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भारत को मिलेगा फायदा, 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उत्पाद होंगे ड्यूटी-फ्री

नई दिल्ली भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते के तीन साल पूरे होने पर बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार, 29 दिसंबर को घोषणा की कि 1 जनवरी 2026 से ऑस्ट्रेलिया भारतीय निर्यात के लिए अपनी सभी टैरिफ लाइनों को शून्य ड्यूटी (zero-duty) कर देगा. यानी भारत से ऑस्ट्रेलिया जाने वाले किसी भी सामान पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा. ये समझौता 29 दिसंबर 2022 को लागू हुआ था और इसे 'अर्ली हार्वेस्ट' डील कहा जाता है. जिसमें शुरुआती चरण में कुछ प्रमुख व्यापारिक मुद्दों को शामिल किया गया था. अब तीन साल बाद ये डील अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है, जहां ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय सामान के लिए पूरी तरह ड्यूटी-फ्री मार्केट एक्सेस देने का फैसला किया है. पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, पीयूष गोयल का पोस्ट. उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों में इस समझौते ने निर्यात में लगातार वृद्धि की है. बेहतर बाजार तक पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने में मदद की है. इससे भारतीय निर्यातक, MSME, किसान और काम करने वाले लोगों को खास फायदा हुआ है.  रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का ऑस्ट्रेलिया को निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन (trade balance) में सुधार हुआ है. विभिन्न क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है. मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और जेम्स एवं ज्वेलरी जैसे सेक्टर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई. निर्यात में 8% की शानदार बढ़ोतरी वाणिज्य मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात 8 प्रतिशत बढ़ा है। इस वृद्धि में रसायन, कपड़ा, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोलियम उत्पाद और रत्न व आभूषण (जेम्स एंड जूलरी) जैसे प्रमुख क्षेत्रों का बड़ा योगदान रहा है। पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर कहा, "1 जनवरी, 2026 से भारतीय निर्यात के लिए 100 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई टैरिफ लाइन्स (उत्पाद श्रेणियां) जीरो-ड्यूटी होंगी। इससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।" समझौते के 3 साल के दौरान क्या-क्या हुआ? भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यह अंतरिम व्यापार समझौता 29 दिसंबर, 2022 को लागू हुआ था। आज इसके तीन साल पूरे हो गए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और शुल्क बाधाओं को कम करना था। मंत्री ने समझौते की सफलता के बारे में बताते हुए कहा, "पिछले तीन वर्षों में इस करार ने निरंतर निर्यात वृद्धि, बाजार तक गहरी पहुंच और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने का काम किया है। इसका सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों, एमएसएमई, किसानों और श्रमिकों को मिला है।" श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सबसे ज्यादा फायदा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देश में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलने से भारतीय उत्पाद वहां चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले ज्यादा किफायती हो जाएंगे। चूंकि कपड़ा, चमड़ा और आभूषण उद्योग में बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होता है, इसलिए यह कदम भारत की रोजगार वृद्धि में भी सहायक होगा। भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते में क्या खास?     समझौता लागू हुआ: 29 दिसंबर, 2022     पूर्ण शुल्क माफी: 1 जनवरी, 2026 से (100% टैरिफ लाइन्स पर)     मौजूदा वित्त वर्ष में वृद्धि: निर्यात में 8% का इजाफा     लाभ लेने वाले सेक्टर: टेक्सटाइल, फार्मा, केमिकल्स, जेम्स एंड जूलरी नए साल में लागू होने वाली 100 प्रतिशत टैरिफ छूट के साथ, भारत सरकार को उम्मीद है कि ऑस्ट्रेलिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़ों में और तेजी देखने को मिलेगी।  कृषि निर्यात में भी व्यापक प्रगति हुई है. फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद, मसाले और खास तौर पर कॉफी में खासा उछाल देखा गया है. श्रम-प्रधान क्षेत्र जैसे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड को इस नई व्यवस्था से सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि टैरिफ खत्म होने से इनके लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में पहुंच आसान और सस्ती हो जाएगी. ये कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लग रहा है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित बाजार में ड्यूटी-फ्री एक्सेस भारत के लिए निर्यात की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. दोनों देश फिलहाल व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (Comprehensive Economic Cooperation Agreement – CECA) पर बातचीत कर रहे हैं, जो और भी गहरा और व्यापक होने की उम्मीद है. पीयूष गोयल ने कहा कि Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की आर्थिक मौजूदगी को मजबूत करता है और 'मेक इन इंडिया' तथा 'विकसित भारत@2047' के विजन से जुड़ा है.

