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कुक्षी में बालिकाओं के लिए बने शौचालय में पुरुषों के यूरिनल, 3.12 लाख खर्च के बावजूद 6 साल तक कोई कार्रवाई नहीं

धार धार जिले के कुक्षी स्थित एक कन्या प्राथमिक विद्यालय में बालिकाओं के लिए बने शौचालय में पुरुषों के यूरिनल लगाए गए हैं। यह निर्माण कार्य वर्ष 2019-20 में 3.12 लाख रुपए की लागत से हुआ था, लेकिन पिछले छह वर्षों से शिक्षा विभाग के अधिकारी इस गंभीर त्रुटि पर कोई ध्यान नहीं दिया।  कुक्षी के सिनेमा चौराहे स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय क्रमांक 1 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग ने यह शौचालय बनाया था। हैरानी की बात यह है कि शौचालय के प्रवेश द्वार पर 'बालिका शौचालय' का बोर्ड लगा है, जबकि अंदर पुरुषों के लिए यूरिनल पार्ट स्थापित किए गए हैं। यह मामला तब सामने आया जब रविवार शाम एक जागरूक नागरिक ने शौचालय के अंदर के वीडियो बनाए। इस निर्माण त्रुटि और छह साल तक किसी भी अधिकारी का ध्यान न जाना, गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। बीआरसी देंगे जवाब कुक्षी के बीईओ राजेश सिन्हा ने बताया कि प्राथमिक शाला क्रमांक 1 और 2 एकीकृत हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य बीआरसी कार्यालय की ओर से चलाए जाते हैं और इस मामले में बीआरसी ही जवाब देंगे। प्राथमिक शाला प्रधान ने नहीं दी जानकारी इस संबंध में कुक्षी के बीआरसी सीताराम डावर ने बताया कि बालिकाओं के लिए शौचालय का निर्माण 2020 में हुआ था, उस दौरान वे बीआरसी नहीं थे। उन्होंने इस निर्माण में निर्माण एजेंसी आरईएस की बड़ी गलती बताई। डावर ने यह भी कहा कि प्राथमिक शाला प्रधान राकेश सोनी द्वारा भी उन्हें इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि यह प्राथमिक शाला एकीकृत हो जाने के कारण अब प्राचार्य के अधीन आती है। फिलहाल, स्कूल के पीछे बनाए गए अतिरिक्त कक्ष के पास बालिकाओं के लिए शौचालय बनाया गया है।

इंदौर डबल डेकर ब्रिज: निर्माण का अधिकांश हिस्सा पूरा, जल्द मिलेगा ट्रैफिक के लिए नया ब्रिज

इंदौर  इंदौर के लवकुश चौराहे पर बन रहे प्रदेश के पहले डबलडेकर ब्रिज का काम 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। चार माह में इस ब्रिज की सौगात मिल सकती है। यह ब्रिज मेट्रो ट्रैक और सुपर कॉरिडोर बने ब्रिज को पार कर उज्जैन रोड की तरफ उतरेगा। इस ब्रिज की अधिकतम ऊंचाई जमीन से 70 फीट है। ब्रिज के मध्य हिस्से के स्पान रखे जाना शेष है। इसके लिए विशेष क्रेन कंपनी ने मंगाई है। यह काम ट्रैफिक रोककर किया जाएगा।  अपनी ऊंचाई के कारण इस ब्रिज की लंबाई भी शहर के दूसरे ब्रिजों से ज्यादा है। यह ब्रिज डेढ़ किलोमीटर लंबा है और इसके निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। डबलडेकर ब्रिज के बनने से हर दिन एक लाख लोगों की राह आसान होगी। सिंहस्थ के समय भी यह ब्रिज ट्रैफिक में मददगार साबित होगा। यह ब्रिज अरबिंदो अस्पताल के चौराहे पर खत्म होगा और वहां से इंदौर-उज्जैन छहलेन ब्रिज का काम शुरू होगा। भुजा पर हो रहा डामरीकरण ब्रिज की भुजा पर डामरीकरण शुरू हो चुका है। दोनों तरफ से यह काम जारी है। इसके अलावा ब्रिज के विद्युतीकरण और सौंदर्यीकरण का काम भी चल रहा है। जल्दी ही यह काम पूरा हो जाएगा। जून माह तक ब्रिज का निर्माण पूरा हो जाएगा। इसके बाद ट्रैफिक के लिए यह खोल दिया जाएगा। इंदौर विकास प्राधिकरण के अफसरों का कहना है कि ब्रिज के मध्य हिस्से की डिजाइन में कर्व दिया गया है। इससे ब्रिज पर चलने वाला ट्रैफिक भी सुरक्षित रहेगा और सुंदर भी दिखाई देगा। आपको बता दें कि ब्रिज का भूमिपूजन तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था। सुपर कॉरिडोर का ब्रिज सालभर पहले बन चुका था। उसकी दोनों भुजाओं से ट्रैफिक गुजर रहा है।

