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इंदौर में इलाज के दौरान 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत, मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंची

इंदौर  इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से शुक्रवार को एक और बुजुर्ग महिला की मौत की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही दूषित पानी से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 15 पर पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग महिला का अरविंदो अस्पताल में इलाज चल रहा था। गुरुवार को कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता मरीजों से मिलेंगे और उन्हें नारियल व अन्य जरूरत का सामान भी देंगे, लेकिन दूसरी ओर उन्हीं के समर्थक भागीरथपुरा में रहवासियों को समस्या बताने से भी रोक रहे हैं। मीडिया से बात करने पर उन्हें धमका रहे हैं कि समस्या का निराकरण हमसे चाहते हो या नहीं। गुरुवार को आकाश विजयवर्गीय पार्षद कमल वाघेला के कार्यालय पर पहुंचे। इस दौरान 25 दिसंबर को दूषित पानी के कारण मौत का शिकार हुए संतोष बिगोलिया के स्वजन उनसे मुलाकात करने के लिए पहुंचे। उन्होंने नईदुनिया अखबार की प्रति दिखाते हुए कहा कि हमारे परिवार के सदस्य की मौत दूषित पानी के कारण हुई है, लेकिन कोई मान नहीं रही है। इस पर उन्होंने प्रशासन की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता की मांग की। इसके बाद जब मीडिया मृतक के बेटे शुभम और बहू से चर्चा कर रही थी। 'आपकी समस्या का निराकरण हमसे चाहते हैं या मीडिया से' तभी भाजपा कार्यकर्ता चंदन सिंह बैस वहां आया और परिवार को कहने लगा कि आपकी समस्या का निराकरण हमसे चाहते हो या फिर मीडिया से। इसके अलावा कई ओर परिवार भी है, जिन्हें इसी प्रकार कहा जा रहा है। इससे साफ लगता है कि मामले को दबाने के लिए लोगों को बात करने से रोका जा रहा है। यह मामला चर्चाओं में बना हुआ है। छह माह के अव्यान के माता-पिता ने आर्थिक मदद लेने से इंकार किया भागीरथपुरा में गुरुवार को मंत्री विजयवर्गीय जब मृतकों के स्वजन से मिलने पहुंचे तो उन्हें रहवासियों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। मंत्री के अलावा उनके समर्थक जब आठ मृतकों के स्वजन को आर्थिक मदद के चेक देने पहुंचे तो छह माह के अव्यान के माता-पिता ने मदद लेने से इंकार कर दिया। अव्यान के गमगीन माता-पिता बोले कि हमारा बच्चा दस साल की मन्नत के बाद जन्मा था। अब हमें कोई आर्थिक मदद नहीं चाहिए। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री मृतिका उर्मिला यादव के घर पहुंचे तो उन्होंने सहायता राशि लेने से मना कर दिया और कहा कि नहीं चाहिए हमें कोई राशि। बाद में समझाइश के बाद उन्होंने ले ली। स्वजन ने बताया कि मृतिका के बेटे और बहू दोनों अभी अस्पताल में भर्ती है। वहीं, निधि यादव गोद में बच्चा लेकर पहुंची। उसने कहा कि मेरी 70 साल की सास सात दिन से अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी किडनी फेल हो गई है। उनको कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा? अस्पताल वाले स्लिप देकर पैसे मांग रहे हैं। हमारे पेट में दर्द है, फिर भी बच्चे लेकर दौड़ रहे हैं। मंत्री से मिलने गए तो उनके लोगों ने मिलने भी नहीं दिया। महिला को मंत्री से मिलने नहीं दिया।

तमनार हिंसा: महिला आरक्षक को अर्धनग्न कर घसीटा, भीड़ ने दौड़ाया, वीडियो में रोते हुए बोली- भाई छोड़ दो

