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22 जनवरी 2026 का राशिफल: ग्रहों की स्थिति में बदलाव, क्या कहता है आपके सितारों का हाल

मेष राशि  दैनिक लव राशिफल में मेष राशि वालों के लिए दिन मिलेजुले असर वाला है, पुरानी बातें तो रहेंगी, पर आकर्षण और आत्मविश्वास रिश्ते में खास प्रभाव डाल सकता है। पार्टनर आपकी बातों को गंभीरता से सुनेंगे और उनके समर्थन से आपका मन हल्का हो सकता है।  वृषभ राशि  दैनिक लव राशिफल में वृष राशि वालों के लिए आज पार्टनर के साथ बातचीत गहरी तो होगी, लेकिन साथ ही साथ वो अर्थपूर्ण भी लगेगी। कोई पुराना मनमुटाव खत्म होने के संकेत मिलेंगे। पार्टनर का सहयोग आपकी भावनात्मक जरूरतों को पूरा कर सकता है और रिश्ता सहज महसूस हो सकता है।   मिथुन राशि  दैनिक लव राशिफल में मिथुन राशि वालों के लिए आज बातचीत अच्छी रहने वाली है, जो प्यार को जीतने के लिए बेहतर साबित हो सकता है। आपके शब्द रिश्ते को एक नई दिशा देंगे। पसंद का व्यक्ति आपकी सोच से प्रभावित हो सकता है।    कर्क राशि  दैनिक लव राशिफल में कर्क राशि वालों के लिए आज आपकी भावनाएं थोड़ी गहरी रह सकती हैं और सामने वाला उन्हें बहुत अच्छे से समझ पाएगा। रिश्ते में आराम और अपनापन महसूस हो सकता है। किसी पुराने विषय पर खुलकर बात हो सकती है, जिससे मन का बोझ हल्का हो सकता है।    सिंह राशि दैनिक लव राशिफल में सिंह राशि वालों के लिए आज दिन रोमांस और उत्साह से भरा रह सकता है लेकिन ख्याल रखें आपका जोश दूसरे के लिए परेशानी न बन पाए। आपकी मौजूदगी पार्टनर के लिए खास मायने रखेगी। किसी को लेकर मन में आकर्षण है, तो आज उसकी ओर से अच्छा व्यवहार मिलेगा।    कन्या राशि  दैनिक लव राशिफल में कन्या राशि वालों के लिए आज रिश्ते में संतुलन बनाए रखना आपके लिए महत्वपूर्ण रह सकता है। पसंद का व्यक्ति आपकी सोच और व्यवहार को समझने की कोशिश कर सकता है।  तुला राशि दैनिक लव राशिफल में तुला राशि वालों के लिए आज का दिन भावनात्मक नज़दीकियों के लिए अनुकूल है। आपकी कोई छोटी सी पहल रिश्ते को खूबसूरत बना देगी। पार्टनर आपकी भावनाओं को बिना कहे भी समझ पाएंगे।    वृश्चिक राशि  दैनिक लव राशिफल में वृश्चिक राशि वालों के लिए भावनाएं गहरी होने का दिन बन रहा है, जिससे आप रिश्ता पूरी निष्ठा से निभाना चाहेंगे। पार्टनर के साथ किसी गंभीर विषय पर बातचीत हो सकती है जो रिश्ते को मजबूत बनाएगी।   धनु राशि दैनिक लव राशिफल में धनु राशि वालों के लिए आज का दिन कुछ खुशनुमा रह सकता है और रिश्ते में उत्साह दिखेगा। पार्टनर के साथ किसी आउटिंग या प्लान की संभावना है। पसंद का व्यक्ति आपकी खुली सोच और ईमानदारी से आकर्षित हो सकता है।   मकर राशि  दैनिक लव राशिफल में मकर राशि वालों के लिए आज रिश्तों में स्थिरता और समझ बढ़ने का समय होगा। तनाव या दूरी थी, तो अब धीरे धीरे कम होने लगेगी। किसी व्यक्ति से बात करने का अच्छा मौका मिलेगा।  कुंभ राशि  दैनिक लव राशिफल में कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन दिल की बात खुले मन से कह पाने में मदद कर सकता है। सामने वाला आपकी भावनाओं को महत्व देगा। रिश्ते में कोई महत्वपूर्ण कदम उठाने का मौका मिल सकता है।  मीन राशि  दैनिक लव राशिफल में मीन राशि वालों के लिए आज दिल मुलायम रह सकता है और भावनाओं में गहराई महसूस होगी। पार्टनर आपकी देखभाल और समझ से संतुष्ट होंगे। किसी प्रिय व्यक्ति से दिल की बात साझा करने का सही समय है।

