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घर का मुख्य द्वार किस दिशा में हो तो मिले अपार धन और खुशहाली?

वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन करने से जातक का जीवन खुशियों से भरा रहता है। वास्तु की दृष्टि से घर के मुख्य द्वार एक अहम हिस्सा होता है, इसलिए मुख्य द्वार सही दिशा में होना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होगा। शुभ दिशा में घर का मुख्य द्वार होने से सकारात्मकता और मानसिक शांति बनी रहती है। साथ ही तनाव की समस्या दूर होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में होना चाहिए घर का मुख्य द्वार। कौन-सी दिशा मुख्य द्वार के लिए है शुभ?     वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार लिए उत्तर दिशा शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। इससे घर में धन का प्रभाव बना रहता है।     इसके अलावा पूर्व दिशा को भी घर के मुख्य द्वार के लिए उत्तम माना जाता है। यह दिशा सूर्य देव की है। इस दिशा में मुख्य द्वार होने से जातक को मान-सम्मान मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।     अगर आप घर में शांति का माहौल चाहते हैं, तो घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में होना चाहिए। इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इन बातों का रखें ध्यान     मुख्य द्वार घर के अंदर की तरफ खुलना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।     इसके अलावा मुख्य द्वार घर के सभी दरवाजों से बड़ा चाहिए।     मुख्य पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार पर गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता है।     मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है     मुख्य द्वार पर पेड़-पौधें लगाएं। इससे गेटिविटी दूर रहती है।     द्वारा पर हमेशा पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।     अगर आप वास्तु के इन नियम का पालन करते हैं, तो आपक घर में हमेशा खुशहाली और सकारात्मकता का वास होगा।  

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने नंदनवन जंगल सफारी का किया निरीक्षण

रायपुर. छात्रों से साझा किए विद्यार्थी जीवन के अनुभव पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री   राजेश अग्रवाल ने नया रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी का दौरा कर पर्यटन सुविधाओं और वन्यजीव संरक्षण व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जंगल सफारी भ्रमण में आए छात्रों से संवाद कर प्रेरणादायी अनुभव साझा किए। मंत्री   अग्रवाल ने नंदनवन जंगल सफारी के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर पर्यटन संभावनाओं का मूल्यांकन किया। यह स्थल न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को बेहतर प्रबंधन और आधुनिक सुविधाओं के निर्देश दिए। छात्रों के साथ आत्मीय संवाद इस अवसर पर जंगल सफारी भ्रमण पर आए पीएम   राजा सर्वेश्वरदास शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, राजनांदगांव और गुरुकुल विद्यालय, भाटापारा के छात्रों से संवाद किया। मंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन के रोचक किस्से सुनाए और सभी को मेहनत, अनुशासन व उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया। मंत्री   अग्रवाल ने कहा कि नंदनवन जंगल सफारी राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल बनेगा, जो राज्य में पर्यावरण जागरूकता और शैक्षिक यात्राओं को बढ़ावा देगा।

यूपीआई टेक्स में मध्यप्रदेश के 12 उद्यमों ने की सहभागिता

भोपाल उ.प्र. की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपो यूपीआई टेक्स में एमएसएमई विभाग के सहयोग से मध्यप्रदेश की 12 चयनित एमएसएमई इकाइयों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इन इकाइयों द्वारा फैब्रिक्स, पर्ल (मोती) निर्माण, पैकेजिंग, बांस आधारित उत्पाद तथा मसाला उद्योग सहित विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। मध्यप्रदेश के इन मंडपों की आगंतुकों एवं व्यापारिक प्रतिनिधियों द्वारा सराहना की गयी। सहभागी 12 एमएसएमई इकाइयों में से 2 महिला उद्यमियों की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जो महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है। एमएसएमई विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा एक्सपो में भाग लेने वाली सभी इकाइयों के लिए स्टॉल स्थापना सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गईं। इस प्रकार की प्रदर्शनियों में सहभागिता से प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को नए बाजार, व्यापारिक संपर्क तथा निर्यात के अवसर प्राप्त होते हैं। मध्यप्रदेश एमएसएमई विभाग भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।  

