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बस्तर के समग्र विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

नक्सल उन्मूलन के साथ विकास के रोडमैप पर हुई व्यापक चर्चा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की समीक्षा के निर्देश कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष फोकस रायपुर छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय से सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का अंत अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व तथा सुरक्षाबलों के अदम्य साहस के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल हो रही है। यह सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है कि नक्सलवाद की हिंसक विचारधारा फिर कभी सिर न उठा सके और इसके लिए बस्तर अंचल से सतत संवाद, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर अंचल के समग्र विकास पर केंद्रित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का स्पष्ट लक्ष्य बस्तर का सर्वांगीण और संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों के लिए बस्तर के विकास का एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर मिशन मोड में उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने तथा सचिवों को बस्तर क्षेत्र का दौरा कर योजनाओं की जमीनी प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं का तीव्र गति से विस्तार अत्यंत आवश्यक है, ताकि दूरस्थ से दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुँचे और शासन-प्रशासन पर लोगों का भरोसा सुदृढ़ हो। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में स्वस्फूर्त जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बैठक में पेयजल, विद्युतीकरण और मोबाइल कनेक्टिविटी की गहन समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान के लिए सतही जल स्रोतों से आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने, शेष गांवों के शीघ्र विद्युतीकरण तथा दूरस्थ इलाकों में मोबाइल टावरों की स्थापना में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार कार्ड निर्माण, बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाकर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। पर्यटन विकास पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने होम-स्टे को प्रोत्साहन देने, स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत चिन्हित स्थलों के विकास, बस्तर टूरिज्म कॉरिडोर के निर्माण तथा युवाओं को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आईआईटीटीएम ग्वालियर से प्रशिक्षित बस्तर के 32 स्थानीय गाइडों को प्रशिक्षण दिए जाने के पहल की विशेष रूप से सराहना की। बैठक में वनधन केंद्रों के माध्यम से लघु वनोपज के संग्रहण एवं प्रसंस्करण, शिक्षा के क्षेत्र में भवन विहीन विद्यालयों के लिए शीघ्र राशि स्वीकृति, नवोदय एवं पीएमश्री स्कूलों का विस्तार, स्वास्थ्य अधोसंरचना का सुदृढ़ीकरण, मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पीएम-अभीम योजना, बाइक एम्बुलेंस सेवा, सिंचाई परियोजनाएँ, आंगनबाड़ी एवं बालवाड़ी संचालन, ग्रामीण बस योजना तथा रोजगार और आजीविका से जुड़े विभिन्न कार्ययोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने सभी संबंधित विभागों को विशेष केंद्रीय सहायता के लिए आवश्यक प्रस्ताव शीघ्र मुख्य सचिव कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए, ताकि बस्तर के समग्र, संतुलित और टिकाऊ विकास को नई गति मिल सके। बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजु एस., समस्त विभागीय सचिव तथा वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