टैरिफ केस में ट्रंप फंसे, कोर्ट के एक आदेश से अमेरिका पर भारी आर्थिक मार

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनके प्रशासन के खिलाफ फैसला देता है, तो अमेरिका को लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) की रकम वापस करनी पड़ सकती है। उन्होंने माना कि ऐसा करना आसान नहीं होगा और इससे कई लोगों को नुकसान भी हो सकता है। ट्रंप ने कहा,“मुझे नहीं पता सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला देगा। अब तक हमने टैरिफ के जरिए सैकड़ों अरब डॉलर की कमाई की है। अगर हम केस हार गए, तो हमें पूरी कोशिश करनी पड़ेगी कि वह पैसा वापस किया जाए।” राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि टैरिफ सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि इससे अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा में भी बड़ा फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि टैरिफ के कारण देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और अमेरिका की स्थिति दुनिया में बेहतर हुई है। यह मामला इस समय अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अगर अदालत यह तय करती है कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर टैरिफ लगाए, तो सरकार को अरबों डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं। इसी बीच ट्रंप अपने 2026 के पहले विदेशी दौरे पर स्विट्ज़रलैंड के डावोस जा रहे हैं, जहां वे विश्व आर्थिक मंच (WEF) में वैश्विक नेताओं और बड़े उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे। वहां वे अमेरिका की व्यापार नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक भूमिका पर अपनी बात रखेंगे। टैरिफ, ग्रीनलैंड को लेकर बयान और वेनेजुएला के तेल से जुड़े फैसलों के कारण ट्रंप पहले ही कई देशों और सहयोगियों के निशाने पर हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला ट्रंप की आर्थिक और व्यापार नीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा पर वायुसेना प्रमुख की दो टूक: शक्ति के साथ इच्छाशक्ति भी अनिवार्य

नई दिल्ली भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वही देश सुरक्षित रहता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। भारतीय वायुसेना के प्रमुख के अनुसार आर्थिक, कूटनीतिक या तकनीकी शक्ति कितनी भी मजबूत क्यों न हो, यदि उसके पीछे सशक्त सैन्य बल नहीं है, तो कोई भी राष्ट्र दूसरे देशों के दबाव में आ सकता है। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला और इराक इसके ताजा उदाहरण हैं। वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित 22वें सुब्रतो मुखर्जी सेमिनार को संबोधित किया। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि सैन्य शक्ति राष्ट्रीय शक्ति का अंतिम निर्णायक तत्व होती है। इसके बिना कोई भी देश सुरक्षित नहीं रह सकता। सेमिनार को संबोधित करते हुए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वेनेजुएला और इराक इसके उदाहरण हैं, जहां कमजोर सैन्य स्थिति के कारण बाहरी हस्तक्षेप और दबाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि अंततः वही देश सुरक्षित रहता है जिसके पास मजबूत और सक्षम सैन्य शक्ति होती है। एयर चीफ मार्शल सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सिर्फ सैन्य शक्ति होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रयोग करने की इच्छाशक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। यदि कोई देश केवल संयम दिखाता है, लेकिन उसकी शक्ति स्पष्ट नहीं है, तो उस संयम को कमजोरी के रूप में देखा जाता है। वहीं, जब कोई देश मजबूत होकर संयम दिखाता है, तभी वह संयम क्षमता और आत्मविश्वास के रूप में स्वीकार किया जाता है। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वर्षों में जिस सैन्य शक्ति ने अपेक्षित परिणाम दिए हैं, वह हवाई शक्ति है। चाहे संघर्ष वाले क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान हो, आतंकवादी ढांचों और उनके संरक्षकों पर सटीक प्रहार करना हो, या फिर कुछ ही घंटों में पाकिस्तान के बेस व दुश्मन के ठिकानों पर कार्रवाई कर स्पष्ट संदेश देना हो, इन सभी मामलों में हवाई शक्ति ने निर्णायक भूमिका निभाई है। वायु सेना प्रमुख ने हवाई शक्ति को कम समय में तेज, सटीक और प्रभावी कार्रवाई करने की क्षमता वाला बताया। अपनी इसी क्षमता के कारण हवाई शक्ति आधुनिक सैन्य रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि भारत को एक प्रभावशाली और विश्वसनीय शक्ति के रूप में स्थापित रहना है, तो वायु शक्ति पर निरंतर ध्यान और निवेश आवश्यक है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायुसेना के संस्थापक एयर मार्शल सुब्रतो मुखर्जी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और कठिन परिस्थितियों में भी वायुसेना की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि सुब्रतो मुखर्जी की दूरदृष्टि ने भारतीय वायुसेना को सही दिशा दी और जैसा कहा जाता है कि अच्छी शुरुआत आधी सफलता होती है। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि आज भारतीय वायुसेना पहले से कहीं बेहतर स्थिति में है और संसाधन भी लगातार बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वे अपने पूर्ववर्ती वायुसेना प्रमुखों की तुलना में अधिक सक्षम वातावरण में कार्य कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आत्मसंतोष से बचना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय वायुसेना को पिछली सफलताओं पर नहीं रुकना चाहिए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए स्वयं को और अधिक सशक्त, आधुनिक और तैयार बनाना होगा। यह आयोजन सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा ‘राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यताओं’ पर मंथन किया गया था।

