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महाराष्ट्र में बागेश्वर सरकार की पहल, 20 साल बाद आधा दर्जन लोग लौटे घर, ईसाई धर्म अपनाने का था झांसा

 गोंदिया  महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में बागेश्वर महाराज के कथा मंच से आज आधे दर्जन से अधिक हिंदुओं ने सनातन धर्म में पुनः वापसी की। इस वापसी में गोंदिया जिले के निवासी शिवदास, शिमला, कन्हाभगत, संजय भगत, कुंवर अक्षय सहित आधे दर्जन से अधिक सदस्यों ने सनातन धर्म में वापसी की। ये सभी ग्राम छोटी, पोस्ट तुगुड़ी, जिला गोंदिया के निवासी हैं। बच्चे की आँखों के स्वास्थ्य सुधार की आशा के चलते अपनाया था ईसाई धर्म जानकारी के मुताबिक बीस वर्ष पूर्व साल 2006 में बच्चे की आँखों के स्वास्थ्य में सुधार की आशा में उन्होंने धर्म परिवर्तन कर लिया था। आज सभी सदस्यों ने वापसी कर ली है। इस मौके पर देश के धर्मांतरित हिंदुओं से बागेश्वर महाराज की अपील है कि जिनके पूर्वज रामलाल, श्यामलाल थे, वे पुनः सनातन धर्म में लौट आएं। हमारे पुत्र संजय भगत का जन्म सन 2006 में हुआ था। उसी समय से उसे कम दिखाई देता था। ईसाई धर्म के अनुयायियों ने यह प्रलोभन दिया था कि यदि हम उनके धर्म में सम्मिलित हो जाएं, तो हमारे बच्चे को दिखाई देने लगेगा और वह स्वस्थ हो जाएगा। इसी प्रलोभन में हमने परिवार सहित ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन हमें फिर भी वहां संतोष प्राप्त नहीं हुआ। हमारे बच्चे को स्वस्थ करने तथा उसे दृष्टि प्रदान करने के संबंध में जो हमें उस समय आश्वासन दिया गया था, वह पूरा नहीं हुआ। हम अपनी त्रुटि स्वीकार करते हैं। आज हमने सपरिवार सनातन धर्म में पुन: वापसी की है। बागेश्वर महाराज जी की कथा में उपस्थित होकर, हमें सम्मानपूर्वक घर वापसी का अवसर प्राप्त हुआ। विगत एक वर्ष से हम बागेश्वर महाराज को टेलीविजन के माध्यम से देखते आ रहे थे, परंतु घर वापसी हेतु आवश्यक सहयोग के अभाव में हम यह कदम नहीं उठा पा रहे थे। आज बागेश्वर महाराज के मंच से हमारी घर वापसी संपन्न हुई, जिससे हमें अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। हम यह सुनिश्चित करते हैं कि भविष्य में हम किसी अन्य धर्म को नहीं अपनाएंगे और सदैव अपने सनातन धर्म के प्रति निष्ठावान रहेंगे। सभी घर वापसी करने वाले सदस्यों को महाराज श्री की व्यास पीठ के बगल में खड़े होकर त्रिकुंड चंदन लगाया गया, मंत्र पढ़े गए और उनके गले में सनातन धर्म के बागेश्वर बालाजी की पट्टिका डाली।

बिहार के खिलाडियों ने दो साल में देश-विदेश में बढ़ाया ‘वैभव’

