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चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट उप मुख्यमंत्री साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में चयनित खिलाड़ियों को परफॉर्मेंस असेसमेंट से पहले दी हॉकी किट

रायपुर. उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बेंग्लुरू स्थित साई के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को हॉकी किट प्रदान किया। उन्होंने आज नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास कार्यालय में गोलकीपर अल्फाज खान को गोलकीपिंग का संपूर्ण किट तथा फॉरवर्ड पोजिशन में खेलने वाली मधु सिदार और दामिनी खुसरो को हाकी स्टिक प्रदान किया। ये तीनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में पिछले तीन सालों से हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने तीनों खिलाड़ियों के साई के परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में चयन पर खुशी जाहिर करते हुए बधाई दी। उन्होंने तीनों को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। जून-2022 से खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बहतराई के आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में 67 खिलाड़ी अभी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। राज्य शासन और प्रशिक्षकों के सहयोग से यहां से लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। हॉकी किट के वितरण के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक ए. एक्का और राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में हॉकी के वरिष्ठ कोच राकेश टोप्पो भी मौजूद थे। रायपुर के अल्फाज खान हाल ही में 12 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक बेंग्लुरू के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल हुए थे। वहां भारतीय हॉकी कोच पी.आर. श्रीजेश ने देशभर के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को परखा। जशपुर की मधु सिदार और बोड़ला (कबीरधाम) की दामिनी खुसरो इसी महीने 16 जनवरी से 23 जनवरी तक आयोजित परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल होंगी। इन तीनों खिलाड़ियों ने 15वीं हॉकी इण्डिया जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसी आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप के लिए हुआ है। दामिनी खुसरो और मधु सिदार पिछले वर्ष  हुए वेस्ट जोन हॉकी चैम्पियनशिप में विजेता टीम का हिस्सा रही थी। इसमें मधु सिदार सर्वाधिक गोल कर टॉप स्कोरर रही थी।

PoK में दोबारा भड़का विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान सरकार से नाराज़ जनता

नई दिल्ली पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में फिर से शहबाज सरकार के खिलाफ विरोध की भावनाएं धधक रही हैं। पीओके की जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी और सरकार के बीच बातचीत रद्द हो गई है। ऐसे में क्षेत्र में अक्टूबर 2025 के समय में लंबे विरोध और हिंसा के बाद जो शांति आई थी, वह फिर से जा सकती है। सितंबर 2025 में, पीओके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिस दौरान कई संगठनों ने विकास से जुड़ी कई मांगें रखी थीं। पाकिस्तान सरकार ने दखल दिया और उनकी सभी मांगें पूरी करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, अब कमेटी ने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाया और कहा कि एक भी मांग पूरी नहीं की गई है। कमेटी ने पाकिस्तानी सरकार के साथ किसी भी तरह की बातचीत करने से इनकार कर दिया। ऐसे में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के आसार नजर आ रहे हैं। एक मूल्यांकन में अनुमान लगाया गया है कि विरोध प्रदर्शन पिछली बार से भी बड़ा होने की संभावना है। यह पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान सरकार अपनी बात से पलटी है। इससे इलाके के लोग बहुत निराश हैं। पीओके के प्रति सरकार का रवैया वही है जो बलूचिस्तान में देखने को मिलता है। लंबे समय से पीओके और बलूचिस्तान इलाकों के लोग सरकार और सेना के बड़े अधिकारियों पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि उनके संसाधनों का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के बड़े शहरों में सभी विकास के काम किए जाते हैं। इन इलाकों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार यहां के विकास को बहुत नजरअंदाज करती है। संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने अक्टूबर में सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते पर हस्ताक्षर करने के दौरान यह तय हुआ था कि कमेटी और सरकार विकास की समीक्षा करने के लिए हर 15 दिन में मीटिंग करेंगे, लेकिन पिछले तीन महीनों में इस सिलसिले में सिर्फ तीन बार बैठकें हुई हैं। इसकी वजह से कमेटी ने सरकार पर दिखावा करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, पाक सरकार ने कई कमेटी सदस्यों के नाम एग्जिट कंट्रोल लिस्ट (ईसीएल) से हटाने का भी वादा किया था और भरोसा दिलाया गया था कि उनके खिलाफ एफआईआर वापस ले ली जाएंगी और रिफ्यूजी सीटों से जुड़े मसलों को सुलझाया जाएगा। हालांकि, एक भी मांग पूरी नहीं हुई और अब इससे कमेटी के सदस्य नाराज हैं। कमेटी का कहना है कि 3 अक्टूबर 2025 के समझौते के बाद से सरकार ने जो कुछ भी किया है, वह सब बेकार है। रिफ्यूजी सीटों के मसलों को सुलझाने के लिए सरकार ने एक कमेटी बनाई थी। हालांकि, कमेटी सिर्फ खास मसलों को ही देखेगी, लेकिन पीओके कमेटी चाहती है कि सभी मसलों को एक साथ सुलझाया जाए। कमेटी ने आगे कहा कि सिर्फ कुछ कदम उठाने से काम नहीं चलेगा और इस बार वह सरकार के भरोसे पर यकीन नहीं कर रही है। वहीं, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ये हालात हैरान करने वाले नहीं हैं और पीओके के मामले में पाकिस्तान का हमेशा यही रुख रहा है। अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर मसलों को तत्काल नहीं सुलझाया गया, तो विरोध प्रदर्शन तेज हो सकते हैं और भारत में भी इसके फैलने से इनकार नहीं किया जा सकता। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ही सब कुछ तय करती है। उसने इलाके में बिचौलियों से निपटने के लिए कई सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। उन्हें पीओके में मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा गया है। लोगों ने इन अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे सारा फंड पाकिस्तान के मुख्य हिस्सों में भेज रहे हैं, जबकि इलाके में कोई सुधार नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, इन संसाधनों से मिलने वाला बहुत सारा फंड सेना के अधिकारी हड़प लेते हैं। इन अधिकारियों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इन मुद्दों ने सेना के अंदर भी हलचल मचा दी है। हाल ही में, गार्डियंस ऑफ ऑनर के एक लेटर में असीम मुनीर पर नाकाबिलियत, जुल्म और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान सरकार लंबे समय से झूठे भरोसे देकर पाकिस्तान के लोगों से झूठ बोलती आ रही है। यह बस कुछ ही समय की बात है, जब पीओके के हालात पाकिस्तान में बैठे लोगों के कंट्रोल से बाहर हो जाएंगे।

