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बिहार में 36.3 लाख लीटर शराब जब्त कर 1.25 लाख लोग गिरफ्तार

पटना. बिहार में पिछले 9 साल से शराबबंदी लागू है। जिसके चलते यहां शराब तस्करों पर लगातार कार्रवाई हो रही है। साल 2025 में पुलिस ने 36.3 लाख लीटर से ज़्यादा शराब जब्त की है। वहीं, शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में 1.25 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने बताया कि ज़ब्त की गई शराब में 18.99 लाख लीटर इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) और 17.39 लाख लीटर देसी शराब शामिल थी। अधिकारियों ने पिछले साल शराबबंदी कानून तोड़ने के आरोप में 1,25,456 लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 1,21,671 था। यानी 2024 की तुलना में 2025 में 3 प्रतिशत अधिक गिरफ्तारी की गई है। 2016 में लागू किया गया था शराबबंदी कानून बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 में एक कानून बनाया था, जिसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, व्यापार, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, बिक्री और सेवन पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि, इस कानून के कड़े प्रावधानों के बावजूद, तब से कई बार शराब की तस्करी और जहरीली शराब से होने वाली मौतों की खबरें सामने आई हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि जहरीली शराब की घटनाओं को रोकने के लिए, स्पिरिट बेचने वालों पर खास नजर रखी जा रही है।उन्होंने कहा कि 2025 के दौरान शराब से जुड़ी कोई बड़ी घटना नहीं हुई, लेकिन शराबबंदी से जुड़े मामलों में जब्ती और गिरफ्तारियों में 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पुलिस लगातार चला रही है अभियान उन्होंने कहा, "हम अवैध शराब के धंधे में शामिल लोगों की संपत्ति को भी टारगेट कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से रोका जा सके।" कुमार ने बताया कि पिछले साल शराब के धंधे के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने कुल 38 ऑपरेशन किए। इसमें 15 ऑपरेशन झारखंड, 17 उत्तर प्रदेश, चार छत्तीसगढ़ और 2 मध्य प्रदेश में हुए। इन अभियानों के दौरान कुल 29 बड़े वाहन, 26 छोटे वाहन और 2,27,182 लीटर शराब ज़ब्त की गई। यह 2024 में प्रोहिबिशन यूनिट द्वारा किए गए चार ऑपरेशन्स की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है, जब 28,210 लीटर स्पिरिट जब्त की गई थी। विनय कुमार ने बताया कि 2025 में, शराब के अवैध व्यापार से जमा की गई संपत्ति के लिए कुल 289 लोगों की पहचान की गई और उन व्यक्तियों के खिलाफ BNSS की धारा 107 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह धारा आपराधिक गतिविधि से जुड़ी संपत्ति की कुर्की, जब्ती या बहाली से संबंधित है।

पानी के 955 नमूनों में से 20 में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