दो दिवसीय सुरक्षित वाहन चालन कोर्स संपन्न

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से पीटीआरआई में हुआ आयोजन भोपाल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री मो. हम्मीद शाहिद अबसार के निर्देशन पर पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) द्वारा मध्यप्रदेश में सड़क पर होने वाली वाहन दुर्घटनाओं एवं दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से निरीक्षक (चालक) से आरक्षक (चालक) स्तर के अधिकारी/ कर्मचारियों को सुरक्षित वाहन चालन कोर्स के माध्यम से दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना, जिसमें पदयात्रियों तथा सायकिल, वाहन चालकों को प्राथमिकता दी गयी हो और भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या एवं सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु की संख्या में कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करना है । सड़क सुरक्षा को मूलभूत यातायात सेवा में अविभाज्य अंग के रूप में मान्यता देना है। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई श्री टी.के. विद्यार्थी द्वारा 4-ई” के प्रमुख सूत्रों जैसे एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इनफोर्समेंट एवं एमरजेंसी केयर की तथा सड़क दुर्घटनाओं की भयावहता को प्रशिक्षणार्थियों के सम्मुख रखा। उनके द्वारा आरक्षक चालक को सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से विभाग की बैकबोन के रूप में उनकी जिम्मेदारी से अवगत कराया गया। इस दौरान पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्री अभिजीत कुमार रंजन, श्री राजेश मिश्रा, श्री विक्रम रघुवंशी, उपुअ श्री हिमांशु कार्तिकेय तथा अन्य प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस सत्र में सुरक्षित वाहन चालन को दृष्टिगत रखते हुए कोर्स के प्रथम दिन वाहन से सम्बन्धी जानकारियों में एडवांस टेक्नोलॉजी एण्ड सिस्टम ऑफ व्हीकल के सम्बन्ध में विशेषज्ञ व्याख्याता पुलिस आईटीआई श्री लोकेश कुमार राठौर द्वारा जानकारी प्रदाय की गयी। उप-निरीक्षक, सेवानिवृत्त श्री राशीद खान आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारी द्वारा भी वाहन चालन सुरक्षा एवं उससे सम्बन्धी सावधानियों की बारीकियां बताई और व्याख्यान के दौरान प्रशिक्षणार्थियों द्वारा किये गए प्रश्नों का तथ्यात्मक उत्तर देकर संतुष्ट किया गया। प्रशिक्षण से सम्बन्धी मुख्य जानकारी विषयक व्ही.आई.पी. सिक्यूरिटी से सम्बन्धी संकेतकों के प्रयोगों एवं कारकेड के दौरान कर्तव्यों के वहन का व्याख्यान उपुअ. श्री हर्ष शर्मा द्वारा लिया गया। इसके बाद वाहन के दैनिक रखरखाव की जानकारी विशेषज्ञ श्री राजन बी. लक्ष्मण द्वारा दी गयी। कोर्स के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई श्री टी.के. विद्यार्थी द्वारा उज्जवल भविष्य की शुभकामनाओं सहित प्रमाण- पत्र प्रदाय किया गया।  

मताधिकार पर हमला! भोपाल में फर्जी आवेदन से वोटरों को हटाने की कोशिश – कमलनाथ

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि फर्जी आवेदनों के जरिए मतदाताओं के मताधिकार को छीनने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। राजधानी भोपाल में नाम कटवाने के लिए फर्जी आवेदनों का मामला सामने आने पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर फर्जीवाडा रुकने का नाम नहीं ले रहा है।  मध्य प्रदेश में ऐसे बहुत से मामले सामने आए हैं जहां लोगों ने दूसरों के नाम से फॉर्म सात भरके मतदाता सूची में मौजूद नाम काटने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि अकेले भोपाल में ही इस तरह के नौ हजार से अधिक मामले सामने आए हैं। फॉर्म सात के जरिए इस तरह से नाम कटने के फर्जी आवेदन देश के मतदाता के अधिकार को छीनने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा की गई व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि जब चुनाव आयोग द्वारा तैनात बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता की जांच कर रहे हैं तो उन्हीं को सुनिश्चित करना चाहिए कि कौन वहां रह रहा है या नहीं। उन्होंने आगे कहा कि गैर सरकारी व्यक्तियों को किसी का भी नाम कटवाने का आवेदन देकर चुनाव आयोग ने वैध मतदाता के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। वोट चोरी के षड्यंत्र को हर हाल में खत्म करने की जरूरत है। दरअसल, राजधानी में लगभग नौ हजार ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें फर्जी आवेदनों के जरिए मतदाता के नाम काटने को कहा गया है। इसे प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया है और पूरे मामले की जांच की बात कही है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एक तरफ चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं, वहीं वोट चोरी को लेकर भाजपा को घेरने की कोशिश की है।