RTE प्रवेश नियम संशोधन का विरोध तेज: निजी स्कूलों में नर्सरी–KG में दाखिला बंद करने के फैसले पर उठे सवाल

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 16 दिसंबर 2025 को लिए गए निर्णय से शिक्षा जगत में हलचल मच गई है। इस निर्णय के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से आरटीई शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों का प्रवेश केवल कक्षा पहली से ही दिया जाएगा। पहले नर्सरी, प्री-प्राइमरी PP-1, PP-2 और कक्षा 1 में प्रवेश की सुविधा थी, लेकिन अब इसे सीमित कर दिया गया है। इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष किष्टोफर पॉल ने इसे RTE कानून की धारा 12(1)(ग) का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि स्कूल पूर्व-प्राथमिक शिक्षा (प्री-स्कूल) प्रदान करता है, तो 25% आरक्षण का नियम वहां भी लागू होगा। कर्नाटक हाईकोर्ट के 17 अप्रैल 2017 के फैसले (W.P. No. 14241/2017) का हवाला देते हुए पॉल ने तर्क दिया कि प्रवेश के दो स्तर हैं – एक कक्षा 1 में और दूसरा पूर्व-प्राथमिक में। पॉल ने सरकार से अपील की है कि इस निर्णय को तुरंत निरस्त किया जाए और RTE के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पूर्व-प्राथमिक स्तर से ही प्रवेश का अधिकार बहाल किया जाए। इस निर्णय के नुकसान क्या हैं? शिक्षाविदों और विशेषज्ञों के अनुसार, RTE प्रवेश को केवल कक्षा 1 तक सीमित करने से कई गंभीर नुकसान हो सकते हैं- प्रारंभिक शिक्षा का अवसर छिनना – पूर्व-प्राथमिक शिक्षा 3-6 वर्ष आयु के बच्चे के आधारभूत विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। यहां से निजी स्कूलों में प्रवेश न मिलने से गरीब बच्चे अच्छी शुरुआत से वंचित रह जाएंगे, जिससे आगे की पढ़ाई में लर्निंग गैप (सीखने का अंतर) बढ़ेगा। शैक्षणिक असमानता बढ़ना – विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चा कक्षा 1 में अचानक निजी स्कूल में प्रवेश लेता है, तो वह पहले से पढ़ रहे अमीर बच्चों से पीछे रह जाएगा। इससे सामाजिक और आर्थिक असमानता गहराएगी। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने भी इसे “आरटीई विरोधी” बताया और कहा कि यह गरीब बच्चों को महत्वपूर्ण चरण में पीछे धकेल देगा। वित्तीय बोझ से बचने का आरोप – आलोचकों का मानना है कि सरकार पूर्व-प्राथमिक स्तर पर रीइंबर्समेंट (फीस वापसी) के बोझ से बचना चाहती है, लेकिन इसका खामियाजा सबसे गरीब बच्चों को भुगतना पड़ेगा। ड्रॉपआउट दर बढ़ने का खतरा – शुरुआती स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलने से बच्चों का आगे पढ़ने का मनोबल टूट सकता है, जिससे ड्रॉपआउट बढ़ेगा। शिक्षाविदों की राय शिक्षाविद और RTE विशेषज्ञ इस निर्णय को कानून की भावना के विरुद्ध मानते हैं। RTE एक्ट की धारा 12(1)(ग) में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा पर भी आरक्षण लागू होने का स्पष्ट उल्लेख है। कई अदालती फैसलों, जैसे कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्णय, में यह दोहराया गया है कि प्रावधान पूरक हैं और पूर्व-स्कूल स्तर को बाहर नहीं रखा जा सकता। राष्ट्रीय स्तर पर RTE विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे प्रतिबंध समावेशी शिक्षा के उद्देश्य को कमजोर करते हैं। प्राइवेट स्कूलों में शुरुआती प्रवेश से सामाजिक मिश्रण बढ़ता है और गरीब बच्चे बेहतर सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। इस निर्णय से RTE का मूल लक्ष्य सभी बच्चों को समान अवसर प्रभावित होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाएगा और गड़बड़ियों पर अंकुश लगाएगा, लेकिन पैरेंट्स एसोसिएशन और विशेषज्ञ इसे गरीब विरोधी बता रहे हैं। अब देखना यह है कि सरकार इस विरोध पर क्या कदम उठाती है या अदालत में चुनौती दी जाती है।