लुधियाना में बदलाव, नगर निगम के नए कमिश्नर ने संभाली कमान

लुधियाना बुधवार, 21 जनवरी को बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 26 आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में  लुधियाना नगर निगम के कमिश्नर को भी बदल दिया गया है। सरकारी आदेशों के अनुसार, नगर निगम लुधियाना के मौजूदा कमिश्नर आदित्य डेचलवाल का तबादला कर उन्हें डिप्टी कमिश्नर रोपड़ नियुक्त किया गया है। वहीं, लुधियाना नगर निगम की कमान अब नीरू कत्याल को सौंपी गई है। अब लुधियाना नगर निगम के नए कमिश्नर नीरू कत्याल होंगे। बता दें कि नीरू कत्याल वर्तमान में पुड्डा (PUDA) में मुख्य प्रशासक के पद पर कार्यरत थीं।   नीरू कत्याल इससे पहले नगर निगम लुधियाना में एडिशनल कमिश्नर के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा वह ग्लाडा (GLADA) की चीफ एडमिनिस्ट्रेटर भी रह चुकी हैं। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें लुधियाना जैसे बड़े शहर की जिम्मेदारी सौंपी है।  इस तबादला सूची को आगामी समय में प्रशासनिक कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

अरावली व अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: नई परिभाषा पर रोक बरकरार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 जनवरी) को कहा कि अवैध खनन से अपूरणीय क्षति हो सकती है, इसलिए वह अरावली में खनन और संबंधित मुद्दों की व्यापक एवं समग्र जांच के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की एक समिति गठित करेगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी और न्यायमित्र के. परमेश्वर को चार सप्ताह के भीतर खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने का निर्देश दिया, ताकि विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जा सके। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि समिति इस न्यायालय के निर्देशन और निगरानी में कार्य करेगी।   उच्चतम न्यायालय ने अपने उस आदेश को भी विस्तारित किया, जिसमें अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार करने वाले 20 नवंबर के निर्देशों को स्थगित रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि उस परिभाषा पर रोक जारी रहेगी। सुनवाई के दौरान न्यायालय को सूचित किया गया कि छिटपुट स्थानों पर अवैध खनन हो रहा है, और पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया कि इस तरह का कोई भी अनधिकृत खनन नहीं होगा। SC ने स्वतः संज्ञान लिया था अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर उठे विवाद के बीच, उच्चतम न्यायालय ने ‘अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा तथा उससे जुड़े मुद्दे’ शीर्षक से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। अरावली की नई परिभाषा को लेकर जारी बवाल के बीच, न्यायालय ने पिछले साल 29 दिसंबर को अपने 20 नवंबर के उन निर्देशों को स्थगित कर दिया था, जिनमें इन पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार किया गया था। कोर्ट ने क्या कहा था? इन निर्देशों में अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा स्वीकार की गई थी। न्यायालय ने कहा था कि कुछ गंभीर अस्पष्टताओं का समाधान ज़रूरी है, जिनमें यह आशंका भी शामिल है कि 100 मीटर ऊंचाई और पहाड़ियों के बीच 500 मीटर की दूरी के मानक से अरावली का बड़ा हिस्सा पर्यावरण संरक्षण से बाहर हो सकता है। न्यायालय ने 20 नवंबर को अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की एक समान परिभाषा को स्वीकार कर लिया था और विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने तक दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैले इसके क्षेत्रों के भीतर नए खनन पट्टे देने पर प्रतिबंध लगा दिया था।  

