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बैलेट पेपर से पंच और सरपंच तथा ईवीएम से होंगे जिला पंचायत के चुनाव

जयपुर. राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर मतदान व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंच और सरपंच पदों के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराने का फैसला लिया है। वहीं, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान कराया जाएगा। इस संबंध में आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और उसी अनुरूप चुनावी तैयारियां करने को कहा गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की गाइड लाइन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, पंच और सरपंच चुनावों में बैलेट पेपर, बैलेट बॉक्स, मतगणना की प्रक्रिया और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएंगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन पदों के लिए ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके साथ ही जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे, लेकिन जहां ईवीएम की उपलब्धता कम होगी, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बैलेट बॉक्स की तैयारी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका मकसद यह है कि किसी भी जिले में मशीनों की कमी के कारण मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो। गौरतलब है कि राजस्थान में पिछले तीन पंचायती राज चुनावों में सभी पदों के लिए मतदान ईवीएम से ही कराया गया था। पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद चारों स्तरों पर ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ऐसे में लंबे समय बाद पंच और सरपंच चुनावों में बैलेट प्रणाली की वापसी को एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे चुनाव प्रबंधन से जुड़ा बड़ा फैसला बताया जा रहा है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह निर्णय चुनावों को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है। ईवीएम की सीमित संख्या और बड़े पैमाने पर होने वाले ग्रामीण चुनावों को देखते हुए बैलेट और ईवीएम दोनों विकल्पों को साथ में रखा गया है। आयोग ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में आवश्यक संसाधनों का आकलन कर समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी करें, ताकि चुनाव के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती हैं और इन चुनावों में बड़ी संख्या में मतदाता भाग लेते हैं। ऐसे में मतदान प्रक्रिया में किए गए इस बदलाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अब ग्रामीण मतदाता पंच और सरपंच के लिए मतपत्र के जरिए वोट डालेंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए ईवीएम का इस्तेमाल होगा। आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विधानसभा की मतदाता सूचियों के आधार पर फोटोयुक्त पंचायत मतदाता सूचियां तैयार की जा रही हैं। इन सूचियों का अंतिम प्रकाशन 25 फरवरी को होगा। पंच और सरपंच के चुनाव मतपेटियों से कराए जाएंगे, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से होने की संभावना है। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की एमपीएसवी ईवीएम भी मंगाई जा रही हैं।

नीतीश से बेटे को लेकर ललन सिंह बोले- ‘अब इन्हें भी आने दीजिए’