तमनार  रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में  उद्योग को आबंटित गारे पेलमा सेक्टर वन कोयला खदान के विरोध में चल रहे आंदोलन के दौरान हिंसा की एक शर्मनाक घटना सामने आई है. प्रदर्शन के दौरान एक महिला आरक्षक के साथ मारपीट की गई. प्रदर्शनकारियों ने उसे लगभग आधा किलोमीटर तक दौड़ाया और जब वह खेत में गिर गई, तो उसकी वर्दी फाड़ दी गई, जिससे वह अर्धनग्न हो गई.  यह घटना 27 दिसंबर की है, जब आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था. जानकारी के अनुसार,  उद्योग की कोल ब्लाक जनसुनवाई को पहले प्रस्तावित स्थल से दूसरी जगह कराए जाने के बाद भी आंदोलन शांत नहीं हुआ. 12 दिसंबर से चल रहे आंदोलन के बीच 27 दिसंबर को एक सड़क दुर्घटना के बाद विवाद इतना बढ़ा कि पथराव, आगजनी और पुलिस पर सीधा हमला किया गया. मिन्नतें करती रही महिला आरक्षक  तमिनार ब्लॉक में महिला आरक्षक के साथ हुई अमानवीय व्यवहार का वीडियो भी वायरल हो रहा है. करीब 40 सेकंड की इस वीडियो में एक महिला आरक्षक रोती हुई और प्रदर्शनकारियों से मिन्नतें करती हुई दिख रही है. महिला आरक्षक प्रदर्शनकारियों से कह रही है, 'भाई मुझे माफ कर दो, मुझे जाने दो.' वीडियो में प्रदर्शनकारी महिला पुलिस कर्म से पूछते हैं, 'तुम यहां क्या कर रही थी? तुम्हें चप्पल से मारूं? यहां से चली जाओ.' फिर वे उसे अकेला छोड़ देते हैं. इससे पहले महिला आरक्षक को भीड़ ने करीब आधा किलोमीटर तक दौड़ाया और जब वह खेत में गिर गई, तो उसकी वर्दी फाड़-फाड़कर उसे अर्धनग्न कर दिया गया. यह घटना 27 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है. बता दें इस घटना से पहले एक हिंसक झड़प के दौरान एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को लात मारे जाने का वीडियो भी सामने आया था.  हिंसा का शर्मनाक वीडियो वायरल  सबसे गंभीर और शर्मनाक वीडियो में एक महिला आरक्षक के साथ बर्बरता दिखाई दे रही है. वीडियो में आंदोलनकारी महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ते हुए नजर आ रहे हैं. महिला आरक्षक हाथ जोड़कर रहम की गुहार लगाती दिखाई देती है. करीब 20 सेकंड का यह वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि आंदोलन प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के बाद समाप्त हो गया है और जनसुनवाई निरस्त करने का भरोसा दिया गया है, लेकिन 27 दिसंबर की इस घटना को लेकर पुलिस अधिकारियों की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है. क्या है पूरा मामला? सूत्रों के मुताबिक, तमनार पुलिस स्टेशन में अलग-अलग FIR में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों पर गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जबकि कुछ को गिरफ्तार भी किया गया है. बता दें कि यह घटना 8 दिसंबर 2025 को धौरभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है. JPL कोल माइन सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के लोग 12 दिसंबर से धरना प्रदर्शन कर रहे थे. 27 दिसंबर की सुबह करीब 9:00 बजे लगभग 300 ग्रामीण लिबारा चौक पर इकट्ठा हुए और सड़क पर बैठकर ट्रैफिक जाम कर दिया. हालात बिगड़ता देख पुलिस के बड़े अधिकारी करीब 10:00 बजे मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने ग्रामीणों से बात की और उन्हें लौटने के लिए मनाया. कुछ देर के लिए स्थिति शांत रही, लेकिन बाद में तनाव बड़ गया.   सूत्रों के मुताबिक तमनार थाने में अलग-अलग एफआईआर के तहत सौ से अधिक आंदोलनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं. कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है. अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है इस मामले में बिलासपुर संभाग के आईजी संजीव शुक्ला ने बताया कि दोषियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया जा चुका है. अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है. पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जल्द अन्य आरोपियों को भी पकड़ा जाएगा.