शेयर बाजार में रिकॉर्ड भागीदारी, NSE पर खुले 25 करोड़ से ज्यादा अकाउंट

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के मुताबिक, भारत में कुल ट्रेडिंग अकाउंट्स (UCCs) की संख्या 25 करोड़ (250 मिलियन) के आंकड़े को पार कर गई है. यह दिखाता है कि अब आम भारतीय नागरिक बचत के पारंपरिक तरीकों को छोड़कर शेयर बाजार पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं. Indian Share Market Growth: इतनी तेजी से कैसे बढ़े निवेशक?  रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में निवेशकों की एंट्री अब और भी तेज हो गई है. पिछले एक करोड़ अकाउंट सिर्फ दो महीनों में जुड़े हैं. वहीं, कुल खातों का 20% हिस्सा यानी 5 करोड़ अकाउंट तो पिछले महज 16 महीनों में खुले हैं. इसका मुख्य कारण मोबाइल ऐप के जरिए आसान ट्रेडिंग, कम फीस और बढ़ता डिजिटल इंडिया है. आज एक मिडिल क्लास व्यक्ति भी अपने फोन से सीधे शेयर बाजार में निवेश कर पा रहा है. Indian Share Market Growth: कौन से राज्य हैं सबसे आगे? निवेश के मामले में महाराष्ट्र अभी भी नंबर वन बना हुआ है. यहां राज्यों की हिस्सेदारी कुछ इस प्रकार है:     महाराष्ट्र: 4.2 करोड़ अकाउंट (सबसे ज्यादा 17% हिस्सा)     उत्तर प्रदेश: 2.8 करोड़ अकाउंट (दूसरे स्थान पर)     गुजरात: 2.2 करोड़ अकाउंट     पश्चिम बंगाल और राजस्थान: 1.4 करोड़ अकाउंट प्रत्येक हैरानी की बात यह है कि देश के टॉप 5 राज्य ही मिलकर लगभग आधा (49%) शेयर बाजार संभाल रहे हैं. क्या SIP के जरिए भी बढ़ रहा है निवेश? जी हां, लोग अब सिर्फ सीधे शेयर ही नहीं खरीद रहे, बल्कि म्यूचुअल फंड (SIP) के जरिए भी बाजार में पैसा लगा रहे हैं. अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच करीब 6 करोड़ नए SIP अकाउंट खुले हैं. हर महीने औसतन 28,766 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि SIP के जरिए बाजार में आ रही है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है. क्या निवेशकों का पैसा सुरक्षित है? NSE ने निवेशकों की सुरक्षा और जागरूकता पर भी जोर दिया है. साल 2025 में लगभग 23,000 जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए. साथ ही, ‘इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड’ (IPF) भी 18.5% बढ़कर 2,791 करोड़ रुपये हो गया है, ताकि किसी गड़बड़ी या धोखाधड़ी होने पर छोटे निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे.

होली के मौके पर बिहार जाने वालों के लिए राहत, राजस्थान और MP से चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