बस्तर के दुर्गम इलाकों में सालों से अधूरी 41 महत्वपूर्ण सड़कें अब हुई पूर्ण

रायपुर. ग्राम सचिवालय को पुनः प्रांरभ कर पंचायतों को किया जाएगा सशक्त उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा है कि ग्रामीण अंचल की समस्याओं की तेजी से निराकरण के लिए पुनः ग्रामीण सचिवालय प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में सबसे तेज गति से पीएम आवास बनाने के मामले में छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर है। यहां प्रतिदिन सर्वाधिक पीएम आवास बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के ग्रामीण अंचलों में पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रथम केबिनेट में ही 18 लाख पीएम आवास स्वीकृत किए गए थे। इन आवासों को तेजी से पूर्ण कराया जा रहा है। उक्त बातें उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने आज संवाद भवन, नवा रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में पत्रकारों को संबोधित करते हुए बताई। इस अवसर पर उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बीते दो वर्षों में किए गए नवाचारों, उपलब्धियों तथा भावी कार्ययोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि मोर आवास मोर अधिकार को लेकर पहले हमने संघर्ष किया था, अब परिणाम का समय है। चुनाव के बाद शासन ने 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी, जिसमें वर्षों से अधूरे, प्रतिक्षा सूची में शेष, आवास प्लस में शामिल एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के आवासों को स्वीकृति प्रदान की थी। उन्होंने बताया कि न सिर्फ आवासहीनों बल्कि 3 हजार से अधिक आत्मसमर्पित एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को आवास प्रदान किये गये हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों के 33 हजार से अधिक लोगों को पीएम जनमन तथा नियद नेल्ला नार के तहत नक्सल प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों में 9 हजार से अधिक लोगों के आवास निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें 2 हजार से अधिक आवास पूर्ण भी हो चुके हैं। राज्य में आवास निर्माण को गति देने में स्वसहायता समूह की दीदीयों ने भी अहम भूमिका  निभाई है, आवास निर्माण के लिए गांव-गांव तक बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई के लिए कहीं डीलर दीदी बनीं तो कहीं सेंट्रिंग प्लेट निर्माण कर गांव में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की। आवास हितग्राहियों को सेंटरिंग प्लेट एवं अन्य निर्माण सामाग्री की आपूर्ति के लिए 8000 से अधिक डीलर दीदी एवं घर बनाने के लिए आरसेटी द्वारा एवं प्रोजेक्ट उन्नति के माध्यम से 5000 से अधिक राजमिस्त्रियों को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया गया है।  उन्होंने कहा कि हमने चुनाव के समय गांव-गांव मंे वित्तीय लेनदेन की व्यवस्था सुनिश्चित करने का वादा किया था, आज प्रदेश में दो चरणों में 6,195 अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से लगभग 919 करोड़ रूपये से अधिक राशि का ट्रांजेक्शन किया जा चुका है। अब लोगों को अपना पैसा निकालने और बैंकिंग कार्यों के लिए गांव से बाहर जाने की जरूरत नहीं है।  इस अवसर पर उन्होंने बताया कि राज्य में समर्थ पंचायत पोर्टल के द्वारा पंचायत करों का संग्रहण ऑनलाईन के माध्यम से भी प्रारंभ कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का सांकरा देश का पहला ग्राम पंचायत है जहां पर टैक्स का संग्रहण यूपीआई द्वारा किया गया। इस संबंध में विगत दिनों केन्द्रीय पंचायत मंत्रालय के सचिव के द्वारा भी इसकी सराहना करते हुए महराष्ट्र की पंचायतों को भी इससे प्रेरणा लेने की बात कही थी। अब बम्बई भी रायपुर से सीखेगा किस प्रकार प्रदेश के गांव-गांव में डिजिटल क्रांति को अपनाया जा रहा है।       प्रदेश में परिसंपत्तियों का भी ऑनलाईन अभिलेखीकरण ग्राम सम्पदा मोबाईल एप द्वारा किया जा रहा है ताकि गांव में निर्मित अधोसंरचना की जानकारी ऑनलाईन प्राप्त हो एवं ग्राम विकास के लिए बेहतर योजना बनाई जा सके। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय के परिपालन में नवीन आरक्षण प्रावधान को लागू कर त्रिस्तरीय पंचायतों का चुनाव समय पर कराने में छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्य रहा है, जबकि महाराष्ट्र एवं तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों में अब तक यह संभव नहीं हो पाया है।      राज्य में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ उनके आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए राज्य में 368 महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है जिसमें से 137 महतारी सदन पूर्ण हो चुके है। सरकार ने घोषणा पत्र में किये गये वादे को पूरा करते हुए पंचायत सचिवों की नवीन वेतनमान के अंतर की एरियर्स राशि लगभग 49.30 करोड़ रूपए प्रदान किया है। पीएम जनमन सडकों के निर्माण में स्वच्छताग्रही दीदियों से प्राप्त वेस्ट प्लास्टिक का प्रयोग कर महासमुंद जिले में अमेटी से कमारडेरा, डूमरपाली से कमारडेरा, मामा भांचा से कमारडेरा, जोरातराई से कमारडेरा सड़के बनाई गई है। उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों 41 ऐसी सड़कें थी, जो कई वर्षों से नहीं बन पायी थी आज उनका निर्माण पूर्ण हो गया है। आठ साल से लंबित सुकमा जिले की ताड़मेटला के तुमड़ीपारा सड़क, दंतेवाड़ा की 20 सालों से अधूरी कटेकल्याण कापानार रोड़ से नडेनार को पूर्ण किया  गया है।    उन्होंने बताया कि आजादी के बाद पहली बार विशेष पिछड़ी जनजाति की बसाहटों को जोड़ने के लिए पीएम जनमन द्वारा 807 सड़कें बनाई जा रहीे है। जशपुर के मनोरा विकासखंड स्थित दुर्गम पहाड़ी में बसे बंधकोना बी के पहाड़ी कोरवा एवं कवर्धा के शंभुपीपर में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की बसाहटों तक सड़कों का निर्माण किया गया है। पीएमजीएसवाय के चौथें चरण में लगभग 2500 कि.मी. से अधिक लंबाई की सड़कें राज्य में बनाई जाएगी। इन सड़कों के निर्माण की मॉनिटरिंग इसरो एवं जियो इमेजिंग के माध्यम से कराने हेतु योजना का निर्माण किया गया है जिससे मुख्यालय से ही राज्य में कहीं भी बन रही सड़कों की मॉनिटरिंग किसी भी समय की जा सकेगी।  उन्होंने बताया कि राज्य की स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा राज्य के महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ‘ का संचालन प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को किया जा रहा हैै। स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों का मानकीकरण कर उनकी मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग के लिए ‘छत्तीसकला‘ ब्रांड बनाया गया है। बस्तर की महिलाएं गांव में होने वाले वनोपजों का प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग का कार्य भी स्वयं कर रही है। आने वाले समय में दिल्ली, मुम्बई जैसे बड़े शहरों में भी ये महिलाएं अपने उत्पाद बेचती नजर आएंगी।  स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अतंर्गत राज्य में 1.86 लाख परिवारों के लिए शौचालय निर्माण पूर्ण … Read more

शिक्षा और कला का उत्सव: इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का भव्य दीक्षांत समारोह

