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चुनावी बजट: महिलाओं को ₹500 अतिरिक्त, गिग वर्कर्स की भी होगी मदद, ममता सरकार का बड़ा ऐलान

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.06 लाख करोड़ रुपये का अंतरिम बजट पेश किया. इस बजट में सबसे बड़ा ऐलान ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर हुआ है. राज्य की 2.42 करोड़ महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि में 500 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यह बढ़ी हुई राशि फरवरी 2026 से ही लागू हो जाएगी. इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. क्या है बंगाल बजट की अन्य बड़ी घोषणाएं? पश्चिम बंगाल बजट में केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों पर भी फोकस किया गया है. गिग वर्कर्स यानी जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वालों को अब ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा. इसके अलावा आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय में अप्रैल 2026 से 1000 रुपये की वृद्धि की जाएगी. बेरोजगारी दूर करने के लिए युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह का भत्ता देने की नई योजना भी शुरू होगी. ‘लक्ष्मी भंडार’ के बदले समीकरण लक्ष्मी भंडार योजना ममता बनर्जी की सबसे सफल योजनाओं में से एक मानी जाती है. वर्तमान में इसमें सामान्य वर्ग को 1000 और एससी-एसटी वर्ग को 1200 रुपये मिलते हैं. अब 500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी के बाद यह राशि और बढ़ जाएगी. जानकारों का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं के भारी मतदान ने एनडीए की जीत तय की थी. इसी पैटर्न को देखते हुए बंगाल में भी तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. महिलाओं को लुभाने की मची होड़ आजकल राजनीति में महिलाएं नई ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी हैं. पश्चिम बंगाल ही नहीं, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी यही ट्रेंड दिख रहा है. महाराष्ट्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ के तहत 2.5 करोड़ महिलाओं को दिसंबर और जनवरी की किस्त एक साथ देने का फैसला किया है. तमिलनाडु की डीएमके सरकार ने भी ‘कलैग्नार मगलिर उरीमई थिट्टम’ योजना का दायरा बढ़ा दिया है. सभी पार्टियां जानती हैं कि महिलाओं का वोट जीत की गारंटी है.

‘पीएम मोदी के साथ कुछ भी हो सकता था’, स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा में किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  संसद के इतिहास में शायद यह पहली बार हुआ है जब लोकसभा अध्यक्ष ने खुद यह स्वीकार किया है कि देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा और सम्मान को सदन के भीतर ही खतरा था. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने ही कल (बुधवार) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोका था. बिरला ने आशंका जताई कि अगर पीएम मोदी कल सदन में आते, तो उनके साथ कोई “अप्रत्याशित और अप्रिय घटना” घट सकती थी. स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी और सदन के भीतर के हालात से यह इनपुट मिला था कि कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के आसन (कुर्सी) तक जाकर हंगामा करने और किसी अनहोनी को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, “मेरे पास जानकारी आई कि कांग्रेस के सांसद पीएम के आसन पर जाकर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे. मुझे डर था कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी हो सकता है. अगर वह घटना हो जाती, तो वह बेहद अप्रिय होती और लोकतंत्र के लिए काला दिन साबित होती.” ‘मैंने पीएम से आग्रह किया: आप मत आइए’ ओम बिरला ने बताया कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने कहा, “इस संभावित खतरे और टकराव को टालने के लिए मैंने खुद पीएम से आग्रह किया कि वो सदन में न आएं.” बता दें क‍ि बुधवार शाम को विपक्ष की महिला सांसदों ने पीएम मोदी की खाली कुर्सी को घेर लिया था, जिसके बाद बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष पीएम पर ‘हमला’ करना चाहता था. अब स्पीकर के इस बयान ने बीजेपी के उन आरोपों की पुष्टि कर दी है कि कल सदन के भीतर का माहौल प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिहाज से सामान्य नहीं था. बीजेपी ने पूछा- क्‍या पीएम पर हमला करने का इरादा था ? बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और बृजमोहन अग्रवाल ने विपक्ष पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने और उन पर ‘हमला’ करने की साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया था. मनोज तिवारी ने तीखा सवाल किया कि विपक्षी सांसद हार की बौखलाहट में पीएम की कुर्सी तक क्यों आए? क्या इनका इरादा पीएम पर हमला करना था? वहीं, बृजमोहन अग्रवाल ने इसे कांग्रेस की ‘प्री-प्लान’ साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि महिला सांसदों को ढाल बनाकर पीएम को घेरना और भाषण से रोकना न केवल सुरक्षा से खिलवाड़ है, बल्कि पूरे सदन की अवमानना है, जिस पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

