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वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की

ग्रामीण आजीविका में योगी सरकार ने बनाया रिकॉर्ड, 23 लाख से अधिक महिलाओं को मिला रोजगार वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की रोजगार से नेतृत्व तक उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं के हाथ आई कमान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में गांवों की तस्वीर अब बदल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अब सिर्फ रोजगार नहीं दे रही, बल्कि गांव-गांव महिला नेतृत्व तैयार कर रही है। रोजगार गारंटी व्यवस्था के जरिए उत्तर प्रदेश ने वह कर दिखाया है, जो अब तक सिर्फ कल्पना थी। महिलाएं अब मेट बनकर काम की निगरानी, प्रबंधन और नेतृत्व कर रही हैं। मानव दिवस सृजन में महिलाओं की सहभागिता 43 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। आंकड़ों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था अब महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व से तेजी से मजबूत हो रही है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 23 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराकर प्रदेश ने न सिर्फ लाखों परिवारों को स्थायी सहारा दिया है, बल्कि गांवों में आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव भी रखी है। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ी है और उनका सामाजिक-आर्थिक आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ है। महिला नेतृत्व को मिला नया मंच योगी सरकार की सोच का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक करीब 32 हजार से अधिक महिला मेट्स को कार्य सौंपा गया है। ये महिलाएं गांवों में कार्यों की निगरानी, श्रमिकों की हाजिरी और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। सरकार ने इन महिला मेट्स को 111 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की है। पारदर्शी और समयबद्ध भुगतान प्रणाली ने महिलाओं का भरोसा सरकारी योजनाओं पर और गहरा किया है। स्वयं सहायता समूह बने नेतृत्व की रीढ़ महिला सशक्तिकरण को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सरकार ने स्पष्ट रणनीति अपनाई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर महिला मेट के रूप में चुना जा रहा है। इससे रोजगार के साथ-साथ गांवों में लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल्स का भी तेजी से विकास हो रहा है। गांवों में अब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन रही हैं। समय पर भुगतान, भरोसे की गारंटी रोजगार गारंटी व्यवस्था में पारदर्शिता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2025–26 में 97 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों को समय से भुगतान किया गया है। यह आंकड़ा बताता है कि सिस्टम अब भरोसेमंद हो चुका है और श्रमिकों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल रहा है। गांवों में बने आय के नए स्रोत प्रदेश में ग्रामीण रोजगार गारंटी के तहत अब तक 6703 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इससे गांवों में विकास कार्यों को नई रफ्तार मिली है, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों को विशेष प्राथमिकता देकर सरकार ने समावेशी विकास को भी मजबूत किया है। मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर योगी सरकार की यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन की कहानी बन चुकी है। रोजगार से लेकर नेतृत्व तक, महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई यह नीति उत्तर प्रदेश को देश के सामने वूमेन-लीड ग्रोथ मॉडल के रूप में स्थापित कर रही है। गांवों में आत्मनिर्भर परिवार, सशक्त महिलाएं और मजबूत अर्थव्यवस्था यही योगी सरकार का नया इतिहास है।

इंदौर में अवैध आयुर्वेदिक दवा निर्माण: बिना लैब और डिग्री के चल रही कफ सीरप फैक्ट्री

