पत्रकार भी बनते थे। छापेमारी के दौरान इनके पास से चैनल की आईडी भी मिली है। पत्रकार बनकर ये पुलिस और लोगों को चकमा देते थे। हिस्ट्रीशीटर बदमाश को पकड़ने का था लक्ष्य भोपाल पुलिस मुख्य रूप से एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश को पकड़ने के लिए पूरी योजना बनाकर पहुंची थी। पुलिस ने छापेमारी में आरोपियों के ठिकानों से एक नकली पिस्तौल, 21 दोपहिया वाहन और 51 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।  हिस्ट्रीशीटर बदमाश राजू ईरानी को पकड़ने गई थी पुलिस डीपीसी जोन-4 मयूर खंडेलवाल ने बताया कि नकली पुलिस बनकर अमन कॉलोनी के कुछ बदमाशों द्वारा भोपाल के ग्रामीण क्षेत्र सहित आसपास के जिलों में कुछ लोगों को ठगने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पकड़ा गया गिरोह मुख्य रूप से बड़े शहरों में बड़ी चोरियां, भोपाल और आसपास के जिलों में मोबाइल और चेन लूट की वारदातों को अंजाम देता है। रविवार सुबह हिस्ट्रीशीटर बदमाश राजू ईरानी को पकड़ने गई थी। डेढ़ सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने घरों की तलाशी लेनी चाही तो महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। वे पुलिसकर्मियों के सामने खड़ी हो गईं। जल्द ही पुरुष भी प्रदर्शन में शामिल होकर हंगामा करने लगे। महिला पुलिसकर्मियों सहित जवानों से खींचातानी करने लगे। तलाशी अभियान के दौरान बदमाश काला ईरानी के घर से एक नकली पिस्तौल मिली। काला ईरानी नकली पुलिस बनकर कई लोगों को ठग चुका है। हालांकि ठगी का शिकार अधिकांश लोगों ने प्रकरण दर्ज नहीं कराया।  दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दो बदमाशों को पकड़ा था इसी साल जुलाई महीने में दिल्ली पुलिस ने अमन कॉलोनी निवासी ईरानी गैंग के दो सदस्यों- मुर्तजा अली उर्फ दमार (38) और सिराज अली (40) को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस को उनके दिल्ली में छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर इंद्रप्रस्थ पार्क के पास रात में घेराबंदी की गई। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपी गोली लगने से घायल हो गए थे। जांच में सामने आया कि दोनों के खिलाफ देश के कई राज्यों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और ठगी जैसे संगीन अपराध दर्ज हैं। वे कई मामलों में फरार चल रहे थे। दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ नया केस दर्ज किया था। अमेरिका और ईरान की करेंसी मिली अपराधी इतने खूंखार हैं कि इन्हें किसी दूसरे शहर में भी लूट करने से डर नहीं लगता है। छापेमारी के दौरान इनके घरों से अमेरिकी और ईरानी की करेंसी मिली है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विदेशी करेंसी लूट के ही हैं। विदेशों में बेचते हैं लूट के सामान जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि ईराने डेरे का नेटवर्क विदेशों में भी फैला है। ये लोग लूट के फोन विदेशों में भी बेचते थे। जांच में यह बात सामने आई है कि लूट के मोबाइल दुबई में बेचते थे। लूट के फोन पहले मुंबई भेजते थे। इसके बाद वहां से दुबई जाता था। अपराधियों का घर है ईरानी डेरा दरअसल, ईरानी डेरा भोपाल के बाहरी इलाके में बसा हुआ है। इनकी बस्ती इतनी सघन है कि बाहरी लोगों का घुसना मुश्किल है। इसी का फायदा उठाकर अपराधी यहां शरण लेते हैं। इन अपराधियों के लिए महिलाएं शिल्ड का काम करती हैं। पुलिस जब आती है तो पहले महिलाओं से उनका सामना होता है। बताया जाता है कि देश भर से अपराध करने के बाद अपराधी यहीं शरण लेने आते हैं। भोपाल के निशातपुरा और … Read more

मध्यप्रदेश के 22 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, मंदसौर में सबसे कम 2.9 डिग्री, ट्रेनें देरी से चल रही हैं