पटना. लोक स्वास्थ्य संस्थान (पीएचआइ) के बैक्टीरियोलाजी विभाग में स्थित जल जांच प्रयोगशाला में गत वर्ष रेलवे के 743 व आमजन के 212 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 20 में हैजा, टायफायड, हेपेटाइटिस ए या ई, अमीबायसिस, जियार्डियासिस, डायरिया और फ्लोरोसिस जैसे रोगों के कारक बैक्टीरिया पाए गए। यह जानकारी पीएचआइ के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दी। ऐसे में यदि आप अपने पीने के पानी की गुणवत्ता जानना चाहते हैं तो सरकारी प्रयोगशालाओं में निशुल्क जांच करवा सकते हैं। सरकार ने इसकी पुख्ता व्यवस्था की है। जिले में पीएचईडी विभाग हर अनुमंडल, जिला के साथ राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला संचालित कर रहा है। वहीं PHI के निदेशक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह के अनुसार आमजन यदि पानी जांच का आवेदन देते हैं तो उनकी टीम एक दिन में चार जगह से नमूने लेकर उनकी निशुल्क जांच करती है। इसकी रिपोर्ट संबंधित व्यक्ति व संस्थान को देने के साथ उनके विशेषज्ञ जल उपचार के उपाय भी सुझाते हैं। वहीं, पीएचईडी विभाग के अधीन एक राज्यस्तरीय, 38 जिला स्तरीय व 75 अनुमंडलीय स्तर जल जांच प्रयोगशाला कार्यरत हैं। कमोवेश हर जिले में दो से तीन जल जांच प्रयोगशाला हैं। जिलास्तरीय जांच प्रयोगशाला में हर माह 300 तो अनुमंडलस्तरीय प्रयोगशाला में 125 नमूनों की जांच की जानी है। 15 जिलास्तरीय प्रयोगशालाओं को एनएबीएल सर्टिफिकेट प्राप्त हैं। इनमें 16 मानकों पर पानी की गुणवत्ता जांच होती है। सरकार हर वर्ष सिर्फ पानी की जांच पर 62 लाख 32 हजार 500 रुपये खर्च कर रही है। सप्लाई का पानी साफ होने का दावा पीएचईडी (लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग) पूर्वी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर कुमार अभिषेक के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के हर वार्ड में हर घर नल का जल योजना के तहत जिस जल की आपूर्ति की जा रही है, उसकी भौतिक, रासायनिक, बैक्टीरियल-वायरल जांच हर तीन माह में कराई जाती है। आपूर्ति जल अबतक सभी मानकों पर खरा उतरा है। जिले के लोग रेडियो स्टेशन के पीछे स्थित राज्यस्तरीय जल जांच प्रयोगशाला या राजवंशी नगर में ऊर्जा आडिटोरियम के पास स्थित जिला जल जांच प्रयोगशाला के अलावा अपने अनुमंडल स्थित प्रयोगशाला में चापाकल, कुआं, बोरिंग, नल आदि के पानी की जांच निशुल्क करा सकते हैं। पीएचईडी के विपरीत नगर निगम के पास अपनी कोई जल जांच प्रयोगशाला नहीं है। हाल में पेयजल की शुद्धता का मामला गरमाने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने पीएचईडी की प्रयोगशालाओं में नमूने भेज कर गुणवत्ता की जांच कराई है। उपलब्ध जांच की सुविधा प्रयोगशाला में उपलब्ध जांच की सुविधा : पानी के रंग-गंध, पीएच, क्लोरीन, क्षारीयता, खारापन, क्लोराइड, फ्लोराइड, आयरन, सल्फेट, नाइट्रेट, आर्सेनिक, ई-कोली या कोलिफार्म बैक्टीरिया, थर्मो टालरेंट कोलिफार्म बैक्टीरिया की जांच होती है। एनएबीएल प्रमाणित प्रयोगशाला कम पेयजल की जांच बीआइएस मानक आइएस-10500 के अनुसार की जाती है। नेशनल एक्रिडिएशन लैबोरेटरी बोर्ड प्रमाणित प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट को ही मानक माना जाता है। प्रदेश में पटना, भागलपुर, गया, मुज़फ्फरपुर, बेगूसराय, सहरसा, पूर्णिया, अररिया, शेखपुरा, सासाराम, बांका जैसे 15 जिलों की ही प्रयोगशाला एनएबीएल प्रमाणित हैं।आरओ के चयन में इन बातों का रखें ध्यान राज्य जल जांच प्रयोगशाला के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवीण कुमार ने बताया कि शुद्ध पेयजल के लिए सिर्फ कोई भी आरओ लगवाना उचित नहीं है। आरओ लगवाने के पहले पानी की जांच करवाएं और उसके अनुसार फिल्टर का चयन जरूरी है। पेयजल में आर्सेनिक, पानी लाल-पीला हो तो आयरन, हड्डी-दांत की समस्या ज्यादा हो, तो फ्लोराइड, नाइट्रेट, टीडीएस व ई-कोली या कोलीफार्म की जांच हर व्यक्ति को जरूर करानी चाहिए। आयरन ज्यादा हो तो आयरन रिमूवर फिल्टर लगवाएं आरओ नहीं। आर्सेनिक-फ्लोराइड ज्यादा है तो आरओ-यूएफ के साथ मिनरल कार्टिरेज लगवाएं, टीडीएस 300 से कम हो लेकिन बैक्टीरिया है तो यूवी प्लस यूएफ फिल्टर लगवाएं सामान्य आरओ नहीं। यदि सब कुछ मानक से ज्यादा हो तो संपूर्ण आरओ सिस्टम लगवाना चाहिए जो आर्सेनिक-फ्लोराइड सर्टिफाइड हो। पेयजल के मानक पेयजल रंगहीन, गंधहीन व प्राकृतिक स्वाद वाला होना चाहिए। पीएच मानक 6.5 – 8.5 के बीच l टीडीएस (कुल घुलनशील ठोस) 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम कठोरता या क्षारीयता 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम सल्फेट 200 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम क्लोराइड 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम नाइट्रेट 45 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम फ्लोराइड 1 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर आयरन (लोहा)0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम आर्सेनिक 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम लेड (सीसा)0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए। ई-कोली, टोटल कोलीफार्म जैसे बैक्टीरिया प्रति 100 मिलीग्राम में शून्य होना चाहिए। कीटनाशक, मरकरी, कैडमियम, फिनाल, साइनाइड जैसे विषैले तत्वों की भी जांच अब जरूरी होती जा रही है।