पटना. बिहार में खेल अब सिर्फ मैदान तक सीमित गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव, युवा सशक्तिकरण और राज्य की नई पहचान का मजबूत आधार बन चुका है। 9 जनवरी 2024 को गठित बिहार खेल विभाग ने महज दो वर्षों में यह साबित कर दिया है कि यदि नीति स्पष्ट हो और इच्छाशक्ति मजबूत, तो खेल किसी भी राज्य की तस्वीर बदल सकते हैं। इन दो वर्षों का सफर बिहार को उस निर्णायक मोड़ पर ले आया है, जहां से वर्ष 2026 को खेलों के नए युग की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। कैसे शुरू हुई खेल क्रांति बिहार में खेल क्रांति की नींव योजनाबद्ध तरीके से रखी गई। अगस्त 2024 में राजगीर खेल अकादमी की स्थापना ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाओं और संरचित कोचिंग का रास्ता खोला। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उद्घाटित बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर ने खेल को शिक्षा, शोध और करियर से जोड़ते हुए एक स्थायी ढांचा खड़ा किया। इन संस्थानों ने यह संदेश दिया कि बिहार में खेल अब शौक या विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य का सशक्त माध्यम है। गांव-गांव से निकल रहे चैंपियन बीते दो वर्षों में खेल विभाग ने अवसंरचना को केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अवसर सृजन का माध्यम बनाया। जिला मुख्यालयों से लेकर पंचायत स्तर तक विकसित खेल सुविधाओं ने बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए खेल को सुलभ बनाया है। प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियम, जिला खेल भवन सह जिमनैजियम और गांवों में विकसित खेल मैदानों ने खेल को शहरों की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया है। वर्ष 2025 में ही 257 प्रखंड स्तरीय स्टेडियमों का पूर्ण होना इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल है। आज बिहार के गांवों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी उभर रहे हैं। विश्व स्तर पर बिहार की पहचान बिहार अब केवल खिलाड़ियों को तैयार करने वाला राज्य नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का भरोसेमंद मेजबान भी बन चुका है। एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, सेपकटाकरा वर्ल्ड कप, एशियन रग्बी सेवन्स, खेलो इंडिया यूथ गेम्स, हीरो एशिया कप हॉकी और ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज एथलेटिक्स चैंपियनशिप जैसे आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि बिहार वैश्विक खेल मानकों पर खरा उतरने की पूरी क्षमता रखता है। इन आयोजनों से न केवल राज्य की छवि बदली, बल्कि पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के आत्मविश्वास को भी नई ऊर्जा मिली। बच्चों में जगी खेल की नई रुचि खिलाड़ी विकास की सोच में भी बुनियादी बदलाव देखने को मिला है। ‘मशाल’ जैसी व्यापक प्रतिभा खोज पहल ने लाखों बच्चों को खेल से जोड़ा। एकलव्य स्पोर्ट्स स्कूलों और प्रशिक्षण केंद्रों के विस्तार से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निरंतर मार्गदर्शन और बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, राजगीर सहित अन्य प्रशिक्षण केंद्रों के कारण अब बिहार के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बाहर जाने की मजबूरी नहीं रही। खिलाड़ी-केंद्रित शासन की शुरुआत खेल विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। पंचायत स्तर तक गठित खेल क्लबों ने स्थानीय नेतृत्व को मजबूत किया है। वहीं छात्रवृत्ति, सरकारी नियुक्ति, प्रोत्साहन राशि और कल्याणकारी योजनाओं ने यह भरोसा दिलाया है कि बिहार में खेल प्रतिभा का भविष्य सुरक्षित है। पदक जीतने वाले खिलाड़ी अब सिर्फ सम्मान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें स्थायी अवसर और सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिल रही है। बिहार बनेगा खेल हब वर्ष 2026 बिहार खेल विभाग के लिए आत्मविश्वास और विस्तार का वर्ष होगा। सात निश्चय योजना (03) के तहत पटना में प्रस्तावित स्पोर्ट्स सिटी, जिला-विशेष खेल उत्कृष्टता केंद्र, एकलव्य खेल केंद्रों का सुदृढ़ संचालन, नई छात्रवृत्ति प्रणाली और खेल प्रशासन में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां, ये सभी पहल बिहार को खेल आधारित विकास मॉडल की ओर ले जाएंगी। खेल युग की औपचारिक शुरुआत दो वर्षों में बिहार खेल विभाग ने यह सिद्ध कर दिया है कि खेल राज्य की पहचान और दिशा दोनों बदल सकते हैं। विकसित भारत 2047 और गौरवशाली बिहार 2047 के लक्ष्य के साथ बिहार अब खेलों के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है। वर्ष 2026 को बिहार में इसी नए खेल युग की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