इंदौर  सांवेर तहसील के धरमपुरी सोलसिंदा स्थित रेबिहांस हर्बल प्राइवेट लिमिटेड द्वारा घर में अवैध तरीके से आयुर्वेदिक कफ सीरप बनाया जा रहा था। संचालक ने इसके लिए न कोई लैब बना रखी थी और न सुरक्षा मानक थे। यहां अन्य कंपनियों के नाम से भी नकली सीरप बनाए जा रहे थे, जांच के दौरान दूसरी कंपनियों के लैबल पाए गए। दिसंबर में यहां से लिए गए सैंपल जांच में फेल हो गए जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई है। धरमपुरी के एक घर में बिना लैब व बिना सुरक्षा मानकों के आयुर्वेदिक सीरप बनाया जा रहा था। दिसंबर में जिला प्रशासन और आयुष विभाग ने कार्रवाई कर "फैक्ट्री" से सैंपल लिए थे। इन सैंपलों को जांच के लिए ग्वालियर भेजा गया था, जिनकी रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। ये सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। अवैध रूप से संचालित इस फैक्ट्री को प्रशासन ने सैंपल लेने के बाद सील कर दिया था। जांच में कफ सीरप तय मानकों पर खरा नहीं उतर सका। केमिस्ट के पास योग्यता नहीं यह फैक्ट्री सुखलिया निवासी सुरेंद्र सिंह के निर्देशन में संचालित होती थी। जांच के दौरान मौके पर केमिस्ट संजय डेविड कार्यरत मिला, जिसने बीएससी मैथ्स किया था। डेविड ने जांच के दौरान बताया था कि सीरप निर्माण का अनुभव एमको फार्मा में कार्य के दौरान प्राप्त हुआ। केमिस्ट के पास निर्धारित तकनीकी योग्यता नहीं पाई गई। प्रशासन की टीम ने आयुर्वेदिक कफ सीरप कंपनी की जांच की थी। कंपनी के पास लाइसेंस था, लेकिन ग्वालियर जांच के लिए भेजे गए सीरप के सैंपल फेल हुए हैं। कंपनी संचालक पर एफआइआर दर्ज कराई गई है और आगे भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। – शिवम वर्मा, कलेक्टर इंदौर 30 प्रकार के सीरप का निर्माण हो रहा था फैक्ट्री में 30 से अधिक प्रकार के कफ सीरप पाए गए थे। ये उत्पाद मनोमय लाइफ केयर प्राइवेट लिमिटेड जिरकपुर पंजाब, रेबिहांस बायोटेक प्रालि देहरादून आदि अंकित पाए गए। जांच के दौरान मौके पर सीरप बनाने को लेकर इन कंपनियों से किसी प्रकार का वैध टाई-अप अनुबंध नहीं दिखाया गया था

समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम

कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटन में यूपी ने प्राप्त किया सत्तर फीसदी लक्ष्य, भूमिहीन किसान हुए लाभान्वित समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बना रहे योगी सरकार के भूमि सुधार कार्यक्रम यूपी में भूमिहीन और सीमांत किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल का आवंटन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बढ़ावा लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले ग्रामीणों और भूमिहीन किसानों के आर्थिक स्वावलंबन के लिए बड़े पैमाने पर भूमि सुधार कार्यक्रम लागू किए हैं। जो उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास की अवधारणा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके तहत प्रदेश का राजस्व विभाग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक भूमिहीन, अल्पभूमि धारक किसानों को कृषि भूमि और आवास स्थल आवंटित करता है। इस क्रम में विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष लगभग सत्तर फीसदी लक्ष्य हासिल किया है। जिससे न केवल भूमिहीन किसानों को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्राप्त हुए हैं, बल्कि उनके सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जो प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भूमिहीन किसानों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में चलाए जा रहे भू-सुधार कार्यक्रमों के तहत भूमिहीन या अल्पभूमि धारक ग्रामीणों को ग्राम सभा की ओर से भूमि आवंटित कराई जाती है। जिसके तहत वर्ष 2025-26 में राजस्व विभाग की ओर से 1076 आवंटियों को 151.80 हेक्टेयर कृषि भूमि का आवंटन किया जा चुका है। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 69.16 प्रतिशत है। राजस्व विभाग के इस कार्य से प्रदेश के भूमिहीन और सीमांत किसानों को खेती के लिए उपजाऊ भूमि उपलब्ध हुई है। इससे न केवल उनकी आजीविका में स्थिरता आएगी, बल्कि राज्य के कुल कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि होगी। राजस्व विभाग ने 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए राजस्व विभाग गांवों में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को आवास के लिए भी जमीन उपलब्ध करवाता है। इस क्रम में विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 3754 परिवारों को आवास स्थल आवंटित किए गए हैं। जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 70.90 प्रतिशत है। आवास स्थल प्राप्त करने से इन परिवारों को न सिर्फ सिर पर छत मिली, बल्कि इसका सीधा प्रभाव उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार के रूप में देखा गया। प्रदेश सरकार के इस कार्यक्रम में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को वरीयता प्रदान की जाती है। राजस्व विभाग के भूमि सुधार कार्यक्रमों के तहत कृषि भूमि और आवास स्थल उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की समावेशी विकास नीति का अहम हिस्सा है। इससे न केवल प्रदेश में भूमि का न्यायोचित वितरण सुनिश्चित होता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक न्याय एवं आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

गोवंश संरक्षण को मिली तकनीकी मजबूती, अयोध्या के सभी गो-आश्रय हाईटेक निगरानी से जुड़े

