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हाइवे के बीच खड़ा था घर, किसान ने हटाने की बजाय पूरा खिसकाया

चंडीगढ़ पंजाब के एक किसान का अपनी कोठी से अनोखा प्यार सामने आया है। कोठी की जगह हाईवे पर आने से किसान ने उसे आगे खिसाने का फैसला लिया। आप भी ये पूरा मामला पढ़ चौंक जाएंगे। जी हां… बरनाला के किसान सुखप्रीत सिंह की 3 साल की मेहनत, जिंदगी भर की कमाई और सपनों का 2 मंजिला घर सब कुछ तैयार था, बस रंग-रोगन बाकी था। किसा ने 2017 से कोठी बनाना शुरू किया और 2020 में बनकर तैयार हुई। लेकिन तभी एक नोटिस ने किसान सुखप्रीत सिंह की दुनिया हिला दी। नोटिस में बताया गया कि उसकी आलीशान कोठी भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले लुधियाना-बठिंडा हाईवे के रास्ते में आ रही है और इसे हटाना होगा।   यह खबर सुनते ही किसान के पैरों तले से जमीन खिसक गई। पूरा परिवार टेंशन में आ गया कि, वर्षों की मेहनत से बनाए गए घर को टूटते देखने का ख्याल उन्हें बेचैन कर रहा था। रिश्तेदारों, जानकारों और अधिकारियों से सलाह ली गई, लेकिन सवाल वही था, क्या सपनों का आशियाना तोड़ दिया जाए? इस दौरान किसान के सामने 2 ही विकल्प थे या तो घर गिरा दिया जाए, या फिर नामुमकिन को मुमकिन बनाया जाए। आखिरकार किसान ने हिम्मत दिखाते हुए दूसरा रास्ता चुना।   किसान ने हरियाणा के ठेकेदार से सम्पर्क किया और उसकी मदद से करीब 60 लाख रुपये की लागत से बनी इस 2 मंजिला कोठी को अब मशीनों की मदद से 350 फुट आगे खिसकाया जा रहा है। बीते 2 महीनों से कोठी को शिफ्ट करने का काम चल रहा है और इसे पूरा होने में अभी करीब 3 महीने और लगेंगे। इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 10 लाख 60 हजार रुपये का खर्च आएगा, लेकिन किसान का कहना है कि मेहनत से बनाए गए सपनों के घर को बचाने के लिए यह कीमत उसे मंजूर है। मिली जानकारी के अनुसार सुखप्रीत सिंह ने 60 लाख में कोठी तैयार करवाई थी। लेकिन प्रोजेक्ट में आई इस जमीन के लिए उसे सिर्फ 60 लाख रुपए मुआवजा मिल रहा था। किसान ने बताया कि उसकी जमीन और उस पर बनी कोठी की कीमत दोगुनी थी लेकिन उसे मुआवजा बहुत कम मिल रहा था, वह कि वह कहीं और कोठी नहीं बना सकता था। इसी कारण वह परेशान था। इस दौरान लोग भी उसे कहते थे कि, 25-30 लाख रुपए में कोई नई कोठी बन जाएगी, लेकिन उसकी कोठी की कीमत 60 लाख रुपए की कीमत से तैयार हुई थी। ऐसी कोठी बनना उसकी सबसे बड़ा सपना था। कई बार प्रशासन को कोठी हटाने से मना किया लेकिन आखिर में उक्त फैसला लिया गया। किसान ने  बताया कि उसने कोठी को खिसकाने का फैसला इंस्टाग्राम पर रील देखकर लिया। उसने बताया कि एक दिन रात के समय इंस्टाग्राम पर रील देखी जिसमें कोठी को तोड़ने की बजाय खिसकाया जा सकता है। इसके बाद उसने कोठी को शिफ्ट करवाने का फैसला लिया। इस दौरान उन्होंने एक कमरा बनवाया जिसमें परिवार वालों को रखा। इस दौरान कई लोगों ने बाते भी की। कोठी को खिसकाने पर उसमें दरारें आ जाएंगी। किसान ने बताया जो हरियाणा के ठेकेदार उसकी कोठी को शिफ्ट करवा रहा है, वह यमुनागर से काम सीख कर आया है। ये काम बहुत ही मुश्किल है, जरा सी चूक होने पर कोठी को नुकसान हो सकता है। ठेकेदार ने कहा कि अगर कोठी में दरारें आए तो उसका पूरा मुआवजा दिया जाएगा। अप्रैल महीने तक पूरी कोठी शिफ्ट हो जाएगी, जिसके वह और उनका परिवार राहत की सांस लेंगे।

भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों ने डीजीपी कैलाश मकवाणा से की भेंट

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से भारतीय विदेश सेवा अधिकारियों ने की सौजन्य भेंट पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से आज प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षणरत् भारतीय विदेश सेवा (IFS) के 5 अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। यह भेंट प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान, आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों तथा बहु-सेवा समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।इस अवसर पर डीजीपी  कैलाश मकवाणा ने भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें मध्यप्रदेश पुलिस की संगठनात्मक संरचना, कार्यप्रणाली तथा उत्तरदायित्वों से अवगत कराया। उन्होंने कानून-व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध, अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियानतथा तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की विस्तृत जानकारी दी। डीजीपी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में प्रवेश के साथ ही नैतिक मूल्योंको अपने आचरण में आत्मसात करना अनिवार्य हो जाता है। ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ किया गया कार्य ही किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान और विश्वसनीयता का आधार होता है। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके लक्ष्यों पर संवाद करते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही सच्चे अर्थों में लोकसेवा है। डीजीपी ने दुर्ग में अपनी पहली पदस्थापना के अनुभव साझा करते हुए प्रारंभिक चुनौतियों, सीख और सेवा में निरंतर आत्म-प्रेरणा बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपने अधीनस्थ स्टाफ के प्रति व्यवहार में संवेदनशीलता रखना, उनकी बातों को गंभीरता से सुनना और समस्याओं को समझना प्रभावी नेतृत्व की पहचान है, जिससे अधिकारी स्वाभाविक रूप से सम्मान अर्जित करते हैं।अपने मुरैना कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि निरंतर परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ किया जा सकता है। वहीं बस्तर में पदस्‍थापना के दौरान किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी सूचना पर त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई से जन-विश्वासमजबूत होता है। इसके अतिरिक्त मंदसौर के लॉ-एंड-ऑर्डर से जुड़े प्रसंग साझा करते हुए डीजीपी ने स्पष्ट किया कि अधिकारी के प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में जनता का विश्वास परिलक्षित होना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि यह उनका सीखने का समय है, अधिक से अधिक सीखें, आवश्यकता पड़ने पर अपने सहकर्मी अथवा अपने अनुभवी अधिकारियों से परामर्श लेने में संकोच न करें, आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग करें और पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं प्रतिबद्धता के साथ कर्तव्य निर्वहन करें। भारतीय विदेश सेवा के अधिकारियों ने अपने प्रशिक्षण अनुभव साझा करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक भूमिका, वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तथा राज्यों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अपनाए जा रहे नवाचारों, तकनीकी समाधानों और जनहित में संचालित अभियानों की सराहना की। यह संवाद विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं के मध्य सहयोग, आपसी समझ और समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।इस अवसर पर पीएसओ टू डीजीपी  विनीत कपूर, एसओ टू डीजीपी  मलय जैन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी मती नेहा भारतीय द्वारा किया गया।  