भोपाल  होली के त्योहार के दौरान एक जगह से दूसरी जगह पर आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हो जाती है। इसी अतिरिक्त यात्री दबाव को देखते हुए रेल प्रशासन ने लोगों को परेशानी से बचाने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इस दौरान पश्चिम मध्य रेलवे ने मध्य प्रदेश के रानी कमलापति स्टेशन और राजस्थान के सोगरिया स्टेशन से बिहार के दानापुर के लिए दो विशेष ट्रेन चलाने की जानकारी दी है। ये दोनों ट्रेन अलग-अलग दिनों पर चलेंगी और दोनों दिशाओं में कुल चार फेरे लगाएंगी। इसके अलावा रेल विभाग ने भोपाल से रीवा और रानी कमलापति स्टेशन से रीवा के बीच भी विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक रहेगा। इन सभी ट्रेनों के चलने के समय और दिन की विस्तृत जानकारी हम आपको इस रिपोर्ट में बता रहे हैं।     गाड़ी संख्या 09821/09822 सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन (2-2 ट्रिप)     गाड़ी संख्या 01667/01668 रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन (2-2 ट्रिप) ट्रेन नंबर 09821 सोगरिया से दानापुर स्पेशल ट्रेन कब चलेगी- 28 फरवरी 2026 (शनिवार) एवं 7 मार्च 2026 (शनिवार) प्रस्थान का समय- सोगरिया से रात 23:10 बजे प्रस्थान करेगी पहुंचने का समय- दूसरे दिन रात्रि 23:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी ट्रेन नंबर 09822 दानापुर से सोगरिया स्पेशल ट्रेन कब चलेगी- 2 मार्च 2026 (सोमवार) एवं 9 मार्च 2026 (सोमवार) प्रस्थान का समय- दानापुर स्टेशन से मध्य रात्रि 1:15 बजे प्रस्थान करेगी पहुंचने का समय- अगले दिन मध्य रात्रि 01:10 बजे सोगरिया स्टेशन पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इन स्टेशनों पर रुकेगी- बारां, सालपुरा, छाबड़ा गुगोर, रुठियाई, गुना, अशोकनगर, महादेवखेड़ी, सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, माणिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा स्टेशन होकर दानापुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन (2 फेरे) कब चलेगी- 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) और 2 मार्च 2026 (सोमवार) प्रस्थान का समय- रानी कमलापति से दोपहर 14:25 बजे शुरू होगी पहुंचने का समय- अगले दिन सुबह 08:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी विभिन्न स्टेशनों से निकलने का समय- रानी कमलापति स्टेशन (दोपहर 14:25 बजे प्रस्थान), नर्मदापुरम (15:25 बजे), इटारसी (15:55 बजे), पिपरिया (17:10 बजे), गाडरवारा (17:45 बजे ), नरसिंहपुर (18:25 बजे), जबलपुर (19:40 बजे ), सिहोरा रोड (20:10 बजे), कटनी (20:50 बजे), मैहर (21:40 बजे), सतना (22:15 बजे) से निकलकर मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा होते हुए अगले दिन सुबह 08:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01668 दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन (2 फेरे) कब चलेगी- 28 फरवरी 2026 (शनिवार) और 3 मार्च 2026 (मंगलवार) प्रस्थान का समय- दानापुर स्टेशन से सुबह 11:15 बजे शुरू होगी पहुंचने का समय- अगले दिन सुबह 08:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। विभिन्न स्टेशनों से निकलने का समय- दानापुर स्टेशन से 11:15 बजे प्रस्थान कर आरा, बक्सर, PDDU जंक्शन, मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, मानिकपुर होते हुए सतना पहुंचेगी फिर यहां से रात्रि 01:00 बजे निकलेगी, फिर रात्रि 1.28 बजे मैहर से, रात्रि 2:30 बजे कटनी से, रात्रि 3:13 बजे सिहोरा रोड से, तड़के 4.00 बजे जबलपुर से, सुबह 5:00 बजे नरसिंहपुर से, सुबह 5:30 बजे गाडरवारा से, सुबह 6:00 बजे पिपरिया से, सुबह 7:10 बजे इटारसी से, सुबह 7:48 बजे नर्मदापुरम से निकलकर सुबह 8:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इन स्टेशनों पर रुकेगी- नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा स्टेशनों पर रुकेगी। स्पेशल ट्रेन के ठहराव एवं समय के बारे में विस्तृत जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in से भी प्राप्त की जा सकती है। रेलयात्री किसी भी कंप्यूटरीकृत आरक्षण केन्द्र या ऑनलाइन IRCTC की वेबसाइट से इन होली स्पेशल ट्रेनों में आरक्षण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

MSP पर गेहूं उपार्जन के लिए किसानों में उत्साह, 20,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज

20 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन : मंत्री  राजपूत भोपाल  रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन अवश्य करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 4084, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री  राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग का असर और प्राइवेट नौकरी वालों पर संभावित प्रभाव