उत्तर प्रदेश में सर्दी से हालात बिगड़े, 5 जनवरी तक कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में ठंड और कोहरा का सितम जारी है। प्रदेश में शीत लहर चलने से शरीर कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। हालांकि गुरुवार को धूप निकलने से लोगों को बड़ी राहत मिली थी। लेकिन शुक्रवार को फिर से दोपहर के समय भी धूप के दीदार नहीं हुए और बदली छाई रही। इस तरह प्रदेश में भीषण ठंड के प्रकोप को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कक्षा 12 तक के स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी है। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दे दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण शीतलहर को लेकर 12 वीं तक के स्कूलों में छुट्टी बढ़ा दी है। सीएम योगी ने 5 जनवरी तक सभी स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने यूपी बोर्ड, सीबीएसई बोर्ड और आईसीएससी बोर्ड के सभी स्कूलों को 5 जनवरी तक बंद करने के निर्देश दिए है। मैदान में उतरें अफसर, सुनिश्चित करें व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के आला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वयं क्षेत्रों में भ्रमणशील रहकर जमीनी हकीकत का जायजा लें। सीएम ने कहा कि भीषण ठंड को देखते हुए हर जिले के सार्वजनिक स्थलों पर अलाव और कंबलों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 'कोई भी खुले में न सोए' शीलहर को देखते हुए सीएम योगी ने रैन बसेरों के संचालन को लेकर अधिकारियों को विशेष हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोई भी व्यक्ति कड़ाके की ठंड में खुले में सोने को मजबूर न हो। सभी रैन बसेरों में बिछौने, कंबल और साफ-सफाई समेत सभी आवश्यक सुविधाएं पुख्ता की जाएं। अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि जरूरतमंदों को समय पर राहत सामग्री और आश्रय प्राप्त हो। इसके अलावा अलाव की व्यवस्था की जाए। तीन डिग्री पर ठिठुरा बाराबंकी, मेरठ में सर्द दिन प्रदेश के कई जिलों में धूप निकली लेकिन सर्द हवाओं का सितम रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बीते 24 घंटों के दौरान बाराबंकी का तापमान 3 डिग्री दर्ज किया गया। यह प्रदेश का सबसे सर्द जिला रहा। सीजन में भी सबसे सर्द रहा। वहीं मेरठ में दिन का तापमान सबसे कम रहा। मेरठ में दिन का तापमान 14.9 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। मेरठ सहित वेस्ट यूपी में गुरुवार को दिनभर धूप गायब रही। अमौसी स्थित मौसम मुख्यालय के अनुसार बाराबंकी के अलावा गोरखपुर और हरदोई में भी गलन और ठिठुरन ने अपना असर दिखाया। गोरखपुर में न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रहा, जो सामान्य से 4.7 डिग्री कम है। वहीं, हरदोई में पारा 4.5 डिग्री, अयोध्या में 5.0 डिग्री, सुलतानपुर में 5.2 डिग्री और बरेली में 5.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कानपुर में भी रात का तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। वहीं, पछुआ हवा के चलते दिन में भी धूप बेअसर साबित हो रही है। बस्ती में अधिकतम तापमान सामान्य से 5.6 डिग्री गिरकर 18.0 डिग्री पर आ गया। आगरा, अलीगढ़, इटावा और फतेहगढ़ जैसे शहरों में भी दिन का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे रहा। अभी तक कक्षा 12 तक के स्कूलों में 1 जनवरी तक छुट्टी घोषित थी। लेकिन अब इसे 5 जनवरी तक बढ़ा दी गई है। भीषण ठंड के प्रकोप के चलते स्कूलों में छुट्टी बढ़ाने का फैसला लिया गया है। वहीं कक्षा 8 तक के स्कूल 14 जनवरी तक बंद रहेंगे। इसके अलावा बढ़ती ठंड को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को भी जरूरी दिशा निर्देश दे दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि शीत लहर को लेकर सभी अधिकारी क्षेत्र में भ्रमण शील रहें। साथ ही सीएम योगी ने सभी जिलों में कंबल और अलाव की व्यवस्था करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति खुले में न सोए। साथ ही कहा कि अधिकारी सभी रैन बसेरों में आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करे। बता दें, प्रदेश में दिन पर दिन ठंड बढ़ती जा रही है। कड़ाके की ठंड के साथ ही कोहरे का सितम भी जारी है।