यूपी में 75 साल में 21 मुख्यमंत्री बने, ब्राह्मणों का 6 बार शासन, 32 साल से सियासी वनवास में कौन?

लखनऊ    उत्तर प्रदेश की सियासत में लंबे समय तक सत्ता की कमान ब्राह्मण समाज के हाथों में रही है. नारायण दत्त तिवारी के बाद यूपी में कोई भी ब्राह्मण समाज से मुख्यमंत्री नहीं बन सका. सूबे में पिछले 3 दशकों से राजनीतिक पार्टियों के लिए ब्राह्मण समाज महज एक वोटबैंक बनकर रह गया है. ऐसे में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक ने इस कड़ाके के ठंड में सियासी गर्मी बढ़ा दी है. विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान 23 दिसंबर को लखनऊ में कुशीनगर से बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के सरकारी आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक की, जिसमें 40 से ज्यादा ब्राह्मण समाज के विधायकों ने शिरकत किया था. इसके बाद सूबे में ब्राह्मण पॉलिटिक्स की फिर से चर्चा तेज हो गई. ब्राह्मण विधायकों को बैठक करने पर यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नसीहत और चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठकें बीजेपी के संविधान में नहीं हैं. इसके बाद पीएन पाठक ने सोमवार देर शाम एक ट्वीट कर जवाब दिया. उन्होंने साफ कहा कि ब्राह्मण हमेंशा से समाज और सनातन धर्म का नेतृत्व करता रहा है. इस तरह से यूपी की जातीय गोलबंदी के बीचसवाल उठता है कि आखिर यूपी में किस-किस जाति के मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में किस जाति के कितने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश की सियासत में अब के बने मुख्यमंत्रियों पर नजर डालें तो आजादी के बाद से लेकर अभी तक कुल 21 मुख्यमंत्री हुए, इसमें सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री (6) ब्राह्मण समाज से रहे. इसके अलावा पांच ठाकुर मुख्यमंत्री बने हैं. ब्राह्मण और ठाकुर के बाद यूपी में तीन यादव मुख्यमंत्री रहे और तीन ही वैश्य समाज से सीएम बने. इसके अलावा एक लोधी समाज से मुख्यमंत्री रहे तो दलित समाज से मायावती एकलौती सीएम रहीं. इसके अलावा जाट और कायस्थ समाज से एक-एक मुख्यमंत्री बने हैं. यूपी में 6 ब्राह्मण सीएम और 23 साल राज आजादी के बाद यूपी की सियासत में 1989 तक ब्राह्मण का सियासी वर्चस्व रहा. इस दौरान ब्राह्मण समाज से 6 मुख्यमंत्री बने. गोविंद वल्लभ पंत, सुचेता कृपलानी, कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, श्रीपति मिश्र और नारायण दत्त तिवारी बने. ये सभी कांग्रेस से थे. ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों में सबसे ज्यादा नारायण दत्त तिवारी तीन बार यूपी के सीएम रहे तो गोविंद वल्लभ पंत दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला. इन छह मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल को देखें तो करीब 23 साल तक प्रदेश की सत्ता की कमान ब्राह्मण समाज के हाथ में रही है. इतना लंबे समय तक किसी दूसरे समाज के सीएम सूबे में नहीं रहे, जिसके चलते 1950 से 1989 तक के समय को ब्राह्मण काल भी कहा जाता रहा है. ठाकुर, यादव और वैश्य समाज के सीएम बने ब्राह्मण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा सीएम ठाकुर समाज से बने. ठाकुर समाज से पांच सीएम बने, जिसमें सबसे पहले त्रिभुवन नारायण सिंह और उसके बाद विश्‍वनाथ प्रताप सिंह, वीर बहादुर सिंह कांग्रेस के सीएम रहे. इसके अलावा बीजेपी के राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ठाकुर समाज से सीएम बने. इसके योगी आदित्यनाथ दूसरी बार सीएम हैं जबकि बाकी सभी एक-एक बार सीएम रहे. सूबे में करीब 17 साल तक ठाकुर समाज के सीएम रहे. यूपी में यादव समाज से तीन सीएम बने, जिसमें सबसे पहले राम नरेश यादव जनता पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री थे. इसके बाद मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सीएम बने. 13 साल तक यूपी में सत्ता की कमान यादव समाज के हाथों में रही. इसी तरह से वैश्य समाज से तीन सीएम बने. वैश्य समाज से चंद्र भान गुप्ता, बाबू बनारसी दास और राम प्रकाश गुप्ता सीएम बने. चंद्र भान गुप्ता दो बार सीएम रहे और बाकी दोनों नेता एक-एक बार. राम प्रकाश गुप्ता बीजेपी सरकार में सीएम रहे जबकि दोनों कांग्रेस से थे. जाट-लोध-दलित और कायस्थ 1-1 सीएम बने यूपी में ब्राह्मण, ठाकुर, यादव और वैश्य समाज के अलावा जाट, लोध, दलित और कायस्थ समाज से एक-एक मुख्यमंत्री रहे हैं. कायस्थ समाज से डॉ सम्‍पूर्णानन्‍द 1954 से लेकर 1960 तक दो बार सीएम बने. जाट समदाय से चौधरी चरण सिंह यूपी में दो बार मुख्यमंत्री रहे. चरण सिंह पहली बार अप्रैल 1967 मे सीएम बने और उसके बाद 1970 में बने थे. दलित समाज से मायावती एकलौती नेता हैं, जो यूपी की मु्ख्यमंत्री बनी हैं. मायावती चार बार सीएम रही. पहली बार 1995 में सीएम बनी और उसके बाद 1997, 2002 और 2007 में मुख्यमंत्री का पद संभाला. मायावती ने लगभग पौने सात साल सीएम रही हैं. लोध समाज से कल्याण सिंह दो बार यूपी के सीएम बने. पहली बार 1991 और दूसरी बार 1997 में सीएम बने. 32 साल से ब्राह्मण समाज का वनवास उत्तर प्रदेश में मंडल और कमंडल की राजनीति ने ब्राह्मण समाज को हाशिए पर धकेल किया. हालांकि, बीजेपी में अटल विहारी वाजपेयी और मुरली मनोहर जोशी से लेकर कलराज मिश्रा जैसे ब्राह्मण नेता चेहरा हुआ करते थे, पर सूबे की सत्ता में कांग्रेस की तरह उनकी हनक नहीं रही. मंडल की राजनीति ने यूपी की सियासत को ओबीसी के इर्द-गिर्द समेटकर रख दिया. 1989 के बाद से कांग्रेस सत्ता में नहीं आई है जबकि पिछले दिनों से सपा से लेकर बसपा और बीजेपी की उत्तर प्रदेश में कई बार सरकारें बनी, लेकिन सूबे को ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं मिला. इस तह पिछले 32 सालों में ब्राह्मण समाज से कोई मुख्यमंत्री नहीं बना. साल 1989 के बाद अब तक कुल सात मुख्यमंत्री बने, चार बीजेपी, दो सपा और एक बसपा से. बीजेपी ने 1989 के बाद से अब तक प्रदेश में चार बार सरकार बनाई है, इसमें उसने दो ठाकुर और एक बनिया और एक लोधी राजपूत को मौका दिया. ऐसे में ब्राह्मण समाज सत्ता की बागडोर संभालने को बेचैन दिख रहा है. यही वजह है कि ब्राह्मण समाज बैठक कर अपने प्रतिनिधित्व के लिए चिंता जता रहा है.