प्रभास के ‘राजा साब’ ने पहले दिन 100 करोड़ कमाए, दर्शकों पर दिखा जादू

मुंबई  पैन इंडिया स्टार प्रभास ने एक बार फिर अपनी स्टार पावर का कमाल दिखाया है. उनकी लेटेस्ट हॉरर कॉमेडी फिल्म 'द राजा साब' ने मिक्स्ड से नेगेटिव रिव्यूज पाने के बावजूद वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर शानदार ओपनिंग की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले दिन इस पिक्चर ने लगभग 54-100 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है. पहले दिन प्रभास की फिल्म ने किया कमाल? डायरेक्टर मारुति के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने भारत में अनुमानित 45-70 करोड़ रुपये की ग्रॉस कमाई की है. ये आंकड़ा ऑफलाइन शो और सभी भाषाओं को मिलाकर सामने आया है. डोमेस्टिक बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई तेलुगू स्टेट्स से हुई है, जहां फिल्म ने 50+ करोड़ रुपये ग्रॉस बटोरे हैं. इसमें प्रीमियर शो के 8-9 करोड़ रुपये से ज्यादा शामिल हैं.  ओवरसीज बॉक्स ऑफिस पर फिल्म के 25-30 करोड़ रुपये के आसपास कलेक्शन करने की उम्मीद है. इससे वर्ल्डवाइड ओपनिंग डे 90+ करोड़  रुपये ग्रॉस तक पहुंच सकता है. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पेड प्रीव्यू के 9.15 करोड़ रुपये समेत, 'राजा साब' का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन 54.15 करोड़ रुपये हो चुका है. जबकि फाइनल फिगर तेलुगू स्टेट्स से आने के बाद पता चलेगा कि ये 100 करोड़ के पार जाता है या नहीं. फिल्म 'द राजा साब' ने ओपनिंग डे के लिए वर्ल्डवाइड प्री-सेल्स में 50 करोड़ से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन किया था. अगर भारत में बुकिंग्स थोड़ा पहले खुली होतीं, तो ये आंकड़े और भी ऊंचे हो सकते थे. फिर भी एडवांस सेल्स मजबूत रही. हालांकि ये प्रभास की हालिया फिल्मों जैसे 'कल्कि 2898 एडी' और 'सालार' से कम कम ही थीं.  जैसा कि हमने कहा, इस फिल्म की ओपनिंग पूरी तरह प्रभास के स्टारडम की वजह से संभव हुई है. खासकर तब जब क्रिटिक्स के नेगेटिव रिव्यूज के बाद शुरुआती वर्ड ऑफ माउथ अच्छा नहीं था. पिक्चर की एडवांस भी ठीक-ठाक हैं, जो रिसेप्शन को देखते हुए डीसेंट होल्ड दिखाती है. अब देखना यह है कि संक्रांति के फेस्टिव वीकेंड पर फिल्म कैसा परफॉर्म करती है.

मलेशिया ओपन से बाहर हुईं पीवी सिंधु, सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर-2 ने हराया

कुआलालंपुर पीवी सिंधु का सपना टूट गया है. सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी ने भारत की इस स्टार शटलर को मात दे दी है. पीवी सिंधु मलेशिया ओपन से बाहर हो गई हैं. शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल में उन्हें दुनिया की नंबर 2 खिलाड़ी चीन की वांग झियी से 16-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा. पीवी सिंधु दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट वांग झियी के खिलाफ दबाव नहीं बना सकीं. पैर की चोट से उबरने के बाद अपना पहला टूर्नामेंट खेल रही सिंधु ने दूसरे गेम में 11-6 की बढ़त भी गंवा दी. पीवी सिंधु का सपना टूटा हार के साथ ही टूर्नामेंट में उनके सफर का निराशाजनक अंत हो गया. पीवी सिंधु ने वांग झियी को मुकाबले की शुरुआत में कड़ी टक्कर दी. उन्होंने जोरदार शॉट लगाए और अपने खास क्रॉस-कोर्ट स्मैश लगाकर 5-2 की बढ़त बना ली, लेकिन वांग के हल्के टच ने उन्हें लगातार अंक दिलाकर बराबरी करने में मदद की. पहले गेम में एक समय सिंधु 9-7 से आगे चल रही थीं, लेकिन चीनी खिलाड़ी ने एक बार फिर वापसी की और इंटरवल पर सिंधु के नेट पर शॉट चूकने पर एक अंक की मामूली बढ़त बना ली. सेमीफाइनल में वर्ल्ड नंबर-2 खिलाड़ी ने दे दी शिकस्त मैच फिर से शुरू होने के बाद स्कोर एक समय 13-13 से बराबर था. 15-14 पर, वांग ने लगातार आक्रामक शॉट्स से दबाव बढ़ाया. वह 18-14 पर पहुंच गईं, एक जबरदस्त रैली में एक अंक गंवाया, फिर चार गेम अंक हासिल किए और ओपनर खत्म किया क्योंकि सिंधु वाइड चली गईं. दूसरे गेम में सिंधु दो गलतियों के बाद 1-3 पर फिसल गईं, लेकिन उन्होंने वापसी की, और 6-3 से आगे निकलने के लिए जोरदार रैली बनाईं. मलेशिया ओपन से कर दिया बाहर वांग ने अंतर कम किया, फिर भी सिंधु ने बीच के समय में अपनी विरोधी खिलाड़ी को तेज एंगल से कोनों की ओर धकेलकर अपना दबदबा बनाया, जिससे ब्रेक तक 11-6 की बढ़त हो गई. वांग ने दोबारा गेम शुरू होने के बाद जोरदार वापसी की, तेज रैलियों में हिस्सा लिया, लेकिन सिंधु ने लगभग परफेक्ट नेट शॉट्स से जवाब दिया और 13-9 से आगे रहीं. वांग ने फिर वापसी की, जब सिंधु के शॉट्स बाहर और नेट में चले गए, और 13-13 से बराबरी कर ली. इसके बाद 16-13 की बढ़त के साथ वांग झियी ने मैच अपने नाम कर लिया. 

