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अमेरिका में लापता भारतीय छात्र का हाल, पुलिस चेतावनी: जीवन भी हो सकता है खतरे में

न्यूयॉर्क अमेरिका में भारतीय छात्रों की मौत और लापता होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में अमेरिका के बर्कले में 22 साल के भारतीय छात्र साकेत श्रीनिवासैया लापता हो गए हैं। अमेरिकी पुलिस डिपार्टमेंट का कहना है कि साकेत की तलाश की जा रही है। अमेरिकी पुलिस ने उनकी जान को खतरा भीबताया है। मंगलवार की शाम 5 बजे उन्हें आखिरी बार देखा गया था। पुलिस ने बताया है कि साकेत की लंबाई 6 फीट 1 इंच थीऔर उनका वजन 72 किलो के आसपास था। उनकी आंखें भूरी हैं और बाल छोटे हैं। पुलिस ने इसके अलावा ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। सैन फ्रांसिस्को में कॉन्सुलेट जनरल ऑफ इंडिया ने बयान जारी करते हुए घटना पर चिंता जताई है। बयान में कहा गया गया है कि भारतीय कॉन्सुलेट जनरल को साकेत श्रीनिवासैया के गायब होने की चंता है। वह कर्नाटक के रहने वाले हैं और यूसी बर्कली में पोस्टग्रैजुएट स्टूडेंट हैं। कॉन्सुलेट उनके परिवार और यहां स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है। श्रीनिवासैया बर्कले की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में केमिकल ऐंड बायोमॉलीकुलर इंजीनयिरिंग डिपार्टमेंट में पोस्ट ग्रैजुएशन कर रहे थे। उनकी लिंक्ड इन प्रोफाइल के मुताबिक एमएस पीडीपी 26 प्रोग्राम के तहत उन्होंने यहां ऐडमिशन लिया था। उन्होंने आईआईटी मद्रास से 2025 में अपना बीटेक पूरा किया था। इसके बाद विदेश में पढ़ने का मौका मिला और उन्हें यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में ऐडमिशन मिल गया। बता दें कि विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्र के साथ यह कोई पहली घटना नहीं है। अकसर अमेरका और अन्य देशोंमें भारतीय छात्रों के साथ नस्लीय भेदभाव के मामले सामने आते रहते हैं। हाल ही में लोकसभा में एआईएमआईएम असुद्द्दीन ओवैसी ने विदेश में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। उनको जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा था कि सरकार विदेश में पढऩे वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। विदेश में मौजूद भारत के मिशन पूरा ध्यान रखते हैं कि भारतीयों के साथ बुरा व्यवहार ना होने पाए। बता दें कि श्रीनिवासैया के साथ रहने वाले बनेतस सिंह ने उनके गायब होने के बाद मदद के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसमें लिखा गया था कि श्रीनिवासैया 9 फरवीर से लापता हैं। आखिरी बार बर्कले हिल्स के बाद उन्हें देखा गया था। अगर किसी को भी उनके बारे में पता चलता है तो जानकारी दे। उन्होंने कहा, यह मेरे लिए बहुत मुश्किल समय है अगर कोई भी मदद कर सकता है तो कृपया संपर्क करे।

चंडीगढ़ में मीट की बिक्री पर नगर निगम ने लगाई पाबंदी!

चंडीगढ़. महाशिवरात्रि के पवित्र त्योहार के मद्देनजर चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा शहर में मीट की दुकानें और स्लॉटरहाउस (बूचड़खाने) बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। नगर निगम के कमिश्नर अमित कुमार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेशों के अनुसार 15 फरवरी, 2026 को रविवार के दिन शहर की सीमा में आते सारे स्लॉटरहाउस और मीट की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। यह फैसला महाशिवरात्रि की पवित्रता को मुख्य रखते हुए मेयर सौरभ जोशी के निर्देशों पर लिया गया है। निगम प्रशासन ने सभी अधिकारियों को इन आदेशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए है। नगर निगम द्वारा जारी जनतक सूचना में स्पष्ट किया गया है कि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी लाइसेंस धारकों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और जानवरों की हत्या और मीट की बिक्री से संबंधित हिस्सेदारों को इन आदेशों की सख्ती से पालन करनी होगी। नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर (हेल्थ) की तरफ से इस दफ्तरी आदेश की कॉपियां संबंधित विभागों को भी भेज दी गई हैं ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी व्यक्ति 15 फरवरी को मीट बेचता या स्लॉटर हाउस चलाता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शहर की मर्यादा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, निगम की स्पेशल टीमें इस दिन अलग-अलग इलाकों में चेकिंग भी करेंगी। 