पटना. बिहार की राजनीति अक्सर इशारों, मुस्कानों और खामोशी के बीच फैसले करती है. ऐसा ही एक पल शुक्रवार को पटना स्थित जेडीयू आईटी सेल कार्यालय में देखने को मिला, जब सरस्वती पूजा कार्यक्रम में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की एक हल्की-सी टिप्पणी और मुख्यमंत्री की मुस्कान ने इस चर्चा को और तेज कर दिया कि क्या निशांत कुमार की ‘राजनीतिक पारी’ अब बस शुरू होने वाली है. “तुम कब आ गए?” और उसके पीछे छिपा संकेत जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और उन्होंने निशांत को पहले से मौजूद देखा, तो सहज भाव में पूछा, “तुम कब आ गए?” निशांत का जवाब था, “आधा घंटा हो गया है.” यह संवाद भले ही सामान्य लगे, लेकिन राजनीति में हर शब्द और हर भाव का अपना अर्थ होता है. यह पहली बार नहीं है जब निशांत किसी सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम में दिखे हों, लेकिन इस बार माहौल कुछ अलग था. उनके साथ केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की मौजूदगी और पूरे कार्यक्रम में राजनीतिक गर्माहट साफ महसूस की जा सकती थी. ललन सिंह की लाइन और नीतीश की मुस्कान कार्यक्रम के दौरान ललन सिंह ने मजाकिया लहजे में नीतीश कुमार से कहा, “बोल दीजिए कि मानेंगे.” मतलब साफ था कि निशांत कुमार के राजनीति में आने पर अपनी सहमति दे दीजिए. इस पर मुख्यमंत्री और निशांत दोनों ही कुछ बोले नहीं, बस मुस्कुराते रहे. बिहार की राजनीति में यह मुस्कान किसी बयान से कम नहीं मानी जा रही है. यह न तो सीधा इनकार था और न ही खुला समर्थन, बल्कि संभावनाओं का एक दरवाजा खोलने वाला संकेत था. निशांत कुमार की मौजूदगी क्यों बन रही है बड़ी खबर निशांत कुमार अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखते आए हैं. वे चुनावी मंचों, रैलियों और पार्टी की रणनीतिक बैठकों से दूर ही दिखे हैं. ऐसे में जेडीयू आईटी सेल जैसे राजनीतिक रूप से अहम मंच पर उनकी मौजूदगी अपने आप में खास है. वहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से घुल-मिलकर बातचीत की, सरस्वती पूजा में हिस्सा लिया और पूरे कार्यक्रम में सहज दिखाई दिए. यह सब उस छवि से अलग था, जिसमें निशांत को हमेशा राजनीतिक हलकों से दूर रहने वाला माना जाता रहा है. बिहार की राजनीति और ‘राजनीतिक उत्तराधिकार’ की बहस बिहार में परिवारवाद हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. लालू प्रसाद यादव से लेकर रामविलास पासवान तक, हर बड़े नेता के परिवार ने राजनीति में अपनी जगह बनाई है. नीतीश कुमार को अब तक इस मामले में अलग माना जाता रहा है, क्योंकि उन्होंने कभी अपने बेटे को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया. यही वजह है कि निशांत कुमार की मौजूदगी और उस पर नीतीश की चुप्पी ज्यादा मायने रखती है. यह चुप्पी कहीं न कहीं इस संभावना को मजबूत करती है कि भविष्य में तस्वीर बदल सकती है. फिलहाल न तो नीतीश कुमार ने कोई औपचारिक ऐलान किया है और न ही निशांत कुमार ने अपनी मंशा जाहिर की है. लेकिन बिहार की राजनीति में इतना भर काफी है कि एक मुस्कान और एक चुप्पी से नई चर्चाओं का दौर शुरू हो जाए. अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि यह मुस्कान आगे चलकर राजनीतिक हरी झंडी में बदलती है या फिर सिर्फ एक संयोग बनकर रह जाती है.

उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर लांच हुई ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ (ओडीओसी) योजना

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी)  योजना ने स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और निर्यात को नई दिशा दी है। ओडीओपी के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों कारीगरों को स्वरोजगार मिला, निर्यात बढ़ा और यूपी की पहचान वैश्विक बाजारों तक पहुंची। अब इसी सफलता मॉडल को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की समृद्ध पाक-कला विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से “एक जनपद–एक व्यंजन” यानी ओडीओसी (वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरासत संग विकास विजन का विस्तार है, जिसमें सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन, रोजगार और निर्यात को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है। क्या है ओडीओसी योजना का उद्देश्य ओडीओसी योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं-  प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला विरासत का संरक्षण व संवर्धन  व्यंजन तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों का पंजीकरण  चयनित व्यंजनों का गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग  राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों को पहचान दिलाना  स्थानीय आजीविका, स्वरोजगार व एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा ओडीओपी की तर्ज पर ओडीओसी भी जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बनेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पैकेजिंग  जीआई टैग और ई-कॉमर्स से स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक मंच मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों को एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक फूड वेंडर्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। चयनित व्यंजनों की जीआई टैगिंग कर उनकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ओडीओसी फूड स्टाल लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के विविध स्वादों का अनुभव कर सकें। दुनिया तक पहुँचेगा यूपी का स्वाद उत्तर प्रदेश का लगभग हर जनपद किसी न किसी विशिष्ट व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। जैसे आगरा का पंछी पेठा, मथुरा का ब्रजवासी पेड़ा, अयोध्या का रामआसरे पेड़ा, अलीगढ़ (इगलास) का चमचम, बाराबंकी की चंद्रकला, पूर्वांचल का बाटी-चोखा व लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी व मलाई मक्खन, काशी की लौंगलता व मलइयो, संडीला (हरदोई) के लड्डू और कानपुर के समोसे। ऐसे सैकड़ों व्यंजन हैं, जो अपने शहर में तो लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्य या देश से बाहर इन्हें सीमित पहचान मिली है। ओडीओसी योजना के माध्यम से यूपी के सभी 75 जनपदों के इन ऐतिहासिक व स्वादिष्ट व्यंजनों को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी)  योजना ने स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और निर्यात को नई दिशा दी है। ओडीओपी के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों कारीगरों को स्वरोजगार मिला, निर्यात बढ़ा और यूपी की पहचान वैश्विक बाजारों तक पहुंची। अब इसी सफलता मॉडल को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की समृद्ध पाक-कला विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से “एक जनपद–एक व्यंजन” यानी ओडीओसी (वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरासत संग विकास विजन का विस्तार है, जिसमें सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन, रोजगार और निर्यात को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है। क्या है ओडीओसी योजना का उद्देश्य ओडीओसी योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं-  प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला विरासत का संरक्षण व संवर्धन  व्यंजन तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों का पंजीकरण  चयनित व्यंजनों का गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग  राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों को पहचान दिलाना  स्थानीय आजीविका, स्वरोजगार व एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा ओडीओपी की तर्ज पर ओडीओसी भी जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बनेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पैकेजिंग  जीआई टैग और ई-कॉमर्स से स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक मंच मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों को एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक फूड वेंडर्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। चयनित व्यंजनों की जीआई टैगिंग कर उनकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ओडीओसी फूड स्टाल लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के विविध स्वादों का अनुभव कर सकें। दुनिया तक पहुँचेगा यूपी का स्वाद उत्तर प्रदेश का लगभग हर जनपद किसी न किसी विशिष्ट व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। जैसे आगरा का पंछी पेठा, मथुरा का ब्रजवासी पेड़ा, अयोध्या का रामआसरे पेड़ा, अलीगढ़ (इगलास) का चमचम, बाराबंकी की चंद्रकला, पूर्वांचल का बाटी-चोखा व लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी व मलाई मक्खन, काशी की लौंगलता व मलइयो, संडीला (हरदोई) के लड्डू और कानपुर के समोसे। ऐसे सैकड़ों व्यंजन हैं, जो अपने शहर में तो लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्य या देश से बाहर इन्हें सीमित पहचान मिली है। ओडीओसी योजना के माध्यम से यूपी के सभी 75 जनपदों के इन ऐतिहासिक व स्वादिष्ट व्यंजनों को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