नई दिल्ली  दिल्ली की सर्दी में चाय की चुस्कियों के साथ ऑफिस जाने वाले लाखों कर्मचारी आजकल एक ही बात पर चर्चा कर रहे हैं- 8वां केंद्रीय वेतन आयोग क्या लाने वाला है? आयोग की ऑफिशियल वेबसाइट लाइव हो चुकी है, जहां कर्मचारी, यूनियन और अन्य स्टेकहोल्डर्स 16 मार्च 2026 तक अपने सुझाव और फीडबैक जमा कर सकते हैं. यह आयोग नवंबर 2025 में गठित हुआ था और इसे 18 महीनों के अंदर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी हैं, जिनमें वेतन, भत्ते, पेंशन और अन्य सुविधाओं की समीक्षा शामिल है. समझा जा रहा है कि जल्द ही सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आने वाला है. लेकिन एक बड़ा सवाल कई लोगों के मन में है कि क्या ये बदलाव प्राइवेट सेक्टर की सैलरी पर भी असर डालेंगे? तो सच्चाई ये है कि 8वां वेतन आयोग प्राइवेट सेक्टर को सीधे तौर पर कवर नहीं करता. ये आयोग सिर्फ केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (लगभग 48-50 लाख), डिफेंस पर्सनल और पेंशनर्स (करीब 68-70 लाख) के लिए बना है. प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों पर इसका कोई कानूनी या डायरेक्ट प्रभाव नहीं पड़ता. न ही प्राइवेट कंपनियों को बाध्य किया जा सकता कि वे इसके हिसाब से सैलरी बढ़ाएं. तो प्राइवेट सेक्टर को कोई लाभ नहीं? नहीं, ऐसा भी नहीं है. हालांकि इसमें प्राइवेट सेक्टर सीधे तौर पर शामिल नहीं होता है. केंद्रीय वेतन आयोग केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (Central Government Employees), रक्षा कर्मियों (Defence Personnel) और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन की समीक्षा के लिए बनाया जाता है. इसकी Terms of Reference (ToR) में स्पष्ट रूप से यही लिखा होता है. प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की सैलरी पर आयोग कोई सीधी सिफारिश नहीं करता. ऐसे में प्राइवेट सेक्टर पर कोई डायरेक्ट असर नहीं पड़ता. हां, इनडायरेक्ट असर की बात करें तो पिछले वेतन आयोगों में अच्छा-खासा असर देखा गया है. इनडायरेक्ट असर कैसे पड़ता है?     टैलेंट कॉम्पिटिशन (Talent Retention & Attraction): सरकारी सैलरी बढ़ने के बाद अच्छे इंजीनियर्स, MBA, CA, IT प्रोफेशनल्स आदि सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित होते हैं. प्राइवेट कंपनियों को इन्हें रोकने या नए हायर करने के लिए सैलरी बढ़ानी पड़ती है. खासकर IT, Banking, Consulting, PSU-Competitive सेक्टर्स में यह असर बहुत ज्यादा दिखता है.     बेंचमार्किंग (Benchmarking): कई बड़ी प्राइवेट कंपनियां जैसे TCS, Infosys, HDFC, L&T आदि अपने वेतन स्ट्रक्चर को सरकारी वेतन आयोग या PSUs के सैलरी लेवल के साथ कम्पेयर करती हैं. 8वें वेतन आयोग में तो ToR में ही प्राइवेट सेक्टर की मौजूदा सैलरी को ध्यान में रखने को कहा गया है.     PSUs पर डायरेक्ट प्रभाव: केंद्रीय PSUs (जैसे ONGC, IOC, SAIL, BHEL) अक्सर केंद्रीय वेतन आयोग के बाद अपना वेतन रिवाइज करती हैं. इससे प्राइवेट सेक्टर में और दबाव बढ़ता है.     इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: करीब 50 लाख कर्मचारी और 70 लाख पेंशनर्स की सैलरी बढ़ने से मार्केट में डिमांड बढ़ती है. डिमांड बढ़ने से कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाना पड़ता है, जिससे वेतन में वृद्धि होती है. पिछले आयोगों का रियल अनुभव 7वें वेतन आयोग (2016) के बाद कई प्राइवेट कंपनियों ने 2016-18 में अच्छी सैलरी हाइक्स दीं, खासकर मिड-लेवल पर. अभी 8वें वेतन आयोग (2026 से लागू होने की संभावना) में अगर फिटमेंट फैक्टर 2.0+ हुआ तो सरकारी सैलरी में 30-35%+ की बढ़ोतरी हो सकती है. इससे प्राइवेट सेक्टर में खासकर एंट्री लेवल और मिड लेवल पर दबाव बढ़ेगा.