राज्यपाल ने नहीं पढ़ा केंद्र पर कटाक्ष, CM पिनाराई विजयन ने पूरा किया भाषण

तिरुवनंतपुरम केरल विधानसभा में मंगलवार को एक असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के संबोधन समाप्त करने के तुरंत बाद आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण को पूरी तरह नहीं पढ़ा। इसके बाद सीएम ने खुद राज्यपाल द्वारा छोड़े गए भाषण के अंशों को पढ़कर सदन के पटल पर रख दिया। राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार की आलोचना से जुड़े कुछ हिस्से न पढ़े जाने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा ऐतराज जताया और स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल द्वारा अप्रूव पूरा भाषण ही सरकार की नीति घोषणा है, जिसे बदला नहीं जा सकता।   मुख्यमंत्री के विरोध के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो अंश राज्यपाल ने नहीं पढ़े, उन्हें पढ़ा हुआ ही माना जाए और मंत्रिमंडल से स्वीकृत पूरे भाषण को ही आधिकारिक रूप से सदन का हिस्सा माना जाए। उन्होंने कहा कि नीतिगत भाषण सरकार की घोषणा होता है और उसमें कोई भी काट-छांट या जोड़ संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने भी राज्य सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा- संविधान के अनुसार राज्यपाल को वही भाषण पढ़ना चाहिए, जिसे मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी हो। यदि राज्यपाल जानबूझकर किसी हिस्से को छोड़ते हैं या उसमें कुछ जोड़ते हैं, तो यह गलत है। जानकारी के अनुसार, राज्यपाल ने मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित नीतिगत भाषण के अनुच्छेद 12, 15 और 16 नहीं पढ़े। इनमें केंद्र सरकार द्वारा केरल पर डाले जा रहे कथित वित्तीय दबाव और संघीय व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। छोड़े गए हिस्सों में यह पंक्ति भी थी कि केरल लगातार गंभीर वित्तीय तनाव का सामना कर रहा है, जो केंद्र सरकार की उन कार्रवाइयों के कारण है, जो वित्तीय संघवाद के संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर करती हैं। इसके अलावा, राज्यपाल उस अंश को भी पढ़ने को तैयार नहीं थे, जिसमें केंद्र द्वारा शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण, राज्य सूची के विषयों में हस्तक्षेप और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों के लंबे समय तक लंबित रहने पर चिंता जताई गई थी। उस हिस्से में यह भी उल्लेख था कि इन मुद्दों पर राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है और मामला संविधान पीठ को सौंपा गया है। विवाद उस समय और बढ़ गया, जब राज्यपाल ने एक पंक्ति में 'मेरी सरकार मानती है' शब्द जोड़ दिए। यह मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत भाषण का हिस्सा नहीं थे। मुख्यमंत्री ने अध्यक्ष से इसे हटाने की मांग की और कहा कि मूल भाषण से अलग कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, अपने नीतिगत भाषण के अन्य हिस्सों में राज्यपाल ने केरल के विकास की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और विकेंद्रीकरण के क्षेत्र में केरल देश के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। राज्य में शिशु मृत्यु दर में कमी, रोजगार गारंटी योजनाओं की सफलता और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया। राज्यपाल ने केंद्र सरकार के कुछ फैसलों की आलोचना करते हुए कहा कि केरल के वैध हिस्से में कटौती, जीएसटी हिस्सेदारी में कमी और ऋण सीमा घटाए जाने से राज्य के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केरल ने राजस्व बढ़ाने, खर्च नियंत्रित करने और वित्तीय स्थिति सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं। भाषण में राज्य की अर्थव्यवस्था को विकास पथ पर बताया गया और Vizhinjam Port परियोजना को आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन में सहायक बताया गया। राज्यपाल ने कहा कि इससे शिक्षित युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, उन्होंने कानून-व्यवस्था में सुधार, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जीवन स्तर को बेहतर बनाने के न्यू केरल लक्ष्य, वन्यजीवों के कारण फसल क्षति पर मुआवजा सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के लिए तैयार करने का भी उल्लेख किया।  