भोपाल से विदिशा, रायसेन और सीहोर तक मेट्रो सेवा शुरू, राजधानी को मिलेगा सैटेलाइट शहरों से कनेक्शन

भोपाल  मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा। भोपाल शहर में 6 लाइनें तय अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा। उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी। सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी? बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है। -संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त

चंबल में रेत माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, 2 दिन में 4 करोड़ से अधिक की अवैध रेत नष्ट, मुरैना में पकड़े गए माफिया

मुरैना  चंबल की रेत पर वर्षों से चल रहा माफिया का खेल अब प्रशासन के सीधे निशाने पर आ गया है. जिले के कलेक्टर ने रेत माफिया की कमर तोड़ने के लिए अधिकारियों को पूरी तरह फ्री हैंड दे दिया है. टास्क फोर्स की बैठक के बाद वन विभाग, पुलिस, राजस्व, परिवहन और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की. चंबल में करोड़ों की रेत नष्ट की गई महज दो दिनों में 4 करोड़ रुपये से अधिक की चंबल में रेत नष्ट की जा चुकी है. बुधवार की सुबह से शाम तक 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद से चंबल राजघाट स्थित पिपरई और भानपुर क्षेत्र में रेत को नष्ट किया गया. इस सख्त कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है, वहीं हाईवे पर लगने वाली रेत मंडी भी दो दिनों से बंद पड़ी है. प्रशासन का यह अभियान अगले 15 दिनों तक लगातार जारी रहेगा. बीते रोज जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने टास्क फोर्स की बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए अधिकारियों को रेत माफियाओं पर सख्ती से कार्रवाई करने के लिए फ्री हैंड दे दिया था. इसके बाद प्रशासनिक मशीनरी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर आई. कलेक्टर के निर्देश पर वन मंडलाधिकारी हरिश्चंद्र बघेल के नेतृत्व में वन विभाग, पुलिस, परिवहन, राजस्व और माइनिंग विभाग की संयुक्त टीम ने चंबल राजघाट पुल क्षेत्र के पिपरई और भानपुर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की. चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई हजारों ट्राली रेत नष्ट मंगलवार और बुधवार को लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 20 जेसीबी मशीनों और 5 लोडरों की मदद से 16,500 से अधिक ट्रॉली अवैध रेत को नष्ट किया गया. अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में चंबल नदी किनारे डंप कर रखी गई लगभग 1000 से अधिक ट्रॉली से अधिक रेत को नष्ट किया गया, जबकि बुधवार सुबह से शाम तक दोबारा अभियान चलाकर करीब 15,000 ट्रॉली अवैध रेत को मिट्टी में मिला दिया गया. यह रेत, माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खनन कर नदी किनारे जमा की गई थी.  कार्रवाई के दौरान 150 पुलिस के जवान और 50 वन रक्षक तैनात दो दिनों में नष्ट की गई रेत का बाजार मूल्य करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये आंका गया है. प्रशासन इसे चंबल क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई बता रहा है. कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मौके पर करीब 150 पुलिस जवान और 50 वन रक्षक तैनात रहे, जिससे किसी भी तरह की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति न बन सके. इस बड़ी कार्रवाई से रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है. हाईवे पर लगने वाली रेत मंडियां भी बीते दो दिनों से बंद पड़ी हैं. प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा, बल्कि आने वाले दिनों में भी लगातार कार्रवाई जारी रहेगी. चंबल में अवैध रेत कारोबार पर अब आर-पार की लड़ाई के संकेत साफ नजर आ रहे हैं. ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद किया गया कलेक्टर के निर्देश पर चंबल नदी से आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर जेसीबी मशीनों से गहरे गड्ढे खुदवाए गए हैं, जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है. रेत विनिष्टीकरण की इस बड़ी कार्रवाई में मंगलवार को 6 जेसीबी मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि बुधवार को अभियान और तेज करते हुए 20 जेसीबी और 5 लोडरों की मदद ली गई. कार्रवाई के दौरान वनमंडलाधिकारी हरिशचंद्र बघेल के नेतृत्व में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, एसडीएम मुरैना बीएस कुशवाह, जिला खनिज अधिकारी सुखदेव निर्मल, पुलिस लाइन आरआई रविकांत शुक्ला, सूबेदार गजेंद्र सिंह परिहार, राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के एसडीओ सहित संबंधित राजस्व अमला मौके पर मौजूद रहा. 