भोपाल  मध्य प्रदेश में सर्दी का सितम लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है। राजधानी भोपाल में न्यूनतम तापमान गिरकर 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि मंदसौर सबसे ठंडा जिला रहा, जहां पारा 2.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में हो रही बर्फबारी का सीधा असर मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। उत्तर से आ रही ठंडी हवाओं के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में कोल्ड वेव की स्थिति बनी हुई है। भोपाल, इंदौर, रीवा समेत कई जिलों में सुबह और रात के समय जबरदस्त ठंड महसूस की जा रही है।  मंदसौर सबसे ठंडा, भोपाल में 4.6 डिग्री तक लुढ़का पारा प्रदेश में बीती रात सबसे कम तापमान मंदसौर में 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा शाजापुर में 3.1 डिग्री, राजगढ़ में 3.8 डिग्री और पचमढ़ी में 4.8 डिग्री रहा। भोपाल में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री तक गिर गया, जो सामान्य से काफी नीचे है। ग्वालियर, इंदौर सहित करीब 30 शहरों में पारा 10 डिग्री से कम रहा। कोहरे का कहर, रेल यातायात प्रभावित सुबह घने कोहरे ने दृश्यता बेहद कम कर दी, जिससे दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली कई ट्रेनें देरी से चलीं। मालवा एक्सप्रेस, शताब्दी और अन्य प्रमुख ट्रेनों की समय-सारिणी बिगड़ गई। यात्रियों को ठंड के साथ लंबे इंतजार की मार झेलनी पड़ी। उत्तरी जिलों जैसे ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड में कोहरा सबसे घना रहा।  शीतलहर का अलर्ट, सर्द हवाएं तेज मौसम विभाग ने भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, शाजापुर, मंदसौर सहित कई जिलों में कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया है। ऊंचाई पर तेज जेट स्ट्रीम के कारण सर्द हवाएं चल रही हैं, जिससे दिन में धूप निकलने के बावजूद ठंडक बनी हुई है।  पश्चिमी विक्षोभ से और बढ़ेगी ठंड मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 30 दिसंबर के आसपास पश्चिमी हिमालय में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्यप्रदेश तक पहुंचेगा। जेट स्ट्रीम की तेज रफ्तार ठंड को और गहरा कर रही है, आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट संभव है। लोगों के लिए सलाह विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि सुबह-शाम बाहर निकलते समय गर्म कपड़े पहनें, कोहरे में वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और बुजर्गों-बच्चों का विशेष ध्यान रखें। ठंड से बचाव के लिए गरम पेय और हीटर का इस्तेमाल करें। प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग में घना कोहरा छाया रहा, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम होने के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ है। कोहरे की वजह से कई ट्रेनें 4 से 5 घंटे की देरी से चल रही हैं। मौसम विभाग ने बताया कि ऊपरी वायुमंडल में जेट स्ट्रीम की रफ्तार 213 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है, जिससे ठंडी हवाएं और तेज हो गई हैं। विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक ठंड और कोहरे से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह-शाम अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, गर्म कपड़े पहनने और बुजुर्गों व बच्चों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। नवंबर-दिसंबर में रिकॉर्ड तोड़ चुकी है सर्दी इस बार नवंबर के बाद दिसंबर में भी सर्दी रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। नवंबर में भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर के यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, 17 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इससे पहले 30 नवंबर 1941 में तापमान 6.1 डिग्री रहा था। इंदौर में भी पारा 6.4 डिग्री ही रहा। यहां भी सीजन की सबसे सर्द रात रही। 