बिहार में अब फोन से करें ठगी की शिकायत

पटना. बीमा कराया, समय पर प्रीमियम भरा, लेकिन बीमारी के वक्त अस्पताल में कैशलेस सुविधा देने से या जीवनबीमा का भुगतान करने से इंकार कर दिया गया। बड़े अरमनों से कोई मनचाहा ऑनलाइन सामान मंगवाया, डिलीवरी तो समय पर हुई मगर डिब्बा खुलते ही घटिया या खराब उत्पाद निकला। शिकायत की तो न रिटर्न मिला न रिफंड। मोबाइल, इंटरनेट, ट्रैवल या होम सर्विस का वादा बड़े-बड़े दावों के साथ किया गया, लेकिन पैसे लेने के बाद कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। डिजिटल दौर में जितनी तेजी से सुविधाएं बढ़ी हैं, उससे कहीं ज्यादा गति से उपभोक्ताओं के साथ ठगी, धोखाधड़ी या सेवा में लापरवाही की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे मामले उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ज्यादातार ग्राहक अक्सर यह सोचकर चुप रह जाते हैं कि कहां शिकायत करें, कौन कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाएगा, सालों तक अधिवक्ताओं की फीस देगा। ई-कामर्स प्लेटफार्म, कंपनियां व कई बार बड़े दुकानदार तक ग्राहकों की इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनका अधिकार नहीं देतीं। ऑनलाइन खरीदारी में खराब गुणवत्ता के सामान वापसी, रिफंड नहीं मिलने या सेवा देने में कोताही की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अधीन संचालित उपभोक्ता संरक्षण निदेशालय ने नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (एनसीएच) शुरू किया है। अब ठगे गए ग्राहकों को बिना कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाए उनका पैसा वापस चंद घंटों या अधिकतम दो-तीन दिन में वापस मिल रहा है। यह सुविधा सिर्फ एक फोन कॉल , वाट्सएप या मैसेज पर मिल रही है। यह जानकारी पटना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य रजनीश कुमार ने दी। तेजी से हो रहा समस्याओं का समाधान रजनीश कुमार ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं को हेल्पलाइन 1915 से समाधान नहीं मिला या वे उससे संतुष्ट नहीं थे, ऐसे 440 मामले 2025 में जिला आयोग के समक्ष आए थे। इसी समयावधि में आयोग ने 1033 मामलों का निष्पादन किया। इनमें नए के साथ लंबित मामले भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां जीवनबीमा, हेल्थ इंश्योरेंस या इससे संबंधित मामले सर्वाधिक रहते थे। आजकल ई-कामर्स खासकर इलेक्ट्रानिक उत्पादों से संबंधित व 10 मिनट डिलिवरी वाले मामले ज्यादा आ रहे हैं। इसके अलावा रेलवे, फ्लाइट, अपार्टमेंट-फ्लैट, विभिन्न प्रवेश परीक्षा व नौकरियों की तैयारी कराने वाली कोचिंग, स्कूल-कॉलेजों की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। अस्पताल की सेवा में कमी या चिकित्सा में उपेक्षा, ऑनलाइन शापिंग, इंश्योरेंस, भवन, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग, रेलवे, फ्लाइट समेत सभी तरह की शिकायतों का समाधान किया जाता है। हेल्पलाइन त्वरित समाधान घर बैठे उपलब्ध करा रहा है। सुबह 8:00 से शाम 8:00 बजे तक करें ऑनलाइन शिकायत – उपभोक्ता सुबह 8:00 बजे से शाम आठ बजे तक टोल फ्री नंबर 1915 पर फोन कर, 8800001915 पर वाट्सएप या एसएमएस या उमंग एप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यहां से समाधान नहीं होने या संतुष्ट नहीं होने पर जिला या राज्य आयोग में शिकायत की जाती है। शिकायत के लिए निम्न बातों का रखें ध्यान – आर्डर आइडी, बिल, भुगतान प्रमाण, समस्या की फोटो-वीडियो व एप-कंपनी से की शिकायत की फोटो जरूर संलग्न करें। कंपनी-एप को चैट-ईमेल से लिखित शिकायत कर उसका टिकट नंबर जरूर लें। तीन से सात दिनों में समस्या का समाधान नहीं होने या जवाब नहीं मिलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में फोन-वाट्सएप या ईमल करें। इसमे अपना नाम, मोबाइल नंबर, कंपनी का नाम, ऑर्डर विवरण, समस्या, प्रमाण व शिकायत अपलोड करें। हेल्पलाइन से सहायता नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग में आफलाइन या ऑनलाइन मामला दर्ज कराएं। शिकायत की भाषा सरल व तथ्यात्मक रखें। इसमें तारीख, समय, राशि स्पष्ट लिखें। किस आयोग में कितने तक की शिकायत जिला आयोग में 50 लाख तक के मामले। राज्य आयोग में 50 लाख से दो करोड़ रुपये तक के मामले। राष्ट्रीय आयोग में दो करोड़ रुपये से अधिक के मामले। क्या मांग सकते हैं – रिफंड मुआवजा सेवा में सुधार मानसिक उत्पीड़न का हर्जाना   ऐसे मामलों में मिला त्वरित न्याय – बोरिंग रोड निवासी दिलीप कुमार को फ्लाइट टिकट रद करने के बाद रिफंड नहीं मिला, उन्होंने शिकायत की तो कंपनी ने तुरंत पूरी राशि वापस कराई। पाटलिपुत्र निवासी राजेश कुमार ने एक ई-कामर्स प्लेटफार्म से प्रीपेड किराना आर्डर किया। कंपनी ने डिलिवरी तो नहीं ही की, रिफंड के बारे में गलत सूचना दी। शिकायत पर पूरी राशि दो दिन में वापस कराई गई। पाटलिपुत्र निवासी कमलेश के पुत्र ने वाशिंग मशीन ऑनलाइन आर्डर कर भिजवाई। मशीन में खराबी के कारण वापस करने के आवेदन के बावजूद न तो मशीन उठवाई गई और न ही नई मशीन भेजी गई। उन्होंने आयोग की हेल्पलाइन में शिकायत की जिसके तीन दिन बाद उन्हें पूरी कीमत वापस कर दी गई। गोलारोड निवासी अखिलेश कुमार ने ई-कामर्स के प्लेटफार्म से पांच सितारा रेफ्रिजरेटर का आर्डर किया। जब उन्हें आर्डर मिला तो वह थ्री स्टार था। भारी छूट का लालच दे सस्ता व कम गुणवत्ता का उत्पाद भेजने की उन्होंने हेल्पलाइन में शिकायत की। इसके बाद कंपनी ने पूरी राशि वापस की। इन मामलों में प्राप्त कर सकते हैं सहायता खाद्य सामग्री की खराब गुणवत्ता व मिलावट, एक्सपायर्ड, नकली या घटिया गुणवत्ता का सामान, गलत लेबलिंग (तारीख, वजन, सामग्री छिपाना) के मामले में। गलत वजन या माप यानी कम तौलना-नापना, पैकेट पर लिखे वजन से कम सामग्री देना। अधिक मूल्य वसूली, अधिकतम से अधिक मूल्य लेना, बिल न देना या गलत बिल देना, सरकारी दर से अधिक कीमत लेना आदि। सेवाओं में कमी जैसे मोबाइल, इंटरनेट, डीटीएच, बिजली, पानी की खराब सेवा, बैंक, बीमा, अस्पताल, स्कूल, ट्रैवल आदि में लापरवाही, मरम्मत या डिलीवरी में अनावश्यक देरी। भ्रामक विज्ञापन, झूठे दावे करने वाले विज्ञापन, आफर-छूट के नाम पर धोखाधड़ी, गारंटी-वारंटी का गलत प्रचार आदि। ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े मामलों में गलत या खराब सामान की डिलीवरी, रिफंड-रिटर्न नहीं देना, ई-कामर्स प्लेटफार्म की शिकायत आदि। उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन जैसे शिकायत के बाद भी समाधान नहीं करना, जबरदस्ती कोई वस्तु-सेवा थोपना, अनुचित व्यापार व्यवहार करना।

छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के लिए डॉ. रमन सिंह की बड़ी योजना, 6,000 से अधिक परिवारों को मिली मदद

मजदूर हितों की बड़ी पहल: छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने 6,000 से अधिक श्रमिक परिवारों को दी योजनाओं की सौगात विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के हाथों श्रमिक कल्याण को नई ताकत, ढाई करोड़ से बदली हजारों मजदूर परिवारों की तक़दीर रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज रायपुर स्थित अपने निवास के सभागृह में छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के संगठित क्षेत्र में कार्यरत हजारों मजदूर परिवारों को ढाई करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि प्रदान की। यह सहायता छात्रवृत्ति योजना, साइकिल सहायता योजना एवं खेलकूद प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत वितरित की गई। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा ने श्रम कल्याण मंडल द्वारा प्रदेशभर में संचालित 14 कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को हर परिस्थिति में सहयोग और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए श्रम कल्याण मंडल कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहा है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि प्रदेश के 6,000 से अधिक मजदूर परिवारों को छात्रवृत्ति, साइकिल सहायता एवं खेलकूद प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत करोड़ों रुपये की सौगात दी गई है। उन्होंने कहा कि श्रम कल्याण मंडल और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को अमली जामा पहनाने का कार्य उनके मुख्यमंत्रीत्व काल में प्रारंभ हुआ, जो निरंतर आगे बढ़ा है। अब तक इन योजनाओं से लाखों मजदूर लाभान्वित हो चुके हैं और आने वाले समय में इनका और विस्तार किया जाएगा। डॉ. रमन ने मंडल द्वारा संचालित सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना का स्वागत करते हुए कहा कि श्रम कल्याण मंडल ने जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के लिए योजनाएं बनाकर मजदूर कल्याण के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया है। इसके बावजूद, मजदूर वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाओं की व्यापक प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। इस कार्यक्रम में मंडल के कल्याण आयुक्त अजितेश पांडे, सदस्यगण मोहन एंटी, रामकृष्ण धीवर, रवि शंकर सिंह, राधेश्याम गुप्ता, कमल बॉस सहित विभिन्न उद्योगों से आए मजदूरों ने आत्मीय स्वागत किया।