दावोस मंच से गूंजा विवादित सुर, अमेरिकी मंत्री बेसेंट ने ग्रीनलैंड पर जताया दावा

दावोस अमेरिका के वित्त मंत्री और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी स्कॉट बेसेंट ने दावोस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यहीं से ग्रीनलैंड का इतिहास याद दिलाते हुए अमेरिका के दावे को अहम बताया। उन्होंने यूरोपीय यूनियन को निशाने पर लिया और कहा कि डेनमार्क का ग्रीनलैंड पर दावा ठीक नहीं है। उन्होंने यूरोप के नियमों को दलदल समान बताया। ये प्रेस कॉन्फ्रेंस डब्ल्यूईएफ (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) सेंटर के ठीक बाहर यूएस हाउस में आयोजित की गई थी। बेसेंट ने कहा, "यूएस अपने सहयोगियों से यह समझने के लिए कह रहा है कि ग्रीनलैंड को यूनाइटेड स्टेट्स का हिस्सा बनना चाहिए।" इतिहास याद दिलाते हुए बोले, "अमेरिका ने पहले विश्व युद्ध में डेनमार्क से यूएस वर्जिन आइलैंड्स खरीदे थे। मैं सभी को याद दिलाऊंगा कि पहले वर्ल्ड वॉर के दौरान डेनमार्क न्यूट्रल (तटस्थ) रहा था। उन्होंने असल में जर्मनों को काफी जमीन बेची थी।" जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका को इस बात की चिंता है कि यूरोप में संस्थागत निवेशक (जैसे कि डेनमार्क का पेंशन फंड) अमेरिकी ट्रेजरी मार्केट से अपना पैसा निकाल सकते हैं, तो बेसेंट ने इस बात को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ट्रेजरी बॉन्ड में डेनमार्क के निवेश का आकार, डेनमार्क की तरह ही, कोई मायने नहीं रखता। यह 100 मिलियन डॉलर से भी कम है। एनर्जी के बारे में पूछे जाने पर, स्कॉट बेसेंट ने नॉर्ड स्ट्रीम 2 पाइपलाइन बनाने और रूसी तेल खरीदने के लिए यूरोपीय देशों की आलोचना की। बेसेंट के अनुसार खरीदे गए तेल की रकम से मास्को को पैसे मिले जिससे उसने यूक्रेन के साथ युद्ध किया। ट्रेड डील के मुद्दे पर, बेसेंट ने कहा कि यूरोप को यूरोप के अंदर और बाहर की ट्रेड बाधाओं को खत्म करना होगा। यूरोप एक रेगुलेटरी दलदल है जो नौकरशाही और नियमों पर बना है जो आर्थिक गतिविधियों को रोकते हैं।

