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कर्नाटक में सड़क हादसों का कहर: बीदर और कोलार में 6 लोगों की मौत

 बीदर  कर्नाटक के बीदर और कोलार जिलों में दो अलग-अलग सड़क हादसों में छह लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, बीदर जिले के हमनाबाद तालुक में हल्लीखेड़ा के पास नागन्ना चौराहे के निकट रविवार को एक मोटरसाइकिल के पुल से टकरा जाने के कारण एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान राजेश्वर गांव के निवासी वेंकट करतमाल (40), उनकी पत्नी शिल्पा (35) और उनकी बेटी रक्षिता (12) के रूप में हुई है। उनके बेटे दिगंबर (15) को गंभीर चोटें आई हैं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने कहा, "हादसा उस समय हुआ जब ये चारों एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे और चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिससे मोटरसाइकिल पुल से टकरा गई।" एक अन्य हादसे में, कोलार जिले के श्रीनिवासपुर में रविवार को एक कार के पलट जाने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में से दो की पहचान आंध्र प्रदेश निवासी मुनियम्मा और वेंकटप्पा के रूप में हुई है। इस दुर्घटना में 10 से अधिक अन्य लोग घायल हो गए, जिन्हें आंध्र प्रदेश के मदनपल्ली स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया, "यह हादसा उस समय हुआ जब श्रमिक काम खत्म करके लौट रहे थे। श्रीनिवासपुर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है।"

दिव्या अग्रवाल और उनके बिजनेसमैन पति के रिश्ते में टेंशन, क्या शादी में आई दरार?

मुंबई  शो 'द 50' में जमकर बवाल हो रहा है. शो के बीते एपिसोड में दिव्या अग्रवाल और इंफ्लुएंसर भव्या सिंह के बीच तगड़ी लड़ाई देखने को मिली. झगड़े के दौरान भव्या पर्सनल गईं. उन्होंने दिव्या पर जमकर कमेंट किए. भव्या ने एक्ट्रेस की शादी पर बड़ा खुलासा किया. उन्होंने दावा किया कि एक्ट्रेस अपने पति अपूर्व पडगांवकर से अलग रहती हैं. दिव्या-भव्या में हुई कैटफाइट दोनों के बीच झगड़ा बैल और बुद्धि टास्क के दौरान हुआ. यहां पर दिव्या ने कहा कि अर्चना गौतम के पास दिमाग नहीं है. ये कमेंट सुनकर भव्या नाराज हो जाती हैं. उन्होंने दिव्या को सबक सिखाने का फैसला किया. वॉशरूम एरिया में दिव्या लड़ाई के बाद रो रही थीं. उन्होंने भव्या से टिश्यू पास करने को कहा. मगर भव्या ने तुरंत मना कर दिया. भव्या का रिएक्शन देखकर दिव्या रोने लगीं और शो छोड़ने की बात कही. रिद्धि डोगरा संग अपनी फीलिंग्स बयां करते हुए दिव्या ने कहा- मैंने लोगों के साथ दोस्ती बनाने में सालों खर्च किए हैं. हर शो में सबसे ज्यादा मुझसे नफरत की जाती है. मैंने शो में अकेले खेला है. मैंने इसे अपनी ईगो पर लिया और शो जीतकर खुद को साबित किया. अर्चना मेरी दोस्त है. लेकिन यहां पर वो मेरे से दुश्मनों की तरह लड़ रही है. मैं अपने पति को मिस कर रही हूं. उसने मुझे अच्छा और शांत इंसान बनाया. उसके जिंदगी में आने के बाद मैंने दोस्त बनाने शुरू किए. उसने मुझे दोस्ती का असली मतलब समझाया.  तभी भव्या वहां पर आईं और दिव्या को चेतावनी देते हुए कहा कि वो उनसे अच्छे से बात करें. बाद में सपना चौधरी, आर्या संग बात करते हुए भव्या ने दिव्या पर निजी कमेंट किए. वो कहती हैं- ये इतनी फेक लड़की है. इसमें कोई हैरानी नहीं कि लोग इसे गोल्ड डिगर कहते हैं. मैंने इसे पॉडकास्ट पर पूछा है कि कभी रियलिटी शो करोगे? तब दिव्या ने कहा था- नहीं, मैंने बिग बॉस नहीं जीता था. मैं पूछती हूं- क्या उखाड़ लिया तुमने, सारी पीआर कराके और स्पॉटिंग कराके, थोड़ा दिख जाती हो. कुछ नहीं किया जिंदगी में, फेक औरत है. सबके साथ फेक कर रही है.. अब सबके साथ बैठकर गॉसिप करेगी. पति से अलग रहती हैं दिव्या? भव्या ने दावा किया कि दिव्या अपने पति संग नहीं रहती. उन्होंने कहा- दिवाली पर असली पटाखे तो इसके घर पर फूटे थे. वो मैंने फोड़े थे और आज तक मैंने कभी बोली नहीं ये बात, ना कभी पॉडकास्ट पर कहा, ना मैं कभी बोलूंगी. क्योंकि इनका खुद का आपसी पारिवारिक मामला था. उसमें मुझे इंवॉल्व कर दिया इन लोगों ने. भीख मांगती है लोगों से मुंबई में कि मेरे घर आ जाओ, आप मेरे पास आ जाओ, प्लीज मिलो मुझसे, अलग रहती है अपने पति से. भव्या ने कहा कि वो दिव्या को तबाह करके इस शो से जाएंगी. दिव्या ने बिजनेसमैन अपूर्व से 2024 में शादी की थी. पिछले साल जुलाई में दोनों के सेपरेशन की खबरें भी आई थीं. तब दिव्या ने मस्ती भरा पोस्ट शेयर कर शादी में खटपट की न्यूज को खारिज किया था. 

नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी को नई सजा, ईरान में 44 साल की जेल की सजा का सामना

तेहरान  ईरान में महिलाओं के हक के लिए आवाज उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. ईरानी कोर्ट ने उन्हें एक बार फिर दो अलग-अलग मामलों में कुल साढ़े सात साल की नई जेल की सजा सुनाई है. वकील ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी  नरगिस के वकील मुस्तफा नीली ने सोशल मीडिया पर बताया कि मशहद शहर की एक अदालत ने उन्हें दो बड़े आरोपों में सजा दी है. पहली सजा 6 साल की है, जो ‘गुटबाजी और साजिश’ के लिए दी गई है. दूसरी सजा डेढ़ साल की है, जो ‘सरकार के खिलाफ प्रचार’ करने के लिए मिली है. इसके अलावा, उन पर 2 साल का ट्रैवल बैन (विदेश जाने पर रोक) लगाया गया है और उन्हें देश के ही एक दूरदराज इलाके ‘खुस्फ’ में 2 साल के निर्वासन (Exile) की सजा भी दी गई है. क्यों हुई ताजा गिरफ्तारी? नरगिस (53 साल) को दिसंबर में तब गिरफ्तार किया गया था, जब वे वकील खुसरो अलीकोर्दी की शोक सभा में शामिल होने गई थीं. अलीकोर्दी अपने दफ्तर में मृत पाए गए थे. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, नरगिस ने वहां ‘भड़काऊ बातें’ की थीं. नरगिस के परिवार ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ मारपीट की गई, जिसकी वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. कोर्ट को बताया ‘दिखावा’, शुरू की भूख हड़ताल नरगिस का समर्थन करने वाले ‘नरगिस फाउंडेशन’ ने शनिवार को हुई कोर्ट की इस सुनवाई को ‘दिखावा’ करार दिया है. फाउंडेशन के मुताबिक, अपनी अवैध गिरफ्तारी और जेल की खराब स्थिति के विरोध में नरगिस ने 2 फरवरी से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी. उनकी सेहत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें जेल से अस्पताल ले जाना पड़ा, लेकिन फिर वापस जेल भेज दिया गया. परिवार का दर्द- यह फैसला क्रूर है नरगिस के पति तघी रहमानी ने बीबीसी को बताया कि यह सजा बेहद नाइंसाफी भरी और क्रूर है. उन्होंने कहा कि नरगिस ने कोर्ट में अपना बचाव करने से भी इनकार कर दिया क्योंकि वे इस न्याय व्यवस्था को सही नहीं मानतीं. उन्होंने न तो कोर्ट में एक शब्द बोला और न ही किसी कागज पर साइन किए. वहीं, पेरिस में रह रही उनकी बेटी कियाना भी अपनी मां की गिरती सेहत को लेकर काफी डरी हुई हैं. 10 साल से जेल में, बच्चों से भी नहीं मिल पाईं नरगिस मोहम्मदी पिछले एक दशक का ज्यादातर समय जेल की सलाखों के पीछे ही गुजार चुकी हैं. कुल सजा: फाउंडेशन के अनुसार, ताजा फैसले के बाद उनकी कुल सजा अब 44 साल की हो गई है. दूरी का गम: नरगिस साल 2015 से अपने जुड़वां बच्चों से नहीं मिल पाई हैं, जो पेरिस में रहते हैं. बीमारी में भी राहत नहीं: दिसंबर 2024 में उन्हें ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए 3 हफ्ते की पैरोल मिली थी, लेकिन ठीक होते ही उन्हें फिर जेल भेज दिया गया. कौन हैं नरगिस मोहम्मदी और क्यों मिला नोबेल? नरगिस को साल 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था. उन्हें यह सम्मान ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ लड़ने, मानवाधिकारों की रक्षा और फांसी की सजा (Capital Punishment) के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मिला था. जब उन्हें यह अवॉर्ड मिला, तब भी वे जेल में ही थीं और उनकी तरफ से उनके बच्चों ने यह पुरस्कार लिया था. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट  एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान दुनिया में चीन के बाद सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है. नरगिस इसी सिस्टम के खिलाफ लड़ रही हैं, जिसके कारण उन पर बार-बार ‘देश की सुरक्षा को खतरा’ पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, उनके वकील को अब भी उम्मीद है कि उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए जमानत मिल सकती है और इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी.