फरीदाबाद में कुत्ते-बिल्लियों ने बीते साल 32 हजार 60 लोगों पर किया था हमला

फरीदाबाद. शहर के कुत्ते कटकने होते जा रहे है। इस पर न तो नगर निगम अंकुश लगा पा रहा है और न ही पशुपालन विभाग। आलम यह है कि फरीदाबाद के बीके अस्पताल में हर रोज 70 से 80 मामले कुत्ते या बंदरों के काटने के सामने आ रहे है। इतना ही नहीं हर महिने करीब 5 से 6 लोगों को बिल्लियां भी काटकर जख्मी कर रही हैं। लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी रैबीज इंजेक्शन की डोज तक कम पड़ जाती हैं। इसे देखते हुए इस बार विभाग ने छह महीने का एडवांस स्टॉक बीके अस्पताल में जमा कर दिया है। जबकि पहले मरीजों को बाजार में निजी मेडिकल सेंटरों से जाकर 350 से 380 रुपए का इंजेक्शन की एक डोज लगवानी पड़ रही थी। अस्पताल में दवा उपलब्ध होने से मरीजों को कुछ राहत जरूर मिली है। लेकिन आंकडे बताते हैं कि कुत्तों, बिल्ली और बंदरों के काटने के सर्वाधिक हमले बच्चों और बुर्जुगों पर ज्यादा हुए हैं। बीते साल 32 हजार 60 लोगों को काटने के मामले सामने आ चुके हैं। साल के अप्रैल माह में सर्वाधिक 2680 लोग कुत्तों के हमले से जख्मी हुए हैं। जो अपने आप में ही चौंकाने वाला आंकडा है । जबकि यह आंकड़ा वर्ष 2019 में 22022 या था। ऐसे में जीत सालों से यह आकड़ा 10 हजार 48 ज्यादा है। यह बडी विकट स्थिति। हैं कि साल दर साल कुते काटने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। बीते साल में चार महीने तो ऐसे रहे जब मरीजों को बीके अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन ही नहीं मिले। इसमें फरवरी, मार्च, जून, जुलाई। लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए इस बार स्वास्थ्य विभाग ने एडवांस में ही छह माह का एंटी रैबीज इंजेक्शनकी डोज उपलब्ध रखी है। कुत्तों के काटने के मामलों में 32 हजार 60 मरीजों में ऐसे मरीज भी शामिल हैं जिन्हें कुत्तों के अलावा बंदरों और बिल्ली ने भी काटा है। यानि फरीदाबाद में औसतन हर साल कुत्तों के काटने के 26 हजार अधिक मामले सामने आ रहे हैं। जवकि यह आंकडा वर्ष 2019 में 22 हजार 22 रहा था। साल दर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद नगर निगम कुत्तों को पकड़ने और पशुपालन विभाग कुत्तों की नसबंदी करने के प्रति कोई पुरुता कदम नहीं उठा रहा है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने दावे किए थे कि कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाए जाएंगे और शहर में कुत्ता पकड़ने का अभियान तेज किया जाएगा। लेकिन यह सब खानापूर्ति में ही सिमट कर रह गया है। शुरूआती कुछ हफ्तों में शहर में कुत्ता पकड़कर नसबंदी एवं शेल्टर होम भेजने की कार्रवाई की गई। लेकिन अब यह पूरी तह से बंद है। स्वास्थ्य विभाग के चीफ फॉर्मासिस्ट शैलेन्द्र की माने तो वर्ष 2025 में जनवरी में 2235, फरवरी में 2553 में, मार्च में 2372, अप्रैल में 2680, मई में 2586, जून में 2373, जुलाई में 2603, अगस्त में 2469, सितम्बर में 2511, अक्टूबर में 2386, नवम्बर 2300 और दिसम्बर में 2620 लोगों कुत्तों के शिकार हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग की माने तो इतने ही मामले निजी अस्पतालों में भी पहुंचने हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो कुत्ता काटने के करीब 60 हजार से अधिक मामले फरीदाबाद शहर में आ रहे हैं। जो चौंकाने वाली संख्या है। क्या कहते हैं शहर के जाने माने फिजीशियन वीके अस्पताल के फिजीशियन डॉ. मोहित अग्रवाल व योगेश गुप्ता की माने तो कुत्ता काटने के रोगी को पानी से डर लगता है इसे हाईड्रोफोबिया हो जाता है। कुते के काटने पर उसका लार खून में मिल जाता है और यह धीरे धीरे मस्तिष्क में पहुंच जाता है। इसका डोज 0.3.7-14-30 के हिसाब से दिया जाता है। कुतों ये होने वाले रैबीज गैंग के जहर का असर मस्तिष्क पर पड़ता है। चिकित्सकों के अनुसार जब किसी की कोई भी कुत्ता काट लें तो उसके 24 घंटे के बाद एआरबी का इंजेक्शन लगवा लेना जरूरी होता है। चिकित्सकों की माने तो सर्दियों में कुर्ती, बंदर और बिल्ली के काटने के मामले बढ़ जाते हैं।