2026 में विराट और रोहित के खेल कार्यक्रम की पूरी जानकारी, कितने मुकाबले होंगे?

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली और रोहित शर्मा ने 2025 अपनी बेहतरीन फॉर्म दिखाकर जोरदार वापसी की. इन दोनों के दमदार खेल की बदौलत भारत ने टेस्ट क्रिकेट में खराब प्रदर्शन के बाद तीन मैचों की सीरीज में दक्षिण अफ्रीका को 2-1 से हराया. टी20 और टेस्ट से संन्यास लेने के बाद दोनों पूर्व कप्तान अब सिर्फ एक ही फॉर्मेट खेलते हैं. 2027 वर्ल्ड कप से पहले उनके भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बावजूद वनडे क्रिकेट में टीम इंडिया के लिए टॉप परफॉर्मर बने हुए हैं. कोहली ने प्रोटियाज के खिलाफ तीन मैचों में 302 रन बनाए, जिसमें दो शतक और एक अर्धशतक शामिल था. वहीं, रोहित ने तीन मैचों में दो अर्धशतकों की मदद से 146 रन बनाए. यह दोनों का 2025 में टीम इंडिया के लिए आखिरी मैच था. अब रोहित शर्मा और विराट कोहली कब दिखेंगे? अब फोकस टी20 इंटरनेशनल पर शिफ्ट होगा, क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी के तहत बुधवार (9 दिसंबर) से दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज शुरू हो रही है. रोहित और विराट एक महीने बाद फिर से मैदान पर लौटेंगे. 2026 में उनका पहला मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ होगा, जहां भारत नए साल में तीन वनडे मैच खेलेगा. इसके बाद कोहली और रोहित लगभग छह महीने तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहेंगे और 2026 टी20 वर्ल्ड कप और 2026 आईपीएल के बाद ही भारत के लिए खेलेंगे. 2026 में किन टीमों के साथ भारत का मुकाबला किस टीम से मुकाबला                   होस्ट    सीरीज में कितने मैच    सीरीज कब होगी भारत बनाम न्यूजीलैंड                    भारत            3                    11-18 जनवरी 2026 भारत बनाम अफगानिस्तान              भारत           3                     जून 2026 भारत बनाम इंग्लैंड                        इंग्लैंड             3                   14 -19 जुलाई 2026 भारत बनाम बांग्लादेश                  बांग्लादेश           3                  सितंबर 2026 भारत बनाम वेस्टइंडीज               वेस्टइंडीज          3                सितंबर-अक्टूबर 2026 भारत बनाम न्यूजीलैंड                न्यूजीलैंड             3               अक्टूबर-नवंबर 2026 2027 वर्ल्ड कप से पहले कितने मैच मार्च 2027 के बाद का फ्यूचर टूर प्रोग्राम (एफटीपी) अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन उस साल एशिया कप और वर्ल्ड कप की तैयारी में भारत को और द्विपक्षीय सीरीज खेलनी होंगी. यह भी गौर करने वाली बात है कि न्यूजीलैंड सीरीज से पहले रोहित और विराट मुंबई और दिल्ली के लिए विजय हजारे ट्रॉफी (वीएचटी) में खेलने उतरे.

1 जनवरी 2026 से लागू होंगे ये 7 बड़े नियम, LPG से लेकर UPI और PAN तक आपकी जेब पर होगा असर