राष्ट्रपति के साथ गणतंत्र परेड में होंगी हरियाणा की फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता

झज्जर. कासनी गांव निवासी अक्षिता धनखड़ का नाम आज पूरे देश में गूंज रहा है। वह भारतीय वायु सेना की फ्लाइट लेफ्टिनेंट हैं और गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ रहेंगी। अक्षिता ने बताया कि वे बचपन में गणतंत्र दिवस की परेड देखती थीं और कर्तव्य पथ पर खड़े होने का सपना देखती थीं। पिता ने भी गणतंत्र दिवस की परेड में हिस्सा लिया था। उनकी कहानियां सुनकर वर्दी पहनने का सपना पक्का हो गया। बचपन की यादें ही कॅरिअर का आधार बनीं। अक्षिता ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से पढ़ाई की। एनसीसी (नेशनल कैडेट कोर) में हिस्सा लिया। अक्षिता ने मेहनत से कैडेट सजेंट मेजर का रैंक हासिल किया। एनसीसी यूनिट ने उन्हें एक्स-सीएसएम कहकर याद किया क्योंकि उन्होंने साथी कैडेट्स को उदाहरण से प्रेरित किया। एनसीसी की मिलिट्री जैसी ट्रेनिंग ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से सेना के लिए तैयार किया। अक्षिता ने बताया कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है। जहां उनको देश की राष्ट्रपति के साथ तिरंगा झंडा फहराने का मौका मिला है। राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद 27 तोपों की सलामी भी दी जाएगी। अक्षिता की माता सुनीता ने भी इसे गर्व का क्षण बताया।

राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर उत्तर प्रदेश दिवस समारोह के शुभारंभ पर बोले केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह

लखनऊ. देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर उत्तर प्रदेश दिवस समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान गृह मंत्री ने प्रदेश की जनता से भावनात्मक और निर्णायक अपील करते हुए कहा कि आने वाले चुनाव में जात-पात से ऊपर उठकर वंशवादी पार्टियों को पूरी तरह रिजेक्ट करें और फिर से एक बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलाएं। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश को लेबर सोर्स स्टेट कहा जाता था, लेकिन आज यह भारत की इकोनॉमी का फोर्स स्टेट बन चुका है। गृह मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास के लिए, उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए और देश की सुरक्षा के लिए एक बार फिर यहां पूर्ण बहुमत की, प्रचंड बहुमत की भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनानी आवश्यक है। ये परिवारवादी पार्टियां चाहे कांग्रेस हो,  समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी, इस उत्तर प्रदेश का कल्याण नहीं कर सकतीं। उत्तर प्रदेश का कल्याण केवल और केवल भारतीय जनता पार्टी ही कर सकती है। प्रदेश को एक बार फिर सही दिशा में आगे बढ़ाने का निर्णय लेना होगा अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश हर काल खंड में देश को सुरक्षित करने वाला राज्य बना है और आज उन्हें गर्व है कि फिर से एक बार इस प्रदेश में देशभक्ति की लौ जागृत हो चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2014, 2017, 2019 व 2022 में उत्तर प्रदेश की जनता ने भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया और अगला साल चुनाव का साल है, जिसमें प्रदेश को एक बार फिर सही दिशा में आगे बढ़ाने का निर्णय लेना होगा। मोदी व योगी ने उत्तर प्रदेश के भीतर विकास की सारी संभावनाओं को तराशा गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के भीतर विकास की सारी संभावनाओं को तराशकर अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया है। पीएम मोदी ने पूरे उत्तर प्रदेश को नेशनल हाईवे नेटवर्क से जोड़ने का काम किया है। आज उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है, जहां सबसे अधिक एयरपोर्ट हैं। भारत सरकार ने प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की, जहां ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि यह जो परिवर्तन देश के अंदर दिखाई दे रहा है, उसमें योगी सरकार की बड़ी भूमिका है। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूत किया गया, कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद किया गया और हर गरीब के कल्याण के लिए ढेर सारी योजनाओं को जमीन पर उतारा गया। भाजपा सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है कि हर गांव तक 24 घंटे में कम से कम 20 घंटे बिजली जरूर पहुंचे। गृह मंत्री ने दोहराया कि आने वाले चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश का हर मतदाता जात-पात से ऊपर उठकर वंशवादी पार्टियों को रिजेक्ट करे और फिर से एक बार भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर महान राज्य उत्तर प्रदेश के सभी वासियों को अनंत शुभकामनाएं देते हुए वंदे मातरम और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपना संबोधन आगे बढ़ाया। उत्तर प्रदेश दिवस समारोह का भव्य शुभारंभ राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर आयोजित समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने सबसे पहले दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने भारत माता की जय और जय श्रीराम का उद्घोष किया और उपस्थित जनसमूह ने भी उनका साथ दिया। उत्तर प्रदेश से आए सभी लोगों को राम-राम कहते हुए उन्होंने देश, दुनिया में रहने वाले सभी प्रदेशवासियों को उत्तर प्रदेश दिवस की शुभकामनाएं दीं। 15 अगस्त 2047 तक उत्तर प्रदेश पूर्ण विकसित प्रदेश बनकर विकसित भारत का एक अहम राज्य होगा अमित शाह ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य के साथ-साथ विकसित उत्तर प्रदेश का निर्माण किया जा रहा है। जब 15 अगस्त 2047 को देश की आजादी की शताब्दी मनाई जाएगी, तब उत्तर प्रदेश पूर्ण विकसित प्रदेश बनकर विकसित भारत का एक अहम राज्य होगा। उत्तर प्रदेश भारत की धड़कन है और भारत की आत्मा भी। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश भारत के विकास का इंजन बनने जा रहा है। उत्तर प्रदेश युग-प्रवर्तकों की पवन भूमि गृह मंत्री ने कहा कि इस भूमि को प्रभु श्रीराम, श्रीकृष्ण, बाबा विश्वनाथ, महावीर व बुद्ध जैसे अनेक युग-प्रवर्तक महानुभावों ने पावन किया है। उन्होंने राष्ट्र प्रेरणा स्थल की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि यहां डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आसमान छूती मूर्तियां आने वाले दशकों तक देश को दिशा देने का काम करेंगी। कूड़े के पहाड़ से प्रेरणा स्थल तक अमित शाह ने कहा कि जहां आज यह भव्य प्रेरणा स्थल खड़ा है, वहां कभी 65 एकड़ में कूड़े का पहाड़ था। भाजपा सरकार ने कूड़े को कंचन में बदलने की व्यवस्था की और यह स्थान आज पूरे उत्तर प्रदेश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। युवाओं को ब्याज-मुक्त लोन गृह मंत्री ने बताया कि हर साल एक लाख युवाओं को पांच लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त लोन दिया जा रहा है, जिसमें 10 प्रतिशत अनुदान भी शामिल है। अब तक 1,30,000 युवाओं को 5,322 करोड़ रुपये का लाभ मिल चुका है। ओडीओपी और उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान गृह मंत्री ने कहा कि 2017 में जब दिल्ली में यूपी का घोषणा पत्र बन रहा था, तब वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट की कल्पना की गई थी। उस समय लोग संशय में थे, लेकिन डबल इंजन सरकार के प्रयासों से आज यह योजना न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश में फैल चुकी है। इससे कारीगरों, युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। उत्तर प्रदेश के हर जिले का व्यंजन मेला आज प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और पहचान को दुनिया के सामने रख रहा है। कार्यक्रम में पांच विशिष्ट व्यक्तित्वों को उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान प्रदान किया गया। अमित शाह ने विशेष रूप से डॉ हरिओम पंवार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज को जागरूक करने का उल्लेखनीय कार्य किया है। फूड बास्केट से लेकर फोर्स स्टेट तक अमित शाह ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश देश का फूड बास्केट बन चुका है। पिछले तीन वर्षों में … Read more