दक्षिण की रणनीति: 2026 की संभावनाएँ, केरल पर फोकस और तमिलनाडु से कनेक्ट की कवायद

नई दिल्ली वर्तमान में देश के 21 राज्यों में सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हौसले भविष्य के लिए बुलंद हैं। साल 2025 में हवा का रुख बदला तो दशकों बाद दिल्ली भाजपा की हो गई। कुछ महीनों में भाजपा ने बिहार को भी मजबूत कर लिया और फिर साल बीतते-बीतते केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम भाजपा के रंग में रंग गई। यह जीत सिर्फ एक राज्य या शहर तक सीमित नहीं, बल्कि 2026 में दक्षिण भारत की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल के अलावा दक्षिण भारत के राज्यों केरल और तमिलनाडु में साल 2026 में चुनाव हैं। उत्तर भारत में भाजपा का परचम पहले से ही लहरा रहा है, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और झारखंड को छोड़ दें तो पार्टी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब पार्टी की नजरें दक्षिण भारत पर टिकी हैं, वह क्षेत्र जहां कर्नाटक को छोड़कर अब तक सत्ता का स्वाद नहीं मिला। बिहार जीतते ही प्रधानमंत्री मोदी ऐलान कर चुके हैं कि अगला मिशन पश्चिम बंगाल है, लेकिन तमिलनाडु और खासकर केरल में भाजपा की जमीनी तैयारियां काफी कुछ बयां करती हैं। तिरुवनंतपुरम की जीत इसका ताजा उदाहरण है। पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु तीनों विधानसभाओं का कार्यकाल मई में पूरा होगा। 7 मई वर्तमान पश्चिम बंगाल विधानसभा के कार्यकाल का आखिरी दिन होगा, जबकि तमिलनाडु विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 10 मई और केरल विधानसभा का 23 मई है। लिहाजा, इससे पहले नई विधानसभा चुनी जानी है। चुनावों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दौरे शुरू हो चुके हैं, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया यात्रा भी शामिल है। 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने 'तमिल भाषा' का जिक्र करके तमिलनाडु को कनेक्ट किया। उन्होंने 28 दिसंबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में काशी के स्कूलों में तमिल भाषा सिखाने के लिए चलाए जा रहे अभियान की बात की। वहीं, तिरुवनंतपुरम की जीत को भाजपा की 'दक्षिणी दस्तक' के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले चुनावी समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।