मेघालय में कोयला खदान में भीषण धमाका, 10 मजदूरों की दर्दनाक मौत

 शिलॉन्ग मेघालय के ताशखाई इलाके में स्थित एक कोयला खदान में भीषण धमाका होने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुर्घटना में कम से कम 10 मजदूरों की मौत होने की जानकारी सामने आई है. हादसे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया. जानकारी के मुताबिक, ताशखाई की कोयला खदान में अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके कारण खदान के अंदर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए. धमाका इतना तेज था कि खदान के अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया. आशंका जताई जा रही है कि मृतकों में सभी मजदूर असम के रहने वाले थे, हालांकि प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि की प्रक्रिया जारी है.   स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृत मजदूरों में से एक असम के कटिगारा क्षेत्र के बिहारा गांव का रहने वाला बताया जा रहा है. हादसे की सूचना मिलते ही मेघालय पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया. खदान के अंदर फंसे अन्य मजदूरों की तलाश के लिए सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. प्रशासन ने आसपास के इलाके को घेरकर सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए. अधिकारियों का कहना है कि धमाके के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है. शुरुआती तौर पर खदान में गैस रिसाव या तकनीकी खामी को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी. इस हादसे के बाद मजदूरों की सुरक्षा और अवैध खनन गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने की बात भी कही गई है.

फर्जी बिल और दोहरे भुगतान के मामले में जिला प्रबंधक की सेवा समाप्त, 2.80 लाख के गबन पर कलेक्टर की बड़ी कार्रवाई

उमरिया जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े बहुचर्चित गबन मामले में आखिरकार प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया है। फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सामने आई खबरों के बाद कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला प्रबंधक (कृषि) महेन्द्र कुमार बारसकर की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। यह आदेश मध्य प्रदेश शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिला स्तर पर प्रदत्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों के आधार पर जारी किया गया है।  कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि महेन्द्र कुमार बारसकर पर प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाही के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इन्हीं कारणों से उनकी संविदा नियुक्ति को तत्काल समाप्त किया गया है। आदेश जारी होते ही प्रभावशील हो गया है, जिससे यह साफ संदेश गया है कि शासकीय योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दरअसल, यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब अमर उजाला ने ग्रामीण आजीविका मिशन में हुए फर्जी भुगतान और गबन की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर में बताया गया था कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के अंतर्गत प्रशिक्षण व्यय और मानदेय की स्वीकृत राशि का एक बार भुगतान होने के बावजूद उसी दावे का दोबारा भुगतान किया गया। इस दोहरे भुगतान से 1,43,440 रुपये का गबन सामने आया। इसके अलावा बिना सक्षम स्वीकृति के 1,36,683 रुपये का भुगतान कर दिया गया। कुल मिलाकर 2,80,123 रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग का मामला उजागर हुआ। मामले की शिकायत जिला परियोजना प्रबंधक चंद्रभान सिंह द्वारा की गई थी। इसके बाद जिला मिशन प्रबंधन इकाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अंतरिक निरीक्षण के दौरान बिल-वाउचर, कैश बुक, लेजर, व्यय पंजी और बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया गया। जांच में पाया गया कि कुछ भुगतान एक ही स्वीकृति आदेश के आधार पर दो बार किए गए, जबकि कुछ भुगतान बिना किसी वैध स्वीकृति के कर दिए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत उमरिया के निर्देश पर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। थाना प्रभारी मदनलाल मरावी के अनुसार फर्जी बिल और वाउचर के आधार पर राशि निकाले जाने की पुष्टि हुई है। धारा 316(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर जांच जारी है, हालांकि अभी गिरफ्तारी नहीं हुई है।  प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई और आखिरकार कलेक्टर ने कड़ा निर्णय लेते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की। यह फैसला न केवल इस मामले में अहम माना जा रहा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मीडिया की सक्रियता और पारदर्शिता कैसे सरकारी तंत्र को जवाबदेह बनाने में भूमिका निभाती है। अब सबकी निगाहें आगे की पुलिस जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।  