सरस्वती पूजा विधि: घर में पूजन के लिए जरूरी सामग्री, शुभ समय और खास नियम

बसंत पंचमी का पावन पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन मां सरस्वती के प्राकट्य से जुड़ा माना जाता है, जिन्हें विद्या, बुद्धि, वाणी और विवेक की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर में नियमपूर्वक सरस्वती पूजा करने से ज्ञान में वृद्धि होती है, मानसिक स्पष्टता आती है और अध्ययन में एकाग्रता बढ़ती है. इसलिए बसंत पंचमी पर घरेलू पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पंचमी तिथि 23 जनवरी को सुबह 02:28 बजे से प्रारंभ होकर 24 जनवरी को रात्रि 01:46 बजे तक रहेगी, इसलिए बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को श्रद्धा और विधि विधान के साथ मनाया जाएगा. सरस्वती पूजा से पहले की तैयारी और शुभ समय बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए प्रातः काल का समय सबसे उत्तम माना गया है. सूर्योदय के बाद स्नान कर स्वच्छ और हल्के रंग, विशेष रूप से पीले या सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए. पूजा से पूर्व घर की साफ सफाई कर पूजा स्थल को पवित्र करना आवश्यक माना गया है. ईशान कोण (North-East direction) या शांत स्थान पर पीले वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. मान्यता है कि मां सरस्वती को स्वच्छता और शांति प्रिय है. पूजा सामग्री जैसे दीपक, धूप, चंदन, अक्षत, पीले पुष्प और नैवेद्य पहले से तैयार रखें. पूजा से पहले मन को शांत कर सकारात्मक भाव बनाए रखना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. घर में सरस्वती पूजा की विधि और नियम पूजा प्रारंभ करते समय सबसे पहले दीप जलाकर कर संकल्प लें. इसके बाद मां सरस्वती के चित्र या प्रतिमा पर चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें. मां को पीले फूल और पीले वस्त्र विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं. पूजा के दौरान पुस्तकों, कॉपियों, कलम और वाद्य यंत्रों को पूजा स्थल के पास रखना शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे विद्या से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है. पूजा करते समय शुद्ध मन और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें. घर में सरस्वती पूजा करते समय किसी भी प्रकार का शोर या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए. अंत में मां से ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें. भोग, मंत्र और पूजा में सावधानियां बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को सात्विक भोग अर्पित करने की परंपरा है. खीर, मीठे चावल, बूंदी या पीले रंग के मिष्ठान्न शुभ माने जाते हैं. पूजा के दौरान तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखना आवश्यक बताया गया है. मंत्र जाप के लिए सरस्वती वंदना या सरल स्तुति का पाठ किया जा सकता है. मान्यता है कि शांत मन से किया गया मंत्र जाप अधिक फलदायी होता है. पूजा के समय क्रोध, जल्दबाजी या आलस्य से बचना चाहिए. यदि घर में बच्चे हैं तो उन्हें भी पूजा में शामिल करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे उनमें संस्कार और विद्या के प्रति सम्मान विकसित होता है. पूजा के बाद क्या करें और क्या न करें? सरस्वती पूजा के बाद कुछ समय अध्ययन, लेखन या संगीत अभ्यास करना अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इस दिन पढ़ाई की गई विद्या लंबे समय तक स्मरण रहती है. छोटे बच्चों के लिए अक्षर अभ्यास या विद्यारंभ करना भी लाभकारी माना गया है. पूजा के बाद पुस्तकों का अपमान न करें और उन्हें जमीन पर न रखें. इस दिन बाल कटवाना या अनावश्यक विवाद से बचने की सलाह दी जाती है. पीले रंग का दान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यकारी माना गया है. बसंत पंचमी पर किया गया संकल्प जीवन में सकारात्मक दिशा प्रदान करता है और मां सरस्वती की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है.

प्रधानमंत्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न से प्रेरित मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 में शामिल होने पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "डी-रीस्किंग द ग्रीन लीप: सब नेशनल ब्लू प्रिंट फॉर यूटिलिटी स्केल एनर्जी ट्रांजीशन" विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय राउंड टेबल मीटिंग में भागीदारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की ऊर्जा यात्रा में नवकरणीय ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा मध्यप्रदेश के समावेशी और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन को प्रेरणा बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य स्वच्छ, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शी सोच से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने हरित ऊर्जा को विकास की मुख्य धारा में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि अन्तर्राज्यीय सहयोग और बेहतर समन्वय से राज्य में बिजली और जल आपूर्ति में स्थिरता आई है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ उद्योगों को भी लाभ मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य में सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण से जुड़ी नई नवकरणीय परियोजनाओं की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। राउण्ड टेबल मीटिंग के समापन-सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने भारत और प्रधानमंत्री श्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न को साझा किया। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नीति स्थिरता के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपभोक्ताओं और ऊर्जा क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने सुधारोन्मुख राज्यों, विशेषकर मध्यप्रदेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सौर ऊर्जा संबंधित उपलब्धियाँ वैश्विक स्तर पर साझा की जा सकती हैं। उन्होंने श्रम, भूमि और ऊर्जा के बेहतर समन्वय से स्वच्छ ऊर्जा में जोखिम कम करने के मध्यप्रदेश मॉडल को उल्लेखनीय बताया और प्रौद्योगिकी निवेश और ब्लेंडेड फाइनेंस पर ज़ोर दिया। राउण्ड टेबल मीटिंग में मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन श्री अशोक खन्ना, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना एवं एमडी एमपीआईडीसी श्री चन्द्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे। मीटिंग में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये एक ड्रॉफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया। विदेश में म.प्र. की नवकरणीय ऊर्जा नीति की हुई सराहना इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के उप-राज्यपाल श्री एमिल एलेस्टियान्तो डार्डक ने कहा कि उप-राष्ट्रीय सरकारें भी राष्ट्रीय नीतियों में परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की प्रगतिशील नीतियों की सराहना की। राउंड टेबल मीटिंग में प्रतिभागियों में वैश्विक और घरेलू कंपनियों के कॉरपोरेट प्रतिनिधि और निवेशक शामिल थे, जिन्होंने राज्य की नीतियों, हरित ऊर्जा की उपलब्धता, तथा डेटा सेंटर जैसी नई प्रौ‌द्योगिकी एवं नवाचारों के संबंध में जानकारी ली। चर्चाओं में नियामकीय आवश्यकताओं और जमीनी वास्तविकताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि किस प्रकार से मध्यप्रदेश जैसे क्षेत्रीय या उप-राष्ट्रीय सरकारें इस क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व कर सकती हैं।  