रायपुर. राज्यपाल  रमेन डेका के हाथों 5 को डी.लिट्, 64 को शोध उपाधि तथा 236 विद्यार्थियों को मिला पदक राज्यपाल  रमेन डेका आज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के 17 वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल  डेका ने विभिन्न संकायों के सफल विद्यार्थियों को उपाधियाँ एवं स्वर्ण पदक प्रदान किए। उन्होंने कहा कि कला, संगीत और संस्कृति समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कला का उपयोग राष्ट्र निर्माण तथा समाज के कल्याण के लिए करने का आह्वान किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा, धरसींवा विधायक डॉ. अनुज शर्मा उपस्थित रहे। समारोह में  5 शोधार्थियों को डी.लिट् की उपाधि प्रदान की गई। 64 शोधार्थियों को शोध उपाधि प्रदान की गई। 236 विद्यार्थियों को पदक वितरण किया गया जिसमें 232 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं 4 विद्यार्थियों को रजत पदक दिया गया। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते राज्यपाल ने कहा कि खैरागढ़ का यह संगीत विश्वविद्यालय राजकुमारी इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के नाम से जाना जायेगा। इसके लिये उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करने कहा।  डेका ने कहा कि भारतीय संस्कृति की बहुमूल्य धरोहर ललित कलाओं के विकास में इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का अविस्मरणीय योगदान है। लघु भारत का स्वरूप इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय दानवीर राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी के दान का प्रतिफल है। अपनी राजकुमारी इन्दिरा की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए अपने महल को दान देकर उन पुण्यात्माओं ने छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया। कला राष्ट्र के जीवन का एक मुख्य अंग है। संगीत, चित्रकला, मूर्तिकला, स्थापत्य और साहित्य का सम्बन्ध प्रत्यक्ष रूप से जीवन और समाज से रहा है। आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य यंत्रवत और संवेदनहीनता की ओर बढ़ रहा है, इसे हमें रोकना है। ललित कलाओं के माध्यम से हम मानव जीवन में सरसता ला सकते हैं। कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय के सत्रहवें दीक्षान्त समारोह में पदक प्राप्तकर्ताओं एवं उपाधि धारकों को उनके स्वर्णिम भविष्य की कामना करते हुये उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुये उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि किसी भी देश अथवा समाज को सभ्य और सुसंस्कृत बनाने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुये  कुलपति प्रो.(डॉ.) लवली शर्मा ने कहा कि  दीक्षांत समारोह केवल प्रमाण-पत्र बांटने की रस्म नहीं है, यह अपनी उपलब्धियों के सिंहावलोकन और भविष्य के संकल्प का दिन है। मुझे गर्व है कि हमारे विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का परचम न केवल प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लहराया है।  कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने राजकुमारी शारदा देवी सिंह बावली नामपट्टिका का अनावरण किया। विश्वविद्यालय प्रांगण में स्थित यह बावली प्राचीन धरोहर है, जिसका संरक्षण किया जा रहा है। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता, शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचार एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