नई दिल्ली यह नया साल केवल कैलेंडर बदलने वाला नहीं, बल्कि आपकी जेब, बिल, निवेश, ट्रैवल और रोजमर्रा की डिजिटल लाइफ पर कई बड़े बदलाव सीधे असर डालने वाले हैं. 1 जनवरी 2026 से देशभर में कई रूल्स अप्लाई हो रहे हैं,गैस बिल से लेकर UPI, PAN, LPG और ट्रेड पॉलिसी तक सब कुछ बदल रहा है.तो आइए जानते हैं आने वाले महीने की पहली तारीख से कौन से नियम बदलने वाले हैं. गैस टैरिफ अब पूरे देश में एक समान      पहली बार देश में "One Nation – One Tariff" लागू होगा.     PNGRB ने यूनिफाइड गैस टैरिफ मंजूर किया,     0–300 किमी: ₹54/MMBTU,     300 किमी से ऊपर: ₹102.86/MMBTU     अब टैरिफ दाम पूरे भारत में एक जैसे होंगे,     CNG के दाम ₹2–₹3 तक घटेंगे,     THINK Gas ने CNG में ₹2.50/kg कटौती की होगी,     PNG में ₹2–₹5/SCM तक कमी,किचन खर्च होगा कम. LPG सिलेंडर और ATF के दाम भी घट सकते हैं     कच्चे तेल के भाव नीचे आए तो 1 जनवरी को LPG कीमतों में कटौती संभव है.     घरेलू और कमर्शियल,दोनों सिलेंडर सस्ते हो सकते हैं,     ATF (एविएशन फ्यूल) के दाम भी कम होने के संकेत हैं.     OCL–BPCL–HPCL हर महीने रेट रिव्यू करते हैं.     नए साल की शुरुआत ,गैस बिल कम होने की उम्मीद. भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौता      1 जनवरी 2026 से बड़ा बदलाव लागू की उम्मीद है.     भारत का 100% निर्यात ऑस्ट्रेलिया में अब ड्यूटी-फ्री.     हले सिर्फ 96–98% उत्पाद शामिल थे.     अब इंजीनियरिंग, मशीनरी, स्टील,सब कवर है.      MSME व एक्सपोर्ट सेक्टर को सीधा फायदा.     पीयूष गोयल: निर्यातकों के लिए बड़ा अवसर है. IndiGo पायलटों का वेतन बढ़ा     लगातार फ्लाइट कैंसिलेशन के बाद नीति में बदलाव.     डोमेस्टिक लेओवर: कैप्टन ₹3,000, फर्स्ट ऑफिसर ₹1,500.     डेडहेड अलाउंस: कैप्टन ₹4,000, फर्स्ट ऑफिसर ₹2,000.     नाइट अलाउंस: कैप्टन ₹2,000 प्रति घंटा (12 AM–6 AM).     नया "टेल-स्वैप" अलाउंस लागू.     मकसद-संचालन स्मूद, यात्रियों को बेहतर शेड्यूल मिले. UPI और डिजिटल पेमेंट      1 जनवरी से सुरक्षा नियम सख्त हो जाएंगे.     UPI ऐप्स पर अतिरिक्त KYC जरूरी.      मोबाइल–डिवाइस लिंकिंग जरूरी है.     संदिग्ध / फर्जी अकाउंट ब्लॉक होंगे.      Google Pay, PhonePe, Paytm, WhatsApp Pay सभी पर लागू.     फ्रॉड रोकना मुख्य उद्देश्य है,     डिजिटल पेमेंट अब और सुरक्षित बनेंगे. स्मॉल सेविंग्स स्कीम     स्मॉल सेविंग्स स्कीम की ब्याज दरें 31 दिसंबर को RBI रिव्यू करेगा.     G-Sec यील्ड कम होने से जनवरी–मार्च 2026 में दरें घट सकती हैं.     PPF, SSY, SCSS, FD निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत. PAN-Aadhaar लिंकिंग      PAN-Aadhaar लिंकिंग की लास्ट 31 दिसंबर 2025 है.     टाइम पर लिंक न किया तो 1 जनवरी 2026 से PAN इनऑपरेटिव हो जाएगा.     *ITR फाइल और वेरिफाई नहीं हो पाएगा.     रिफंड अटक सकता है, TDS/TCS 20% तक कटेगा.     बैंक, डीमैट, म्यूचुअल फंड–प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन में दिक्कतें आएंगी. नतीजे भी समझें     ITR फाइल और वेरिफाई नहीं कर पाएंगे.     टैक्स रिफंड रुकेगा.     TDS/TCS 20% तक लगेगा.     बैंक अकाउंट-डीमैट-म्युचुअल फंड-प्रॉपर्टी खरीद में दिक्कत. नया साल, नए नियम     2026 के ये बदलाव घर, जेब, बिज़नेस, ट्रैवल और डिजिटल मनी,सब पर असर डालेंगे.     अगर आप चाहते हैं कि नया साल पैसों की बचत और सही प्लानिंग के साथ शुरू हो .     PAN-Aadhaar लिंक करें, UPI अकाउंट अपडेट करें और गैस-LPG दरों को ध्यान से चेक करें.