पुरुषों की मंशा पर हाईकोर्ट का ध्यान, लिव-इन पार्टनर को पत्नी का अधिकार देने की दिशा में विचार

तमिलनाडु लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बेहद अहम टिप्पणी की है। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए। इस दौरान हाईकोर्ट ने हिन्दू रीति रिवाजों के तहत गंधर्व विवाह का जिक्र भी किया। इस दौरान हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मनाप्पराई ऑल वुमन पुलिस स्टेशन द्वारा गिरफ्तार किए गए एक शख्स की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जानकारी के मुताबिक उस व्यक्ति पर शादी के झूठे वादे करके एक महिला के साथ यौन संबंध बनाने का आरोप था। सुनवाई के दौरान जस्टिस एस श्रीमति ने कहा कि आधुनिक सामाजिक ढांचे के तहत कमजोर महिलाओं की सुरक्षा करना अदालतों की जिम्मेदारी है, क्योंकि लिव-इन रिलेशनशिप में शादीशुदा महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा नहीं होती है। गंधर्व विवाह का जिक्र लाइवलॉ ने अपनी एक रिपोर्ट में मदुरै कोर्ट के हवाले से कहा, "लिव-इन रिलेशनशिप में, महिलाओं को गंधर्व विवाह या प्रेम विवाह की तरह 'पत्नी' का दर्जा देकर संरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पत्नी के रूप में अधिकार मिल सकें भले ही रिश्ता मुश्किल दौर से गुजर रहा हो।" क्या था मामला? तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली जिले के मनाप्पराई ऑल वुमन पुलिस ने हाल ही में महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे इस शख्स को गिरफ्तार किया था। व्यक्ति पर आरोप हैं कि उसने शादी का वादा करके कई बार महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन बाद में अपना वादा तोड़ दिया। इसके बाद महिला ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आधुनिकता का दावा करते हैं पुरुष हालांकि याचिका खारिज करते समय जस्टिस एस श्रीमति ने कहा कि आधुनिकता अपनाने के नाम पर, पुरुष अक्सर इस कानूनी अस्पष्टता का फायदा उठाते हैं लेकिन जब समय के साथ उनका रिश्ता खराब हो जाता है तो वे महिला के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष रिश्ते में रहते हुए खुद को आधुनिक मान सकते हैं, लेकिन जब चीजें बिगड़ने लगती हैं तो वे महिलाओं को शर्मिंदा करने या दोष देने में देर नहीं लगाते। हालांकि भारत में लिव-इन रिलेशनशिप को अभी भी 'कल्चरल शॉक' माना जाता है, लेकिन यह भारतीय समाज में एक आम बात हो गई है।” जज ने आगे कहा कि कई युवा महिलाएं मॉडर्न लाइफस्टाइल अपनाने की चाहत में ऐसे रिलेशनशिप में आती हैं लेकिन बाद में निराश हो जाती हैं क्योंकि कानून लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को शादीशुदा महिलाओं की तरह सुरक्षा नहीं देता है। कोर्ट ने कहा कि जो पुरुष मॉडर्निटी के नाम पर इसका फायदा उठाते हैं और शादी के वादे से मुकर जाते हैं, वे कानूनी नतीजों से बच नहीं सकते।