पदभार संभालते ही तीखा हमला: आदित्य साहू ने हेमंत सरकार को घेरा

रांची झारखंड भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने आज औपचारिक रूप से अपने पद का कार्यभार संभाल लिया। इस मौके पर भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और झारखंड की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाए। "राज्य में बड़े पैमाने पर अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं" पदभार संभालने से पहले आदित्य साहू ने सरस्वती पूजा के अवसर पर पूजा-अर्चना की। इसके बाद संगठन की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधा। आदित्य साहू ने कहा कि जिस उद्देश्य और सपने के साथ झारखंड राज्य का गठन हुआ था, मौजूदा सरकार उसे खत्म करने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़े पैमाने पर अन्याय और अत्याचार हो रहे हैं। इसके खिलाफ भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ता संगठन के माध्यम से संघर्ष करेंगे। "भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है" साहू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी है और उसकी विचारधारा को गांव-गांव और व्यक्ति-व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा। पदभार ग्रहण करते समय उन्होंने पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताया और कहा कि उनका राजनीतिक सफर बूथ स्तर के कार्यकर्ता से शुरू होकर प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ऐसा अवसर केवल भाजपा में ही संभव है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव: वैश्विक व्यापार में भारत बना पसंदीदा साझेदार

भोपाल रोजगार मूलक व्यवसाय उद्योग स्थापना पर दी जायेगी मदद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी प्रदेश की पहचान उसके केवल नक्शे से नहीं, बल्कि उपलब्धियों से भी होती है। आज मध्यप्रदेश अपनी प्रभावी नीतियों और उनके सफल क्रियान्वयन के कारण न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बना रहा है। प्रदेश औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से अग्रसर है और निवेश के लिए उद्यमियों को आकर्षित कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस की वार्षिक बैठक में सहभागिता के बाद जबलपुर में महाकौशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के व्यापारियों एवं उद्यमियों द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में यह बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2014 के पहले की स्थिति अब पूरी तरह बदल चुकी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है और आज दुनिया का हर देश व्यापार और निवेश के लिए भारत से जुड़ने को उत्सुक है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, महापौर  जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', सांसद  आशीष दुबे, विधायक  अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे सहित व्यापारिक एवं व्यावसायिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में 200 से अधिक देशों ने भाग लिया, लेकिन सबसे अधिक फोकस भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर रहा। भारत सरकार के साथ-साथ देश के 10 राज्यों ने भी इस मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें मध्यप्रदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया। विशेषकर नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा एवं पॉवर सेक्टर के माध्यम से सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और मात्र 2 रुपये 10 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए आर्थिक समृद्धि अत्यंत आवश्यक है। राज्य यदि आर्थिक रूप से समृद्ध नहीं होगा तो विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाई आएगी। मध्यप्रदेश आज एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है, जहां सड़क, बिजली, पानी और लैंड बैंक जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराकर हर प्रकार के उद्योग-व्यवसाय को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। वर्ष 2025 को मध्यप्रदेश में उद्योग रोजगार वर्ष के रूप में मनाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भारत की विकास दर विश्व में सबसे तेज है। इसमें भी मध्यप्रदेश सभी राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मध्यप्रदेश जनसंख्या के आधार पर देश में 5वें स्थान पर है। प्रदेश युवा शक्ति के मामले में पहले स्थान पर है। प्रदेश की प्रभावी नीतियों के कारण बेरोजगारी दर के मामले में मध्यप्रदेश देश के उन तीन राज्यों में शामिल है जहां बेरोजगारी की दर सबसे कम है। उन्होंने बताया कि त्रिपुरा और तेलंगाना जैसे छोटे राज्यों की तुलना में, लगभग 9 करोड़ की आबादी होने के बावजूद मध्यप्रदेश में बेरोजगारी दर कम होना प्रदेश की बड़ी उपलब्धि है। साथ ही प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में लगातार वृद्धि हो रही है, जो समृद्धि का संकेत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार रोजगार मूलक उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही है। उद्योगों की स्थापना पर 30 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी प्रदान की जा रही है, वहीं एमएसएमई सेक्टर को 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। राज्य के संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि देश में सबसे तेज गति से मेडिकल कॉलेज मध्यप्रदेश में खोले जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज खोलने के इच्छुक उद्यमियों को 25 एकड़ भूमि मात्र एक रुपये की दर से उपलब्ध करायी जा रही है। साथ ही निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में नीट के माध्यम से चयनित छात्रों को फीस भुगतान के लिए राज्य सरकार द्वारा ऋण सुविधा भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शहरी क्षेत्र औद्योगिकीकरण होने से तेजी से आगे बढ़ते हैं। प्रदेश के महानगरों के विकास के लिए औद्योगिकीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जबलपुर शहर के समग्र विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें जबलपुर से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी शहरों को शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज यदि देश में कहीं चीता परिवार का विस्तार हो रहा है तो वह मध्यप्रदेश में हो रहा है, जो पूरे एशिया के लिए गर्व की बात है। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में हेलीकॉप्टर सेवा प्रारंभ की गई है, जिसमें 45 मिनट की यात्रा का किराया मात्र 3500 रुपये रखा गया है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। इससे प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिलेगी।  