MP में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, कई जिलों के अधिकारी होंगे ट्रांसफर, नई लिस्ट जल्द सार्वजनिक

भोपाल  मध्यप्रदेश में बजट सत्र खत्म होते ही बड़े प्रशासनिक बदलाव की तैयारी है। सरकार कई जिलों में कलेक्टर और कमिश्नर बदलने की योजना बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य 21 फरवरी को अंतिम प्रकाशन के साथ पूरा हो जाएगा, लेकिन तबादलों की कार्रवाई अब विधानसभा के बजट सत्र के बाद ही की जाएगी। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलेगा। परंपरागत रूप से इस दौरान तबादले नहीं किए जाते, इसलिए सत्र समाप्त होते ही मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। कामकाज के आधार पर होगी छंटनी जानकारी के अनुसार, जिन कलेक्टरों की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं पाई गई है, उन्हें बदला जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों के पालन की समीक्षा की गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन दो बार अधिकारियों के कामकाज का विस्तृत आकलन करा चुके हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। अब अंतिम निर्णय बजट सत्र के बाद लिया जाएगा। सचिव और अपर कलेक्टर भी होंगे प्रभावित फेरबदल सिर्फ कलेक्टर-कमिश्नर तक सीमित नहीं रहेगा। सचिव स्तर के कई अधिकारियों को नए दायित्व दिए जाएंगे। मैदानी स्तर पर अपर कलेक्टरों को भी बदला जा सकता है, खासकर वे अधिकारी जो ढाई साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के इच्छुक हैं और उन्हें हरी झंडी भी मिल चुकी है। इसके अलावा सचिव स्तर के अधिकारी श्रीमन शुक्ला और स्वतंत्र कुमार सिंह भी प्रतिनियुक्ति की कतार में बताए जा रहे हैं। अधिकारियों की कमी से बढ़ा दबाव वर्तमान में प्रदेश के 44 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिनमें 14 अधिकारी 2024-25 में ही गए हैं। इससे प्रदेश में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है। प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर पर कमी के कारण कई अधिकारियों के पास दो से तीन विभागों का अतिरिक्त प्रभार है। इस वर्ष केवल एम. सेलवेंद्रन को ही प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति मिली है। स्पष्ट है कि बजट सत्र समाप्त होते ही प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका असर मंत्रालय से लेकर जिलों तक पड़ेगा।

समाधान योजना में 5.58 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सरचार्ज में राहत, सरकार ने जारी किए आंकड़े

समाधान योजना में अब तक 05 लाख 58 हजार से अधिक उपभोक्‍ताओं को मिली सरचार्ज में छूट 553 करोड़ 90 लाख मूल राशि हुई जमा, 267 करोड़ 70 लाख का सरचार्ज हुआ माफ दूसरे चरण में 28 फरवरी तक एकमुश्‍त जमा करने पर सरचार्ज में मिलेगी 90 प्रतिशत तक की छूट भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 का द्वितीय व अंतिम चरण 28 फरवरी तक लागू है। इस दौरान तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्‍ताओं को एकमुश्‍त राशि जमा करने पर 90 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट का लाभ दिया जा रहा है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि पिछले साल 3 नवंबर से शुरू हुई समाधान योजना 2025-26 में शामिल होकर लाखों बकायादार उपभोक्‍ताओं ने छूट का लाभ लिया। कंपनी के प्रबंध संचालक  ऋषि गर्ग ने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि तीन माह से अधिक के बकायादार उपभोक्‍ता योजना के प्रथम चरण में शामिल नहीं हो पाए, वे अब द्वितीय चरण में शामिल होकर अपना बकाया बिल एकमुश्‍त जमा करके 90 फीसदी तक सरचार्ज माफी का लाभ उठा सकते हैं। समाधान योजना में 2025-26 में अब तक मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 5 लाख 58 हजार 598 बकायादार उपभोक्‍ताओं ने अपना पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के खाते में 553 करोड़ 90 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 267 करोड़ 70 लाख रूपए का सरचार्ज माफ किया गया है। समाधान योजना 2025-26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्‍ता हैं, जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्‍त बकाया राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाधान योजना के द्वितीय चरण में सरचार्ज में 50 से लेकर 90 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमुश्‍त अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना जल्दी आएं, एकमुश्‍त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं के सिद्धांत पर आधारित है। योजना में द्वितीय और अंतिम चरण 01 फरवरी से शुरू हो चुका है जो कि 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। दूसरे चरण में एक मुश्‍त भुगतान करने पर 70 से 90 फीसदी तथा किस्‍तों में भुगतान करने पर 50 से 60 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल के लिये portal.mpcz.in पर पंजीयन कराना होगा। कंपनी के "उपाय" ऐप एवं कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तथा एमपी ऑनलाइन पर भी पंजीयन की सुविधा उपलब्‍ध है। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है साथ ही विद्युत वितरण केंद्र से भी योजना के संबंध में जानकारी ले सकते हैं।  