लालू के ‘लाल’ को NDA का न्योता! विजय सिन्हा के भोज में दिखे तेज प्रताप यादव

पटना मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की सियासत गर्माई हुई है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पटना स्थित आवास पर मंगलवार को आयोजित दही-चूड़ा भोज में सियासी जमावड़ा देखने को मिला। पूर्व मंत्री एवं जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव भी सिन्हा के भोज में पहुंचे, जो राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र रहा। वहीं, तेज प्रताप को एनडीए से न्योता भी मिलने लगा है। नीतीश सरकार के दो मंत्रियों ने इस मौके पर कहा कि अगर वे एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है।   डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। इसमें सूबे के कई नेताओं को न्योता दिया गया था। सिन्हा के भोज में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी समेत अन्य मंत्री, विधायक समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, इसमें चर्चा राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप की रही। क्या बोले विजय सिन्हा और तेज प्रताप पत्रकारों से बातचीत में विजय सिन्हा ने कहा कि ‘एक बिहारी सब पर भारी’ का भाव जगाना है। तेज प्रताप की एनडीए में एंट्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि आने वाले भविष्य में पता चल जाएगा। वहीं, जेजेडी चीफ ने भी इस पर कहा, “पता चल जाएगा, अभी क्यों बताना है।” तेज प्रताप ने कहा कि दही-चूड़ा भोज का आमंत्रण दिया गया था। हम अपना धर्म निभाने आए हैं। नेता लोग मिलते जुलते रहते हैं राजनीति अलग है। तेज प्रताप को एनडीए में आने का न्योता? रिपोर्ट्स के अनुसार, नीतीश सरकार में मंत्री एवं हम सुप्रीमो जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा कि तेज प्रताप यादव एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत है। हालांकि, यह उनकी मर्जी के ऊपर निर्भर करता है। मंत्री रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप के एनडीए में आने पर उनका स्वागत करने की बात कही। दरअसल, लालू परिवार और आरजेडी से बेदखल होने के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नाम से नई पार्टी बनाई थी। उन्होंने हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर प्रत्याशी भी उतारे। हालांकि, जेजेडी एक भी सीट नहीं जीत पाई। चुनाव के बाद तेज प्रताप ने नीतीश सरकार को अपना नैतिक समर्थन दे दिया। इसके बाद से उनकी एनडीए नेताओं से नजदीकी की चर्चा चलती रही है। अब तेज प्रताप के भोज पर निगाहें तेज प्रताप यादव ने भी बुधवार को दही-चूड़ा भोज रखा है। पिछले दिनों वे विजय सिन्हा को निमंत्रण देने उनके आवास पर भी पहुंचे थे। उन्होंने एनडीए और महागठबंधन के कई नेताओं को दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया है। उनके यहां कौन-कौन नेता पहुंचते हैं। ऐसे में सबकी निगाहें उनके भोज पर टिक गई हैं।  

डिजिटल शिक्षा से छात्राओं को संबल, योगी सरकार के अभियान को नई उड़ान

समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच हुआ एमओयू, दो बालिका विद्यालयों को दिए गए टैबलेट पायलट प्रोजेक्ट के रूप में गोरखपुर और महाराजगंज के सर्वोदय बालिका विद्यालयों से पहल की शुरुआत लखनऊ, छात्राओं के समावेशी विकास, डिजिटल साक्षरता और तकनीकी सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसके तहत मंगलवार को गोमती नगर स्थित भागीदारी भवन में मदद फाउंडेशन के सहयोग से समन्वय बैठक और टैबलेट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज कल्याण विभाग और मदद फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। हर बालिका विद्यालय को 20–20 टैबलेट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा के डिजिटलीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके तहत कार्यक्रम में जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय, गोरखपुर और महाराजगंज जनपदों के प्रधानाचार्यों को कुल 40 टैबलेट प्रदान किए गए। प्रत्येक विद्यालय को 20–20 टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसकी सफलता के आधार पर अन्य विद्यालयों में टैबलेट वितरण का दायरा बढ़ाया जाएगा। ‘डिजिटल शिक्षा समय की अनिवार्य आवश्यकता’ इस अवसर पर समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण और मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि उपस्थित रहे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज समय की अनिवार्य आवश्यकता है। तकनीकी संसाधनों के माध्यम से छात्राओं को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भी बनेंगी। उन्होंने इस पहल को बालिकाओं के सशक्तिकरण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ एवं डिजिटल इंडिया की भावना के अनुरूप बताया। योगी सरकार का शिक्षा व महिला सशक्तिकरण मॉडल कार्यक्रम में बताया गया कि योगी सरकार द्वारा स्मार्ट क्लास, ई-कंटेंट, टैबलेट व डिजिटल उपकरण कौशल व करियर उन्मुख प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राओं को नई तकनीक से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। लक्ष्य यह है कि बालिकाएं केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से दक्ष और आत्मनिर्भर नागरिक बन सकें। मदद फाउंडेशन के फाउंडर राजेश मणि ने समाज कल्याण विभाग के साथ इस सहयोग को सामाजिक उत्थान और शिक्षा के क्षेत्र में एक सार्थक प्रयास बताया। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह, उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह, जे. राम सहित विभागीय अधिकारी एवं मदद फाउंडेशन की टीम उपस्थित रही।