गोवा की याद दिलाएगा ऊना: गोविंद सागर का ‘अंदरोली’ खुला एडवेंचर प्रेमियों के लिए

ऊना ऊना जिले की बंगाणा तहसील में गोविंद सागर झील से सटा अंदरोली क्षेत्र अब एडवेंचर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों का नया केंद्र बनकर तेजी से उभर रहा है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन एवं निर्देशों के अनुरूप गोविंद सागर झील में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुनियोजित ढंग से ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कुटलैहड़ टूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से मेफील्ड एडवेंचर्स कंपनी के साथ वाटर स्पोर्ट्स संचालन का करार किया गया है। कंपनी ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए वाटर स्पोर्ट्स सुविधाएं उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को वास्तविक गति मिली है। उपायुक्त ने कहा कि देवभूमि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सदैव पर्यटकों को आकर्षित करती रही है। अब प्रदेश सरकार के निरंतर प्रयासों से साहसिक खेलों और पर्यटन के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का अद्भुत संगम चारों ओर पहाड़ों से घिरी गोविंद सागर झील की मनोहारी छटा और जल-पर्यटन की नई गतिविधियों ने अंदरोली क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलानी शुरू कर दी है। यहां बोटिंग, कयाकिंग, जेट स्की, एटीबी राइड, हॉट एयर बैलून, स्पीड बोट और ड्रैगन राइड सहित विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे पर्यटकों को एक नया और रोमांचक अनुभव मिल रहा है।   उपायुक्त ने बताया कि भविष्य में यहां बनाना-बम्पर राइड, वाटर जेटोवेटर, शिकारा, 100 से अधिक सीटर क्रूज, जिप लाइन, पैरा मोटरिंग, फ्लोटिंग जेट्टी तथा पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां भी उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल पर्यटन को नया आयाम देने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यावसायिक अवसर भी सृजित करेगी। उपायुक्त ने स्वयं लिया रोमांचक अनुभव, परिवार सहित आने की अपील उपायुक्त जतिन लाल ने हाल ही में स्वयं गोविंद सागर झील के अंदरोली क्षेत्र में परिवार सहित पहुंचकर हॉट एयर बैलून राइड सहित विभिन्न एडवेंचर गतिविधियों का आनंद लिया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा अब परिवार, बच्चों और पर्यटकों के लिए घूमने-फिरने तथा वाटर स्पोर्ट्स व साहसिक गतिविधियों का बेहतरीन विकल्प बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पहले लोग इन गतिविधियों के लिए दूर-दराज पर्यटन स्थलों का रुख करते थे या सुविधाएं न होने के कारण निराश रहते थे, लेकिन अब अंदरोली में ही यह अवसर सहज रूप से उपलब्ध है। उपायुक्त ने आमजन से अपील की कि वे परिवार एवं बच्चों के साथ आएं और सुरक्षित वातावरण में इन गतिविधियों का आनंद लें। पारदर्शी प्रक्रिया से मिला संचालन अनुबंध उपायुक्त ने बताया कि वाटर स्पोर्ट्स संचालन के लिए प्रतिस्पर्धी व पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें मेफील्ड एडवेंचर्स ने 80 लाख 500 रुपये की सर्वाधिक बोली लगाकर संचालन अनुबंध प्राप्त किया। पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न करने हेतु अतिरिक्त उपायुक्त ऊना की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गईं। एडीबी से 10 करोड़ का निवेश प्रस्तावित उन्होंने बताया कि अंदरोली क्षेत्र को एडवेंचर टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने के लिए एशियन विकास बैंक (एडीबी) की सहायता से 10 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिससे पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और क्षेत्र को व्यवस्थित पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त गोविंद सागर पर मंदली-लठियाणी पुल व सड़क निर्माण परियोजना से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे पर्यटन को नई गति मिलेगी। गौरतलब है कि बीते वर्षों में पुलिस विभाग द्वारा आयोजित एडवेंचर स्पोर्ट्स मीट ने भी इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी, जिसमें देशभर से आए प्रतिभागियों ने साहसिक गतिविधियों में भाग लिया था। पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभरेगा ऊना जिला उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की प्राथमिकता है कि पर्यटन को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जाएं। गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था सशक्त होगी और ऊना जिला पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभरेगा। मुख्यमंत्री के विजन को मिल रहा धरातल पर स्वरूप : विवेक शर्मा कुटलैहड़ के विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट विजन है कि पर्यटन को प्रदेश के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाया जाए। कुटलैहड़ विस के अंदरोली में गोविंद सागर झील में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की शुरुआत इसी विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे क्षेत्र में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बनने के साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