धमतरी: नगरी क्षेत्र में नई संजीवनी, फुटहामुड़ा नहर परियोजना से सुधरेगा ग्रामीण सिंचाई परिदृश्य

 धमतरी : नगरी क्षेत्र को सिंचाई में नई संजीवनीः फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य धमतरी धमतरी जिले के नगरी विकासखंड में बहुप्रतीक्षित फुटहामुड़ा नहर निर्माण परियोजना अब तेज गति से आगे बढ़ रही है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिससे किसानों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना से बदलेगा ग्रामीण परिदृश्य       फुटहामुड़ा नहर का निर्माण गंगरेल जलाशय के सैंडल डैम, ग्राम फुटहामुड़ा से प्रारंभ होकर लगभग 19.74 किलोमीटर लंबाई में किया जा रहा है। परियोजना के पूर्ण होने पर नगरी विकासखंड के 22 ग्रामों के लगभग 1940 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों का रकबा भी बढ़ेगा और किसानों की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।       परियोजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक प्रगति हो चुकी है। मुख्य नहर से प्रभावित 10 ग्रामों में कुल 14.33 हेक्टेयर भूमि का भू-अर्जन पूर्ण कर लिया गया है। वहीं वन प्रकरण से प्रभावित 24.42 हेक्टेयर भूमि की अंतिम चरण की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही निर्माण कार्य में आने वाली सभी प्रमुख प्रशासनिक बाधाएं दूर हो गई हैं, जिससे कार्य अब निर्बाध गति से आगे बढ़ रहा है।        जिला प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग द्वारा बताया गया कि यह परियोजना केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। सिंचाई सुनिश्चित होने से किसानों की आय बढ़ेगी, कृषि आधारित रोजगार के अवसर सृजित होंगे और पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी।       कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने परियोजना को नगरी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा, “फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी विकासखंड के किसानों के लिए दीर्घकालीन लाभ देने वाली योजना है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूर्ण हो। यह परियोजना कृषि समृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को नई दिशा देगी।”        उल्लेखनीय है कि पिछले माह उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा स्थल का दौरा कर निर्माण प्रगति, तकनीकी पक्षों एवं आवश्यक संसाधनों का गहन निरीक्षण किया गया था। अधिकारियों के मार्गदर्शन में अब कार्य को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। फुटहामुड़ा नहर परियोजना नगरी अंचल में हरित क्रांति की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह

धमतरी : धान से आगे सोच : मखाना खेती से बदलेगी धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह 40 महिला किसान समूह ने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया धमतरी कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।  डबरी से समृद्धि तकः धमतरी की महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह ख़ास कर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे है। अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी।  छोटी-छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।          कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।       इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।       बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।      इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 किं्वटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।      उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।         उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।       आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।

अंबिकापुर में शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 12 जनवरी

अंबिकापुर खाद्य अधिकारी ने बताया कि नगर पालिक निगम अम्बिकापुर के अंतर्गत संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकान संचालन हेतु पात्र संस्था/एजेन्सी को आबंटित किया जाना है। जिसमें शासकीय उचित मूल्य दुकान नमनाकला वार्ड क्र. 14 आई.डी. 391001048, मंगल पाण्डेय वार्ड क्र. 13 आई.डी. 391001005, डॉ. भीमराव अम्बेडकर वार्ड क्र. 45 आई.डी. 391001072, महारानी लक्ष्मीबाई वार्ड क्र. 04, आई.डी. 391001004, स्वामी विवेकानंद वार्ड क्र. 35, आई.डी. 391001010, शीतला वार्ड क्र. 32 आई.डी. 391001030, पटपरिया वार्ड क्र. 11 आई.डी. 391001037, एवं लरंग साय वार्ड क्र. 24 आई.डी. 391001071 संचालन हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन शासकीय उचित मूल्य दुकानों के नवीन आबंटन के संचालन हेतु इ़च्छुक पात्र एजेन्सी अपना आवेदन पत्र विहित प्रारूप में सम्पूर्ण विवरण एवं दस्तावेज की सत्यापित छायाप्रति के साथ 12 जनवरी 2026 तक कार्यालय कलेक्टर खाद्य शाखा में जमा कर सकते हैं। समय-सीमा के बाद आवेदन पत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा।  

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा: जीवन रक्षा की पहल, अब तक 118 नागरिकों को मिली सहायता

पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा : समय पर उपचार से जीवन रक्षा की प्रभावी पहल अब तक 118 नागरिक हो चुके हैं लाभान्वित भोपाल  पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा मध्य प्रदेश सरकार की संवेदनशील और दूरदर्शी स्वास्थ्य नीति का सशक्त उदाहरण है। गंभीर रूप से बीमार और आपातकालीन मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष रूप से उन परिस्थितियों में जहाँ हर मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को यह सुविधा निःशुल्क प्रदान कर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आर्थिक स्थिति उपचार में बाधा न बने। पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा राज्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह सेवा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि आपात परिस्थितियों में समय पर उपलब्ध उन्नत चिकित्सा परिवहन कितने अनमोल जीवन बचा सकता है। नवजात से वरिष्ठ नागरिक तक, सभी के लिए जीवन रक्षक पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा के अंतर्गत भोपाल से पूरे प्रदेश के लिए 24 घंटे, सातों दिन आपातकालीन चिकित्सा परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। यह व्यवस्था गंभीर रोगियों को कम से कम समय में उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है। सेवा प्रारंभ होने के कुछ ही महीनों में बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर उपचार उपलब्ध कराया गया है। इनमें नवजात शिशु, वरिष्ठ नागरिक, सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीज, हार्ट अटैक एवं न्यूरोलॉजिकल आपात स्थितियां, अंग प्रत्यारोपण जैसे अति संवेदनशील मामले शामिल हैं। इन सभी परिस्थितियों में हर मिनट निर्णायक रहा, जहां एयर एम्बुलेंस ने जीवन रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उपयोगिता में निरंतर वृद्धि पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा की उपयोगिता में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 में उपयोगिता में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि पाई गई। फिक्स्ड विंग एयर एम्बुलेंस की औसत उपयोगिता में 30 प्रतिशत और हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस की उपयोगिता में 17 प्रतिशत वृद्धि हुई है। योजना प्रारंभ से अब तक कुल 118 लाभार्थियों को इस सेवा का सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया एयर एम्बुलेंस सेवा की उपयोगिता के विस्तार हेतु संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गयी है। संशोधित प्रस्ताव में स्वीकृति एवं पात्रता की प्रक्रिया को सरल किया गया है, आपातकालीन उपचार के अतिरिक्त अंगदान हेतु परिवहन, आपदा प्रबंधन, विशेष मेडिकल टीमों को सेवा में शामिल किया गया है। प्रशासनिक समन्वय और जन-जागरूकता सेवा के प्रभावी उपयोग हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों एवं जिला कलेक्टरों को राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं। साथ ही, विभाग द्वारा आमजन में एयर एम्बुलेंस सुविधा के प्रति व्यापक जन-जागरूकता भी की गई है।  