अब और मरीजों को मिलेगा मुफ्त इलाज, दिल्ली सरकार ने लागू किया नया कदम

नई दिल्ली रेखा गुप्ता सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मुफ्त इलाज की सुविधा का फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने EWS (आर्थिक रूप से कमजोर) वर्ग की सालाना आय सीमा तो बढ़ाकर 5 लाख रुपए तक कर दिया गया है। राज्य सरकार ने बताया कि निम्न आय वर्ग के लोगों को यह सुविधा सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर दी गई जमीन पर बने शहर के अस्पतालों में मिलेगी। जिसके बाद हाई कोर्ट ने भी दिल्ली सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया।   9 साल पहले लिया था स्वतः संज्ञान इस दौरान उच्च न्यायालय ने बताया कि सक्षम अथॉरिटी ने EWS सीमा की सालाना आय 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने को सहमति दे दी है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने यह बात 8 जनवरी को रेखा गुप्ता सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कही। कोर्ट सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर की कमी पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू हुए एक मामले की सुनवाई कर रहा था। सालाना 5 लाख रुपए तक की आय वाले उठा सकेंगे फायदा कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'दिल्ली में स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के इच्छुक सभी व्यक्ति अब जरूरी शर्तों को पूरा करने के बाद 5 लाख रुपए की निम्न आय वर्ग सीमा के तहत लाभ पाने के हकदार होंगे। सालाना आय की सीमा में यह बढ़ोतरी दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों और रियायती दरों पर आवंटित ज़मीन पर बने सभी पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों पर लागू होगी, जहां EWS नियम लागू हैं।' इससे पहले तक वार्षिक इतनी इनकम वालों को ही मिलता था फायदा अपने फैसले में कोर्ट ने राज्य सरकार व संबंधित विभागों को इस बढ़ोतरी का पर्याप्त प्रचार करने का निर्देश भी दिया ताकि नागरिकों को इसके बारे में पता चले और वे इसका लाभ उठा सकें। बेंच को बताया गया कि डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज़ ने कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए 2 जनवरी को EWS की सालाना आय सीमा को 2.20 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का आदेश पारित किया था। कोर्ट ने यह बात साल 2017 में स्वतः संज्ञान लेते हुए किए एक मामले की सुनवाई के दौरान कही, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज में कमी की वजह से साल 2017 में शुरू किए गए एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने पहले AIIMS के डायरेक्टर को डॉ. एसके सरीन समिति की सिफारिशों को लागू करने की जिम्मेदारी लेने का निर्देश दिया था, जिसने स्वास्थ्य प्रणाली में कई कमियों की ओर इशारा किया था, जिसमें खाली पद, महत्वपूर्ण फैकल्टी सदस्यों की कमी और इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इस मामले में वकील अशोक अग्रवाल को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया था।  

443 IAS अफसरों की संपत्ति जानकारी लंबित, यूपी सरकार ने जारी किए कड़े निर्देश

लखनऊ योगी सरकार ने आईएएस अफसरों द्वारा संपत्तियों का ब्योरा देने में हिलाहवाली करने को गंभीरता से लिया है। जानकारी नहीं देने आईएएस अफसरों को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। यूपी कॉडर के 683 आईएएस अफसरों में 240 ने संपत्तियों की जानकारी दी है ओर 443 ने स्पैरो पोर्टल पर चल-अचल संपत्तियों की जानकारी नहीं दी है। नियुक्ति विभाग ने इस संबंध में गोपनीय रूप से आंतरिक अलर्ट जारी किया है।   आईएएस अधिकारियों को प्रत्येक वर्ष अर्जित की गई संपत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से स्पैरो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना होता है। वर्ष 2025 में अर्जित संपत्तियों की जानकारी अधिकारियों को 31 जनवरी तक पोर्टल पर अपलोड करनी है। सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि कई अधिकारी संपत्तियों का विवरण देने में लापरवाही बरत रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग की ओर से आंतरिक अलर्ट जारी किया गया है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, कुल 443 आईएएस अधिकारियों में से 12 ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर ड्राफ्ट के रूप में भर तो दिया है, लेकिन उसे अब तक अंतिम रूप से सबमिट नहीं किया है। नियुक्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद जानकारी न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। दो पीसीएस अफसरों की राज्य निर्वाचन आयोग में तैनाती राज्य सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग में दो पीसीएस अधिकारियों की तैनाती की है। यह तैनाती पंचायत चुनाव की तैयारियों को देखते हुए की गई है। अविनाश गौतम एसडीएम कन्नौज और अभिषेक वर्मा एसडीएम रायबरेली को राज्य निर्वाचन आयोग में तैनाती दी गई है।  

गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश में निहित संभावनाओं की सिर्फ बात नहीं करते, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति से संभावनाओं के अनुरूप परिणाम भी देते हैं। सरकार की इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश माफियामुक्त, दंगामुक्त होकर विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।   सीएम योगी मंगलवार अपराह्न गोरखपुर महोत्सव के औपचारिक समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। रामगढ़ताल के सामने चंपा देवी पार्क में महोत्सव के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ति से प्रदेश में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। सरकार के प्रयासों से नौजवानों को रोजगार मिल रहा है। अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। उद्यमियों, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण में कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। बहन-बेटियों को मुस्कुराते हुए स्कूल-बाजार जाने का माहौल मिल रहा है। आज किसी ने बहन-बेटियों की राह में बाधा डालने का दुस्साहस किया तो अगले चौराहे पर यमराज उसका टिकट काटने को तैयार मिलेंगे। यह तभी संभव हो रहा है जब सरकार में जनसेवा करने की दृढ़ इच्छाशक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में सबसे बड़ी ताकत धैर्य और अनुशासन है। हमने कभी धैर्य नहीं खोया। उपेक्षा हुई तो संघर्ष का रास्ता अपनाया। इंसेफेलाइटिस की समस्या पर तत्कालीन सरकारों द्वारा की जा रही उपेक्षा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि तब हमने सड़कों पर आंदोलन किया और जब सरकार में आए तो पूरी जिम्मेदारी की भावना के साथ दो वर्षों में इंसेफेलाइटिस का खात्मा कर दिखाया। विकास की नई बुलंदियों पर गोरखपुर और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर और उत्तर प्रदेश विकास की नई बुलंदियों पर है। 2017 के पहले भी जब देश आगे बढ़ रहा था तो गोरखपुर पीछे छूट गया था। तुलना की जाए तो 2017 के पहले और इसके बाद के उत्तर प्रदेश और गोरखपुर में जमीन-आसमान का अंतर दिखेगा। 2017 तक प्रदेशभर की तरह गोरखपुर भी उपद्रव, गुंडागर्दी की चपेट में था। गुंडा टैक्स वसूला जाता था। सड़कें जर्जर थीं, बिजली नहीं मिलती थी। गंदगी, बीमारी और इंसेफेलाइटिस का कहर था। मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक सीएम योगी ने कहा कि मच्छर और माफिया एक दूसरे के पूरक होते हैं। एक शरीर को अस्वस्थ करता है तो दूसरा समाज को। जब समाज हर प्रकार की स्वच्छता शारीरिक और सामाजिक, के प्रति जागरूक नहीं होता है तो उसे दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के अभियान का परिणाम धरातल पर मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की वर्तमान और पूर्व स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी गोरखपुर माफियाराज और गुंडाराज के लिए कुख्यात था। प्रदेश की भी यही स्थिति थी। हर दूसरे-तीसरे दिन प्रदेश में दंगा होता था। व्यापारी, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। व्यापारी गुंडा टैक्स देने को मजबूर थे। इंसेफेलाइटिस बीमारी चरम पर थी और नौनिहालों को इससे बचाने के लिए कोई पुरसाहाल नहीं था। नौजवान पलायन को मजबूर थे। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की उत्तर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कायाकल्प के लिए जो अभियान शुरू किया, उसके परिणाम आज जमीनी धरातल पर नजर आ रहे हैं। आठ साल बाद आने वाले पहचान नहीं पाएंगे गोरखपुर सहित यूपी के शहरों को मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ साल पहले यहां आया व्यक्ति यदि आज गोरखपुर आएगा तो यहां विकास से आए बदलाव के चलते शहर को पहचान नहीं पाएगा। ऐसी ही स्थिति अयोध्या, काशी, प्रयागराज को लेकर होगी। आठ साल बाद लखनऊ आए एक व्यक्ति द्वारा बताए गए संस्मरण को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह व्यक्ति लखनऊ को पहचान ही नहीं पाए। आठ साल पहले जब वह लखनऊ आए थे तब बहुत गंदगी थी, सड़कें संकरी थीं। और, उन्हें सूर्यास्त के बाद घर से न निकलने की सलाह दी गई थी। अब वह देर रात में भी भयमुक्त होकर निकल रहे हैं। बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बदलाव ही समृद्धि और खुशहाली का आधार है। इसी मंत्र को अपनाते हुए आज जब भारत आगे बढ़ रहा है तो उत्तर प्रदेश और गोरखपुर भी पीछे नहीं है। आज बिना मांगे विकास की योजनाएं लोगों तक पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि पहले कोई सोचता था कि क्या गोरखपुर का खाद कारखाना चल पाएगा, क्या गोरखपुर में एम्स बन पाएगा या क्या बीआरडी मेडिकल कॉलेज फिर से चिकित्सा का बेहतरीन केंद्र बन सकेगा। पर, आज ये सारी बातें हकीकत हैं। कभी अपराध के लिए बदनाम रामगढ़ताल आज बेहतरीन पर्यटन केंद्र बन चुका है। गोरखपुर में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर शानदार मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गोरखपुर में शानदार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर है। यहां फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों का संजाल है। 10 वर्ष पूर्व गोरखपुर से लखनऊ जाने में 8 से 10 घण्टे, अयोध्या और काशी जाने में 6 घण्टे लग जाते थे। आज शानदार रोड कनेक्टिविटी होने से गोरखपुर से लखनऊ की दूरी साढ़े तीन घण्टे में, काशी की दूरी ढाई घण्टे में और अयोध्या की दूरी डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। 2017 के पहले गोरखपुर से सिर्फ एक वायुसेवा थी, वह भी कभी कभार ही मिलती थी। आज गोरखपुर से दिल्ली, मुंबई सहित कई प्रमुख शहरों के लिए हवाई सेवा है और दूरी एक से डेढ़ घण्टे में पूरी हो जाती है। गोरखपुर में हजारों करोड़ रुपये के निवेश से 50 हजार युवाओं को मिली नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा का बेहतर वातावरण बना तो पिछले 8 वर्षों में गोरखपुर में हजारों करोड़ों रुपये का निवेश हुआ और इसके जरिए 50 हजार युवाओं को नौकरी मिली। यदि यह निवेश नहीं होता तो इन युवाओं को पलायन करना पड़ता। जबकि आज उन्हें अपने क्षेत्र में ही नौकरी मिल गई है। पहले गोरखपुर में एक विश्वविद्यालय था, आज चार विश्वविद्यालय हैं। गोरखपुर में प्रदेश सरकार का होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी बन गया है। अटल आवासीय विद्यालय में गरीबों के बच्चों को मुफ्त अत्याधुनिक शिक्षा प्राप्त हो रही है। उपलब्धियां विरासत के साथ विकास यात्रा का शो-केस सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर और प्रदेश की उपलब्धियां विरासत के साथ विकास की यात्रा का शो-केस हैं। इनकी शो-केसिंग … Read more