पंजाब में खेत में खोदे गहरे गड्ढे में गिरने से 9 वर्षीय बच्चे की मौत

जालंधर. बसंत पंचमी के दिन शहर में हुई मूसलाधार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही। इसी दौरान मकसूदा क्षेत्र में सुरानसी पेट्रोल पंप के पास एक किसान ने बरसाती पानी से फसल को बचाने के लिए अपने खेत में करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खुदवाया था। दोपहर बाद बारिश थमने पर इलाके के बच्चे पतंग उड़ाने लगे। इसी दौरान पतंग लूटने के लिए कुछ बच्चे खेत की ओर दौड़े, तभी एक 9 वर्षीय बच्चा खेत में बने गहरे गड्ढे में गिर गया। बच्चे के साथ मौजूद अन्य बच्चे घबरा गए और घर चले गए, लेकिन उन्होंने इस घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। जब बच्चा देर शाम तक घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिजनों ने 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही थाना नंबर एक की पुलिस मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान रात करीब 8 बजे खेत में बने गहरे गड्ढे से बच्चे का शव बरामद किया गया। मृतक बच्चे की पहचान शिवम के रूप में हुई है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतक बच्चे के परिजनों ने खेत मालिक किसान पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि निजी लाभ के लिए इतना गहरा और असुरक्षित गड्ढा खोदना उनके बच्चे की मौत का कारण बना। परिजनों ने प्रशासन से दोषी किसान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं थाना नंबर एक के प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

फिल्मों से चमकेगा छत्तीसगढ़: चित्रोत्पला फिल्म सिटी रचेगी रचनात्मक अर्थव्यवस्था का नया अध्याय