टेक्नोलॉजी में नया अध्याय: Jio–Google–Microsoft की Trusted Tech Alliance, भारत के डिजिटल भविष्य पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली अफ्रीका, एशिया, यूरोप और नॉर्थ अमेरिका की 15 बड़ी कंपनियों ने ‘ट्रस्टेड टेक एलायंस’ (TTA) के गठन की घोषणा की है। यह एक जैसी सोच वाली इंटरनेशनल टेक कंपनियों का एक समूह है, जो कनेक्टिविटी, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, सेमीकंडक्टर, सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए ऐसी तकनीक बनाने के लिए साथ आए हैं जिस पर दुनिया यकीन कर सके और जिसे परखा जा सके। इस एलायंस में भारत की ओर से Jio Platforms शामिल है। जर्मनी में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान इस एलायंस का ऐलान किया गया। ये दिग्गज कंपनियां हैं इस एलायंस का हिस्सा एलायंस के संस्थापक सदस्यों में अमेजन, वेब सर्विसेज, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल क्लाउड, एरिक्सन, नोकिया, एसएपी और एनटीटी जैसी कुल 15 ग्लोबल टेक कंपनियां शामिल हैं। एलायंस का कहना है कि आगे और कंपनियों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, देश और दुनिया के लेवल पर अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने, दूसरी कंपनियों के साथ मुकाबले में बने रहने और एक मजबूत डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर काम जारी रहेगा। जियो का बड़ा संकल्प लॉन्च के मौके पर जियो प्लेटफॉर्म्स के सीईओ किरण थॉमस ने कहा कि विश्व स्तर पर डिजिटल विकास को गति देने के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और पारदर्शी टेक्नोलॉजी जरूरी है। जियो प्लेटफॉर्म्स को गर्व है कि वह 'ट्रस्टेड टेक एलायंस' का हिस्सा बना है, ताकि टेक्नोलॉजी की दुनिया में मिलकर ऐसे नियम और तरीके बनाए जा सकें जो सुरक्षित हों और जिन पर सब भरोसा कर सकें। उन्होंने आगे बताया कि हम इस कोशिश के जरिए दुनिया भर के पार्टनर्स के साथ मिलकर आने वाले समय की इंटरनेट कनेक्टिविटी, क्लाउड और AI सिस्टम को इतना बेहतर बनाना चाहते हैं कि लोग लंबे समय तक उन पर भरोसा कर सकें। माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ ने इस मौक पर कहा कि मौजूदा वैश्विक माहौल में समान सोच वाली कंपनियों का साथ आना जरूरी है, ताकि सीमाओं के पार तकनीक में भरोसा और उच्च मानक कायम किए जा सकें। वहीं एरिक्सन के सीईओ बोर्ये एकहोम ने कहा कि कोई एक कंपनी या देश अकेले सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल ढांचा नहीं बना सकता, इसके लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है। ग्लोबल मंच पर बढ़ेगी भारत की धाक इस एलायंस के तहत सदस्य कंपनियों ने पांच प्रमुख सिद्धांतों पर सहमति जताई है। इसमें कंपनियों को चलाने के ईमानदार तरीके, सुरक्षा की समय-समय पर जांच, सामान और सेवाओं की सप्लाई का मजबूत नेटवर्क, एक ऐसा सिस्टम जहां सब मिलकर काम कर सकें और कानून के हिसाब से लोगों के डेटा को सुरक्षित रखना शामिल है। इन नियमों के जरिए कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि टेक्नोलॉजी सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदारी के साथ संचालित हो, चाहे उसका विकास या इस्तेमाल कहीं भी हो। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो की भागीदारी से भारत को वैश्विक डिजिटल मानकों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका मिलेगा। इससे देश में क्लाउड, 5G और AI आधारित सर्विसेज को ग्लोबल स्तर की विश्वसनीयता मिल सकती है और डेटा सुरक्षा को लेकर ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होगा।