गहरी नींद में सोते समय मुंह से लार बहने पर रहें अलर्ट?

अकसर दिन भर की थकान के बाद बिस्तर में पहुंचते ही लोगों को गहरी नींद आ जाती है। लेकिन कई बार गहरी नींद से जागने पर सुबह तकिए पर लगे लार के निशान व्यक्ति को असहज और शर्मिंदगी महसूस करवा सकते हैं। हो सकता है ऐसा कुछ कई बार खुद आपके साथ भी हुआ हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गहरी नींद में बहने वाली यह लार महज एक इत्तेफाक है या आपके शरीर की तरफ से दिया जाने वाला कोई खास इशारा? तो बता दें, डॉक्टरी भाषा में इस समस्या को 'सियलोरिया' (Sialorrhea) कहा जाता है। वैसे तो सोते समय लार निकलना इस बात का संकेत हो सकता है कि आप बहुत गहरी और सुकून भरी नींद में थे, लेकिन कई बार यह गलत पॉस्चर, एसिडिटी या साइनस जैसी समस्याओं की दस्तक भी हो सकती है। आइए समझते हैं कि आखिर रात के सन्नाटे में हमारा शरीर इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों देता है और इसके पीछे की असली वजह क्या है। क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट शारदाकेयर हेल्थसिटी में हेड ऑफ न्यूरोसाइंस डॉ. अतामप्रीत सिंह कहते हैं कि नींद में कभी-कभी लार टपकना आम बात है। यह अक्सर चेहरे की मांसपेशियों के ढीले होने, मुंह से सांस लेने या गलत सोने की मुद्रा के कारण होता है और आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे, तो यह नाक के लगातार बंद रहने, एसिड रिफ्लक्स, दांतों या मसूड़ों की समस्या, या नींद में निगलने की क्षमता कम होने का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में यह नसों या मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियों से भी संबंधित हो सकता है। ऐसे में रोगी को चाहिए कि नाक को साफ रखें, सही तरीके से सोना और किसी भी छुपी हुई बीमारी का इलाज करने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। अगर लार टपकने की समस्या ज्यादा या लगातार बनी रहे, तो कारण जानने और आगे की परेशानियों से बचने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।                                 नींद में लार टपकने के पीछे छिपे 5 बडे़ कारण ​मस्तिष्क संबंधी विकार कई बार कुछ मस्तिष्क संबंधी विकारों के चलते मांसपेशियों पर कंट्रोल रखना मुश्किल हो जाता है, जिसकी वजह से व्यक्ति के मुंह से लार टपकने लगती है। इन विकारों में स्ट्रोक,सेरेब्रल पाल्सी, पार्किंसंस रोग, एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS),मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस), डाउन सिंड्रोम और ऑटिज्म शामिल हैं। इंफेक्शन कई बार किसी संक्रमण की वजह से भी मुंह से लार टपकने लगती है। जिसमें खराब गला या मोनोन्यूक्लिओसिस, साइनस इंफेक्शन, तोंसिल्लितिस, पेरिटोनसिलर फोड़ा जैसे संक्रमण शामिल होते हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें टॉन्सिलिटिस आपकी गर्दन और छाती तक फैल जाता है, जिसकी वजह से पीड़ित व्यक्ति के मुंह से लार बहने लगती है। एलर्जी यदि आपको किसी चीज से एलर्जी है तो भी सोते वक्त आपके मुंह से लार बह सकती है। दरअसल, एलर्जी होने पर लार ग्रंथि ज्यादा मात्रा में लार बनाकर शरीर से विषाक्त पदार्थों बाहर निकालती है। बंद नाक कई बार जुकाम, एलर्जी या साइनस इंफेक्शन की वजह से व्यक्ति की नाक बंद हो जाती है। नाक बंद होने से भी सोते समय मुंह से लार आने की परेशानी हो सकती है। इस स्थिति में नाक को साफ रखें और स्टीम के साथ गर्म पानी से भाप लें। एसिडिटी जिन लोगों को एसिडिटी की समस्या रहती है उनके मुंह से भी सोते समय लार बह सकती है। कैसे रोकें लार बहना ? -पीठ के बल सोने की आदत डालें। -बंद नाक का इलाज करवाएं। इसके लिए सोने से पहले स्टीम ले सकते हैं। -पानी ज्यादा पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें। -दवाओं की वजह से लार आने पर अपने डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर को दिखाना कब है जरूरी? अगर लार बहुत ज्यादा बनने के साथ सांस लेने में दिक्कत, निगलने में परेशानी या नींद पूरी न होने की समस्या परेशान करती है तो, डॉक्टर से संपर्क करें।