Gold-Silver Rate में हलचल: चांदी की कीमत में आई तेजी, सोने के दाम में भी उछाल

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों में हालिया भारी गिरावट के बाद अब एक बार फिर बाजार में तेज रिकवरी देखने को मिल रही है। सोमवार को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड और सिल्वर दोनों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। कारोबार शुरू होते ही चांदी करीब ₹15,000 प्रति किलो महंगी हो गई, जबकि सोने के दामों में एक झटके में ₹3,000 की तेजी आ गई। हालांकि, तेजी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं अपने ऑल टाइम हाई से अब भी काफी सस्ती बनी हुई हैं। चांदी ने खुलते ही मचाया गदर MCX पर 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का भाव पिछले बंद ₹2,49,892 प्रति किलो से उछलकर ₹2,64,885 प्रति किलो पहुंच गया। इस तरह 1 किलो चांदी की कीमत में ₹14,993 का उछाल देखने को मिला। हालांकि, अगर इसके लाइफ टाइम हाई से तुलना करें तो चांदी अब भी काफी नीचे है। 29 जनवरी को चांदी पहली बार ₹4 लाख के पार गई थी और ₹4,20,048 प्रति किलो के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची थी। इसके बाद तेज गिरावट के चलते भाव ₹2.25 लाख तक लुढ़क गए थे। मौजूदा तेजी के बावजूद चांदी अब भी अपने हाई से ₹1,55,163 सस्ती चल रही है। सोने ने भी पकड़ी रफ्तार चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी सोमवार को मजबूती देखने को मिली। MCX पर 2 अप्रैल एक्सपायरी वाले 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव शुक्रवार के बंद ₹1,55,451 से उछलकर ₹1,58,500 पहुंच गया। यानी सोना ₹3,049 प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया। इसके बावजूद सोना अपने ऑल टाइम हाई से अभी भी ₹34,596 सस्ता मिल रहा है। देश ही नहीं, विदेशों में भी टूटी थी चांदी चांदी में गिरावट सिर्फ भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट सिल्वर में बड़ी टूट देखने को मिली। पिछले सप्ताह एक दिन में ही करीब 20% की गिरावट आई थी और अपने हाई से चांदी लगभग 40% तक फिसल चुकी थी। स्पॉट सिल्वर बीते महीने $120 प्रति औंस के स्तर से गिरकर $64 प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) तक आ गई थी। अब वैश्विक संकेतों के बीच इसमें फिर से मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। क्रैश के बाद सोना-चांदी में आई यह तेजी निवेशकों के लिए राहत की खबर है, लेकिन कीमतें अभी भी रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की चाल पूरी तरह ग्लोबल ट्रेंड और डॉलर मूवमेंट पर निर्भर करेगी।

परीक्षा पे चर्चा में प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: देश के छात्रों में अपने सपने सच करने की ताकत