अयोध्या के 87 गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी से 24 घंटे निगरानी, योगी आदित्यनाथ सरकार की पहल गोवंश संरक्षण को मिली तकनीकी मजबूती, अयोध्या के सभी गो-आश्रय हाईटेक निगरानी से जुड़े सोलर व सिम बेस्ड सीसीटीवी से सुरक्षित हुए अयोध्या के गो-आश्रय स्थल -विकास भवन कंट्रोल रूम से 87 गो-आश्रयों की पल-पल निगरानी -अब ऐप से दिखेगी गोशालाओं की लाइव स्थिति, व्यवस्था में आई पारदर्शिता -सीसीटीवी निगरानी से गोवंशों की देख-रेख में उल्लेखनीय सुधार -14,800 निराश्रित गोवंशों का संरक्षण, सीडीओ बोले व्यवस्था हुई अधिक प्रभावी अयोध्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप निराश्रित गोवंशों के संरक्षण एवं गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में अयोध्या जनपद में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के सभी 87 गो-आश्रय स्थलों में अब वाई-फाई, सोलर एवं सिम बेस्ड सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर दो-दो कैमरे लगाए गए हैं। एक कैमरा प्रवेश द्वार पर स्थापित किया गया है, जिससे आने-जाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, जबकि दूसरा कैमरा गोशाला के अंदर लगाया गया है, जिसके माध्यम से गोवंशों की स्थिति, भूसा, हरा चारा, पानी, साफ-सफाई एवं अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है। सोलर व सिम बेस्ड कैमरों से निर्बाध निगरानी कैमरे सोलर बेस्ड होने के कारण सूर्य की रोशनी से चार्ज होकर बिना बिजली बाधा के लगातार कार्य कर रहे हैं। वाई-फाई एवं सिम आधारित प्रणाली के चलते मोबाइल फोन व ऐप के माध्यम से लाइव स्ट्रीमिंग को कहीं से भी आसानी से देखा जा सकता है। सभी कैमरों की स्थापना ग्राम पंचायत निधि से की गई है। विकास भवन में कंट्रोल रूम से निगरानी सभी 87 गो-आश्रय स्थलों की निगरानी के लिए अयोध्या विकास भवन में एक केंद्रीय कंट्रोल रूम संचालित किया गया है। यहां 11 विकास खंडों के अलग-अलग ग्रुप बनाकर टेलीविजन स्क्रीन पर एक बार में चार-चार कैमरों की लाइव स्थिति देखी जाती है। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मचारी बारी-बारी से सभी गो-आश्रय स्थलों की सतत निगरानी करते हैं और किसी भी कमी के पाए जाने पर तत्काल निवारण की कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। कैमरा प्रणाली की प्रमुख विशेषताएं सीसीटीवी कैमरे 360 डिग्री रोटेशन की क्षमता से युक्त हैं, जिससे गोशाला के अंदर और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी संभव है। स्मार्ट डिटेक्शन सेंसिटिविटी के माध्यम से गतिविधियों का स्वतः पता चलता है। ह्यूमन डिटेक्शन एवं स्मार्ट ट्रैकिंग से केयरटेकर व अन्य मानव गतिविधियों की पहचान कर नोटिफिकेशन और क्लिप क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित होती है।डिटेक्शन एरिया सेटिंग से नाद, बैठने के स्थान, साफ-सफाई व भूसा भंडारण की निगरानी की जा सकती है। सायरन सेटिंग अवांछनीय गतिविधियों को रोकने में सहायक है। नाइट विजन मोड से रात्रि में भी स्पष्ट दृश्य उपलब्ध होते हैं, जिससे चोरी और गोवंशों के बाहर निकलने की घटनाओं पर रोक लगी है। डिवाइस कॉल सुविधा के माध्यम से ऐप से गोशाला में मौजूद लोगों से सीधे संवाद भी किया जा सकता है। देख-रेख में आया उल्लेखनीय सुधार इस प्रणाली से गोशालाओं में पाई जाने वाली कमियों का तुरंत पता चल रहा है। समय पर भूसा, हरा चारा, पानी एवं अन्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होने से सुरक्षा, स्वच्छता और गोवंशों की देख-रेख में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।  सीसीटीवी निगरानी से गो-आश्रयों में बढ़ी पारदर्शिता, 14,800 निराश्रित गोवंश सुरक्षित: सीडीओ मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि जिले के 87 गो-आश्रय स्थलों में अब तक 14 हजार 800 निराश्रित गोवंशों को संरक्षित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ी है और गो-आश्रयों की व्यवस्थाएं पहले से अधिक प्रभावी और विश्वसनीय हुई हैं। सोलर बेस्ड सिम सीसीटीवी प्रणाली के केंद्रीकृत संचालन से अयोध्या के सभी गो-आश्रय स्थलों की निगरानी अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और दक्ष हो गई है। इससे निराश्रित गोवंशों के संरक्षण की व्यवस्था मजबूत हुई है और पूरी प्रणाली अब अधिक सुदृढ़ एवं भरोसेमंद बन गई है।