जीवन बदल देने वाले 5 छोटे काम: रोज़ करें और परेशानियों को कहें अलविदा

क्या आप अपनी लाइफ से खुश हैं? ज्यादातर लोगों से अगर ये सवाल पूछा जाए तो अपनी लाइफ से जुड़ी सैकड़ों कमियां वो आपको गिना देंगे। कुल मिलाकर कहें तो अधिकतर लोगों की जिंदगी में शिकायतें ज्यादा भरी हुई हैं और खुशियां कम। खैर, सुख और दुख दोनों ही जिंदगी का हिस्सा हैं, आप चाहें या ना दुख तो जरूर आएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लाइफ में ज्यादातर प्रॉब्लम्स हमारी ही बनाई हुई होती हैं। कई बार हम छोटी-छोटी चीजों को इतना इग्नोर करते हैं कि आगे चलकर वो एक बड़ी समस्या बनकर हमारे आगे खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप अपने लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव कर लें तो आपकी ज्यादातर प्रॉब्लम्स अपने आप सॉल्व हो सकती हैं। यकीन मानें ये कोई जादू-टोने का मामला नहीं है, बल्कि प्रैक्टिकल लाइफस्टाइल हैक्स हैं जो लाइफ की प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने में मदद करेंगे। सुबह जल्दी उठने की आदत डालें बचपन से ही आप घर के बड़ों से सुनते आए होंगे कि सुबह जल्दी उठने से सब ठीक हो जाता है। कुछ हद तक ये बात बिल्कुल सही है। ज्यादातर सफल लोगों की दिनचर्या उठाकर देखेंगे तो उसमें सुबह जल्दी उठने की आदत कॉमन पाएंगे। दरअसल जब आप जल्दी उठते हैं, तो आपके पास दिन का पूरा कंट्रोल होता है। आप हड़बड़ी में नहीं होते बल्कि आराम से पूरे दिन की प्लानिंग कर पाते हैं, जिससे पूरा दिन प्रोडक्टिव होता है। आप फ्रेश भी फील करते हैं और बेहतर फैसले ले पाते हैं। अपने स्क्रीन टाइम को कम कर दें आजकल हमारे दिन का आधा से ज्यादा समय फोन, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन के आगे ही गुजर जाता है। इसमें काम के घंटे कम होते हैं बल्कि फालतू का टाइम पास ज्यादा होता है। जितना समय आप स्क्रीन के आगे गुजारते हैं उतने ही नाखुश और डिप्रेस महसूस करते हैं। घंटों मोबाइल के आगे बैठकर परिवार के साथ भी आपकी बॉन्डिंग खराब होती है, स्लीप साइकिल डिस्टर्ब होती है, मूड पर नेगेटिव इंपैक्ट पड़ता है और समय भी बर्बाद होता है। इसकी जगह एक अच्छी किताब पढ़ें, दोस्तों और फैमिली से बातचीत करें और लाइफ की प्लानिंग करें; आप खुश भी रहेंगे और बहुत चीजें आसान भी हो जाएंगी। रोज किसी तरह की फिजिकल एक्टिविटी करें अपने बिजी लाइफस्टाइल के चलते लोग जरा सा भी समय अपनी हेल्थ को नहीं देते, फिर बिगड़ती तबियत और बढ़ता मोटापा उन्हें परेशान करता है। इसलिए जरूरी है कि रोजाना कम से कम आधा घंटा अपने शरीर को दिया जाए। आप हल्के फुल्की वॉक या स्ट्रेचिंग से भी शुरुआत कर सकते हैं। फिजिकल एक्टिविटी ना सिर्फ आपके हेल्दी और फिट रखने में मदद करती है, बल्कि आपके मूड, हार्मोन और स्ट्रेस लेवल को भी बैलेंस रखती है। हर रोज थोड़ा वक्त खुद को दें काम के लिए समय निकाल लिया, परिवार के लिए भी समय निकाल लिया, लेकिन क्या खुद के लिए समय निकाला? अगर आपको याद नहीं कि लास्ट टाइम आप कब अकेले खुद के साथ बैठे थे तो यकीन मानिए आप अपने साथ बड़ी ज्यादती कर रहे हैं। क्योंकि आप जबतक खुद के साथ कनेक्ट नहीं करेंगे, तब तक किसी और के साथ भी खुश नहीं रह सकेंगे। इसलिए जरूरी है कि रोजाना कुछ देर अपने साथ बिताएं, एक कप चाय पीएं और अपना मनपसंद काम करें। वो कोई हॉबी हो सकती हैं या फिर आप खुद से बात कर सकते हैं। कुल मिलाकर कुछ भी ऐसा करें जो आप इंजॉय कर सकें। दूसरे से कंपेयर करना बंद करें खुद को या अपनी लाइफ को दूसरों से कंपेयर करना जबतक बंद नहीं करेंगे, तब तक ना खुश रह पाएंगे और ना ही आगे बढ़ पाएंगे। आपको समझना होगा कि हर किसी की लाइफ जर्नी अलग-अलग होती है। आप सिर्फ वही देख पाते हैं, जो आपको दिखाया जाता है। उसके पीछे की असलियत आपकी समझ से बहुत अलग भी हो सकती है। इसलिए दूसरे को देखकर सिर्फ खुश हों लेकिन खुद से कंपेयर करने ना बैठ जाएं। आपका फोकस सिर्फ खुद को आज से बेहतर बनाने पर होना चाहिए, फिर देखना कैसे आप खुश भी रहते हैं और सक्सेस की सीढ़ियां चढ़ते जाते हैं।