रायपुर: राज्यपाल डेका ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय को दिए पांच नए कम्प्यूटर

रायपुर : राज्यपाल डेका ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय को प्रदान किए पांच कम्प्यूटर रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने बालिकाओं की शिक्षा को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए कस्तूबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, राजपुर कला लखनपुर जिला सरगुजा की छात्राओं के लिए अपने स्वेच्छानुदान मद से पांच कम्प्यूटर प्रदान किए है। राज्यपाल ने सरगुजा जिले के प्रवास के दौरान उक्त आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने छात्राओं की शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया और विद्यालय में सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से अतिरिक्त कम्प्यूटर उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी थी। जिसके फलस्वरूप आज विद्यालय को लोेकभवन में राज्यपाल के हाथों पांच कम्प्यूटर प्राप्त हुए। इस सुविधा से छात्राओं की पढ़ाई में गुणात्मक सुधार आएगा और वे डिजिटल शिक्षा से बेहतर रूप से जुड़ सकेंगी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, विद्यालय की अधीक्षिका श्रीमती अनुराधा सिंह एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।

विवादित वीडियो देख भड़के जावेद अख्तर, कहा– जरूरत पड़ी तो होगी कार्रवाई

मुंबई मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने अपने खिलाफ फैलाए जा रहे एक फर्जी 'डीपफेक' वीडियो पर कड़ी नाराजगी जताई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक AI जेनरेटेड एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें सिर पर टोपी पहने दिखाया गया है और दावा किया गया है कि वे अब आस्तिक हो गए हैं। जावेद अख्तर ने शुक्रवार को एक्स पर इस फर्जी वीडियो को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।   वीडियो में दावा किया गया था कि जावेद अख्तर ने आखिरकार "खुदा की राह" अपना ली है। इस पर उन्होंने लिखा, "यह पूरी तरह बकवास है।" उन्होंने कहा कि वे इस फर्जी खबर को बनाने और फैलाने वालों को कोर्ट में घसीटेंगे क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जावेद अख्तर और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच 'क्या ईश्वर का अस्तित्व है?' विषय पर एक गंभीर बहस हुई थी। माना जा रहा है कि इसी चर्चा के बाद उनके विचारों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए यह डीपफेक वीडियो बनाया गया। जावेद अख्तर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो तकनीक के इस गलत इस्तेमाल से परेशान हैं। हाल के दिनों में कई अन्य सितारों ने भी अपनी आवाज उठाई है। कुछ दिनों पहले, भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी उन AI जेनरेटेड तस्वीरों की आलोचना की थी जिनमें उन्हें संसद के बाहर साड़ी के बजाय पेंट-सूट में दिखाया गया था। उन्होंने इसे अपनी निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह तय करना उनका अधिकार है कि वे क्या पहनना चाहती हैं। वहीं, दिसंबर 2025 में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रीलीला और निवेथा थॉमस ने भी अपनी फर्जी तस्वीरों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। निवेथा ने इसे 'डिजिटल प्रतिरूपण' करार देते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही थी। भारत में डीपफेक के खिलाफ क्या हैं नियम? भारत सरकार ने 2025 के अंत तक डीपफेक और AI जेनरेटेड कंटेंट के लिए कड़े दिशानिर्देश लागू किए हैं। आईटी नियम 2021 (संशोधित) के तहत प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर ऐसी भ्रामक सामग्री हटानी होती है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि सभी AI-जनित फोटो या वीडियो पर कम से कम 10% हिस्से में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि यह 'सिंथेटिक' या 'AI जेनरेटेड' है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानहानि और जालसाजी के लिए जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।  

राज्यपाल डेका ने रायपुर में सरस्वती शिक्षा संस्थान को प्रदान किए चार ई-रिक्शे

रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ रायपुर को चार ई-रिक्शे प्रदान किए। उन्होंने लोकभवन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अपने स्वेच्छानुदान मद से चार ई-रिक्शे की चाबी वाहन चालकों को सौंपी और हरी झंडी दिखाकर वाहनों को रवाना किया। इन वाहनों का उपयोग विभिन्न सरस्वती शिक्षा संस्थानों में किया जाएगा। इस अवसर पर डॉ. पुर्णेन्द्रु सक्सेना सहित संस्थान के पदाधिकारी उपस्थित थे।

टेस्ट क्रिकेट का पाठ: पुजारा और रहाणे जैसे बनने की सलाह स्टीव स्मिथ-जो रूट को किसने दी?