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, देशी शराब होगी महंगी; जानें नई दरें कब से लागू

लखनऊ  यूपी कैबिनेट ने प्रदेश की नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है. 1 अप्रैल से यूपी में देसी शराब के दाम बढ़ जाएंगे. देसी शराब के दाम में लगभग 5 रुपए बढ़ेंगे. 36% अल्कोहल वाली देसी शराब 165 से बढ़कर 173 रुपए की हो जाएगी. अन्य किस्म की शराब के दामों में कोई संशोधन नहीं हुआ. यूपी सरकार ने 2026-27 के लिए आबकारी को 71,278 करोड़ का राजस्व लक्ष्य दिया है. वहीं शहरी क्षेत्र में दुकानों का देसी शराब का कोटा घटेगा. शराब की फुटकर दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से होगा. अंग्रेजी शराब की फुटकर दुकानों की लाइसेंस फीस 7.5% बढ़ाई गई है. नोएडा, गाजियाबाद, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में लो अल्कोहलिक स्ट्रैंथ बेवरेज बियर, वाइन और आरटीडी के बाहर लाइसेंस मिल सकेंगे. यूपी में निर्मित शराब और आबकारी के अन्य उत्पादों को विदेश में भी निर्यात होगा. इसके अलावा यूपी में एक अप्रैल से नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब 10 से 30 रुपये तक महंगी हो जाएगी. देशी शराब के यह दाम प्रति बोतल के हिसाब से बढ़े हैं, इसी आधार पर हाफ क्वॉर्टर और बच्चा की रेट में भी बढ़ोत्तरी हुई है. यानी कोटा 7.5 फीसदी बढ़ा है और 7.5 फीसदी ही लाइसेंस शुल्क भी बढ़ा है. 7.5 फीसदी की यही बढ़ोतरी अंग्रेजी शराब की तरह बीयर पर भी लागू होगी. एक अप्रैल से लागू होने वाली नई आबकारी नीति में कई नए प्रावधान किए गए है. कोटेदारों (अनुज्ञापी) को राहत देने वाली इस नीति में पहली बार देसी शराब में 100 एमएल का मिनिएचर ‘बच्चा’ उतारा गया. 42.8 डिग्री तीव्रता वाला यह ‘बच्चा’ बाजार में 50 रुपये का बिकेगा.  

भविष्य की नौकरियों पर AI का कहर, 2027 तक ज्यादातर जॉब्स खत्म; केवल पांच क्षेत्र में रहेंगी अवसर