वैभव सूर्यवंशी का बाउंसर टेस्ट फेल, U-19 वर्ल्ड कप में लगातार एक ही पैटर्न में 4 बार हुए आउट

मुंबई  14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने अंडर 19 वर्ल्ड कप में अपने बल्ले से चमक बिखेरी है. उन्होंने 6 मैचों  की 6 पार‍ियों में 264 रन 44 के एवरेज से बनाए. इस दौरान  वैभव का स्ट्राइक रेट 147.48 का रहा. वैभव ने पूरे वर्ल्ड कप में 26 चौके और 15 छक्के लगाए.  वैभव ने बुधवार (4 जनवरी) को अफगानिस्तान की अंडर 19 टीम के ख‍िलाफ हुए सेमीफाइनल  मुकाबले में भी शानदार 68 रनों की पारी  महज 33 गेंदों पर खेली. इसमे 9 चौके और 4 छक्के शामिल रहे. एक समय तो ऐसा लग रहा था कि वैभव इस सेमीफाइनल मैच में शतक जड़ेंगे, लेकिन वो एक बार फ‍िर बाउंसर गेंद के सामने असहाय दिखे और आउट हो गए. उनको नूर‍िस्तानी उमरजई ने ओस्मान सादात के हाथों कैच आउट करवाया.  कुल म‍िलाकर वैभव ने इस पारी से यह तो दिखाया कि वह ताबडतोड़ अंदाज में ही खेलने में व‍िश्वास करते हैं, लेकिन उनकी कमजोर कड़ी भी सामने आ गई है. दरसअल, वैभव बाउसंर गेंदों को ठीक से नहीं खेल पा रहे हैं. आइए आपको बताते हैं कि इस अंडर 19 वर्ल्ड कप में वैभव कैसे कैसे आउट हुए हैं.  1– अमेरिका के खलाफ वैभव बोल्ड 2 रन बनाकर ऋत्विक अप्पिडी की गेंद पर बोल्ड हो गए थे.  2- बांग्लादेश के ख‍िलाफ वैभव ने 72 रन बनाए. गेंद बहुत ज्यादा छोटी (बाउंसर) नहीं थी, लेकिन सूर्यवंशी पीछे हटे, नीचे झुके और डीप मिडविकेट के ऊपर से बड़ा शॉट लगाने की कोशिश की. गेंद हवा में तो गई, लेकिन दूरी नहीं मिली. लेकिन वह कैच आउट हो गए. हालांकि गेंद नो-बॉल की लाइन के बहुत करीब थी, लेकिन अंपायर ने उसे सही गेंद माना.  3-न्यूजीलैंड के ख‍िलाफ वैभव ने 40 रन बनाए, लेकिन उनको जसकरन संधू ने ऑफ स्टंप के बाहर छोटी गेंद (बाउसंर) डाली. सूर्यवंशी ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद ऊंची हवा में मिड-ऑफ की तरफ चली गई. मेसन क्लार्क ने पीछे की ओर काफी दौड़ लगाई, गेंद पर नजर बनाए रखी और दौड़ते हुए डाइव लगाकर शानदार कैच लपक लिया.  4-ज‍िम्बाव्बे के ख‍िलाफ 2 रन बनाकर वैभव सीधे मिड-ऑफ फील्डर को कैच थमा बैठे.  5- पाक‍िस्तान के ख‍िलाफ मुकाबले में वैभव की कमजोरी एक बार फ‍िर नजर आई, यहां भी वो बाउंसर गेंद पर 30 रन बनाकर आउट हुए. यह साफ इशारा था है कि आगे के करियर में सूर्यवंशी को छोटी गेंदों का खूब सामना करना पड़ेगा. पाकिस्तान के ख‍िलाफ सूर्यवंशी ने स्क्वायर के सामने पुल शॉट खेलने की कोशिश की. लेकिन बल्ले का निचला किनारा लगा और गेंद कीपर के पास चली गई. वैभव सूर्यवंशी बांग्लादेश, न्यूजीलैंड, पाक‍िस्तान और  अफगान‍िस्तान के ख‍िलाफ सेमीफाइनल में बाउंसर गेंदों पर आउट हुए. कुल म‍िलाकर 6 में 4 बार. यानी साफ है कि वैभव को अब बाउंसर पर खेलने के लिए कुछ सुधार करने हेांगे, क्योंकि व‍िपक्षी टीमों ने उनकी कमजोर कड़ी को भांप लिया है. 