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज परीक्षा पे चर्चा 2026 के दूसरे एपिसोड में तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ के छात्रों से बात कर रहे हैं. इस दौरान पीएम मोदी छात्रों को स्टार्टअप से लेकर परीक्षा की तैयारी को लेकर संवाद कर रहे हैं. इस बार पीएम मोदी देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर बच्चों से बात कर रहे हैं और उनके करियर से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे हैं.  परीक्षा पे चर्चा में ना सिर्फ पढ़ाई की तैयारी की बात हुई, बल्कि पीएम मोदी ने इस दौरान कल्चर, चाय आदि कई चीजों पर चर्चा की. इस दौरान हर चर्चा का उद्देश्य हर बच्चे को सुनना था. इस दौरान अंत में पीएम मोदी ने सभी बच्चों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के 9वें संस्करण का दूसरा एपिसोड सोमवार को जारी किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अद्भुत प्रतिभा के धनी हमारे विद्यार्थियों में अपने सपनों को सच करने की पूरी क्षमता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "अद्भुत प्रतिभा के धनी हमारे विद्यार्थियों में अपने सपनों को सच करने की पूरी क्षमता है। 'परीक्षा पे चर्चा' का उद्देश्य भी यही है कि कैसे वे अपनी प्रतिभा और कौशल का सार्थक इस्तेमाल कर सकते हैं।" इस अवसर पर पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित भी शेयर किया। उन्होंने प्राचीन संस्कृत श्लोक का हवाला देते हुए लिखा, "विद्या वितर्को विज्ञानं स्मृतिस्तत्परता क्रिया। यस्यैते षड्गुणास्तस्य नासाध्यमतिवर्तते॥" इसका अर्थ है, 'विद्या, तर्कशक्ति, विज्ञान, स्मृति-शक्ति, तत्परता और कार्यशीलता, ये छह जिसके पास हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्य नहीं।' हम क्या डाइट फॉलो करें? इस पर पीएम मोदी ने कहा कि मेरा कोई डाइट का सिस्टम नहीं है. हमेशा डाइट अपने मन का करना चाहिए और इसे दवाई की तरह नहीं खाना चाहिए. खाना हमेशा मन भर कर खाना चाहिए. अपने शरीर को सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए. आपकी लाइफ में टीचर का क्या रोल था? इस पर पीएम मोदी ने कहा कि हमारे टीचर का काफी रोल था और हमे लाइब्रेरी जाने के लिए कहते थे. इसके अलावा हमारे टीचर हमें फिजिकल फिटनेस के लिए आग्रह करते थे और योग के लिए कहते थे. हर एक टीचर का कुछ ना कुछ योगदान होता है.  पीएम मोदी ने गुजरात में पालतरिया समाज को लेकर किए गए काम का जिक्र भी परीक्षा पे चर्चा में किया है. इसके अलावा पीएम मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि बच्चों को तनाव से बचने के लिए अच्छी नींद लेना चाहिए.  साथ ही उन्होंने कहा कि सपना के अनूकुल मेहनत करनी चाहिए.  इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि पहले लीडर बनिए. पहले ये तय कीजिए कि मुझे ये करना है और वो करना शुरू कर दीजिए. जैसे आप सड़क से कोई कचरा हटा देंगे तो लोग आपको फॉलो करेंगे. लीडर का मतलब ये नहीं है कि चुनाव लड़ना है. लीडर का मतलब है कि आप कुछ लोगों को अपनी बात समझा सकें. ऐसे में आपको पहले उसके बारे में समझना होगा. पढ़ाई और खेल का संतुलन कैसे रखें? इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा सबकुछ नहीं कर सकती है, लेकिन सिर्फ खेल से भी काम नहीं चलेगा. साथ ही उन्होंने कहा कि जिंदगी में खेल होने से बचना है तो खेलना चाहिए.  इस सेशन में तमिलनाडु के साथ पीएम मोदी ने रायपुर में छत्तीसगढ़ के बच्चों से भी बात की. इस दौरान पीएम मोदी ने बच्चों को सलाह दी कि उन्हें अपने शहर की अलग अलग जगहों पर जाना चाहिए. इस बार पीएम मोदी देश ने अलग अलग शहरों में जाकर बच्चों से बात की है.  क्या एआई से डरना चाहिए? हर युग में टेक्नोलॉजी आती है तो ऐसी चर्चा होती है. हमें इससे डरना नहीं चाहिए. हमारी कोशिश रहनी चाहिए कि वो उसका गुलाम नहीं बनेंगे. उसे अपना मालिक नहीं बनने देंगे. मैं गुलाम नहीं बनूंगा, ये आपको पक्का करना होगा. साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि जॉब नेचर बदलता रहता है, ऐसे में टेक्नोलॉजी को समझना होगा. हमें डरने की जरुरत नहीं है.  इंस्पिरेशन और मोटिवेशन में क्या चुनें? इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि इंस्पिरेशन के साथ अनुशासन भी जरूरी है.  अगर अनुशासन है ही नहीं तो कितना ही इंस्पिरेशन होगा तो एक्सप्रेशन क्या काम करेगा. मान लीजिए एक किसान है उसकी प्रेरणा मिल रही है, बगल वाला किसान बहुत कमाई कर रहा है, ऐसे में इंस्पिरेशन तो मिलती है कि उतनी कमाई करनी चाहिए. लेकिन, डिसिप्लिन नहीं होगा तो इंस्पिरेशन काम नहीं करेगा. फिर वह बोझ बन जाता है निराशा पैदा करता है. स्टार्टअप शुरू करना है कैसे करुं? एक स्टूडेंट के इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि आप छोटे-छोटे स्टार्टअप से काम शुरू कर सकते हैं. साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि अगर आप पढ़ाई और पेशन दोनों को फॉलो करना चाहते हैं तो आप सप्ताह में दिन में कुछ वक्त पेशन के लिए निकालना शुरू कीजिए. इससे आप आसानी दोनों कामों को संतुलित तरीके से कर सकेंगे.    'परीक्षा पे चर्चा 2026' के दूसरे एपिसोड में देवमोगरा, कोयंबटूर, रायपुर, गुवाहाटी और दिल्ली में पीएम मोदी की छात्रों के साथ बातचीत को दिखाया जाएगा। इस एपिसोड में पीएम मोदी एग्जाम की तैयारी करते समय कॉन्फिडेंट रहने, रूटीन फॉलो करने और खुद पर भरोसा रखने के बारे में प्रैक्टिकल टिप्स शेयर करेंगे। 'परीक्षा पे चर्चा 2026' का पहला एपिसोड 6 फरवरी को जारी किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले एपिसोड में कहा कि बहुत सारे छात्रों ने यह सुझाव दिया था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए। इस स्पेशल एपिसोड में आप यही देखने जा रहे हैं। गौरतलब है कि साल 2018 के बाद प्रधानमंत्री मोदी हर साल बोर्ड परीक्षाओं से पहले छात्रों के साथ 'परीक्षा पे चर्चा' (पीपीसी) करते हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के बीच परीक्षा के तनाव को कम करना और समग्र शिक्षा को बढ़ावा देना है। शिक्षा मंत्रालय इस कार्यक्रम को संचालित करता है। साल 2025 के कार्यक्रम में 5 करोड़ से अधिक छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी देखी गई। 2026 के संस्करण में 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण हुए। अतिरिक्त 2.26 करोड़ प्रतिभागी … Read more