25 साल में पहली बार पारा इतना लुढ़का। दूसरी ओर, दिसंबर में इंदौर में पारा सबसे कम रहा। भोपाल में भी यह 5 डिग्री से नीचे पहुंच चुका है। ठंड के लिए दिसंबर-जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं। इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से दिसंबर में मावठा भी गिरता है। इससे दिन में भी सर्दी का असर बढ़ जाता है। अब जानिए दिसंबर में कैसी रहती है ठंड? मौसम का ट्रेंड देखें तो दिसंबर में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस आते हैं। वहीं, उत्तरी हवाएं आने से दिन-रात के तापमान में गिरावट होती है। इस बार भी यही हो रहा है। शुरुआत से अब तक कई वेस्टर्न डिस्टरबेंस उत्तर भारत को प्रभावित कर चुके हैं। इस वजह से एमपी में कड़ाके की ठंड के साथ शीतलहर का असर है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी     ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के सभी जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यहां बर्फीली हवाएं सीधे आ रही हैं। कोहरे का असर भी इन जिलों में ज्यादा देखा जा रहा है। सागर और रीवा संभाग भी प्रभावित है।     भोपाल संभाग के सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा में ठंड का जोर है। राजगढ़ में पारा 4 डिग्री तक पहुंच चुका है।     सागर संभाग के निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़-पन्ना, रीवा संभाग के मऊगंज, सीधी-सिंगरौली में तेज ठंड है।     जबलपुर संभाग के मंडला-डिंडौरी, इंदौर संभाग के इंदौर, धार और झाबुआ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। उत्तर भारत में शीतलहर-कोहरे का कहर, नए साल पर कैसा रहेगा मौसम? श्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से पूरा उत्तर भारत घने कोहरे और शीतलहर की चपेट में है। रविवार को दिल्ली और आसपास के इलाकों में कोहरे के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते दिखे। रेल और वायु यातायात पर बहुत बुरा असर पड़ा। लंबी दूरी की ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही हैं। विमानों का परिचालन भी प्रभावित हुआ। मौसम विभाग का अनुमान है कि 31 दिसंबर तक मौसम का रुख लगातार सर्द होगा जबकि नए साल के पहले … Read more

अरावली हिल्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न, पुराने आदेश पर रोक लगाकर नई समिति गठित करने का निर्देश

नई दिल्ली अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा तय करने वाले आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 20 नवंबर को सुनाया गया फैसला अगली सुनवाई तक लागू नहीं होगा। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। सीजेआई ने कहा कि अरावली पहाड़ियों के अध्ययन और सर्वे के लिए एक नई समिति बनाई जाएगी। सीजेआई ने कहा कि इसपर पुनः विचार किया जाना है कि क्या 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियों को ही अरावली का हिस्सा मानने से अवैध खनन तो नहीं शुरू हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उस इलाके की पहचान करने के लिए परिभाषा तय करनी है जो कि अरावली का हिस्सा नहीं हैं। बता दें कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक जैसी परिभाषा को स्वीकार करते हुए मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली इस पर्वत श्रृंखला में विशेषज्ञों की रिपोर् आने तक खनन पट्टों पर रोक लगा दी थी। अरावली को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी भौगोलिक सीमा और परिभाषा को लेकर है। पहाड़ियों की स्पष्ट परिभाषा न होने के कारण कई बार निर्माण कार्यों और खनन को लेकर नियमों का उल्लंघन होता है। इससे पहले, न्यायालय ने अरावली में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के खिलाफ निर्णय लिया था। न्यायालय का मानना था कि इस तरह का निषेध अवैध खनन गतिविधियों को जन्म दे सकता है। क्या थी नई परिभाषा? अदालत ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की एक समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया था। समिति के अनुसार, ‘‘अरावली पहाड़ी’’ को उन चिह्नित अरावली जिलों में मौजूद किसी भी भू-आकृति के रूप में परिभाषित किया जाएगा, जिसकी ऊंचाई स्थानीय निचले बिंदु से 100 मीटर या उससे अधिक हो। वहीं, ‘‘अरावली पर्वतमाला’’ एक-दूसरे से 500 मीटर के भीतर दो या अधिक ऐसी पहाड़ियों का समूह होगा।