द्वितीय चरण में 200 सांदीपनि विद्यालयों के लिए 3 हजार 660 करोड़ रुपये की स्वीकृति

शिक्षकों के लिए चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान योजना लागू- 322 करोड़ 34 लाख रुपये की स्वीकृति द्वितीय चरण में 200 सांदीपनि विद्यालयों के लिए 3 हजार 660 करोड़ रुपये की स्वीकृति उज्जैन शहर की जल आवर्धन योजना के लिए 1,133 करोड़ 67 लाख रुपये स्वीकृत राजगढ़ एवं रायसेन जिले की सिचांई परियोजनाओं के लिए 898 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति ग्वालियर व्यापार एवं उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला-2026 में ऑटोमोबाइल विक्रय पर मोटरयान कर में 50% छूट दिये जाने की स्वीकृति मध्यप्रदेश स्पेस टेक नीति-2026 लागू किये जाने की स्वीकृति "मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना पंचम चरण" में तीन वर्षों के लिए 5 हजार करोड़ स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सहित मंत्रि-परिषद के सदस्य बैठक में टैबलेट के साथ शामिल हुए। मंत्रि-परिषद द्वारा शैक्षणिक संवर्ग के सहायक शिक्षक, शिक्षक तथा नवीन शैक्षणिक संवर्ग के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों के लिए 1 जुलाई 2023 अथवा उसके बाद की तिथि से 35 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर, चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान योजना प्रभावशील किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके लिए 322 करोड़ 34 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। द्वितीय चरण में सांदीपनि विद्यालयों के लिए 3 हजार 660 करोड़ रुपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा द्वितीय चरण के लिए 200 सर्वसुविधा युक्त सांदीपनि विद्यालय की स्थापना के लिए अनुमानित व्यय 3 हजार 660 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। द्वितीय चरण के प्रस्तावित विद्यालयों की क्षमता एक हजार से अधिक होगी। उज्जैन शहर की जल आवर्धन योजना के लिए 1,133 करोड़ 67 लाख रुपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सिंहस्थ-2028 के दृष्टिगत उज्जैन शहर की जल आवर्धन योजना लागत 1,133 करोड़ 67 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। सहायक उप निरीक्षक स्व. गौतम के परिवार को 90 लाख रुपये की श्रद्धा निधि स्वीकृत मंत्रि-परिषद द्वारा जिला मऊगंज में हुई घटना में दिवंगत स्व. रामचरण गौतम, सहायक उप निरीक्षक के परिवार को 90 लाख रुपये की श्रद्धा निधि दिये जाने की स्वीकृति दी गयी। उल्लेखनीय है कि दिवंगत स्व. गौतम के परिवार को 10 लाख रुपये की विशेष अनुग्रह राशि पूर्व में 1 अप्रैल 2025 को प्रदान की जा चुकी है। जिला मऊगंज थाना शाहपुर अंतर्गत ग्राम गडरा में एक परिवार के लोगों को समुदाय के लोगों द्वारा बंधक बना लिया गया था। घर के अंदर एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद शव को अभिरक्षा में लेने के दौरान समुदाय द्वारा पुलिस अमले पर हमला कर दिया था। हमले में गौतम ने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए कर्तव्य का पालन किया और वीर गति को प्राप्त हुए। ग्वालियर व्यापार एवं उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला-2026 में ऑटोमोबाइल विक्रय पर मोटरयान कर में 50% छूट दिये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा ग्वालियर व्यापार मेला-2026 एवं उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला 2026 में ऑटोमोबाइल विक्रय पर मोटरयान कर में 50 प्रतिशत छूट दिये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। सोलर सह स्टोरेज प्रदाय परियोजना की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तीन सोलर सह स्टोरेज प्रदाय परियोजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृति अनुसार रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही परियोजना के अंतर्गत सोलर-सह चार घंटे 300 मेगावाट, सोलर सह छह घंटे 300 मेगावाट एवं सोलर-सह 24 घंटे 200 मेगावाट विद्युत प्रदाय की सिंगल साइकिल चार्जिंग आधारित ऊर्जा भंडारण परियोजना की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस परियोजना से राज्य में पीक डिमांड के समय भी सस्ती, स्वच्छ एवं भरोसेमंद विद्युत उपलब्ध हो सकेगी। सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उपलब्ध विद्युत केवल दिन के समय उपलब्ध रहती है और इसकी उपलब्धता मौसम पर निर्भर करती है। इसी प्रकार पवन ऊर्जा परियोजनाओं से ऊर्जा की उपलब्धता भी अनिश्चित रहती है, क्योंकि यह पवन की उपलब्धता एवं गति पर निर्भर करती है। मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी, ग्रिड स्थिरता की आवश्यकता, पीक-डिमांड प्रबंधन तथा विद्युत की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा आधारित ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं की स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण है। राजगढ़ एवं रायसेन जिले की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 898 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा राजगढ़ एवं रायसेन जिले की सिंचाई परियोजनाओं के लिए 898 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील की मोहनपुरा विस्तारीकरण (सारंगपुर) सिंचाई परियोजना लागत 396 करोड़ 21 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे सारंगपुर तहसील के 26 ग्रामों की 11,040 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी, जिसमें 10 हजार 400 कृषक परिवार लाभांवित होंगे। मंत्रि-परिषद द्वारा रायसेन जिले की सुल्तानपुरा उद्वहन सिंचाई परियोजना लागत 115 करोड़ 99 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इससे सुल्तानपुर तहसील के 20 ग्रामों की 5,700 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई उपलब्ध होगी, इसमें 3,100 कृषक परिवारों को लाभ होगा। रायसेन जिले की बरेली तहसील की बारना उद्वहन सिंचाई परियोजना लागत 386 करोड़ 22 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इससे बरेली तहसील के 36 ग्रामों की 15 हजार हैक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी, जिसमें 6,800 कृषक परिवार लाभांवित होंगे। मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति-2026 लागू किये जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में उपलब्ध 322 औद्योगिक पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और 31 गीगावाट की बिजली आपूर्ति, उत्कृष्ट शैक्षणिक सस्थानों आदि संसाधनों एवं अनुकुल वातावरण के दृष्टिगत अंतरिक्ष-ग्रेड विनिर्माण की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में म.प्र. स्पेसटेक नीति-2026" लागू की जाने की स्वीकृति दी। यह नीति उपग्रह निर्माण, भू स्थानिक विश्लेषण और डाउन स्ट्रीम अनुप्रयोगों में नवाचार को बढ़ावा देगी। प्रदेश में आगामी 5 वर्ष में 1 हजार करोड़ का निवेश और लगभग 8 हजार का रोजगार सृजन होगा। इस पर अनुमानित वित्तीय भार 628 करोड़ रूपये आयेगा। इस नीति के लागू होने से मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (स्पेसटेक) क्षेत्र में एक मजबूत केंद्र बनने की ओर अग्रसर होगा। इस नीति के लागू होने से राज्य अंतरिक्ष उद्योग को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचे और अनुसंधान सहायता के माध्यम से अपनी रणनीति बना सकेगा। यह नीति उपग्रह निर्माण, भू-स्थानिक विश्लेषण, और डाउन स्ट्रीम अनुप्रयोगों (जैसे कृषि, आपदा … Read more