नागरिकों को मिलेगा लोकभवन देखने का अवसर, 25 जनवरी से

भोपाल  नागरिकों के लिए 25 जनवरी को दोपहर 2 बजे से खुलेगा लोकभवन  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक लोकभवन आमजन के लिए खोला जा रहा है। इन तीनों दिन नागरिक लोकभवन की ऐतिहासिकता, प्राकृतिक सौंदर्य एवं विशेष सजावट को करीब से देख सकेंगे। केन्द्रीय संचार ब्यूरो और मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर आधारित प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रहेगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने समस्त नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे लोकभवन का भ्रमण जरूर करे। लोकतांत्रिक मूल्यों को निकट से अनुभव कर संविधान के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ करे। यह आयोजन नागरिकों और शासन के बीच संवाद, सहभागिता और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रवेश गेट क्रमांक- 1 से और निकास गेट क्रमांक- 4 से राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने बताया कि आमजन लोकभवन का भ्रमण 25 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक कर सकेंगे। दिनांक 25 और 27 जनवरी को दोपहर 2 बजे से शाम 8 बजे तक प्रवेश का समय निर्धारित है। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के दिन, लोकभवन भ्रमण का समय प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। नागरिकों के लिए कुशाभाऊ ठाकरे सभागार परिसर में वाहन पार्किंग होगी। आमजन लोकभवन में गेट क्रमांक-1 से प्रवेश और गेट क्रमांक- 4 से निकास करेंगे। भ्रमण का इस प्रकार रहेगा रूट राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. कोठारी ने बताया कि लोकभवन भ्रमण के लिए आने वाले आमजन का रूट निर्धारित किया गया है। गेट क्रमांक-1 से प्रवेश के बाद नागरिक लोकभवन सचिवालय एवं व्ही.आई.पी. रोड होते हुए कांच गेट से लोकभवन परिसर में प्रवेश करेंगे। स्वर्ण जयंती सभागार (बैंक्वेट हॉल), ऐतिहासिक दरबार हॉल, तोप एवं ध्वज वंदन स्थल का अवलोकन करेंगे। इसके पश्चात सिविल डिस्पेंसरी के सामने आयोजित केन्द्र और राज्य सरकार की प्रदर्शनी, सांदीपनि सभागार के बाहर वॉटर फाउंटेन के समीप वीडियो वॉल के माध्यम से लघु फिल्मों को देख सकेंगे। नागरिक, मंदिर के सामने वाले द्वार से होते हुए, गेट क्रमांक-4 से परिसर से बाहर निकलेंगे। विशेष आकर्षण : केन्द्र एवं राज्य सरकार की प्रदर्शनियां लोकभवन की ऐतिहासिकता के अवलोकन के साथ आमजन, केन्द्र एवं राज्य सरकार के विकासपरक एवं ऐतिहासिक पलों को प्रदर्शनी के माध्यम से देख सकेंगे। भारत सरकार के केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना” तथा “वंदे भारत” थीम पर आधारित आकर्षक एवं सूचनात्मक प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जो नागरिकों को राष्ट्र निर्माण की योजनाओं और विकास यात्रा से परिचित कराएगी। जनसंपर्क विभाग द्वारा “राजभवन से लोकभवन” विषय पर विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर अब तक के सभी राज्यपालों की जानकारी सरल एवं रोचक रूप में प्रस्तुत की जाएंगी। लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