नई दिल्ली मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की पिच आजकल चर्चा में है। आईसीसी ने उसे 'असंतोषजनक' करार दिया है। चौथे एशेज टेस्ट के दौरान ये पिच बल्लेबाजी के लिए कब्रगाह साबित हुई और मैच 2 दिन में ही खत्म हो गया। इंग्लैंड ये मैच जीत तो जरूर गया लेकिन ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ उसके भी बल्लेबाज पिच पर पस्त नजर आए। स्टीव स्मिथ और जो रूट जैसे दिग्गज बल्लेबाज भी बेबस नजर आए। इस पर भारत के पूर्व क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने कहा है कि मेलबर्न की पिच मुश्किल थी, तेज गेंदबाजों के लिए मददगार थी लेकिन ऐसा नहीं था कि खेलने लायक नहीं थी। उन्होंने कहा कि पिच इतनी खराब इसलिए लग रही क्योंकि आधुनिक बल्लेबाजी में अब धैर्य का पुट नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसी पिच पर चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसा खेलना चाहिए।   उथप्पा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, ‘देखिए ये स्थिति दो विपरीत पहलू वाली है। ये ऐसी नहीं है कि विकेट खेलने के लिए असंभव थी। मेलबर्न में विकेट ऐसी होती हैं जो तेज गेंदबाजों के लिए काफी मददगार होती हैं…मुझे लगता है कि आज जिस तरह से क्रिकेट खेली जा रही है, उसकी वजह से ऐसा है। मुझे लगता है कि ये पिचें खेलने लायक नहीं हैं लेकिन अगर आपके पास सही तकनीक है, सही मानसिकता है और आपमें जज्बा है तो आप इस तरह के विकेट के लिए भी कोई रास्ता ढूंढ लेंगे। ये हाई-स्कोरिंग मैच नहीं था लेकिन ये 300 प्लस का मैच नहीं था। लेकिन इस पिच पर 250 का स्कोर बन सकता था। आपको इसके लिए जुझारूपन दिखाना होगा। पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसा खेलिए, आप निश्चित तौर पर रन बनाएंगे।’ उथप्पा ने ये भी कहा कि जो रूट ब्रिसबेन में हुए दूसरे टेस्ट में संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड का ये बल्लेबाज पूरी तरह जैसे खो गया था। उन्होंने इसे टेस्ट क्रिकेट का दुर्भाग्यपूर्ण क्षण बताया। उथप्पा ने कहा, ‘आज टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीका बदल गया है। मैं इसे बहुत पसंद नहीं करता। एशेज टेस्ट 2 दिन में खत्म हो जा रहे हैं। एंटरटेनमेंट के लिए हम खेल के साथ क्या कर रहे हैं? जो रूट भी टेस्ट मैच में खो जा रहे हैं। वह नहीं जान पा रहे कि कैसे खेलना है, आक्रामक क्रिकेट खेलनी है कि अपने अंदाज में खेलना है। ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।’ मेलबर्न टेस्ट की बात करें तो इंग्लैंड ने इसे 4 विकेट से जीता था। ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 152 रन बनाए थे। जवाब में इंग्लैंड की टीम अपनी पहली पारी में सिर्फ 110 रन पर सिमट गई थी। ऑस्ट्रेलिया अपनी दूसरी पारी में 132 रन ही बना सकी, जिसके बाद मैच के दूसरे ही दिन इंग्लैंड ने अपनी दूसरी पारी में 6 विकेट के नुकसान पर 178 रन बनाकर मैच 4 विकेट से जीत लिया।  

राजू की तलाश में 6 राज्यों की पुलिस जुटी, देशभर में डेरे को संरक्षण देने वालों का डेटा तैयार