युवा तीरंदाजों ने बढ़ाया ओडिशा का मान, 4 स्वर्ण सहित 10 पदकों की शानदार उपलब्धि

भुवनेश्वर ओडिशा के युवा तीरंदाजों ने 69वें नेशनल स्कूल गेम्स अंडर-17 तीरंदाजी चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य का नाम रोशन किया है। झारखंड के रांची में 6 से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित इस प्रतियोगिता में ओडिशा ने कुल 10 मेडल जीते, जिसमें 4 गोल्ड, 5 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज शामिल हैं। ओडिशा ओवरऑल रनर-अप रहा, जबकि महाराष्ट्र पहले और झारखंड तीसरे स्थान पर रहा। ओडिशा टीम को स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग के तहत ओडिशा राज्य स्कूल खेल संघ द्वारा मैदान में उतारा गया था। राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले 18 खिलाड़ियों में 11 लड़कियां और 7 लड़के शामिल थे। इस सफलता से राज्य में युवा खेल प्रतिभाओं को नई प्रेरणा मिली है और वे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित हुए हैं। मयूरभंज जिले के बारीपदा स्थित यूजीपी गवर्नमेंट हाई स्कूल के कक्षा 10 के छात्र रोहित कुमार मरांडी टूर्नामेंट के स्टार साबित हुए। उन्होंने 30-मीटर इंडियन राउंड, 30-मीटर ओलंपिक राउंड और मिक्स्ड टीम इवेंट में तीन गोल्ड मेडल जीते, साथ ही ओवरऑल 30 मीटर और 20 मीटर कैटेगरी में एक सिल्वर भी हासिल किया। भुवनेश्वर के केआईएसएस स्कूल की रेशमा मल्लिक ने रोहित के साथ मिलकर 30-मीटर मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड जीता। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया पर रोहित और रेशमा को बधाई देते हुए कहा कि इनकी सफलता ओडिशा के लिए गर्व की बात है और उन्होंने चार गोल्ड मेडल जीतकर राज्य का मान बढ़ाया। क्योंझर जिले की सुनीता नाइक ने 60-मीटर रिकर्व राउंड में सिल्वर और 60-मीटर व्यक्तिगत इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसी कैटेगरी में सबित्री पात्रो (क्योंझर), टेनिश मेहर (सुंदरगढ़) और पंखी भात्रा (भुवनेश्वर) ने भी सिल्वर मेडल जीतकर ओडिशा की मेडल तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यह प्रदर्शन ओडिशा की खेल नीतियों और युवा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की सफलता को दर्शाता है। राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिससे स्कूली स्तर पर प्रतिभाएं निखर रही हैं। ओडिशा के युवा तीरंदाजों की यह जीत भविष्य में ओलंपिक और एशियाई खेलों में भी राज्य का प्रतिनिधित्व मजबूत करने की उम्मीद जगाती है।

प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने, 5 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य