कैंपस में बवाल क्यों? UGC के इक्विटी कार्ड पर उभरी आग

नई दिल्ली यूजीसी के ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ ने उच्च शिक्षा जगत को 2 हिस्सों में बांट दिया है. इन दिनों दिल्ली, लखनऊ, पटना और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में जो चल रहा है, उससे पता चलता है कि यह विवाद अब जमीनी संघर्ष बन चुका है. एक तरफ नियमों को ‘ऐतिहासिक’ मानकर समर्थन में मार्च निकाले जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इसे ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ बताकर इसके खिलाफ अदालतों और सड़कों पर मोर्चा खोला गया है. प्रशासनिक स्तर पर यूजीसी का तर्क है कि कैंपस में बढ़ते मानसिक उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए अब तक के मौजूद तंत्र (जैसे एंटी-रैगिंग सेल) नाकाफी साबित हुए हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में विरोध कर रहे संगठनों का मानना है कि इन नियमों की आड़ में एक खास वर्ग को लक्षित किया जा रहा है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों पर हुई पुलिसिया सख्ती ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है. इस विवाद की हर परत को यहां विस्तार से समझिए. समर्थन का पक्ष: क्यों जरूरी हैं यूजीसी के नियम? नियमों का समर्थन कर रहे छात्र संगठनों (जैसे AISA, SFI, NSUI और अन्य दलित-पिछड़ा वर्ग संगठन) का तर्क है कि ‘संस्थागत हत्याओं’ (Institutional Murders) को रोकने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत है.     बढ़ती शिकायतों का सच: यूजीसी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना की शिकायतों में 118% की वृद्धि दर्ज की गई है.     स्वतंत्र जांच तंत्र: समर्थकों का कहना है कि वर्तमान में भेदभाव की जांच वही प्रशासन करता है जिस पर आरोप होता है. नए नियम बाहरी निगरानी की वकालत करते हैं, जो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगा.     लखनऊ का ‘समता संवर्धन मार्च’: लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों ने मांग की कि ‘उच्च शिक्षा सामाजिक न्याय आयोग’ का गठन हो, जिससे फेलोशिप में देरी और पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन (Biased Evaluation) जैसे मुद्दों पर कानूनी जवाबदेही तय की जा सके. विरोध का पक्ष: क्या हैं आशंकाएं? सवर्ण समाज समन्वय समिति (Coordination Committee) और कई ‘सामान्य श्रेणी’ के छात्र संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया है. उनके विरोध के मुख्य बिंदु नीचे लिखे हैं:     सुरक्षात्मक प्रावधानों का अभाव: विरोधियों का आरोप है कि 2025 के शुरुआती ड्राफ्ट में ‘झूठी शिकायत’ करने वालों पर दंड का प्रावधान था, जिसे आखिरी नोटिफिकेशन से हटा दिया गया है. इससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को फंसाए जाने का डर है.     प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: नए नियमों में ‘सबूत का भार’ (Burden of Proof) आरोपी पर डाल दिया गया है. यानी, अगर किसी पर भेदभाव का आरोप लगता है तो उसे खुद को निर्दोष साबित करना होगा, जो भारतीय दंड संहिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जा रहा है.     