लॉकहीड मार्टिन का भारत को बड़ा प्रस्ताव: 80 C-130J विमान और अरबों डॉलर का दांव, ‘भारत में बनाएंगे, दुनिया पर होगा कब्जा’

नई दिल्ली भारत करीब 80 सैन्य परिवहन विमानों की खरीद की तैयारी में है. इस बीच अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने अपने C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान को मजबूत दावेदार बताते हुए पेश किया है. कंपनी का कहना है कि यह विमान भारत को क्वाड देशों के बीच सामरिक एयरलिफ्ट में और मजबूत बनाएगा. कंपनी भारत में प्रोडक्शन हब लगाएगी लॉकहीड मार्टिन के  अधिकारियों ने कहा है कि अगर भारत C-130J का चयन करता है. तो कंपनी भारत में इस विमान के निर्माण के लिए एक बड़ा प्रोडक्शन हब लगाएगी. यह अमेरिका के बाहर दुनिया का पहला ऐसा फाइनल असेंबली सेंटर होगा. अब तक C-130J परिवार के 560 से ज्यादा विमान बन चुके हैं. जो 23 देशों की 28 वायु सेनाओं में सेवा दे रहे हैं. 30 लाख से ज्यादा फ्लाइट ऑवर्स पूरे कर चुके हैं. IAF के पास पहले से 12 C-130J विमान भारतीय वायुसेना (IAF) के पास पहले से 12 C-130J विमान हैं. यह विमान सिर्फ ट्रांसपोर्ट ही नहीं, बल्कि स्पेशल फोर्स ऑपरेशन, खुफिया मिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सर्च एंड रेस्क्यू और कमांड रोल जैसे कई कामों में इस्तेमाल हो सकता है. भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भी C-130J का संचालन कर रहे हैं. लॉकहीड मार्टिन की उपाध्यक्ष कहा कि C-130J ने हर मुश्किल माहौल में अपनी क्षमता साबित की है. यह भारत के लिए सबसे बेहतर विकल्प है. कंपनी का दावा है कि यह विमान 20 से ज्यादा अलग-अलग मिशन प्रोफाइल में इस्तेमाल हो सकता है. इसके नाम 54 वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज हैं. IAF ने 2022 में पुराने AN-32 और IL-76 विमानों को बदलने के लिए मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी. करीब 80 विमानों की यह डील कई अरब डॉलर की है. आने वाले हफ्तों में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से इसे मंजूरी मिलने की संभावना है. इस रेस में ब्राजील की एम्ब्राएर का KC-390 और एयरबस का A-400M भी शामिल हैं. C-130J में लगातार नए फीचर्स जोड़े जा रहे लॉकहीड मार्टिन इस प्रोजेक्ट के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के साथ साझेदारी में बोली लगा रही है. कंपनी ने कहा कि C-130J में लगातार नए फीचर्स जोड़े जा रहे हैं. इनमें F-35 फाइटर जेट में इस्तेमाल होने वाला डिस्ट्रिब्यूटेड अपर्चर सिस्टम (DAS) भी शामिल है. यह सिस्टम छह इन्फ्रारेड कैमरों के जरिए पायलट को बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस और मिसाइल चेतावनी देता है. लॉकहीड मार्टिन के अधिकारियों का कहना है कि MTA प्रोग्राम भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को नई मजबूती देगा. भारत के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को भी मजबूत करेगा. कंपनी का दावा है कि उसके पास तेज डिलीवरी की क्षमता है. वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से पहले विमान सप्लाई कर सकती है. भारत में C-130J के टेल सेक्शन पहले से बनाए जा रहे कंपनी ने यह भी बताया कि हैदराबाद स्थित टाटा लॉकहीड मार्टिन एयरोस्ट्रक्चर्स लिमिटेड में C-130J के टेल सेक्शन पहले से बनाए जा रहे हैं. हाल ही में यहां 250वां C-130J टेल तैयार किया गया है. आगे चलकर भारत में MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सुविधा भी स्थापित की जाएगी. इससे भारत इस विमान का क्षेत्रीय हब बन सकता है. अगर भारत C-130J को चुनता है. उसे न सिर्फ एक भरोसेमंद और बहुउपयोगी ट्रांसपोर्ट विमान मिलेगा. बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा निर्यात के लिए भी नए रास्ते खुलेंगे.