RSS और राम मंदिर आंदोलन का असर: मोहन भागवत ने बीजेपी के अच्छे दिनों का राज बताया

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा को लेकर बड़ी लकीर खींच दी है। 2024 के आम चुनाव के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हम आरएसएस के बिना भी चुनाव में जीत हासिल कर सकते हैं। इसे लेकर संघ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष देखा गया था। अब सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भाजपा के ये 'अच्छे दिन' आरएसएस के चलते ही आए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने प्रतिबद्धता दिखाई थी और जिसने इसका साथ दिया, उसे फायदा मिला। इस तरह उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि संघ के नेतृत्व में चले राम मंदिर आंदोलन का फायदा भाजपा को चुनावी राजनीति में भी मिला। इस तरह उन्होंने साफ कर दिया कि भाजपा के लिए आरएसएस का कितना महत्व है और वह भी उसका मातृ संगठन है। माना जा रहा है कि आरएसएस के कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखने के मकसद से उन्होंने ऐसी बात कही है। इसके अलावा भाजपा नेतृत्व के लिए भी यह एक संदेश है कि भले ही दल का विस्तार हो गया है, लेकिन उसका वैचारिक आधार अब भी आरएसएस ही है। बता दें कि आरएसएस और भाजपा के संबंधों को लेकर अकसर सवाल उठते रहे हैं। आरएसएस की ओर से भाजपा में किसी भी फैसले लेने के दावों को खारिज किया जाता रहा है। उसका कहना है कि हम संघ के कार्यकर्ता देते हैं, लेकिन उसके फैसलों में हमारा कोई दखल नहीं रहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अलग राजनीतिक पार्टी है भाजपा। उसमें बहुत से स्वयंसेवक हैं, लेकिन वह संघ की पार्टी नहीं है। उसमें स्वयंसेवक हैं और वे अपना काम करते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोगों के पास कोई और काम करने के लिए समय नहीं होता। उन्होंने कहा कि हमारे यहां माताओं-बहनों से आप बात करेंगे तो वे कहेंगे कि इन्हें घर पर भी ध्यान देने का समय नहीं है। आरएसएस का एक ही काम कि संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट किया जाए। इसके अतिरिक्त हमें कोई और काम नहीं करना है। हमारे विचार की बात करने से कुछ लोगों को मिलता है फायदा मोहन भागवत ने कहा कि फिर सवाल उठता है कि देश में और भी समस्याएं हैं। उनका क्या होगा। इस पर संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने कहा था कि संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी अहम कामों में संघ के कार्यकर्ता शामिल हैं, लेकिन वे स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि हमारा काम मनमर्जी से चलता है। इसमें नियंत्रण नहीं चलता है। स्वयंसेवकों के बीच एक सहयोग की भावना है। हमारे पास एक शक्ति है तो राष्ट्र के लिए भी एक विचार है और उसके अनुसार जो लोग बात करते हैं। उन्हें लाभ होता है। लेकिन हमारा काम किसी को लाभ पहुंचाना नहीं है।