मंदिर का मालिक बनने का दावा ठुकराया, HC ने पुजारी को दिया कानूनी झटका

अहमदाबाद गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी भी मंदिर का पुजारी ज़मीन का मालिक नहीं होता, बल्कि वह केवल देवता का सेवक होता है। अदालत ने एक ऐसे पुजारी की अपील खारिज कर दी, जो सार्वजनिक रास्ते पर बने गणेश मंदिर की ज़मीन पर अपना मालिकाना हक जताना चाहता था। जस्टिस जे.सी. दोशी की पीठ ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ वर्षों तक पूजा-पाठ करने से किसी पुजारी को मंदिर की ज़मीन पर अधिकार नहीं मिल जाता और न ही वह मंदिर को तोड़े जाने से रोक सकता है। रमेशभाई उमाकांत शर्मा बनाम आशाबेन कमलेशकुमार मोदी और अन्य के मामले में जस्टिस जेसी दोशी ने कहा कि पुजारी को मंदिर को गिराने से रोकने या ज़मीन पर मालिकाना हक का दावा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अपील खारिज करते हुए, कोर्ट ने पुजारी की सीमित भूमिका को साफ तौर पर समझाया। कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा, “पुजारी भूमिस्वामी नहीं होता, वह केवल देवता का सेवक होता है। सेवक होने के नाते वह यह दावा नहीं कर सकता कि उसकी मौजूदगी मालिक की तरफ से थी और वह ‘अतिक्रमण द्वारा स्वामित्व’ (Adverse Possession) में बदल गई।” अदालत ने यह भी कहा कि धार्मिक सेवा कभी भी कानूनी स्वामित्व का आधार नहीं बन सकती। क्या है पूरा मामला? मामला तब शुरू हुआ जब एक महिला ज़मीन मालिक ने अपनी संपत्ति के पास सार्वजनिक रास्ते पर बने गणेश मंदिर पर आपत्ति जताई और सिविल कोर्ट में मंदिर हटाने की मांग की। ट्रायल कोर्ट और पहली अपीलीय अदालत दोनों ने मंदिर को हटाने का आदेश दिया। इसके बाद मंदिर के पुजारी ने गुजरात हाई कोर्ट में अपील दाखिल की। पुजारी का तर्क था कि वह कई वर्षों से वहां पूजा कर रहा है, इसलिए उसे 'एडवर्स पजेशन’ के तहत ज़मीन का मालिक माना जाना चाहिए। ‘एडवर्स पजेशन’ का दावा क्यों खारिज हुआ? हाई कोर्ट ने कहा कि किसी जमीन पर मालिकाना हक पाने के लिए यह साबित करना जरूरी होता है कि कब्जा खुला हो, लगातार हो और असली मालिक के खिलाफ हो लेकिन इस मामले में पुजारी खुद मानता है कि वह सबकी जानकारी और सहमति से पूजा कर रहा था। यानी उसका कब्ज़ा न तो विरोध में था और न ही ज़बरदस्ती का। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में मालिकाना हक का दावा कानूनी रूप से टिक नहीं सकता। ट्रस्ट या देवता की ओर से भी कोई दावा नहीं बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि न तो मंदिर ट्रस्ट, न ही देवता की ओर से कोई प्रतिनिधि विवादित जमीन पर अधिकार जताने सामने आया। पुजारी ने अकेले ही दावा किया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सड़कों या सरकारी ज़मीन पर बने अनधिकृत धार्मिक ढांचों को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि ऐसे निर्माण आम लोगों के अधिकारों का हनन करते हैं और कानून का दुरुपयोग कर अतिक्रमण को बचाने की कोशिश की जाती है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अगर आप भी दरवाजे के पीछे टांगते हैं कपड़े, तो हो जाएं अलर्ट!