लक्ष्मण तिवारी ने मऊगंज से पूर्व विधायक रहते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दिया

रीवा  रीवा में कांग्रेस पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। मऊगंज से पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में लक्ष्मण तिवारी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांग्रेस में गुटबाज़ी हावी हो चुकी है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। 

बिहार विधानसभा में चर्चा के केंद्र में NEET मामला और बजट

पटना. बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज तीसरा दिन है और सदन का माहौल गरम रहने के आसार हैं। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के साथ ही नीतीश सरकार द्वारा पेश बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। वहीं NEET छात्रा की मौत के मामले में विपक्ष सरकार को कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है, जिससे सदन में हंगामे की संभावना जताई जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नोत्तर काल से शुरू होगी। इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों का संबंधित मंत्री जवाब देंगे। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत विधायक श्याम रजक ने उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर विभागीय प्रभारी मंत्री को जवाब देना होगा। इसके अलावा जल संसाधन विभाग से जुड़े मुद्दों पर विधायक राणा रंधीर, अनिल सिंह समेत पांच विधायकों ने सरकार का ध्यान खींचा है। NEET छात्रा मौत पर विपक्ष का आक्रामक रुख NEET परीक्षा से जुड़ी छात्रा की मौत का मामला आज सदन में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में खामियों के कारण छात्र मानसिक दबाव में हैं। सरकार से इस मामले पर स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग को लेकर विपक्ष हंगामा कर सकता है। बजट पर होगी तीखी बहस बजट सत्र के दूसरे दिन नीतीश सरकार ने 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। यह पिछले बजट से करीब 30,694 करोड़ रुपये अधिक है। सरकार ने बजट को विकासोन्मुख बताते हुए पांच नए एक्सप्रेस-वे, सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन करने और पटना मेट्रो के विस्तार जैसी घोषणाएं की हैं। शिक्षा और किसानों पर खास फोकस इस बजट में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग को सबसे अधिक 68,216.95 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं किसानों के लिए जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की गई है। इसके तहत केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि के साथ मिलाकर अब किसानों को सालाना 3,000 रुपये मिलेंगे। इससे 75 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। कल्याण, स्वास्थ्य और उद्योग की बड़ी योजनाएं स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। PMCH में पहले चरण में 1100 बेड तैयार हो चुके हैं और 10 नए जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा हुई है। इसके साथ ही बंद चीनी मिलों को चालू करने, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का भी ऐलान किया गया है। सदन में सियासी तल्खी भी दिखी बजट पर चर्चा के दौरान सियासी तल्खी भी सामने आई। बीजेपी विधायक भगवान कुशवाहा ने राजद विधायकों पर तीखा हमला बोलते हुए पुराने दौर के नरसंहार और कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाया। इस बयान से सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आज के सत्र पर सबकी नजर राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा, बजट की समीक्षा और NEET मामले पर संभावित हंगामे के चलते आज का सत्र काफी अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार विपक्ष के सवालों का कैसे जवाब देती है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।