यूपी दिवस पर योगी सरकार की पहल, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर जोर

निपुण भारत मिशन को जन-आंदोलन बनाने की तैयारी, 24 जनवरी को हर न्याय पंचायत में होगी ‘शिक्षा चौपाल’ यूपी दिवस पर योगी सरकार की पहल, अभिभावकों और समुदाय की भागीदारी से समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति पर जोर बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष बल लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध ढंग से प्राप्त करने और शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश की सभी न्याय पंचायतों में 24 जनवरी, 2026 को यूपी दिवस के अवसर पर ‘शिक्षा चौपाल’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अभिभावकों, विद्यालय प्रबंधन समितियों (SMC), शिक्षकों और स्थानीय जनसमुदाय को निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों से जोड़ते हुए बच्चों की बुनियादी भाषायी और गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। बालवाटिका से बुनियादी शिक्षा तक जागरूकता महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर आयोजन के निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि शिक्षा चौपाल के माध्यम से बालवाटिका के प्रभावी संचालन, बच्चों के नामांकन और नियमित उपस्थिति तथा शिक्षा के दीर्घकालिक महत्व पर विशेष जोर दिया जाएगा। चौपाल में विद्यालयों को उपलब्ध कराई गई शिक्षण सामग्री, प्रिंट-रिच सामग्री, गणित किट, क्रियाशील पुस्तकालय, खेल सामग्री सहित डिजिटल संसाधनों जैसे स्मार्ट क्लास, ICT लैब, दीक्षा, खान अकादमी और टीचर्स ऐप की जानकारी भी साझा की जाएगी। सम्मान और सहभागिता से बढ़ेगा उत्साह शिक्षा चौपाल के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, नामांकन व उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार करने वाले विद्यालयों, तथा मेधावी बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, अभिभावकों और SMC सदस्यों के योगदान के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, प्रबुद्धजन और मीडिया प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा। ₹10 हजार प्रति न्याय पंचायत, सख्त वित्तीय दिशा-निर्देश शिक्षा चौपाल के आयोजन के लिए ₹10,000 प्रति न्याय पंचायत की दर से धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि टेंट, कुर्सी, साउंड सिस्टम, बैनर, जलपान, स्टेशनरी, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी आदि व्यवस्थाओं पर व्यय की जाएगी। व्यय का विवरण निर्धारित समयसीमा में प्रबंध पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।जिला और मंडलीय स्तर के अधिकारी कार्यक्रम का सतत अनुश्रवण करेंगे।