रायपुर चित्रोत्पला फिल्म सिटी छत्तीसगढ़ की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देगी नई गति छत्तीसगढ़ का बरसों पुराना सपना आज साकार हो गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के ग्राम माना-तूता में चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का किया भूमि पूजन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण की आधारशिला रखी। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों, फिल्म कलाकारों, निर्माता-निर्देशकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के अभिनय और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के माध्यम से प्रदेश के हजारों हुनरमंद कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। स्थानीय फिल्म निर्माताओं को फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार में प्रदेश की कला और कलाकारों को उचित सम्मान मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने भूमिपूजन के साथ ही फिल्म निर्माण और कन्वेंशन सेंटर से संबंधित विभाग को चार प्रस्ताव प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में फिल्म निर्माण गतिविधियों को नई गति मिलेगी और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को बड़े पर्दे पर स्थान मिलेगा। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि आज का यह अवसर छत्तीसगढ़ पर्यटन एवं फिल्म विकास उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल एक निर्माण परियोजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि राज्य के सांस्कृतिक, आर्थिक और रचनात्मक भविष्य की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण राज्य है और इस पहल से पर्यटन के साथ-साथ फिल्म उद्योग को भी नया आयाम मिलेगा। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ फिल्म निर्माताओं के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है। हमारी स्पष्ट योजना है कि आगामी दो वर्षों के भीतर इन परियोजनाओं को पूर्ण कर राज्य को समर्पित किया जाएगा। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप, सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक  अनुज शर्मा, विधायक  इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष  नीलू शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष  नवीन अग्रवाल तथा पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने फिल्म सिटी के प्रस्तावित मास्टर प्लान का किया अवलोकन चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के भूमिपूजन अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने परियोजना के प्रस्तावित मास्टर प्लान का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं तथा परियोजना पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन अवसर पर पर्यटन विभाग को मिले 4 प्रस्ताव चित्रोत्पला फिल्म सिटी के भूमिपूजन के साथ ही पर्यटन विभाग को फिल्म निर्माण एवं कन्वेंशन सेंटर में इकाइयों की स्थापना हेतु चार प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। समारोह के दौरान ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपे गए। गदर फिल्म के निर्माता  अनिल शर्मा ने अपनी आगामी फिल्म का निर्माण चित्रोत्पला फिल्म सिटी में करने का प्रस्ताव दिया। इंडिया एक्सपोजीशन मार्ट लिमिटेड के चेयरमेन  राकेश कुमार ने ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में इंटरनेशनल एक्जीबिशन सेंटर एवं ट्रेड मार्ट के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स के चेयरमेन  नीरज खन्ना ने यहां वर्ल्ड क्लास हैंडीक्राफ्ट्स एंड गिफ्ट फेयर आयोजित करने का प्रस्ताव दिया। वहीं एटी फिल्म्स हॉलीवुड से  आशुतोष वाजपेयी ने हॉलीवुड फिल्मों एवं स्ट्रीमिंग वीडियो कंटेंट को चित्रोत्पला फिल्म सिटी में लाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को सौंपा। उल्लेखनीय है कि राज्य में फिल्म टूरिज्म की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की “कैपिटल इन्वेस्टमेंट हेतु राज्यों को विशेष सहायता – ग्लोबल स्तर के आइकॉनिक पर्यटन केंद्रों का विकास” योजना के अंतर्गत इन दोनों परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना के तहत चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण हेतु 95.79 करोड़ रुपये तथा ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण हेतु 52.03 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इन दोनों परियोजनाओं का क्रियान्वयन पीपीपी (पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के अंतर्गत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र से लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश की भी संभावना है। परियोजनाओं को दो वर्षों की समयावधि में पूर्ण किए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी एवं ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाएंगे। फिल्म सिटी के निर्माण से छत्तीसगढ़ में स्थानीय एवं अन्य वाणिज्यिक फिल्मों और वेब सीरीज़ के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य के प्राकृतिक दृश्य, पर्यटन स्थल एवं समृद्ध संस्कृति फिल्म शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। फिल्म सिटी में गांव, शहर एवं गलियों के सेट, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, जेल एवं पुलिस चौकी, स्कूल-कॉलेज, मंदिर एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों के सेट, स्कल्प्चर गार्डन, शॉपिंग स्ट्रीट, प्रोडक्शन ऑफिस, स्टूडियो, प्रशासनिक भवन एवं पार्किंग विकसित की जाएगी। साथ ही पर्यटकों के लिए टॉय म्यूजियम, स्नो वर्ल्ड, होटल, रेस्टोरेंट, मल्टीप्लेक्स एवं एक्सपीरियंस सेंटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर में लगभग 1500 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक कन्वेंशन हॉल विकसित किया जाएगा, जिसमें मीटिंग, कॉन्फ्रेंस, बैंक्वेट, रेस्टोरेंट, अतिथि कक्ष, जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल एवं प्रशासनिक … Read more