सूरजकुंड मेले में हादसे पर दुष्यंत चौटाला का बयान, कहा- पर्यटन विभाग की लापरवाही से हुई छवि को क्षति

चंडीगढ़  पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने फरीदाबाद में चल रहे 39वे सूरजकुंड शिल्प मेले में हुए हादसे की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तर पर ख्याति प्राप्त सूरजकुंड मेले में ऐसा हादसे होने से इस मेले और हरियाणा की प्रतिष्ठा को ना सिर्फ देश में, बल्कि विश्व स्तर पर नुकसान पहुंचा है। उन्होंने हादसे के कारणों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस हादसे से हरियाणा की छवि को हुए नुकसान के लिए हरियाणा का पर्यटन विभाग जिम्मेदार है। मेले में 50 देशों के 700 से ज्यादा शिल्पकार हिस्सा ले रहे हैं और देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सूरजकुंड का अंतर्राष्ट्रीय मेला हाथ से सामान बनाने वाले देश-दुनिया के उम्दा कलाकारों को एक शानदार प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाता है। इस मेले में देश विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं और शिल्पकारों व कलाकारों के बनाए सामान को देखते और खरीदते हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पर्यटन विभाग ने पिछले कुछ वर्षों से इस मेले को कमाई का जरिया बना लिया है और इसमें एडवेंचर के नाम पर असुरक्षित झूले लगाने की इजाजत दी जा रही है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि ऐसे झूलों की तरफ पर्यटक आकर्षित होते हैं और हथकरघा कारीगरों के काम की अनदेखी होती है। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेले में ये झूले गैरजरूरी और कारीगरों की अनदेखी करवाने वाला कदम है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इन झूलों को लगाने की इजाजत देने वाली नीति को बंद किया जाना चाहिए। वरिष्ठ जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने इस हादसे में मारे गए पुलिसकर्मी के परिवार को उचित आर्थिक सहायता के साथ परिवार को एक्सग्रेसिया के तहत एक नौकरी भी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मृतक पुलिसकर्मी ने बहादुरी के साथ अपनी ड्यूटी निभाई है और राज्य सरकार को कैबिनेट से मंजूरी दिलवाकर उनके परिवार को एक नौकरी और पर्याप्त सहायता देनी चाहिए। साथ ही हादसे में घायल हुए लोगों को उचित इलाज के साथ आर्थिक सहायता भी देने की मांग उन्होंने की।

विवेक ओबेरॉय को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत, बिना इजाजत फोटो के इस्तेमाल पर होगी सख्त कार्रवाई

नई दिल्ली बॉलीवुड सेलेब्स इन दिनों पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट का रुख कर रहे हैं। सलमान खान, अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, रजनीकांत, अनिल कपूर, ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन, ऋतिक रोशन और जैकी श्रॉफ समेत कई स्टार्स को कोर्ट से पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा मिल चुकी है। अब इस कड़ी में अभिनेता विवेक ओबरॉय का नाम भी शामिल हो चुका है। कोर्ट ने अपने नए आदेश में साफ कर दिया है कि अभिनेता की बिना परमिशन के उनसे जुड़ी किसी भी सामग्री का इस्तेमाल अपराध होगा। अभिनेता का कोर्ट में पक्ष रख रही अधिवक्ता सना रईस खान ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने विवेक आनंद ओबेरॉय के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए एक निर्णायक आदेश जारी किया है, जिससे उनके नाम, छवि और आवाज की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। न्यायालय ने उल्लंघनकारी सामग्री को तत्काल हटाने का आदेश दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में उल्लंघन करने वाले लोग कानून से बच नहीं पाएंगे। अधिवक्ता सना रईस खान के मुताबिक सिनेमा और उद्यम जगत के एक अग्रणी व्यक्ति और दो दशकों से समाज के लिए काम कर रहे ओबेरॉय को जान-बूझकर निशाना बनाया गया है। यह सिर्फ कानूनी उल्लंघन नहीं है, बल्कि उनके निजी जीवन और परिवार पर हमला है। इससे उनके परिवार और छोटे बच्चों पर गलत असर भी पड़ेगा। अभिनेता की कानूनी जीत एक सशक्त मिसाल कायम करती है कि किसी व्यक्ति का वंश सार्वजनिक संपत्ति नहीं है। क्लिकबेट या लाभ पाने के लिए उनके व्यक्तित्व के साथ किया गया खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसा करने वालों को कानूनी तौर पर कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। अभिनेता की तरफ से दायर शिकायत में जिक्र किया गया कि कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां और डिजिटल टेक्नोलॉजी मिलकर बिना इजाजत के उनके फोटो, वीडियो, आवाज और ब्रॉडिंग के लिए उनके नाम का इस्तेमाल कर रही हैं। अभिनेता की तरफ से यह भी पक्ष रखा गया कि कई बार ऑनलाइन साइट्स से सामग्री को हटाने के लिए कहा गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, जिसके बाद कोर्ट का रुख किया गया। बता दें कि हिंदी सिनेमा से लेकर दक्षिण भारतीय सिनेमा के सेलेब्स को पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कोर्ट का सहारा लेना पड़ रहा है क्योंकि अपने लाभ के लिए कई ऑनलाइन साइट्स सेलेब्स के नामों और फोटोज का इस्तेमाल धड़ल्ले से करती हैं। 