उपराष्ट्रपति बोले- ‘सिर्फ अपने लिए जीना गलत, समाज को कुछ वापस देना चाहिए’

चंडीगढ़. एलपीयू में 12वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। इस समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री मैरी एलिजाबेथ ट्रस को डॉक्टरेट मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस मौके उपराष्ट्रपति ने ग्रेजुएट छात्रों को बधाई देते हुए दीक्षांत समारोह को एक संतुष्टि का क्षण बताया। जो एक साथ जिम्मेदारी को भी बढ़ाता है – न केवल ग्रेजुएट्स के लिए, बल्कि माता-पिता, स्टाफ सदस्यों और संस्थानों के लिए भी जो युवा दिमागों को आकार देते हैं। इसी के साथ उन्होंने मेड-इन-इंडिया उत्पादों को अपनाने के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली एलपीयू की पहलों की सराहना की। उन्होंने स्नातकों से ईमानदारी, विविधता, करुणा और सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया, इस बात पर जोर देते हुए कि “अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ़ अपने लिए जीना गलत है। हमें समाज को कुछ वापस देना चाहिए”। इसी के साथ छात्रों से न केवल खुद नशीली दवाओं को अस्वीकार करने, बल्कि अपने साथियों को भी इस जाल में फंसने से रोकने का आग्रह किया। वहीं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को बधाई दी और उन्हें याद दिलाया कि शिक्षा सिर्फ़ अकादमिक उपलब्धि तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसमें चरित्र निर्माण, मूल्यों और नागरिक ज़िम्मेदारी का भी महत्व है। संसद मेंबर व एलपीयू के फाउंडर चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति के साथ-साथ प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तियों की मेजबानी करने पर खुशी ज़ाहिर की। डॉ. मित्तल ने इस बात पर जोर दिया कि एलपीयू में शिक्षा सिर्फ डिग्रियों तक ही सीमित नहीं है। इसी के साथ यूनाइटेड किंगडम की पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा भारत उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था को आकार देने वाली एक केंद्रीय शक्ति है। इसी के साथ जोखिम लेने और इनोवेशन के महत्व पर ज़ोर देते हुए, ग्रेजुएट छात्रों को स्थापित प्रणालियों को चुनौती देने, असफलताओं से सीखने और दृढ़ विश्वास के साथ नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस समारोह में 2023- 2024 और 2024-2025 के रेगुलर, ऑनलाइन और डिस्टेंस एजुकेशन कार्यक्रमों के 50,000 से ज़्यादा छात्रों को डिग्रियां दी गई। इसी के साथ यूनिवर्सिटी ने 320 छात्रों को अकादमिक पदक प्रदान किए, 37 स्वर्ण पदक विजेता शामिल हैं, जबकि 861 पीएचडी रिसर्चर को उनके शोध योगदान, दृढ़ता और अकादमिक कठोरता के लिए सम्मानित किया गया। इस दीक्षांत समारोह में लवली ग्रुप के चेयरमैन रमेश मित्तल, वाइस-चेयरमैन नरेश मित्तल, प्रो-चांसलर डॉ. कर्नल रश्मि मित्तल, पंजाब के बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत और एलपीयू के डायरेक्टर जनरल एच.आर. सिंगला भी शामिल हुए।

कलेक्टर की पहल पर उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की फ्री हुई सोनोग्राफी