पॉज मोड में ऑपरेशन सिंदूर, डीके त्रिपाठी ने रांची में दी हुंकार

रांची  नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके त्रिपाठी (DK Tripathi) ने अपने झारखंड दौरे के दौरान राजधानी रांची में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि पॉज (विराम) मोड में है. इस युद्ध में भारतीय सेना ने पराक्रम का परिचय दिया. हम युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थे. जरूरत पड़ने पर अपनी ताकत दिखाने में भी सक्षम थे, लेकिन प्रतिद्वंदी ने लड़ने का मौका ही नहीं दिया. एडमिरल त्रिपाठी शुक्रवार को सीसीएल सभागार में आयोजित विकसित भारत-2047 संवाद कार्यक्रम में स्कूली विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे. सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं डीके त्रिपाठी (DK Tripathi) ने कहा कि भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. बिना सुरक्षा के कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता. इसमें वर्दी और बिना वर्दी वाले, दोनों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है. सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं. अगले दो दशकों की यात्रा से ही विकसित भारत का सपना पूरा होगा. इसके कई लक्ष्य हैं. ये लक्ष्य बहुत कठिन हैं, लेकिन सरकार की मंशा स्पष्ट है. इसके लिए शत-प्रतिशत शिक्षा का लक्ष्य पूरा करना होगा. सभी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देनी होंगी. इनोवेशन (नवाचार) में ग्लोबल लीडर बनना होगा. दूसरों पर निर्भरता को कम करना होगा. विकसित भारत कमजोरी से रेसिलिएंस (लचीलापन) की ओर बढ़ने का मार्ग है. यह केवल नीति-निर्माताओं से संभव नहीं होगा. आम लोगों की भागीदारी जरूरी है. इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. भारत की ओर गलत नजर उठी, तो जवाब होगा सख्त इससे पहले नौसेना प्रमुख ने रजप्पा में प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिके के दर्शन किए और वहां पूजा की. रजरप्पा में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है कि भारत के खिलाफ किसी तरह की गलत सोच या मंशा बर्दाश्त नहीं की जायेगी. भारत की ओर गलत नजर उठी, तो सख्त जवाब दिया जायेगा. देश की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्षम है. किसी भी चुनौती का सामना मजबूती के साथ करने के लिए तैयार है. आवश्यक होने पर कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी. एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि देश की सुरक्षा आज मजबूत हाथों में है. समुद्री सीमाओं की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. भारत के खिलाफ किसी प्रकार की गतिविधि का तत्काल और प्रभावी जवाब दिया जायेगा.

सीएम ने भोपाल में ‘संध्या छाया’ वृद्धाश्रम का लोकार्पण, 327 करोड़ की पेंशन राशि का वितरण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल की पत्रकार कॉलोनी में नव-निर्मित सर्वसुविधायुक्त सशुल्क वृद्धाश्रम ‘संध्या छाया’ का लोकार्पण किया. इस अवसर पर उन्होंने राज्य स्तरीय स्पर्श मेला-2026 के विजेताओं को सम्मानित किया और सिंगल क्लिक के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को 327 करोड़ की राशि अंतरित की. लोकार्पण समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-जन का कल्याण मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है. वरिष्ठ नागरिकों के सम्मानजनक जीवन के लिए सरकार लगातार नई पहल कर रही है. परिसर में प्रेयर हॉल, लाइब्रेरी भवन में वातानुकूलित कमरें, टीवी, फ्रिज, गर्म और ठंडा पानी, निजी बालकनी की व्यवस्था हर कमरे में है. खासबात यह है कि संध्या छाया में डॉक्टर परामर्श की भी सुविधा है. भवन में फिजियोथेरिपी सेंटर, आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुविधा भी दी गई है. परिसर में प्रेयर हॉल, लाइब्रेरी, और ओपन मेस हॉल भी बनाया गया है. इस सशुल्क वृद्धाश्रम के संचालन की जिम्मेदारी सेवा भारती को सौंपी गई है. सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम आश्रम में सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सांध्य छाया के संचालन में सामाजिक भागीदारी दर्ज कराते हुए सेवा भारती मध्य भारत को इसके संचालन का जिम्मा दो वर्षों के लिए दिया गया है. वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठजन को प्रतिमाह कमरे के आकार के अनुसार पृथक-पृथक राशि देनी होगी. एक नजर में कमरों का किराया एक डबल बेड 60 स्का. मीटर कमरा- 39,490 रुपए, डबल बेड 90 स्का. मीटर 43,490 रुपए, डबल बेड 56.5 स्का. मीटर 38,490 रुपए, सिंगल बेड 49.2 स्का. मीटर 49,990 रुपए, सिंगल बेड 35 स्का. मीटर 47,990 रुपए तथा सिंगल बेड 33.5 स्का. मीटर 45,990 रुपए प्रतिमाह चार्ज देना होगा.  