तेजप्रताप यादव का बड़ा आरोप: इन 5 नेताओं ने की साजिश, गद्दारों की लिस्ट का किया खुलासा

पटना. बिहार की राजनीति में अपनी बेबाकी और अलग अंदाज के लिए चर्चित लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है. इस बार उन्होंने किसी पहेली का सहारा लेने के बजाय सीधे तौर पर उन पांच नामों का खुलासा किया है, जिन्हें वे अपनी राजनीतिक राह का कांटा और ‘जयचंद’ मानते हैं. तेज प्रताप का आरोप है कि ये पांचों नेता उनके खिलाफ गहरी साजिश रच रहे हैं और उन्हें उनके भाई तेजस्वी यादव से दूर करने की कोशिश में जुटे हैं. तेज प्रताप यादव ने जिन पांच नामों को ‘जयचंद’ की श्रेणी में रखा है, वे आरजेडी के बेहद रसूखदार चेहरे हैं. आइए इन पांचों नेताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं . कौन हैं तेज प्रताप यादव के वो ‘पांच जयचंद’? तेजप्रताप यादव ने साजिशकर्ताओं के नाम और क्रम भी बताया है. उनके अनुसार,जयचंद्रों के क्रम में पहले नंबर पर महुआ के पूर्व विधायक मुकेश रौशन है तो नंबर दो पर राज्यसभा सांसद संजय यादव. नंबर तीन पर तेजस्वी यादव के करीबी रमीज नेमत, जबकि नंबर चार पर आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव हैं. नंबर पांच पांच पर जो नाम है वह भी चौंकाने वाला है, क्योंकि सुनील सिंह राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई के तौर पर जाने जाते हैं. आइए इन पांचों के बारे में भी जानते हैं. मुकेश रौशन: महुआ के पूर्व विधायक और ‘नंबर एक’ दुश्मन तेज प्रताप यादव की सूची में पहले स्थान पर मुकेश रौशन का नाम है. मुकेश रौशन वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि महुआ वही सीट है जहां से 2015 में तेज प्रताप खुद चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. बाद में तेज प्रताप ने यह सीट मुकेश रौशन के लिए छोड़ दी थी.2020 का चुनाव तेज प्रताप यादव ने समस्तीपुर से लड़ा था. इसके बाद 2025 विधानसभा चुनाव में जनशक्ति जनता दल से उन्होंने फिर महुआ से चुनावी लड़ी, लेकिन मुकेश रौशन और तेज प्रताप यादव, दोनों ही चुनाव हार गए. एक समय में तेज प्रताप के बेहद करीबी माने जाने वाले मुकेश अब उनके निशाने पर हैं. संजय यादव: तेजस्वी के रणनीतिकार और राज्यसभा सांसद सूची में दूसरा सबसे प्रभावशाली नाम संजय यादव का है. संजय यादव वर्तमान में आरजेडी के राज्यसभा सांसद हैं और उन्हें तेजस्वी यादव का ‘दायां हाथ’ माना जाता है. हरियाणा के रहने वाले संजय यादव लंबे समय से तेजस्वी के राजनीतिक सलाहकार और रणनीतिकार की भूमिका निभा रहे हैं. तेज प्रताप यादव अक्सर यह आरोप लगाते रहे हैं कि संजय यादव जैसे बाहरी लोग परिवार के बीच में आकर भाई-भाई को लड़ाने का काम करते हैं. उनके लिए संजय यादव उस ‘सिस्टम’ का हिस्सा हैं जो तेज प्रताप को मुख्य राजनीति से दूर रखता है. रमीज नेमत: तेजस्वी यादव के साये की तरह रहने वाले करीबी तेज प्रताप ने तीसरे नंबर पर रमीज नेमत का नाम लिया है. रमीज का परिचय राजनीतिक गलियारों में तेजस्वी यादव के बेहद निजी और भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर होता है. वे अक्सर तेजस्वी के साथ उनके दौरों और बैठकों में साये की तरह नजर आते हैं. तेज प्रताप का मानना है कि रमीज जैसे लोग सूचनाओं को फिल्टर करते हैं और उनके खिलाफ तेजस्वी के कान भरते हैं. संगठन में रमीज की बढ़ती सक्रियता तेज प्रताप को हमेशा से खटकती रही है. बता दें कि तेज प्रताप यादव की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने भी रमीज की लालू परिवार में घुसपैठ पर सवाल उठाया था. शक्ति सिंह यादव: पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और प्रखर चेहरा चौथे स्थान पर तेज प्रताप ने शक्ति सिंह यादव को रखा है. शक्ति सिंह यादव आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता हैं और टीवी चैनलों पर पार्टी का सबसे मजबूत पक्ष रखते हैं. वे हिलालपुर (हिलसा) से पूर्व विधायक भी रहे हैं. तेज प्रताप का आरोप है कि शक्ति सिंह यादव जैसे नेता सार्वजनिक रूप से तो पार्टी की बात करते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर तेज प्रताप की छवि बिगाड़ने का काम करते हैं. प्रवक्ता के तौर पर उनके बयानों और सक्रियता को तेज प्रताप ने अपनी अनदेखी से जोड़कर देखा है. सुनील सिंह: विधान पार्षद और बिस्कोमान के अध्यक्ष पांचवें ‘जयचंद’ के रूप में तेज प्रताप ने सुनील सिंह का नाम लिया है. सुनील सिंह बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं और बिस्कोमान के अध्यक्ष के तौर पर सहकारिता जगत का बड़ा नाम हैं. सुनील सिंह को लालू प्रसाद यादव का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है, बिहार की राजनीति में उनकी पहचान तेज प्रताप यादव की मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई के तौर पर है. अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए चर्चा में रहने वाले सुनील सिंह के साथ तेज प्रताप के रिश्ते काफी समय से तल्ख रहे हैं. तेज प्रताप को लगता है कि सुनील सिंह अपनी पहुंच का इस्तेमाल उनके राजनीतिक कद को छोटा करने में कर रहे हैं.