PAK को करारा जवाब: BSF की ताबड़तोड़ फायरिंग से भागे तस्कर, बड़ी साजिश नाकाम

चंडीगढ़ पंजाब के फाजिल्का में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान से भेजा गया हथियारों और हेरोइन का भारी जखीरा बरामद किया गया है। बीएसएफ की बीओपी जी-जी-3 के इलाके में देर रात पाकिस्तानी तस्कर इस खेप को सीमा पार करने की फिराक में थे। लेकिन पहले से अलर्ट बीएसएफ जवानों ने उनके मंसूबे नाकाम कर दिए। बीएसएफ जवानों ने तस्करों पर 60 राउंड फायरिंग की, जिस से डर कर वे पाकिस्तान की तरफ भाग गए। इसके बाद बीएसएफ और पंजाब पुलिस के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल ने संयुक्त रूप से इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्च के दौरान पाकिस्तान से भेजा गया हथियारों और हेरोइन का भारी जखीरा बरामद हुआ। यह जानकारी पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने एक्स पर दी।   विदेशी पिस्टल और हेरोइन की बड़ी खेप मिली फाजिल्का में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित बीएसएफ की बीओपी जी-जी-3 इलाके में देर रात हलचल हुई। यहां पाकिस्तानी तस्कर दो बैगों में भर कर हथियार और हेरोइन की बड़ी खेप भारत में भेजने की फिराक में थे। बीएसएफ जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देख तुरंत कार्रवाई करते हुए फायरिंग की, जिसके बाद तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर पाकिस्तान की ओर भागने में कामयाब हो गए। सर्च के दौरान पाकिस्तान से भेजा गया हथियारों और हेरोइन का भारी जखीरा बरामद किया गया। पुलिस ने 2 किलो 160 ग्राम हेरोइन,11 ग्लॉक पिस्टल व 22 मैगजीन,1 बरेटा पिस्टल व 1 मैगजीन ,5 जिगाना पिस्टल व 10 मैगजीन, 3 नॉरिंको पिस्टल व 5 मैगजीन,1 गफ्फर सिक्योरिटी पिस्टल व 1 मैगजीन, कुल 20 पिस्टल, 39 मैगजीन, एक गन और 310 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। स्टेट स्पेशल सेल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क को खंगालने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। अमृतसर के सीमावर्ती गांव में चार हैंड ग्रेनेड और 40 किलो हेरोइन बरामद उधर, अमृतसर के हलका राजासांसी के गांव ओठियां के पास पुलिस ने चार हैंड ग्रेनेड और 40 किलो हेरोइन बरामद की है। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के माध्यम से यह खेप भेजी गई थी। एक पिस्तौल और कुछ जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। यह खेप गांव ओठियां के समीप गिरी थी, जिसे कुछ युवक मोटरसाइकिल पर लेकर जा रहे थे। उस समय गांव में सड़क निर्माण कार्य चल रहा था। वहां मौजूद लोगों और कर्मचारियों ने जब युवकों को रोका तो वे घबरा गए और मोटरसाइकिल वहीं छोड़कर फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मोटरसाइकिल सहित आसपास के इलाके की तलाशी ली। बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

UGC रूल्स पर SC की दोटूक चेतावनी, लगाई रोक; बोले– देश के सामाजिक ढांचे पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इन नियमों को लेकर देश भर में विवाद हो रहा था और सवर्ण समाज के लोगों ने ऐतराज जताया था। यह कहा जा रहा था कि इन नियमों में सवर्ण समाज को पहले से ही दोषी मान लिया गया है और जांच कमेटी में उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित नहीं किया गया है। इसके अलावा एससी, एसटी के साथ ही ओबीसी को भी भेदभाव के दायरे में लाए जाने को लेकर भी ऐतराज था। यह मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो बेंच ने अगले आदेश तक रोक लगा दी।   