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एक प्रमुख विशेषज्ञ ने ऐसी चेतावनी दी है जिसने दुनिया भर में हड़कंप मचा दिया है. लैटवियन मूल के कंप्यूटर साइंटिस्ट और लुइसविल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रोमन याम्पोलस्की ने ‘द डायरी ऑफ ए सीईओ’ पॉडकास्ट में स्टीवन बार्टलेट से बातचीत में कहा कि 2027 तक आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) आ सकता है, जो इंसानों से बेहतर हर संज्ञानात्मक काम कर सकेगा. इसके साथ ही अगले पांच सालों में 99 प्रतिशत नौकरियां गायब हो जाएंगी. डॉ. याम्पोलस्की, जिन्होंने AI सेफ्टी और रिस्क पर 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं, ने कहा, “कोई भी जॉब ऐसी नहीं जो ऑटोमेटेड ना हो सके. पहले की सभी तकनीकें इंसानों की मदद करती थीं, लेकिन AI सब कुछ खुद कर लेगा.” इसका नतीजा होगा कि लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ जाएगा. इन जॉब्स पर सबसे अधिक खतरा एक्सपर्ट ने बताया कि सबसे पहले कंप्यूटर पर होने वाले काम ऑटोमेट हो जाएंगे, फिर ह्यूमनॉइड रोबोट्स के आने से फिजिकल लेबर भी 5 साल पीछे रह जाएगा. 2030 तक रोबोट्स इतने प्रभावी हो जाएंगे कि सभी फिजिकल काम भी AI संभाल लेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पहले कभी नहीं देखी गई स्तर की बेरोजगारी आएगी. “10 प्र.तिशत बेरोजगारी भी डरावनी है, लेकिन एआई की वजह से 99 प्रतिशत तक बेरोजगारी हो जाएगी.” उन्होंने कहा कि आज के मॉडल्स से ही 60 प्रतिशत जॉब्स रिप्लेस हो सकती हैं और कई जॉब्स तो ‘बुलशिट जॉब्स’ हैं जो बिना ऑटोमेशन के ही खत्म हो जाएंगे. रिट्रेनिंग का कोई फायदा नहीं, क्योंकि “प्लान बी नहीं है.” आएगा आइआइ का बाप डॉ. याम्पोलस्की ने AGI के आने को 2027 तक संभावित बताया, जो प्रेडिक्शन मार्केट्स और लीडिंग AI लैब्स के सीईओज की भविष्यवाणियों पर आधारित है. इसके बाद सुपरइंटेलिजेंस आ सकती है, जो इंसानों से कहीं ज्यादा स्मार्ट होगी. लेकिन उनका मुख्य फोकस जॉब्स पर है. उन्होंने कहा कि क्रिएटिव काम, मीडिया, पॉडकास्टिंग सब AI से बेहतर हो सकता है क्योंकि AI तेज, सटीक और डेटा-ड्रिवन है. फिर भी, कुछ जॉब्स बचे रह सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है. उन्होंने सिर्फ 5 तरह के काम बताए जहां लोग इंसान को प्राथमिकता देंगे: पर्सनल सर्विसेज फॉर द रिच – जैसे अमीर लोग अपने अकाउंटेंट, पर्सनल असिस्टेंट या अन्य सर्विसेज में इंसान चाहेंगे, जैसे वॉरेन बफेट AI की बजाय ह्यूमन अकाउंटेंट चुनते हैं. इमोशनल या पर्सनल टच वाली जॉब्स – जहां इंसानी भावनाएं, एम्पैथी या ट्रस्ट जरूरी हो, जैसे कुछ थेरेपी या पर्सनल रिलेशनशिप रोल्स, लेकिन ये भी सीमित होंगे. AI ओवरसाइट एंड रेगुलेशन – AI सिस्टम्स को कंट्रोल, मॉनिटर और रेगुलेट करने वाले एक्सपर्ट्स, क्योंकि सेफ्टी इश्यूज रहेंगे. इंटरमीडियरीज या AI एक्सप्लेनर्स – जो AI को समझकर कंपनियों या लोगों के लिए इसे डिप्लॉय और एक्सप्लेन करेंगे. प्रॉम्प्ट इंजीनियर्स या स्पेशलाइज्ड AI हैंडलर्स – शुरुआत में प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग जैसी जॉब्स, लेकिन लंबे समय में ये भी कम हो सकती हैं. ये जॉब्स सिर्फ छोटे सेक्शन के लिए होंगी, ज्यादातर लोगों के लिए नहीं होगी. उन्होंने कहा कि समाज को यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) जैसी व्यवस्था अपनानी पड़ेगी, क्योंकि AI से इतनी अबंडेंस आएगी कि काम की जरूरत नहीं रहेगी. लेकिन खतरा ये है कि सिस्टम तैयार नहीं हैं. यह चेतावनी भारत जैसे देशों के लिए और भी गंभीर है, जहां युवा बेरोजगारी पहले से समस्या है. अगर AI इतनी तेजी से जॉब्स छीन लेगा, तो लाखों-करोड़ों लोग प्रभावित होंगे. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकारों को अभी से पॉलिसी बनानी चाहिए, स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करना चाहिए, लेकिन डॉ. याम्पोलस्की मानते हैं कि रिट्रेनिंग काफी नहीं होगी.