राजनांदगांव. जिले में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क जांच एवं उपचार किया जा रहा है। अब तक 1667 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की जा चुकी है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत जिले में गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व देखभाल उपलब्ध कराने प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख को विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क जांच, उपचार एवं परामर्श प्रदान किया जाता है। अभियान अंतर्गत पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ हो, पहले गर्भपात या मृत शिशु का जन्म हुआ हो, जिनका वजन या ऊंचाई कम हो, कम उम्र में गर्भधारण किया हो, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या किसी अन्य बीमारी से ग्रसित महिलाओं की जांच की जाती है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक सप्ताह दूरभाष के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी एवं सलाह दी जा रही है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत जिले में 1775 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं है। जिसमें 1667 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का सोनोग्राफी किया गया है एवं शेष 108 गर्भवती महिलाओं का शनिवार तक सोनोग्राफी कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मदद से आज कुल 16 गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क सोनोग्राफी किया गया है। जिसमें सुन्दरा अस्पताल में घुमका के 11 एवं भारत डायग्नोस्टिक में 5 गर्भवती महिलाओं का नि:शुल्क सोनोग्राफी किया गया है।

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा

रायपुर : चावल निर्यातकों को दी बड़ी सौगात, मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई गई इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में मुख्यमंत्री साय ने की घोषणा ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है – मुख्यमंत्री साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है। छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा      मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी। छत्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात           मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की।  मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन     इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।     इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल, राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री साय का बयान: विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों का योगदान रहेगा महत्वपूर्ण

रायपुर : विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका- मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस राजधानी रायपुर में रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर द्वारा आयोजित कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।   मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। व्यापार जगत की बेहतरी और ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई, जिसका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। जीएसटी रिफॉर्म्स से कई वस्तुओं की कीमत में कमी आई है। जीएसटी की प्रक्रिया को काफी सुगम बनाया गया है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति को देश-विदेश में सराहा जा रहा है। लगभग आठ लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हमें प्राप्त हो चुके हैं। हर सेक्टर में हमें ये निवेश प्रस्ताव मिले हैं जिनपर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश में रोजगार सृजन पर हमारा विशेष फोकस है। नई उद्योग नीति में एक हजार से अधिक रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमियों को विशेष इंसेंटिव प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में रोटरी क्लब और उद्यमियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रोटरी क्लब उद्यम के साथ ही परोपकार का भी कार्य करता है। क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य बहुत प्रशंसनीय हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि यह एक्सपो मध्य भारत का सबसे बड़ा एक्सपो है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉल हैं। इस विशाल आयोजन का लाभ निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को मिलेगा।  रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि रोटरी क्लब द्वारा आयोजित इस एक्सपो का यह 16वां वर्ष है। रोटरी क्लब सेवा से जुड़ी एक संस्था है। रोटरी क्लब द्वारा पोलियो निर्मूलन के कार्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में मोबाइल आई क्लीनिक की एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न सेक्टर्स में विशिष्ट योगदान दे रही 25 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया और इन महिला उद्यमियों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, राम गर्ग सहित रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर के सदस्यगण व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

RailOne App पर अनारक्षित टिकट पर मिलेगी 3% की छूट, 14 जनवरी से शुरू होगा नया नियम