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य दरवाजा सकारात्मक ऊर्जा (प्राणिक ऊर्जा) के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। इसके पीछे कपड़े टांगना या कोई बाधा रखना शुभ नहीं माना जाता। मुख्य दरवाजे के पीछे कपड़े टांगना सही नहीं है क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करता है। अन्य दरवाजों पर कपड़े टांगने में कोई बड़ी समस्या नहीं है, बशर्ते इसे सुव्यवस्थित और स्वच्छ रखा जाए। यदि यह आपकी आदत है और इसे बदलना संभव नहीं है, तो सकारात्मक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से सफाई और दरवाजे की देखभाल करें। आइए जानें, इससे जुड़े विभिन्न पहलु- दरवाजे के पीछे कपड़े टांगने के प्रभाव ऊर्जा का अवरोध: दरवाजे के पीछे कपड़े टांगने से दरवाजे का खुलना सीमित हो सकता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे घर में तनाव या नकारात्मकता बढ़ सकती है। अव्यवस्था और मानसिक प्रभाव: दरवाजे के पीछे टंगे कपड़े अव्यवस्थित ऊर्जा (क्लटर एनर्जी) का निर्माण करते हैं। इससे घर के सदस्यों की मानसिक शांति और ध्यान भंग हो सकता है। मुख्य द्वार के पीछे टंगे कपड़े: यदि मुख्य द्वार के पीछे कपड़े टांगे जाते हैं तो यह विशेष रूप से अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार, यह धन और अवसरों के प्रवाह को रोक सकता है। बैडरूम और अन्य दरवाजों पर कपड़े: बैडरूम या अन्य दरवाजों के पीछे कपड़े टांगना उतना हानिकारक नहीं होता, लेकिन इसे नियमित रूप से व्यवस्थित करना चाहिए। वास्तु-अनुकूल उपाय दरवाजे पर बाधा न बनाएं: मुख्य दरवाजे के पीछे या किसी अन्य दरवाजे के पीछे ऐसी चीजें न रखें जो उसे पूरी तरह खुलने से रोकें। हुक या हैंगर का उपयोग: यदि कपड़े टांगना आवश्यक है, तो दरवाजे के ऊपरी हिस्से में हल्के और व्यवस्थित हुक का उपयोग करें। दरवाजे के पास स्वच्छता रखें: नियमित रूप से दरवाजे के पास साफ-सफाई और सुव्यवस्था बनाए रखें। दरवाजे के पास ऊर्जा बढ़ाने वाले उपाय: सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए मुख्य दरवाजे के पास तुलसी का पौधा, स्वस्तिक चिन्ह या तोरण लगाएं। 