भेदभाव की ‘अस्पष्ट’ परिभाषा: विरोधियों का तर्क है कि ‘अपमानजनक व्यवहार’ की परिभाषा इतनी व्यापक और अस्पष्ट रखी गई है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं को भी इसके दायरे में लाकर किसी का करियर बर्बाद किया जा सकता है. कैंपस की मौजूदा स्थिति: लखनऊ से दिल्ली यूनिवर्सिटी तक का हाल हालिया घटनाक्रमों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. लखनऊ विश्वविद्यालय में समर्थन में उतरे छात्रों को जिस तरह पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया, उसने समर्थकों का आक्रोश बढ़ा दिया है. वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय में सवर्ण संगठनों ने यूजीसी मुख्यालय का घेराव कर चेतावनी दी है कि अगर इन नियमों को वापस नहीं लिया गया तो देशव्यापी आंदोलन होगा. कई प्रोफेसर ने भी अपनी पहचान गुप्त रखते हुए कहा है कि ये नियम कैंपस में ‘मुक्त संवाद’ (Free Speech) का माहौल खत्म कर सकते हैं. यूजीसी विवाद: इन 5 धाराओं ने कैंपस को ‘अखाड़ा’ बना दिया यूजीसी इक्विटी कार्ड विवाद समझने के लिए आपको वो 5 धाराएं भी पता होनी चाहिए, जिनकी वजह से विभिन्न यूनिवर्सिटी में माहौल गर्माया हुआ है.     धारा 4.2: ‘भेदभाव’ की विस्तृत और अस्पष्ट परिभाषा- इस धारा के तहत ‘जातिगत भेदभाव’ की परिभाषा को इतना व्यापक बना दिया गया है कि इसमें किसी छात्र की शैक्षणिक आलोचना, उपहास या उसे किसी समूह से बाहर रखना भी शामिल है. विवाद की वजह: विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उपहास’ या ‘भेदभावपूर्ण व्यवहार’ व्यक्तिपरक (Subjective) हो सकते हैं. विरोधियों को डर है कि सामान्य शैक्षणिक चर्चाओं या चुटकुलों को भी इस धारा के तहत ‘अपराध’ की श्रेणी में लाकर प्रोफेसरों और छात्रों को लक्षित किया जा सकता है.     धारा 6.1 (ख):आरोपी पर ‘सबूत का भार’- आमतौर पर किसी भी कानून में शिकायतकर्ता को आरोप साबित करना होता है, लेकिन इस क्लॉज ने इसे पलट दिया है. विवाद की वजह: अगर किसी छात्र ने भेदभाव का आरोप लगाया है तो आरोपी छात्र या शिक्षक को साबित करना होगा कि उसने ऐसा नहीं किया. इसे ‘प्राकृतिक न्याय’ (Natural Justice) के खिलाफ माना जा रहा है.. क्योंकि यह आरोपी को तब तक दोषी मानता है, जब तक वह अपनी बेगुनाही साबित न कर दे.     धारा 8.4: झूठी शिकायत पर दंड के प्रावधान का हटना- प्रारंभिक ड्राफ्ट (2025) में प्रावधान था कि अगर कोई दुर्भावनापूर्ण तरीके से झूठी शिकायत दर्ज कराता है तो उस पर कार्रवाई होगी. लेकिन 2026 की अंतिम अधिसूचना में यह सुरक्षा कवच हटा दिया गया है. विवाद की वजह: विरोध कर रहे छात्र संगठनों का तर्क है कि इस क्लॉज के हटने से व्यक्तिगत रंजिश निकालने के लिए झूठी शिकायतों की बाढ़ आ सकती है और आरोपी के पास इससे बचने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचेगा.     धारा 10.2: स्वतंत्र ‘लोकपाल’ (Ombudsman) और बाहरी हस्तक्षेप- यह धारा हर विश्वविद्यालय क स्वतंत्र ‘समान अवसर सेल’ और एक बाहरी लोकपाल नियुक्त करने का निर्देश देती है, जो संस्थान के प्रशासन का हिस्सा नहीं होगा. विवाद की वजह: समर्थकों (जैसे लखनऊ के प्रदर्शनकारी छात्र) के लिए यह सबसे मजबूत बिंदु है क्योंकि यह निष्पक्षता सुनिश्चित करता है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसे अपनी ‘स्वायत्तता’ (Autonomy) पर हमला मान रहा है क्योंकि अब आंतरिक मामलों का फैसला बाहरी व्यक्ति करेगा.     धारा 12.1: फंड में कटौती और ‘डी-रिकग्निशन’ की शक्ति- यह धारा यूजीसी को अधिकार देती है कि अगर कोई संस्थान इन नियमों को सख्ती से लागू नहीं करता … Read more

पीएम मोदी के लिए कांग्रेस का ट्वीटेड सरप्राइज: फ्लाइट टिकट बुक, जनता का ध्यान आकर्षित