  हाई स्किल रोजगार के सृजन की ओर बढ़ रहा है प्रदेश, थमेगा प्रतिभा पलायन लखनऊ,  उत्तर प्रदेश तेजी से विकसित होती अवसंरचना के कारण वैश्विक कंपनियों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यह प्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) निवेश की दृष्टि से एक उभरता हुआ गंतव्य बन गया है। पिछले नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश नॉलेज और सर्विस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर भी मजबूती से अपने कदम बढ़ा रहा है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है की आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश वैश्विक कंपनियों का एक बहुत बड़ा केंद्र बनेगा। प्रदेश में 1000 से अधिक जीसीसी स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसके माध्यम से प्रदेश के पांच लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।    उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 के माध्यम से योगी सरकार ने जिस नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण को अपनाया है उससे वैश्विक कंपनियों की सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है। इनमें नियमों की अनिश्चितता और प्रक्रियाओं में देरी सबसे प्रमुख थी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने स्पष्ट ढांचा तैयार किया है, जिससे निवेशकों को शुरुआत से ही नियम शर्तें और दायित्व समझ में आ सकें। इससे भरोसे का वातावरण बना है, निर्णय लेने की गति तेज हुई है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में इस समय लगभग 90 जीसीसी हैं। भूमि आधारित प्रोत्साहन, निवेश की शुरुआती लागत को घटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार की सोच है कि जब निवेशक को शुरुआती चरण में संरचनात्मक सहयोग मिलेगा तो वह लंबे समय तक प्रदेश से जुड़ा रहेगा। यही कारण है कि अस्थायी ऑफिस या किराए की व्यवस्था के स्थान पर स्थायी औद्योगिक ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। यह मॉडल प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को मजबूत और स्थिर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रदेश सरकार का जोर केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं है, इसके समयबद्ध क्रियान्वयन पर भी है। इसके लिए जवाबदेही तय की गई है, जिससे परियोजनाएं तय समय में पूरी हो सकें। निवेशकों की नजर में उत्तर प्रदेश अब परिणाम देने वाला राज्य है जहाँ पर निवेश करना फायदेमंद है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के जरिये प्रदेश में हाई वैल्यू रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, डेटा और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त होने का रास्ता मिल रहा है। इससे न केवल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता सुदृढ़ होगी बल्कि प्रतिभा पलायन की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रूप से नियंत्रण संभव होगा। विशेष रूप से कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित कर सरकार क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। जब वैश्विक कंपनियां इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का निर्देश, स्वास्थ्य उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनकी निरंतर मॉनिटरिंग हो

स्वास्थ्य उपकरणों की उपलब्धता के साथ उपयोग की सतत मॉनिटरिंग करें : उप मुख्यमंत्री शुक्ल स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन की उपलब्धता और अधोसंरचना विकास कार्यों की समीक्षा की भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन की उपलब्धता और अधोसंरचना विकास कार्यों में आवश्यक निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ब्यौहारी, बुढ़ार एवं उमरिया क्षेत्र में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने नर्सिंग शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु नर्सिंग टीचर्स के 59 राजपत्रित पदों की मांग शीघ्र लोक सेवा आयोग को अग्रेषित करने के निर्देश दिए। सिंगरौली नर्सिंग कॉलेज के लिए भूमि चिन्हांकन एवं टेंडर प्रक्रिया समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्वास्थ्य उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उनके उपयोग की सतत मॉनिटरिंग करने पर बल दिया। चिकित्सकों की पदोन्नति हेतु ‘लोक सेवा पदोन्नति नियम’ से छूट प्राप्त करने संबंधी कार्यवाही सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रदेश के सुपर स्पेशिलिटी अस्पतालों में कार्यरत मेडिकल टीचर्स के वेतन एवं भत्तों की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश दिए। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों में रिक्त ट्यूटर/डिमॉन्स्ट्रेटर पदों पर सीधी भर्ती की कार्यवाही करने के निर्देश दिए।उन्होंने रक्ताधान सेवाओं को और बेहतर बनाने हेतु प्रदेश में एन.ए.टी. सुविधा का विस्तार करने के निर्देश दिए। बॉण्ड चिकित्सकों के लिए एकीकृत ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने एवं ऑनलाइन एन.ओ.सी. जारी करने की प्रक्रिया का क्रियान्वयन करने के निर्देश भी दिए गए। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पूर्व की निवेश नीति से संबंधित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। चिकित्सा महाविद्यालयों में आउटसोर्स पदों की स्वीकृति के मानकों में सुधार कर स्किल्ड/सेमी-स्किल्ड कार्मिकों का प्रावधान करने हेतु प्रस्ताव मंत्रि-परिषद् के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने ग्वालियर चिकित्सा महाविद्यालय में सी.टी.वी.एस. विभाग (हार्ट बायपास) की स्थापना के लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला अस्पतालों में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने को कहा गया। बैठक में आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी, एम.डी. एम.पी.पी.एच.एस.सी.एल. मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।