 भोपाल  रेलवे द्वारा डिजिटल टिकट बुकिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यात्रियों को एक बड़ी राहत दी जा रही है। अब कोटा मंडल के यात्री रेलवन मोबाइल ऐप के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक करने पर तीन प्रतिशत की सीधी छूट का लाभ उठा सकेंगे। यह सुविधा 14 जनवरी से प्रायोगिक रूप से आगामी छह माह की अवधि के लिए लागू की जा रही है। यह छूट आर-वालेट को छोड़कर अन्य सभी डिजिटल भुगतान विकल्पों जैसे यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग पर लागू होगी। वहीं, आर-वालेट से टिकट बुक करने वाले यात्रियों को पहले की तरह तीन प्रतिशत बोनस कैशबैक मिलता रहेगा। यह प्रायोगिक योजना 14 जनवरी से 14 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम द्वारा योजना की समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा। रेलवे का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से यात्रियों को डिजिटल भुगतान के प्रति प्रोत्साहित करना, टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।     वर्तमान में रेलवन ऐप पर केवल आर-वालेट के माध्यम से अनारक्षित टिकट बुक करने पर तीन प्रतिशत की राशि बोनस कैशबैक के रूप में दी जाती है। लेकिन नई व्यवस्था के तहत 14 जनवरी से सभी डिजिटल भुगतान माध्यमों से अनारक्षित टिकट बुक करने पर यात्रियों को तीन प्रतिशत की सीधी छूट प्रदान की जाएगी।     -सौरभ कटारिया, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक मकर संक्रांति से पहले रेलवे की ओर से अपील मकर संक्रांति का पर्व करीब आते ही भोपाल रेल मंडल ने आमजन से रेलवे लाइनों के आसपास पतंगबाजी न करने की अपील की है। रेलवे प्रशासन ने चेतावनी दी है कि हाई वोल्टेज बिजली लाइनों के कारण यह शौक जानलेवा साबित हो सकता है। भोपाल रेल मंडल में शत प्रतिशत ट्रेनों का संचालन 25,000 वोल्ट की हाई टेंशन विद्युत लाइनों के माध्यम से होता है, जिनमें 24 घंटे लगातार करंट प्रवाहित रहता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि पतंग का मांझा इन विद्युत तारों में उलझ जाता है, तो गीला, धातुयुक्त या सिंथेटिक मांझा करंट को सीधे पतंग उड़ाने वाले व्यक्ति तक पहुंचा सकता है, जिससे गंभीर हादसा या मौत तक हो सकती है। पूर्व में देश के विभिन्न हिस्सों में इस तरह की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लोगों की जान गई है। वहीं पतंग और मांझे के बिजली की लाइनों में फंसने से न केवल जनहानि का खतरा रहता है, बल्कि रेल संचालन भी बाधित हो सकता है। इससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। मकर संक्रांति के अवसर पर भोपाल रेल प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक, ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों और स्टेशन परिसरों के पास पतंगबाजी से बचें। सुरक्षित स्थानों पर ही पतंग उड़ाएं और दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

मोदी सरकार का तोहफा: पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% इजाफा

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा घोषित पूर्व सैनिकों (ESM) और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% की बढ़ोतरी अब लागू कर दी गई है. ये जानकारी रक्षा मंत्रालय (MoD) ने शनिवार यानी 10 जनवरी को दी है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बढ़ी हुई सहायता केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिक कल्याण विभाग द्वारा लागू की गई योजनाओं के तहत दी गई है. मंत्रालय ने कहा कि ये फैसला दिग्गजों की सर्विस और बलिदान का सम्मान करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्रालय (MoD) ने कहा, 'रक्षा मंत्रालय ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% की बढ़ोतरी को पूरी तरह लागू कर दिया है. इस निर्णय के तहत केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से विवाह अनुदान 1 लाख रुपये और शिक्षा अनुदान 2,000 रुपये प्रति माह हो गया है. ये सरकार की पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.' कब मिली थी मंजूरी? रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों (ESM) के लिए वित्तीय सहायता में 100% बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी. किन ग्रांट्स में बढ़ोतरी की गई है? मंत्रालय के मुताबिक, गरीबी भत्ता को हर लाभार्थी के लिए ₹4,000 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रति माह कर दिया गया है. ये 65 साल से अधिक उम्र के बुज़ुर्ग और नॉन-पेंशनर ESM और उनकी विधवाओं को जिंदगी भर लगातार सहायता देगा, जिनकी कोई रेगुलर इनकम नहीं है. एजुकेशन ग्रांट को प्रति व्यक्ति ₹1,000 से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह कर दिया गया है. ये दो आश्रित बच्चों (कक्षा I से ग्रेजुएशन तक) या दो साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स करने वाली विधवाओं के लिए है. शादी ग्रांट को प्रति लाभार्थी ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दिया गया है. ये ESM की दो बेटियों तक और विधवा के दोबारा शादी करने पर लागू होगा. वो भी उन शादियों के लिए जो इस आदेश के जारी होने के बाद हुई हैं. बलिदान का सम्मान, सरकार की प्रतिबद्धता इन योजनाओं को रक्षा मंत्री पूर्व सैनिक कल्याण कोष से फाइनेंस किया जाता है, ये सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष (AFFDF) का एक हिस्सा है. MoD के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए बताया कि इस फैसले से कम इनकम वाले ग्रुप के नॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों, विधवाओं और आश्रितों के लिए सोशल सिक्योरिटी सेफ्टी नेट बेहतर होगा. जिससे दिग्गजों की सेवा और बलिदान का सम्मान करने की सरकार की प्रतिबद्धता फिर से पक्की होती है.