बांग्लादेश में संकट, यूनुस की जिद के कारण ₹9 हजार करोड़ का नुकसान, भारतीय सूत पर रोक के बावजूद समस्या बरकरार

नई दिल्ली भारत से दुश्मनी का बांग्लादेश अब खामियाजा भुगतने लगा है. मोहम्मद यूनुस के भारत से पंगा लेने का नुकसान बांग्लादेशियों को खूूब हो रहा है. भारत के कारण बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए का चूना लगने वाला है. जी हां, बांग्लादेश की स्थानीय कताई मिलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं. भारतीय सस्ते सूत की वजह से बंगलादेश की मिलों के पास करीब 9 हजार करोड़ रुपए का बिना बिका स्टॉक जमा हो गया है. बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए के सूत का कोई खरीददार नहीं मिल रहा है. बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक, मौजूदा वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत से सूत का आयात 137 प्रतिशत बढ़ गया है. भारतीय व्यापारी घरेलू कीमतों से 0.30 डॉलर प्रति किलोग्राम से भी कम दाम पर सूत बांग्लादेश में बेच रहे हैं. इसके चलते प्रतिस्पर्धा में टिक न पाने के कारण लगभग 50 स्थानीय स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं. भारत पर बैन का क्या मकसद? दरअसल, बांग्लादेश मिल्स एसोसिएशन भारतीय सूत पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. इन लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर हम भारतीय सूत पर ज्यादा निर्भर रहे और भारत अचानक आपूर्ति बंद कर दे, तो हमारा परिधान उद्योग भी मुश्किल में पड़ सकता है. अब इसी का असर बांग्लादेश पर उल्टा पड़ रहा है. बांग्लादेश ने क्या फैसला लिया था? गौरतलब है कि अप्रैल में बांग्लादेश ने लैंड पोर्ट के जरिए भारत से सूत आयात पर प्रतिबंध लगाया था, ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिल सके. हालांकि, यह प्रतिबंध समुद्री मार्ग से होने वाले आयात पर लागू नहीं होता. बावजूद इसके भारत के सस्ते सूत से बांग्लादेश की कताई मिलें संकट में आ गई है. बांग्लादेश के मिल मालिकों की नहीं सुन रहे यूनुस हालांकि, बांग्लादेश के मिल मालिकों ने कहा है कि वे भारतीय सूत पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं चाहते, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन कम करने की मांग कर रहे हैं, जो फिलहाल भारत के पक्ष में है…इसके अलावा मिल मालिक उन किस्मों के सूत के आयात पर रोक लगाने की मांग की, जिनका उत्पादन देश में पर्याप्त मात्रा में हो रहा है…     बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन चाहता है कि बांग्लादेश की सरकार कपास व्यापारियों के लिए वेयरहाउसिंग की सुविधा दे ताकि अमेरिकी कपास का भंडारण कर स्थानीय मिलों में उपयोग किया जा सके. क्योंकि ये वादा पारस्परिक टैरिफ वार्ताओं के दौरान किया गया था. भारत का माल है सस्ता अन्य मिल मालिकों ने बताया कि वे भारतीय सूत से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं, जहां भारतीय सूत 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम बिक रहा है, वहीं कच्चे माल, खासकर कपास की कमी के कारण स्थानीय मिलों को सूत 3 डॉलर प्रति किलोग्राम में बेचना पड़ रहा है. क्यों इंटरनेशनल ब्रांड भी भारतीय सूत की रखते हैं चाहत सस्ते दामों के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय सूत को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बांग्लादेश का स्पिनिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान आयात 950 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 137 प्रतिशत अधिक है…बांग्लादेश अब भारतीय सूत का सबसे बड़ा आयातक बन चुका है और कुल आयात का 44 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. बांग्लादेश में कितनी मिलें बंद? उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि भारत कपास किसानों से लेकर फैक्ट्रियों और निर्यातकों तक कई स्तरों पर प्रोत्साहन देता है, जिससे भारतीय सूत बेहद प्रतिस्पर्धी बन गया है. बांग्लादेश में करीब 40-50 मिलें बंद हो चुकी हैं और कई और बंद होने की कगार पर हैं. श्रम कानून में संशोधन से भी अशांति बढ़ सकती है. BTMA ने बांग्लादेश सरकार से 72 घंटे के भीतर नीतिगत समर्थन देने की अपील की है और कहा कि 25 प्रतिशत नकद प्रोत्साहन, बैक-टू-बैक एलसी सुविधा और EDF के जरिए यह क्षेत्र अब भी संभल सकता है.