  नई दिल्ली असम के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक बेहद व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से हिंसा प्रभावित मणिपुर जाने की अपील की है.  X पर एक पोस्ट में, खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, "चुनाव वाले राज्य हमेशा आपकी सर्वोच्च प्राथमिकता होते हैं, लेकिन मणिपुर को "छोड़ा नहीं जाना चाहिए. राज्य 2023 से जल रहा है, और अब फिर से जल रहा है." खेड़ा ने दोनों राज्यों के बीच कम दूरी की तरफ इशारा करते हुए लिखा, “आप आज असम में हैं. मणिपुर यहां से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है. कृपया वहां भी जाइए. प्रधानमंत्री की उपस्थिति मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करने में बहुत मददगार साबित हो सकती है.”  'मेरे पास आपका नंबर नहीं था…': कांग्रेस नेता ने फ्लाइट टिकट की फोटो साझा करते हुए लिखा, "आपकी आसानी के लिए हमने गुवाहाटी से इम्फाल का टिकट बुक कर दिया है, आपको बस विमान में सवार होना है. चूंकि मेरे पास आपका नंबर नहीं था, इसलिए मैं टिकट यहीं साझा कर रहा हूं." उन्होंने केंद्र के 'PM CARES' फंड पर कटाक्ष करते हुए संदेश दिया कि प्रधानमंत्री वहां जाकर दिखाएं कि वह वाकई मणिपुर की परवाह करते हैं. मणिपुर में 2023 से जारी हिंसा और बीच-बीच में भड़कती घटनाओं को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है. वहीं सरकार का कहना है कि शांति बहाली के प्रयास जारी हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. इस अनूठे राजनीतिक विरोध ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. जहां कांग्रेस समर्थक इसे मणिपुर की अनदेखी का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं आलोचक इसे राजनीतिक नौटंकी करार दे रहे हैं.