FASTag Alert: 1 फरवरी से लागू होगा नया Toll Tax नियम, जानिए क्या बदलेगा आपके लिए

नई दिल्ली भारत में National Highways Authority of India (NHAI) ने कार मालिकों के लिए FASTag प्रक्रियाओं में बड़ा सुधार किया है। सरकार ने घोषणा की है कि 1 फरवरी, 2026 से कार, जीप और वैन के लिए जारी किए जाने वाले नए FASTag पर Know Your Vehicle (KYV) वेरिफिकेशन प्रक्रिया को पूरी तरह से हटाया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को टैग जारी करने और उपयोग के बाद होने वाली देरी, अनावश्यक फ़ॉलो-अप और शिकायतों से राहत मिले। KYV पहले FASTag जारी हो जाने के बाद वाहन की पुष्टि के लिए आवश्यक था, लेकिन अक्सर इससे समस्याएं उत्पन्न होती थीं valid दस्तावेज होने के बावजूद कई चालकों को बार-बार दस्तावेज अपलोड करने, फोटो भेजने और टैग हर बार सत्यापित करवाने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। अब NHAI ने सारी जांच और सत्यापन टैग सक्रिय होने से पहले बैंकों की जिम्मेदारी बना दी है, जिससे टैग जारी करने की प्रक्रिया तेज़, सरल और बिना रुकावट वाली हो जाएगी। KYV क्या था और क्यों लागू हुआ? Know Your Vehicle (KYV) FASTag प्रक्रिया का एक verification step था, जिसमें टैग जारी होने के बाद वाहन के विवरण की पुष्टि की जाती थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि FASTag सही वाहन नंबर से जुड़ा हुआ है और गलत या duplicate टैग इस्तेमाल नहीं हो रहा। अब क्या बदल गया? KYV हट गया है: 1 फरवरी, 2026 के बाद नए कार FASTag पर KYV अनिवार्य नहीं होगा। सभी वेरिफिकेशन अब टैग एक्टिवेशन से पहले किया जाएगा, जिससे post-activation validation की जरूरत खत्म हो जाएगी। सारे vehicle validation बैंक करेंगे पहले अब टैग जारी करने से पहले VAHAN database के जरिये वाहन विवरण की जांच करना बैंक की जिम्मेदारी होगी। अगर VAHAN में डिटेल उपलब्ध नहीं है, तो बैंक RC (Registration Certificate) का उपयोग करेगा। पुराने FASTag धारकों को KYV नहीं चाहिए पहले से जारी FASTag पर अब KYV नियमित प्रक्रिया नहीं होगी। केवल उन मामलों में KYV की आवश्यकता होगी जब कोई specific complaint आए जैसे TAG loose होना, गलत issuance हो जाना, misuse या गलत vehicle से लिंक होना। नए नियमों का असर तेज FASTag प्रक्रिया टैग खरीदते ही पहचान और डिटेल का verification पहले पूरा हो जाएगा, जिससे आप सीधे ही टैग का उपयोग कर सकेंगे। कोई बार-बार डॉक्यूमेंट जमा नहीं करना चाहिए KYV हटने के कारण आपको बार-बार दस्तावेज अपलोड या सम्पर्क करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Complaint आधारित KYV ही बचेगा अगर किसी वाहन पर कोई गंभीर समस्या आती है, तो ही नयी जांच होगी, जैसे अवैध टैग, loose TAG या misuse।  