भोपाल  भोपाल के  ईरानी डेरा अमन कॉलोनी में फिलहाल 6 राज्यों की पुलिस ने डेरा जमा रखा है. क्योंकि पुलिस को कुख्यात राजू ईरानी और उसके गिरोह के पांच सदस्यों की तलाश है. पुलिस देशभर में डेरे को संरक्षण देने वालों का डेटा भी तैयार करने में जुटी है, ताकि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए. डेरे की जमीन के कागजात की सर्चिंग भी जारी है. बता दें कि 2014 में 39 घरों में आगजनी के बाद यह ईरानी डेरा चर्चा में आया था. पुलिस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है. क्योंकि राजू ईरानी पर कई केस चल रहे हैं.  6 राज्यों में नेटवर्क  पुलिस ने बताया कि ईरानी गैंग के सदस्यों का नेटवर्क दूसरे राज्यों में भी फैला है. किसी भी वारदात को अंजाम देने के बाद वह मुंबई, बैंगलुरू, दिल्ली, छत्तीसगढ़ के अलावा एमपी के ही देवास, नर्मदापुरम जैसे जिलों में फरारी काटते हैं, जबकि दूसरे राज्यों से उनके रिश्तेदार यहां आकर फरारी काटते हैं, ऐसे में सभी राज्यों की पुलिस अब तेजी से इस गिरोह के खिलाफ अभियान चला रही है. भोपाल नगर निगम की तरफ से भी बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा की तरफ से भी जानकारी जुटाई जा रही है. माना जा रहा है कि यहां जो नियम विरुद्ध मकान बने हैं, उन पर जल्द ही बुलडोजर की कार्रवाई देखने को मिल सकती है.  ईरानी डेरे के अपराध के तार 12 राज्यों तक अपराध का अड्डा बना चुका ईरानी डेरा पर पुलिस के साथ ही जिला प्रशासन की भी नजर टेढ़ी हो चुकी है. ईरानी डेरा की जमीन की जांच शुरू हो गई है. भोपाल में 6 राज्यों की पुलिस डटी हुई है. ईरानी गिरोह का नेटवर्क सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है. गिरोह के तार देश के 12 राज्यों से जुड़े होना बताए जा रहे हैं. कई राज्यों की पुलिस टीमें मिलकर गिरोह के नेटवर्क, फरार आरोपियों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही हैं. डेरे की जमीन के कागजात की सर्चिंग जारी अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे के कागजात की छानबीन प्रशासन की टीम कर रही है। इसी के साथ नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा भी डेरे पर बने मकानों की जांच कर रही है। नियम विरुद्ध बने मकानों पर जल्द प्रशासन का बुल्डोजर चल सकता है। वहीं पुलिस को राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर की तलाश है। यह सभी पुलिस की कार्रवाई के बाद से फरार हैं। वारदातों के लिए महीनों का सफर ईरानी डेरे में रहने वाले अपराधी चोरी, लूट, ठगी जैसी वारदातों के लिए महीनों कबीले से दूर दूसरे शहर और राज्यों में रहते हैं। इसे सफर में होना कहा जाता है। इस दौरान कबीले के युवक आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। पकड़े जाने पर भी माल को सुरक्षित कबीले तक पहुंचाने के लिए दो युवक होते हैं। सफर में जाने वाले युवकों के गिरोह के साथ हर समय दो युवक ऐसे होते हैं जो वारदात में सीधे तौर पर शामिल नहीं होते, लेकिन घटना के बाद मिले माल को लेकर सुरक्षित कबीले तक लाने की जिम्मेदारी इनकी होती है। इसके लिए कई बार आरोपी बाय रोड लग्जरी कार और बाइक से सैकड़ों किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भोपाल पुलिस ने हाल में गिरफ्तार किए गए ईरानी गैंग के सदस्यों से गहन पूछताछ के बाद कई अहम जानकारियां जुटाई हैं। इनमें यह सामने आया है कि गैंग के सदस्य चोरी, लूट और ठगी जैसी वारदातों के बाद नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे शहरों में छिपते रहे हैं। इसी तरह, अन्य राज्यों में सक्रिय उनके रिश्तेदार और सहयोगी वारदातों के बाद भोपाल की अमन कॉलोनी में शरण लेते थे। पुलिस अब उन सभी लोगों का डेटा तैयार कर रही है, जो अलग-अलग राज्यों में ईरानी डेरे को संरक्षण देते आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब इस नेटवर्क को राज्य सीमा से बाहर निकलकर तोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इसके तहत संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे की जमीन के कागजातों की सघन जांच की जा रही है। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा ने भी नियम विरुद्ध बने मकानों की पड़ताल शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अनियमित निर्माण पाए जाने पर जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि ईरानी गैंग वारदातों के लिए महीनों तक अपने कबीले से दूर रहता था, जिसे वे ‘सफर’ कहते हैं। इस दौरान गिरोह के कुछ सदस्य सीधे अपराध करते थे, जबकि दो अन्य युवक केवल चोरी या लूट का माल सुरक्षित रूप से भोपाल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते थे। कई बार ये आरोपी लग्जरी कार और बाइक से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। अमन कॉलोनी का ईरानी डेरा पहले भी विवादों में रहा है। वर्ष 2014 में यहां शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें करीब 39 मकानों में आगजनी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। उसी घटना के बाद यह इलाका प्रदेशभर में चर्चा में आया था। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर जैसे फरार आरोपियों की गिरफ्तारी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ भोपाल बल्कि देशभर में सक्रिय संगठित अपराध के खिलाफ एक अहम कदम मानी जा रही है। इन अपराधियों की तलाश में पुलिस गिरोह का सरगना राजू ईरानी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है. पुलिस को आशंका है कि वह शहर या राज्य छोड़कर फरारी काट रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है. सादिक, गुलाम, राजू, हैदर मामू की भी तकनीकी सर्विलांस के साथही पुराने संपर्कों की भी जांच की जा रही है. अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरा की जमीन को लेकर राजस्व रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. ईरानी डेरे की जमीन की जांच प्रशासन का मानना है कि इस जमीन पर अवैध … Read more