राजधानी लखनऊ की दो ग्राम पंचायतों से आधार सेवाओं का शुभारंभ

खुशखबरी : अब अपने गांव में ही मिलेंगी आधार से जुड़ी सेवाएं राजधानी लखनऊ की दो ग्राम पंचायतों से आधार सेवाओं का शुभारंभ पहले चरण में 1000 ग्राम पंचायतों में सेवा विस्तार की योजना अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को दिया जा चुका प्रशिक्षण सीएम योगी का विजन : पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त कर रहा पंचायतीराज विभाग लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पंचायती राज विभाग ने लखनऊ में ग्राम पंचायत स्तर पर आधार केंद्रों की शुरुआत कर दी है, जिससे ग्रामीणों को आधार से जुड़ी सेवाएं अब अपने गांव में ही उपलब्ध हो सकेंगी। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ब्लॉक सरोजनीनगर की ग्राम पंचायत भटगवां पांडेय तथा चिनहट ब्लॉक की सैरपुर ग्राम पंचायत में आधार सेवाएं सफलतापूर्वक प्रारंभ कर दी गई हैं। इन दोनों ग्राम पंचायतों में अब तक 40 से अधिक ग्रामीणों को आधार से संबंधित सेवाएं प्रदान की गई हैं, जिससे उन्हें अब शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। चरणबद्ध तरीके से 57,694 ग्राम पंचायतों तक मिलेगी सुविधा यह पहल पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं की सहज, पारदर्शी और सुलभ उपलब्धता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। विभाग की योजना के अनुसार, पहले चरण में प्रदेश की 1000 ग्राम पंचायतों में आधार सेवाएं प्रारंभ की जाएंगी, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायती राज विभाग द्वारा पंचायत सहायकों का व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। अब तक 800 से अधिक पंचायत सहायकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि शेष पंचायत सहायकों का प्रशिक्षण कार्य प्रगति पर है। ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि ग्राम स्तर पर आधार सेवाओं की शुरुआत ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह पहल न केवल समय और संसाधनों की बचत करेगी, बल्कि पंचायतों को आत्मनिर्भर और सक्षम भी बनाएगी। डिजिटल इंडिया और सशक्त पंचायतों के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ी शुरुआत पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने कहा कि विभाग ग्राम पंचायतों को डिजिटल रूप से सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। आधार सेवाओं की यह शुरुआत पंचायतों को नागरिक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इसका लाभ प्रदेश के हर गांव तक पहुंचेगा। ग्राम पंचायत स्तर पर आधार सेवाओं की यह पहल डिजिटल इंडिया और सशक्त पंचायतों के संकल्प को साकार करने की दिशा में बड़ी शुरुआत मानी जा रही है।

अर्थतंत्र को सशक्त और सुप्रबंधित करने में डॉ. मोहन यादव का योगदान

अर्थ तंत्र को सुप्रबंधित और सशक्त करते डॉ मोहन यादव  विश्व के महानतम अर्थशास्त्री कौटिल्य के अनुसार प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है।इसलिए राजा को – तस्मान्नित्योत्थितो राजा,कुर्यादर्थानुशासनम् । अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः ।। अर्थात राजा सदैव उद्यमशील रहकर,अर्थमूल में वृद्धि करे। इसके विपरीत कार्य अनर्थ या हानि के कारण बनते हैं ।  इस मंत्र को आत्मसात करते हुए भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार प्रगति पथ पर अग्रसर है।अर्थ तंत्र को उन्नत कर रही है।मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के कुशल वित्तीय सुप्रबंधन द्वारा राज्य का अर्थ तंत्र उन्नत हो रहा है, सशक्त हो रहा है।वित्त विभाग द्वारा श्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन मानकों को अपनाकर शून्य आधारित बजट प्रक्रिया के अनुसार बजट तैयार किया जा रहा है। तीन वर्षों के लिये रोलिंग बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें बजट प्रक्रिया से संबंधित नवाचार अपनाएं जा रहे हैं। वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी प्रतिवेदनों में मध्यप्रदेश के वित्तीय प्रबंधन,बजटीय विश्वसनीयता तथा गुणवत्ता को सराहा गया है।