अदालत ने कहा कि फिलहाल इन नियमों पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक कमेटी के गठन की सलाह दी है, जो इन नियमों की समीक्षा करे। कोर्ट ने सरकार को सलाह दी है कि वह यूजीसी के इन नियमों की भाषा को देखे और नए सिरे से नियमों को जारी किया जाए। नए नियम आने तक 2012 वाले रेगुलेशन ही जारी रहेंगे। अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है। उस दिन केंद्र सरकार और यूजीसी यह जानकारी देंगे कि वह इन नियमों में समीक्षा के लिए क्या कर रहे हैं। इस तरह सरकार के पास करीब 50 दिनों का वक्त है, जिसमें उसे इन नियमों में समीक्षा को लेकर फैसला लेना है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा, 'यदि हमने दखल नहीं दिया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इससे समाज में बंटवारे की स्थिति पैदा होगी और उसके नतीजे खतरनाक होंगे। पृथमदृष्टया हमें लगता है कि इन रेगुलेशंस की भाषा स्पष्ट नहीं है। इसके बारे में एक्सपर्ट्स को विचार करना होगा और सही एवं स्पष्ट भाषा के साथ नए नियम जारी करने होंगे। यह भाषा ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी इन नियमों का बेजा इस्तेमाल न कर सके।' अदालत ने कहा कि सरकार और यूजीसी हमें 19 मार्च को इस संबंध में जवाब दे। याचिका में कहा गया था- सवर्णों को सुनवाई का अधिकार क्यों नहीं दरअसल याचिका में कहा गया था कि इन नियमों में सवर्णों को किसी भी तरह के भेदभाव की स्थिति में शिकायत का मौका नहीं दिया गया है। एससी, एसटी और ओबीसी को तो भेदभाव की शिकायत का अधिकार दिया गया है, लेकिन सवर्णों को ऐसा मौका नहीं मिलेगा। इसका अर्थ यह है कि उन्हें पहले ही अपराधी मान लिया गया है। इन दलीलों के साथ प्रदर्शन हो रहे थे और इसी के साथ अदालत में अर्जी दाखिल की गई थी। इसके अलावा एक मांग यह भी थी कि यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो फिर गलत आरोप लगाने पर भी ऐक्शन होना चाहिए। अगर हम हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे, समाज में विभाजन होगा और इसके गंभीर प्रभाव होंगे। प्रथम दृष्टया हम कह सकते हैं कि विनियमन की भाषा अस्पष्ट है और विशेषज्ञों को इसकी भाषा को संशोधित करने के लिए जांच करने की आवश्यकता है ताकि इसका दुरुपयोग न हो। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘मान लीजिए कि एक छात्र साउथ का है और उत्तर के किसी राज्य में एडमिशन मिलता है। इसी तरह उत्तर वाले को दक्षिण में एडमिशन मिलता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि कुछ टिप्पणियां दोनों को झेलनी हों। यदि दोनों की जातियों का पता ना हो तो फिर उन्हें किस नियम के तहत समाधान मिलेगा। यह भी जानकारी होनी चाहिए।’ मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमने 75 वर्षों में जिस देश को वर्गहीन समाज बनाने के लिए इतनी सारी उपलब्धियां हासिल की हैं। क्या अब हम उसे पीछे नहीं ले जा रहे हैं। रैगिंग में सबसे बुरी बात यह है कि दक्षिण या उत्तर-पूर्व से आने वाले बच्चे अपनी संस्कृति साथ लाते हैं और कोई अनजान व्यक्ति उन पर टिप्पणी करने लगता है। फिर आपने अलग-अलग छात्रावासों की बात की। अंतरजातीय विवाह भी होते हैं और हम भी ऐसे छात्रावासों में रहे हैं, जहां सभी एक साथ रहते थे। इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। सुनवाई के दौरान वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हमारी आपत्ति इन रेगुलेशंस के सेक्शन 3 (सी) को लेकर है। जातिगत भेदभाव की परिभाषा में एससी, एसटी और ओबीसी को शामिल किया गया है। इसमें जनरल कैटिगरी शामिल ही नहीं है। ऐसा तो संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है, जिसमें आप पहले ही एक वर्ग को अपराधी मान लेते हैं और उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव की शिकायत का कोई मंच ही नहीं दिया गया है।  