Toyota ने पेश की 3-रो इलेक्ट्रिक SUV, जानें क्या होगी भारत में उपलब्धता

मुंबई  जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी टोयोटा ने आखिरकार अपनी पहली फ्लैगशिप तीन-रो वाली इलेक्ट्रिक SUV से पर्दा उठा दिया है। लंबे समय से इलेक्ट्रिक सेगमेंट में मौजूद रहने के बावजूद टोयोटा के पास अब तक ऐसी कोई फुल-साइज़ EV नहीं थी, जो सीधे तौर पर फैमिली और प्रीमियम SUV खरीदारों को टारगेट कर सके। इसी खाली जगह को भरने के लिए कंपनी ने नई Toyota Highlander EV को पेश किया है, जिसे 2027 से बिक्री के लिए उतारा जाएगा। इस मॉडल को खास तौर पर Kia EV9 और Hyundai Ioniq 9 जैसी इलेक्ट्रिक SUVs को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। बदला हुआ डिजाइन, ज्यादा दमदार रोड प्रेजेंस 2027 Toyota Highlander EV को कंपनी की लेटेस्ट डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया गया है। इसका फ्रंट लुक काफी बोल्ड रखा गया है, जिसमें हैमरहेड-स्टाइल फेस, फुल-लेंथ LED DRL और अलग से सेट किए गए LED हेडलैंप्स देखने को मिलते हैं। साइड प्रोफाइल में शार्प लाइन्स, उभरे हुए फेंडर्स और लंबा ग्लासहाउस इसे एक स्लीक लेकिन मजबूत सिल्हूट देते हैं। पीछे की तरफ कनेक्टेड LED टेललैंप्स और स्पॉइलर इसे मॉडर्न EV पहचान देते हैं। आकार के लिहाज से नई Highlander EV पहले से बड़ी हो गई है। इसकी चौड़ाई और व्हीलबेस में बढ़ोतरी की गई है, जिससे केबिन में तीनों रो के लिए ज्यादा स्पेस मिलता है और थर्ड रो में बैठना पहले के मुकाबले ज्यादा आरामदायक हो गया है। टेक-फॉरवर्ड और प्रीमियम इंटीरियर Toyota Highlander EV का केबिन पूरी तरह मॉडर्न अप्रोच के साथ डिजाइन किया गया है। डैशबोर्ड पर बड़ा 14-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम दिया गया है, जो वायरलेस कनेक्टिविटी को सपोर्ट करता है। ड्राइवर के सामने 12.3-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है, जिसमें फुल-स्क्रीन नेविगेशन की सुविधा दी गई है। इसके अलावा हेड-अप डिस्प्ले, 64-कलर एम्बिएंट लाइटिंग और कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा पैनोरमिक ग्लासरूफ इसे और प्रीमियम बनाते हैं। फ्रंट सीट्स हीटेड हैं, दूसरी रो में कैप्टन सीट्स दी गई हैं और तीनों रो में चार्जिंग पोर्ट्स की सुविधा मौजूद है, जिससे लंबी यात्राएं ज्यादा सुविधाजनक बनती हैं। पावरट्रेन और रेंज के विकल्प नई Toyota Highlander EV को XLE और Limited वेरिएंट्स में उतारा जाएगा। इसमें फ्रंट-व्हील ड्राइव और ऑल-व्हील ड्राइव, दोनों ऑप्शन मिलते हैं। बेस वेरिएंट में 77 kWh की बैटरी दी गई है, जो सिंगल मोटर सेटअप के साथ एक चार्ज में करीब 462 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम है। ऑल-व्हील ड्राइव वर्जन में डुअल मोटर सेटअप मिलता है, जिससे पावर और टॉर्क में बढ़ोतरी होती है, हालांकि रेंज थोड़ी कम हो जाती है। वहीं बड़े 95.8 kWh बैटरी पैक के साथ यह SUV एक चार्ज में 515 किलोमीटर तक चल सकती है, जो इसे लंबी दूरी की फैमिली EV के तौर पर मजबूत बनाता है। भारत में लॉन्च की क्या है संभावना? Toyota Highlander EV को पहले अमेरिकी बाजार में लॉन्च किया जाएगा और इसकी बिक्री 2027 की शुरुआत से शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल कंपनी ने भारत में इसके लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हालांकि, अगर इसे भारतीय बाजार में लाया जाता है, तो संभावना है कि यह CBU रूट के जरिए पेश की जाए। भारत में इस समय प्रीमियम तीन-रो इलेक्ट्रिक SUV सेगमेंट में Kia EV9 अकेली मजबूत दावेदार है, जबकि लग्ज़री सेगमेंट में Mercedes-Benz EQS और Mercedes-Benz EQB मौजूद हैं। ऐसे में अगर Toyota Highlander EV भारत आती है, तो यह सीधे तौर पर Kia EV9 को कड़ी टक्कर दे सकती है।

डाइट में गेहूं की जगह शामिल करें यह अनाज, हार्ट हेल्थ को मिलेगी जबरदस्त मजबूती

चाहे घर में दाल बनी हो या कोई मसालेदार सब्जी, गेहूं की रोटी के बिना हमारी थाली अधूरी होती है। यह हमारे भोजन का अहम हिस्सा है, पर अब समय बदल रहा है। आजकल बदलती लाइफस्टाइल और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अपनी डाइट में बदलाव कर रहे हैं। इसलिए, अब क्विनोआ रोटी लोगों की थाली में जगह बना रही है। क्विनोआ कैलोरी, प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम, जिंक और अन्य जरूरी विटामिन से भरपूर होती है। यही वजह है कि इसे आज सुपरफूड कहा जाता है। बता दें कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में क्विनोआ रोटी की मांग बढ़ी है, लेकिन सच यह है कि दक्षिण अमेरिका में इसे हजारों सालों से उगाया और खाया जाता रहा है। चलिए जानते हैं इसे डाइट में शामिल करने के कुछ फायदों के बारे में। दिल की सेहत के लिए अच्छा दिल के मरीजों के लिए क्विनोआ रोटी को डाइट में शामिल करना काफी फायदेमंद माना गया है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि क्विनोआ खाने से मेटाबॉलिज्म बेहतर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मददगार है। डायबिटीज के लिए फायदेमंद क्विनोआ की रोटी खाना डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती है। अगर आप रोजाना इसे डाइट में शामिल करते हैं, तो यह ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल रखने में मदद करती है।   वजन घटाने में मददगार वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए क्विनोआ की रोटी किसी वरदान से कम नहीं है। एक स्टडी में पाया गया है कि क्विनोआ मोटापे को भी कम करने का एक बेहतरीन सुपरफूड है। अगर आप भी बढ़ते वजन को लेकर परेशान हैं, तो क्विनोआ की रोटी को डाइट में जरूर शामिल करें। ग्लूटेन-फ्री रोटी का बेस्ट ऑप्शन जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी है या सीलिएक डिजीज है, तो उनके लिए गेंहू की रोटी की जगह क्विनोआ की रोटी एक सुरक्षित और पौष्टिक ऑप्शन माना जाता है। क्विनोआ को खरीदने से पहले मिलावट या गंदगी की जांच के लिए पैकेट पर लगे लेबल को ध्यान से जरूर पढ़ें। पाचन को बनाए हेल्दी क्विनोआ में कई अनाजों से ज्यादा फाइबर होता है, जो पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज की समस्या कम करता है। साथ ही, क्विनोआ की रोटी खाने से पेट लंबे समय तक भरा महसूस होता है।  