हरियाणा में सोनीपत की 14 प्रदूषणकारी इकाइयां तुरंत बंद करने का आदेश

चंडीगढ़. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को तेजी से कम करने के लिए सख्त कदम उठाते हुए 16 औद्योगिक इकाइयों को तुरंत बंद करने के आदेश जारी किए हैं। ये इकाइयां गंभीर और बार-बार होने वाले पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के दोषी पाई गईं। निरीक्षण के दौरान पता चला कि इन इकाइयों ने संचालन की सहमति (सीटीओ) और स्थापना की अनुमति (सीटीई) के बिना काम किया, वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) नहीं लगाए या उन्हें ठीक से नहीं चलाया, प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल किया, ग्रेप की रोक अवधि में भी संचालन जारी रखा, डीजल जनरेटर सेट के नियमों की अनदेखी की तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं से खुला धुआं और उत्सर्जन किया। सीएक्यूएम के एक अधिकारी के अनुसार, इन 16 इकाइयों में से 14 हरियाणा के सोनीपत जिले में, एक उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में और एक राजस्थान (एनसीआर) में स्थित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ये इकाइयां तब तक बंद रहेंगी, जब तक वे सभी आवश्यक पर्यावरणीय नियमों और मानकों का पूरा पालन नहीं कर लेतीं। सीएक्यूएम ने चेतावनी दी है कि गैर-अनुपालन बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी इकाइयों के खिलाफ बंद करने के अलावा जुर्माना तथा अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आयोग ने एनसीआर में स्थित सभी औद्योगिक इकाइयों से अपील की है कि वे पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन करें, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को ठीक से स्थापित और संचालित रखें और हर समय अनुपालन सुनिश्चित करें।

कड़ाके की ठंड को देख बच्चों और बुजुर्गों को बेहद सतर्क रहने के निर्देश

चंडीगढ़/फाजिल्का. सेहत विभाग फाजिल्का द्वारा डायरेक्टर सेहत विभाग पंजाब के दिशा-निर्देशों के अनुसार सर्दी और धुंध से छोटे बच्चों, बुजुर्गों, ज्यादा समय से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों और गर्भवती महिलाओं के बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, क्योंकि ये सर्दी में ज्यादा प्रभावित होते हैं। इन शब्दों का प्रकटावा सिविल सर्जन फाजिल्का डॉक्टर कविता सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि सर्दी लगने के कारण अगर समय पर इलाज न करवाया जाए तो कई बार यह खतरे का कारण बन सकता है। जिला एपिडिमोलॉजिस्ट डॉ. सुनीता कंबोज ने बताया कि सुबह और देर शाम या रात को ठंड और घनी धुंध के कारण घरों से बाहर जाने से परहेज करना चाहिए। घनी धुंध के कारण होने वाले हादसे खतरनाक हो सकते हैं। घरों में बंद कमरे में अंगीठी जलाकर कभी भी आग न सेंकी जाए, क्योंकि आग जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है जिससे बंद कमरे में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जो कि सेहत के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। अगर किसी को कोई भी समस्या आती है तो तुरंत डॉक्टरी सलाह के अनुसार इलाज करवाना चाहिए। विनोद कुमार जिला मास मीडिया और सूचना अफसर तथा दिवेश कुमार ने बताया कि छोटे बच्चे इस मौसम में ज्यादा बीमार होते हैं, इसलिए बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने चाहिए और जूते-जुराबें तथा सिर पर टोपी पहननी चाहिए। बुजुर्ग, दमा और सांस की बीमारी के मरीज बहुत ज्यादा ठंड होने पर घरों से बाहर जाने से गुरेज करें और खुराक में भी गर्म चीजें जैसे सूप, चाय, कॉफी और संतुलित खुराक का सेवन करें। शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के लिए थोड़े-थोड़े समय बाद या जरूरत के अनुसार गुनगुना पानी पीना चाहिए।