दूरदर्शी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 5 वर्षों में बजट के आकार को दोगुना कर वर्ष 2028-29 तक 7 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।पूंजीगत निवेश को बढ़ाना,सड़क विस्तार एवं संधारण, सिंचाई क्षेत्रफ़ल जल संचय क्षमता विस्तारण,बिजली,सौर,पवन ऊर्जा उत्पादन,वितरण सुविधा का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा का विकास और उद्योग,रोजगार के अवसर वृद्धि हेतु,निवेश आकर्षित करने आदि के लक्ष्यों को पूर्ण कर,विकसित भारत निर्माण के परम लक्ष्य में योगदान देना है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा प्रदेश में पूंजीगत व्यय में निरंतर, सतत वृद्धि की जा रही है। पूंजीगत व्यय से राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर, अवसंरचना में गुणात्मक वृद्धि हुई है।वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय,केपिटल एक्सपेंडिचर लगभग 85 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।प्रभावी पूंजीगत व्यय लगभग 90 हजार करोड़ रुपये है।प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में नियमित वृद्धि बनी हुई है।वर्ष 2024-25 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 15 लाख 03 हजार 395 करोड़ रूपये रहा एवं प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 52 हजार 615 रूपये रही है।वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 17 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आर्थिक संकल्पों को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पूर्ण मनोयोग से सिद्ध कर रहे हैं।वर्तमान में वित्तीय मानकों के आधार पर प्रदेश की स्थिति अत्यधिक सुदृढ़ है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशन में संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा अनेक नवाचार लागू किए गए हैं।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आर्थिक शुचिता और नवाचार के कारण लगभग 50 वर्षों से प्रचलित व्यवस्था को समाप्त किया गया है जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में मुख्यमंत्री एवं समस्त मंत्री स्वयं ही आयकर का भुगतान कर रहे हैं।पूर्व में मुख्यमंत्री,मंत्रीगणों, मुख्य सचिव का वार्षिक आयकर,शासकीय कोष द्वारा वहन किया जाता था। वाणिज्यिक कर अर्थव्यवस्था को सुप्रबंधित, सशक्त कर रहा है। वाणिज्य कर द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55 हजार 634 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक कुल 34 हजार 829 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक डाटा एनालिटिक्स आधारित चिन्हित प्रकरणों में प्रवर्तन कार्यवाहियों से रुपये 967 करोड़ एवं ऑडिट की कार्यवाही से रुपये 404 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।  नवाचारी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दूरदर्शी पहल द्वारा मध्य प्रदेश, देश का प्रथम राज्य बन गया है जहाँ पंजीयन विभाग में 75 प्रकार के दस्तावेज पट्टा, पॉवर ऑफ अटर्नी, बंधक इत्यादि का घर बैठे वीडियो केवायसी के माध्यम से पंजीयन किया जा रहा है।पंजीयन विभाग के सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में स्वर्ण पदक मिला है। प्रदेश के 8 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिये यह गौरव का विषय है।पंजीयन विभाग को वर्ष 2023-24 में 10 हजार 325 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।वर्ष 2024-25 में 11 हजार 355 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।वर्ष 2025-26 में 13 हजार 920 करोड रूपये का लक्ष्य रखा गया है।नवंबर 2025 तक 7 हजार 580 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हो गया है।प्रतिवर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विभिन्न विभागों में अनेक आर्थिक सुधारों एवं नवाचारों को अपनाकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रहे हैं।मध्य प्रदेश के अर्थ तंत्र को, अर्थमूल को बढ़ा रहे हैं। इति श्री।                                                                                                                           लेखक- सत्येंद्र कुमार जैन 

राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो साल: जानिए क्या-क्या हुआ निर्माण, धर्मध्वजा से लेकर राम दरबार तक

अयोध्या  अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हो चुके हैं. इन दो वर्षों में मंदिर में लगातार निर्माण हो रहे हैं और आस्था के इस नए केंद्र का नया ही स्वरूप बदलकर सामने आ रहा है. रोज हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में दर्शन की व्यवस्था से लेकर टाइमिंग आदि में भी बदलाव हुए हैं जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए अपनाए जा रहे हैं.  श्रीराम मंदिर का मुख्य ढांचा अब लगभग पूर्ण हो चुका है. गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति स्थापित है और नियमित पूजा-अर्चना हो रही है. मंदिर की भूतल संरचना पूरी तरह तैयार है, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर निर्माण और कलात्मक कार्य अंतिम चरण में हैं. मंदिर का शिखर, मंडप और स्तंभ पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किए गए हैं, जिन पर बारीक नक्काशी की गई है. पत्थरों पर रामायण से जुड़े प्रसंग उकेरे गए हैं, जो मंदिर को सांस्कृतिक पहचान देते हैं. पिछले दो साल में मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा विकसित किया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है, जिससे दर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रित रहती है. परिसर में रास्ते, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर दर्शन कर सकें. राम मंदिर में फहराई गई धर्म ध्वजा बीते साल नवंबर 2025 में अयोध्या में राम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण हुआ. राम मंदिर पर फहराने वाला ध्वज केसरिया रंग का है. ध्वज की लंबाई 22 फीट चौड़ाई 11 फीट और ध्वजदंड 42 फीट का है. इस ध्वज को 161 फीट के शिखर पर फहराया गया. ध्वज पर 3 चिन्ह चिह्नित किए गए हैं- सूर्य, ऊं, कोविदार वृक्ष. माना जा रहा है कि यह ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है. सनातन परंपरा में केसरिया त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक माना गया है. रघुवंश के शासनकाल में भी यह रंग विशेष स्थान रखता था. भगवा वह रंग है जो ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का प्रतिनिधित्व करता है. ध्वज पर उकेरे गए ये पवित्र चिन्ह ध्वज पर कोविदार वृक्ष और 'ऊं' की छवि अंकित की गई है. कोविदार वृक्ष का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसे पारिजात व मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष माना गया है. मुख्य राम मंदिर: गर्भगृह और रंग मंडप सहित इसका निर्माण पूरा हो गया है. परकोटा: मुख्य मंदिर के चारों ओर लगभग 800 मीटर लंबा परकोटा तैयार है, जिसमें कई छोटे मंदिर शामिल हैं. सप्त मंडप: महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहल्या के मंदिर बनकर तैयार हैं. छोटे मंदिर: भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, मां दुर्गा और मां अन्नपूर्णा के मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं. प्रतिमाएं और ध्वज: जटायु, गिलहरी और संत तुलसीदास की प्रतिमाएं स्थापित हैं, और सभी मंदिरों पर कलश व धर्म ध्वज लगा दिए गए हैं. लक्ष्मण जी का मंदिरः परकोटे के बाहर शेषावतार लक्ष्मणजी का मंदिर भी बनकर तैयार है और सभी मंदिरों के शिखरों पर कलश और धर्म ध्वज भी स्थापित किए जा चुके हैं. मंदिर परिसर में राम कथा को समझाने के लिए संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल विकसित किए जा रहे हैं. यहां श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन, वनवास, राम-रावण युद्ध और रामराज्य की अवधारणा को चित्रों, शिल्प और आधुनिक माध्यमों से समझाया जाएगा. यह व्यवस्था खासतौर पर युवाओं और बच्चों के लिए बनाई जा रही है ताकि वे रामायण को सरल भाषा और दृश्य रूप में समझ सकें. जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण से संबंधित काम 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच अगस्त 2020 को भूमि पूजन किया था. भूमि पूजन के बाद जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नींव की खोदाई शुरू कराई थी. कुल मिलाकर, दो साल बाद श्रीराम मंदिर अपनी भव्यता और गरिमा के साथ खड़ा है. कुछ कार्य अभी शेष हैं, लेकिन मंदिर अब अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना का मजबूत केंद्र बन चुका है.

राउत के बयान से भड़कीं अमृता फडणवीस, जानिए क्या था विवाद

मुंबई  महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत की टिप्पणियों पर जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके पति दावोस में पिकनिक मनाने नहीं गए हैं। फडणवीस विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में हैं। अमृता ने मुंबई में एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'मुझे उनकी (राउत) भाषा कभी समझ नहीं आती, लेकिन मैं इतना ही कहूंगी कि अगर कोई व्यक्ति पिकनिक पर गया है, तो वह भारत और महाराष्ट्र में निवेश लाने और रोजगार बढ़ाने के लिए रोज सुबह छह बजे से रात 11 बजे तक सम्मेलन और बैठकें नहीं करता।' उन्होंने कहा, 'इसलिए मुझे लगता है कि उनका (राउत) यह बयान, उनके बाकी सभी बयानों की तरह निराधार है।' राउत ने दावोस जाने वाले नेताओं के यात्रा खर्च को सार्वजनिक करने की मांग की थी। राउत ने कहा था, 'भारत के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री दावोस में पिकनिक मना रहे हैं। भारतीय दृष्टिकोण से दावोस सम्मेलन हास्यास्पद है।' मुंबई के नए महापौर के बारे में पूछे जाने पर अमृता ने कहा कि वह एक मराठी व्यक्ति होंगे। महाराष्ट्र में 15 लाख करोड़ के निवेश पर हस्ताक्षर एजेंसी वार्ता के अनुसार, फडणवीस ने दावोस में राज्य के लिए 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं तथा इन निवेशों के जरिए राज्य में लगभग 13 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। महाराष्ट्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के मीडिया सेल प्रमुख नवनाथ बान ने  संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। राउत के मुख्यमंत्री की दावोस यात्रा की आलोचना पर पलटवार करते हुए बान ने कहा कि राउत को यह बताना चाहिए कि उन्होंने अपने जीवन में क्या 13 लोगों को भी रोजगार दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या उद्धव ठाकरे ने अपने ढाई साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में कम से कम 1,300 लोगों को नौकरी दी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने राउत को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे फडणवीस की दावोस यात्रा की आलोचना कर रहे हैं, तो उन्हें यह भी बताना चाहिए कि आदित्य ठाकरे अपने दावोस दौरे से कितना निवेश लेकर लौटे थे।