राज्यपाल मंगुभाई पटेल से प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की सौजन्य भेंट

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल से प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने शनिवार को लोकभवन में सौजन्य भेंट की। राज्यपाल  पटेल के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। राज्यपाल  पटेल का प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. मिश्रा ने पुष्प गुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल  पटेल ने डॉ. मिश्रा को अंग वस्त्रम् और साँची स्तूप की प्रतिकृति स्मृति स्वरूप भेंट की।  

वैलेंटाइन डे के साथ अगले 7 दिन मौसम रहेगा साफ!

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम स्थिर बना हुआ है. वेलेंटाइन डे पर अगर आप भी कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यह मौसम राहत भरा रहने वाला है. राजधानी में दिन के वक्त हल्की गर्मी महसूस हो सकती है, हालांकि सुबह धुंध भी छाए रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने अगले 7 दिन अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई विशेष बदलाव की संभावना नहीं जताई है. पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम शुष्क रहा. प्रदेश में अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस रायपुर में दर्ज किया गया. वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया. इस दौरान कहीं भी बारिश नहीं हुई. अगले दो दिन मौसम शुष्क ही रहने के आसार हैं. मौसम विभाग ने जानकारी दी कि प्रदेश में वर्तमान में कोई सक्रिय मौसम प्रणाली प्रभावी नहीं है. इसके कारण पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है. फिलहाल बारिश को लेकर कोई अलर्ट नहीं है.  रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में शनिवार को मौसम शुष्क रहने वाला है. सुबह के वक्त धुंध छाए रहने के आसार हैं. अगले 24 घंटों में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.

सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार टकराने से सेना के 4 जवानों की गई जान

जगदलपुर/मेदिनी नगर/पलामू. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शनिवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे में 201 कोबरा बटालियन के चार जवानों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसा अर्जुनी थाना क्षेत्र के ग्राम खपरी बाईपास के समीप हुआ। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कार ट्रक के नीचे जा घुसी और उसकी छत पूरी तरह उखड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोबरा बटालियन के जवान जगदलपुर से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी तेज रफ्तार डिजायर कार खपरी बाईपास पर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार सीधे ट्रक के नीचे फंस गई और उसमें सवार जवान बुरी तरह अंदर जकड़ गए। कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और राहत दल ने गैस कटर की मदद से कार को काटकर जवानों को बाहर निकाला। चार जवानों को घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल जवान को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू मृतकों में झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर प्रखंड अंतर्गत रानीदेवा गांव निवासी मुकेश कुमार भी शामिल हैं। जैसे ही गांव में उनके निधन की सूचना पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के अनुसार, मुकेश मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ स्वभाव के थे। उनके असमय निधन से गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका है कि तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े ट्रक से अचानक टकराव हादसे का कारण बना। इस हृदयविदारक घटना से सुरक्षाबलों के साथ-साथ पलामू जिले में भी गहरा शोक व्याप्त है।