उस्मान हादी की हत्या में जमात-ए-इस्लामी का हाथ, साजिश ढाका ऑफिस में हुई तैयार

ढाका  बांग्लादेश की राजनीति को हिला देने वाली शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि हादी की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी के एक गुट की भूमिका हो सकती है. सूत्रों का दावा है कि यह कोई बाहरी साजिश नहीं, बल्कि जमात के अंदर चल रही सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई का नतीजा है. सूत्रों के मुताबिक, शरीफ उस्मान हादी का राजनीतिक कद लगातार बढ़ रहा था. खासकर युवा वोटरों और छात्रों के बीच उनकी लोकप्रियता जमात के लिए चिंता का कारण बन गई थी. आगामी 12 फरवरी को होने वाले चुनावों से पहले हादी एक बड़ा चुनावी फैक्टर बन चुके थे. उनका असर जमात की पारंपरिक राजनीति और नेतृत्व के लिए खतरे के रूप में देखा जाने लगा था. सूत्रों का दावा है कि हादी को खत्म करने की साजिश ढाका स्थित जमात कार्यालय में रची गई थी. संगठन के भीतर एक धड़ा हादी को पूरी तरह रास्ते से हटाना चाहता था. इसी दौरान कथित तौर पर हत्या की सुपारी को लेकर भी अंदरूनी मतभेद सामने आए. शुरुआती तौर पर एक करोड़ टका में हत्या कराने की बात हुई, लेकिन बाद में रकम को लेकर जमात के भीतर ही खींचतान शुरू हो गई. सूत्रों का कहना है कि एक गुट का मानना था कि इतनी बड़ी राजनीतिक बाधा को हटाने के लिए रकम कम है, जबकि दूसरे गुट ने खर्च कम रखने की बात कही. इसी टकराव के दौरान यह पूरा मामला जमात के भीतर से ही लीक हुआ. दावा यह भी किया जा रहा है कि शूटर को अलग से बड़ी रकम देने पर सहमति बनी थी. हादी की हत्या को भारत से जोड़ा गया इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह भी है कि कुछ दिन पहले हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश की गई थी. यह कहा गया कि आरोपी भारत भाग गए हैं और मेघालय में छिपे हुए हैं. लेकिन बांग्लादेश, इस थ्योरी का कोई ठोस आधार नहीं दे सका. आरोपियों के दुबई भागने की कहानी गढ़ने की कोशिश हुई, लेकिन तब भी कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया.  बताया था कि अगर आरोपी विदेश गए भी, तो उसमें यूनुस प्रशासन की मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

तेल और गैस की खोज से बदलेगी पाकिस्तान की तक़दीर? पिछड़े क्षेत्र में बड़ी सफलता का दावा