बांग्लादेश में चुनावी गर्मी, BNP और जमात में भिड़ंत, 40 लोग हुए घायल

ढाका  बांग्लादेश में आम चुनाव से ठीक 72 घंटे पहले राजनीति एक बार फिर सड़क पर उतर आई. शनिवार देर रात बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प में महिलाओं समेत 40 से ज्यादा लोग घायल हो गए. यह घटना ऐसे वक्त पर हुई है, जब 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले चुनाव प्रचार सोमवार सुबह 7:30 बजे खत्म होने वाला है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक देर रात के कार्यक्रम में जमात पर पैसे बांटने का आरोप लगाते हुए BNP कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराने पहुंचे. इसके बाद दोनों पक्षों ने समर्थक जुटाए और बात हाथापाई से लेकर पत्थरबाजी तक पहुंच गई. रातभर चले टकराव को मौजूदा चुनाव अभियान की सबसे गंभीर हिंसा बताया जा रहा है. बांग्लादेश का चुनावी माहौल तनावपूर्ण पिछले छह हफ्तों में अलग-अलग इलाकों में चुनावी हिंसा में कई लोग घायल हो चुके हैं. अगस्त 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद यह पहला बड़ा चुनाव है. शेख हसीना की पार्टी को चुनाव से बाहर कर दिया गया है. इसी वजह से इसे 2009 के बाद का सबसे निर्णायक चुनाव माना जा रहा है. चुनाव में किसके-किसके बीच है टक्कर? 12 फरवरी को होने वाले चुनाव में 12.7 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं. मुकाबला मुख्य रूप से BNP और जमात-नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच माना जा रहा है. BNP प्रमुख तारिक रहमान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़कर सरकार बनाने लायक बहुमत हासिल करेगी. अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने चुनाव को ‘न्यू बांग्लादेश का उत्सव’ बताते हुए इसे स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने का वादा किया है. हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि लगातार हिंसा से प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है, खासतौर पर तब, जब सत्ता समीकरण उलट चुके हैं और सड़क पर दबदबा शेख हसीना के विपक्षी दलों का दिख रहा है. बवाल का अर्थव्यवस्था पर असर चुनाव का नतीजा देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है. हालिया अशांति से गारमेंट जैसे प्रमुख उद्योग प्रभावित हुए हैं और बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से मदद की जरूरत पड़ी है. विदेश नीति के मोर्चे पर भी दिशा बदलने के संकेत हैं. विश्लेषकों के मुताबिक, BNP को भारत के प्रति अपेक्षाकृत संतुलित माना जाता है, जबकि जमात की भूमिका पाकिस्तान की ओर झुकाव की अटकलें बढ़ाती है.