राज्यपाल पटेल का बयान: विविधता में एकता से सशक्त होता है भारत

विविधता में एकता से सशक्त होता भारत : राज्यपाल  पटेल राज्यों की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का उत्सव  लोकभवन में मना चार राज्यों का संयुक्त स्थापना दिवस समारोह भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह केवल प्रशासनिक इकाइयों के गठन का स्मरण नहीं, बल्कि भारत की संघीय संरचना, सांस्कृतिक समृद्धि और राष्ट्रीय अखंडता के उत्सव का पावन प्रसंग है। उन्होंने “विविधता में एकता” को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” का संकल्प इसी भावना की जीवंत अभिव्यक्ति है। राज्यपाल श्री पटेल मणिपुर, मेघालय और उत्तर प्रदेश राज्यों के संयुक्त स्‍थापना दिवस समारोह को शनिवार को लोकभवन में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्यों के स्‍थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी। इस अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल को निदेशक राष्ट्रीय मानव संग्रहालय प्रो. अमिताभ पांडेय ने चित्रकार दोरेन सिंह द्वारा निर्मित केनवास पेंटिंग “पुंग चोलम ऑफ मणिपुर” भेंट की। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, राज्यपाल के अपर सचिव श्री उमाशंकर भार्गव भी मौजूद थे। राज्यपाल श्री पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” अभियान ने देश की विविधताओं को एक सूत्र में पिरोकर राष्ट्रीय एकता को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने बताया कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर 1 नवम्बर से 15 नवम्बर तक भारत पर्व के आयोजन में देश के सभी राज्यों की संस्कृतियों को एक मंच पर लाया जाता है। एकता नगर गुजरात में हुए गत वर्ष के समारोह में 11 नवम्बर को मध्यप्रदेश, मणिपुर एवं मेघालय का संयुक्त समारोह आयोजित हुआ था। इसमें राज्यों के राज्यपाल एवं मंत्री शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस का यह संयुक्त आयोजन इस सत्य को पुनः स्थापित करता है कि भौगोलिक दूरी के बावजूद हमारी आत्मा, चेतना और संस्कार एक हैं। उत्तर भारत की आध्यात्मिक चेतना, पूर्वोत्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और पश्चिमी भारत की समुद्री विरासत का संगम भारत को विश्व मंच पर एक सशक्त और प्रेरक राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करता है। राज्यपाल श्री पटेल ने स्थापना दिवस को क्षेत्रीय अस्मिताओं के सम्मान और राष्ट्रीय एकता को और अधिक सुदृढ़ करने के सामूहिक संकल्प का विशेष प्रसंग बताया। उन्होंने विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। सभी नागरिकों से सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भारत की सांस्कृतिक विविधता को गौरव के रूप में अपनाने और “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया। राज्यों के संयुक्त स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्यमंत्री, जेल विभाग श्री दारा सिंह ने मध्यप्रदेश में रह रहे उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने के लिए बधाई दी। उन्होंने मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश की लोक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रस्तुतियों को देखकर ऐसा लगा मानो वे स्वयं उन राज्यों में पहुँच गए हों। उन्होंने बताया कि देश के 50% एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश में हैं, तीन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे संचालित हैं और अयोध्या में चौथा बन रहा है। नोएडा मोबाइल निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुका है। उन्होंने लोकभवन में समारोह आयोजन के लिए राज्यपाल के प्रति आभार ज्ञापित किया। राज्यों के संयुक्त समारोह में मणिपुर के राज्यपाल श्री अजय कुमार भल्ला और मेघालय के राज्यपाल श्री सी.एच. विजयशंकर के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश राज्यों की संस्कृति, सभ्यता और विकास को दर्शाती लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। मणिपुर राज्य की ओर से "दि गोल्डन लैंड ऑफ लियंगमई" लोक गीत की प्रस्तुति दी गई। गीत के माध्यम से लियंगमई जनजाति, अपनी पूर्वजों की भूमि को 'स्वर्ण भूमि' के रूप में सराहा गया। लोक नृत्य “थोगल जागोई” की प्रस्तुति दी गई। मेघालय राज्य की ओर से लोक गीत "पोर तमास" गीत की प्रस्तुति दी गई, जिसमें पारंपरिक वाद्यों की गूंज के संगम में अद्भूत समा बांध दिया। उत्तर प्रदेश राज्य की प्रस्तुति में प्रदेश की विभिन्न संस्कृतियों के लोक गीतों छठ पूजा, कजरी, जट-जटिन, रासलीला, होरी और फगुआ के मोतियों को एक माला में पिरोते हुए राज्य की सांस्कृतिक वैभव को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का संचालन आभा शुक्ला ने किया। इस अवसर पर लोकभवन के अधिकारी, स्‍थापना दिवस समारोह से संबंधित राज्यों के मध्यप्रदेश वासी उपस्थित थे।