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा में कच्चा तेल और गैस खोज लेने का दावा किया है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने इसे लेकर देश को बधाई दी है और कहा कि इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और हमें आयात पर कम खर्च करना होगा। पाकिस्तानी एजेंसियों का दावा है कि उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहट जिले के नश्पा ब्लॉक में तेल और गैस का भंडार खोज लिया है। यहां से प्रति दिन 4100 बैरल कच्चा तेल निकाला जा सकेगा। इसके अलावा 10.5 मिलियन क्यूबिक फीट गैस भी प्रति दिन निकाली जा सकेगी। पाक सरकार का कहना है कि यह सफलता उनके मुल्क के लिए काफी बड़ी है क्योंकि इससे आयात पर निर्भरता कम हो सकेगी।   पीएम शहबाज शरीफ ने पेट्रोलियम और गैस सेक्टर की एक उच्च स्तरीय मीटिंग में कहा कि स्थानीय स्तर पर इनकी खोज से हमें आयात कम करने में मदद मिलेगी। शहबाज शरीफ ने कहा कि इससे हमारा विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा और हमें तेल और गैस की खरीद पर खर्च कम करने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान की ऑयल ऐंड गैस डिवेलपमेंट कंपनी लिमिटेड ने नश्पा ब्लॉक में गैस और तेल की खोज करने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि पीएम शहबाज शरीफ ने हमें और अन्य एजेंसियों को इस खोज के लिए बधाई दी है। मीटिंग के दौरान कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि इस साल ग्राहकों को पर्याप्त गैस मिली है। अब हमारा टारगेट है कि जून 2026 तक 3.5 लाख नए गैस कनेक्शन बांट दिए जाएं। पाकिस्तान इसे बड़ी सफलता के तौर पर देख रहा है। बता दें कि इससे पहले भी बलूचिस्तान में पाकिस्तान कई बार गैस और तेल के भंडार तलाशता रहा है। हालांकि खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक के लोगों का इस बात को लेकर विरोध रहा है कि पाकिस्तान हमारे संसाधनों का तो इस्तेमाल करता है, लेकिन उससे मिलने वाली रकम को स्थानीय विकास पर खर्च नहीं किया जाता। प्राकृतिक भंडार के बाद भी क्यों इतने पिछड़े हैं बलूचिस्तान और खैबर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान दोनों ही पंजाब के मुकाबले काफी पिछड़े हैं। यही कारण है कि इन राज्यों में पंजाबी विरोध प्रबल है। यहां के लोगों का कहना है कि सेना, सियासत और प्रशासन में पंजाबियों का ही प्रभुत्व है, जबकि उनके संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।  

Gig Workers के लिए बड़ी खुशखबरी, Swiggy-Zomato डिलीवरी बॉय को मिलेगा सोशल सिक्योरिटी कवर और सरकारी सुविधाएं