एचपीडब्ल्यूसी बैठक में बड़ा फैसला: सैनी सरकार देगी शहरों को 127.87 करोड़ की सौगात

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बुधवार को हरियाणा निवास में शहरी स्थानीय निकाय विभाग की हाई-पावर्ड वर्क्स कमेटी (एचपीडब्ल्यूसी) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान, प्रदेशभर में प्रमुख शहरी अवसंरचना और विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल भी मौजूद रहे। बैठक में कुल लगभग 136.64 करोड़ रुपये की 3 निविदाओं पर विचार किया गया, जबकि चौथी परियोजना के लिए पुनः निविदा आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए। इन तीनों निविदाओं में बोलीदाताओं के साथ विस्तृत बातचीत के उपरांत कार्यों की लागत लगभग 127.87 करोड़ रुपये निर्धारित की गई, जिससे इस पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 8.77 करोड़ रुपये की बचत सुनिश्चित हुई। मंज़ूर की गई परियोजनाओं में अमृत योजना के तहत फरीदाबाद शहर में नागरिक सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी वाले क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति प्रणाली प्रदान करने के लिए निविदा और अंबाला शहर नगर निगम में सड़कों की मशीनीकृत और मैनुअल सफाई का काम शामिल है, जिसका उद्देश्य सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना और शहरी स्वच्छता में सुधार करना है। इसके अलावा, बैठक में गुरुग्राम में माता शीतला देवी मंदिर परिसर के पुनर्विकास के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं, इलेक्ट्रिकल, एचवीएसी और अग्निशमन प्रणालियों से संबंधित शेष कार्यों को भी मंज़ूरी दी गई। बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरी बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने और सार्वजनिक कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, अतिरिक्त प्रधान सचिव और आयुक्त एवं सचिव, शहरी स्थानीय निकाय डॉ. साकेत कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।