बाजार में लौटी रौनक: निफ्टी 25,340 को पार, सेंसेक्स में 800 अंकों की बढ़त

मुंबई   पॉजिटिव ग्लोबल संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने 22 जनवरी को मजबूती के साथ शुरुआत की. निफ्टी 25,300 के ऊपर खुला, जबकि सेंसेक्स में करीब 600 अंकों की तेजी देखी गई. स्टॉक मार्केट में पिछले दो दिनों से गिरावट देखने को मिल रही थी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोपीय साझेदारों पर टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेने के बाद ट्रेड वॉर की चिंताएं कम हुईं हैं. इसके चलते वॉल स्ट्रीट में तेजी आई थी और उसी के साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली. आज GIFT निफ्टी से संकेत मिल रहे थे कि भारत के प्रमुख इंडेक्स में पॉजिटिव शुरुआत हो सकती है. निफ्टी में लगभग 193 अंक या 0.77% की तेजी के साथ शुरुआती कारोबार देखा गया. निफ्टी फ्यूचर्स लगभग 25,368.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहे थे. इससे पहले भारतीय शेयर बाजार ने 21 जनवरी को लगातार तीसरे सेशन में गिरावट जारी रखी. ग्लोबल संकेत कमजोर रहे, जिसमें ग्रीनलैंड को लेकर भू-राजनीतिक तनाव और जापानी सरकारी बॉन्ड में तेज बिकवाली शामिल थी. लगातार बिकवाली के दबाव ने प्रमुख इंडेक्स को आठ महीने में पहली बार उनके 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे ला दिया. क्लोजिंग पर सेंसेक्स 270.84 अंक या 0.33% गिरकर 81,909.63 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 75 अंक या 0.30% की गिरावट के साथ 25,157.50 पर बंद हुआ. इन सेक्टर्स में खरीदारी सभी सेक्टोरल इंडेक्स में जोरदार तेजी देखने को मिल रही है. ऑटो, आईटी, मीडिया, मेटल सेक्टर्स 1 फीसदी से ज्यादा उछल गए हैं. Nifty PSU Bank Index ने 3 दिन की गिरावट तोड़ते हुए 2% की तेजी दिखाई है. निफ्टी में Eternal, Dr Reddy’s Labs, Tata Motors Passenger Vehicles, Asian Paints, Adani Enterprises निफ्टी टॉप गेनर्स हैं, जबकि Nestle, UltraTech Cement, Max Healthcare, NTPC टॉप लूजर्स में शामिल हैं. सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर ट्रेड कर रहे हैं, जिसमें PSU बैंक और कैपिटल गुड्स इंडेक्स 2% की तेजी के साथ सबसे आगे हैं. बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 1.6% की बढ़त के साथ मजबूती दिखा रहे हैं. एनालिस्ट ने कहा- ‘बाजार में राहत’ मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, VK Vijayakumar, Chief Investment Strategist, Geojit Investments ने कहा, “एक बार फिर ट्रंप अपने पुराने रुख से पीछे हटते दिखे हैं. ग्रीनलैंड को जबरन अपने कब्जे में लेने की धमकी से हटकर अब उन्होंने दावोस में कहा है कि इस पर भविष्य के समझौते का स्टक्चर तैयार हो गया है. इससे भी ज्यादा अहम बात यह है कि अमेरिका ने यूरोप पर टैरिफ न लगाने का संकेत दिया है, जिससे अमेरिका-यूरोप ट्रेड वॉर का खतरा टल गया है, जो बाजारों पर दबाव बना रहा था. इसका असर आज बाजार में राहत की तेजी के रूप में दिख सकता है, क्योंकि बाजार में करीब 2 लाख शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट्स हैं और शॉर्ट-कवरिंग के लिए हालात अनुकूल हैं. तीसरी तिमाही में कंपनियों के मुनाफे पर नए लेबर कोड से जुड़ी एक बार की प्रोविजनिंग का असर पड़ा है, लेकिन बाजार इसे नजरअंदाज करेगा. कल आए नतीजों में Eternal कंपनी बेहतर रही, जहां क्विक कॉमर्स बिजनेस से उम्मीद से ज्यादा रेवेन्यू और मुनाफा देखने को मिला.”