मुंबई  भारत में तेजी से बढ़ती ‘गिग इकोनॉमी’ को अब कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है. नए सोशल सिक्योरिटी कोड में जोमैटो, स्विगी, और ब्लिंकिट के डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर आदि को भी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) के दायरे में लाया गया है. इसके लिए सरकार ने ड्रॉफ्ट नियम जारी कर दिए हैं. इन ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा का लाभ पाने के लिए किसी एक ही कंपनी (एग्रीगेटर) से जुड़े वर्कर को एक साल में कम से कम 90 दिन उसी कंपनी के साथ काम करना अनिवार्य होगा. वहीं, जो लोग एक से ज्यादा प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हैं, उनके लिए यह सीमा 120 दिन तय की गई है. अगर कोई व्‍यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करते हैं, तो उसे तीन दिन गिना जाएगा, जिससे 120 दिन का कोटा पूरा करना आसान हो जाएगा. नए साल के मौके पर गिग वर्कर्स की हड़ताल के चलते जहां स्विगी और जोमैटो ने पीक ऑवर्स और साल के आखिरी दिनों में इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। वहीं, सरकार से भी उनके लिए अच्छी खबर आई है। सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कवर देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस संबंध में नियमों का एक ड्राफ्ट जारी किया गया है। कौन होगा पात्र? सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए नए नियमों का एक ड्राफ्ट जारी करके उस पर सार्वजनिक सुझाव मांगे हैं। TOI की रिपोर्ट के अनुसार, इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर कोई गिग वर्कर किसी एक कंपनी या ऐप के साथ एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिन काम करता है, तो वह सोशल सिक्योरिटी का लाभ उठाने का पात्र होगा। जबकि एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स के साथ जुड़े वर्कर्स के लिए यह अवधि 120 दिन होगी। कंपनियों की होगी रजिस्‍ट्रेशन की जिम्‍मेदारी कंपनियों (एग्रीगेटर्स) की यह जिम्मेदारी होगी कि वे अपने साथ काम करने वाले हर छोटे-बड़े वर्कर का विवरण सरकारी पोर्टल पर अपडेट करें. इसमें वे वर्कर्स भी शामिल होंगे जो किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी या सहयोगी कंपनी के जरिए काम पर लगे हैं. क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी? नए नियमों का उद्देश्य गिग वर्कर्स को वह सुरक्षा देना है जो अब तक केवल सरकारी या बड़ी निजी कंपनियों के कर्मचारियों को मिलती थी. इसके तहत निम्नलिखित लाभ प्रस्तावित हैं:     स्वास्थ्य और जीवन बीमा: वर्कर्स को मुफ्त या रियायती दरों पर स्वास्थ्य बीमा मिलेगा.     दुर्घटना कवर: काम के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की व्यवस्था होगी.     आयुष्मान भारत: श्रम मंत्रालय ने इन वर्कर्स को आयुष्मान भारत योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे उन्हें 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा.     पेंशन की सुविधा: भविष्य में सरकार ऐसी योजना ला सकती है जिसमें वर्कर और कंपनी दोनों मिलकर योगदान देंगे, ताकि रिटायरमेंट के बाद वर्कर को पेंशन मिल सके. कौन-कौन होंगे पात्र योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ सीमाएं भी तय की गई हैं. ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, गिग वर्कर जैसे ही अपनी 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा, वह इन सामाजिक सुरक्षा लाभों के लिए अयोग्य हो जाएगा. यानी यह सुरक्षा मुख्य रूप से कामकाजी उम्र के लोगों के लिए है. इसके अलावा, लाभ बरकरार रखने के लिए हर साल काम के न्यूनतम दिनों (90 या 120 दिन) की शर्त पूरी करनी होगी. यदि कोई वर्कर एक वित्तीय वर्ष में पर्याप्त काम नहीं करता है, तो अगले साल वह इन सुविधाओं से वंचित रह सकता है. निगरानी के लिए बनेगा नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड इन सभी नियमों को जमीन पर उतारने और वर्कर्स की समस्याओं को सुनने के लिए एक ‘राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ बनाने का प्रस्ताव है. यह बोर्ड केवल कागजी काम नहीं करेगा, बल्कि इसकी जिम्मेदारी होगी कि वह देश में गिग वर्कर्स की सही संख्या का पता लगाए और बदलती अर्थव्यवस्था के हिसाब से नई कल्याणकारी नीतियां बनाए. इस बोर्ड में सरकार के साथ-साथ श्रमिक संगठनों और कंपनियों के 5-5 प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि दोनों पक्षों की बात सुनी जा सके. कैसे होगी दिनों की गिनती? ड्राफ्ट के अनुसार, गिग कर्मचारियों के दिनों की गिनती अलग-अलग की जाएगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वर्कर एक ही दिन में स्विगी और जोमैटो दोनों के लिए काम करता है, तो उसे दो दिन माना जाएगा। काम की गिनती उसी दिन से शुरू हो जाएगी जब वर्कर ने प्लेटफॉर्म से पैसे कमाए, कितने कमाए इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि 16 साल से अधिक उम्र के प्रत्येक गिग वर्कर्स के पास आधार से लिंक रज‍िस्‍ट्रेशन होना अनिवार्य है। इन शर्तों का पालन जरूरी सरकार की तरफ से कहा गया है कि प्रत्येक कंपनी या एग्रीगेटर को अपने गिग वर्कर्स से जुड़ी जानकारी केंद्र के पोर्टल पर देनी होगी, ताकि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर बनाया जा सके। हर पंजीकृत गिग वर्कर को डिजिटल या फिजिकल आईडी कार्ड जारी किया जाएगा। ड्राफ्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि 60 साल की उम्र होने या पिछले वित्त वर्ष में 90/120 दिनों के काम की शर्त पूरी न करने की स्थिति में सोशल सिक्योरिटी के फायदे मिलना बंद हो जाएंगे। क्या मिलेंगी सुविधाएं? सोशल सिक्योरिटी के तहत गिग वर्कर्स को कई तरह के फायदे मिलेंगे। उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और एक्सीडेंट बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। गिग वर्कर्स आयुष्मान भारत का भी हिस्सा बनेंगे। इसके अलावा, बाद में वे प्लेटफॉर्म और गिग वर्कर्स, दोनों के योगदान के आधार पर पेंशन के लिए योग्य होंगे। श्रम मंत्रालय ने पहले ही 'ई-श्रम' पोर्टल पर गिग वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है।