क्या आप शकरकंद को सिर्फ सब्जी समझते हैं? इसके 6 हैरान कर देने वाले फायदे जानकर चौंक जाएंगे

जब बात हेल्दी और टेस्टी खाने की आती है, तो शकरकंद हर डाइट में स्टार बन जाता है, जिसे स्वीट पोटेटो के नाम से भी जाना जाता है। यह सिर्फ एक सिंपल सब्जी नहीं, बल्कि कई हेल्थ प्रॉब्लम का हल भी है। अगर आप सोच रहे हैं कि कौन इसे रोज खाए?, तो जान लीजिए कि शकरकंद कुछ लोगों के लिए सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए वरदान भी है। दिल के मरीज शकरकंद में पोटैशियम और एंटी इन्फ्लेमेटरी भरपूर होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखता है और दिल को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद हाई फाइबर दिल की बीमारी के खतरों को कम करने में भी मदद करता है, खासकर जब इसे अन्य हाई फाइबर वाले डाइट के साथ मिलाकर खाया जाए। गट हेल्थ वाले के लिए अच्छा शकरकंद में मौजूद फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट आंतों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इसके अलावा, शकरकंद आपके आंतों के माइक्रोबायोम में हेल्दी मात्रा में बैक्टीरिया बनाए रखने में मदद करता है, जिससे गट हेल्थ बेहतर होती है और कोलोन कैंसर का खतरा कम होता है। डायबिटीज के मरीज शकरकंद में पाए जाने वाले एंथोसायनिन के कारण इसका डार्क पर्पल कलर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और हेल्दी गट माइक्रोबायोम को बनाए रखने के लिए अच्छा ऑप्शन है। डायबिटीज के मरीज शकरकंद को आसानी से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। कमजोर विजन वाले लोग शकरकंद में मौजूद बीटा-कैरोटीन के कारण इसका कलर ब्राइट ऑरेंज होता है। जब आप इस एंटीऑक्सीडेंट को खाते हैं, तो यह विटामिन ए में बदल जाता है, जो आपकी आंखों की रोशनी को प्रोटेक्ट करने में मदद करता है। आप भी अपनी डेली डाइट में शकरकंद को जरूर शामिल करें। ब्रेन फंक्शन में सुधार अगर आप डेली डाइट में शकरकंद को शामिल करते हैं, तो इससे ब्रेन फंक्शन में सुधार हो सकता है। इसमें मौजूद एंथोसायनिन सूजन को कम करता है और मेमोरी को बेहतर बनाने का काम करता है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोग शकरकंद बीटा कैरोटीन के सबसे बेहतरीन स्रोतों में से एक है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को इसे जरूर खाना चाहिए। यह आंतों की हेल्थ के लिए अच्छा होता है और शरीर को वायरल इन्फेक्शन से बचने में भी मदद करता है।   

जनवरी के अंतिम सप्ताह शुष्क दिवस पर शराब दुकानें रहेंगी बंद

दुर्ग. आबकारी आयुक्त छत्तीसगढ़ रायपुर की कंडिका क्रमांक 22(1) में दिए गए निर्देशानुसार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिले में शुष्क दिवस घोषित किया गया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के आदेशानुसार 26 जनवरी 2026 गणतंत्र दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले में स्थित समस्त देशी मंदिरा एवं विदेशी मंदिरा की फुटकर दुकानों, रेस्टोरेंट-बार, होटल-बार, क्लब आदि जैसे-एफ.एल.-1(घघ), एफ.एल.-1(घघ-कम्पोजिट), सी.एस.-2(घघ), सी.एस.-2(घघ-कम्पोजिट), सी.एस.-2(ग-अहाता), सी.एस.-2(ग-कम्पोजिट अहाता),एल.एल-1(ख-अहाता), एल.एल-1(ख-कम्पोजिट अहाता), एफ.एल 2(क), 3, 3(क,ग), 4, 4(क), 5,5 (क), 6, 7, 8, सी.एस.1, सी.एस. 1-ग, एफ.एल. 10 एवं भण्डारण भाण्डागार भिलाई शामिल है। प्रशासन द्वारा संबंधित सभी लाइसेंसधारकों को निर्देशित किया गया है कि उक्त आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।