‘ये मोदी की गारंटी है’: सबरीमाला मामले में PM ने किया बड़ा वादा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी को लेकर केरल के लोगों से बड़ा वादा किया है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है, तो सबरीमाला सोने मामले की जांच की जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मोदी की गारंटी है। पीएम मोदी ने यह टिप्पणी केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में की, जहां उन्होंने विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया और नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई।   पीएम मोदी ने कहा, 'पूरे देश में हम सबकी भगवान अयप्पा में अटूट आस्था है। हालांकि, एलडीएफ सरकार ने सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब यहां से सोने की चोरी की खबरें सामने आ रही हैं। मंदिर से, भगवान के ठीक पास से सोना चुराए जाने की रिपोर्ट्स हैं। मैं एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि जैसे ही यहां भाजपा की सरकार बनेगी, इन आरोपों की गहन जांच होगी और दोषियों की जगह जेल में होगी।' सबरीमाला मामले को लेकर राजनीतिक तूफान प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी सबरीमाला सोने की चोरी मामले के विवाद के बीच आई है, जो राजनीतिक तूफान में बदल चुका है। यह मामला मंदिर के गर्भगृह के दरवाजे के फ्रेम और रक्षक मूर्तियों को ढकने वाली प्लेटों से सोने के गबन से संबंधित है। इसकी जांच फिलहाल केरल पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) की ओर से की जा रही है, जो राज्य उच्च न्यायालय के आदेश पर काम कर रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि दशकों से एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने तिरुवनंतपुरम की उपेक्षा की है, जिससे यह शहर बुनियादी सुविधाओं और अवसंरचना से वंचित रह गया है। उन्होंने कहा, ‘वामपंथी और कांग्रेस लगातार हमारे लोगों की जरूरतों को पूरा करने में विफल रहे हैं। हालांकि, हमारी भाजपा टीम ने तिरुवनंतपुरम के विकास की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। शहर के लोगों से मैं कहना चाहता हूं – विश्वास रखें, जिस बदलाव की लंबे समय से प्रतीक्षा थी, वह आखिरकार आने वाला है।’  

राज्यपाल पटेल बोले—सत्य और पर्यावरण संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा, सत्य बोलना, धर्माचरण और पर्यावरण संरक्षण हैं। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने आचरण में संस्कार, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को आत्मसात करें। राज्यपाल एवं कुलाधिपति  पटेल शुक्रवार को वसंत पंचमी के अवसर पर महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने समारोह में विद्यार्थियों को पी.एच.डी. उपाधि, स्वर्ण पदक तथा विभिन्न उपाधियाँ प्रदान की। दीक्षांत समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार भी मौजूद थे। उपाधियाँ, समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक राज्यपाल  पटेल ने कहा कि समारोह में प्रदान की गई उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारियों का प्रतीक है। विद्यार्थी जीवन में नए अवसरों और चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर सीखते रहें। आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि अपने ज्ञान, कौशल, शोध और नवाचार के माध्यम से देश को निरंतर आगे बढ़ाएँ। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा केवल विद्यालय या विश्वविद्यालयों से नहीं, बल्कि परिवार और समाज से भी व्यक्ति जीवन मूल्यों की शिक्षा प्राप्त करता है। आज के विद्यार्थी ही कल के विकसित भारत की नींव हैं। शिक्षा का लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना भी होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक, कौशल आधारित और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करने में नई शिक्षा नीति की सराहनीय भूमिका है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में आगे बढ़ते समय माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, तपस्या और मार्गदर्शन को कभी न भूलें। उनका सम्मान करना ही सच्ची सफलता की पहचान है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षक का व्यक्तित्व विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। उनमें ज्ञान, कौशल और चरित्र का संचार करता है। शिक्षक के कार्य की तभी सच्ची सार्थकता है जब समाज की अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचे। राज्यपाल  पटेल ने दीक्षांत समारोह में 19 विद्यार्थियों को पीएचडी, 46 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और लगभग 200 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की। माँ सरस्वती और महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। स्मारिका “दीक्षावाणी” का लोकार्पण और विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री  दिलीप अहिरवार ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थी शोध और नवाचार के माध्यम से प्रदेश और देश की प्रगति में योगदान दें। सारस्वत अतिथि एवं म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. खेम सिंह डहेरिया ने कहा कि कठोर अनुशासन, आत्मविश्वास और संवेदनशीलता जीवन में सफलता के आधार हैं। कार्यक्रम में कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उपाधि धारकों को शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।