गुप्ता सरकार की बड़ी सौगात: दिल्ली में EWS वर्ग के लिए इलाज की आय सीमा बढ़ी

नई दिल्ली दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्लीवालों को एक बड़ी राहत दी है। सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की आमदनी सीमा को दोगुने से अधिक कर दिया है। अब 5 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी वालों को इस कैटिगरी में रखा जाएगा। दिल्ली सरकार की ओर से इस आदेश का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। अभी तक यह सीमा 2.20 लाख रुपये थी। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से 2 जनवरी को जारी किए गए आदेश में 2 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का भी हवाला दिया गया है। इसमें बताया गया है कि चिह्नित अस्पतालों में ईडब्ल्यूएस वर्ग के मरीजों के इलाजे के लिए आमदनी की सीमा को बदला गया है। आदेश में कहा गया है कि आमदनी की सीमा को 2 लाख 20 हजार सालाना से बढ़ाकर 5 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। सभी चिह्नित प्राइवेट हॉस्पिटलों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का अनुपालन कराने और ऐसा नहीं किए जाने को गंभीरता से लेने को कहा गया है। लाखों परिवार EWS दायरे में आएंगे आय सीमा में इस बदलाव से दिल्ली में लाखों परिवार को फायदा होगा। आय सीमा में बदलाव के प्रभाव को आप इस बात से भी समझ सकते हैं कि अभी तक करीब 18 हजार मासिक आमदनी वालों को ही इसका लाभ मिलता था, जबकि अब 41 हजार औतम मासिक आदमनी वाले लोग भी इस कैटिगरी में आ जाएंगे।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका महान समाज सुधारक एवं नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत स्वर्गीय सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज में अनेक कुरीतियाँ और बंधन व्याप्त थे। उन्होंने न केवल महिलाओं को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उन्हें शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। छुआछूत, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध उनका संघर्ष साहस, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्वितीय प्रतीक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्त्री अधिकारों, समानता और शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान अमूल्य तथा अविस्मरणीय है। उनके विचार और कर्म आज भी समाज को प्रगतिशील दिशा देने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

नामांकन वापसी पर बगावत: नागपुर में BJP उम्मीदवार को समर्थकों ने ही घर में बंद किया

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख पर गहमागहमी देखने को मिली। इस बीच, नागपुर शहर में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी के एक उम्मीदवार के समर्थकों ने उन्हें घर में बंद कर दिया, ताकि वह अपना नॉमिनेशन वापस न ले सकें। भाजपा ने अपने एबी फॉर्म (नामांकन दाखिल करने के लिए आवश्यक दस्तावेज) में वार्ड 13 (D) से विजय होले और किशन गावंडे को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में पार्टी ने गावंडे से चुनावी मैदान से हटने को कहा।   इस फैसले से भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग नाराज हो गया जो वार्ड 13 (D) के अंतर्गत आने वाले हजारीपहाड़ इलाके से प्रतिनिधित्व चाहता था। गावंडे के समर्थकों ने उन्हें घर में बंद कर दिया, ताकि वह निर्वाचन अधिकारी से मिलकर अपना नामांकन वापस न ले सकें। इस दौरान खूब नारेबाजी भी की गई। भाजपा के विधान परिषद सदस्य परिणय फुके और स्थानीय नेता मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को समझाया, जिसके बाद गावंडे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। भाजपा कार्यकर्ता किस बात पर नाराज किशन गावंडे ने कहा, 'इलाके के भाजपा कार्यकर्ता चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूं, इसलिए वे नाराज हो गए। हम पार्टी नेतृत्व के फैसले को समझते हैं और इसी वजह से मैंने नामांकन वापस ले लिया।' नागपुर महानगरपालिका समेत राज्य के 29 नगर निकायों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन की जाएगी। नागपुर नगर निगम में 151 सीट हैं। भाजपा 143 सीट पर चुनाव लड़ रही है जबकि शिवसेना 8 सीट पर चुनाव लड़ रही है। अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी 90 से अधिक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस बिना किसी गठबंधन के सभी 151 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) 79 सीट पर चुनाव लड़ रही है।  

अरुण साव पर बयान को लेकर साहू समाज का आक्रोश, भूपेश बघेल से सार्वजनिक माफी की मांग

रायपुर  पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव के विरुद्ध की गई टिप्पणी को छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने अत्यंत अमर्यादित, आपत्तिजनक और निंदनीय बताया है. इसके साथ ही 10 दिनों के भीतर भूपेश बघेल से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा है. इस बीच पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भूपेश बघेल का बचाव करते हुए कहा कि टिप्पणी समाज पर नहीं व्यक्ति पर थी. छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू की ओर से समाज के तमाम जिला अध्यक्षों को जारी पत्र में भूपेश बघेल के बयान को निंदनीय बताते हुए क्षमा मांगने की मांग की है. इसके साथ ही सार्वजनिक रूप से क्षमा नहीं मांगने पर साहू समाज प्रत्येक जिले में पुलिस अधीक्षक को 3 दिवस के अंदर ज्ञापन सौंपकर कड़ा विरोध दर्ज कराएगा. इसके साथ लोकतांत्रिक, संगठित एवं चरणबद्ध आंदोलन करने की बात कही है.